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मिडिल ईस्ट तनाव से बाजार में हाहाकार! सेंसेक्स 1836 अंक टूटा, निवेशकों के डूबे लाखों करोड़


नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू राजनीतिक तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ नजर आया। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली और प्रमुख सूचकांक BSE Sensex और Nifty 50 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट के साथ बंद हुए। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1836.57 अंक यानी 2.46 प्रतिशत टूटकर 72696.39 पर आ गया, जबकि निफ्टी 601.85 अंक यानी 2.60 प्रतिशत गिरकर 22512.65 पर बंद हुआ। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव और युद्ध जैसे हालात ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा है।

निवेशकों को भारी नुकसान, 13.65 लाख करोड़ डूबे

इस बड़ी गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में भारी कमी आई है। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 14 लाख करोड़ रुपए घट गया और यह 428.76 लाख करोड़ रुपए से गिरकर 415.11 लाख करोड़ रुपए रह गया। इंट्रा डे में बाजार और भी ज्यादा दबाव में दिखा, जहां सेंसेक्स एक समय करीब 1974 अंक तक लुढ़क गया था। वहीं, निफ्टी भी 643 अंकों तक गिर गया था। बाजार में घबराहट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि India VIX में 19 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई, जो निवेशकों के बीच बढ़ती चिंता को दर्शाता है।

मिडकैप और स्मॉलकैप में ज्यादा मार, सभी सेक्टर दबाव में

बाजार में गिरावट सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में और ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स करीब 3.90 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स 3.94 प्रतिशत गिरा। सेक्टरवार देखें तो कंस्ट्रक्शन, रियल्टी और मेटल सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। बैंकिंग, ऑटो और एफएमसीजी सेक्टर में भी भारी गिरावट दर्ज की गई, जबकि आईटी सेक्टर में अपेक्षाकृत कम कमजोरी देखने को मिली। यह संकेत देता है कि बाजार में व्यापक स्तर पर बिकवाली हुई है और निवेशकों ने जोखिम भरे एसेट्स से दूरी बनानी शुरू कर दी है।

तेल कीमतें और होर्मुज संकट बने बड़ी वजह

विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल है। Strait of Hormuz में संभावित बाधा से सप्लाई प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 80 प्रतिशत आयात करता है, ऐसे में तेल की कीमतों में तेजी से देश की अर्थव्यवस्था और कंपनियों की कमाई पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते बयानबाजी और संभावित सैन्य कार्रवाई के संकेतों ने बाजार का माहौल और नकारात्मक कर दिया है।

आगे का रुख अनिश्चित, निवेशकों में बढ़ी चिंता

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता, तब तक बाजार में स्थिरता लौटना मुश्किल है। वैश्विक बाजारों के साथ तालमेल के चलते भारत भी इस दबाव से बच नहीं पा रहा है। फिलहाल बाजार का रुख कमजोर बना हुआ है और निवेशकों के लिए सतर्क रहने की जरूरत है। अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो बाजार में और गिरावट देखने को मिल सकती है।

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