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अब वॉइस मैसेज सुनना नहीं पड़ेगा, WhatsApp की ट्रांसक्रिप्ट सुविधा से सीधे पढ़ें मैसेज और बचाएं प्राइवेसी

नई दिल्ली । WhatsApp दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स में से एक है। इसके जरिए यूजर्स टेक्स्ट चैट, वॉइस और वीडियो कॉल करने के साथ स्टेटस शेयरिंग और वॉइस नोट भेजने जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं। हालांकि, कई बार वॉइस मैसेज ऐसे समय पर आते हैं जब उन्हें सुनना सार्वजनिक जगहों, ऑफिस या भीड़-भाड़ वाली जगहों पर मुश्किल हो जाता है। ऐसे में WhatsApp का Voice Message Transcript फीचर बेहद उपयोगी साबित होता है। यह फीचर वॉइस मैसेज को सीधे लिखित टेक्स्ट में बदल देता है। इसका मतलब है कि यूजर को ऑडियो सुनने की जरूरत नहीं होती और मैसेज की सामग्री तुरंत पढ़ी जा सकती है। इससे न केवल प्राइवेसी बनी रहती है, बल्कि समय की बचत भी होती है। फीचर Android और iPhone दोनों डिवाइस पर उपलब्ध है और इसे इस्तेमाल करना बेहद आसान है। इस सुविधा का उपयोग करने के लिए सबसे पहले अपने स्मार्टफोन में WhatsApp खोलें। इसके बाद Settings में जाएं और Chat विकल्प चुनें। यहां आपको Voice Message Transcripts का ऑप्शन दिखाई देगा। इसे ऑन कर दें और अपनी पसंदीदा भाषा का चयन करें। वर्तमान में अंग्रेजी भाषा सबसे अधिक इस्तेमाल की जाती है। जब फीचर एक्टिव हो जाता है, तो किसी भी चैट में मौजूद वॉइस मैसेज पर टैप करें। अब Transcribe विकल्प दिखाई देगा। इस पर क्लिक करने के बाद WhatsApp ऑडियो को कुछ ही सेकंड में टेक्स्ट में बदल देता है। पूरा संदेश आपकी स्क्रीन पर लिखित रूप में दिखाई देने लगता है। WhatsApp ने यह Voice Message Transcript फीचर वर्ष 2024 में पेश किया था। शुरुआत में यह सुविधा केवल सीमित यूजर्स के लिए उपलब्ध थी, लेकिन अब इसे व्यापक रूप से रोलआउट कर दिया गया है। आज अधिकांश यूजर्स अपने स्मार्टफोन पर इस फीचर का लाभ उठा सकते हैं और वॉइस मैसेज सुनने के बजाय आसानी से पढ़ सकते हैं। विशेष रूप से सार्वजनिक स्थानों पर यह सुविधा प्राइवेसी बनाए रखने में मदद करती है। यदि आप सार्वजनिक परिवेश में WhatsApp का उपयोग करते हैं, तो इस फीचर की मदद से आप बिना किसी परेशानी के मैसेज पढ़ सकते हैं। साथ ही, यह समय की बचत भी करता है क्योंकि किसी भी ऑडियो को पूरा सुनने की आवश्यकता नहीं होती। इस फीचर के इस्तेमाल से न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा बढ़ती है बल्कि सामाजिक शिष्टाचार भी बना रहता है। हेडफोन न होने या आसपास का माहौल शांत रखने की आवश्यकता होने पर यह सुविधा और भी उपयोगी साबित होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के ट्रांसक्रिप्शन फीचर्स आने वाले समय में मैसेजिंग एप्स की नई पहचान बन सकते हैं। सारांश यह है कि WhatsApp का Voice Message Transcript फीचर यूजर्स को पब्लिक जगहों पर वॉइस मैसेज सुनने से बचाता है, प्राइवेसी को सुरक्षित रखता है और समय की बचत करता है। यह फीचर सरल, तेज और सभी स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं के लिए सहज रूप से उपलब्ध है।

इंतजार खत्म! WhatsApp ला रहा नया फीचर, निजी चैट्स होंगी पहले से ज्यादा सुरक्षित..

