MP: धार की ऐतिहासिक भोजशाला में हिन्दुओं को मिले पूजा का अधिकार…. HC में हिन्दू पक्ष ने रखे तर्क

इंदौर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) की इंदौर पीठ (Indore Bench) के सामने शुक्रवार को धार की ऐतिहासिक भोजशाला (Historical Bhojshala) को लेकर एक अहम दलील पेश की गई. हिंदू याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को इस परिसर के मूल धार्मिक स्वरूप को बहाल करने का निर्देश दिया जाए और वहां केवल हिंदुओं को पूजा की अनुमति मिले। ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ के वकील विष्णु शंकर जैन ने जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच के सामने ASI के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को कानून का उल्लंघन बताया। अभी हिंदुओं को मंगलवार को पूजा और मुस्लिमों को शुक्रवार को नमाज की अनुमति है. जैन ने कहा कि ‘प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम 1958’ के तहत किसी भी स्मारक का उपयोग उसके मूल स्वरूप के विपरीत नहीं किया जा सकता. उनके अनुसार, यह व्यवस्था हिंदुओं के मौलिक अधिकारों का हनन है। मंदिर बनाम मस्जिदयाचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी के वकील मनीष गुप्ता ने परिसर की बनावट पर बड़े सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि इस ढांचे में न तो कोई मीनार है और न ही वजूखाना, जो एक पारंपरिक मस्जिद की पहचान होते हैं. उन्होंने इस दावे को भी खारिज कर दिया कि भोजशाला एक जैन मंदिर था; उन्होंने कहा कि यह स्मारक असल में एक सरस्वती मंदिर है, जिसकी स्थापना 1034 ईस्वी में परमार वंश के राजा भोज ने की थी। मुस्लिम पक्ष और 1991 के कानून की दलीलमुस्लिम पक्ष ने अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए ‘पूजा स्थल (विशेष उपबंध) अधिनियम 1991’ का सहारा लिया. 15 अगस्त 1947 को यह परिसर एक मस्जिद के रूप में अस्तित्व में था, इसलिए कानूनन इसके स्वरूप में बदलाव नहीं किया जा सकता। विष्णु शंकर जैन ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि भोजशाला एक ASI संरक्षित स्मारक है, इसलिए 1991 का अधिनियम इस पर लागू नहीं होता। हाई कोर्ट इस परिसर के धार्मिक स्वरूप से जुड़ी कुल पांच याचिकाओं और एक रिट अपील पर एक साथ सुनवाई कर रहा है. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 11 मई की तारीख तय की है।
अक्षय तृतीया पर बन रहा दुर्लभ योग सोना खरीदने का सबसे शुभ समय और पूजा तरीका

नई दिल्ली । अक्षय तृतीया का पर्व हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है। इस दिन को “अबूझ मुहूर्त” भी कहा जाता है, यानी किसी भी शुभ कार्य के लिए अलग से मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किया गया दान, जप, तप और पूजा का फल अक्षय होता है, यानी उसका कभी क्षय नहीं होता। इस वर्ष अक्षय तृतीया 2026 का पर्व विशेष ज्योतिषीय संयोगों के कारण और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस बार अक्षय तृतीया पर रवि योग, त्रिपुष्कर योग, सौभाग्य योग और आयुष्मान योग जैसे कई शुभ संयोग बन रहे हैं। इसके साथ ही शुक्र ग्रह के अपनी स्वराशि में होने से मालव्य महापुरुष राजयोग और गजकेसरी योग का निर्माण भी हो रहा है, जिससे इस दिन का महत्व कई गुना बढ़ गया है। पंचांग के अनुसार वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 19 अप्रैल को सुबह 10:48 बजे शुरू होगी और 20 अप्रैल को सुबह 7:27 बजे समाप्त होगी। इस अवधि को अत्यंत शुभ माना गया है और इस दौरान किए गए कार्यों का फल कई गुना बढ़कर प्राप्त होता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा विशेष रूप से की जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था और इसका संबंध सतयुग एवं त्रेतायुग की शुरुआत से भी जोड़ा जाता है। महाभारत काल में श्रीकृष्ण द्वारा पांडवों को दिया गया अक्षय पात्र भी इसी दिन की महिमा से जुड़ा माना जाता है। पूजा विधि के अनुसार घर में चौकी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। सबसे पहले कलश स्थापना कर उनका आह्वान करें। गंगाजल से स्नान कराकर चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप और दीप अर्पित करें। पीले वस्त्र, फल, मिठाई और विशेष रूप से खीर या सत्तू का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इसके बाद मंत्र जप और आरती करें। सोना खरीदने के लिए इस दिन कई शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। 