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पाकिस्तान में खूनी आतंकी हमला: बन्नू पुलिस चौकी पर आत्मघाती विस्फोट, 15 सुरक्षाकर्मियों की मौत

नई दिल्ली। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बन्नू जिले में आतंकियों ने पुलिस चौकी पर बड़ा आत्मघाती हमला कर दिया। विस्फोटकों से भरी गाड़ी से किए गए धमाके और उसके बाद हुई भारी फायरिंग में कम से कम 15 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आतंकियों ने पहले विस्फोटकों से लदी गाड़ी को पुलिस पोस्ट की ओर बढ़ाया। सुरक्षा बलों ने जब वाहन को रोकने की कोशिश करते हुए फायरिंग की, तभी जोरदार धमाका हो गया। धमाका इतना भीषण था कि पुलिस चौकी की इमारत पूरी तरह तबाह हो गई और आसपास के कई घरों की छतें भी गिर गईं। कई सुरक्षाकर्मी मलबे में दब गए, जिन्हें बाद में रेस्क्यू टीमों ने बाहर निकाला। हमले के तुरंत बाद बड़ी संख्या में आतंकियों ने पुलिस पोस्ट पर धावा बोल दिया, जिसके बाद दोनों ओर से लंबे समय तक गोलीबारी चलती रही। इलाके को घेरकर सुरक्षा बलों ने सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि कितने आतंकी मारे गए या गिरफ्तार किए गए हैं। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री मोहम्मद सोहेल अफरीदी ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे कायराना हरकत बताया है। उन्होंने घायलों के बेहतर इलाज और पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं। गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी इलाकों में आतंकी गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। हाल ही में दक्षिण वजीरिस्तान में भी सुरक्षा बलों ने विस्फोटकों से भरी गाड़ी लेकर चेकपोस्ट की तरफ बढ़ रहे एक संदिग्ध आतंकी को मार गिराया था। हालिया हमले की जिम्मेदारी अभी किसी संगठन ने नहीं ली है, लेकिन पाकिस्तान सरकार पहले भी प्रतिबंधित आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) पर ऐसे हमलों के आरोप लगाती रही है। लगातार बढ़ते आतंकी हमलों ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था और सरकार की आतंकवाद विरोधी रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

उत्तर कोरिया का बड़ा दावा: किम जोंग उन पर हमला हुआ तो स्वतः परमाणु हमला, संविधान में जोड़ा गया नया प्रावधान

नई दिल्ली। उत्तर कोरिया ने अपने संविधान में एक बड़ा और विवादास्पद बदलाव करते हुए परमाणु नीति को और सख्त कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक नए प्रावधान में कहा गया है कि अगर देश के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन या परमाणु कमांड सिस्टम पर हमला होता है, तो उत्तर कोरिया तुरंत और स्वचालित रूप से परमाणु हमला करेगा। इस कदम ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ा दी है। सरकारी मीडिया के हवाले से सामने आई जानकारी में बताया गया है कि यह संशोधन 22 मार्च को किया गया था, लेकिन इसे हाल ही में सार्वजनिक किया गया है। संविधान के परमाणु नीति वाले आर्टिकल में स्पष्ट किया गया है कि अगर देश की परमाणु कमांड और नियंत्रण व्यवस्था को खतरा पहुंचता है, तो जवाबी कार्रवाई बिना किसी देरी के की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम उत्तर कोरिया की “डिटरेंस स्ट्रैटेजी” का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य संभावित हमलों को रोकना है। हालांकि, इस बयान ने वैश्विक स्तर पर तनाव को और बढ़ा दिया है, क्योंकि यह परमाणु हमले की स्वचालित प्रतिक्रिया की बात करता है। रिपोर्टों में यह भी दावा किया जा रहा है कि हाल ही में ईरान पर हुए हमलों और वैश्विक घटनाओं को देखते हुए उत्तर कोरिया ने अपनी सुरक्षा नीति को और कठोर बनाया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसी बीच उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया सीमा के पास नई 155 मिमी स्वचालित तोपों की तैनाती की है। बताया जा रहा है कि इन हथियारों की रेंज लगभग 60 किलोमीटर तक है, जिससे दक्षिण कोरिया की राजधानी के आसपास का क्षेत्र भी खतरे की जद में आ सकता है। किम जोंग उन ने खुद इन हथियारों के परीक्षण का निरीक्षण किया और इसे सेना की क्षमता में बड़ा बदलाव बताया। उत्तर कोरिया लंबे समय से दक्षिण कोरिया और अमेरिका को अपना मुख्य सुरक्षा खतरा मानता रहा है। इसी वजह से वह लगातार अपनी मिसाइल और परमाणु क्षमताओं को मजबूत करने में जुटा है। आंकड़ों के अनुसार, उत्तर कोरिया के पास वर्तमान में दर्जनों परमाणु हथियार मौजूद हैं, जबकि उसके पास इतना रेडियोधर्मी पदार्थ है जिससे वह भविष्य में और भी हथियार बना सकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि कुछ हथियार पहले से तैनात स्थिति में हैं। हालांकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय बार-बार उत्तर कोरिया से तनाव कम करने और बातचीत के रास्ते अपनाने की अपील करता रहा है, लेकिन किम जोंग उन की नीतियां लगातार सैन्य ताकत बढ़ाने पर केंद्रित रही हैं।

