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Panna Tiger Reserve : पन्ना टाइगर रिजर्व में पर्यटकों को मिला दुर्लभ नजारा, बाघिन P-142 अपने शावकों के साथ जंगल में करती दिखी अठखेलियां

 Panna Tiger Reserve : मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में वन्यजीव प्रेमियों को एक ऐसा दुर्लभ और मनमोहक दृश्य देखने को मिला जिसने सफारी के पूरे अनुभव को यादगार बना दिया। हिनौता क्षेत्र में जंगल सफारी पर निकले पर्यटकों को उस समय रोमांच और उत्साह का अनुभव हुआ जब उन्हें बाघिन P-142 अपने दो छोटे शावकों के साथ प्राकृतिक वातावरण में विचरण करते हुए दिखाई दी। यह दृश्य न केवल रोमांचकारी था बल्कि जंगल की जीवंतता और उसमें चल रही प्राकृतिक प्रक्रियाओं की एक सुंदर झलक भी प्रस्तुत करता है। सफारी के दौरान अचानक सामने आए इस दृश्य ने पर्यटकों को पूरी तरह उत्साहित कर दिया। बाघिन अपने शावकों के साथ बेहद शांत और सतर्क अवस्था में नजर आई, जबकि नन्हे शावक अपने मासूम और चंचल व्यवहार से सभी का ध्यान आकर्षित कर रहे थे। कभी वे मां के करीब जाकर स्नेह जताते दिखे तो कभी झाड़ियों के बीच छिपकर खेलते और अपने प्राकृतिक व्यवहार को समझने की कोशिश करते नजर आए। यह पूरा दृश्य जंगल में जीवन के स्वाभाविक विकास और सीखने की प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से दर्शा रहा था। Bhind Officials Get Notices : सीएम हेल्पलाइन की अनदेखी पड़ी भारी, तीन अधिकारियों को नोटिस जारी इस अनोखे अनुभव को पर्यटकों ने कैमरों में कैद कर लिया। तस्वीरों और वीडियो में बाघिन की सतर्कता, शावकों की मासूम हरकतें और जंगल का शांत वातावरण एक साथ देखने को मिला। कुछ समय तक पर्यटकों के सामने रहने के बाद बाघिन धीरे धीरे अपने शावकों को लेकर घने जंगल की ओर बढ़ गई और देखते ही देखते सभी दृश्य से ओझल हो गए। यह क्षण पर्यटकों के लिए लंबे समय तक याद रहने वाला अनुभव बन गया। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित किया है कि सुरक्षित और संतुलित प्राकृतिक वातावरण में वन्यजीव न केवल सुरक्षित रहते हैं बल्कि अपनी प्राकृतिक जीवनशैली को पूरी स्वतंत्रता के साथ जीते हैं। पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या और उनका सफल प्रजनन इस क्षेत्र की मजबूत पारिस्थितिकी व्यवस्था का संकेत देता है। यह संरक्षण प्रयासों की सफलता को भी दर्शाता है, जहां प्रकृति और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। ऐसे दृश्य यह संदेश देते हैं कि जब प्राकृतिक आवास सुरक्षित रहते हैं तो वन्यजीव अपनी पूरी सहजता के साथ जीवन जीते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रकृति का संतुलन बनाए रखने में योगदान देते हैं।

उज्जैन में बनेगा देश का दूसरा ‘वनतारा’: 300 करोड़ की लागत से आधुनिक जू और टाइगर सफारी, सिंहस्थ-2028 से पहले पहला फेज पूरा करने की तैयारी