19 अप्रैल को सुबह 10:49 से 20 अप्रैल की सुबह 05:51 तक सोना खरीदना शुभ माना गया है। इसके अलावा 20 अप्रैल को दोपहर 02:26 से 03:52 तक अमृत मुहूर्त और 02:30 से 03:22 तक विजय मुहूर्त भी बेहद शुभ माना गया है। इस समय किया गया निवेश और खरीदारी विशेष फलदायी मानी जाती है।
हनुमान जी को प्रसन्न करने का आसान उपाय मंगलवार व्रत के नियम और पूजन विधि जरूर जानें

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में मंगलवार का दिन अत्यंत पवित्र और विशेष माना जाता है। यह दिन हनुमान जी को समर्पित होता है जिन्हें संकट मोचन और भक्तों के कष्ट हरने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमों के साथ मंगलवार का व्रत रखकर बजरंगबली की आराधना करता है उसके जीवन के सभी दुख और बाधाएं धीरे धीरे समाप्त हो जाती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मंगलवार व्रत की महिमा केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह व्रत व्यक्ति के आत्मविश्वास को बढ़ाता है मानसिक शक्ति प्रदान करता है और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। विशेष रूप से जिन लोगों के जीवन में बार बार बाधाएं आती हैं उन्हें यह व्रत करने की सलाह दी जाती है। मंगलवार व्रत रखने के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना जरूरी होता है। सबसे पहले साधक को प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पूजा के समय यदि संभव हो तो लाल रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए क्योंकि यह रंग हनुमान जी को प्रिय माना जाता है। पूजा के लिए हमेशा स्वच्छ और पवित्र स्थान का चयन करें और लाल रंग के ऊनी आसन पर बैठकर साधना करें। पूजा करते समय साधक का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए क्योंकि इसे शुभ माना जाता है। यदि संभव हो तो ब्रह्म मुहूर्त यानी सुबह 4 से 6 बजे के बीच पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसके अलावा संध्या के समय प्रदोष काल में भी पूजा की जा सकती है। व्रत के दौरान खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस दिन नमक का सेवन नहीं करना चाहिए और तामसिक चीजों से दूर रहना चाहिए। व्रत करने वाले व्यक्ति फलाहार कर सकते हैं और दिनभर संयम और सात्विकता बनाए रखना आवश्यक होता है। धूम्रपान और नशे जैसी आदतों से पूरी तरह दूर रहना चाहिए। कुछ विशेष नियम भी बताए गए हैं जिनका पालन करना जरूरी है। जैसे महिलाओं को हनुमान जी को चोला अर्पित नहीं करना चाहिए और पूजा के दौरान हनुमान जी को चरणामृत से स्नान नहीं कराया जाता है। यह परंपराएं शास्त्रों में वर्णित हैं और इनका पालन करना शुभ माना जाता है। मंगलवार व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि अनुशासन और श्रद्धा का प्रतीक है। जब व्यक्ति पूरे मन से इस व्रत का पालन करता है तो उसे न केवल आध्यात्मिक शांति मिलती है बल्कि जीवन में सकारात्मक बदलाव भी देखने को मिलते हैं। ऐसे में यदि आप भी मंगलवार का व्रत रखते हैं तो इन नियमों का पालन जरूर करें ताकि आपका व्रत पूर्ण और फलदायी बन सके।
SALKLANPUR TEMPLE : सलकनपुर में चैत्र नवरात्रि की धूम, मां विजयासन देवी मंदिर सज-धज कर स्वागत को तैयार

