नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सिम बाइंडिंग नियमों को लागू करने की 28 फरवरी की समय सीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया है। 1 मार्च से लागू होने जा रहे इन नए प्रावधानों के तहत यदि मोबाइल फोन में वह सक्रिय सिम कार्ड मौजूद नहीं है जिससे मैसेजिंग ऐप रजिस्टर है तो WhatsApp Telegram और Signal जैसे ऐप्स का उपयोग सीमित या बंद हो सकता है। सरकार का कहना है कि यह कदम साइबर फ्रॉड फर्जी नंबरों और डिजिटल धोखाधड़ी पर रोक लगाने के लिए उठाया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा पहले की नीति के तहत सिम बाइंडिंग नियमों में कोई ढील नहीं दी जाएगी।
क्या होगा बड़ा बदलाव? नए नियमों के अनुसार:
क्या होगा बड़ा बदलाव? नए नियमों के अनुसार:
जिस सिम से अकाउंट रजिस्टर है उसका मोबाइल में सक्रिय रहना जरूरी होगा। यदि सिम मौजूद नहीं है तो ऐप की सेवाएं बाधित हो सकती हैं। WhatsApp Web या कंप्यूटर लॉगिन हर 6 घंटे में स्वतः लॉगआउट हो जाएगा। दोबारा उपयोग के लिए QR कोड स्कैन करना होगा। भारत में करोड़ों यूजर्स एक ही नंबर से कई डिवाइस पर WhatsApp चलाते हैं। ऐसे में जिन यूजर्स ने अलग अलग डिवाइस पर अकाउंट एक्टिव कर रखा है या जो बार बार सिम बदलते रहते हैं वे सीधे तौर पर प्रभावित हो सकते हैं।
छोटे कारोबारियों पर असर
विशेषज्ञों का अनुमान है कि 60–80% तक छोटे व्यवसाय जो WhatsApp आधारित संचार और ऑर्डर मैनेजमेंट पर निर्भर हैं उन्हें शुरुआती दिनों में ऑपरेशनल दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। खासतौर पर वे बिजनेस जो एक नंबर को कई सिस्टम पर चलाते हैं उन्हें हर कुछ घंटों में दोबारा लॉगिन की प्रक्रिया अपनानी होगी।
सिर्फ WhatsApp नहीं व्यापक असर
यह बदलाव केवल एक ऐप तक सीमित नहीं है। Telegram Signal और अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म भी इसके दायरे में बताए जा रहे हैं। यानी यह डिजिटल कम्युनिकेशन सिस्टम में एक बड़ा नीतिगत परिवर्तन साबित हो सकता है। फिलहाल सरकार अपने फैसले पर अडिग नजर आ रही है। 1 मार्च की डेडलाइन को लेकर टेक कंपनियों और करोड़ों यूजर्स की नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि नियमों का क्रियान्वयन किस स्तर पर और किस सख्ती से किया जाता है और आम यूजर्स के डिजिटल अनुभव में कितना बदलाव आता है।