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AI समिट में शर्टलेस विरोध पर दिल्ली कोर्ट का सख्‍त रूख, कहा- देश की कूटनीतिक छवि को पहुंचा नुकसान

नई दिल्ली । दिल्ली की अदालत ने एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान इंडियन यूथ कांग्रेस आईवाईसी के कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए शर्टलेस विरोध प्रदर्शन को सार्वजनिक व्यवस्था पर सीधा हमला करार दिया। कोर्ट ने कहा कि यह असहमति जताने का उचित तरीका नहीं था और इससे भारत की डिप्लोमैटिक इमेज को नुकसान पहुंचा। चार कार्यकर्ताओं को पुलिस हिरासत में भेजा गया ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट रवि की अदालत ने शनिवार को गिरफ्तार चार कार्यकर्ताओं को 5 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा। इनमें बिहार से राष्ट्रीय सचिव कृष्णा हरि, प्रदेश सचिव कुंदन यादव, उत्तर प्रदेश से प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार और तेलंगाना से नरसिंह यादव शामिल हैं। प्रारंभिक जांच में बाहरी साजिश के संकेत कोर्ट ने बताया कि आरोपियों के दूर दराज के राज्यों से होने और प्रारंभिक जांच में बाहरी साजिश के संकेत मिलने के कारण उनके फरार होने का खतरा अधिक है। मजिस्ट्रेट ने कहा कि विरोध प्रदर्शन ने न केवल आयोजन की शुचिता को खतरे में डाला, बल्कि देश की कूटनीतिक प्रतिष्ठा को भी प्रभावित किया। क्‍या हैं आरोप? अदालत के अनुसार, आरोपियों ने वैश्विक प्रतिनिधियों और गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में शर्टलेस प्रदर्शन किया, जिसमें भड़काऊ नारे लिखी हुई टी शर्ट पहनी गई थी। आरोप है कि उन्होंने सरकारी कर्मचारियों और पुलिस कर्मियों को उनकी ड्यूटी में बाधा पहुंचाई और कुछ पर शारीरिक हमला भी किया।सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा मजिस्ट्रेट ने कहा, “ऐसा व्यवहार असहमति जताने की वैध सीमा से बाहर है और सार्वजनिक व्यवस्था पर स्पष्ट हमला है। इससे आयोजन की गरिमा और विदेशी हितधारकों के सामने भारत की कूटनीतिक छवि प्रभावित होती है।” कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि आरोपियों के कई सहयोगी संभावित रूप से फरार हैं और डिजिटल या वित्तीय सबूतों से छेड़छाड़ कर सकते हैं। कानूनी प्रावधान जांच में शामिल आरोप भारतीय न्याय संहिता की धारा 121 लोक सेवक को कर्तव्य से रोकने के लिए चोट पहुंचाना और धारा 61(2) आपराधिक षड्यंत्र के तहत आते हैं, जिनमें तीन साल से अधिक की सजा का प्रावधान है।