SALKLANPUR TEMPLE : बुधनी । मध्यप्रदेश के मशहूर शक्तिपीठ मां विजयासन देवी मंदिर में श्रद्धा और भक्ति का उत्सव फिर से देखने को मिलेगा। 19 मार्च 2026 से शुरू होने वाले चैत्र नवरात्रि के लिए मंदिर समिति ने तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। बुधनी विधानसभा क्षेत्र में स्थित यह दिव्य धाम हर साल लाखों श्रद्धालुओं का आकर्षण केंद्र बनता है और इस बार भी भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। गुरुवार सुबह 10:47 बजे शुभ मुहूर्त में घट स्थापना और ज्योति स्थापना के साथ नौ दिवसीय नवरात्रि का शुभारंभ होगा। यह पर्व 27 मार्च को राम नवमी के दिन समाप्त होगा। भक्तों की आस्था उत्साह और भक्ति का संगम इस दौरान मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में साफ दिखाई देगा। मंदिर समिति ने गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पानी छांव और परिक्रमा मार्ग में कारपेट बिछाने जैसी व्यवस्थाओं का खास इंतजाम किया है। श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो इसके लिए समिति हर संभव प्रयास कर रही है। मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्त लगभग 1400 सीढ़ियों का रास्ता तय कर सकते हैं। इसके अलावा रोपवे और सड़क मार्ग की सुविधा भी उपलब्ध है जिससे बुजुर्ग और छोटे बच्चों वाले परिवार भी आसानी से दर्शन कर सकते हैं। सुरक्षा के दृष्टिकोण से पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क हैं। नवरात्रि के दौरान सैकड़ों पुलिस जवान और प्रशासनिक अधिकारी तैनात रहेंगे ताकि भक्तों के लिए व्यवस्था सुचारू बनी रहे और किसी भी तरह की असुविधा न हो। मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था के साथ साथ भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन सेवाओं का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा। मंदिर का वातावरण नवरात्रि की शुरुआत से ही भक्तिमय हो जाएगा। श्रद्धालु सुबह शाम पूजन हवन और आरती में भाग लेंगे। इस दौरान देवी मां के विभिन्न स्वरूपों की पूजा और भजन कीर्तन का आयोजन भी होगा। मंदिर के आसपास स्थानीय बाजार भी सज धज कर उत्सव का रंग बिखेरेंगे जहां भक्त पूजा सामग्री और नवरात्रि से जुड़े अन्य सामान खरीद सकते हैं। भक्ति श्रद्धा और उत्साह के इस महापर्व में सलकनपुर एक बार फिर आस्था के रंग में रंगने को तैयार है। हर उम्र के भक्त इस अवसर पर माता के दर्शन के लिए दूर दूर से यहां पहुंचते हैं। नौ दिन तक चलने वाले इस पर्व में भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए देवी की उपासना करेंगे और मंदिर परिसर में चारों ओर भक्तों की भीड़ भजन और आरती का अद्भुत दृश्य देखने को मिलेगा। सलकनपुर और मां विजयासन देवी मंदिर इस बार भी श्रद्धालुओं को यादगार अनुभव देने के लिए पूरी तरह सज धज कर तैयार हैं। नवरात्रि के इस महापर्व में हर कोई आस्था उल्लास और भक्तिभाव में डूबकर माता के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करेगा।
ग्वालियर में बाबा अचलनाथ की भव्य रंगपंचमी नगर यात्रा: फूलों और गुलाल से होली, 5 किलो चांदी का दान, श्रद्धालुओं ने किया उत्साहपूर्वक स्वागत

ग्वालियर। रंगपंचमी के अवसर पर बाबा अचलनाथ की नगर यात्रा निकली, पूजा-अर्चना के बाद शुरू हुआ भव्य चल समारोह। शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए बाबा अचलनाथ की सवारी के साथ श्रद्धालु फूलों और गुलाल से होली खेलते नजर आए। यात्रा की शुरुआत अचलेश्वर महादेव मंदिर से हुई और इसमें डीजे और बैंड की धुनों पर लोग नाचते-गाते शामिल हुए। नगर भ्रमण सवारी दल बाजार, लोहिया बाजार, दौलतगंज, महाराज बाड़ा और सराफा बाजार से होकर गुजरी। शाम करीब 4 बजे बाबा अचलनाथ की सवारी राम मंदिर पहुंची, जहां बाबा ने भगवान राम के साथ रंग और गुलाल से होली खेली। इसके अतिरिक्त, सनातन धर्म मंदिर में चक्रधर भगवान के साथ भी रंगोत्सव का आयोजन किया गया। नगर भ्रमण के दौरान श्रद्धालुओं ने जगह-जगह बाबा अचलनाथ का उत्साहपूर्वक स्वागत किया और प्रसादी वितरित की गई। इस अवसर पर एक दानदाता ने मंदिर के स्तंभों के लिए 5 किलो चांदी का दान भी किया। मंदिर प्रबंधन ने बताया कि आज सभी दानपेटियां भी खोली जाएंगी। इस भव्य रंगपंचमी आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है और बड़ी संख्या में लोग शामिल होने के लिए पहुंच रहे हैं।
