योगी कार्यकाल में कानून-व्यवस्था का दावा मजबूत: मुठभेड़ों और गिरफ्तारी के आंकड़े बने सुर्खियां

नई दिल्ली /उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों के दौरान कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण को लेकर किए गए पुलिस अभियानों के आंकड़े एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। सामने आए विवरण के अनुसार इस अवधि में राज्यभर में हजारों मुठभेड़ की घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें बड़ी संख्या में अपराधियों की गिरफ्तारी, कई के घायल होने और कुछ मामलों में गंभीर परिणाम देखने को मिले। औसतन हर दिन कई मुठभेड़ होने का दावा किया गया है, जो प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था और पुलिसिंग मॉडल पर व्यापक बहस को जन्म देता है। आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में पुलिस ने संगठित अपराध, गिरोहबंदी और गंभीर आपराधिक गतिविधियों पर लगातार कार्रवाई की है। हजारों मामलों में पुलिस और अपराधियों के बीच टकराव की स्थिति बनी, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया गया। साथ ही कई अपराधी घायल भी हुए, जिससे यह संकेत मिलता है कि कानून-व्यवस्था को लेकर राज्य में सक्रिय और आक्रामक रणनीति अपनाई गई है। इन कार्रवाइयों के दौरान पुलिस बल को भी नुकसान हुआ, जिसमें कुछ कर्मियों की जान जाने और कई के घायल होने की घटनाएं शामिल रहीं। प्रदेश के विभिन्न जोनों में इन कार्रवाइयों का स्तर अलग-अलग रहा। कुछ क्षेत्रों में मुठभेड़ों की संख्या अधिक दर्ज की गई, जबकि कुछ जगहों पर तुलनात्मक रूप से कम घटनाएं सामने आईं। पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जोन इस तरह की कार्रवाइयों में अधिक सक्रिय दिखाई दिए, जहां अपराधियों पर लगातार दबाव बनाए रखने के प्रयास किए गए। इन अभियानों में बड़े अपराधियों को पकड़ने और उनकी गतिविधियों को रोकने पर विशेष जोर दिया गया। इन आंकड़ों के साथ यह भी दावा किया जा रहा है कि पुलिस की सख्ती के चलते संगठित अपराध पर नियंत्रण में मदद मिली है और कई आपराधिक नेटवर्क प्रदेश छोड़ने या निष्क्रिय होने को मजबूर हुए हैं। प्रशासन का कहना है कि कठोर कार्रवाई और कानूनी प्रावधानों के प्रभावी उपयोग से अपराधियों में भय का माहौल बना है। वहीं दूसरी ओर, इस तरह की कार्रवाइयों को लेकर समय-समय पर मानवाधिकार और पुलिसिंग के तरीकों पर सवाल भी उठते रहे हैं, जिससे यह मुद्दा केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित न रहकर सामाजिक और कानूनी बहस का हिस्सा बन गया है। कुल मिलाकर, पिछले नौ वर्षों में सामने आए ये आंकड़े उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर एक व्यापक तस्वीर पेश करते हैं, जिसमें एक तरफ अपराध पर नियंत्रण और पुलिस की सक्रिय भूमिका दिखाई देती है, तो दूसरी तरफ इस रणनीति की प्रकृति और प्रभाव पर अलग-अलग राय भी मौजूद हैं। यह पूरा विषय राज्य में सुरक्षा व्यवस्था के बदलते स्वरूप और उसके परिणामों को समझने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मजदूरों को राहत: न्यूनतम वेतन में 1000 से 3000 रुपये तक इजाफा, नई दरें लागू

नई दिल्ली। नोएडा में चल रहे श्रमिक आंदोलन और तनाव के बीच Yogi Adityanath सरकार ने मजदूरों के हित में बड़ा फैसला लिया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यूनतम मजदूरी में 1000 रुपये से 3000 रुपये तक की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। यह नया शासनादेश 1 अप्रैल 2026 से पूरे राज्य में लागू होगा। नए वेतन दर क्या हैं?सरकार द्वारा तय किए गए नए वेतन के अनुसार Gautam Buddh Nagar और Ghaziabad में अकुशल मजदूरी ₹11,313 से बढ़ाकर 13,690 रुपये कर दी गई है। अर्धकुशल मजदूरी 12,445 रुपये से बढ़कर 15,059 रुपये और कुशल मजदूरी 13,940 रुपये से बढ़कर 16,868 रुपये कर दी गई है। वहीं अन्य नगर निगम क्षेत्रों में अकुशल मजदूरी 13,006, रुपये अर्धकुशल 14,306 रुपये और कुशल रुपये 16,025 तय की गई है। अन्य जिलों में अकुशल मजदूरी रुपये 12,356, अर्धकुशल 13,591 रुपये और कुशल रुपये 15,224 निर्धारित की गई है। मजदूरों को मिली अंतरिम राहतसरकार का कहना है कि यह फैसला श्रमिकों और उद्योगों के बीच संतुलन बनाकर लिया गया है और इससे मजदूरों को फिलहाल अंतरिम राहत मिलेगी। आगे वेज बोर्ड के माध्यम से मजदूरी की व्यापक समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही सरकार ने स्पष्ट किया है कि न्यूनतम वेतन ₹20,000 किए जाने की खबरें पूरी तरह भ्रामक हैं। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर इस तरह की झूठी खबरें फैलाई जा रही हैं, जिनका कोई आधिकारिक आधार नहीं है। सरकार ने बताया कि केंद्र स्तर पर नए लेबर कोड के तहत राष्ट्रीय न्यूनतम ‘फ्लोर वेज’ तय करने की प्रक्रिया जारी है। 20,000 रुपये न्यूनतम वेतन की खबरें गलतमुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने जनता से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें और अफवाहों से बचें। साथ ही नियोक्ताओं से कहा गया है कि वे श्रमिकों को समय पर वेतन, ओवरटाइम का भुगतान, साप्ताहिक अवकाश, बोनस और सामाजिक सुरक्षा के सभी अधिकार सुनिश्चित करें, साथ ही महिला श्रमिकों की सुरक्षा और सम्मान का विशेष ध्यान रखें।