कृषि विज्ञान मेलों का लाभ उठाएं उन्नत खेती करें किसान : कृषि मंत्री कंषाना

भोपाल! किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि किसान कल्याण वर्ष 2026में कृषि नवाचार और उन्नत खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में कृषि विज्ञान मेलों का आयोजन किया जा रहा है। कृषि, उद्यानिकी, तकनीक विस्तारण एवं तिलहन मिशन में जिला स्तर पर कृषि विज्ञान मेले आयोजित किया जा रहे हैं। इन मेलों का लाभ उठाकर किसान निरंतर उन्नत खेती करें और प्रदेश की समृद्धि में अपना योगदान दें।    कृषि मंत्री श्री कंषाना ने कहा कि मेलों का उद्देश्य कृषकों को उन्नत कृषि तकनीकों, प्राकृतिक एवं जैविक खेती, मूल्य संवर्धन, विपणन, सूक्ष्म सिंचाई (ड्रिप एवं स्प्रिंकलर), नरवाई प्रबंधन, तिलहनी-दलहनी फसलों के विस्तार तथा आधुनिक कृषि यंत्रों की जानकारी प्रदान करना है। “कृषि विज्ञान मेला” किसानों को आत्मनिर्भर एवं समृद्ध बनाने की दिशा में विशेष महत्व रखते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव किसानों की समृद्धि और कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। मंत्री श्री कंषाना ने कहा कि शासन विभिन्न किसान हितैषी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन कर रहा है। उन्होंने मिश्रित खेती की पारंपरिक पद्धति को भूमि की उर्वरता के लिए उपयोगी बताते हुए कहा कि वर्तमान में एकल फसल प्रणाली एवं रासायनिक उर्वरकों-कीटनाशकों के अत्याधिक उपयोग से भूमि की गुणवत्ता के साथ सभी का स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है। उन्होंने किसानों से नवीन तकनीकों एवं ज्ञान को व्यवहार में लाने तथा जैविक एवं प्राकृतिक खेती अपनाकर स्वस्थ समाज एवं समृद्ध किसान के लक्ष्य को साकार करने का आह्वान किया। किसान, कृषि विज्ञान मेलों में केवल अवलोकन तक सीमित न रहें, बल्कि शासन की योजनाओं का अधिकतम लाभ लें। कृषि मंत्री श्री कंषाना ने बताया कि प्रदेश में जैविक खेती को व्यापक रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है, जो मुख्यमंत्री डॉ. यादव की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को उन्नत कृषि एवं उद्यानिकी की ओर प्रेरित करना आवश्यक है, जिससे कृषि क्षेत्र में नवाचार एवं समृद्धि सुनिश्चित हो सके। किसान, कृषि विज्ञान मेलों में प्रदर्शनी को ध्यानपूर्वक देखें, समझें और प्राप्त जानकारी को अपनी खेती में लागू करें। उन्होंने कहा कि नरवाई जलाने से भूमि की उर्वरकता को हानि होती है तथा दंड का प्रावधान है। नरवाई का उपयोग जैविक खाद एवं अन्य उपयोगों में कर लाभ अर्जित किया जा सकता है।

बंदियों की सोच सकारात्मक बनाने के प्रयास हो : राज्यपाल पटेल

भोपाल। राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि बंदी पुनर्वास प्रयासों को समग्रता और बहुआयामी स्वरूप में किया जाना चाहिए। कार्य का दृष्टिकोण मानवतावादी हो। भाव संवेदनशील और विचारशील होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पुनर्वास प्रयासों में सकारात्मक सोच के निर्माण पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री का ‘मन की बात’ कार्यक्रम बंदियों की सोच को रचनात्मक दिशा देने। भविष्य के प्रति विश्वास और आत्मबल को मजबूत करने में बहुत सहयोगी होगा। राज्यपाल श्री पटेल सोमवार को लोकभवन में गृह एवं जेल विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा कर रहे थे। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव गृह श्री शिव शेखर शुक्ला, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, विशेष महानिदेशक जेल श्री अखितो सेमा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। राज्यपाल श्री पटेल ने अधिकारियों से कहा कि बंदी उत्पादक गतिविधियों के द्वारा बंदियों के परिवारों के जीवन निर्वाह में आर्थिक सहयोग के उद्देश्य से नियोजन गतिविधियों का संयोजन किया जाए। उन्होंने कहा कि जेलों में बंद मामूली अपराधों के विचाराधीन कैदियों को केवल दंड देना ही नहीं, बल्कि उन्हें सकारात्मक सुधार के जरिए समाज की मुख्य धारा में वापस भेजना पुनर्वास प्रयासों का मूलाधार होना चाहिए। भाव उनको अपराधी की पहचान से मुक्त होकर बेहतर नागरिक के रूप में स्थापित होने में मदद का होना चाहिए। समाज के नव-निर्माण में वे अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकें। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि ‘मन की बात’ कार्यक्रम को सुनकर जेल की दीवारों के पीछे एकाकी जीवन जी रहे बंदियों को देश की प्रगति और प्रेरक कहानियों से जुड़ने का अवसर मिलेगा। उनके जीवन में आशावाद और नव-निर्माण का संचार होगा। बंदियों के भीतर छिपी नकारात्मकता में कमी आएगी। सकारात्मक दृष्टिकोण और आत्म-सुधार की भावना जागृत होगी। उन्होंने जेलों में लंबित दया याचिकाओं, महिला बंदियों के बच्चों के उचित लालन–पालन की व्यवस्थाओं, महिला बंदियों के पुनर्वास, दिव्यांग एवं बुजुर्ग बंदियों के लिए आवश्यक कृत्रिम उपकरणों की उपलब्धता और श्रम शक्ति के उत्पादक गतिविधियों में नियोजन के संबंध चर्चा की। अपर मुख्य सचिव गृह श्री शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि वर्ष 2025-26 में प्राप्त 18 दया याचिकाओं का प्रक्रिया के विभिन्न स्तरों पर परीक्षण किया जा रहा है। जेल विभाग द्वारा विगत पांच वर्षों में प्राप्त सभी दया याचिकाओं का परीक्षण कराया जा रहा है। विभाग द्वारा उनके त्वरित निराकरण के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर भी बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 180 देशों के 11 लाख लोगों के द्वारा देखे जाने वाले गीता पाठ के ऑनलाइन कार्यक्रम का प्रदेश की जेलों में प्रसारण की अभिनव पहल जेल विभाग द्वारा की गई है। साप्ताहिक प्रसारण में गीता के श्लोक का शुद्ध उच्चारण और श्लोक का भावार्थ कर समझाया जाता है।

