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तेल संकट के बीच ईरान का बड़ा बयान: अमेरिका-इजरायल पर आरोप, भारत समेत दुनिया पर असर

नई दिल्ली। ईरान ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के बीच वैश्विक सप्लाई चेन और तेल संकट पर गंभीर चिंता जताई है, जिसका असर भारत सहित कई देशों पर पड़ रहा है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि इस स्थिति से ईरान “खुश नहीं” है, लेकिन इसके लिए सीधे तौर पर अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, जिन्होंने क्षेत्र में तनाव को बढ़ाया है। बकाई के अनुसार, पश्चिम एशिया में मौजूदा संकट की जड़ में अमेरिका और इजरायल की नीतियां हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए खाड़ी क्षेत्र के देशों की जमीन का इस्तेमाल सैन्य गतिविधियों के लिए किया। उन्होंने कहा कि ईरान को अपनी सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जवाबी कदम उठाने पड़े, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उचित हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान को इस संघर्ष के कारण भारत या किसी अन्य देश को होने वाले आर्थिक नुकसान पर कोई खुशी नहीं है। उनके मुताबिक, ईरान एक तटीय देश होने के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य पर काफी निर्भर है और वह इस क्षेत्र में शांति और सुरक्षा चाहता है। तेल और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ा यह संकट वैश्विक स्तर पर असर डाल रहा है, जिससे सप्लाई चेन बाधित हुई है और कई देशों में तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ गया है। भारत जैसे देश, जो ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं, इस स्थिति से सीधे प्रभावित हो रहे हैं। ईरानी प्रवक्ता ने यह भी संकेत दिया कि होर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा सभी देशों के हित में है और इसे खुला और स्थिर बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि संघर्ष का समाधान बातचीत और कूटनीति से ही संभव है, न कि सैन्य टकराव से। फिलहाल यह संकट अंतरराष्ट्रीय राजनीति और ऊर्जा सुरक्षा के बीच गहरे तनाव को दर्शा रहा है, जिसका असर आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल सकता है।

पश्चिम एशिया तनाव में भी चीन में पेट्रोल-LPG की हो रही भरपूर सप्लाई…. जिनपिंग ने ढूंढा नया रास्ता!

बीजिंग। मिडल ईस्ट (Middle East) में छिड़ी भीषण जंग और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) की तालाबंदी ने दुनिया के कई देशों में हाहाकार मचा दिया है. तेल संकट से जूझ रहे देशों में चीन (China) भी शामिल होता लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने एक रास्ता ढूंढ़ लिया है. ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा देखते हुए बीजिंग (Beijing) ने पुराने ट्रे़ड रास्तों का विकल्प ढूंढना शुरू कर दिया है. ऐसे में म्यांमार चीन के लिए सिर्फ एक पड़ोसी नहीं, बल्कि हिंद महासागर में उतरने का सबसे सुरक्षित ‘बैकडोर’ बन गया है. चीन-म्यांमार आर्थिक गलियारा (CMEC) अब केवल व्यापार का जरिया नहीं, बल्कि एक रणनीतिक ढाल बन चुका है। बड़ी-बड़ी पाइपलाइनें: चीन ने म्यांमार के क्यायुकफ्यू बंदरगाह से लेकर चीन के कुनमिंग शहर तक दो बड़ी-बड़ी पाइपलाइनें बिछाई हैं. इनका सबसे बड़ा मकसद ‘मलक्का डिलेमा’ से बचना है. कच्चा तेल: यह पाइपलाइन सालाना 2.2 करोड़ टन यानी लगभग 2,40,000 बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल ले जाने की क्षमता रखती है. खाड़ी देशों और अफ्रीका से आने वाले बड़े टैंकर म्यांमार के तट पर तेल उतारते हैं, जो पाइपलाइन के जरिए सीधे चीन पहुंचता है. नैचुरल गैस: इसके साथ ही एक गैस पाइपलाइन भी है जो सालाना 12 अरब क्यूबिक मीटर गैस सप्लाई करती है. इसमें म्यांमार के अपने अपतटीय क्षेत्रों की गैस भी शामिल है. हिंद महासागर में चीन की बिसातचीन अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए ‘मोतियों की माला’ (String of Pearls) की नीति को और मजबूत कर रहा है. मालदीव में चीन ने इंफ्रास्ट्रक्चर और ‘फ्रेंडशिप ब्रिज’ जैसे प्रोजेक्ट्स में भारी निवेश किया है ताकि भारत के प्रभाव को कम किया जा सके। भारत ने ग्रेट निकोबार द्वीप पर नया एयरपोर्ट और मिलिट्री बेस बनाकर चीन की घेराबंदी तेज कर दी है. यह बेस बंगाल की खाड़ी और मलक्का जलडमरूमध्य के बीच एक ‘नेचुरल बैरियर’ की तरह काम करेगा. म्यांमार: चीन का ‘ट्रम्प कार्ड’सारे रास्तों के बंद होने पर म्यांमार ही वो एकमात्र रास्ता है जो चीन को सीधे बंगाल की खाड़ी से जोड़ता है. चीन ने इसके लिए कई तरह की चालें चली हैं, जिसमें से एक म्यांमार के आंतरिक संघर्षों में एक ‘मध्यस्थ’ की भूमिका भी है, ताकि CMEC के प्रोजेक्ट्स सुरक्षित रहें. चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए वाशिंगटन में भी अब चर्चा शुरू हो गई है कि क्या म्यांमार पर लगाए गए प्रतिबंध उसे पूरी तरह चीन की गोद में धकेल रहे हैं?

