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सिनेमा, संघर्ष और सपनों पर खुलकर बोलीं श्रेया पिलगांवकर, कहा- मुंबई ने लाखों कलाकारों को दी नई पहचान

नई दिल्ली। सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सपनों, संघर्षों और भावनाओं को जोड़ने वाली एक ऐसी दुनिया है जो लाखों लोगों को नई पहचान देती है। इसी सोच को लेकर एक विशेष फिल्म कार्यक्रम के दौरान अभिनेत्री श्रेया पिलगांवकर ने अपने अनुभव, सिनेमा के बदलते स्वरूप और मुंबई से जुड़े भावनात्मक रिश्ते पर खुलकर बात की। इस दौरान उन्होंने फिल्मों, कलाकारों और नए दौर के कंटेंट को लेकर अपने विचार साझा किए, जिसने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा।

अपने संबोधन के दौरान श्रेया ने मुंबई को केवल एक शहर नहीं बल्कि एक भावना बताया। उन्होंने कहा कि यह शहर वर्षों से लोगों को बड़े सपने देखने की प्रेरणा देता आया है और उन्हें पूरा करने की ताकत भी देता है। देशभर से आने वाले लाखों लोग यहां अपने करियर, पहचान और भविष्य की तलाश लेकर पहुंचते हैं और यही शहर उन्हें अवसर देने का काम करता है। मुंबई की यही खासियत इसे अन्य शहरों से अलग बनाती है।

उन्होंने अपने निजी जीवन और पारिवारिक माहौल को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि बचपन से ही उनके आसपास कहानियों, अभिनय और सिनेमा का वातावरण रहा है। ऐसे माहौल में पले-बढ़ने से कला के प्रति स्वाभाविक लगाव पैदा हुआ। उन्होंने यह भी माना कि परिवार से मिली प्रेरणा ने उनके अभिनय सफर को दिशा देने में बड़ी भूमिका निभाई है। कलाकारों के लंबे और सक्रिय करियर को लेकर उन्होंने कहा कि जुनून और समर्पण के साथ कला से जीवनभर जुड़े रहना संभव है।

बदलते दौर में मनोरंजन की दुनिया को लेकर भी उन्होंने अपनी राय रखी। उनका मानना है कि समय के साथ कंटेंट देखने और प्रस्तुत करने के तरीके में बड़ा बदलाव आया है। अब कलाकारों के सामने पहले की तुलना में ज्यादा अवसर मौजूद हैं। नए माध्यमों और नई कहानियों ने कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए विस्तृत मंच प्रदान किया है। इस बदलाव से युवा कलाकारों को भी अपनी पहचान बनाने का अवसर मिल रहा है।

उन्होंने इस दौरान थिएटर और मंचीय कलाकारों के महत्व पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि दर्शकों को फिल्मों और डिजिटल माध्यमों के साथ-साथ रंगमंच और अन्य कला रूपों को भी समर्थन देना चाहिए। कला के हर रूप का अपना महत्व होता है और विविध मंचों को समर्थन मिलने से रचनात्मकता को नई दिशा मिलती है।

सोशल मीडिया को लेकर भी उन्होंने संतुलित सोच रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि आज के समय में अक्सर नकारात्मक विषय अधिक चर्चा में रहते हैं, जबकि अच्छी कहानियों और सकारात्मक कार्यों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। दर्शकों के समर्थन से ही बेहतर और मजबूत कंटेंट आगे बढ़ सकता है।

फिलहाल श्रेया पिलगांवकर अपने आगामी प्रोजेक्ट्स को लेकर भी उत्साहित नजर आ रही हैं। आने वाले समय में उनके नए काम दर्शकों के सामने होंगे, जिससे उनके प्रशंसकों की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। सिनेमा और कला के प्रति उनका यह नजरिया कई युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।

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