बीआरटीएस मार्ग पर बदलेगा ट्रैफिक का चेहरा, इंदौर में एलिवेटेड कॉरिडोर निर्माण की फिर से हुई शुरुआत

इंदौर शहर में लंबे समय से प्रतीक्षित एलिवेटेड कॉरिडोर प्रोजेक्ट आखिरकार जमीन पर उतरता दिखाई दे रहा है। बीआरटीएस मार्ग पर बनने वाले इस बहुप्रतीक्षित कॉरिडोर का काम फिर से शुरू हो गया है और मशीनों की गूंज के साथ मिट्टी परीक्षण की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। करीब चार साल पहले गुजरात की कंपनी राजकमल बिल्डर्स को इस प्रोजेक्ट का ठेका दिया गया था, लेकिन विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से यह योजना अधर में लटक गई थी। अब एक बार फिर निर्माण की कवायद तेज हो गई है। करीब पंद्रह साल पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के कार्यकाल में इस प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली थी। हालांकि बाद में एबी रोड पर बीआरटीएस निर्माण हो जाने के कारण एलिवेटेड कॉरिडोर की आवश्यकता और व्यवहारिकता को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रही। लंबे विचार-विमर्श और समीक्षा के बाद मुख्यमंत्री की मंजूरी मिलते ही परियोजना को दोबारा हरी झंडी दी गई और अब कॉरिडोर मार्ग पर बेरिकेडिंग कर काम शुरू कर दिया गया है। फिलहाल एलआईजी गुरुद्वारा के पास मिट्टी परीक्षण किया जा रहा है। इससे पहले ट्रैफिक सर्वे, प्लानिंग और प्रारंभिक मिट्टी परीक्षण पर ही पांच करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। अब दोबारा परीक्षण कर निर्माण की औपचारिक प्रक्रिया को गति दी जा रही है। छह किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर एलआईजी से नवलखा चौराहे तक बनेगा और इसे पूरा करने में लगभग तीन वर्ष का समय लगने का अनुमान है। यह प्रोजेक्ट वर्ष 2021 में राजकमल बिल्डर्स को सौंपा गया था और 2024 तक इसके पूरा होने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन ट्रैफिक लोड अपेक्षित 4 प्रतिशत तक नहीं पहुंचने के कारण मामला अटक गया। अनुबंध की शर्तों के अनुसार यदि लोक निर्माण विभाग परियोजना रद्द करता तो सरकार को कंपनी को 30 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ता। इसी कारण दो माह पहले दोबारा समीक्षा कर प्रोजेक्ट को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया गया और अब निर्माण प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना पर 300 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आएगी। निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग द्वारा किया जा रहा है। हाल ही में नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर परियोजना की प्रगति की समीक्षा की। बैठक में यह तय किया गया कि तीन प्रमुख चौराहों पर भुजाएं उतारी जाएंगी और ट्रैफिक सुगमता के लिए रोटरी भी बनाई जाएगी। एलिवेटेड कॉरिडोर बनने से बीआरटीएस मार्ग पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और शहर की यातायात व्यवस्था को नई दिशा मिलेगी। लंबे समय से अटकी इस परियोजना के फिर से शुरू होने से शहरवासियों में उम्मीद जगी है कि इंदौर का यातायात ढांचा और मजबूत होगा तथा विकास की रफ्तार और तेज होगी।
US-ईरान तनाव के बीच अलर्ट: भारतीय दूतावास, तेहरान ने भारतीयों से तुरंत ईरान छोड़ने को कहा

