आदेश के मुताबिक, प्राइवेट स्कूल प्रबंधन और प्राचार्य बच्चों के माता-पिता को यूनिफॉर्म, जूते, टाई, किताबें या स्टेशनरी खरीदने के लिए निर्धारित दुकानों पर मजबूर नहीं कर सकते। इस कदम के पीछे यह वजह है कि वर्तमान में कई स्कूल पेरेंट्स को केवल कुछ चुनिंदा दुकानों से ही सामान खरीदने के लिए बाध्य करते हैं।
कलेक्टर ने हर अनुभाग में 5 सदस्यीय टीम गठित की है। टीम में संबंधित एसडीएम, तहसीलदार और सरकारी स्कूल के प्राचार्य शामिल हैं। इन टीमों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि नए सत्र में किसी भी स्कूल द्वारा पेरेंट्स पर दबाव न डाला जाए।
स्कूलों की स्थिति और टाइमलाइन:
अभी स्कूलों में परीक्षाएं चल रही हैं, जो मार्च तक जारी रहेंगी। अप्रैल में स्कूल फिर से खुलेंगे और इस दौरान अक्सर पेरेंट्स पर यूनिफॉर्म और बुक्स खरीदने का दबाव बनाया जाता है। पिछले साल भी कलेक्टर ने इसी प्रकार का आदेश जारी किया था, ताकि पेरेंट्स की परेशानियों को कम किया जा सके।
जिम्मेदार टीमों के विवरण:
एमपी नगर: एसडीएम एलके खरे, तहसीलदार दीपक कुमार द्विवेदी, प्राचार्य एसके खांडेकर, वंदना शुक्ला, नूतन सक्सेना।
टीटी नगर: एसडीएम अर्चना शर्मा, तहसीलदार कुणाल राउत, प्राचार्य अभिषेक बैंस, सरला कश्यप, मनोज रोहतास।
कोलार: एसडीएम पीसी पांडेय, तहसीलदार एनएस परमार, प्राचार्य आरके यादव, शीला मौर्य, बीआरसी रूपाली रिछारिया।
शहर वृत्त: एसडीएम दीपक पांडेय, तहसीलदार रामप्रकाश पांडे, प्राचार्य एसके उपाध्याय, एसएस सिसौदिया, बीआरसी अमित श्रीवास्तव।
बैरागढ़: एसडीएम रविशंकर राय, तहसीलदार हर्षविक्रम सिंह, प्राचार्य अनामिका खरे, नीलम बसानिया, वेरोनिका मंडल।
गोविंदपुरा: एसडीएम भुवन गुप्ता, तहसीलदार सौरभ वर्मा, प्राचार्य विनोद राजोरिया, स्मिता मेश्राम, चक्रेश कुमार जैन।
हुजूर: एसडीएम विनोद सोनकिया, तहसीलदार आलोक पारे, प्राचार्य सुनीता जैन, रचना श्रीवास्तव, अमिता शर्मा।
बैरसिया: एसडीएम आशुतोष शर्मा, तहसीलदार दिलीप चौरसिया, बीईओ आरएन श्रीवास्त्री, प्राचार्य गीता जोशी, बृजेंद्र कुमार कटारे।
कलेक्टर ने इन टीमों को निर्देश दिए हैं कि जैसे ही किसी पेरेंट्स की शिकायत मिले, तुरंत कार्रवाई करें। स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने में देरी न हो।
इस आदेश का उद्देश्य है कि नए शिक्षा सत्र में पेरेंट्स पर अनावश्यक दबाव न डाला जाए, और बच्चों की पढ़ाई और स्कूली माहौल सुचारू रूप से चले। जिला प्रशासन का यह कदम पेरेंट्स की राहत और शिक्षा में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।