अंतरिक्ष का अनोखा तरीका: बिना गुरुत्वाकर्षण के ऐसे पानी पीते हैं अंतरिक्ष यात्री

नई दिल्ली अंतरिक्ष में, विशेष रूप से अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर, माइक्रोग्रेविटी होती है। अर्थात गुरूत्व बहुत काम होता है। ऐसे तूफ़ान में पानी नीचे गिरा की जगह छोटे-छोटे सोने के पत्तों में तूफ़ान जैसा दिखता है। यही कारण है कि सामान्य कप के रूप में पृथ्वी वहां लाभदायक साबित होती है पानी कप में टिकट ही नहीं। पहले कैसे थे पानी?शुरुआत में एस्ट्रोनॉट्स प्लास्टिक प्लास्टिक और स्ट्रो जैसे टुकड़े का प्रयोग किया जाता था। यह तरीका निश्चित रूप से सुरक्षित था, लेकिन इसमें “घूंट लेकर पीने” जैसा अनुभव नहीं था। फूला या चाय की चटनी और स्वाद भी ठीक नहीं लगता। ‘जीरो-जी कप’ क्या है?इस समस्या का समाधान नासा के एस्ट्रोनॉट डॉन पेटिट ने आउट किया। उन्होंने एक सामान्य खास डिजाइन वाला जीरो-जी कप तैयार किया, जिससे अंतरिक्ष में भी कप की तरह का सिप लेकर पानी या फुला पी जा सकता है। यह कप कैसे काम करता है? (सरल विज्ञान)जीरो-जी कप का जादू दो वैज्ञानिक सिद्धांतों पर रुका है: सतही तनाव (सतह तनाव)केपिलरी एक्शन (केपिलरी एक्शन) कप का डिज़ाइन टियर-ड्रॉप (आंसू) जैसा होता है और इसमें एक चिप गिल्ली (चैनल) बनी होती है। जब भी पानी डाला जाता है, तो वह कप की दीवारों से चिपक जाता हैसैन्सरी नाली का पानी ऊपर की ओर खींचा जाता हैधीरे-धीरे पानी कप के किनारे तक पहुँच जाता है जैसे ही एस्ट्रोनॉट कप को स्टॉक तक बेचा जाता है, पानी खुद ही किनारे पर आ जाता है और वे सामान्य तरीकों से सिप ले सकते हैं। ये खास क्यों है?बिना स्ट्रॉ के पीने का अनुभवफुलाए/चाय की अनुभूति संभव हैतरल पदार्थ का टूटना नहीं होताछलकने का ख़तरा कम मानसिक आराम भी देता हैअंतरिक्ष में लंबे समय तक जीवित रहना मानसिक रूप से परिवर्तनशील होता है। ऐसे में “घर का अनुभव जैसा” – जैसे कप से चाय फ़्रैंक – एस्ट्रोनॉट्स को आराम और सामान्य अनुभव मिलता है। जीरो-जी कप सिर्फ एक पॉश्चर नहीं, बल्कि विज्ञान और जरूरत का सबसे अच्छा मेल है। इसमें दिखाया गया है कि नासा कैसे छोटे-छोटे आवेदकों के लिए भी बड़े-बड़े इनोवेशन करती है-ताकीस्पेस में जीवन आसान और इंसान बनाया जा सके।