कहां बना है भारत का पहला परमाणु संयंत्र
भारत का पहला परमाणु एनर्जी संयंत्र तारापुर परमाणु एनर्जी स्टेशन महाराष्ट्र के पालघर जिले में स्थित है. यह मुंबई के पास स्थित है और इसे 28 अक्टूबर 1969 को शुरू किया गया था. इस संयंत्र की स्थापना के पीछे उद्देश्य था कि देश को स्वच्छ और लॉन्ग टर्म एनर्जी उपलब्ध कराई जा सके. तारापुर में दो उबलते जल रिएक्टर लगे हुए थे, जिनकी कुल क्षमता लगभग 200 मेगावाट थी. जब यह संयंत्र चालू हुआ, तब यह एशिया का दूसरा सबसे बड़ा परमाणु एनर्जी स्टेशन था. इस संयंत्र के जरिए भारत ने परमाणु एनर्जी के क्षेत्र में अपनी तकनीकी क्षमता साबित की और दुनिया के लिए अपनी वैज्ञानिक उपलब्धियों को भी दिखाया.
यह अब भी कितनी बिजली करता है पैदा?
तारापुर परमाणु एनर्जी संयंत्र की यूनिट 1 अब 160 मेगावाट बिजली उत्पादन कर रही है. इसके अलावा, यूनिट 2 का नवीनीकरण भी अंतिम चरण में है और उसे जुड़ने के बाद कुल उत्पादन और बढ़कर लगभग 200 मेगावाट से ज्यादा हो जाएगा. तारापुर संयंत्र ने वर्षों तक देश को स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराई. हाल ही में इस संयंत्र की यूनिट 1 का रिनोवेशन किया गया और अब यह फिर से 160 मेगावाट बिजली उत्पादन कर रही है. यह उपलब्धि इसलिए खास है क्योंकि यह पूरी तरह भारतीय तकनीक से पुरानी यूनिट को नया जीवन देने का पहला प्रयास है.
यूनिट 1 के नवीनीकरण में छह साल का समय लगा. इसमें रिएक्टर की पाइपिंग, टरबाइन जनरेटर और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम को अपग्रेड किया गया. इसके अलावा, 3डी लेजर स्कैनिंग, जंग-रोधी सामग्री, नई सुरक्षा प्रणालियां और कंट्रोल रूम का आधुनिकीकरण भी किया गया. संयंत्र का संचालन न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड करता है. अधिकारियों का कहना है कि यूनिट 2 का नवीनीकरण भी अंतिम चरण में है और आने वाले महीनों में इसे भी राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ दिया जाएगा.
भारत की एनर्जी सुरक्षा और स्वच्छ एनर्जी में योगदान
तारापुर संयंत्र की नई तकनीक और नवीनीकरण ने न केवल बिजली उत्पादन बढ़ाया है, बल्कि देश को स्वच्छ एनर्जी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद की है. इससे कोयला आधारित बिजली पर निर्भरता कम होगी और कार्बन एमिशन में भी कमी आएगी. विशेषज्ञों के अनुसार, इस सफलता से भविष्य में पुराने रिएक्टरों का नवीनीकरण आसान होगा.