लखनऊ में राजनीतिक तनाव: लखनऊ में बीजेपी और सपा समर्थकों के बीच बढ़ा टकराव

नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शनिवार को राजनीतिक माहौल अचानक गरमा गया, जब सरोजनी नगर से बीजेपी विधायक Rajeshwar Singh के समर्थक सड़क पर उतर आए और सपा सांसद R.K. Chaudhary के आवास का घेराव कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने 1090 चौराहे से जुलूस निकालते हुए मुंशी पुलिया स्थित सांसद आवास तक पहुंचकर जोरदार नारेबाजी की। इस दौरान “अखिलेश यादव मुर्दाबाद”, “राहुल गांधी मुर्दाबाद” और “प्रियंका गांधी होश में आओ” जैसे नारे लगाए गए, जिससे इलाके में तनावपूर्ण माहौल बन गया। महिला आरक्षण मुद्दा बना प्रदर्शन की वजहप्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं का कहना था कि नारी वंदन अधिनियम और महिला आरक्षण को लेकर सपा सांसद के बयान आपत्तिजनक हैं। इसी के विरोध में यह घेराव किया गया। महिला समर्थकों ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया और “आरके चौधरी शर्म करो” जैसे नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि महिलाओं के अधिकारों को लेकर विपक्षी दलों का रवैया गलत है। सांसद के आवास पर मौजूदगी और प्रतिक्रियाविवाद के बीच सपा सांसद अपने आवास पर मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि वे प्रदर्शन करने आए लोगों का सम्मान करेंगे और सरोजनी नगर उनका क्षेत्र है। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं का सम्मान करना उनकी प्राथमिकता है, चाहे वे किसी भी दल से हों। सांसद ने नारी वंदन अधिनियम पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इसे लागू करने में सरकार की मंशा पर सवाल उठते हैं और महिलाओं के आरक्षण के मुद्दे पर गंभीरता से काम नहीं हो रहा है। प्रदर्शन में बढ़ा राजनीतिक टकरावप्रदर्शन के दौरान समर्थकों ने गाड़ियों के काफिले के साथ 1090 चौराहे से मुंशी पुलिया तक मार्च किया। कई जगहों पर नारेबाजी और भीड़ के कारण तनाव की स्थिति बनी रही। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिलाने के मुद्दे पर विपक्षी दलों को जवाब देना होगा। दोनों पक्षों की सियासी बयानबाजी तेजबीजेपी समर्थकों का कहना है कि महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ दिए गए बयानों पर कार्रवाई होनी चाहिए, जबकि सपा सांसद ने इसे राजनीतिक विरोध बताया है।
नई दिल्ली में महिला आरक्षण को लेकर बड़ा राजनीतिक प्रदर्शन, सीएम योगी ने विपक्ष पर साधा निशाना

नई दिल्ली। दिल्ली से जुड़े व्यापक राजनीतिक माहौल के बीच लखनऊ में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर एक विशाल जन आक्रोश महिला पदयात्रा आयोजित की गई। इस कार्यक्रम ने राजनीतिक स्तर पर बड़ा शक्ति प्रदर्शन प्रस्तुत किया, जिसमें हजारों महिलाओं और कार्यकर्ताओं ने भाग लेकर विधानसभा तक पैदल मार्च किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने मंत्रिमंडल सहयोगियों के साथ इस पदयात्रा में शामिल हुए और पूरे समय जनता के बीच सक्रिय रूप से मौजूद रहे। लगभग एक दशमलव सात पांच किलोमीटर लंबी इस यात्रा ने राजनीतिक वातावरण को और अधिक गरमा दिया। विधानसभा के बाहर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि देश की आधी आबादी के अधिकारों और सम्मान से जुड़ा विषय है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह अपनी संकीर्ण सोच के कारण इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और लगातार इस दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि समाज में महिलाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है और उन्हें राजनीति एवं निर्णय प्रक्रिया में अधिक अवसर देने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश के विकास में महिला, युवा, गरीब और किसान चार प्रमुख आधार हैं जिनमें महिलाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि महिलाओं के अधिकारों की अनदेखी करने वाले राजनीतिक दलों को जनता भविष्य में जवाब देगी। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण लागू होने तक यह संघर्ष जारी रहेगा। वहीं उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस प्रदर्शन को महिलाओं की बढ़ती राजनीतिक जागरूकता और शक्ति का प्रतीक बताया।