नई दिल्ली । लोकप्रिय इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp अपने करोड़ों यूजर्स के लिए एक नया और महत्वपूर्ण प्राइवेसी फीचर लेकर आ रहा है। इस अपडेट का उद्देश्य निजी बातचीत को पहले से अधिक सुरक्षित बनाना और यूजर्स को उनकी व्यक्तिगत जानकारी पर बेहतर नियंत्रण प्रदान करना है। डिजिटल सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच कंपनी लगातार ऐसे फीचर्स विकसित कर रही है जो यूजर्स की गोपनीयता को मजबूत करें। नया फीचर विशेष रूप से उन संदेशों और मीडिया फाइल्स के लिए उपयोगी होगा जिन्हें यूजर्स सीमित समय के लिए साझा करना चाहते हैं। यह सुविधा निजी बातचीत के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा सुनिश्चित करेगी और संवेदनशील जानकारी को अनावश्यक रूप से लंबे समय तक उपलब्ध रहने से बचाने में मदद करेगी। इससे व्यक्तिगत और पेशेवर दोनों तरह की बातचीत अधिक सुरक्षित हो सकेगी। आज के समय में ऑनलाइन संचार लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुका है। ऐसे में डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी से जुड़े मुद्दे भी पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं। यूजर्स चाहते हैं कि उनकी निजी तस्वीरें, वीडियो और संदेश केवल निर्धारित व्यक्ति तक ही सीमित रहें। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए WhatsApp लगातार अपने सुरक्षा ढांचे को मजबूत बना रहा है। पिछले कुछ वर्षों में प्लेटफॉर्म ने चैट लॉक, एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, डिसअपीयरिंग मैसेज और अन्य सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। इन फीचर्स ने यूजर्स को अपनी चैट्स और डेटा पर अधिक नियंत्रण दिया है। नया अपडेट इसी दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे निजी संचार और अधिक सुरक्षित बन सकेगा। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर खतरों और डेटा लीक की बढ़ती घटनाओं के बीच प्राइवेसी आधारित फीचर्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए सुरक्षा और गोपनीयता को प्राथमिकता देना आवश्यक हो गया है। WhatsApp का नया फीचर इसी बदलती जरूरत को ध्यान में रखकर तैयार किया गया माना जा रहा है। यह सुविधा उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी हो सकती है जो नियमित रूप से संवेदनशील दस्तावेज, निजी तस्वीरें या गोपनीय जानकारी साझा करते हैं। अतिरिक्त सुरक्षा उपायों से डेटा के दुरुपयोग और अनधिकृत पहुंच की आशंका को कम करने में मदद मिल सकती है। इससे यूजर्स का भरोसा भी मजबूत होगा और डिजिटल संचार का अनुभव बेहतर बनेगा। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि आने वाले समय में प्राइवेसी-केंद्रित फीचर्स मैसेजिंग सेवाओं की सबसे बड़ी आवश्यकता बन जाएंगे। यूजर्स अब केवल तेज और आसान संचार नहीं चाहते, बल्कि अपने डेटा की सुरक्षा को भी उतना ही महत्व देते हैं। यही कारण है कि तकनीकी कंपनियां लगातार नए सुरक्षा समाधान विकसित कर रही हैं। WhatsApp का यह नया फीचर भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इसके व्यापक रूप से उपलब्ध होने के बाद यूजर्स को निजी चैटिंग के दौरान अधिक सुरक्षा और सुविधा मिलने की उम्मीद है। इससे डिजिटल दुनिया में सुरक्षित संचार को बढ़ावा मिलेगा और प्राइवेसी को लेकर लोगों का विश्वास और मजबूत होगा।

WhatsApp यूजर्स के लिए बड़ा सिक्योरिटी अलर्ट: Meta ने दो खामियां कीं फिक्स, तुरंत अपडेट करना जरूरी