उज्जैन । धर्मनगरी उज्जैन जल्द ही एक और बड़े पर्यटन प्रोजेक्ट का केंद्र बनने जा रही है। मध्यप्रदेश सरकार यहां देश का दूसरा वनतारा विकसित करने की तैयारी कर रही है। यह परियोजना मुख्यमंत्रीमोहन यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में शामिल है और इसे गुजरात के जामनगर में बने प्रसिद्ध वंतारा पशु बचाव और संरक्षण केंद्र की तर्ज पर तैयार किया जाएगा। इस आधुनिक वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट DPR तैयार की जा रही है। जानकारी के अनुसार वनतारा की विशेषज्ञ टीम पहले ही उज्जैन का दौरा कर प्रारंभिक सर्वे कर चुकी है। अब परियोजना को अंतिम रूप देने के लिए तकनीकी और पर्यावरणीय पहलुओं पर काम किया जा रहा है। यह प्रोजेक्ट शहर के मक्सी रोड क्षेत्र के नौलखी क्षेत्र में विकसित किया जाएगा, जहां इसके लिए 100 हेक्टेयर से अधिक भूमि चिन्हित की गई है। प्रस्तावित वनतारा प्रोजेक्ट में केवल एक सामान्य चिड़ियाघर ही नहीं बल्कि वन्यजीवों के संरक्षण, उपचार और पुनर्वास के लिए आधुनिक सुविधाओं से लैस रेस्क्यू सेंटर भी बनाया जाएगा। यहां घायल या संकटग्रस्त वन्यजीवों का इलाज और देखभाल की जाएगी। साथ ही प्रदेश के विभिन्न जिलों और संभागों से रेस्क्यू किए गए वन्यजीवों को यहां सुरक्षित रखा जा सकेगा। परियोजना को पर्यटन के लिहाज से भी बेहद आकर्षक बनाया जाएगा। यहां टाइगर सफारी, जंगल सफारी, नाइट कैंपिंग और प्रकृति से जुड़े कई एडवेंचर एक्टिविटी विकसित की जाएंगी। पर्यटक दिन और रात दोनों समय जंगल सफारी का अनुभव ले सकेंगे, जो इस परियोजना की खास विशेषता होगी। इससे उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक नया आकर्षण मिलेगा। सरकार की योजना है कि इस प्रोजेक्ट के पहले चरण को सिंहस्थ कुंभ मेला 2028 से पहले पूरा कर लिया जाए, ताकि उस समय उज्जैन आने वाले लाखों श्रद्धालु और पर्यटक इस नए पर्यटन स्थल का लाभ उठा सकें। शुरुआती चरण में करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से इस परियोजना को विकसित किया जाएगा। इसमें 300 से अधिक देशी और विदेशी प्रजातियों के वन्यजीवों को रखने की व्यवस्था की जाएगी। राज्य सरकार का मानना है कि इस प्रोजेक्ट से उज्जैन की पहचान केवल धार्मिक नगरी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह एक प्रमुख पर्यटन और वाइल्डलाइफ डेस्टिनेशन के रूप में भी विकसित होगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पर्यटन उद्योग को भी नया बढ़ावा मिलेगा। धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध उज्जैन में इस तरह की आधुनिक पर्यटन परियोजना विकसित होने से शहर के विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

एमपी सरकार के कैलेंडर में इम्पाला फोटो विवाद, दिग्विजय सिंह बोले- भारत में नहीं मिलता यह हिरण

नई दिल्ली। मध्यप्रदेश सरकार के सरकारी कैलेंडर में छपी हिरण की तस्वीर ने सियासी तूफ़ान खड़ा कर दिया है।उन्होंने सवाल उठाया कि शासकीय प्रकाशनों में चित्रों का चयन सोच-समझकर क्यों नहीं किया गया। पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने कहा कि प्रदेश की वन संपदा बहुत समृद्ध है और बावजूद इसके गलत चित्र का चयन किया गया, जिससे वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन के स्तर पर चिंता है। कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने कहा कि प्रशासन इतना निरंकुश हो गया है कि उसे यह भी पता नहीं कि सरकारी प्रकाशनों में क्या छाप रहा है। वहीं, कांग्रेस विधायक राजन मंडलोई ने इसे हास्यास्पद बताते हुए कहा कि भारत में शेर, चीते और अन्य वन्य जीव हैं, जिनकी फोटो कैलेंडर में लगाई जा सकती थी। कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि कांग्रेस केवल नकारात्मक राजनीति कर रही है। बीजेपी के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष ऊषा अग्रवाल ने भी ट्वीट किया कि कांग्रेस और दिग्विजय सिंह भ्रम फैलाने की आदत छोड़ें। इस विवाद ने सरकार के सरकारी प्रकाशनों की विश्वसनीयता और चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि राज्य सरकार इस पर क्या स्पष्टीकरण देती है और भविष्य में चित्र चयन की प्रक्रिया में बदलाव करती है या नहीं।

