BJP vs TMC election news : चुनावी माहौल गरम: तृणमूल कांग्रेस का दावा-डर के बिना करें मतदान, विपक्ष पर साधा निशाना

BJP vs TMC election news : नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के तहत मतदान जारी है। दोनों राज्यों में सुबह से ही मतदाताओं में उत्साह देखने को मिल रहा है। इस बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है और कई बड़े नेताओं ने जनता से मतदान करने की अपील की है। BJP नेता का विवादित बयान पश्चिम बंगाल में वोटिंग के बीच बीजेपी नेता अग्निमित्रा पॉल ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि अगर ममता बनर्जी चुनाव जीतती हैं, तो राज्य अलग देश बन सकता है। उन्होंने चुनाव में गड़बड़ी की आशंका भी जताई और इसे “संस्कृति बचाने की लड़ाई” बताया। TMC की अपील – डर के बिना करें मतदान वहीं तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने जनता से अपील की है कि वे बिना किसी डर के मतदान करें। पार्टी ने कहा कि हर मतदाता को अपने अधिकार का प्रयोग करते हुए राज्य के विकास और सम्मान के लिए वोट देना चाहिए। राजनाथ सिंह ने की ज्यादा मतदान की अपील रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर मतदाताओं से बड़ी संख्या में वोट डालने की अपील की। उन्होंने खासकर महिलाओं, युवाओं और पहली बार वोट करने वालों से लोकतंत्र को मजबूत बनाने में भागीदारी करने को कहा। तमिलनाडु में सितारों ने डाला वोट तमिलनाडु में भी मतदान के दौरान कई बड़े फिल्मी सितारे मतदान केंद्रों पर पहुंचे। सुपरस्टार रजनीकांत ने वोट डाला, वहीं अभिनेता-राजनेता कमल हासन अपनी बेटी श्रुति हासन के साथ वोट देने पहुंचे। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मतदाताओं से लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए मतदान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह चुनाव समानता, न्याय और स्वतंत्रता को बनाए रखने का अवसर है। विजय ने कड़ी सुरक्षा में किया मतदान अभिनेता-राजनेता विजय ने चेन्नई में कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान किया। उनके मतदान केंद्र पर भारी भीड़ देखने को मिली। सुवेंदु अधिकारी का बयान बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम में वोट डालने के बाद कहा कि राज्य में बदलाव जरूरी है। उन्होंने चुनाव में गड़बड़ी के आरोप भी लगाए और सख्त कार्रवाई की मांग की। हाई-वोल्टेज सीट बना नंदीग्राम नंदीग्राम सीट इस चुनाव का सबसे चर्चित मुकाबला बनी हुई है, जहां ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी आमने-सामने हैं। बंगाल और तमिलनाडु में जारी मतदान के साथ ही राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। एक तरफ बड़े-बड़े बयान और आरोप-प्रत्यारोप हो रहे हैं, तो दूसरी ओर सभी दल मतदाताओं से अधिक से अधिक संख्या में मतदान करने की अपील कर रहे हैं। अब सबकी नजरें चुनाव परिणामों पर टिकी हैं।
West Bengal Elections 2026 के बीच सियासी वार-पलटवार तेज, पीएम मोदी ने TMC को घेरा