महिला आरक्षण पर राजनीति…. कांग्रेस बोली- LS की वर्तमान संख्या के आधार पर तुरंत इसे लागू करे सरकार

नई दिल्ली। कांग्रेस (Congress) ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) पर महिलाओं के लिए आरक्षण के मुद्दे पर घड़ियाली आंसू बहाने का आरोप लगाया और मांग की कि लोकसभा की वर्तमान संख्या में आरक्षण को तत्काल लागू किया जाए। विपक्षी दल ने यह भी दावा किया कि 17 अप्रैल को लोकसभा (Lok Sabha) में जो विधेयक पारित नहीं सका वह महिला आरक्षण विधेयक नहीं बल्कि परिसीमन विधेयक था। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत (Supriya Shrinet) ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक संसद द्वारा 21 सितंबर, 2023 को सर्वसम्मति से पारित किया गया था और अब यह संविधान का हिस्सा है। उन्होंने यहां प्रेसवार्ता में कहा, ”महिलाओं के लिए आरक्षण विधेयक पराजित नहीं हुआ, बल्कि परिसीमन विधेयक पराजित हुआ है, जिसे आप (सरकार) देश पर थोपना चाहते थे।” श्रीनेत ने कहा, ”प्रधानमंत्री मोदी घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं और महिला आरक्षण विधेयक की आड़ में छिप रहे हैं।” श्रीनेत ने एक कार्टून प्रदर्शित किया, जिसमें प्रधानमंत्री के पास 543 आमों से भरी टोकरी दिखाई गई है, लेकिन वह महिलाओं को 33 प्रतिशत हिस्सा देने से इनकार कर रहे हैं और उनसे कह रहे हैं कि वह उन्हें उनका हिस्सा तभी दे सकते हैं जब वह आमों की संख्या बढ़ाकर 850 कर दें, जो विपक्ष उन्हें करने नहीं दे रहा है। संसद में संविधान संशोधन विधेयक के खारिज होने पर प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन पर कांग्रेस नेता ने अपनी पार्टी के रुख को दोहराते हुए कहा कि अगर मोदी वाकई गंभीर हैं, तो उन्हें लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों में महिलाओं के लिए तत्काल आरक्षण प्रदान करना चाहिए। सरकार पर हमला करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, “आपने इस पर एक शर्त लगा दी है। उस शर्त को हटाइए। आप ही महिला आरक्षण में बाधा डाल रहे हैं, आप पुरुषों को खुश रखना चाहते हैं और उनकी सीटें कम नहीं करना चाहते।” मोदी द्वारा महिलाओं से माफी मांगने का जिक्र करते हुए श्रीनेत ने कहा कि प्रधानमंत्री सही थे क्योंकि उन्हें मणिपुर में दंगों के दौरान दो महिलाओं के साथ जो हुआ, हाथरस और उन्नाव में जो हुआ, महिला ओलंपिक खिलाड़ियों के साथ जो हुआ और बिलकीस बानो मामले में दोषियों को जिस तरह सम्मानित किया गया, उसके लिए देश की महिलाओं से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा, ”आप (प्रधानमंत्री) सही थे। महिलाएं अपने अपमान को नहीं भूलतीं। आपसे बेहतर यह बात और कौन जान सकता है?” श्रीनेत ने कहा कि 240 सांसदों में से केवल 31 महिलाएं हैं, जो मात्र 12 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि देशभर के 1,654 विधायकों में से केवल 164 महिलाएं हैं, जो 10 प्रतिशत से भी कम है। कांग्रेस नेता ने कहा कि भाजपा के 21 मुख्यमंत्रियों में से केवल एक महिला है। श्रीनेत ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने मूल रूप से 1989 में दिवंगत राजीव गांधी के नेतृत्व में महिला आरक्षण पेश किया था, जिसका अटल बिहारी वाजपेयी, एल के आडवाणी, जसवंत सिंह और राम जेठमलानी जैसे भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने विरोध किया था। परिसीमन के मुद्दे पर, कांग्रेस प्रवक्ता ने लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत आनुपातिक वृद्धि के प्रधानमंत्री के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि मसौदा विधेयक में इसका कहीं भी उल्लेख नहीं है।
