पश्चिम एशिया संकट से निपटने के तरीके पर सरकार के साथ नजर आ रहे ये नेता… बढ़ाई कांग्रेस की मुश्किल!

नई दिल्ली। कांग्रेस (Congress) के कुछ नेताओं ने पश्चिम एशिया (West Asia) संकट से निपटने के तरीके पर सरकार के साथ खड़े नजर आकर कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पहले भी कई मौकों पर कांग्रेस को असहज स्थिति में डाल चुके पार्टी सांसद शशि थरूर (MP Shashi Tharoor) के अलावा मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के पूर्व सीएम कमलनाथ (Former CM Kamal Nath) और पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा (Anand Sharma) और मनीष तिवारी (Manish Tewari) ने पिछले कुछ दिनों में पार्टी के आधिकारिक रुख से अलग राय जताई है। नेताओं की बयानबाजी से कांग्रेस की हुई किरकिरीइन प्रमुख नेताओं की बयानबाजी ने कांग्रेस की काफी किरकिरी कराई है। खासकर ऐसे समय जब पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण देश में ऊर्जा संकट उत्पन्न होने को लेकर लगातार नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साध रहे हैं। राहुल ने हाल ही में कहा था कि आने वाले समय में ईंधन एक बड़ी समस्या बनने वाला है, क्योंकि ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो चुकी है। यह स्थिति गलत विदेश नीति के कारण पैदा हुई है। आनंद शर्मा, कमलनाथ के बाद सरकार के साथ मनीष तिवारीकांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने पश्चिम एशिया में जारी जंग पर एक टीवी चैनल पर कहा, सरकार संभवतः सही काम कर रही है। अभी दो दिन पहले कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं आनंद शर्मा और कमलनाथ ने भी मौजूदा स्थिति को संभालने के केंद्र के तरीके की सराहना की थी। आनंद शर्मा ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा था कि भारत का कूटनीतिक तरीका समझदारी भरा रहा है। इससे संभावित मुश्किलों से बचा गया है। एलपीजी की कोई कमी नहीं है- कमलनाथमध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने छिंदवाड़ा में एक कार्यक्रम के दौरान कहा, एलपीजी की कोई कमी नहीं है। बस ये माहौल बनाया जा रहा है कि कमी है। कुछ लोगों राजनीतिक फायदे के लिए जानबूझकर डर फैला रहे हैं। शशि थरूर ने पिछले महीने एक लेख में पश्चिम एशिया संकट पर भारत सरकार के संयमित रुख का समर्थन करते हुए इसे जिम्मेदारी भरा बताया है। उनके मुताबिक, इस मामले में चुप्पी कायरता नहीं है। हमें समझना होगा कि हमारे राष्ट्रीय हित इस इलाके से जुड़े हैं।
पश्चिम एशिया संकट के बीच LPG-PNG और पेट्रोलियम उत्पादों की समीक्षा, PM मोदी ने ली CCS की बैठक

नई दिल्ली। ईरान-अमेरिका युद्ध (Iran-US War) के बीच बुधवार शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के नेतृत्व में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) (Cabinet Committee on Security – CCS) की बैठक हुई। इस बैठक में एलपीजी, पीएनजी, पेट्रोलियम उत्पादों पर जानकारी दी गई। पीएम मोदी ने पश्चिम एशिया संघर्ष के प्रभाव से नागरिकों की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास करने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई यह दूसरी ऐसी बैठक थी, जिसमें ईरान युद्ध के बीच देश में उठाए जा रहे कदमों की समीक्षा की गई। पेट्रोलियम उत्पादों, विशेष रूप से एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित करने और बिजली की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में अपडेट दिया गया। LPG की खरीद के लिए स्रोतों में विविधता लाई जा रही है, जिसके तहत विभिन्न देशों से नई आपूर्ति शुरू की गई है। पीएमओ के बयान के अनुसार, बैठक में बताया गया कि पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शनों का विस्तार करने के लिए भी कदम उठाए गए हैं। गर्मियों के चरम महीनों के दौरान बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कई उपाय किए गए हैं। जैसे कि 7-8 GW क्षमता वाले गैस-आधारित बिजली संयंत्रों को ‘गैस पूलिंग मैकेनिज्म’ से छूट देना, और थर्मल पावर स्टेशनों पर अधिक कोयला पहुंचाने के लिए ‘रेक’ (मालगाड़ियों) की संख्या बढ़ाना आदि। यह भी बताया गया कि लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) भी