जब माधुरी की आंखों में देख शर्मा गए थे जग्गू दादा: 'द ग्रेट इंडियन कपिल शो' में जैकी श्रॉफ ने खोले रोमांस के दिलचस्प राज

नई दिल्ली :बॉलीवुड के दो दिग्गज सितारे जैकी श्रॉफ और माधुरी दीक्षित जब एक साथ ‘द ग्रेट इंडियन कपिल शो’ के मंच पर पहुंचे तो यादों का कारवां मानों ठहर सा गया। कॉमेडी किंग कपिल शर्मा के साथ गुफ्तगू के दौरान जग्गू दादा ने अपनी चिर-परिचित बेबाकी और मासूमियत के साथ माधुरी दीक्षित की जमकर तारीफ की। जैकी ने माधुरी को न केवल एक बेहतरीन अदाकारा बताया बल्कि उन्हें जमीन से जुड़ी हुई एक ऐसी शख्सियत करार दिया जिसकी सादगी का जादू आज भी बरकरार है। बातचीत के दौरान एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए जैकी ने बताया कि भले ही पर्दे पर उन्होंने कई रोमांटिक किरदार निभाए हों लेकिन असल जिंदगी में वह माधुरी के साथ रोमांटिक सीन फिल्माते समय बुरी तरह शर्माया करते थे। यादों के झरोखे को खोलते हुए माधुरी दीक्षित ने अपनी पहली मुलाकात का किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि यह मुलाकात मशहूर फिल्म ‘कर्मा’ के सेट पर हुई थी। उस वक्त माधुरी फिल्म इंडस्ट्री में नई थीं और फिल्म में एक छोटे से गाने का हिस्सा थीं। माधुरी ने हंसते हुए याद किया कि कैसे अनिल कपूर और जैकी श्रॉफ एक कोने में बैठकर उन्हें ‘तिरछी नजरों’ से देख रहे थे। उस समय की अपनी घबराहट को याद करते हुए माधुरी ने बताया कि दो बड़े स्टार्स के सामने वह काफी नर्वस महसूस कर रही थीं। वहीं दूसरी ओर जैकी श्रॉफ ने बताया कि उन्होंने माधुरी के बारे में सबसे पहले मशहूर कोरियोग्राफर सरोज खान से सुना था। सरोज खान ने ही सुभाष घई को माधुरी के हुनर और खूबसूरती के बारे में बताते हुए उन्हें कास्ट करने की सलाह दी थी। शो के दौरान जब कपिल शर्मा ने चुटकी लेते हुए जैकी से पूछा कि वे रिहर्सल छोड़कर माधुरी को क्यों निहारते रहते थे तो जग्गू दादा ने बेहद दार्शनिक अंदाज में जवाब दिया कि कई बार आपको माधुरी जैसी शख्सियत के सामने खुद को भूलना पड़ता है। उन्होंने मजाकिया लहजे में यह भी याद दिलाया कि माधुरी ने उनके साथ हर तरह के रिश्ते निभाए हैं-वे पर्दे पर उनकी प्रेमिका पत्नी और यहाँ तक कि ‘संगीत’ फिल्म में उनकी सास का किरदार भी निभा चुकी हैं। जैकी ने स्वीकार किया कि माधुरी की आंखों में देखकर बात करना या उनके साथ रोमांटिक गाने शूट करना उनके लिए सबसे कठिन काम होता था। जैकी श्रॉफ ने अपनी झिझक का कारण बताते हुए कहा कि वह कभी भी पर्दे पर निजी भावनाओं को दिखाने के आदी नहीं थे। उनके अनुसार फिल्म भले ही काल्पनिक हो लेकिन कुछ भावनाएं और इमोशन्स बहुत व्यक्तिगत होते हैं जो दिल में बसते हैं। ऐसे में माधुरी जैसी प्रभावशाली अभिनेत्री के सामने अभिनय करना उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं था। जैकी और माधुरी की यह जुगलबंदी न केवल दर्शकों के लिए मनोरंजन लेकर आई बल्कि बॉलीवुड के उस सुनहरे दौर की यादें भी ताजा कर गई जहाँ सम्मान और सादगी ही रिश्तों की बुनियाद हुआ करती थी।