PAK: PM शहबाज शरीफ ने की ईरानी राष्ट्रपति से फोन पर बात… पश्चिम एशिया तनाव पर जताई चिंता

इस्लामाबाद। पाकिस्तान (Pakistan) के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Prime Minister Shahbaz Sharif) ने सोमवार को ईरान के राष्ट्रपति डॉ मसूद पेजेशकियान (Iran’s President Dr. Masoud Pezeshkian) से टेलीफोन पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए तत्काल सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, शहबाज शरीफ ने खाड़ी क्षेत्र में जारी खतरनाक शत्रुता को लेकर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस गंभीर स्थिति के मद्देनजर सभी पड़ोसी देशों को मतभेद सुलझाने, तनाव कम करने और संवाद व कूटनीति की राह अपनाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। बयान में आगे कहा गया है कि प्रधानमंत्री ने उम्माह (मुस्लिम समुदाय) में एकता के अत्यधिक महत्व पर बल दिया, जो इस समय पहले से कहीं अधिक जरूरी है। शरीफ ने ईरानी नेतृत्व को आश्वस्त किया कि पाकिस्तान क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए रचनात्मक भूमिका निभाता रहेगा। एक पड़ोसी और मित्र राष्ट्र के रूप में पाकिस्तान ने बहादुर ईरानी जनता के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त की। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने ईरानी राष्ट्रपति और ईरान की जनता को ईद-उल-फितर तथा नवरोज की हार्दिक शुभकामनाएं भी दीं। वहीं सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में शहबाज शरीफ ने दोहराया कि पाकिस्तान क्षेत्रीय शांति को बढ़ावा देने में सक्रिय और रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस बीच, ईरानी आधिकारिक समाचार एजेंसी आईआरएनए के हवाले से तेहरान में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने कहा कि कुछ मित्र देशों से संदेश मिले हैं, जो अमेरिका से युद्ध समाप्त करने के लिए बातचीत शुरू करने के अनुरोध का संकेत देते हैं। पाकिस्तान को मिस्र और कतर के साथ-साथ संभावित मध्यस्थ के रूप में देखा जा रहा है। शरीफ की पोस्ट के तुरंत बाद पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री इशाक डार ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरगची से अलग बातचीत की और हाल के क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा की। विदेश मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट किया कि दोनों पक्षों ने क्षेत्र तथा उसके बाहर शांति, सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करने के लिए संवाद व कूटनीति के महत्व पर जोर दिया। दोनों ने बदलती स्थिति पर निरंतर संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई। इससे पहले अमेरिका ने ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर सैन्य हमले की योजना को पांच दिनों के लिए टाल दिया है और कहा है कि वह इस शत्रुता को सुलझाने के लिए ईरान के एक शीर्ष व्यक्ति से बात कर रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका पश्चिम एशिया में शत्रुता को सुलझाने की कोशिश करने के लिए ईरान की सरकार के एक शीर्ष व्यक्ति के साथ बातचीत कर रहा है। अमेरिका और ईरान हाल की बातचीत में समझौते के प्रमुख बिंदुओं पर पहुंच गए हैं। अगर हमलों में मौजूदा पांच-दिन का विराम ठीक से चलता है, तो इससे पश्चिम एशिया चल रहे संघर्ष का समाधान निकल सकता है।