विभिन्न देशों से मंगाई जा रही है। सचिव ने आगे बताया कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, और इसकी जमाखोरी तथा कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए ‘एंटी-डायवर्जन’ (गलत इस्तेमाल रोकने वाले) उपायों को नियमित रूप से लागू किया जा रहा है। ‘छापेमारी और सख्त कार्रवाई करके रोकें कालाबाजारी’इसके अलावा, बैठक में कृषि, नागरिक उड्डयन, शिपिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे विभिन्न अन्य क्षेत्रों में उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए प्रस्तावित उपायों पर भी चर्चा की गई। उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। जैसे कि मांग को पूरा करने के लिए यूरिया का उत्पादन बनाए रखना, और डीएपी उर्वरकों की आपूर्ति के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं के साथ समन्वय स्थापित करना। राज्य सरकारों से अनुरोध किया गया है कि वे निगरानी, छापेमारी और सख्त कार्रवाई के माध्यम से उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और गलत इस्तेमाल पर अंकुश लगाएं। बुनियादी जरूरतों की उपलब्धता का लिया जायजाप्रधानमंत्री मोदी ने आम आदमी की बुनियादी जरूरतों की उपलब्धता का जायजा लिया। उन्होंने देश में उर्वरकों की उपलब्धता और खरीफ तथा रबी मौसमों में इनकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष के प्रभाव से नागरिकों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए। प्रधानमंत्री ने गलत सूचना और अफवाहों को रोकने के लिए जनता तक सही जानकारी का सुचारू प्रवाह सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। प्रधानमंत्री ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि वे मौजूदा वैश्विक स्थिति से प्रभावित नागरिकों और विभिन्न क्षेत्रों की समस्याओं को कम करने के लिए हर संभव उपाय करें। पिछली बैठक में क्या हुआ थाएक हफ्ते पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रस्तावित राहत उपायों की समीक्षा के लिए सीसीएस की एक बैठक की अध्यक्षता की थी। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, कैबिनेट सचिव ने वैश्विक स्थिति और भारत सरकार के सभी संबंधित मंत्रालयों/विभागों द्वारा अब तक उठाए गए तथा राहत उपायों पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दी थी। कृषि, उर्वरक, खाद्य सुरक्षा, पेट्रोलियम, बिजली,निर्यातक, शिपिंग, व्यापार, वित्त, आपूर्ति श्रृंखला और सभी प्रभावित क्षेत्रों जैसे क्षेत्रों में इसके अपेक्षित प्रभाव और उससे निपटने के लिए उठाए गए उपायों पर चर्चा की गई थी।
PM मोदी आज पश्चिम एशिया संकट को लेकर मुख्यमंत्रियों के साथ करेंगे बैठक

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) चुनाव वाले राज्यों को छोड़कर अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों (Chief Ministers) के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (Video Conferencing.) के जरिये आज शाम बातचीत करेंगे। खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष (West Asia crisis) शुरू होने के बाद पीएम मोदी की मुख्यमंत्रियों के साथ पहली बार बैठक होगी। कैबिनेट सचिवालय चुनाव वाले राज्यों तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के मुख्य सचिवों के साथ अलग-अलग बैठक करेगा। केंद्र सरकार के सूत्रों ने बताया, प्रधानमंत्री शुक्रवार शाम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मुख्यमंत्रियों से जुड़ेंगे और इस दौरान संकट से निपटने में राज्यों की तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा भी होगी। इस पहल का उद्देश्य ‘टीम इंडिया’ की भावना से प्रेरित होकर सरकार के प्रयासों में तालमेल सुनिश्चित करना है। प्रधानमंत्री मोदी ईरान संघर्ष से उत्पन्न संकट पर लगातार सक्रिय हैं। सोमवार को उन्होंने लोकसभा सांसदों को इस बारे में सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी जबकि मंगलवार को राज्यसभा को इस बारे में संबोधित किया। बुधवार को सर्वदलीय बैठक में उनके वरिष्ठ मंत्रियों ने विपक्ष के सभी दलों के सवालों के जवाब दिए। चूंकि तेल-गैस की आपूर्ति से निपटने में राज्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है