BTR में बाघ का हमला: तेंदूपत्ता तोड़ने गए युवक गंभीर घायल, शहडोल रेफर

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के उमरिया जिले स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (BTR) के मानपुर बफर परिक्षेत्र में मंगलवार सुबह एक दर्दनाक घटना सामने आई। तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए जंगल गए एक युवक पर बाघ ने अचानक हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। यह घटना मानपुर बीट के कक्ष क्रमांक पीएफ 385 स्थित अमहाई नाला के पास हुई, जहां सुबह के समय ग्रामीण तेंदूपत्ता तोड़ने के लिए पहुंचे थे। युवक के सिर और शरीर पर गंभीर चोटेंघायल युवक की पहचान धर्मेंद्र के रूप में हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जंगल में काम करते समय अचानक बाघ ने उस पर हमला कर दिया। हमले में धर्मेंद्र के सिर में गंभीर चोटें आईं, जबकि उसके शरीर पर बाघ के दांतों और पंजों के कई गहरे निशान पाए गए। हमले के बाद मौके पर मौजूद अन्य ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई और लोग अपनी जान बचाकर जंगल से बाहर भागे। तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, शहडोल रेफरघटना की जानकारी मिलते ही बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की टीम मौके पर पहुंची और घायल युवक को तुरंत मानपुर अस्पताल ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उसकी हालत गंभीर देखते हुए उसे मेडिकल कॉलेज शहडोल रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों के अनुसार युवक की स्थिति गंभीर बनी हुई है और उसे विशेष निगरानी में रखा गया है। वन विभाग ने बढ़ाई निगरानीबांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के सहायक संचालक भरा गायकवाड़ ने बताया कि घटना के बाद वन विभाग की टीम लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। घायल के इलाज में हर संभव मदद की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में ग्रामीणों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गश्त और निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति न हो। यह घटना एक बार फिर जंगल क्षेत्रों में काम करने वाले ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। वन विभाग की सतर्कता के बावजूद मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं।
बांधवगढ़ में बाघ शावक की दर्दनाक मौत जंगल के भीतर संघर्ष की आशंका ने बढ़ाई चिंता

उमरिया । मध्य प्रदेश के उमरिया स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से एक बार फिर चिंताजनक खबर सामने आई है जहां पनपथा कोर क्षेत्र की बीट बघडो में एक बाघ शावक का शव मिलने से वन महकमे में हलचल मच गई है। यह घटना न केवल वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों पर सवाल खड़े करती है बल्कि बाघों के बीच बढ़ते संघर्ष की ओर भी संकेत करती है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार मृत शावक का शव अत्यंत क्षतविक्षत अवस्था में पाया गया जिससे यह स्पष्ट होता है कि उसकी मौत सामान्य परिस्थितियों में नहीं हुई। प्रारंभिक जांच में यह संभावना जताई जा रही है कि शावक की मौत किसी अन्य बाघ के साथ हुए आपसी संघर्ष के कारण हुई है जिसे वैज्ञानिक भाषा में इंट्रास्पेसिफिक फाइट कहा जाता है। जंगल के भीतर क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर बाघों के बीच इस प्रकार के संघर्ष असामान्य नहीं माने जाते लेकिन हाल के समय में ऐसी घटनाओं की बढ़ती संख्या ने चिंता जरूर बढ़ा दी है। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और पूरे क्षेत्र को घेरकर गहन जांच शुरू की गई। डाग स्क्वाड और मेटल डिटेक्टर की मदद से हर संभावित पहलू की बारीकी से जांच की गई ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस घटना में किसी प्रकार का मानवीय हस्तक्षेप या शिकार शामिल नहीं है। जांच के दौरान ऐसे कोई संकेत नहीं मिले जिससे यह प्रतीत हो कि शावक की मौत के पीछे अवैध शिकार या बाहरी गतिविधि जिम्मेदार है। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी की गाइडलाइंस का पालन करते हुए शावक के शव का मौके पर ही दाह संस्कार कर दिया गया ताकि किसी भी प्रकार के संक्रमण या अन्य खतरे से बचा जा सके। वन विभाग ने इस पूरी प्रक्रिया को निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत अंजाम दिया और सभी आवश्यक दस्तावेजीकरण भी किया गया है। घटना के बाद वन विभाग ने इलाके में सर्चिंग अभियान तेज कर दिया है। विभागीय हाथियों की मदद से आसपास के घने जंगलों में व्यापक तलाशी अभियान चलाया जा रहा है ताकि अन्य बाघों और शावकों की स्थिति का पता लगाया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि वे हर संभावित खतरे पर नजर बनाए हुए हैं और किसी भी असामान्य गतिविधि को गंभीरता से लिया जा रहा है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व देश के प्रमुख टाइगर रिजर्व में से एक है जहां बाघों की अच्छी खासी आबादी पाई जाती है। हालांकि हाल के वर्षों में शावकों की मौत की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं जो वन्यजीव प्रबंधन के लिए एक चुनौती बनती जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती आबादी के कारण क्षेत्रीय संघर्ष की घटनाएं बढ़ सकती हैं जिससे कमजोर शावक अधिक प्रभावित होते हैं। वन विभाग पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रहा है और इसकी रिपोर्ट जल्द ही नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी को भेजी जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर जंगल के भीतर की जटिल वास्तविकताओं को उजागर कर दिया है जहां जीवन और संघर्ष साथ साथ चलते हैं और संरक्षण के प्रयासों के बीच कई अनदेखी चुनौतियां सामने आती रहती हैं।