मध्य प्रदेश में फरवरी में चौथी बारिश का अलर्ट, 8 जिलों में गरज-चमक और आंधी की संभावना

भोपाल । मध्य प्रदेश में फरवरी में चौथी बार बारिश का अनुमान है। मौसम विभाग ने सोमवार को पूर्वी हिस्से के आठ जिलों सीधी सिंगरौली शहडोल उमरिया अनूपपुर मंडला डिंडौरी और बालाघाट में बारिश गरज-चमक और आंधी को लेकर अलर्ट जारी किया है। इस बार बारिश के पीछे दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में एक्टिव लो प्रेशर एरिया और प्रदेश से गुजर रही टर्फ का असर है। मौसम विभाग IMD भोपाल के अनुसार रविवार को दक्षिणी जिलों में मौसम बदलते ही सोमवार को पूर्वी हिस्से में बारिश की संभावना बनी हुई है। पहले 22 फरवरी को पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में वेस्टर्न डिस्टरबेंस का अलर्ट जारी किया गया था लेकिन सिस्टम आगे बढ़ गया और अब लो प्रेशर एरिया व टर्फ की गतिविधियों के कारण प्रदेश में बारिश हो सकती है। फरवरी की शुरुआत से ही प्रदेश में बारिश और आंधी का दौर जारी है। पहले दो बार ओले बारिश और आंधी से फसलों को नुकसान हुआ था जिसके बाद सरकार ने प्रभावित फसलों का सर्वे कराया था। 18 फरवरी से तीसरी बार बारिश हुई और 19-21 फरवरी तक भी इसका असर जारी रहा। अब चौथी बार 23 फरवरी को प्रदेश में बारिश होने की संभावना है। बारिश के चलते दिन के तापमान में गिरावट देखी गई। रविवार को सर्द हवाओं से कुछ राहत मिली। शनिवार-रविवार की रात में पचमढ़ी में न्यूनतम तापमान 10.2 डिग्री दर्ज किया गया। वहीं राजगढ़ में 11 डिग्री कल्याणपुर में 11.2 डिग्री करौंदी में 11.4 डिग्री और मंदसौर में 11.5 डिग्री रहा। अन्य इलाकों में तापमान बढ़ा।

मौत पर नहीं चाहिए था तमाशा, वसीयत में लिख दी थी आखिरी ख्वाहिश; खंडवा की मिट्टी में ही क्यों समाना चाहते थे किशोर दा?

