Dowry Harassment case : जेवर लेकर घर से निकाला, दहेज के लिए परेशान करता था लोको पायलेट पति; सास ससुर पर भी लगे आरोप

HIGHLIGHTS : दहेज के लिए महिला से मारपीट का आरोप लोको पायलट पति, सास-ससुर पर केस दर्ज 10 लाख रुपए की अतिरिक्त मांग का आरोप जेवर लेकर महिला को मायके छोड़ने का दावा पुलिस ने मामला दर्ज कर शुरू की जांच Dowry Harassment case : दतिया। जिले में दहेज प्रताड़ना का गंभीर मामला सामने आया है। महोनाजाट गांव की रहने वाली 32 वर्षीय महिला ने अपने पति, सास और ससुर पर दहेज के लिए मारपीट और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। PRIEST ARREST FOR RAPE : पूजा कराने घर आया पुजारी, शादी का झांसा देकर महिला से किया दुष्कर्म! शादी के बाद शुरू हुई प्रताड़ना पीड़िता के अनुसार, उसकी शादी 16 फरवरी 2020 को भोपाल निवासी आशीष दीक्षित से हुई थी, जो लोको पायलट है। शादी में पर्याप्त दहेज देने के बावजूद कुछ समय बाद ही ससुराल पक्ष ने कम दहेज का ताना देना शुरू कर दिया। FASTag: 1 अप्रैल से महंगा होगा नेशनल हाईवे सफर, देशभर में टोल दरों में होगी बढ़ोतरी 10 लाख रुपए की मांग और मारपीट के आरोप महिला का कहना है कि पति, सास और ससुर ने कई बार उसके साथ मारपीट की और लगातार 10 लाख रुपए की मांग करते रहे। 2021 में बेटी के जन्म के बाद भी प्रताड़ना जारी रही। Gwalior Road Protest : गड्ढे में बैठी पार्षद, सरकार के खिलाफ किया विरोध बोली – 10 दिन बाद बड़े आंदोलन की चेतावनी ! जेवर लेकर घर से निकालने का आरोप पीड़िता ने बताया कि 16 अप्रैल 2024 को उसका पति महोनाजाट आया, जहां उसने मारपीट की और जेवर लेकर चला गया। इसके बाद से महिला को मायके में छोड़ दिया गया और पैसे लाने की शर्त रखी गई। IPL 2026: गुजरात के लिए खतरा, पंजाब किंग्स के ये 5 खिलाड़ी करेंगे मैच पर दबदबा समझाइश के प्रयास भी रहे विफल महिला के परिजनों और रिश्तेदारों ने कई बार ससुराल पक्ष को समझाने की कोशिश की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। आखिरकार पीड़िता ने थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। राजधानी में युवा विधायकों का मंथन: 2047 के विकसित भारत का रोडमैप, अनुशासन-लोकतंत्र और जनसेवा पर जोर पुलिस ने शुरू की जांच पुलिस ने महिला की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है और पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
औरत को तारीफ नहीं सम्मान चाहिए इंटरनेशनल वूमेन्स डे पर समाज के आईने में झांकती एक बात

नई दिल्ली:हर साल 8 मार्च को दुनिया भर में International Women’s Day मनाया जाता है। इस दिन महिलाओं के सम्मान अधिकार और उपलब्धियों की बात की जाती है। लेकिन सच यही है कि हर साल यह दिन हमें यह याद दिला देता है कि समाज अब भी औरत के असली वजूद को पूरी तरह समझ नहीं पाया है। हम अक्सर कहते हैं कि हमारी बेटियां बेटों से कम नहीं हैं लेकिन इस वाक्य के भीतर ही एक छिपा हुआ सच है कि कहीं न कहीं हम अभी भी बराबरी को पूरी तरह स्वीकार नहीं कर पाए हैं। जब हम कहते हैं कि औरत आजाद है तो इसका मतलब यह भी होता है कि उसकी आजादी अभी अधूरी है। जब हम कहते हैं कि बेटियों को भी पढ़ाना चाहिए उन्हें भी आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए तो यह भी इस बात का संकेत है कि इस दिशा में अभी बहुत काम बाकी है। आज की महिला जीवन के हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही है। राजनीति से लेकर विज्ञान खेल से लेकर सेना और कला से लेकर व्यापार तक महिलाएं हर जगह अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। लेकिन सवाल यह है कि उसे बार बार खुद को साबित करने की जरूरत क्यों पड़ती है। समाज अक्सर किसी महिला की सफलता को तब स्वीकार करता है जब वह उन सीमाओं को पार कर लेती है जिन्हें लंबे समय तक पुरुषों ने तय किया था। कई बार तो महिला की कामयाबी को इस तरह देखा जाता है जैसे उसने किसी पुरुष की भूमिका निभाकर यह उपलब्धि हासिल की हो। असल में हमें यह समझना होगा कि औरत केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि पूरे समाज का ताना बाना है। परिवार रिश्तों और भावनाओं को जोड़कर रखने वाली सबसे मजबूत कड़ी अक्सर वही होती है। बचपन से अपने सपनों को सहेजने वाली और फिर अपनों की खुशियों के लिए उन्हें पीछे छोड़ देने वाली भी अक्सर वही होती है। बेटी के रूप में वह रहमत है मां के रूप में जन्नत है बहन के रूप में इज्जत है और दोस्त के रूप में भरोसा है। लेकिन समाज का दूसरा चेहरा भी उतना ही कड़वा है। महिलाओं के साथ हिंसा और अपमान की घटनाएं समय समय पर सामने आती रहती हैं। देश में कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जिन्होंने पूरे समाज को झकझोर दिया। Manipur women parading case 2023 हो या Kanjhawala case 2023 Delhi जैसी घटनाएं यह दिखाती हैं कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर अभी भी लंबा रास्ता तय करना बाकी है। इसी तरह Bilkis Bano का मामला भी बार बार यह सवाल उठाता है कि न्याय और संवेदनशीलता के मामले में समाज कहां खड़ा है। समस्या की जड़ कहीं और भी है। हम अक्सर महिलाओं का सम्मान उनके रिश्तों के आधार पर करते हैं। हमें लगता है कि हमें अपनी मां बहन बेटी या पत्नी की ही इज्जत करनी चाहिए। लेकिन असली सम्मान तब होगा जब सड़क पर चलने वाली या दफ्तर में काम करने वाली हर महिला को वही सम्मान मिले जो हम अपने घर की महिलाओं को देते हैं। हमारी संस्कृति और साहित्य में भी कई बार औरत की खूबसूरती को केवल उसके चेहरे उसकी आंखों या उसकी जुल्फों तक सीमित कर दिया गया है। शायरियों और कविताओं में उसकी आंखों की गहराई और उसके होंठों की नाजुकी का खूब जिक्र मिलता है। इसमें कोई शक नहीं कि महिला की सुंदरता बेमिसाल होती है लेकिन उसकी असली पहचान केवल उसके रूप में नहीं बल्कि उसके व्यक्तित्व उसकी सोच उसकी मेहनत और उसकी संवेदनशीलता में होती है। आज की महिला शायद केवल तारीफ नहीं चाहती बल्कि सम्मान चाहती है। उसे यह एहसास चाहिए कि समाज उसे बराबरी की नजर से देखता है। क्योंकि सच यही है कि किसी महिला को खूबसूरत कहना अच्छी बात हो सकती है लेकिन उसकी इज्जत करना उससे भी कहीं ज्यादा खूबसूरत है।