नई दिल्ली । मध्य पूर्व में तेजी से बदलते हालात और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने 23 फरवरी 2026 को एक अहम एडवाइजरी जारी कर ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों से तुरंत देश छोड़ने की अपील की है। दूतावास ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए छात्र, तीर्थयात्री, व्यापारी और पर्यटक उपलब्ध सभी साधनों, विशेषकर वाणिज्यिक उड़ानों, का उपयोग कर जल्द से जल्द ईरान से बाहर निकलने की योजना बनाएं। यह सलाह पहले 5 जनवरी और 14 जनवरी को जारी परामर्शों की निरंतरता में दोहराई गई है, लेकिन इस बार लहजा अधिक सतर्क और गंभीर है। दूतावास ने अपनी आधिकारिक एडवाइजरी में कहा है कि ईरान में स्थिति तेजी से बदल रही है और किसी भी संभावित आपात परिस्थिति से बचने के लिए एहतियात बरतना बेहद जरूरी है। भारतीय नागरिकों को विरोध प्रदर्शनों और भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर रहने, स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और दूतावास के साथ लगातार संपर्क में बने रहने की सलाह दी गई है। साथ ही सभी से अपने पासपोर्ट, वीजा और अन्य पहचान दस्तावेज तैयार रखने को कहा गया है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तुरंत यात्रा की जा सके। दूतावास ने यह भी दोहराया है कि जिन भारतीयों ने अभी तक अपने प्रवास का पंजीकरण नहीं कराया है, वे तुरंत आधिकारिक लिंक के माध्यम से रजिस्ट्रेशन कराएं। यदि इंटरनेट कनेक्टिविटी में बाधा आ रही हो तो भारत में रह रहे उनके परिजन पंजीकरण प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। किसी भी आपात स्थिति में सहायता के लिए दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर +989128109115, +989128109109, +989128109102 और +989932179359 जारी किए हैं। इसके अलावा cons.tehran@mea.gov.in पर ईमेल के माध्यम से भी संपर्क किया जा सकता है। दूतावास ने भरोसा दिलाया है कि भारतीय समुदाय की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। दरअसल, यह एडवाइजरी ऐसे समय आई है जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंचता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को नए परमाणु समझौते पर सहमति के लिए सीमित समय का अल्टीमेटम दिया है और चेतावनी दी है कि विफलता की स्थिति में कड़े परिणाम भुगतने होंगे। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने मध्य पूर्व क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है, जिसमें युद्धपोत, फाइटर जेट्स और अन्य रणनीतिक संसाधन शामिल हैं। दूसरी ओर, ईरान में विरोध प्रदर्शन और झड़पों की खबरों ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं होते तो क्षेत्र में सैन्य टकराव की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे परिदृश्य में भारतीय दूतावास का यह कदम एहतियाती और रणनीतिक दोनों ही दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बदलती परिस्थितियों के बीच भारतीय नागरिकों से अपील की गई है कि वे अफवाहों से बचें, केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और अपनी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
अमिताभ बच्चन का बड़ा एलान: अब संडे को 'जलसा' के बाहर नहीं दिखेगी प्रशंसकों की भीड़, महानायक ने कहा- अपनी एनर्जी बचाकर रखें