नई दिल्ली। दुनिया की सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप WhatsApp को लेकर पैरेंट कंपनी Meta ने एक अहम सुरक्षा चेतावनी जारी की है। कंपनी ने बताया है कि ऐप में पाई गई दो तकनीकी कमजोरियों को अब ठीक कर दिया गया है, जो कुछ परिस्थितियों में यूजर्स के डिवाइस और डेटा के लिए खतरा बन सकती थीं। क्या थीं ये खामियां?पहली खामी WhatsApp Desktop (Windows) यूजर्स से जुड़ी थी, जिसमें “अटैचमेंट स्पूफिंग” की समस्या थी। इसमें कोई भी खतरनाक फाइल सामान्य डॉक्यूमेंट की तरह दिखाई दे सकती थी और उसे खोलने पर सिस्टम को नुकसान पहुंचाने का खतरा था। दूसरी खामी Android और iOS दोनों यूजर्स पर असर डाल सकती थी। इसमें मीडिया फाइल्स की प्रोसेसिंग सही तरीके से नहीं हो रही थी, जिससे कुछ मामलों में बाहरी कंटेंट गलत तरीके से लोड होकर डिवाइस को प्रभावित कर सकता था। अब क्या सुधार हुआ?Meta के अनुसार इन दोनों खामियों को अब सुरक्षा अपडेट के जरिए पूरी तरह ठीक कर दिया गया है। कंपनी ने इन्हें मीडियम लेवल की गंभीरता वाली समस्या माना था और समय रहते पैच जारी कर दिया गया।अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि इन कमजोरियों का किसी हैकर ने बड़े स्तर पर दुरुपयोग किया हो। यूजर्स के लिए जरूरी सलाहसाइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यूजर्स को तुरंत ये कदम उठाने चाहिए। WhatsApp को लेटेस्ट वर्जन में अपडेट करें। किसी भी अनजान फाइल या अटैचमेंट को न खोलेंसंदिग्ध लिंक और मीडिया फाइल से सावधान रहें क्यों जरूरी है यह अपडेट?आज के समय में साइबर खतरे तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में छोटी सी तकनीकी खामी भी डेटा चोरी या डिवाइस हैकिंग का कारण बन सकती है। इसलिए समय पर अपडेट करना ही सबसे सुरक्षित उपाय है। अगर आप भी WhatsApp का उपयोग करते हैं, तो तुरंत अपडेट करना बेहद जरूरी है, ताकि आपका फोन और डेटा सुरक्षित रह सके।

सरकार की बड़ी सख्ती! अब पुराने तरीके से नहीं चलेंगे WhatsApp और Telegram, यूजर्स परेशान, जानें नए रूल की हर एक डिटेल

नई दिल्‍ली। भारत में एक बड़ा टेक बदलाव 1 मार्च से लागू हो गया है जो हर WhatsApp और Telegram यूजर के लिए नई तरह की परेशानी और सुरक्षा दोनों लेकर आया है। कुछ लोग इससे परेशान हैं तो कुछ लोग खुश। सरकार ने दूरसंचार विभाग (DoT) के तहत एक नया SIM-Binding नियम लागू कर दिया है, जिसका मतलब है कि अब मैसेजिंग ऐप्स सिर्फ उसी फोन में काम करेंगे जिसमें वही SIM कार्ड लगा है जिससे अकाउंट बनाया गया था और वह SIM एक्टिव है। यहां जानें किन यूजर्स को ये रूल कर रहा ज्यादा एफेक्ट: इन यूजर्स के लिए ज्यादा मुसीबत पहले WhatsApp वेरिफ़ाई करने के बाद फोन में SIM हटाकर भी ऐप चलता था और Web/desktop पर भी अकाउंट लॉगिन रहता था। लेकिन अब यह सिस्टम बदल गया है। नई नियमों के बाद अगर फोन में वो SIM मौजूद नहीं है, तो ऐप काम नहीं करेगा या फिर re-verification करना पड़ेगा। खासकर उन यूजर्स को परेशानी होगी जो दो फोन, टैबलेट या कंप्यूटर पर अकाउंट काफी समय तक चालू रखते थे। इस वजह से बना है नया रूल सरकार ने यह कदम साइबर फ्रॉड और ठगी को रोकने के मकसद से उठाया है क्योंकि कई बार धोखेबाज पुराने या नकली SIM से WhatsApp अकाउंट को जारी रखते हैं और उसके जरिये गलत काम करते हैं। लेकिन यूजर को अब रोजमर्रा के इस्तेमाल में थोड़ी असुविधा का सामना करना पड़ेगा। यूजर्स को दिखेगा ये बदलाव सबसे बड़ा असर उन यूजर्स पर होगा जो: एक ही SIM से दो फैबो फोन या टैब में ऐप चलाते थे, WhatsApp Web/desktop का हर वक्त इस्तेमाल करते थे, अक्सर SIM निकालकर दूसरी डिवाइस में लगाने की आदत रखते हैं। अब हर छह घंटे में WhatsApp Web और Telegram Web ऑटोमेटिक लॉग-आउट होगा और फिर से लॉगिन के लिए आपको अपने फोन में वहीं SIM डालना होगा जिससे अपने अकाउंट बनाया हुआ है। ये लोग हो रहे नए रूल सबसे ज़्यादा प्रभावित वे लोग जिनके पास एक ही नंबर से कई फोन और टैब हैं, उन्हें बार-बार एक्टिवेशन करना पड़ेगा। वे जो PC/लैपटॉप पर रोज Web या Desktop संस्करण इस्तेमाल करते हैं, हर छह घंटे में रीकॉनैक्ट करना पड़ेगा। इन पर भी असर विदेश यात्रा के दौरान लोकल SIM डालने पर असली नंबर से जुड़े अकाउंट को फिर से वेरिफिकेशन करना पड़ेगा। Wi-Fi वाले टैबलेट या दूसरे डिवाइस पर यूज करना अब कठिन हो सकता है।