नई दिल्ली। भारतीय संगीत जगत के ‘अनमोल रत्न’ और अपनी बहुमुखी गायकी से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले किशोर कुमार केवल अपनी आवाज के जादू के लिए ही नहीं, बल्कि अपने बेहद अलग और उसूलपसंद अंदाज के लिए भी मशहूर थे। किशोर दा के गानों में जहाँ एक ओर मस्ती और रोमांस की खनक होती थी, वहीं दूसरी ओर जब वे दर्द भरे नग्में गाते थे, तो सुनने वालों की आंखें नम हो जाती थीं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अपनी शर्तों पर जिंदगी जीने वाले इस महान फनकार ने अपनी मौत के बाद के सफर को लेकर भी एक खास वसीयत तैयार की थी? किशोर कुमार नहीं चाहते थे कि उनके जाने के बाद उनकी अंतिम यात्रा किसी फिल्मी तमाशे या किसी बड़े “प्रीमियर” जैसी नजर आए। इस दिलचस्प और भावुक कर देने वाले वाकये का खुलासा मशहूर गीतकार जावेद अख्तर ने अपने एक शो के दौरान किया था। जावेद अख्तर ने बताया कि एक रिकॉर्डिंग के दौरान किशोर दा ने उनसे अपनी वसीयत का जिक्र करते हुए कहा था कि उन्होंने लिखित निर्देश दिए हैं कि मृत्यु के बाद उनका क्रियाकर्म उनके पैतृक शहर खंडवा में ही किया जाए। जब जावेद अख्तर ने हैरानी से इसका कारण पूछा, तो किशोर कुमार का जवाब बेहद मार्मिक था। उन्होंने कहा था कि वे मुंबई की इस ग्लैमरस दुनिया के बीच अपना अंतिम संस्कार नहीं चाहते। किशोर दा का मानना था कि मुंबई में किसी दिग्गज कलाकार की मौत पर पूरी फिल्म इंडस्ट्री उमड़ पड़ती है, बाहर हजारों की भीड़ जमा हो जाती है और लोग सेलिब्रिटीज को देखकर शोर मचाने लगते हैं। उन्हें डर था कि कहीं उनकी अंतिम विदाई किसी फिल्म के भव्य प्रीमियर जैसी न लगने लगे। वे चाहते थे कि जिस छोटे शहर की मिट्टी से वे आए हैं, उनका शरीर उसी मिट्टी में जाकर विलीन हो जाए। यही कारण है कि आज उनकी समाधि मुंबई में नहीं बल्कि मध्य प्रदेश के खंडवा में स्थित है। किशोर कुमार का यह अनोखा अंदाज केवल उनकी वसीयत तक सीमित नहीं था, बल्कि उनके काम करने के तरीके में भी झलकता था। ऐसा ही एक मजेदार किस्सा साल 1974 में आई फिल्म ‘आपकी कसम’ के सुपरहिट गाने “जय जय शिवशंकर” से जुड़ा है। राजेश खन्ना और मुमताज पर फिल्माए गए इस गाने को आर.डी. बर्मन ने कंपोज किया था। रिकॉर्डिंग के दौरान फिल्म के प्रोड्यूसर बार-बार पंचम दा आर.डी. बर्मन को बजट और पैसों के खर्च को लेकर ताने मार रहे थे। जब यह बात किशोर कुमार के कानों तक पहुँची, तो उन्होंने अपने ही अंदाज में प्रोड्यूसर को सबक सिखाने की ठानी। गाने के अंत में उन्होंने अचानक एक लाइन जोड़ दी- अरे बजाओ रे बजाओ, 50 हजार खर्च हो गए! यह लाइन किसी स्क्रिप्ट का हिस्सा नहीं थी, बल्कि प्रोड्यूसर के तानों का करारा जवाब था। किशोर दा का यह बेबाकपन और अपनी जड़ों के प्रति उनका गहरा लगाव ही उन्हें एक आम गायक से अलग कर लेजेंड बनाता है। वे एक ऐसे कलाकार थे जिन्होंने शोहरत के शिखर पर रहते हुए भी सादगी और अपनी मिट्टी की सुगंध को कभी ओझल नहीं होने दिया।

भोपाल में बनेगा हाईटेक स्टेट कैपिटल कॉम्प्लेक्स, 59 कार्यालयों ने मांगी 1.03 लाख वर्गमीटर जगह