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण की वोटिंग के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नादिया जिले में जनसभा को संबोधित करते हुए तृणमूल कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला। ‘झालमुड़ी’ बयान से सियासत गरमरैली के दौरान पीएम मोदी ने कहा, “झालमुड़ी मैंने खाई, लेकिन मिर्ची तृणमूल कांग्रेस (TMC) वालों को लगी है। उनके इस बयान के बाद चुनावी माहौल और ज्यादा गरमा गया है। ‘4 मई को बंगाल में खिलेगा कमल’पीएम मोदी ने दावा किया कि 4 मई को पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत तय है।उन्होंने कहा कि उस दिन पूरे राज्य में जीत का जश्न मनाया जाएगा और मिठाइयों के साथ झालमुड़ी भी बांटी जाएगी। ‘50 साल में सबसे कम हिंसा वाला चुनाव’प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पिछले 50 वर्षों में पहला चुनाव है, जिसमें हिंसा सबसे कम देखने को मिली है। उन्होंने Election Commission of India की तारीफ करते हुए कहा कि चुनाव आयोग ने लोकतंत्र की गरिमा को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है। अधिकारियों और कर्मचारियों की सराहनापीएम मोदी ने सरकारी कर्मचारियों और चुनाव ड्यूटी में लगे अधिकारियों की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि अब तक मिले आंकड़ों के अनुसार, इस बार मतदाताओं की भागीदारी भी रिकॉर्ड स्तर पर है। पश्चिम बंगाल में मतदान के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पीएम मोदी के बयान ने चुनावी माहौल को और गर्मा दिया है। अब सभी की नजरें आने वाले नतीजों पर टिकी हैं, जो राज्य की राजनीति की दिशा तय करेंगे।
ममता के किले पर निशाना! नंदीग्राम से उठे Suvendu Adhikari की सियासी तैयारी

नई दिल्ली नंदीग्राम आंदोलन से उभरकर बड़े नेता बने सुवेंदु अधिकारी अब ममता बनर्जी के खिलाफ आक्रामक रुख में नज आ रहे हैं। जानिए उनका पूरा राजनीतिक सफर, बड़े फैसले और हालिया विवाद। पश्चिम बंगाल की राजनीति में सुवेंदु अधिकारी एक ऐसा नाम बन चुके हैं, जिनकी पहचान संघर्ष, आंदोलन और बड़े राजनीतिक फैसलों से बनी है। नंदीग्राम आंदोलन से उभरकर राज्य की राजनीति में बड़ा चेहरा बने अधिकारी ने उसी जमीन पर अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी ममता बनर्जी को हराकर इतिहास रच दिया था। नंदीग्राम से शुरू हुआ सफरसाल 2007 में Nandigram में जमीन अधिग्रहण के खिलाफ बड़ा आंदोलन हुआ था। उस समय सुवेंदु अधिकारी Trinamool Congress के नेता थे और आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल थे। उन्होंने गांव-गांव जाकर लोगों को संगठित किया और आंदोलन को मजबूत बनाया। यही आंदोलन उनके राजनीतिक करियर की नींव बना। 2021 विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट से उन्होंने सीधे Mamata Banerjee को चुनौती दी। यह मुकाबला बेहद कांटे का रहा और पूरे देश की नजरें इस सीट पर टिकी रहीं। आखिरकार सुवेंदु अधिकारी ने मामूली अंतर से जीत हासिल की। यह जीत इसलिए खास थी क्योंकि ममता बनर्जी ने अपनी पारंपरिक सीट छोड़कर यहां से चुनाव लड़ा था। एक समय सुवेंदु अधिकारी Trinamool Congress के सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते थे, लेकिन 2020 में उन्होंने पार्टी छोड़कर BJP का दामन थाम लिया। यह फैसला जोखिम भरा था, लेकिन इसी के बाद वह राज्य की राजनीति में एक मजबूत विपक्षी चेहरा बनकर उभरे। हालिया घटनाओं से बढ़ी नाराजगीहाल के दिनों में कई घटनाओं को लेकर सुवेंदु अधिकारी ने नाराजगी जताई है। जनवरी 2026 में पश्चिम मेदिनीपुर के चंद्रकोना में उनके काफिले पर हमला हुआ, जिसके बाद उन्होंने टीएमसी कार्यकर्ताओं पर आरोप लगाए। उन्होंने पुलिस पर भी निष्क्रिय रहने का आरोप लगाया। इसके अलावा मार्च 2026 में नंदीग्राम में मूर्ति से छेड़छाड़ की घटना पर भी उन्होंने कड़ी प्रतिक्रिया दी और राज्य सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए।पहले भी कूचबिहार की घटना को लेकर उन्होंने अपनी सुरक्षा पर खतरे की बात कही थी। सुवेंदु अधिकारी को आज बागी नेता और आक्रामक विपक्षी चेहरे के रूप में देखा जाता है। विधानसभा में उनके तीखे बयान और सरकार पर हमले अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। जमीनी नेता की पहचानउनका राजनीतिक सफर जमीनी स्तर से शुरू हुआ है। नंदीग्राम आंदोलन के दौरान उन्होंने सीधे जनता के बीच रहकर काम किया, जिससे उनकी मजबूत पकड़ बनी। यही वजह है कि उन्हें आज भी एक “ग्रासरूट लीडर” माना जाता है। नंदीग्राम से शुरू हुआ Suvendu Adhikari का सफर उन्हें पश्चिम बंगाल की राजनीति के केंद्र में ले आया। जहां एक ओर उन्होंने बड़े राजनीतिक दांव खेलकर अपनी पहचान बनाई, वहीं दूसरी ओर मौजूदा घटनाओं को लेकर उनकी नाराजगी यह दिखाती है कि राज्य की राजनीति में टकराव और सियासी गर्मी अभी भी बरकरार है।
कोलकाता पोर्ट सीट पर चर्चा में प्रियदर्शिनी हकीम कौन हैं और क्यों बनीं कोलकाता में

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में कोलकाता पोर्ट विधानसभा सीट इन दिनों खास चर्चा में है और इसकी मुख्य वजह हैं Priyadarshini Hakim जो तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी की उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतरी हैं प्रियदर्शिनी हकीम को मुख्यमंत्री Mamata Banerjee की करीबी और भरोसेमंद युवा नेता माना जाता है उनकी राजनीतिक सक्रियता और संगठन में बढ़ती पकड़ ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया है खास बात यह है कि वे अपने पिता और राज्य सरकार में मंत्री तथा कोलकाता के मेयर Firhad Hakim के साथ भी लगातार प्रचार करती नजर आती हैं प्रियदर्शिनी हकीम की पहचान केवल एक उम्मीदवार तक सीमित नहीं है बल्कि उन्हें टीएमसी के भीतर एक उभरते हुए युवा चेहरे के रूप में देखा जा रहा है पार्टी ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें एक महत्वपूर्ण सीट कोलकाता पोर्ट से चुनावी मैदान में उतारा है जो राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम मानी जाती है चुनाव प्रचार के दौरान प्रियदर्शिनी की छवि एक विनम्र और जमीन से जुड़ी नेता के रूप में उभर रही है वह लोगों से हाथ जोड़कर मिलती हैं और सीधे जनता से संवाद स्थापित करने की कोशिश करती हैं उनके प्रचार शैली में सादगी और संपर्क पर जोर दिया जा रहा है जिससे वे मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का इस सीट पर खास फोकस है और उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को पूरी ताकत के साथ चुनाव प्रचार में जुटने के निर्देश दिए हैं भवानीपुर को चुनावी प्रचार का मुख्य केंद्र बनाया गया है जहां से रणनीति तैयार की जा रही है प्रियदर्शिनी हकीम की चर्चा का एक बड़ा कारण उनका राजनीतिक परिवार भी है क्योंकि उनके पिता फिरहाद हकीम राज्य की राजनीति में एक अनुभवी और प्रभावशाली नेता हैं इस वजह से उन्हें राजनीतिक अनुभव और मार्गदर्शन दोनों मिल रहा है जो उनके चुनावी अभियान को मजबूती देता है टीएमसी के भीतर उन्हें एक ऐसे चेहरे के रूप में देखा जा रहा है जो आने वाले समय में पार्टी की युवा नेतृत्व की भूमिका निभा सकती हैं उनकी सक्रियता और पार्टी के प्रति निष्ठा उन्हें एक मजबूत उम्मीदवार बनाती है इस प्रकार कोलकाता पोर्ट सीट न केवल एक चुनावी मुकाबला बन गई है बल्कि यह इस बात का भी संकेत है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए चेहरों का उदय हो रहा है और प्रियदर्शिनी हकीम जैसे युवा नेता भविष्य की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं