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RO Filter Scam Alert: बिना जांच हर 6 महीने फिल्टर बदलवाना पड़ सकता है बड़ा नुकसान

नई दिल्ली। घर-घर में RO (रिवर्स ऑस्मोसिस) वॉटर प्यूरीफायर आज एक जरूरत बन चुका है, लेकिन इसके साथ ही एक बड़ा सवाल भी जुड़ा है क्या हर 6 महीने में RO फिल्टर बदलना सच में जरूरी है या फिर यह एक सर्विस स्कैम है? कई बार सर्विस टेक्नीशियन बिना किसी जांच के फिल्टर बदलने की सलाह देते हैं और लोगों को डराते हैं कि पुराना फिल्टर इस्तेमाल करने से बीमारी हो सकती है। लेकिन सच्चाई यह है कि हर बार फिल्टर बदलना जरूरी नहीं होता, यह पूरी तरह पानी की क्वालिटी और मशीन की स्थिति पर निर्भर करता है। RO सिस्टम में मुख्य रूप से सेडिमेंट फिल्टर, कार्बन फिल्टर, RO मेम्ब्रेन और कभी-कभी UF फिल्टर लगे होते हैं। सेडिमेंट फिल्टर पानी में मौजूद धूल और मिट्टी के कण रोकता है, जबकि कार्बन फिल्टर गंध और क्लोरीन हटाता है। RO मेम्ब्रेन सबसे अहम हिस्सा होता है, जो पानी से घुले हुए साल्ट्स, भारी धातु और हानिकारक तत्व हटाता है। इन सभी की लाइफ अलग-अलग होती है और इन्हें समय से पहले बदलना हमेशा जरूरी नहीं होता। अक्सर देखा गया है कि कुछ कंपनियां या सर्विस एजेंट हर 5–6 महीने में पूरे फिल्टर सेट बदलने का दबाव बनाते हैं। अगर ग्राहक सवाल न करे तो अतिरिक्त पैसे वसूले जाते हैं। जबकि असलियत यह है कि फिल्टर बदलने का सही तरीका जांच पर आधारित होना चाहिए, न कि तय समय पर। आप खुद भी आसानी से जांच सकते हैं कि फिल्टर बदलने की जरूरत है या नहीं। इसके लिए सबसे जरूरी टूल है TDS मीटर। अगर RO से निकलने वाले पानी का TDS 50 से 150 के बीच है, तो इसका मतलब है कि मेम्ब्रेन ठीक काम कर रही है और पानी पीने योग्य है। ऐसे में तुरंत फिल्टर बदलने की कोई जरूरत नहीं होती। दूसरा तरीका है पानी के स्वाद और गंध को समझना। अगर पानी का स्वाद अचानक बदल जाए, उसमें बदबू आने लगे या रंग में बदलाव दिखे, तभी फिल्टर खराब होने की संभावना होती है। इसके अलावा अगर RO से पानी बहुत धीमी गति से आने लगे या टंकी भरने में ज्यादा समय लगे, तो यह सेडिमेंट फिल्टर या मेम्ब्रेन जाम होने का संकेत हो सकता है। एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि सर्विस के दौरान हमेशा पुराने फिल्टर को खुद देखकर ही बदलने दें। अगर फिल्टर बहुत ज्यादा काला या जाम दिखे तभी उसे बदलना सही है। कई बार हल्के गंदे फिल्टर भी बदले जाते हैं, जो अभी काम कर सकते हैं। कंपनी के सर्विस मैनुअल में भी हर फिल्टर की लाइफ दी होती है। उसी के आधार पर फैसला लेना चाहिए। अगर कोई टेक्नीशियन बिना जांच के जल्दी-जल्दी बदलाव की सलाह दे रहा है, तो उससे सवाल जरूर करें। RO की लाइफ बढ़ाने के लिए समय-समय पर टैंक की सफाई करें, इनपुट पानी अगर ज्यादा गंदा है तो प्री-फिल्टर लगवाएं और मशीन को लगातार 24 घंटे चालू न रखें। इससे फिल्टर लंबे समय तक चलते हैं और अनावश्यक खर्च से बचा जा सकता है। निष्कर्ष यही है कि RO फिल्टर बदलना एक तकनीकी जरूरत है, न कि तय समय पर होने वाला नियम। सही जानकारी और थोड़ी सावधानी से आप फर्जी सर्विस और बेवजह खर्च से खुद को बचा सकते हैं।

