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होली की आग से दूर रहें ये महिलाएं: साल 2026 का चंद्र ग्रहण और होलिका दहन, भूलकर भी न करें ये गलतियां!


नई दिल्ली। भारतीय संस्कृति में होली का त्यौहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। फाल्गुन पूर्णिमा की रात को जब होलिका का दहन किया जाता है, तो इसके साथ ही नकारात्मक शक्तियों के अंत और नई ऊर्जा के आगमन की कामना की जाती है। हालांकि, साल 2026 का होलिका दहन बेहद खास और संवेदनशील है, क्योंकि इसी दिन चंद्र ग्रहण का संयोग भी बन रहा है। इस खगोलीय घटना के कारण इंटरनेट पर 2 मार्च और 3 मार्च की तारीखों को लेकर खासी बहस छिड़ी हुई है। लेकिन तिथियों के इस भ्रम के बीच एक बड़ा सवाल यह भी है कि आखिर किन लोगों के लिए जलती हुई होली को देखना वर्जित है?

अक्सर लोग जानते हैं कि नई दुल्हन को शादी के बाद पहली होली नहीं देखनी चाहिए, लेकिन शास्त्रों और लोक मान्यताओं के अनुसार कुछ अन्य महिलाओं और बच्चों के लिए भी होलिका दहन की अग्नि के दर्शन शुभ नहीं माने जाते।

सबसे पहले बात करें गर्भवती महिलाओं की, तो उन्हें होलिका दहन से पूरी तरह दूर रहने की सलाह दी जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार, यह अग्नि भक्त प्रहलाद को जलाने के लिए जलाई गई थी, जो एक नकारात्मक भाव का प्रतीक है। ज्योतिषीय और वैज्ञानिक दोनों दृष्टिकोणों से, अग्नि का तीव्र ताप और उससे निकलने वाला धुआं गर्भवती महिला और गर्भस्थ शिशु के मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। ऐसी महिलाओं को होलिका की परिक्रमा करने से भी बचना चाहिए।

इसी तरह, नवजात शिशुओं को भी होलिका दहन के स्थान पर नहीं ले जाना चाहिए। माना जाता है कि पूर्णिमा की इस रात को नकारात्मक शक्तियां अत्यंत प्रबल होती हैं, जिससे छोटे बच्चों को “बुरी नजर” लगने का खतरा रहता है। उनकी कोमल सेहत के लिए धुआं और शोर भी हानिकारक हो सकता है।

एक दिलचस्प सामाजिक मान्यता सास-बहू के रिश्ते को लेकर भी है। कई क्षेत्रों में यह माना जाता है कि सास और बहू को कभी भी एक साथ खड़े होकर होलिका दहन नहीं देखना चाहिए। ऐसा करने से उनके आपसी रिश्तों में खटास आ सकती है और घर में कलह का वातावरण बन सकता है। परिवार की सुख-शांति के लिए दोनों का एक साथ वहां मौजूद होना वर्जित बताया गया है।

इसके अलावा, इकलौती संतान की मां को भी होलिका दहन देखने से परहेज करना चाहिए। इसके पीछे का तर्क भक्त प्रहलाद से जुड़ा है, जो अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। अंत में, ऐसी लड़कियां जिनकी शादी तय हो चुकी है और कुछ ही महीनों में उनका विवाह होने वाला है, उन्हें भी जलती हुई होली देखने से बचना चाहिए। चूंकि वे जीवन के एक नए और मांगलिक पड़ाव में कदम रखने जा रही हैं, इसलिए उन्हें इस “दहन” की प्रक्रिया से दूर रहकर केवल सकारात्मक उत्सवों में ही भाग लेना चाहिए।

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