भोपाल । भोपाल में प्रस्तावित स्टेट कैपिटल कॉम्प्लेक्स (सेंट्रल विस्टा) परियोजना अब तेजी से आगे बढ़ रही है। सामान्य प्रशासन विभाग की उच्च स्तरीय बैठक में इसके प्रारंभिक स्वरूप को मंजूरी दे दी गई है। मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड को 30 जून तक, यानी चार माह के भीतर, डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। परियोजना की डिजाइन और DPR तैयार करने के लिए टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से प्रसिद्ध आर्किटेक्चर फर्म सीपी कुकरेजा आर्किटेक्ट्स का चयन किया गया है। यह फर्म वल्लभ भवन, हमीदिया हॉस्पिटल और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों की डिजाइन से जुड़ी रही है। प्रस्तावित प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 1,000 करोड़ रुपए है। कॉरपोरेट स्टाइल के हाईटेक दफ्तरसामान्य प्रशासन विभाग ने सभी शासकीय विभागों से उनकी कार्यालयीन जरूरतों और स्थानांतरण की इच्छा के संबंध में जानकारी मांगी थी। अब तक 58 विभागों के 84 कार्यालयों से जवाब प्राप्त हुए हैं। इनमें से 33 विभागों के 59 कार्यालय सेंट्रल विस्टा में शिफ्ट होने के इच्छुक हैं और उन्होंने कुल 1,03,000 वर्गमीटर स्थान की मांग की है। 6 कार्यालय प्रस्तावित भवन या रेनोवेशन के कारण सहमत नहीं हैं, जबकि 19 कार्यालयों के पास पहले से पर्याप्त स्वतंत्र भवन उपलब्ध हैं। हालांकि, जहां निर्माण या नवीनीकरण कार्य शुरू नहीं हुआ है, उन्हें रोका जा सकता है। किसी भी विभाग को नई जमीन आवंटित नहीं की जाएगी—सभी को इसी कॉम्प्लेक्स में स्थान मिलेगा। नया परिसर अत्याधुनिक तकनीक और सुविधाओं से लैस होगा, जिससे यह कॉरपोरेट ऑफिस जैसा हाईटेक प्रशासनिक केंद्र बनेगा। मौजूदा क्षेत्रफल से दोगुना होगा निर्माणपुराने और जर्जर हो चुके सतपुड़ा और विंध्याचल भवन की जगह यह नया कॉम्प्लेक्स विकसित किया जाएगा। वर्तमान में दोनों भवनों का कुल निर्मित क्षेत्रफल 76,500 वर्गमीटर है, जबकि नए प्रोजेक्ट में लगभग 1.60 लाख वर्गमीटर निर्माण प्रस्तावित है। नई योजना के तहत वल्लभ भवन की वास्तुकला को ध्यान में रखते हुए 12 नए टॉवर बनाए जाएंगे। परगोला से तापमान नियंत्रण और सोलर ऊर्जा उत्पादनप्रस्तावित डिजाइन में 12 टॉवरों की छतों को जोड़कर एक बड़ा परगोला बनाने की योजना है। इससे परिसर का तापमान नियंत्रित रहेगा और सोलर पैनल के माध्यम से बिजली उत्पादन भी किया जाएगा। हालांकि, इस संरचना की लागत का विस्तृत ब्यौरा साधिकार समिति ने मांगा है। 50 साल की जरूरत के हिसाब से पार्किंगनई योजना में अगले 50 वर्षों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था की जाएगी। Vallabh Bhavan में अधिकारियों के लिए निर्धारित मौजूदा पार्किंग को हटाकर टॉवर 1 और 2 का निर्माण शुरू किया जाएगा। ग्रीन एरिया में चार गुना वृद्धिपरियोजना में हरित क्षेत्र को विशेष महत्व दिया गया है। ग्रीन एरिया 5.84 हेक्टेयर से बढ़ाकर 22.46 हेक्टेयर किया जाएगा, जो वर्तमान से लगभग चार गुना अधिक होगा। मेट्रो से कनेक्टिविटी और जनसुविधाएंकॉम्प्लेक्स को आसपास के मेट्रो स्टेशन से जोड़ने के लिए कवर्ड फुटपाथ बनाए जाएंगे। इसके अलावा हॉकर्स कॉर्नर, सार्वजनिक शौचालय और दूर-दराज से आने वाले नागरिकों के लिए सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था भी होगी। मौजूदा सड़कों का चौड़ीकरण, सौंदर्यीकरण और फुटपाथ निर्माण भी योजना में शामिल है। क्या है स्टेट कैपिटल कॉम्प्लेक्स परियोजना?राजधानी भोपाल में फिलहाल अधिकांश शासकीय कार्यालय अलग-अलग स्थानों पर संचालित हो रहे हैं। विभागीय आवश्यकताओं, नई भर्तियों और जर्जर हो चुके भवनों के कारण एक केंद्रीकृत प्रशासनिक परिसर की जरूरत महसूस की जा रही थी। इसी के तहत नई दिल्ली के सेंट्रल विस्टा की तर्ज पर सतपुड़ा और विंध्याचल भवन की जगह एक आधुनिक, सुव्यवस्थित और एकीकृत प्रशासनिक केंद्र विकसित किया जा रहा है, जिससे प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी और आम नागरिकों को भी बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

NATIONAL HIGHWAY 552: नेशनल हाईवे‑552 पर बाइक स्टंट का वीडियो वायरल, SDOP ने कहा कार्रवाई ज़रूरी