नई दिल्ली।भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ परंपराएं ऐसी हैं, जो केवल एक रस्म नहीं बल्कि भावना बन चुकी हैं। इन्हीं में से एक है हर रविवार की शाम मुंबई के ‘जलसा’ बंगले के बाहर उमड़ने वाला वह जनसैलाब, जो अपने प्रिय महानायक अमिताभ बच्चन की एक झलक पाने के लिए घंटों इंतजार करता है। पिछले कई दशकों से यह सिलसिला बिना रुके चला आ रहा है कि बिग बी अपने घर के गेट पर आते हैं, हाथ हिलाकर फैंस का अभिवादन करते हैं और उनके प्यार का शुक्रिया अदा करते हैं। लेकिन हाल ही में जो खबर आई है, उसने हजारों प्रशंसकों को मायूस कर दिया है। बिग बी ने खुद इस बात का संकेत दिया है कि बरसों से चली आ रही यह “संडे परंपरा” अब टूटने के कगार पर है या कम से कम इसमें एक बड़ा विराम लगने वाला है। अमिताभ बच्चन केवल सोशल मीडिया पर ही नहीं, बल्कि अपने व्यक्तिगत ब्लॉग और टम्बलर Tumblr पर भी अपने फैंस से सीधा संवाद करते हैं। अपनी हालिया पोस्ट में उन्होंने एक ऐसी जानकारी साझा की जिसने सबको चौंका दिया। अमिताभ ने लिखा कि काम का दबाव और कुछ अन्य व्यस्तताओं के कारण अब संडे का वह ब्रेक लेना अनिवार्य हो गया है। उन्होंने बड़े ही भावुक शब्दों में अपनी असमर्थता जाहिर करते हुए कहा कि, “काम कुछ जोश के साथ चल रहा है… लेकिन एक लेकिन आ जाता है। संडे का ब्रेक लेना अब जरूरी है। अफसोस की बात है कि जलसा के गेट पर अब मुलाकात नहीं होगी। उन्होंने अपने फैंस से अपील की कि वे दूर-दराज से आने वाली अपनी ऊर्जा और समय बचाकर रखें और सही समय आने पर वे फिर से मिलेंगे। इस खबर के बीच एक सुखद पहलू यह भी सामने आया कि अमिताभ बच्चन भले ही भीड़ से न मिल पा रहे हों, लेकिन वे अपने करीबियों और पड़ोसियों का ख्याल रखना नहीं भूलते। हाल ही में उनके पड़ोसी निर्मित जेसरानी ने जब उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलने की इच्छा जताई, तो सुपरस्टार ने न केवल उन्हें अपने घर आमंत्रित किया, बल्कि उनके साथ समय भी बिताया। निर्मित ने बताया कि उनके लिए 8 फरवरी का दिन ऐतिहासिक बन गया जब बिग बी ने उन्हें ऑटोग्राफ दिया और अपनी फोटो वाली एक टी-शर्ट भेंट की। शाम 5 बजे जलसा में हुई इस खास मुलाकात ने यह साबित कर दिया कि महानायक का अपने चाहने वालों के प्रति स्नेह आज भी उतना ही गहरा है। हालांकि, आम प्रशंसकों के लिए रविवार का दिन अब पहले जैसा नहीं रहेगा। जलसा के बाहर वह गेट, जो हर रविवार को किसी मंदिर के कपाट की तरह खुलता था, अब बंद रहेगा। बिग बी ने अपने इस फैसले के पीछे बढ़ती उम्र, काम की थकान और शांति की तलाश को मुख्य कारण बताया है। उनके इस संदेश के बाद सोशल मीडिया पर उनके फैंस उनकी सेहत और सलामती की दुआएं कर रहे हैं, इस उम्मीद में कि जल्द ही वह रविवार फिर आएगा जब महानायक अपनी बालकनी से मुस्कराते हुए हाथ हिलाएंगे।
मप्र में मुकुंदपुर जू का एवियारी विदेशी पक्षियों से हुआ गुलजार

भोपाल। मध्य प्रदेश के मैहर जिले के मुकुंदपुर में स्थित महाराजा मारतन्द सिंह जू देव वाईट टाइगर सफारी (मुकुंदपुर) का वॉक इन एवियारी विभिन्न प्रजातियों के रंगे-बिरंगे प्रवासी पक्षियों से गुलजार हो गया है। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने रविवार को मैहर जिले के प्रवास के दौरान मुकुंदपुर जू का निरीक्षण किया। इस दौरान उनकी उपस्थिति में जू में लाए गए विदेशी प्रजाति के पक्षी भी उनके रहवास में छोड़े गए। नॉर्दन कोलफील्ड्स लिमिटेड सिगरोली द्वारा सीएसआर मद से मुकुंदपुर को प्रदाय किए गए नए विदेशी पक्षियों को वॉक इन एवियारी के अंदर प्राकृतिक निवास पर छोड़ा गया। वन्यजीव संरक्षण के लिए मुकुंदपुर जू के एवीयरी मे अब नये प्रजाति के रंग बिरंगे पक्षी आ चुके है, जिनमें रेड स्कारलेट मैकॉ, रेड ग्रीन विंग्ड मैकॉ, सल्फर-क्रेस्टेड कॉकाटू, ब्लू गोल्ड मैकॉ, हैनस मैकॉ, अफ्रीकन ग्रे पैरोट, ग्रैंड इलेक्टस, सन कोनूर, कॉकेटियल्स, और लव बर्ड शामिल हैं। नये पक्षियों के आगमन से पर्यटक को अब और अधिक विदेशी प्रजाति के पक्षी देखने को मिलेंगे।उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने भ्रमण के दौरान पक्षियों के सरंक्षण के प्रयासो की सराहना की। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने रीवा जिले के हरिहरपुर में की जा रही प्राकृतिक खेती का भी अवलोकन किया। इस मौके पर सीसीएफ राजेश राय, वन मंडल अधिकारी विद्या भूषण मिश्रा उपस्थिति रहे।