बंगाल चुनाव में BJP की जीत पर नॉर्वे के पूर्व मंत्री का बड़ा बयान बोले- क्या शानदार बदला लिया है, मोदी की जमकर तारीफ

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत पर नॉर्वे के पूर्व मंत्री और राजनयिक एरिक सोल्हेम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि बीजेपी की यह जीत “शानदार बदला” है। 2024 लोकसभा चुनाव से की तुलनासोल्हेम ने अपने बयान में कहा कि 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान पश्चिमी मीडिया ने बीजेपी के बहुमत से नीचे रहने को “मोदी युग के अंत की शुरुआत” बताया था। लेकिन इसके बाद पार्टी ने कई राज्यों ओडिशा, हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, असम और अब पश्चिम बंगाल में मजबूत वापसी की है। बंगाल की जीत को बताया लोकतंत्र की ताकतउन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्य में 90% से ज्यादा मतदान होना भारत के लोकतंत्र की मजबूती को दर्शाता है। सोल्हेम के अनुसार, भारत में चुनावी भागीदारी यूरोप और अमेरिका के कई देशों से कहीं अधिक है, जो इसे एक मजबूत लोकतांत्रिक उदाहरण बनाता है। भारत के लोकतंत्र की अंतरराष्ट्रीय सराहनाएरिक सोल्हेम ने कहा कि भारत का लोकतंत्र दुनिया के लिए एक मिसाल है और पश्चिमी देशों को इसे और बेहतर तरीके से समझने की जरूरत है। तमिलनाडु राजनीति पर भी टिप्पणीउन्होंने तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने विजय और उनकी पार्टी TVK के प्रदर्शन को भी राज्य की राजनीति में संभावित बड़ा बदलाव बताया।

सीजफायर के बाद कूटनीति तेज, ईरान के 10 सूत्रीय प्रस्ताव पर अमेरिका से होगी अहम वार्ता

नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच दो हफ्ते के सीज़फायर के बाद अब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने पुष्टि की है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत शुक्रवार, 10 अप्रैल से इस्लामाबाद में शुरू होगी। ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को एक विस्तृत 10 बिंदुओं वाला प्रस्ताव भेजा है, जिस पर अब बातचीत की जाएगी। ईरानी मीडिया के अनुसार, इस प्रस्ताव में कई अहम शर्तें शामिल हैं। ईरान के 10 प्रमुख प्रस्ताव इस प्रकार हैं: 1. अहिंसा के प्रति प्रतिबद्धता2. होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का नियंत्रण बरकरार रखना3. यूरेनियम संवर्धन की अनुमति4. सभी प्राथमिक प्रतिबंधों को समाप्त करना5. द्वितीयक प्रतिबंधों को भी हटाना6. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सभी प्रस्तावों को खत्म करना7. बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के प्रस्तावों को समाप्त करना8. ईरान को मुआवजा देना9. क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी10. लेबनान में हिज़्बुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई सहित सभी मोर्चों पर युद्धविराम ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, प्रस्ताव में विशेष रूप से होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण, प्रतिबंधों में ढील और क्षेत्र से अमेरिकी सेनाओं की वापसी जैसे मुद्दों पर जोर दिया गया है। हालांकि, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने साफ किया है कि इस पहल का मतलब जमीनी स्तर पर तनाव पूरी तरह खत्म होना नहीं है। उनका कहना है कि यह युद्ध का अंत नहीं है और किसी भी गलती का कड़ा जवाब दिया जाएगा। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब ईरान ने दो हफ्ते के सीज़फायर को स्वीकार किया है, जिसे उसने अपनी “जीत” बताया है। यह सीज़फायर पाकिस्तान की मध्यस्थता से संभव हुआ है। इस्लामाबाद में होने वाली यह वार्ता करीब 15 दिनों तक चल सकती है और जरूरत पड़ने पर इसे आगे बढ़ाया भी जा सकता है। इसका उद्देश्य एक व्यापक समझौते की दिशा में रूपरेखा तैयार करना है। ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि इस दौरान समुद्री मार्गों पर सीमित सहयोग किया जाएगा और होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित आवाजाही ईरानी सशस्त्र बलों के समन्वय से सुनिश्चित की जा सकती है।वहीं, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा है कि सीज़फायर औपचारिक रूप से तभी लागू माना जाएगा, जब ईरान वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोल देगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के बाद आई एक रिपोर्ट में बताया गया कि तेहरान ने अमेरिका-इजराइल तनाव के बीच पाकिस्तान के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने भी अंतिम समय में हस्तक्षेप कर तनाव कम करने की अपील की थी। इसी बीच, ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने सीज़फायर को मंजूरी दे दी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने कहा कि यदि ईरान पर हमले रुकते हैं तो वे भी जवाबी कार्रवाई रोक देंगे और दो हफ्तों तक होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने सीज़फायर को लागू कराने में भूमिका निभाने के लिए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर के प्रति आभार भी जताया।