आज रात 8:30 बजे देश को संबोधित करेंगे प्रधानमंत्री मोदी, महिला आरक्षण पर कर सकते हैं बात

नई दिल्ली । हालांकि उनके संबोधन का विषय अभी आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं किया गया है लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं कि वे महिला आरक्षण और संसद में हालिया घटनाक्रम पर अपनी बात रख सकते हैं। दरअसल सरकार लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा विधेयक लेकर आई थी जो पारित नहीं हो सका। इसी पृष्ठभूमि में माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री अपने संबोधन में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठा सकते हैं। कैबिनेट बैठक में विपक्ष पर निशाना आज हुई कैबिनेट बैठक में भी इस विषय पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर ‘दोषी’ होने और महिलाओं के लिए आरक्षण बिल का समर्थन न करके महिलाओं के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया। पीएम मोदी ने विपक्ष के इस रवैये को एक गलती बताया और चेतावनी दी है कि भविष्य में उन्हें इसकी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह मैसेज देश के हर गांव तक पहुंचाया जाना चाहिए कि विपक्ष महिलाओं के प्रति नकारात्मक सोच रखता है. पिछले दशकों में क्यों नहीं मिला आरक्षण? विपक्षी दलों पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि वे वास्तव में महिलाओं के पक्ष में थे तो पिछले कई दशकों में उन्होंने आरक्षण लागू क्यों नहीं किया। उन्होंने इसे विपक्ष की नीयत पर सवाल खड़ा करने वाला मुद्दा बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने संकेत दिए कि महिला आरक्षण का विरोध करने का राजनीतिक परिणाम विपक्ष को भुगतना पड़ सकता है। उनके अनुसार जनता इस मुद्दे को गंभीरता से देख रही है और इसका असर चुनावी माहौल पर पड़ना तय है। गांव-गांव तक पहुंचाने का निर्देश उन्होंने पार्टी नेताओं को निर्देश दिया कि इस मुद्दे को देश के हर गांव तक पहुंचाया जाए। साथ ही कहा कि जनता के बीच जाकर यह बताया जाए कि महिलाओं के अधिकारों को लेकर सरकार और विपक्ष की सोच में क्या अंतर है।
क्या भाजपा को पहले से था विधेयक गिरने का अंदाजा, फिर क्यों महिला आरक्षण में संशोधन का खेला दांव

नई दिल्ली। लोकसभा में नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक के गिरने के बाद बीजेपी विपक्ष पर आक्रामक है तो वहीं विपक्ष का कहना है कि यह बीजेपी की सोची-समझी साजिश है। बिना संवाद के विशेष सत्र बुलाया गया और फिर विधेयक ना पास होने का ठीकरा विपक्ष पर फोड़ा जा रहा है। महिला आरक्षण संशोधन विधेयक 2023 और परिसीमन विधेयक 2026 समेत तीन विधेयकों को पास कराने के लिए पांच राज्यों में चुनाव के बीच ही संसद का विशेष सत्र बुलाया गया। पहले दिन रात 1 बजे के बाद तक विधेयकों पर चर्चा होती रही। 17 अप्रैल को सरकार ने महिला आरक्षण कानून को लागू करने की अधिसूचना भी जारी कर दी और फिर शाम को जब वोटिंग हुई तो विधेयक निचले सदन में गिर गया। विधेयक गिरते ही बीजेपी विपक्ष पर आक्रामक हो गई। बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस समेत विपक्ष महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ है। वहीं कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि यह एक तरह का षड्यंत्र था ताकि बीजेपी विधानसभा चुनाव के बीच बिना ठीक से संवाद किए ऐसी परिस्थितियां बनाए कि विधेयक पारित ना होने का ठीकरा विपक्ष पर फोड़ा जा सके। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन में वोटिंग से पहले ही सोशल मीडिया पर अपना संदेश जारी करते हुए कहा विपक्षी सांसदों से भी अपील की थी कि वे विधेयक के पक्ष में वोटिंग करें। वहीं विपक्ष के सांसदों का कहना था कि 2023 में पारित विधेयक को उसी रूप में लागू किया जाए। इसमें संशोधन की जरूरत कहां से पड़ गई अशोक गहलोत ने शुक्रवार को कहा, धानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सहित पूरी सरकार को यह पहले दिन से मालूम था कि संविधान संशोधन विधेयक विपक्ष के सहयोग के बिना पास नहीं हो सकता। इसके बावजूद उन्होंने विपक्षी दलों को विश्वास में नहीं लिया। बीजेपी ने किया विपक्ष में फूट डालने का प्रयास- गहलोत गहलोत ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे लगातार इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग कर रहे थे, परन्तु इतने महत्वपूर्ण विषय पर प्रधानमंत्री ने सभी विपक्षी पार्टियों को एक साथ बुलाकर बात करने के बजाय अलग-अलग बात कर उनमें फूट डालने का प्रयास किया। कैसे गिर गया विधेयक सदन में ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’, पर हुए मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। विधेयक पर मत विभाजन में 528 सदस्यों ने हिस्सा लिया। इस विधेयक को पारित करने के लिए 352 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता थी। विधेयक गिरने का भी फायदा उठाएगी बीजेपी? विधानसभा चुनावों में बीजेपी अकसर महिला वोटों के लिए कोई ना कोई दांव खेलती है। ऐसे में जानकारों का कहना है कि बीजेपी को पहले से पता था कि इस विधेयक को लेकर विपक्ष एकजुट होने का प्रयास करेगा। अगर विधेयक पास होता है तब भी बीजेपी इसे बंगाल चुनाव में मुद्दा बना सकती है। वहीं अगर विधेयक पास नहीं होता है तो वह इसी के बहाने विपक्ष को निशाने पर ले सकती है। अब इस राजनीति की शुरुआत पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु से हो चुकी है। यह मुद्दा 2029 के चुनाव में भी भुनाया जा सकता है।
Madhya Pradesh News : मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव महिला सशक्तिकरण और योजनाओं पर करेंगे संबोधन…

Madhya Pradesh News : भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में 15 अप्रैल को नारी शक्ति वंदन अभियान के अंतर्गत एक भव्य और वृहद कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन शहर के प्रतिष्ठित रवींद्र भवन में संपन्न होगा, जहां राज्य के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव मुख्य रूप से उपस्थित रहकर संबोधित करेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं के सशक्तिकरण, सामाजिक भागीदारी और उनके समग्र विकास की दिशा में सरकार की योजनाओं और प्रयासों को जन-जन तक पहुंचाना है। यह कार्यक्रम नारी शक्ति वंदन पखवाड़े का हिस्सा है, जो 25 अप्रैल तक पूरे प्रदेश में विभिन्न गतिविधियों के साथ मनाया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से महिलाओं के उत्थान, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सम्मान को केंद्र में रखते हुए कई स्तरों पर जागरूकता और लाभकारी योजनाओं का विस्तार किया जा रहा है। राजधानी में होने वाला यह मुख्य कार्यक्रम इस पूरे अभियान का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव नारी सशक्तिकरण पर विस्तार से अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। सरकार का मानना है कि बेटियों और बहनों का विकास ही समाज और प्रदेश के समग्र विकास की आधारशिला है। इस अवसर पर विभिन्न योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी भी साझा की जाएगी, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि राज्य सरकार महिलाओं के हित में किस प्रकार निरंतर कार्य कर रही है। राज्य सरकार द्वारा लाडली बहना योजना को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया है। इस योजना के तहत प्रदेश की बड़ी संख्या में महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार हो रहा है और वे आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो रही हैं। अब तक इस योजना के माध्यम से करोड़ों की राशि सीधे महिलाओं के खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है, जिससे इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल रहा है। नारी शक्ति वंदन पखवाड़े के दौरान राज्यभर में