मप्र में कलेक्टर्स की अनदेखी के चलते 20 जिलों में 77 करोड़ की 33 सरकारी संपत्तियों पर वक्फ बोर्ड का कब्जा

भोपाल। मध्य प्रदेश के 20 जिलों में 77 करोड़ रुपये की 33 सरकारी संपत्तियों का मालिक वक्फ बोर्ड है। वक्फ बोर्ड के नाम पर ये संपत्तियां जिला कलेक्टरों की अनदेखी और लापरवाही की वजह से हुई हैं। इसके अलावा लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने रायसेन जिले में साढ़े चार किलोमीटर लंबी सड़क ऐसी जगह बना दी, जो कुछ दिन बाद डूब क्षेत्र में आने वाला था। साथ ही विदिशा और नर्मदापुरम जिले में स्वीकृति से ज्यादा लंबी सड़क बनाकर सरकार को 15 करोड़ रुपये का चूना लगा दिया। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की निष्क्रियता की वजह से प्रदेश में अवैध कॉलोनियां पनप गईं, तो दूसरी तरफ इंदौर, भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर नगर निगम आश्रय शुल्क के रूप में जमा 260 करोड़ रुपये का हिसाब ही नहीं दे पाए। यह खुलासा कैग (नियंत्रक महालेखा परीक्षक) की रिपोर्ट में हुआ है। इस रिपोर्ट को एक दिन पहले विधानसभा में पेश किया गया था, जिसमें 2018 से 2023 के बीच सरकार के 14 विभागों के कामकाज और योजनाओं की पड़ताल करने के बाद उक्त गड़बड़ियों का खुलासा किया है। कैग की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली को लेकर भी ऑडिट किया। वक्फ की 81 संपत्तियों की जांच में पाया कि 20 जिलों की 33( 41 फीसदी) संपत्तियां जो दस्तावेजों में सरकारी संपत्ति के रूप में दर्ज थीं। उन्हें वक्फ की संपत्ति के रूप में रजिस्टर्ड किया गया। कैग ने रिपोर्ट में लिखा है कि इन 20 जिलों के कलेक्टरों ने संपत्तियों की रजिस्ट्री की प्रक्रिया को निरस्त करने करने के लिए कोई दिशा निर्देश जारी नहीं किए। सरकारी विभागों के इस रवैये की वजह से वक्फ एक्ट का दुरुपयोग हुआ बल्कि सरकारी जमीनों पर कब्जा हो गया। हालांकि, सरकार ने अपने जवाब में बताया कि ये टेक्निकल मिस्टेक है। ये भी कहा कि वक्फ एक्ट में जिला प्रशासन से एनओसी लेने का कोई प्रोविजन नहीं है। जिला प्रशासन को हर संपत्ति के बारे में पता था। जब राजस्व रिकॉर्ड का कंप्यूटरीकरण किया गया तो उस दौरान स्वामित्व के कॉलम में सरकारी संपत्ति दर्ज हुई। कैग ने सरकार के इस उत्तर को खारिज कर दिया और लिखा कि जिन संपत्तियों का परीक्षण किया उनमें से कुछ एक या दो साल पहले ही रजिस्टर्ड हुई हैं। साथ ही ये भी लिखा कि दो संपत्तियों पर कलेक्टरों की तरफ से आपत्ति दर्ज की गई थी इसके बाद भी वक्फ बोर्ड ने उन्हें बतौर वक्फ की संपत्ति दर्ज किया। जिन संपत्तियों को वक्फ ने अपना समझ लिया वो सामुदायिक प्रयोजन के लिए रिजर्व की गई थी। कैग ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (नगर तथा ग्राम निवेश) के लेखा परीक्षा के दौरान पांच बड़े शहरों में हुए प्लान्ड डेवलपमेंट को लेकर ऑडिट किया। ये ऑडिट 2018 से 2023 के बीच भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन नगर निगम में किया गया। इस दौरान 10 अहम बातें सामने आईं। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग शहरों के व्यवस्थित विकास की प्लानिंग करने में ही नाकाम रहा है। कैग ने लिखा- टीएंडसीपी ने बीना पेट्रोकेमिकल्स और औद्योगिक प्रदेश के अलावा कोई भी प्रादेशिक योजना तैयार नहीं की। भोपाल का मास्टर प्लान प्रकाशित नहीं कर पाया। भोपाल में अभी भी साल 2005 का मास्टरप्लान ही लागू है। विकास योजनाओं की तैयारी के लिए टीएंडसीपी उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर और इंदौर ने हितधारकों से इनपुट कलेक्शन नहीं किया। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन नगर निगम ने स्थानीय क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और सुविधाओं के विकास के लिए जोन स्तर पर प्लान तैयार नहीं किए, जिससे अवैध कॉलोनियों और स्लम एरिया में बढ़ोतरी हुई। अवैध मैरिज गार्डन की 126 शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई करने में टीएंडसीपी नाकाम रहा। इसके अलावा नालों का अतिक्रमण और नालों के लिए जमीन छोड़ने के नियमों का पालन भी नहीं करा पाया। कॉलोनाइजर्स ने जो अधूरी कॉलोनियां विकसित कीं, उनके पूरी होने से पहले ही कॉलोनी के बंधक रखे प्लॉट्स को मुक्त कर दिया। नगर निगमों ने सुपरविजन फीस पर जीएसटी नहीं वसूला, जिसके चलते सरकार को 96 लाख रुपए का नुकसान हुआ। नगर निगम के अफसरों ने कॉलोनी डेवलपमेंट और बिल्डिंग परमिशन जारी करने के बाद विकास कार्य की मॉनिटरिंग नहीं की। रिपोर्ट के अनुसार, 142 बिल्डिंग और 43 कॉलोनियों के भौतिक सत्यापन के दौरान पाया गया कि मिनिमम ओपन स्पेस, तलघर, सरकारी जमीन पर अतिक्रमण, वाटर हार्वेस्टिंग यूनिट नहीं बनाई गई। ऑडिट के दौरान पाया गया कि टीएंडसीपी से परमिशन लिए बगैर कॉलेज, रिसॉर्ट और आईटी पार्क बन गए। मप्र में जीएसटी लागू होने के बाद गड़बड़ियां देखकर भी आंखे मूंदे रहे अफसर, कई शहरों में मिली खामियां कैग की रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि जीएसटी लागू होने के बाद शुरुआती दौरान में मध्य प्रदेश में व्यापारियों की गड़बड़ियां देखकर भी जीएसटी विभाग के अफसर आंखें मूंदे रहे और उन पर ठोस कार्रवाई नहीं की, जिसके चलते कई शहरों में भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। इसमें पाया गया कि कई मामलों में जीएसटी विभाग के अफसरों ने ब्याज की राशि के अंतर और ई-वे बिल का कम भुगतान को भी नजरअंदाज किया। गौरतलब है कि 1 जुलाई 2017 को जीएसटी लागू हुआ था। इसके बाद अधिकारी व व्यापारियों को नियमों को समझने में काफी मशक्कत करना पड़ी थी। इंदौर और भिंड में करोड़ों की कर चोरी के मामले कैग की रिपोर्ट के मुताबिक भिंड वृत में वर्ष 2018-19 से 2020-21 के बीच एक प्रकरण में 63 से 162 दिनों की देरी से जीएसटी का भुगतान किया गया। इस प्रकरण में 24 करोड़ रुपये का भुगतान ही नहीं किया गया। वहीं इंदौर के एक ई-वे बिल सत्यापन के प्रकरण में कैग ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। इंदौर के एक करदाता के प्रकरण में वर्ष 2018-19 व 2020-21 के दौरान 137.17 करोड़ की देनदारी के ई-वे बिल जारी किए गए लेकिन तीन साल के दौरान फर्म द्वारा 0.15 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। इस तरह 137.02 करोड़ कर राशि का कम भुगतान किया गया। इतना ही नहीं, इंदौर में आइटीसी इनपुट सेवा वितरक (आईएसडी) क्रेडिट का गलत लाभ उठाकर 4.15 करोड़ रुपये की राशि मिसमैच होने का मामला भी सामने आया। भोपाल में टर्नओवर और पीथमपुर में टीडीएस की गड़बड़ी भोपाल में जीएसटी वार्षिक रिटर्न के मामले में वर्ष 2020-21
बांग्लादेशी सेना में बड़ा बदलाव, भारत में तैनात अधिकारी को वापस बुलाया

