क्रूज शिप पर फैला हंतावायरस, 3 की मौत; जहाज में 2 भारतीय भी मौजूद, WHO अलर्ट पर

नई दिल्ली। अटलांटिक महासागर में सफर कर रहे डच क्रूज शिप MV Hondius पर हंतावायरस संक्रमण के मामले सामने आने के बाद वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। अब तक जहाज पर 5 संक्रमित मरीजों की पुष्टि हुई है, जबकि 3 लोगों की मौत हो चुकी है। जहाज में 2 भारतीय नागरिक भी मौजूद बताए जा रहे हैं। WHO बोला- गंभीर मामला, लेकिन कोरोना जैसा खतरा नहींविश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने घटना को गंभीर बताया है, हालांकि फिलहाल आम लोगों के लिए बड़े खतरे की आशंका कम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि हंतावायरस कोरोना की तरह तेजी से इंसानों में नहीं फैलता। नीदरलैंड के लीडेन यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर की डॉक्टर करिन एलेन वेल्डकैंप ने कहा कि हंतावायरस का इंसान से इंसान में संक्रमण बेहद सीमित होता है और इसका फैलाव कोविड-19 जितना तेज नहीं है। मरीजों को आइसोलेशन में रखा गयाजहाज पर संक्रमित पाए गए लोगों को अलग आइसोलेशन में रखा गया है। मेडिकल टीम लगातार निगरानी कर रही है। डॉक्टरों के मुताबिक, मरीजों में लक्षण खत्म होने और रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद ही आइसोलेशन हटाया जाएगा। विशेषज्ञों ने बताया कि हंतावायरस का इन्क्यूबेशन पीरियड लंबा हो सकता है। कुछ मामलों में लक्षण 6 हफ्ते तक बाद में भी सामने आ सकते हैं। इसी वजह से संक्रमितों और संपर्क में आए लोगों को लंबे समय तक क्वारंटाइन में रखा जा रहा है। एंडीज स्ट्रेन का शकWHO के अनुसार मौत के मामलों में एंडीज स्ट्रेन होने की आशंका है। यह हंतावायरस का ऐसा प्रकार है, जो कुछ स्थितियों में इंसान से इंसान में भी फैल सकता है। यह स्ट्रेन मुख्य रूप से दक्षिण अमेरिका के अर्जेंटीना और चिली में पाया जाता है। जांच में पता चला है कि शुरुआती संक्रमित दंपती यात्रा से पहले अर्जेंटीना, चिली और उरुग्वे में बर्ड वॉचिंग ट्रिप पर गए थे, जहां वायरस फैलाने वाले चूहों की प्रजातियां पाई जाती हैं। कई देशों को अलर्ट170 यात्रियों और 71 क्रू सदस्यों वाले इस जहाज ने मार्च में अर्जेंटीना से यात्रा शुरू की थी और अब स्पेन के कैनरी आइलैंड की ओर बढ़ रहा है। WHO ने ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा, जर्मनी और सिंगापुर समेत 12 देशों को अलर्ट जारी किया है।क्रूज कंपनी और स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
क्रूज शिप पर हंतावायरस का अलर्ट: 3 की मौत, कई संदिग्ध; WHO ने दी राहत घबराने की जरूरत नहीं

नई दिल्ली। अटलांटिक महासागर में चल रहे एमवी होंडियस क्रूज शिप पर हंतावायरस संक्रमण के मामलों ने स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। अब तक 3 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि एक ब्रिटिश नागरिक गंभीर हालत में ICU में भर्ती है। क्या है स्थिति?क्रूज ऑपरेटर के अनुसार, मृतकों में एक डच दंपती और एक जर्मन यात्री शामिल हैं। कुछ मामलों में हंतावायरस की पुष्टि हुई है, जबकि अन्य संदिग्ध मामलों की जांच जारी है।69 वर्षीय एक ब्रिटिश नागरिक को जोहान्सबर्ग के अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत गंभीर लेकिन स्थिर बताई जा रही है। और कितने लोग जांच के दायरे मेंएक ब्रिटिश क्रू मेंबर समेत 5 अन्य संदिग्ध मामलों की जांच की जा रही है। इसके अलावा दो क्रू मेंबर्स में सांस से जुड़ी समस्या के लक्षण पाए गए हैं, हालांकि उनमें वायरस की पुष्टि नहीं हुई है। WHO का बयानविश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस मामले को लेकर कहा है कि हंतावायरस एक दुर्लभ संक्रमण है और यह आमतौर पर इंसानों के बीच आसानी से नहीं फैलता। इसलिए आम जनता के लिए खतरा फिलहाल कम है और किसी तरह के यात्रा प्रतिबंध की जरूरत नहीं है। जहाज पर सतर्कताक्रूज शिप पर 23 देशों के 149 यात्री सवार हैं। डच अधिकारी गंभीर मरीजों को निकालने (मेडिकल इवैक्युएशन) की तैयारी कर रहे हैं।