पश्चिम एशिया तनाव के बीच राहत: भारत में नहीं बढ़ेंगे पेट्रोल डीजल के दाम, कनाडा-ऑस्ट्रेलिया से LPG आयात की तैयारी

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-इजरायल तथा ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है लेकिन भारत सरकार ने आम उपभोक्ताओं को राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि फिलहाल देश में पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़ाए जाएंगे। छह दिन से जारी युद्ध के चलते वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत करीब 16 प्रतिशत बढ़कर 85 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है और ब्रेंट क्रूड लगभग 85.41 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है। इसके बावजूद केंद्र सरकार का कहना है कि भारत के पास पर्याप्त तेल और गैस का भंडार मौजूद है और घरेलू बाजार पर इसका तत्काल कोई असर नहीं पड़ेगा। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों पर तेजी से काम किया है। एलपीजी के मामले में भारत केवल कतर पर निर्भर नहीं है बल्कि ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों ने भी गैस की आपूर्ति का प्रस्ताव दिया है। सरकार का कहना है कि जरूरत पड़ने पर इन देशों से आयात बढ़ाकर किसी भी संभावित कमी को पूरा किया जा सकता है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक भारत लगातार विभिन्न ऊर्जा उत्पादकों और आपूर्तिकर्ताओं के संपर्क में है और स्थिति पर करीबी नजर रखी जा रही है। दरअसल पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के बीच कतर ने अस्थायी रूप से अपना गैस उत्पादन रोक दिया है जिसका असर वैश्विक आपूर्ति पर पड़ सकता है। वर्तमान में भारत लगभग 195 मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर गैस का आयात करता है जिसमें करीब 60 एमएमएससीएम यानी लगभग 30 प्रतिशत गैस कतर से आती है। सरकार का कहना है कि इस कमी को पूरा करने के लिए अन्य देशों से गैस आयात बढ़ाने की योजना तैयार है। यदि जरूरत पड़ी तो गैस कंपनियां उद्योगों को गैस आपूर्ति की प्राथमिकताओं में बदलाव कर सकती हैं लेकिन घरेलू उपभोक्ताओं पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पीएनजी और सीएनजी जैसे घरेलू उपयोग वाले गैस उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। उद्योगों के पास वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत उपलब्ध होते हैं इसलिए गैस की संभावित कमी की स्थिति में आपूर्ति का संतुलन बनाया जा सकता है। फिलहाल ऐसी कोई स्थिति नहीं बनी है जिससे आम उपभोक्ताओं को चिंता करने की जरूरत पड़े। ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सरकार ने यह भी जानकारी दी है कि देश में फिलहाल करीब 50 दिनों के लिए तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। इसमें 25 दिनों के लिए कच्चे तेल का स्टॉक और लगभग 25 दिनों की जरूरत के हिसाब से पेट्रोल और डीजल उपलब्ध है। इसके अलावा भारत लगातार दूसरे देशों से भी तेल आपूर्ति को लेकर बातचीत कर रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की दी जा रही धमकी को लेकर भी सरकार ने कहा है कि इसका भारत पर सीमित असर पड़ेगा। भारत के कुल तेल आयात का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा ही इस मार्ग से गुजरता है जबकि बाकी 60 प्रतिशत अन्य रास्तों से आता है। सरकार ने सुरक्षित मार्गों से आयात बढ़ाने की रणनीति भी तैयार कर ली है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध कुछ समय और चलता है तो कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं लेकिन संघर्ष थमते ही कीमतों में गिरावट की संभावना है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की उपलब्धता पर्याप्त है। इस बीच भारत अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी और ओपेक जैसे संगठनों के साथ भी आपूर्ति को लेकर लगातार बातचीत कर रहा है। साथ ही समुद्री परिवहन को सुरक्षित और सस्ता बनाए रखने के लिए अमेरिका की वित्तीय संस्था डीएफसी के साथ जहाजों के बीमा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा जारी है।