UP Cabinet Expansion: योगी कैबिनेट में बड़ा फेरबदल, 6 नए मंत्रियों की एंट्री, 2 मंत्रियों को प्रमोशन

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की Government of Uttar Pradesh में रविवार को बड़ा राजनीतिक फेरबदल देखने को मिला। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के मंत्रिमंडल का दूसरी बार विस्तार किया गया, जिसमें 6 नए चेहरों को शामिल किया गया, जबकि 2 राज्य मंत्रियों को प्रमोशन देकर राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया। राजभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में सबसे पहले भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष Bhupendra Chaudhary ने मंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद समाजवादी पार्टी से बगावत कर चुके विधायक Manoj Pandey ने शपथ ली। दोनों नेताओं को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। इसके अलावा अजीत पाल और सोमेंद्र तोमर को प्रमोशन देकर राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया। वहीं कृष्णा पासवान, कैलाश राजपूत, सुरेंद्र दिलेर और हंसराज विश्वकर्मा को राज्यमंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई है। कृष्णा पासवान की चर्चा इसलिए भी हो रही है क्योंकि राजनीति में आने से पहले वह आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रह चुकी हैं। शपथ ग्रहण के बाद नए मंत्रियों ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। नए मंत्रिमंडल में जातीय और सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश भी दिखाई दी। इसमें एक ब्राह्मण, तीन ओबीसी और दो दलित वर्ग के नेताओं को जगह दी गई है। अब योगी सरकार में मुख्यमंत्री समेत कुल मंत्रियों की संख्या 60 हो गई है। कैबिनेट विस्तार के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। मंत्री पद नहीं मिलने से नाराज भाजपा विधायक आशा मौर्य ने पार्टी पर मौर्य समाज की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि दलबदलू नेताओं को ज्यादा महत्व दिया गया है। वहीं समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा कि “भाजपा राज में CM का मतलब सिर्फ कूरियर मैसेंजर बनकर रह गया है।” उन्होंने कैबिनेट विस्तार को लेकर सरकार पर निशाना साधा और कहा कि फैसले कहीं और से तय होते हैं। उधर, केंद्रीय मंत्री और उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष Pankaj Chaudhary ने नए मंत्रियों को बधाई देते हुए कहा कि सभी मंत्री प्रदेश के विकास और जनता की सेवा के लिए मिलकर काम करेंगे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावों और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए योगी सरकार ने यह विस्तार किया है, जिससे अलग-अलग वर्गों को साधने की कोशिश दिखाई दे रही है।
UP Politics news : योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल विस्तार की हलचल तेज, गोपनीय हस्तांतरण का दौर

UP Politics news : नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है। योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार की कवायद अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक बैठकों और गोपनीय चर्चाओं का दौर जारी है, जिससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि जल्द ही नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा संगठन और सरकार दोनों स्तर पर संतुलन साधने में जुटी है। गोपनीय दौरे ने बढ़ाई सियासी सरगर्मी भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े का हालिया लखनऊ दौरा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। चंद घंटों के इस दौरे में उन्होंने महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह के साथ बंद कमरे में लंबी बैठक की। वहीं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी से फोन पर बातचीत भी की। इस पूरी कवायद को बेहद गोपनीय रखा गया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर रणनीति लगभग तैयार है। दिल्ली में भी बनी रणनीति, हाईकमान की नजर इससे पहले दिल्ली में भी शीर्ष स्तर पर कई अहम बैठकें हो चुकी हैं। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व, जिसमें नरेंद्र मोदी और संगठन के वरिष्ठ नेता शामिल हैं, ने उत्तर प्रदेश के सियासी समीकरणों पर विस्तार से चर्चा की है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद यह संकेत और मजबूत हुआ कि पार्टी बड़े बदलाव के मूड में है। सीमित विस्तार, लेकिन असरदार बदलाव सूत्रों के मुताबिक, मंत्रिमंडल विस्तार बहुत बड़ा नहीं होगा। करीब आधा दर्जन खाली पदों को भरा जा सकता है, जबकि कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभागों में फेरबदल भी संभव है। पार्टी की कोशिश है कि इस विस्तार के जरिए सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधा जाए, ताकि हर वर्ग को प्रतिनिधित्व मिल सके और चुनाव से पहले संगठन को मजबूती मिले। सामाजिक समीकरण पर फोकस संभावित नए मंत्रियों की सूची तैयार कर ली गई है। अब इन नामों को सामाजिक और राजनीतिक समीकरण के हिसाब से अंतिम रूप दिया जा रहा है। भाजपा नेतृत्व चाहता है कि विस्तार ऐसा हो, जिससे पिछड़े, दलित, ब्राह्मण और क्षेत्रीय संतुलन सभी का ध्यान रखा जा सके। यही वजह है कि हर नाम को सावधानी से परखा जा रहा है। जल्द हो सकता है शपथ ग्रहण पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस महीने के अंत तक या अगले महीने की शुरुआत में नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण हो सकता है। यह कार्यक्रम राजभवन में आयोजित किया जा सकता है। इस विस्तार से न केवल सरकार का चेहरा बदलेगा, बल्कि कार्यकर्ताओं में भी नया उत्साह देखने को मिलेगा। चुनाव से पहले बड़ा संदेश माना जा रहा है कि यह मंत्रिमंडल विस्तार 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। इसके जरिए भाजपा यह संदेश देना चाहती है कि वह हर वर्ग और क्षेत्र को साथ लेकर चल रही है।