पाकिस्तान का बड़ा फैसला: 50 साल बाद फिर शुरू हुआ शराब निर्यात। पाकिस्तान ने करीब पांच दशकों बाद शराब के निर्यात को दोबारा शुरू कर दिया है। देश की एकमात्र स्थानीय ब्रेवरी मरी ब्रेवरी ने अप्रैल से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई शुरू कर दी है। किन देशों को भेजी जा रही शराब?कंपनी के अनुसार यूनाइटेड किंगडम, जापान, पुर्तगाल और थाईलैंड जैसे देशों को बीयर और अन्य अल्कोहलिक पेय भेजे जा रहे हैं।हालांकि यह निर्यात केवल उन देशों तक सीमित है जो ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) के सदस्य नहीं हैं। क्या है इसके पीछे की वजह?विशेषज्ञों के मुताबिक, पाकिस्तान यह कदम विदेशी मुद्रा अर्जन बढ़ाने और वैश्विक बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए उठा रहा है।एक ओर जहां स्वास्थ्य को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान का यह आर्थिक कदम अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई रणनीति का संकेत दे रहा है।
समुद्र में मौत का साया: क्रूज जहाज पर फैला रहस्यमयी हंतावायरस, 3 की मौत के बाद अफ्रीका तट पर मचा हड़कंप

नई दिल्ली। अटलांटिक महासागर में एक क्रूज शिप पर हंतावायरस संक्रमण का संदिग्ध मामला सामने आया है। इसमें तीन लोगों की मौत हो गई है और कम से कम तीन लोग बीमार हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और दक्षिण अफ्रीका स्वास्थ्य विभाग ने रविवार को इसकी पुष्टि की। MV होंडियस नाम के इस क्रूजशिप को फिलहाल अफ्रीकी देश केप वर्डे की राजधानी प्राया में रोका गया है। अभी यात्रियों को उतरने की अनुमति नहीं मिली है। यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि संक्रमण फैलने के खतरे को नियंत्रित किया जा सके। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, जहाज पर 6 लोगों में संक्रमण जैसे लक्षण मिले हैं। इनमें से एक मामले की पुष्टि लैब में हो चुकी है। एक मरीज दक्षिण अफ्रीका के अस्पताल में आईसीयू में भर्ती है, जबकि दो को जहाज से निकालने की तैयारी की जा रही है। यह भी अभी पता नहीं है कि सभी बीमार लोग हंतावायरस से संक्रमित हैं या नहीं। यह बीमारी आखिर कैसे और कहां से फैली है, इसकी जांच चल रही है।7 हफ्ते में कई देशों से गुजरा क्रूज नीदरलैंड के झंडे वाला यह क्रूज शिप 20 मार्च को अर्जेंटीना के उशुआइया से रवाना हुआ था। इसके बाद यह दक्षिणी ध्रुव के आसपास के इलाकों में गया और फिर अटलांटिक पार करते हुए यूरोप की ओर बढ़ रहा था। इसे सबसे आखिर में स्पेन के कैनरी द्वीप तक पहुंचना था, जो अफ्रीका के पास अटलांटिक में स्थित एक प्रमुख पर्यटन क्षेत्र है। जहाज में कुल 170 यात्री और 71 क्रू सदस्य मौजूद हैं। इनमें एक डॉक्टर भी शामिल है। पहला मृतक 70 साल का एक व्यक्ति था, जिसकी मौत जहाज पर ही हो गई थी। वह अपनी पत्नी के साथ इस यात्रा पर था। इसके बाद उसका शव दक्षिण अटलांटिक में स्थित सेंट हेलेना में उतारा गया। उसकी पत्नी बाद में दक्षिण अफ्रीका पहुंचीं, जहां से उन्हें अपने देश नीदरलैंड लौटना था। लेकिन एयरपोर्ट पर ही उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, वह बेहोश हो गईं और बाद में अस्पताल में उनकी मौत