इसलिए इस बारे में अब मोदी मुख्यमंत्रियों से चर्चा करेंगे। पीएम मोदी लगातार यह कहते रहे हैं कि ईरान संघर्ष से पैदा संकट लंबा खिंच सकता है। उन्होंने यह आशंका भी जताई है कि संकट की स्थिति में कुछ तत्व इसका फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं और इससे निपटने में राज्यों को सख्त कदम उठाने होंगे। लोकसभा में अपने संबोधन में भी उन्होंने इस बात पर जोर दिया था। भारत के पास 60 दिन का ईंधन: सरकारइससे पहले सरकार ने नागरिकों को आश्वस्त किया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद कोई तात्कालिक खतरा नहीं है। सरकार ने बताया कि देश के पास 60 दिनों का ईंधन उपलब्ध है। लोगों से ईंधन की कमी से जुड़ी अटकलों पर ध्यान न देने की अपील की गई। सरकार ने पुष्टि की कि देश की ऊर्जा आपूर्ति स्थिर और अच्छी तरह प्रबंधित है और मौजूदा मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त भंडार मौजूद है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, कच्चे तेल की आपूर्ति अगले लगभग दो महीने के लिए पहले ही सुनिश्चित कर ली गई है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल बाजार कंपनियों ने पहले से ही आयात की व्यवस्था कर ली है, जिससे आपूर्ति में निरंतरता बनी रहे। होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं के बावजूद भारत 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल खरीद रहा है, जिससे किसी एक मार्ग या क्षेत्र पर निर्भरता कम हो जाती है।
PM मोदी ने पश्चिम एशिया संकट पर श्रीलंका के राष्ट्रपति से की फोन पर बात, जानें किन मुद्दों पर हुई चर्चा?

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके (Sri Lankan President Anura Kumara Dissanayake) से मंगलवार को फोन पर बातचीत की। इस चर्चा में पश्चिम एशिया (West Asia.) की बदलती स्थिति पर विस्तार से विचार विमर्श हुआ। खासतौर पर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ रहे असर को लेकर गहरी चिंता जताई गई। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया। बातचीत के दौरान भारत और श्रीलंका के बीच ऊर्जा सहयोग से जुड़ी प्रमुख पहलों की प्रगति की समीक्षा की गई। दोनों देशों ने ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी को और मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाने का फैसला किया। क्षेत्रीय सुरक्षा बढ़ाने के लिए भी कई अहम मुद्दों पर सहमति बनी। यह सहयोग दोनों देशों के हितों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ाया जाएगा। भारत और श्रीलंका को निकट और विश्वसनीय साझेदार बताया गया। दोनों नेताओं ने साझा चुनौतियों का सामना करने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई। एनर्जी सप्लाई पर हुई चर्चावैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति में हो रही बाधाओं से निपटने के लिए रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। यह साझेदारी दोनों देशों की सुरक्षा और विकास के लिए अहम है। इस चर्चा से भारत-श्रीलंका संबंधों में नई ऊर्जा मिली है। दोनों पक्षों ने भविष्य में भी नियमित संपर्क बनाए रखने और व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया। क्षेत्रीय शांति और प्रगति के लिए यह साझा प्रयास महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। भारत और श्रीलंका के संबंध बेहद पुराने हैं, जो सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत पर आधारित हैं। श्रीलंकाई गृहयुद्ध और भारतीय शांति सेना (IPKF) के हस्तक्षेप से तनाव बढ़ा, लेकिन मुक्त व्यापार समझौते (FTA) ने आर्थिक सहयोग को मजबूत किया। बीते वर्षों में, श्रीलंकाई आर्थिक संकट में भारत ने लगभग 4 अरब डॉलर की सहायता (क्रेडिट लाइन, करेंसी स्वैप, ईंधन और खाद्य सामग्री) देकर पड़ोस प्रथम नीति का सबूत दिया। कोविड महामारी में ऑक्सीजन और वैक्सीन सहायता भी प्रदान की गई। हाल के वर्षों में उच्चस्तरीय यात्राओं, रक्षा समझौते, ऊर्जा कनेक्टिविटी, डिजिटल भुगतान और व्यापार से संबंध नई ऊंचाई पर पहुंचे हैं।
पश्चिम एशिया संकट पर पीएम मोदी का बड़ा कदम: आज लोकसभा में देंगे बयान, ईरान-इजरायल जंग के बीच भारत की 'सुरक्षा कवच' रणनीति तैयार!