NEW WHATSAPP RULE: बगैर SIM के नहीं चलेगा WhatsApp… 1 मार्च से लागू होगा सरकार का ये नया नियम

NEW WHATSAPP RULE:  नई दिल्ली। अगर आप वाट्सएप (WhatsApp) यूजर हैं, तो यह खबर आपके काम की है। दरअसल केंद्र सरकार ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि SIM-Binding नियम में कोई बदलाव या ढील नहीं दी जाएगी। यह नियम WhatsApp, Telegram, Signal मैसेजिंग ऐप्स लागू होते हैं, और इसका लक्ष्य डिजिटल सुरक्षा को मजबूत बनाना है। यानी 1 मार्च से यह नियम लागू रहेगा और कंपनियों को इसे मानना ही होगा। सरकार के अनुसार, इन ऐप्स को एक्टिव SIM कार्ड से लगातार जुड़े रहना होगा, जिससे यह कन्फर्म किया जा सके कि व्हाट्सऐप उपयोग होने वाला नंबर असली और एक्टिव है। अगर SIM हटाई जाती है या इनएक्टिव होती है, तो ऐप की सेवाएं उस डिवाइस पर काम नहीं करेंगी। SIM-Binding क्या है? जिस मोबाइल नंबर से आपने WhatsApp अकाउंट बनाया है, वही SIM आपके फोन में एक्टिव रहनी चाहिए। अगर वह SIM आपके फोन में नहीं है या बंद हो गई है, तो WhatsApp ठीक से काम नहीं करेगा। अब तक मैसेजिंग ऐप्स में 6-डिजिट OTP डालकर एक बार लॉगिन होने के बाद SIM की मौजूदगी लगातार नहीं चेक होती थी। नया नियम यह बदलने वाला है अब हर समय SIM को एक्टिव और फोन में मौजूद होना जरूरी होगा। सरकार ने यह बदलाव इसलिए किया है क्योंकि वह डिजिटल धोखाधड़ी, फर्जी नंबरों का दुरुपयोग और साइबर अपराध को रोकने पर जोर दे रही है। जब हर अकाउंट एक वेरिफाइड SIM से जुड़ा होगा, तो फ्रॉड और फेक अकाउंट्स को पहचानना आसान हो जाएगा। 1 मार्च 2026 के बाद कोई ढील नहीं डिपार्टमेंट ऑफ़ टेलीकम्यूनिकेशंस (DoT) ने SIM-Binding नियम को 28 नवंबर 2025 को जारी किया था और कंपनियों को इसे पूरा करने के लिए 90 दिन का समय दिया गया है। इसका मतलब है कि 1 मार्च 2026 तक सभी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को इस सिस्टम को लागू करना पड़ेगा। सरकार ने यह भी साफ किया है कि अलग-अलग डिवाइस पर लॉगिन किए गए Web या Desktop के लिए भी छह घंटे का ऑटो लॉग-आउट नियम भी लागू रहेगा। इसका यह मतलब है कि अगर आप कंप्यूटर या वेब पर WhatsApp चला रहे हैं, तो हर छह घंटे में आपको QR कोड से फिर से लॉगिन करना पड़ेगा। आम लोगों पर पड़ेगा ये असर अगर आपका नंबर एक्टिव है और वही SIM आपके फोन में लगी है, तो आपको ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है। आपका WhatsApp सामान्य तरीके से चलता रहेगा।लेकिन अगर आपने फोन से SIM निकाल दी या वहीं SIM दूसरे फोन में डाल दी तो आपका व्हट्सऐप टेम्पररी इनएक्टिव हो जाएगा। साथ ही आपका नंबर बंद हो गया (रिचार्ज न होने की वजह से) तो WhatsApp दोबारा वेरिफिकेशन मांग सकता है या बंद भी हो सकता है। दरअसल केंद्र सरकार का मानना है कि अगर हर अकाउंट एक एक्टिव SIM से जुड़ा होगा, तो फर्जी नंबर, स्कैम और साइबर अपराधों के खिलाफ लड़ाई और मजबूती से लड़ी जा सकती है।