हो गई। क्रूज चलाने वाली कंपनी ओशनवाइड एक्सपेडिशंस ने बताया कि तीसरे मृतक का शव अभी भी जहाज पर केप वर्डे में मौजूद है। संक्रमण कैसे फैला, इसकी जांच की जा रही सबसे बड़ा सवाल यह है कि संक्रमण आया कहां से। अर्जेंटीना के जिस इलाके से जहाज रवाना हुआ, वहां हंतावायरस का कोई मामला दर्ज नहीं है। जहाज ऐसे क्षेत्रों में भी नहीं गया जहां यह वायरस आम है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि संक्रमण जहाज के अंदर हो सकता है। चूहों के संपर्क में आने से फैलता है हंतावायरस सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल के मुताबिक, हंतावायरस व्यक्ति के चूहे या गिलहरी के संपर्क में इंसान के आने से फैलता है। यह मुख्य रूप से चूहों में होता है। इसके कारण चूहों में कोई बीमारी नहीं होती, लेकिन इंसानों की मौत हो जाती है। हंतावायरस का 1993 में पहली बार पता चला था। तब अमेरिका में एक कपल संक्रमित होने के कारण मर गया था। इसके बाद कुछ ही महीनों में इस बीमारी से 600 लोगों की मौत हो गई थी। चूहे के यूरिन, मल और लार के संपर्क में आने पर इंसान संक्रमित हो जाते हैं। इसकी वजह से पल्मोनरी सिंड्रोम नाम की बीमारी होती है।3 तरीके से फैलता है हंतावायरस पहला: अगर वायरस का वाहक चूहा किसी इंसान को काट ले, हालांकि ऐसे मामले कम ही सामने आते हैं। दूसरा : किसी जगह या चीज पर मौजूद चूहे का मल-मूत्र या लार के संपर्क में इंसान आता है और अपने नाक-मुंह को छूता है। तीसरा : अगर इंसान ऐसी चीज खाता है जिस पर चूहे का मल-मूत्र या लार मौजूद हो। हंतावायरस कोरोना से भी ज्यादा खतरनाक वैज्ञानिकों के मुताबिक, हंतावायरस हवा के जरिए नहीं फैलता फिरभी कोरोना वायरस के मुकाबले ज्यादा खतरनाक है। इस बीमारी का कोई खास इलाज नहीं है, सिर्फ लक्षणों के आधार पर इलाज किया जाता है। गंभीर मरीजों को सांस लेने में मदद के लिए वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है। इस बीमारी में करीब 38% मरीजों की मौत हो जाती है। अगर मरीज बुजुर्ग हो या पहले से कमजोर हो, तो खतरा और बढ़ जाता है। वैज्ञानिकों ने अब तक हंतावायरस के 5 स्ट्रेन खोजे हैं, इनमें से सबसे ज्यादा खतरनाक अराराक्वॉरा वायरस है जिसका इन्फेक्शन होने पर डेथ रेट 54% पाया गया है। वही, एक दूसरा स्ट्रेन सिन नॉम्ब्रे वायरस है जिसके केस में डेथ रेट 40% है। तीसरा स्ट्रेन हंतान वायरस होता है। इसका डेथ रेट 5-10% के बीच है। इन तीनों में से किसी से इन्फेक्शन होने पर मौत का खतरा कोरोना की तुलना में कहीं ज्यादा हो सकता है। अब तक इसकी वैक्सीन तैयार नहीं हो सकी है और न ही कोई तय इलाज है। ऐसे मरीजों को विशेष केयर की जरूरत होती है और ऑक्सीजन थैरेपी दी जाती है। जितनी जल्दी मामला पकड़ में आता है उतना ही बेहतर है। अगर बीमारी गंभीर हो जाए, तो करीब 7–10 दिनों के अंदर मरीज की मौत हो सकती है। पिछले साल अमेरिकी अभिनेता की पत्नी की मौत हुई थी यह बीमारी पिछले साल भी चर्चा में आई थी, जब अमेरिकी अभिनेता जीन हैकमैन की पत्नी बेट्सी अराकावा की इससे मौत हुई थी। दोनों 26 फरवरी को अपने घर सांता फे में मृत पाए गए थे। उनके घर के आसपास चूहों के निशान भी मिले थे। बाद में पता चला कि 95 साल के हैकमैन की मौत 18 फरवरी को दिल की बीमारी से हुई थी। वहीं अराकावा का शव बाथरूम में मिला। अराकावा अपनी मौत से पहले लगातार इंटरनेट पर फ्लू जैसे लक्षण, सांस लेने के तरीके और कोविड जैसी बीमारियों के बारे में जानकारी खोज रही थीं। अमेरिका में 1993 से लेकर 2023 तक सिर्फ 890 मामले सामने आए हैं। ज्यादातर केस न्यू मेक्सिको राज्य में मिले हैं, जहां जीन हैकमैन और उनकी पत्नी रहते थे।