करीब पंद्रह साल पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के कार्यकाल में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली थी। हालांकि बाद में एबी रोड पर बीआरटीएस निर्माण हो जाने के कारण एलिवेटेड कॉरिडोर की आवश्यकता और व्यवहारिकता को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रही। लंबे विचार-विमर्श और समीक्षा के बाद मुख्यमंत्री की मंजूरी मिलते ही परियोजना को दोबारा हरी झंडी दी गई और अब कॉरिडोर मार्ग पर बेरिकेडिंग कर काम शुरू कर दिया गया है।
फिलहाल एलआईजी गुरुद्वारा के पास मिट्टी परीक्षण किया जा रहा है। इससे पहले ट्रैफिक सर्वे, प्लानिंग और प्रारंभिक मिट्टी परीक्षण पर ही पांच करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। अब दोबारा परीक्षण कर निर्माण की औपचारिक प्रक्रिया को गति दी जा रही है। छह किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर एलआईजी से नवलखा चौराहे तक बनेगा और इसे पूरा करने में लगभग तीन वर्ष का समय लगने का अनुमान है।
यह प्रोजेक्ट वर्ष 2021 में राजकमल बिल्डर्स को सौंपा गया था और 2024 तक इसके पूरा होने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन ट्रैफिक लोड अपेक्षित 4 प्रतिशत तक नहीं पहुंचने के कारण मामला अटक गया। अनुबंध की शर्तों के अनुसार यदि लोक निर्माण विभाग परियोजना रद्द करता तो सरकार को कंपनी को 30 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ता। इसी कारण दो माह पहले दोबारा समीक्षा कर प्रोजेक्ट को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया गया और अब निर्माण प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
इस महत्वाकांक्षी योजना पर 300 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आएगी। निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग द्वारा किया जा रहा है। हाल ही में नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर परियोजना की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में यह तय किया गया कि तीन प्रमुख चौराहों पर भुजाएं उतारी जाएंगी और ट्रैफिक सुगमता के लिए रोटरी भी बनाई जाएगी।
एलिवेटेड कॉरिडोर बनने से बीआरटीएस मार्ग पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और शहर की यातायात व्यवस्था को नई दिशा मिलेगी। लंबे समय से अटकी इस परियोजना के फिर से शुरू होने से शहरवासियों में उम्मीद जगी है कि इंदौर का यातायात ढांचा और मजबूत होगा तथा विकास की रफ्तार और तेज होगी।