PM Fasal Bima Yojana: अब जंगली जानवरों से बर्बाद फसल पर भी मिलेगा मुआवजा, किसानों को बड़ी राहत

नई दिल्ली। खेती-किसानी में मौसम के साथ-साथ जंगली जानवरों का खतरा भी किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन चुका है। कई बार खेतों में घुसकर नीलगाय, जंगली सूअर और दूसरे वन्य जीव पूरी फसल बर्बाद कर देते हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। अब किसानों के लिए राहत की खबर है। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बड़ा बदलाव करते हुए जंगली जानवरों और जलभराव से खराब होने वाली फसलों को भी बीमा कवर में शामिल करने का फैसला किया है। केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने जानकारी दी कि खरीफ 2026 सीजन से यह नई व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके तहत अगर किसी किसान की फसल जंगली जानवरों द्वारा नुकसान पहुंचाने या भारी बारिश के कारण खेतों में पानी भरने से खराब होती है, तो उसे भी बीमा योजना के तहत मुआवजा दिया जाएगा। लंबे समय से किसान इस तरह के नुकसान को योजना में शामिल करने की मांग कर रहे थे। सरकार के मुताबिक, नई व्यवस्था का फायदा देशभर के हजारों किसानों को मिलेगा। अब तक फसल बीमा योजना में प्राकृतिक आपदाओं और मौसम से होने वाले नुकसान को ही प्राथमिकता दी जाती थी, लेकिन अब खेती को प्रभावित करने वाले दूसरे बड़े जोखिमों को भी शामिल किया जा रहा है। इससे किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिलने की उम्मीद बढ़ी है। कैसे मिलेगा बीमा क्लेम?नई गाइडलाइन के अनुसार, फसल खराब होने की स्थिति में किसान को 72 घंटे के भीतर इसकी सूचना देनी होगी। किसान मोबाइल ऐप या संबंधित पोर्टल के जरिए शिकायत दर्ज कर सकेंगे। इसके साथ खेत की जियो-टैग फोटो भी अपलोड करनी होगी, ताकि नुकसान की पुष्टि की जा सके। इसके बाद अधिकारी मौके पर जांच करेंगे और रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा जारी किया जाएगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि किन जंगली जानवरों से हुए नुकसान को योजना में शामिल किया जाएगा और किन जिलों में यह सुविधा लागू होगी, इसका फैसला संबंधित राज्य सरकारें करेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उन किसानों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है, जो हर साल जंगली जानवरों या जलभराव के कारण भारी नुकसान झेलते हैं। सरकार का कहना है कि खेती को सुरक्षित और किसानों की आय को मजबूत बनाने के लिए योजनाओं में लगातार सुधार किए जा रहे हैं और यह कदम उसी दिशा में अहम माना जा रहा है।
कटनी में शिवलिंग पर बाघ का अनोखा मूवमेंट, वन विभाग ने ग्रामीणों को किया अलर्ट

कटनी । कटनी जिले की ढीमरखेड़ा तहसील के सडार जंगल से एक चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है। वीडियो में दिख रहा है कि एक बाघ प्राचीन शिवलिंग के पास जाकर काफी देर तक अपना सिर और जीभ रगड़ रहा है। घटना स्थल गांव से महज 400 मीटर की दूरी पर है जिससे आसपास के लोगों में चिंता और चर्चा दोनों बढ़ गई हैं। स्थानीय लोग इस दृश्य को आस्था से जोड़कर देख रहे हैं लेकिन वन विभाग का कहना है कि यह बाघ का सामान्य व्यवहार है। वन विभाग के अनुसार जंगली बाघ अक्सर अपनी गंध छोड़ने इलाके पर अधिकार जताने या खुजली मिटाने के लिए पत्थर या अन्य ठोस सतहों से अपना शरीर रगड़ते हैं। ऐसे मूवमेंट का आस्था से जोड़ना गलत नहीं है लेकिन यह जानवर की आदत और इलाके में उसके क्षेत्रीय व्यवहार का हिस्सा है। वन विभाग ने ग्रामीणों को किया अलर्ट पान उमरिया रेंज के अधिकारी अजय मिश्रा ने बताया कि गश्ती दल लगातार क्षेत्र में निगरानी कर रहा है। उन्होंने ग्रामीणों को जंगल की ओर न जाने और सतर्क रहने की सलाह दी। सडार और आसपास के क्षेत्रों में बाघों की आवाजाही पहले भी देखी जाती रही है लेकिन इंसानी बस्ती के इतने करीब यह दृश्य सामने आने के कारण मामला चर्चा में है। वन विभाग का कहना है कि बाघों का इस तरह से शिवलिंग या पत्थर पर सिर रगड़ना सामान्य व्यवहार है और इसमें किसी प्रकार की आस्था या अलौकिक घटना शामिल नहीं होती। हालांकि ग्रामीणों के लिए यह नजारा डरावना भी हो सकता है। अधिकारी ने चेतावनी दी है कि ग्रामीण जंगल में अकेले न जाएं और बच्चों को भी जंगल की ओर जाने से रोका जाए। सडार जंगल कटनी जिले के लिए जंगली जीवन का महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां बाघ तेंदुआ और अन्य जंगली जानवरों की आवाजाही रहती है। वन विभाग की नियमित गश्ती और निगरानी के कारण अब तक किसी भी अप्रिय घटना की जानकारी नहीं मिली है। बावजूद इसके गांव के पास बाघ का दिखना स्थानीय लोगों में सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ा रहा है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया है। लोग इसे देख कर अलग अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं कुछ लोग इसे आस्था का संकेत मान रहे हैं जबकि विशेषज्ञ इसे जानवरों की प्राकृतिक आदत के रूप में बता रहे हैं। वन विभाग ने लोगों से अनुरोध किया है कि वे जंगल में जाने से बचें बाघ के संभावित मूवमेंट को नजरअंदाज न करें और यदि किसी ने बाघ देखा तो तुरंत नजदीकी वन विभाग को सूचित करें। इस तरह की सतर्कता न केवल मानव सुरक्षा के लिए जरूरी है बल्कि जंगली जानवरों के संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण है।