T20 WORLD CUP: सेमीफाइनल से पहले टीम इंडिया के लिए मंदिरों में पूजा: उज्जैन में खिलाड़ियों की फोटो रखकर जीत की प्रार्थना

T20 WORLD CUP: नई दिल्ली। भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाले हाई-वोल्टेज सेमीफाइनल मुकाबले को लेकर देशभर में क्रिकेट प्रेमियों का उत्साह चरम पर है। इसी उत्साह के बीच मध्यप्रदेश के उज्जैन में क्रिकेट फैंस ने टीम इंडिया की जीत के लिए विशेष पूजा-अर्चना की। उज्जैन के प्रसिद्ध अंगारेश्वर मंदिर में गुरुवार को क्रिकेट प्रेमियों, पुजारियों और श्रद्धालुओं ने मिलकर भारतीय टीम की सफलता के लिए भगवान से प्रार्थना की। टी-20 विश्व कप के दूसरे सेमीफाइनल मुकाबले में भारत का सामना इंग्लैंड से होना है। यह महत्वपूर्ण मैच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में शाम 7 बजे खेला जाएगा, जबकि टॉस 6:30 बजे होगा। इस मुकाबले को लेकर देशभर के क्रिकेट प्रशंसकों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। करो या मरो की स्थिति वाले इस मैच से पहले फैंस ने मंदिर में विशेष अनुष्ठान कर टीम इंडिया की जीत की कामना की। अंगारेश्वर मंदिर में आयोजित इस पूजा में करीब 50 से अधिक पंडित, पुजारी, श्रद्धालु और क्रिकेट प्रेमी शामिल हुए। सभी ने मिलकर भगवान शिव का अभिषेक किया और भारतीय टीम की जीत के लिए विशेष प्रार्थना की। इस दौरान टीम इंडिया के खिलाड़ियों की तस्वीरें भी मंदिर में रखी गईं। सूर्यकुमार यादव, अभिषेक शर्मा, हार्दिक पंड्या और शिवम दुबे जैसे खिलाड़ियों की फोटो शिवलिंग के पास रखकर विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया गया। क्रिकेट प्रेमियों का कहना था कि भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाला यह मुकाबला बेहद महत्वपूर्ण है और पूरी उम्मीद है कि टीम इंडिया शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में अपनी जगह बनाएगी। पूजा में शामिल लोगों ने कहा कि टीम इंडिया की जीत के लिए वे भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं और देशवासियों की उम्मीदें खिलाड़ियों के साथ हैं। खाड़ी देशों में फंसे मप्र निवासियों के लिए सरकार अलर्ट, भोपाल और नई दिल्ली में 24×7 कंट्रोल रूम शुरू इधर, सेमीफाइनल मुकाबले से पहले भारतीय खिलाड़ियों ने भी भगवान के दर्शन किए। इंग्लैंड के खिलाफ महत्वपूर्ण मैच से एक दिन पहले भारतीय टीम के कुछ खिलाड़ी मुंबई के प्रसिद्ध श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर पहुंचे थे। यहां अक्षर पटेल, ईशान किशन और अभिषेक शर्मा ने भगवान गणपति के दर्शन कर आशीर्वाद लिया और टीम की सफलता के लिए प्रार्थना की। भारत और इंग्लैंड के बीच यह मुकाबला लगातार तीसरी बार टी-20 विश्व कप के सेमीफाइनल में देखने को मिल रहा है। इससे पहले वर्ष 2022 और 2024 में भी दोनों टीमें सेमीफाइनल में आमने-सामने आ चुकी हैं। इन मुकाबलों में दोनों टीमों ने एक-एक जीत हासिल की थी और खास बात यह रही कि सेमीफाइनल जीतने वाली टीम ने फाइनल मुकाबला भी अपने नाम किया था। ऐसे में इस बार का सेमीफाइनल भी बेहद रोमांचक होने की उम्मीद है। क्रिकेट विशेषज्ञों के अनुसार दोनों टीमों के पास मजबूत बल्लेबाजी और गेंदबाजी लाइनअप है, जिससे मुकाबला काफी कड़ा रहने की संभावना है। देशभर के क्रिकेट प्रेमियों की नजरें अब इस अहम मुकाबले पर टिकी हुई हैं। फैंस को उम्मीद है कि भारतीय टीम शानदार प्रदर्शन करते हुए इंग्लैंड को हराएगी और टी-20 विश्व कप के फाइनल में अपनी जगह बनाएगी। इसी उम्मीद के साथ मंदिरों में प्रार्थनाएं और दुआओं का सिलसिला जारी है।
उज्जैन में चंद्र ग्रहण के कारण मंदिरों के पट बंद, श्रद्धालु करेंगे बाहर से पूजा; महाकाल मंदिर में रहेगी विशेष व्यवस्था!