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों के बीच भारत सरकार पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दोपहर दो बजे लोकसभा में एक महत्वपूर्ण वक्तव्य देने वाले हैं। माना जा रहा है कि पीएम मोदी ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी इस भीषण संघर्ष से वैश्विक स्तर पर पैदा हुए ऊर्जा संकट और इसके भारत पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर संसद को संबोधित करेंगे। इस संबोधन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सोमवार सुबह ही प्रधानमंत्री ने संसद भवन परिसर में विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और सचिव स्तर के अधिकारियों के साथ एक बड़ी बैठक की, जिसमें मौजूदा हालातों की विस्तृत समीक्षा की गई। इससे पहले रविवार शाम को प्रधानमंत्री मोदी ने सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) की अध्यक्षता की। इस उच्च स्तरीय बैठक में पश्चिम एशिया में जारी जंग के कारण पेट्रोलियम, बिजली, आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) और खाद सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर पड़ने वाले अपेक्षित प्रभावों पर गहन चर्चा की गई। कैबिनेट सचिव ने एक विशेष प्रेजेंटेशन के जरिए वैश्विक स्थिति और भारत सरकार द्वारा अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी दी। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि युद्ध का प्रभाव केवल अल्पकालिक नहीं, बल्कि मध्यम और दीर्घकालिक भी हो सकता है। ऐसे में भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को इस झटके से बचाने के लिए तत्काल और दूरगामी, दोनों तरह के जवाबी उपायों पर काम शुरू कर दिया है। आम आदमी की बुनियादी जरूरतों, जैसे भोजन, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा को लेकर सरकार ने विस्तृत आकलन किया है। विशेष रूप से किसानों के लिए खरीफ सीजन के दौरान खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पिछले कुछ वर्षों में खाद का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने के लिए जो कदम उठाए गए थे, उनसे फिलहाल खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित रहेगी। साथ ही, भविष्य में उपलब्धता बनाए रखने के लिए वैकल्पिक स्रोतों की भी तलाश शुरू कर दी गई है। ऊर्जा के मोर्चे पर राहत की बात यह है कि सभी पावर प्लांट्स में कोयले का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, जिससे देश में बिजली की कमी होने की आशंका नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस संकट से निपटने के लिए ‘संपूर्ण सरकार’ (Whole-of-Government) के दृष्टिकोण पर बल दिया है। उन्होंने मंत्रियों और सचिवों के एक विशेष समूह के गठन का निर्देश दिया है, जो सभी हितधारकों के साथ मिलकर काम करेगा। पीएम ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस बदलते वैश्विक घटनाक्रम के बीच भारतीय नागरिकों को कम से कम असुविधा होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकारों के साथ उचित समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि युद्ध की आड़ में आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी और जमाखोरी को रोका जा सके। केमिकल, फार्मास्यूटिकल और औद्योगिक कच्चे माल के आयात के लिए नए और विविध स्रोतों की पहचान की जा रही है, ताकि भारतीय उद्योगों की गति धीमी न पड़े। आज लोकसभा में पीएम का बयान इस पूरी रणनीति का खाका देश के सामने रखेगा।
पश्चिम एशिया संकट के बीच रूस से भी LPG खरीदेगा भारत… सरकार ने दिए संकेत