MORENA BIKE STUNT

HIGHLIGHTS: हाईवे‑552 पर बाइकर्स के खतरनाक स्टंट्स वायरल बाइक स्टंट से राहगीर और वाहन जोखिम में स्थानीयों ने पुलिस की सुस्त कार्रवाई पर आक्रोश स्टंट वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल पुलिस करेगी जांच और आगे कार्रवाई NATIONAL HIGHWAY 552: ग्वालियर। मुरैना जिले के कैलारस क्षेत्र में नेशनल हाईवे 552 पर बाइकर्स गैंग द्वारा खतरनाक और जोखिम भरे स्टंट किए जाने के वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहे हैं। कैलारस से लेकर जौरा तक के हाईवे पर कई युवा बाइकर्स तेज रफ्तार से बाइक चलाते हुए स्टंट करते नजर आते हैं, जिससे आम राहगीरों की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो रहा है। स्थानीय लोग बता रहे हैं कि यह सब खुलेआम किया जाता है और इन स्टंट्स को रिकॉर्ड कर वायरल भी किया जा रहा है, जिससे युवाओं में इस तरह का जोखिम भरा व्यवहार बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश में बिजली की दरों में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी प्रस्तावित, घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बड़ा आर्थिक असर स्थानीय नागरिकों की शिकायतें स्थानीय लोगों ने पुलिस और प्रशासन पर आरोप लगाया है कि बाइकर्स गैंग लगातार हाईवे पर स्टंट करता है लेकिन ट्रैफिक पुलिस की निगरानी कमज़ोर है, जिसके कारण इनकी हिम्मत और बढ़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि मुरैना से कैलारस और जौरा तक यह बाइकर्स नियमित रूप से हाईवे पर स्टंट करते हैं, जबकि कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। कई लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर समय पर सख्ती नहीं बरती गई, तो किसी बड़े हादसे को रोक पाना मुश्किल होगा। मध्यप्रदेश: फर्जी पासपोर्ट बनवाने वाले गिरोह पर ATS का शिकंजा, लाखों का सौदा हुआ उजागर पुलिस ने कहा – जांच के बाद करेंगे कार्रवाई कैलारस के एसडीओपी उमेश मिश्रा ने कहा कि उन्हें हाईवे पर बाइकर्स द्वारा खतरनाक स्टंट किए जाने की शिकायत पहले नहीं मिली थी। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामला गंभीर है और पूरी तरह जांच की जाएगी। यदि जांच में यह साबित होता है कि स्टंट करने वाले युवा कानून का उल्लंघन कर रहे हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।  

नेशनल हाईवे 45 पर ब्रिज ढहने से यातायात प्रभावित, कंपनी और अधिकारियों पर कार्रवाई

जबलपुर/मध्यप्रदेश के जबलपुर में नेशनल हाईवे 45 पर बने ब्रिज के ढहने से सुरक्षा और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। इस गंभीर घटना के बाद प्रदेश के पीडब्ल्यूडी (PWD) मंत्री राकेश सिंह ने बड़ी कार्रवाई की घोषणा की है। मंत्री ने बताया कि ब्रिज बनाने वाली निर्माण कंपनी को ब्लैकलिस्टेड कर दिया गया है। इसके साथ ही ब्रिज निर्माण में लगे इंजीनियर और ठेकेदार के खिलाफ भी FIR दर्ज की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। मंत्री राकेश सिंह ने स्पष्ट किया कि प्राथमिक निरीक्षण में घटना में लापरवाही की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटना कभी नहीं होनी चाहिए थी और इसके लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल मामले में जांच कमेटी बनाने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि घटनास्थल और जिम्मेदारों की स्थिति पहले ही स्पष्ट हो चुकी है। घटना स्थल पर मिली जानकारी के अनुसार, जबलपुर नेशनल हाईवे 45 पर बना ब्रिज का एक हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया। इस दुर्घटना के कारण रेलवे लाइन पर स्थित ब्रिज का एक हिस्सा गिरने से हाईवे पर आवागमन प्रभावित हो गया। पहले से ही ब्रिज का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त था और आवागमन उस हिस्से से ही चल रहा था। अब ब्रिज के दूसरे हिस्से के भी क्षतिग्रस्त होने के बाद सड़क मार्ग पूरी तरह जोखिम भरा हो गया। ब्रिज नेशनल हाईवे 45 पर स्थित है, जो जबलपुर को भोपाल से जोड़ता है। ब्रिज का निर्माण लगभग 4 साल पहले पूरा हुआ था। इतनी कम अवधि में ब्रिज का क्षतिग्रस्त होना निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। घटना के बाद यातायात को शहपुरा शहर के भीतर से डाइवर्ट कर दिया गया है, ताकि दुर्घटना स्थल से गुजरने वाले वाहन सुरक्षित रहें। मंत्री राकेश सिंह ने इस अवसर पर किसानों को लेकर कांग्रेस के आगामी आंदोलन पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि प्रदेश लगातार कृषि क्षेत्र में पुरस्कार प्राप्त कर रहा है और किसानों को लेकर किसी बड़े प्रदर्शन की आवश्यकता नहीं है। मंत्री ने यह भी कहा कि दिशा रहित नेतृत्व के कारण ऐसे आंदोलन होते हैं, जबकि प्रदेश में सरकार ने किसानों के हितों का लगातार ध्यान रखा है। इस पूरे मामले ने निर्माण सुरक्षा, ब्रिज रखरखाव और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही पर जोर दिया है। प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके। अधिकारियों और ठेकेदारों को सतर्क करने के लिए यह कदम एक संदेश भी है कि निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मध्यप्रदेश में बिजली की दरों में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी प्रस्तावित, घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बड़ा आर्थिक असर