उज्जैन। उज्जैन में मंगलवार को चंद्र ग्रहण के चलते शहर के कई प्रमुख मंदिरों के पट बंद कर दिए गए। सुबह 6:47 बजे शुरू हुए सूतक काल के दौरान महाकालेश्वर मंदिर के अलावा अन्य मंदिरों में दर्शन वर्जित रहे। सूतक शाम 6:47 बजे तक रहेगा, जिसके बाद मंदिरों में शुद्धिकरण और संध्या आरती के बाद दर्शन फिर से शुरू होंगे। महाकाल मंदिर के पट खुले रहने के बावजूद गर्भगृह में पुजारियों ने मंत्रोच्चार किया। श्रद्धालु मंदिर परिसर के बाहर से ही भगवान के दर्शन कर रहे थे। इस दौरान मंदिर में केवल मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठान चल रहे थे। शहर के अन्य प्रमुख मंदिर जैसे सांदीपनि आश्रम, मंगलनाथ मंदिर, अंगारेश्वर मंदिर और गोपाल मंदिर में सुबह 5 बजे तक नियमित पूजा हुई, उसके बाद सूतक लगते ही पट बंद कर दिए गए। सूतक के दौरान भक्तों ने मंदिर के बाहर ही भगवान के दर्शन किए। मंगलनाथ मंदिर में भी पट बंद रहने के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। अंगारेश्वर, गोपाल, चिंताहरण हनुमान और सिद्धेश्वर मंदिर सहित हजारों मंदिरों में दर्शन रोक दिए गए थे। मंदिर प्रशासन ने कहा कि शाम को सूतक समाप्त होने के बाद सभी मंदिरों की सफाई और शुद्धिकरण के बाद भगवान का स्नान, श्रृंगार और संध्या आरती की जाएगी। ज्योतिषाचारियों के अनुसार सूतक काल में पूजा, भोग और मूर्ति के स्पर्श वर्जित होते हैं। यही कारण है कि अधिकांश मंदिरों में यह व्यवस्था लागू की गई। हालांकि महाकाल मंदिर में भक्त दर्शन कर सकते हैं, लेकिन गर्भगृह में पुजारियों ने ही मंत्रोच्चार और अनुष्ठान जारी रखा। सूतक से पहले होली का उत्सव भी मंदिरों में पारंपरिक रूप से मनाया गया। भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण के साथ हर्बल गुलाल और फूलों से होली खेली। इसके बाद विधि-विधान से मंदिरों के पट बंद कर दिए गए और दर्शन वर्जित कर दिए गए। मंदिर प्रशासन ने भक्तों से अपील की कि वे सूतक के दौरान मंदिर परिसर में प्रवेश न करें और बाहर से ही पूजा करें। संध्या में पट खुलने के बाद सभी मंदिरों में धार्मिक गतिविधियां सामान्य रूप से शुरू हो जाएंगी। इस तरह, चंद्र ग्रहण के दौरान उज्जैन के मंदिरों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और धार्मिक परंपरा दोनों का ध्यान रखा गया। भक्तों ने मंदिरों के बाहर भी पूजा कर अपनी आस्था व्यक्त की। सूतक समाप्ति के बाद मंदिरों में संपूर्ण शुद्धिकरण और भव्य संध्या आरती के साथ दर्शन शुरू होंगे, जिससे शहर में धार्मिक माहौल पूरी तरह लौट आएगा।
उज्जैन में महाशिवरात्रि पर भगवान महाकाल की विशेष भस्मारती: रजत मुकुट और रुद्राक्ष माला से हुआ भव्य श्रृंगार

उज्जैन । महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार दोपहर भगवान महाकाल की विशेष भस्मारती संपन्न हुई। साल में केवल एक बार होने वाली यह भस्म आरती दोपहर 12 बजे शुरू होकर दोपहर 2 बजे तक चली। इससे पहले सुबह से ही चार प्रहर पूजन, अभिषेक और मंत्रोच्चार के साथ भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया। रविवार रात 10:30 बजे से प्रारंभ हुए चार प्रहर पूजन में 11 ब्राह्मणों ने एकादश-एकादशनी रुद्रपाठ और वैदिक मंत्रों के साथ भगवान महाकाल का अभिषेक किया। पंचामृत, गंगाजल, गुलाब जल, भांग