नई दिल्ली। ईरान-अमेरिका युद्ध (Iran-US war) के बीच पूरी दुनिया में कच्चे तेल (Crude Oil) का संकट पैदा होने लगा है। एलपीजी (LPG) की भी दिक्कतें आने लगी हैं। इस बीच, एलपीजी को लेकर भारत सरकार (Government of India) ने गुरुवार को बड़े संकेत दिए हैं। विदेश मंत्रालय से सवाल पूछा गया कि क्या भारत रूस से एलपीजी खरीद रहा है, इस पर सरकार ने कहा कि अगर रूस में उपलब्ध होगी, तो वहां से खरीदी जाएगी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से पूछा गया कि क्या हम रूस से एलपीजी खरीद रहे हैं? इस पर उन्होंने जवाब दिया, ”एलपीजी हम सभी जगह से खरीदने की कोशिश कर रहे हैं, जहां वह उपलब्ध है। अगर उसमें रूस भी होगा, तो वहां भी जाएंगे, क्योंकि स्थिति अभी इस प्रकार की है। हमें सुनिश्चित करना है कि हमारे लोगों का ईंधन की जरूरतें हैं, वह पूरा हो। कई देश हैं, जहां से एलपीजी खरीद रहे हैं। अभी इन देशों का ब्योरा नहीं है, यह सब पेट्रोलियम मंत्रालय ज्यादा जानकारी देगा, लेकिन हम चाहते हैं कि विकल्प हमारे पास कई हों।” ‘तेल और गैस के कुंओं तथा रिफाइनरियों पर हमले चिंताजनक’भारत ने खाड़ी क्षेत्र में तेल और गैस के कुंओं तथा तेल रिफाइनरियों पर हमलों को अत्यंत चिंताजनक बताया है। सरकार ने कहा है कि इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता और हमले तुरंत रोके जाने चाहिए। पिछले कुछ दिनों में ईरान-अमेरिका जंग और भीषण हुई है। ईरान ने कार्रवाई करते हुए खाड़ी देशों के कई तेल कुओं और रिफाइनरियों को निशाना बनाया है। अमेरिका-इजरायल ने भी ईरानी तेल सुविधाओं पर हमले किए हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पिछले कुछ दिनों में खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा अवसंरचना पर हुए हमलों के संबंध में मीडिया के प्रश्नों के उत्तर में गुरुवार को कहा कि भारत ने यह संघर्ष शुरू होने पर ही कहा था कि नागरिक और ऊर्जा ठिकानों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा ,” भारत ने पहले ही पूरे क्षेत्र में ऊर्जा अवसंरचना सहित नागरिक अवसंरचना को निशाना बनाने से बचने का आह्वान किया था। इस क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हालिया हमले अत्यंत चिंताजनक हैं और ये पूरे विश्व के पहले से ही अनिश्चित ऊर्जा परिदृश्य को और अस्थिर करते हैं। ऐसे हमले अस्वीकार्य हैं और इन्हें तुरंत बंद किया जाना चाहिए।”
West Asia crisis: फिनलैंड के राष्ट्रपति की अपील पश्चिम एशिया में सीजफायर के लिए भारत निभाए अहम भूमिका

West Asia crisis: नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने भारत से अहम कूटनीतिक भूमिका निभाने की अपील की है। उन्होंने अमेरिका ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव के बीच तुरंत सीजफायर की जरूरत बताई है। ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में स्टब ने कहा कि वैश्विक समुदाय को दुश्मनी रोकने और संवाद के रास्ते खोलने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि भारत अपनी संतुलित विदेश नीति के चलते इस संकट को कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है। स्टब ने कहा हमें तत्काल सीजफायर की जरूरत है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारत इसमें मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। उन्होंने एस. जयशंकर द्वारा पहले की गई शांति अपील का भी उल्लेख किया। यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष के बीच सक्रिय कूटनीतिक प्रयास कर रहा है। हाल ही में विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से बातचीत कर स्थिति पर चर्चा की। इस दौरान ईरान ने मौजूदा संघर्ष को अमेरिका और इजरायल के हमलों का परिणाम बताया और आत्मरक्षा के अपने अधिकार पर जोर दिया। भारत इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है। खासतौर पर क्षेत्रीय स्थिरता ऊर्जा आपूर्ति और वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सरकार सतर्क है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से भी बातचीत की। बातचीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने आम नागरिकों की बढ़ती मौतों पर चिंता जताते हुए शांति और स्थिरता बहाल करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस क्षेत्र में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता भारत की प्राथमिकता है।मौजूदा हालात को देखते हुए विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि भारत मध्यस्थता की भूमिका निभाता है तो यह क्षेत्र में शांति बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
सोशल मीडिया पर डर फैलाने की साजिश नाकाम, फर्जी AI वीडियो मामले में यूएई में 10 गिरफ्तार

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच United Arab Emirates (यूएई) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन लोगों पर आरोप है कि उन्होंने ईरान युद्ध और सुरक्षा हालात को लेकर सोशल मीडिया पर फर्जी और भ्रामक वीडियो फैलाकर आम जनता में डर और अफरातफरी पैदा करने की कोशिश की। इसके साथ ही, आरोपियों के खिलाफ त्वरित सुनवाई के आदेश भी जारी किए गए हैं। सोशल मीडिया पर फैलाए गए झूठे वीडियोयूएई के अटॉर्नी जनरल हमद सैफ अल शम्सी ने बताया कि सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के दौरान कई वीडियो सामने आए, जिनमें लोगों को गुमराह करने वाली सामग्री साझा की गई थी। जांच में पाया गया कि कुछ वीडियो में वास्तविक फुटेज का गलत संदर्भ प्रस्तुत किया गया था, जबकि कई क्लिप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से तैयार किए गए थे। इन वीडियो में विस्फोट, प्रमुख इमारतों पर हमले और यूएई के अलग-अलग इलाकों में आग लगने जैसे दृश्य दिखाए गए थे। बच्चों और विदेशी घटनाओं का इस्तेमालअटॉर्नी जनरल ने बताया कि कुछ वीडियो में बच्चों की भावनाओं का इस्तेमाल कर सुरक्षा खतरे का झूठा संकेत दिया गया, जबकि अन्य वीडियो में विदेशी घटनाओं को यूएई से जोड़कर पेश किया गया। इन प्रयासों का उद्देश्य लोगों को भ्रमित करना और डर का माहौल पैदा करना था। अधिकारियों का कहना है कि यह साइबर स्पेस और नई तकनीक का गलत इस्तेमाल था, जिसे यूएई सरकार गंभीरता से ले रही है। आरोपियों की पूछताछ और सजाअभियोजन पक्ष ने आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है और उन्हें हिरासत में रखने का आदेश दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार इस तरह के अपराधों के लिए कम से कम एक वर्ष की जेल और 1 लाख दिरहम का जुर्माना निर्धारित है। अटॉर्नी जनरल ने साफ चेतावनी दी कि देश की सुरक्षा और शांति से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। जनता के लिए सुरक्षा संदेशअटॉर्नी जनरल ने आम लोगों से अपील की है कि वे रक्षा प्रणालियों से जुड़े वीडियो या ऐसी कोई भी जानकारी साझा न करें जिससे समाज में डर और अफरा-तफरी फैले। उन्होंने कहा कि साइबर स्पेस में गलत सूचनाओं और फर्जी एआई सामग्री का फैलाव देश की शांति और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है, और इसे रोकने के लिए कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।