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समुद्री जीवन की लाइफलाइन ‘कोरल रीफ’ पर संकट, समझिए कोरल ब्लीचिंग का असर


नई दिल्ली।समुद्र की गहराइयों में मौजूद कोरल रीफ यानी मूंगा चट्टानें प्रकृति की सबसे अद्भुत और जीवंत संरचनाओं में गिनी जाती हैं। इन्हें ‘समुद्र का वर्षावन’ भी कहा जाता है, क्योंकि ये बेहद कम क्षेत्र में फैली होने के बावजूद समुद्री जैव-विविधता का बड़ा आधार हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, दुनिया के महासागरों के सिर्फ 1 प्रतिशत हिस्से में मौजूद ये रीफ करीब 25 प्रतिशत समुद्री जीवों को आश्रय, भोजन और सुरक्षा प्रदान करती हैं। छोटे-छोटे जीवों यानी पॉलिप्स द्वारा हजारों साल में बनने वाली ये संरचनाएं समुद्र की पारिस्थितिकी को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाती हैं।

कोरल रीफ केवल जैव-विविधता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। ये चट्टानें समुद्री तूफानों और चक्रवातों की तीव्रता को कम कर तटों को क्षरण से बचाती हैं। इसके अलावा, मत्स्य पालन, पर्यटन और शोध गतिविधियों के जरिए ये वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देती हैं। ऑस्ट्रेलिया में स्थित ग्रेट बैरियर रीफ दुनिया की सबसे बड़ी कोरल रीफ है, जो हजारों समुद्री प्रजातियों का घर है और लाखों लोगों की आजीविका का आधार बनी हुई है।

क्या है कोरल और रीफ में अंतर?

वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो ‘रीफ’ समुद्र तल से ऊपर उठी किसी भी संरचना को कहा जाता है, जबकि ‘कोरल’ सूक्ष्म जीव होते हैं जो कैल्शियम कार्बोनेट का ढांचा बनाते हैं। इन कोरल के समूह को ‘कोरल कॉलोनी’ कहा जाता है और जब ये बड़े पैमाने पर संरचना बनाते हैं, तो उसे कोरल रीफ कहा जाता है। कोरल मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं—कठोर और कोमल। कठोर कोरल ही रीफ का मजबूत ढांचा तैयार करते हैं।

क्यों खतरनाक है ‘कोरल ब्लीचिंग’?

आज इन खूबसूरत संरचनाओं पर सबसे बड़ा खतरा कोरल ब्लीचिंग का मंडरा रहा है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें समुद्र का तापमान बढ़ने पर कोरल अपने अंदर मौजूद ‘जूक्सैन्थेली’ नामक शैवाल को बाहर निकाल देते हैं। यही शैवाल कोरल को रंग और पोषण देता है। इसके निकलने से कोरल का रंग सफेद हो जाता है और वह कमजोर पड़ जाता है। यदि तापमान लंबे समय तक अधिक बना रहे, तो कोरल की मृत्यु भी हो सकती है।

हाल के वर्षों में यह समस्या तेजी से बढ़ी है। 2023 से 2025 के बीच हुई वैश्विक ब्लीचिंग घटना ने दुनिया के लगभग 84 प्रतिशत कोरल रीफ को प्रभावित किया, जो अब तक की सबसे गंभीर स्थिति मानी जा रही है। इसके अलावा प्रदूषण, समुद्री गाद और जलवायु परिवर्तन भी इस संकट को और गहरा कर रहे हैं।

क्यों जरूरी है संरक्षण?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोरल रीफ खत्म होते हैं, तो इसका असर सिर्फ समुद्री जीवन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तटीय आबादी, खाद्य सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गहरा प्रभाव पड़ेगा। इसलिए इनका संरक्षण बेहद जरूरी है। समुद्र के इस ‘जीवंत खजाने’ को बचाने के लिए जलवायु परिवर्तन पर नियंत्रण, प्रदूषण कम करना और सतत विकास के उपाय अपनाना समय की मांग है।

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