भोपाल से आज की बड़ी खबर यह है कि मध्यप्रदेश में बिजली महंगी होने की तैयारी चल रही है। राज्य की बिजली वितरण कंपनियों ने आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य विद्युत नियामक आयोग को 10.19 प्रतिशत की दर बढ़ोतरी का प्रस्ताव भेजा है। यदि यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो 1 अप्रैल 2026 से नई दरें लागू हो जाएंगी और प्रदेश के घरेलू उपभोक्ताओं को औसतन 300 रुपये तक का अतिरिक्त बिल चुकाना पड़ सकता है। बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव का मुख्य कारण बिजली कंपनियों को लगातार हो रहे वित्तीय घाटे और बढ़ते परिचालन खर्च हैं। पावर मैनेजमेंट कंपनी ने 6,044 करोड़ रुपये के घाटे को भरने के लिए दर बढ़ोतरी का प्रस्ताव भेजा है। इस कदम से उपभोक्ताओं पर प्रत्यक्ष आर्थिक असर पड़ेगा और घरेलू बिजली खर्च बढ़ने की संभावना है। वर्तमान और प्रस्तावित दरों पर नजर डालें तो पता चलता है कि 50 यूनिट तक के उपभोक्ताओं के लिए वर्तमान दर 4.45 रुपये प्रति यूनिट है, जिसे प्रस्तावित दर 4.78 रुपये प्रति यूनिट तक बढ़ाया गया है। 51 से 150 यूनिट वाले उपभोक्ताओं के लिए वर्तमान दर 5.41 रुपये प्रति यूनिट है, जबकि प्रस्तावित दर 5.82 रुपये तक पहुंच गई है। 151 से 300 यूनिट वाले उपभोक्ताओं के लिए दरें 6.79 रुपये से बढ़कर 7.3 रुपये प्रति यूनिट हो सकती हैं। खास बात यह है कि प्रस्ताव में 151-300 यूनिट वाले स्लैब को समाप्त कर इसे 300 यूनिट से ऊपर वाले स्लैब में विलय करने का भी सुझाव दिया गया है। इसका मतलब यह हुआ कि 151-300 यूनिट इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं की दरें और बढ़ जाएंगी। 300 यूनिट से ऊपर वाले उपभोक्ताओं की वर्तमान दर 8.98 रुपये प्रति यूनिट है, लेकिन प्रस्तावित दर 7.3 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से स्लैब बदलाव के कारण बिल में अप्रत्याशित वृद्धि हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिजली दरों में यह बढ़ोतरी केवल उपभोक्ताओं के लिए ही चुनौतीपूर्ण नहीं होगी, बल्कि छोटे उद्योगों और व्यवसायों पर भी इसका असर पड़ेगा। उपभोक्ताओं को अब अपने बिजली उपयोग पर अधिक ध्यान देना होगा और बचत के उपाय अपनाने पड़ सकते हैं। पावर कंपनियों ने कहा है कि पिछले कुछ सालों में परिचालन खर्च काफी बढ़ गए हैं। कर्मचारियों का वेतन, मेंटेनेंस और नई तकनीक में निवेश की लागत ने घाटे को और बढ़ा दिया है। यही कारण है कि यह दर बढ़ोतरी प्रस्तावित की गई है। अधिकारियों का कहना है कि यदि दर बढ़ोतरी स्वीकृत हो जाती है तो यह कदम कंपनी के वित्तीय स्वास्थ्य को सुधारने में मदद करेगा। राज्य विद्युत नियामक आयोग ने कहा है कि यह प्रस्ताव अब समीक्षा प्रक्रिया में है। जनता से सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे और फिर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि दरों में वृद्धि का उद्देश्य केवल घाटा पूरा करना है, किसी अन्य लाभ के लिए नहीं है।इस प्रस्ताव के लागू होने पर मध्यप्रदेश में बिजली के महंगे होने से घरों की खर्चीली स्थिति और बढ़ सकती है। ऐसे में उपभोक्ताओं को ऊर्जा की खपत पर नजर रखनी और आवश्यकता से ज्यादा बिजली का इस्तेमाल बचाने की रणनीति अपनानी जरूरी हो जाएगी।