तीन दिवसीय सर्वे 22 फरवरी तक जारी, गिद्ध संरक्षण नीति सुदृढ़ करने की तैयारी

इंदौर । इंदौर वनमंडल में गिद्धों की संख्या का आकलन करने के लिए वन विभाग ने तीन दिवसीय शीतकालीन गणना अभियान शुरू किया है यह अभियान 20 फरवरी से शुरू होकर 22 फरवरी तक चलेगा पहले दिन कुल 97 गिद्ध दर्ज किए गए, जिनमें सभी Egyptian Vulture प्रजाति के थे प्रदेशव्यापी स्तर पर संचालित यह सर्वे गिद्ध संरक्षण रणनीति तय करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है चोरल रेंज में सर्वाधिक गिद्धवन अधिकारियों के अनुसार खराब मौसम और कुछ क्षेत्रों में हल्की वर्षा के बावजूद निर्धारित समय पर सर्वे पूरा किया गया इंदौर, महू, मानपुर और चोरल रेंज में केवल बैठे हुए गिद्धों की गणना की गई क्योंकि विभागीय नियमों के तहत यही आंकड़े मान्य माने जाते हैं रेंजवार आंकड़ों में चोरल क्षेत्र में सर्वाधिक 89 गिद्ध दर्ज किए गए जबकि इंदौर रेंज में 4 और महू और मानपुर में 2-2 गिद्ध देखे गए सर्वे की प्रक्रिया और तकनीकी मददगणना के लिए 38 चिन्हित स्थानों पर सुबह 6 से 8 बजे के बीच 16 टीमों ने सर्वे किया प्रमुख निगरानी बिंदुओं में तिंछा फाल, देवगुराड़िया ट्रेंचिंग ग्राउंड, पातालपानी और पेडमी शामिल थे इस बार कुछ स्थानों पर डेटा संग्रह के लिए Epicollect5 मोबाइल एप का उपयोग किया गया है जिससे आंकड़ों की पारदर्शिता और सटीकता बढ़ने की उम्मीद है गिद्धों की गिरती संख्या और संरक्षण की आवश्यकतावन विभाग का कहना है कि गिद्ध पर्यावरण के प्राकृतिक क्लीनर माने जाते हैं लेकिन बीते वर्षों में उनकी संख्या में लगातार गिरावट दर्ज हुई पशु उपचार में प्रयुक्त डाइक्लोफेनाक जैसी दवाओं के दुष्प्रभाव इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं इसी पृष्ठभूमि में विभाग ने जागरूकता अभियान और निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया है पिछले वर्षों की तुलनापिछले वर्षों के आंकड़ों के अनुसार 2025 में इंदौर क्षेत्र में 86 गिद्ध दर्ज हुए थे जबकि 2023 में 114 और 2021 में 117 गिद्ध पाए गए इस बार शुरुआती संख्या अपेक्षाकृत बेहतर मानी जा रही है हालांकि अंतिम आंकड़े अभियान समाप्त होने के बाद जारी होंगे भविष्य की योजना और संरक्षण नीतिवन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह सर्वे केवल गणना तक सीमित नहीं है बल्कि संरक्षण नीति को सुदृढ़ करने की दिशा में अहम कदम है नियमित निगरानी से आवास संरक्षण, भोजन स्रोत और मानवीय हस्तक्षेप से जुड़े जोखिमों की पहचान संभव होगी यह अभियान सार्वजनिक हित से जुड़ी महत्वपूर्ण पर्यावरणीय पहल के रूप में देखा जा रहा है