जागरूकता कार्यक्रम, संवाद सत्र और विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभ देना ही नहीं बल्कि उन्हें समाज के हर क्षेत्र में समान भागीदारी के लिए प्रेरित करना भी है। इसी क्रम में लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने की दिशा में भी चर्चा और पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और निरंतर ऐसी नीतियां लागू की जा रही हैं जिससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आए। इस आयोजन को प्रदेश में महिला सशक्तिकरण के प्रति सरकार की गंभीरता और संकल्प का प्रतीक माना जा रहा है।
मध्यप्रदेश स्टेट बार काउंसिल चुनाव का ऐलान: 12 मई को मतदान, 93 हजार अधिवक्ता चुनेंगे 26 सदस्य

भोपाल । मध्यप्रदेश स्टेट बार काउंसिल के चुनाव को लेकर लंबे समय से चल रहा इंतजार अब खत्म हो गया है। चुनाव कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है जिसके तहत 12 मई 2026 को मतदान कराया जाएगा जबकि मतगणना की प्रक्रिया 16 जून से शुरू होगी। इस चुनाव में प्रदेशभर के करीब 93 हजार अधिवक्ता भाग लेंगे और वे 26 सदस्यों के चयन के लिए मतदान करेंगे। चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित उच्चाधिकार प्राप्त चुनाव समिति ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस एस. के. पालो को रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त किया है। जारी किए गए चुनाव कार्यक्रम के अनुसार सबसे पहले 16 मार्च को प्रोविजनल मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद अधिवक्ताओं को 24 मार्च तक मतदाता सूची में अपने दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया जाएगा। प्राप्त आपत्तियों के निराकरण के बाद 1 अप्रैल 2026 को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। अंतिम सूची जारी होने के बाद उम्मीदवारों के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी। नामांकन फॉर्म जमा करने की प्रक्रिया 8 अप्रैल से 10 अप्रैल तक चलेगी जिसमें इच्छुक अधिवक्ता अपने नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 15 और 16 अप्रैल को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। इस दौरान चुनाव अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी उम्मीदवारों के दस्तावेज और पात्रता नियमों के अनुरूप हैं या नहीं। इसके बाद जिन उम्मीदवारों को चुनाव नहीं लड़ना होगा वे 20 से 22 अप्रैल तक अपना नाम वापस ले सकेंगे। नाम वापसी की अंतिम तिथि के बाद 22 अप्रैल को शाम 5 बजे तक उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी कर दी जाएगी। इसी सूची के आधार पर 12 मई को प्रदेशभर में मतदान कराया जाएगा। इस चुनाव की खास बात यह है कि इसमें महिला अधिवक्ताओं को प्रतिनिधित्व देने के लिए आरक्षण का प्रावधान भी किया गया है। मध्यप्रदेश स्टेट बार काउंसिल में कुल 25 सदस्यों का चुनाव होता है जबकि एक सदस्य नामित किया जाता है जिससे कुल संख्या 26 हो जाती है। इस बार सात पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। हालांकि इनमें से पांच पदों के लिए ही चुनाव कराया जाएगा जबकि शेष दो पदों पर मनोनयन के माध्यम से महिला प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश स्टेट बार काउंसिल का कार्यकाल अक्टूबर 2025 में समाप्त हो चुका था और तब से परिषद एक्सटेंशन पर काम कर रही है। इस मामले को लेकर अदालत में सुनवाई भी हुई थी। 4 फरवरी को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि बार काउंसिल के चुनाव जल्द से जल्द कराए जाएं। अदालत के निर्देश के बाद अब चुनाव कार्यक्रम जारी कर दिया गया है। बार काउंसिल के इस चुनाव को प्रदेश के अधिवक्ताओं के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि परिषद अधिवक्ताओं से जुड़े विभिन्न प्रशासनिक पेशेवर और अनुशासनात्मक मामलों में अहम भूमिका निभाती है। ऐसे में प्रदेशभर के अधिवक्ताओं की नजर अब आगामी चुनाव प्रक्रिया पर टिकी हुई है।