रूस ने व्हाट्सएप को किया पूरी तरह ब्लॉक… स्थानीय कानूनों के उल्लंघन का आरोप

मास्को। रूस (Russia) ने मेटा (Meta) के स्वामित्व वाले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप (Messaging Platform Whatsapp) को स्थानीय कानूनों के कथित उल्लंघन के आरोप में ब्लॉक कर दिया है। क्रेमलिन ने गुरुवार को समाचार एजेंसी एएफपी से इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि यह निर्णय घरेलू कानूनों के अनुपालन न करने के कारण लिया गया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव (Dmitry Peskov) ने प्रतिबंध के बारे में पूछे जाने पर कहा कि वास्तव में ऐसा निर्णय लिया गया और उसे लागू किया गया है। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि व्हाट्सएप ने रूसी कानून के मानदंडों और अक्षरशः पालन करने में अनिच्छा दिखाई, जिसके बाद यह कदम उठाया गया। इससे पहले व्हाट्सएप ने दावा किया था कि रूसी अधिकारी ऐप तक पहुंच को सीमित करने की कोशिश कर रहे हैं। कंपनी का यह बयान टेलीग्राम के संस्थापक पावेल दुरोव द्वारा मॉस्को पर अपने प्लेटफॉर्म की पहुंच बाधित करने का आरोप लगाने के तुरंत बाद आया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में व्हाट्सएप ने कहा था कि आज रूसी सरकार ने लोगों को सरकारी निगरानी ऐप की ओर धकेलने के प्रयास में व्हाट्सएप को पूरी तरह से ब्लॉक करने की कोशिश की। 10 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ताओं को निजी और सुरक्षित संचार से अलग करने का प्रयास एक पिछड़ा कदम है और इससे रूस में लोगों की सुरक्षा में कमी आएगी। हम उपयोगकर्ताओं को जोड़े रखने के लिए हर संभव प्रयास जारी रखेंगे। रूसी समाचार एजेंसी TASS से बातचीत में पेस्कोव ने संकेत दिया कि यदि इसकी मूल कंपनी मेटा स्थानीय नियमों का पालन करती है तो प्लेटफॉर्म को बहाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह रूसी कानूनों के अनुपालन का मामला है। यदि मेटा अनुपालन करती है, तो वह रूसी अधिकारियों के साथ बातचीत करेगी और फिर समझौते की संभावना बन सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर कंपनी अपने रुख पर कायम रहती है और रूसी कानूनों का पालन करने में अनिच्छा दिखाती है, तो बहाली की संभावना नहीं होगी। इस बीच सरकारी एजेंसी TASS ने रिपोर्ट दी कि रूस के दूरसंचार नियामक Roskomnadzor ने राष्ट्रीय कानून के कथित उल्लंघन के आरोप में व्हाट्सएप की गति धीमी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। रूसी अधिकारियों का दावा है कि इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के आयोजन और क्रियान्वयन के लिए किया गया है। साथ ही इसे रूसी नागरिकों को निशाना बनाकर धोखाधड़ी और जबरन वसूली के प्रमुख माध्यमों में से एक बताया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, सरकार समर्थित विकल्प ‘मैक्स’ नामक ऐप को रूस में बेचे जाने वाले सभी नए स्मार्टफोन और टैबलेट में पहले से इंस्टॉल करना अनिवार्य किया गया है। इस ऐप के जरिए उपयोगकर्ता संदेश भेजने, पैसे ट्रांसफर करने और ऑडियो-वीडियो कॉल करने जैसी सुविधाएं प्राप्त कर सकते हैं।

वॉट्सऐप की प्राइवेसी नीति पर छिड़ा विवाद… SC ने लगाई कड़ी फटकार… कहा- नागरिकों की निजता सर्वोपरि

नई दिल्ली। क्या वाकई आपकी चैट पूरी तरह सुरक्षित है? इस सवाल के बीच भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court.) ने मेटा (Meta) के स्वामित्व वाले इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म वॉट्सऐप (Instant messaging platform WhatsApp.) को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि डेटा साझा करने के नाम पर देश के नागरिकों की निजता से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने वॉट्सऐप और उसकी पैरेंट कंपनी मेटा की डेटा-शेयरिंग व्यवस्था और प्राइवेसी पॉलिसी पर गंभीर नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने दो टूक कहा कि भारतीय नागरिकों के प्राइवेसी अधिकारों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं होगा। वॉट्सऐप डेटा साझा करने की आड़ में निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल नहीं कर सकता। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ तीन फरवरी को मेटा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। गौरतलब है कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने वर्ष 2024 में वॉट्सऐप की 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था, जिसे नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) ने भी सही ठहराया। सुप्रीम कोर्ट ने वॉट्सऐप की तथाकथित “टेक इट ऑर लीव इट” प्राइवेसी नीति पर भी सवाल उठाए। अदालत का कहना है कि आम यूजर्स इन जटिल शर्तों को ठीक से समझ ही नहीं पाते। कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि कंपनी को भारतीय कानून और संविधान का पालन करना ही होगा, अन्यथा उसे देश छोड़ने तक का विकल्प चुनना पड़ सकता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भी याचिका में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया गया है। अगली सुनवाई 9 फरवरी को तय की गई है। क्या है वॉट्सऐप की 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी?वॉट्सऐप ने 8 फरवरी 2021 को अपनी नई प्राइवेसी पॉलिसी लागू की थी। कंपनी का दावा है कि उसका एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन पूरी तरह सुरक्षित है, यानी यूजर की चैट, वॉइस कॉल और तस्वीरें मेटा नहीं देख सकता। अगर रिसीवर का फोन अस्थायी रूप से बंद हो या वह ऑफलाइन हो, तो संदेश अधिकतम 30 दिनों तक वॉट्सऐप के सर्वर पर एन्क्रिप्टेड रूप में सुरक्षित रखे जाते हैं ताकि बाद में डिलीवरी हो सके। हालांकि चैट कंटेंट निजी रहता है, लेकिन वॉट्सऐप यूजर के “मेटाडाटा” तक पहुंच रखता है। यूजर्स के सामने केवल दो ही विकल्प होते हैं—इन शर्तों को स्वीकार करना या ऐप का इस्तेमाल बंद कर देना। एआई आधारित साइबर सुरक्षा और डेटा एनालिटिक्स कंपनी इनेफ्यू लैब्स के को-फाउंडर और सीईओ तरुण विज के मुताबिक, वॉट्सऐप मेटाडाटा और व्यवहारिक संकेतों का उपयोग करता है। इसमें यह जानकारी शामिल होती है कि यूजर किससे, कितनी बार और किस समय बात करता है, उसका डिवाइस, लोकेशन, प्रोफाइल फोटो, ग्रुप मेंबरशिप और कॉन्टैक्ट लिस्ट। इसी आधार पर यूजर प्रोफाइलिंग की जाती है। मेटा इस डेटा को इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब जैसे अन्य प्लेटफॉर्म्स के साथ साझा कर सकता है, जिससे डेटा लीक और संवेदनशील जानकारी के दुरुपयोग का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि यूरोप में यूरोपीय डेटा संरक्षण नियम (जीडीपीआर) के चलते ऐसी डेटा शेयरिंग पर सख्त सीमाएं हैं। तरुण विज बताते हैं कि वॉट्सऐप पर की गई गतिविधियां अन्य प्लेटफॉर्म्स पर दिखने वाले विज्ञापनों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में सुरक्षा इस बात पर निर्भर करती है कि यूजर अपनी कितनी जानकारी साझा करना चाहता है। पहले भी घिर चुका है वॉट्सऐपवॉट्सऐप ने अपनी सफाई में कहा है कि उसकी मैसेजिंग सेवा मुफ्त है और दो लोगों के बीच की निजी चैट्स को कंपनी नहीं पढ़ती। वॉट्सऐप और मेटा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि डेटा केवल यूजर की सहमति से ही साझा किया जाता है और प्राइवेसी पॉलिसी में बदलाव अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं। यह पहला मौका नहीं है जब वॉट्सऐप की नीतियों पर सवाल उठे हों। वर्ष 2021 में आयरलैंड के डेटा रेगुलेटर ने डेटा पारदर्शिता के नियमों के उल्लंघन पर वॉट्सऐप पर 225 मिलियन यूरो का जुर्माना लगाया था। जर्मनी की लाइपजिग रीजनल कोर्ट भी मेटा को दंडित कर चुकी है। अदालत ने कहा था कि मेटा के पास ऐसे टूल्स हैं जिनके जरिए वह यूजर्स के ऑनलाइन व्यवहार को ट्रैक कर टार्गेटेड विज्ञापनों से अरबों डॉलर कमाता है। सुरक्षा खामियों के आरोपपिछले वर्ष वॉट्सऐप के पूर्व सुरक्षा प्रमुख अत्ताउल्लाह बैग ने अमेरिका में मेटा के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि प्लेटफॉर्म पर रोजाना लाखों अकाउंट हैक हो रहे थे और सुरक्षा खामियों के चलते कर्मचारी यूजर्स का निजी डेटा देख सकते थे। बैग के अनुसार, बार-बार चेतावनी देने के बावजूद मेटा ने ठोस कदम नहीं उठाए। साल 2025 में शोधकर्ताओं ने “जीरो-क्लिक” हमलों का खुलासा किया, जिनमें बिना किसी क्लिक के वॉट्सऐप के जरिए आईफोन और मैक डिवाइस हैक कर लिए गए। इन हमलों में मैकओएस और आईओएस में इमेज प्रोसेसिंग की खामी और वॉट्सऐप के डिवाइस लिंकिंग फीचर की कमजोरी सामने आई। ऑस्ट्रिया के स्वतंत्र शोधकर्ताओं के एक समूह ने भी वॉट्सऐप में ऐसी कमी खोजी, जिसके जरिये 350 करोड़ फोन नंबर, प्रोफाइल फोटो, डिवाइस जानकारी, टाइमस्टैम्प और बिजनेस डिटेल्स तक पहुंच संभव हो गई थी। भारत में कानूनी स्थितिराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ अमित दुबे बताते हैं कि वर्ष 2019 में वॉट्सऐप के जरिए पेगासस स्पायवेयर ने केवल एक मिस्ड कॉल से कई भारतीयों के फोन हैक कर लिए थे। यह स्पायवेयर इजरायली कंपनी एनएसओ ग्रुप ने विकसित किया था। इस मामले में वॉट्सऐप ने एनएसओ ग्रुप के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। अमित दुबे के अनुसार, हाल के वर्षों में वॉट्सऐप ने चैट समरी और ऑटो-रिप्लाई जैसे एआई आधारित फीचर्स भी जोड़े हैं, जो यूजर की सहमति से सीमित परिस्थितियों में काम करते हैं। ऐसे में खासकर निजी, चिकित्सकीय या कानूनी बातचीत के दौरान सतर्क रहना जरूरी है। भारत में अभी बड़ी टेक कंपनियों को नियंत्रित करने के लिए सख्त और प्रभावी कानूनों की कमी है। डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) अधिनियम मौजूद है, लेकिन यह पूरी तरह 13 मई 2027 से लागू होगा। ऐसे में नागरिकों के पास अदालत का रास्ता ही मुख्य विकल्प बचता है। पुट्टस्वामी फैसले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही निजता को मौलिक अधिकार घोषित कर चुका है। यूजर क्या करें?वरिष्ठ सुप्रीम कोर्ट वकील पवन दुग्गल के अनुसार, आज कई सरकारी