नई दिल्ली । बांग्लादेश सेना के उच्च कमान में रविवार को बड़ा फेरबदल हुआ जिसमें नए चीफ ऑफ जनरल स्टाफ की नियुक्ति भी शामिल है। इस बदलाव से प्रमुख रणनीतिक कमान और देश की मुख्य सैन्य खुफिया एजेंसी प्रभावित हुई है। ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार ये बदलाव प्रधानमंत्री तारिक रहमान की नई सरकार के सत्ता संभालने के कुछ दिनों बाद हुए। रिपोर्ट के मुताबिक लेफ्टिनेंट जनरल एम मैनुर रहमान को CGS नियुक्त किया गया जो पहले सेना प्रशिक्षण और सिद्धांत कमान ARTDOC के प्रमुख या जनरल ऑफिसर कमांडिंग GOC के पद पर थे।भारत में तैनात अधिकारी को वापस बुलाया भारत में बांग्लादेश उच्चायोग में रक्षा सलाहकार के पद पर तैनात ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद हाफिजुर रहमान को मेजर जनरल के दर्जे के साथ पैदल सेना डिवीजन का GOC बनने के लिए वापस बुलाया गया है। नई सरकार और चुनाव का संदर्भ बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी BNP ने 12 फरवरी को हुए चुनाव में दो-तिहाई बहुमत हासिल किया। 60 वर्षीय तारिक रहमान ने 17 फरवरी को प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली जिससे मुहम्मद यूनुस के 18 महीने के अंतरिम शासन का अंत हुआ।भारत-बांग्लादेश संवाद को बढ़ावा ढाका में नियुक्त भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने कहा कि नई सरकार के साथ सक्रिय संवाद को लेकर भारत उत्सुक है। उन्होंने बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान से मुलाकात की और संवाद सहयोग और पारस्परिक हितों पर जोर दिया। उच्चायुक्त वर्मा ने कहा कि भारत बांग्लादेश के साथ हर क्षेत्र में सकारात्मक और भविष्योन्मुखी सहयोग को मजबूत करना चाहता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यूनुस के कार्यकाल के दौरान भारत-बांग्लादेश संबंधों में गिरावट आई थी और 1971 के बाद यह सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे।
सिनेमा या सियासी हथियार? केरल स्टोरी 2 के ट्रेलर पर भड़के प्रकाश राज और अनुराग कश्यप, सीएम विजयन ने भी दी तीखी प्रतिक्रिया!

नई दिल्ली :भारतीय सिनेमा जगत में अपनी बेहतरीन अदाकारी के साथ-साथ अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए मशहूर दिग्गज अभिनेता प्रकाश राज एक बार फिर सुर्खियों में हैं। अक्सर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर सत्ता और सिस्टम को आईना दिखाने वाले प्रकाश राज ने इस बार ‘द केरल स्टोरी 2’ को लेकर छिड़े विवाद में अपनी एंट्री दर्ज कराई है। दक्षिण भारतीय फिल्मों से लेकर बॉलीवुड तक अपनी धाक जमाने वाले इस कलाकार ने फिल्म के कंटेंट पर सवाल उठाते हुए एक ऐसा सोशल मीडिया पोस्ट साझा किया है जिसने इंटरनेट की दुनिया में हलचल मचा दी है। प्रकाश राज उन चुनिंदा कलाकारों में से हैं जो ट्रोलिंग की परवाह किए बिना अपनी बात रखने का साहस रखते हैं और उनके हालिया X पूर्व में ट्विटर पोस्ट ने इसे एक बार फिर साबित कर दिया है। विवाद की असली जड़ विपुल अमृतलाल शाह द्वारा निर्मित और कामाख्या नारायण सिंह के निर्देशन में बनी फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2’ का वह ट्रेलर है जिसमें एक दृश्य दिखाया गया है कि कैसे एक मुस्लिम परिवार एक व्यक्ति को जबरन ‘बीफ’ खिला रहा है। 