पानी आया, लेकिन बिल आ रहे 3 साल से: इंदौर महापौर की जनता चौपाल में फूटा गुस्सा

इंदौर। नर्मदा लाइन के पानी के आगमन के बाद भी नगर निगम के पुराने बिलों की उलझन और जल व्यवस्था की समस्याएं जनता के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। शनिवार को वार्ड 41 में महापौर पुष्यमित्र भार्गव द्वारा आयोजित जनता चौपाल में नागरिकों ने अपनी नाराजगी और समस्याएं खुलेआम रखीं। चौपाल में शहरवासियों ने बताया कि नर्मदा लाइन के पानी के बावजूद नगर निगम लगातार तीन साल से पेयजल बिल भेज रहा है, जिससे आम लोगों पर वित्तीय बोझ पड़ा है। कुछ निवासियों ने कहा कि उन्होंने समय पर बिल भरे, लेकिन निगम की लापरवाही और पुराने रिकॉर्डों की गलतियों के कारण परेशानी अभी भी बनी हुई है। इस अवसर पर जनता ने महापौर के सामने ड्रेनेज और सड़कों की समस्याओं को भी उठाया। कई इलाकों में सड़कें टूटी हुई हैं और बारिश या पानी के रिसाव से वहां की स्थिति और खराब हो गई है। लोगों ने कहा कि कई बार शिकायत करने के बावजूद भी निगम ने ठोस कदम नहीं उठाए, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है। विशेष रूप से भागीरथपुरा कांड के डेढ़ महीने बाद भी शहर में पेयजल की गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ है। गणराज नगर के एक स्कूली छात्र ने महापौर से सीधे कहा कि नर्मदा लाइन के पानी में अब भी गंदगी मिल रही है। इस पर महापौर ने सुधार के निर्देश देने का आश्वासन दिया। जनता चौपाल के दौरान महापौर ने जनता से संवाद करते हुए कहा कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया जा रहा है और जल्द समाधान के प्रयास किए जाएंगे। हालांकि, लोगों का गुस्सा निगम की लगातार लापरवाही और पुराने बिलों के कारण बढ़ा हुआ था। कई निवासी इस बात पर असंतोष व्यक्त कर रहे थे कि पानी तो अब उपलब्ध है, लेकिन पिछले तीन साल के बिल अभी भी लोगों के घरों में आ रहे है विशेषज्ञों का मानना है कि नगर निगम को तकनीकी सुधार और डेटा अपडेट पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। साथ ही जल गुणवत्ता की निगरानी और शिकायत निवारण प्रणाली को तेज करने की आवश्यकता है। इस चौपाल ने यह भी दिखा दिया कि शहर में सुधार की दिशा में कदम उठाने के बावजूद नागरिकों की अपेक्षाएं बढ़ गई हैं। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने आश्वासन दिया कि जल आपूर्ति, बिल प्रणाली और सड़क-ड्रेनेज जैसी समस्याओं का निराकरण प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। शहरवासियों की चिंता और नाराजगी यह संकेत देती है कि इंदौर निगम को अपनी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, तेजी और जवाबदेही लाने की आवश्यकता है। जनता चौपाल ने नागरिकों को अपनी बात सीधे महापौर तक पहुँचाने का अवसर दिया और उम्मीद जताई कि जल्द ही इन समस्याओं का स्थायी समाधान होगा।