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Van Vihar National Park: मध्य प्रदेश में गिद्धों की संख्या 14,000 के पार, वन्यजीव संरक्षण की बड़ी सफलता

 Van Vihar National Park:  भोपाल। 5 मार्च 2026 मध्य प्रदेश में गिद्धों की संख्या 14,000 के पार पहुँच गई है, जो राज्य के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। वन विभाग द्वारा 20 से 22 फरवरी तक तीन दिनों में किए गए विशेष गिद्ध सर्वे में यह आंकड़ा सामने आया है; हालांकि अंतिम रिपोर्ट में यह संख्या और बढ़ सकती है। पिछले साल (2025) की गणना में प्रदेश में 12,981 गिद्ध दर्ज हुए थे, वहीं अब यह आंकड़ा अनुमानतः 14 हजार से अधिक है। ये सर्वे प्रदेश भर के प्रमुख गिद्ध आवासों पर किए गए, जिनमें पन्ना, भोपाल वन विहार नेशनल पार्क, इंदौर वन मंडल, रायसेन के हलाली डैम सहित अन्य क्षेत्र शामिल हैं। सर्वे के दौरान लगभग 7 प्रजातियों के गिद्ध पाए गए, जिनमें भारतीय गिद्ध, सिनेरियस गिद्ध, मिस्र गिद्ध (व्हाइट स्कैवेंजेर) और हिमालयन ग्रिफॉन जैसी प्रजातियां शामिल हैं। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में गिद्धों की गणना 2016 से नियमित रूप से की जा रही है। उस समय कुल 7,028 गिद्ध गिने गए थे। इसके बाद हर सर्वे में संख्या में निरंतर बढ़ोतरी दर्ज हुई 2019: 8,397 2021: 9,446 2024: 10,845 2025: 12,981 और अब 2026 में यह संख्या 14,000 से अधिक होने का अनुमान है। विशेषज्ञों के अनुसार, गिद्ध धीरे‑धीरे प्रजनन करते हैं और इनके जीवनचक्र के कारण संख्या बढ़ाना आसान नहीं होता। यही वजह है कि कभी ये प्रदेश और देशभर में विलुप्ति की कगार पर थे। पशुओं को दर्द और सूजन में दिए जाने वाली दवा डाइक्लोफेनाक के कारण गिद्धों की मृत्यु की दर बढ़ गई थी, लेकिन बाद में इस दवा पर प्रतिबंध लगा दिया गया। अब उसके प्रभाव से संख्या में सुधार हुआ है। इंदौर वन मंडल में पिछले सर्वे में केवल 86 गिद्ध देखे गए थे, जबकि इस बार यह संख्या 156 तक पहुँच गई है। भोपाल के वन विहार नेशनल पार्क में भी सफेद पीठ वाले गिद्धों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज हुई है। 23 फरवरी को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रायसेन जिले के हलाली डैम क्षेत्र में लुप्तप्राय प्रजाति के 5 गिद्धों को प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा। इन पर उच्च तकनीक GPS ट्रैकर लगाए गए हैं, ताकि वन विभाग उनकी गतिविधियों की निरंतर निगरानी कर सके। यह प्रयास राज्य सरकार के संरक्षण कार्यक्रम की सक्रियता को दर्शाता है। वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, शीत ऋतु के अंतिम चरण में गिद्धों की संख्या की गणना करना सबसे उपयुक्त होता है, क्योंकि इस समय स्थानीय और प्रवासी दोनों प्रजातियां एक साथ रहती हैं। इस वजह से सर्वे के आंकड़े वास्तविक स्थिति का सटीक प्रतिबिंब प्रस्तुत करते हैं। इतिहास में पहली बार 2016 में गिद्धों की गणना हुई थी और तब से लगातार वृद्धि जारी है। वन विभाग का मानना है कि लगातार संरक्षण प्रयास, प्राकृतिक आवास का संरक्षण और वैज्ञानिक निगरानी प्रणाली के कारण ही यह सकारात्मक परिणाम संभव हो पाया है। विशेष रूप से वन विहार, पन्ना (पवई), रायसेन (हलाली डैम), शिवपुरी और गांधीसागर अभयारण्य (मंदसौर) जैसे इलाकों में गिद्धों की बढ़ती संख्या वन्यजीव प्रेमियों और संरक्षणकर्ताओं के लिए खुशी का विषय है।