जानकारी के अनुसार, ईरान में चल रहे संघर्ष के कारण पेट्रोलियम सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे इन बैग्स का उत्पादन और आपूर्ति बाधित हो गई है। इसका सीधा असर गेहूं खरीदी प्रक्रिया पर पड़ा है। सीहोर जिले के किसान, जो अपने शरबती गेहूं के लिए प्रसिद्ध हैं, इस स्थिति से सबसे अधिक प्रभावित हैं। रफीकगंज के किसान अवध नारायण का कहना है कि उन्होंने 20 एकड़ में गेहूं की खेती की है। पिछले साल इस समय तक खरीदी और भुगतान दोनों हो चुके थे, लेकिन इस बार फसल कटने के बाद भी खेतों में पड़ी है, जिससे भंडारण की समस्या बढ़ रही है। वहीं किसान नरेश परमार बताते हैं कि फसल कटे करीब एक महीना हो चुका है, लेकिन खरीदी में देरी के कारण उन्हें रोज खेतों की निगरानी करनी पड़ रही है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस साल गेहूं खरीदी के लिए करीब 15.60 करोड़ बारदानों की जरूरत है, जबकि अभी केवल 5.50 करोड़ बारदाने ही उपलब्ध हैं। यानी लगभग 10 करोड़ से ज्यादा की कमी बनी हुई है। वेयरहाउस संचालकों के अनुसार, इस बार जूट और पीपी दोनों तरह के बैग समय पर नहीं मिल पाए, जिससे पूरी व्यवस्था प्रभावित हो गई है।
हालांकि सरकार ने बारदाने की आपूर्ति के लिए टेंडर जारी कर दिए हैं और जल्द स्थिति सामान्य होने का भरोसा दिलाया है। दूसरी ओर, विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए तैयारी में लापरवाही का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेता कुणाल चौधरी ने सवाल उठाया कि जब हर साल मार्च में खरीदी होती है, तो पहले से पर्याप्त तैयारी क्यों नहीं की गई। इस पूरी स्थिति का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ रहा है, जिन्होंने कर्ज लेकर फसल तैयार की है और अब बिक्री में देरी के चलते आर्थिक दबाव झेल रहे हैं।