और केसर मिश्रित दूध से पूजा के बाद भगवान को नवीन वस्त्र और सप्तधान्य अर्पित किए गए। इसके बाद मोगरा और गुलाब के सुगंधित पुष्पों से तैयार 3 क्विंटल का भव्य सेहरा बांधा गया और रजत शेषनाग मुकुट, रजत मुंडमाला, रुद्राक्ष माला सहित अन्य आभूषणों से अलंकरण किया गया। सेहरा आरती के बाद भस्म आरती के लिए भगवान का सेहरा उतारा गया और आभूषण, वस्त्र हटाकर भस्म अर्पित किया गया। इस भस्मारती में प्रशासनिक अधिकारी और भारी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। दोपहर 2:30 बजे भोग आरती संपन्न हुई, जिसके बाद नि:शुल्क अन्नक्षेत्र में ब्राह्मणों का भोजन कराते हुए दक्षिणा प्रदान की गई। भस्मारती के बाद संध्या पूजन, संध्या आरती और शयन आरती के साथ भगवान के पट बंद किए गए। महाशिवरात्रि पर्व का समापन 18 फरवरी को पंचमुखारविंद दर्शन के साथ होगा, जिसमें भगवान के पांच स्वरूपों का दर्शन किया जाएगा। महाशिवरात्रि पर मंदिर में श्रद्धालुओं का भारी सैलाब रहा। रविवार तक करीब 4 लाख भक्त भगवान महाकाल के दर्शन कर चुके हैं। शहर के होटल, लॉज और होम-स्टे पहले ही फुल हो चुके हैं, जिससे महाकालेश्वर मंदिर क्षेत्र में भक्तों की भारी भीड़ देखी गई।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बड़वाले महादेव मंदिर में मनाई महाशिवरात्रि, शिव बारात में लिया भाग

भोपाल। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के प्राचीन बड़वाले महादेव मंदिर में पहुंचकर शिवभक्तों के साथ पूजा-अर्चना की और महापर्व को उत्साहपूर्वक मनाया। मुख्यमंत्री ने उपस्थित नागरिकों को महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं दी और सभी के साथ इस पर्व की महत्ता को साझा किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंदिर में भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर अभिषेक किया। पूजा के दौरान स्थानीय शिवभक्तों और युवाओं ने पारंपरिक ढंग से डमरू दल की प्रस्तुति दी, जबकि पुलिस बैंड ने भव्य संगीत के माध्यम से कार्यक्रम को और आकर्षक बनाया। मंदिर परिसर भक्तों की उपस्थिति से गुलजार रहा और हर-हर महादेव के जयघोष से वातावरण मंत्रमुग्ध कर देने वाला था। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शिव बारात का रथ रवाना किया और स्वयं रथ खींचकर बारात की अगुवाई की। स्थानीय नागरिकों ने उत्साह और उमंग के साथ इस बारात में भाग लिया। हर-हर महादेव और जय महाकाल के सामूहिक उद्घोष ने मंदिर परिसर को भक्तिमय माहौल में बदल दिया। महाशिवरात्रि कार्यक्रम में अनेक जनप्रतिनिधि और शिव भक्त भी शामिल हुए। इनमें सांसद श्री आलोक शर्मा, भोपाल की महापौर श्रीमती मालती राय, विधायक श्री भगवानदास सबनानी, श्री रविंद्र यति, श्री राहुल कोठारी सहित महाशिवरात्रि पर्व आयोजन समिति के पदाधिकारी और सदस्य मौजूद थे। सभी ने मिलकर इस धार्मिक महोत्सव में भाग लिया और भक्तों के साथ त्योहार का आनंद साझा किया। कार्यक्रम के दौरान भक्तों ने न केवल भगवान शिव की पूजा अर्चना की, बल्कि पारंपरिक संस्कृति और धार्मिक उत्सव के महत्व को भी महसूस किया। बड़वाले महादेव मंदिर की भव्य सजावट और आयोजन ने इसे और भी खास बना दिया। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन और भागीदारी ने इस पर्व को और भी प्रभावशाली और यादगार बना दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह समाज में भाईचारा, भक्ति और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि पर्व का आनंद ले और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ इसे मनाएं। इस तरह भोपाल के प्राचीन बड़वाले महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि का पर्व श्रद्धा, भक्ति और उमंग के साथ मनाया गया। शिवभक्तों की भीड़, पारंपरिक बारात और मुख्यमंत्री की उपस्थिति ने इस अवसर को और भी विशेष बना दिया।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में महाशिवरात्रि: ब्रह्म मुहूर्त में साधु-संतों ने किए दर्शन, फूलों से सजा परिसर

खंडवा। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में अद्भुत दृश्य देखने को मिला। रविवार की ब्रह्म मुहूर्त में रात तीन बजे से ही मंदिर परिसर भक्तों और साधु-संतों की उपस्थिति से गुलजार रहा। फूलों से सजे भव्य मंदिर में साधु-संतों ने विशेष दर्शन और पूजा की, जिसके बाद आम श्रद्धालुओं के लिए रात 3:30 बजे मंदिर के पट खुले।भक्तों ने मां नर्मदा में स्नान कर ज्योतिर्लिंग पर जल अर्पित किया। इस अवसर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने पुराने पुल से श्रद्धालुओं को मंदिर की ओर प्रवेश कराया, जबकि नए झूला पुल के माध्यम से बाहर निकाला गया। इस व्यवस्था से श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की गई। रात के समय मंगला आरती के बाद मंदिर के कपाट खोले गए। बैंड बाजो की ध्वनि और बम भोले की गूंज के साथ सन्यासी और साधु-संतों ने शोभायात्रा निकाली और सबसे पहले भगवान शिव के दर्शन किए। मंदिर में फूलों की भव्य सजावट ने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। फूलों से सजा परिसर रात और दिन दोनों समय आकर्षण का केंद्र रहा। मंदिर ट्रस्ट की ओर से दोपहर में भोग आरती का आयोजन भी किया गया। इस दौरान भगवान शिव को 151 किलो मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया। इसके साथ ही तीर्थ नगरी के आश्रमों और नगर के विभिन्न हिस्सों में खिचड़ी और प्रसादी का वितरण किया गया, जिससे श्रद्धालुओं में आनंद और धार्मिक उमंग का माहौल बना रहा। मंदिर में यह विश्वास है कि भगवान शिव साक्षात् रूप में ओंकारेश्वर में निवास करते हैं। दिनभर सृष्टि का संचालन करने के बाद वे रात में नर्मदा किनारे विश्राम करते हैं। इसलिए आज मंदिर में चौपड़-पांसे और झूला नहीं सजाया गया और रात में आरती का आयोजन नहीं होगा। महाशिवरात्रि के अवसर पर ओंकारेश्वर में मंदिर प्रशासन और सुरक्षा अधिकारियों ने पूरी तत्परता दिखाई। भारी भीड़ के बावजूद सुव्यवस्थित व्यवस्था और श्रद्धालुओं का सहयोग इसे सफल आयोजन बनाने में सहायक रहा। भक्तों ने कहा कि ओंकारेश्वर में ब्रह्म मुहूर्त में दर्शन करने का अनुभव अलौकिक और अद्वितीय रहा। फूलों से सजे मंदिर परिसर, भव्य शोभायात्रा, और नर्मदा स्नान के साथ जल अर्पण ने इस महापर्व की महिमा को और बढ़ा दिया। यह महाशिवरात्रि न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रही, बल्कि भक्तों के लिए आध्यात्मिक अनुभव और उमंग का केंद्र भी बनी। मंदिर में पवित्र माहौल, सुरक्षा और सुव्यवस्था ने इसे श्रद्धालुओं के लिए यादगार अवसर बना दिया।