27 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली इस फिल्म को लेकर जहां एक पक्ष इसे सच्चाई बता रहा है वहीं दूसरी ओर प्रकाश राज ने रविवार को केरल की असली तस्वीर पेश करने की कोशिश की। उन्होंने अपने अकाउंट पर पोर्क बीफ और मछली जैसे विभिन्न व्यंजनों की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि असली द केरल स्टोरी यह है कि कैसे ये तमाम पकवान शाकाहारी ‘सद्या’ के साथ मिल-जुलकर रहते हैं। प्रकाश राज ने संदेश दिया कि केरल की पहचान वहां की विविधता और आपसी भाईचारा है न कि नफरत। सिर्फ प्रकाश राज ही नहीं बल्कि जाने-माने फिल्ममेकर अनुराग कश्यप ने भी इस फिल्म के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अपनी फिल्मों में यथार्थवाद दिखाने के लिए मशहूर अनुराग ने इस फिल्म को पूरी तरह बकवास और प्रोपेगेंडा करार दिया। उन्होंने तीखे लहजे में सवाल किया कि भला कोई किसी को इस तरह जबरदस्ती बीफ कैसे खिला सकता है? अनुराग के मुताबिक ऐसी फिल्में समाज में केवल गलत धारणाएं फैलाने का काम करती हैं। इस विवाद में केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की है। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि केरल धार्मिक सद्भाव और सतत विकास की धरती है। उन्होंने जनता से अपील की कि केरल को आतंकवाद के केंद्र के रूप में दिखाने वाली ऐसी कोशिशों और झूठे प्रोपेगेंडा को सिरे से खारिज कर दिया जाए। जैसे-जैसे फिल्म की रिलीज डेट करीब आ रही है वैसे-वैसे बॉलीवुड और राजनीति के गलियारों में बहस और तेज होती जा रही है। एक तरफ जहां फिल्म मेकर्स इसे समाज का आईना बता रहे हैं वहीं दूसरी तरफ प्रकाश राज और अनुराग कश्यप जैसे दिग्गज इसे राज्य की धर्मनिरपेक्ष नींव को कमजोर करने वाली साजिश मान रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विरोध के इन सुरों के बीच ‘द केरल स्टोरी 2’ बॉक्स ऑफिस पर क्या प्रभाव डालती है और दर्शकों का इस पर क्या रुख रहता है।
गाँधीसागर वन्यप्राणी अभयारण्य में गिद्धों की हुई वृद्धि, 1013 गिद्धों के साथ बना सुरक्षित ठिकाना

मंदसौर। मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में स्थित गाँधीसागर वन्यप्राणी अभयारण्य एक बार फिर गिद्धों के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा है। ‘प्रदेशव्यापी गिद्ध गणना 2025-26’ के तहत रविवार को संपन्न हुई, जिसमें यहां कुल 1013 गिद्ध पाए गए हैं। गणना का निरीक्षण मुख्य वन संरक्षक उज्जैन वृत्त, आलोक पाठक एवं वनमंडलाधिकारी मंदसौर, संजय रायखेरे द्वारा किया गया। बताया गया कि गाँधीसागर अभयारण्य केवल स्थानीय गिद्धों का ही नहीं, बल्कि विदेशी प्रजातियों का भी पसंदीदा ठिकाना है। गणना में पाए गए हिमालयन ग्रिफन, यूरेशियन ग्रिफन और सिनेरियस जैसे गिद्ध लंबी दूरी तय कर यहाँ पहुँचते हैं। ये मुख्य रूप से तिब्बत, मध्य एशिया, और हिमालय की ऊँचाइयों से शीतकाल के दौरान प्रवास करते हैं। ये प्रवासी गिद्ध आमतौर पर अक्टूबर-नवंबर के महीने में गाँधीसागर पहुँचते हैं और गर्मी शुरू होने से पहले यानी मार्च-अप्रैल तक यहाँ रुकते हैं। 1. स्थानीय निवासी (4 प्रजातियाँ): ये गिद्ध वर्ष भर अभयारण्य में रहते हैं और यहीं प्रजनन करते हैं: भारतीय गिद्ध : चंबल की ऊँची चट्टानों पर घोंसले बनाने वाली मुख्य प्रजाति। सफेद पीठ वाला गिद्ध : पेड़ों पर बसेरा करने वाले ये गिद्ध पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं। राज गिद्ध : अत्यंत दुर्लभ और विशिष्ट लाल सिर वाली प्रजाति। मिस्र का गिद्ध : आकार में छोटे और सफेद रंग के स्थानीय गिद्ध। विदेशी मेहमान/प्रवासी (3 प्रजातियाँ): ये प्रजातियाँ शीतकाल (अक्टूबर-नवंबर से मार्च-अप्रैल) के दौरान तिब्बत, मध्य एशिया और हिमालय की ऊँचाइयों से प्रवास कर यहाँ पहुँचती हैं: हिमालयन ग्रिफन : हिमालय के ठंडे क्षेत्रों से आने वाले विशालकाय गिद्ध। यूरेशियन ग्रिफन : लंबी दूरी तय कर आने वाले अंतरराष्ट्रीय प्रवासी। सिनेरियस गिद्ध : दुनिया के सबसे भारी और बड़े गिद्धों में शुमार। गाँधीसागर ही क्यों है ‘गिद्धों का स्वर्ग’? निरीक्षण के दौरान डीएफओ संजय रायखेरे ने बताया कि सुरक्षित चट्टानें चंबल नदी के किनारे स्थित ऊँची और दुर्गम चट्टानें गिद्धों को सुरक्षित घोंसले बनाने और प्रजनन के लिए आदर्श स्थान प्रदान करती हैं। प्रचुर भोजन और जल: अभयारण्य में वन्यजीवों की अच्छी संख्या और आस-पास के क्षेत्रों में पशुधन की उपलब्धता के कारण इन्हें पर्याप्त भोजन मिलता है। चंबल का पानी इनके लिए बारहमासी जल स्रोत है। मानवीय हस्तक्षेप मुक्त: अभयारण्य का शांत वातावरण और सुरक्षित कॉरिडोर इनके फलने-फूलने में मदद करता है।
भारतीय सेना में भर्ती के लिए 01 अप्रैल तक कर सकते हैं ऑनलाइन आवेदन

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित सेना भर्ती कार्यालय द्वारा भारतीय सेना में विभिन्न पदों पर भर्ती हेतु अधिसूचना को जारी की जा चुकी है। यह अधिसूचना भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइट www.joinindianarmy.nic.in पर उपलब्ध है। सेना में भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 13 फरवरी प्रारंभ हो चुकी है, जो 01 अप्रैल 2026 तक खुली रहेगी। जनसम्पर्क अधिकारी अरुण शर्मा ने रविवार को जानकारी देते हुए बताया कि इच्छुक एवं पात्र अभ्यर्थी निर्धारित समयावधि के भीतर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। जारी अधिसूचना के अनुसार अग्निवीर पुरुष (जनरल ड्यूटी, तकनीकी, लिपिक/स्टोरकीपर, ट्रेडमैन दसवीं पास, ट्रेडमैन आठवीं पास), अग्निवीर महिला (सेना पुलिस) तथा स्थायी कैडर के अंतर्गत नर्सिंग असिस्टेंट, नर्सिंग असिस्टेंट वेट एवं सिपाही फार्मा के पदों पर भर्ती की जाएगी। भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत ऑनलाइन कॉमन एंट्रेंस एग्जाम 01 जून से 10 जून 2026 के मध्य आयोजित किए जाने की संभावना है। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे परीक्षा से संबंधित दिशा- निर्देश एवं पात्रता शर्तों का सावधानीपूर्वक अध्ययन करें।
जबलपुर में ओवर ब्रिज का एक हिस्सा धंसा, आवागमन प्रभावित

जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित शहपुरा में नेशनल हाईवे 45 शहपुरा रेलवे ओवरब्रिज का हिस्सा रविवार शाम 5 बजे नीचे गिर गया। जिससे आवागमन पूरी तरह से बंद हो गया। ओवरब्रिज गिरने से शहपुरा नगर से यातायात को डायवर्ट किया गया है। जिससे ट्रैफिक जाम की स्थिति बन रही है। उल्लेखनीय है कि दिसंबर 2025 के मध्य में जबलपुर-भोपाल नेशनल हाईवे 45 पर स्थित शहपुरा रेलवे ओवरब्रिज का एक हिस्सा धंस गया था जिसके बाद वाहनों का आवागमन दुसरे बचे हुए हिस्से हो रहा था। लेकिन आज बढ़े हुए दबाव को वह दूसरा हिस्सा भी नहीं झेल पाया। इधर टोल प्लाजा के मैनेजर का कहना हे कि हमने टोल पर वाहनों को बिना किसी शुल्क दिए निकलने की अनुमति दे रखी है। इधर ,युवक कांग्रेस ने ओवर ब्रिज पर जाकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी है। खास बात यह है कि यह पुल मुश्किल से 3 साल पहले ही बना था और धंसने की वजह घटिया निर्माण और खराब इंजीनियरिंग बताई जा रही है। पुल का हिस्सा धंसने से जबलपुर से भोपाल और नरसिंहपुर की तरफ जाने वाला हाईवे प्रभावित हुआ है। लोगों ने इसे बड़ी लापरवाही बताते हुए निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे हैं।