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मार्च में बनाएं घूमने का प्लान, सुकून और फ्रेशनेस देंगे ये खास डेस्टिनेशन

नई दिल्ली । अगर आप रोजमर्रा की भागदौड़ से थोड़ा ब्रेक लेना चाहते हैं तो मार्च का महीना ट्रैवल के लिए बेहतरीन माना जाता है। न कड़ाके की ठंड न चिलचिलाती गर्मी हल्का सुहावना मौसम सफर को आरामदायक बना देता है। यही वजह है कि इस समय पहाड़ हरियाली और आध्यात्मिक स्थलों की खूबसूरती और भी निखर जाती है। अगर आप भी मन को तरोताजा करने और तनाव को पीछे छोड़ने का प्लान बना रहे हैं तो ये तीन जगहें आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होनी चाहिए। कूर्ग भारत का स्कॉटलैंड कर्नाटक में बसा कूर्ग अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए मशहूर है। इसे भारत का स्कॉटलैंड भी कहा जाता है। मार्च के महीने में यहां का मौसम बेहद खुशनुमा रहता है। चारों ओर फैले कॉफी के बागान धुंध से ढकी पहाड़ियां झरनों की कलकल ध्वनि और हरियाली से भरा वातावरण मन को सुकून देता है। अगर आप भीड़भाड़ से दूर प्रकृति के बीच समय बिताना चाहते हैं तो कूर्ग एक परफेक्ट चॉइस है। यहां एबी फॉल्स राजा सीट और दुबारे एलीफेंट कैंप जैसे दर्शनीय स्थल आपकी यात्रा को यादगार बना सकते हैं। ऋषिकेश अध्यात्म और एडवेंचर का संगम उत्तराखंड का ऋषिकेश मार्च में और भी आकर्षक हो जाता है। वसंत ऋतु में यहां का मौसम सुहावना रहता है जिससे गंगा किनारे बिताया गया समय खास बन जाता है। सुबह की गंगा आरती और शांत वातावरण मन को गहरी शांति देता है। सिर्फ आध्यात्म ही नहीं रोमांच के शौकीनों के लिए भी यह जगह खास है। रिवर राफ्टिंग बंजी जंपिंग और कैंपिंग जैसी गतिविधियां एडवेंचर का अलग ही अनुभव कराती हैं। अगर आप आध्यात्मिक सुकून और रोमांच दोनों चाहते हैं तो ऋषिकेश आपके लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन है।सिक्किम वादियों में सजा स्वर्ग पूर्वोत्तर भारत का सिक्किम मार्च में रंग-बिरंगे फूलों और साफ आसमान के साथ किसी स्वर्ग से कम नहीं लगता। ऊंचे-ऊंचे पहाड़ बर्फ से ढकी चोटियां और शांत वातावरण यहां की पहचान हैं। गंगटोक त्सोमगो लेक और प्राचीन बौद्ध मठों की खूबसूरती यात्रियों को मंत्रमुग्ध कर देती है। साफ हवा और प्राकृतिक नज़ारे तनाव को दूर कर मन को पूरी तरह रिफ्रेश कर देते हैं। अगर आपकी ट्रैवल लिस्ट में सिक्किम अब तक सिर्फ नाम भर था तो मार्च इसे सच में देखने का सही समय है।

नई परिवहन नीति के विरोध में बस ऑपरेटर्स की हड़ताल, होली भीड़ के लिए स्पेशल ट्रेनें घोषित

मध्यप्रदेश में होली के त्योहार से पहले यात्रियों के लिए राहत और चिंता दोनों तरह की खबरें सामने आई हैं। एक ओर जहां रेलवे ने बढ़ती भीड़ को ध्यान में रखते हुए भोपाल मंडल से चार जोड़ी स्पेशल ट्रेनों की व्यवस्था की है, वहीं दूसरी ओर नई परिवहन नीति के विरोध में 2 मार्च को बस ऑपरेटरों ने हड़ताल का ऐलान किया है। इससे यात्रियों को यात्रा योजना बनाने में सावधानी बरतने की जरूरत होगी। जानकारी के अनुसार, नई परिवहन नीति के विरोध में प्रदेश के बस ऑपरेटर्स 2 मार्च को बस सेवा बंद रखेंगे। कई बसों पर हड़ताल संबंधी पर्चे भी चिपकाए गए हैं, जिनमें स्पष्ट रूप से 2 मार्च को बस संचालन ठप रखने की बात कही गई है। होली जैसे बड़े त्योहार से ठीक पहले बस सेवा बंद होने की स्थिति में यात्रियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। स्वाभाविक रूप से बस सेवा प्रभावित होने पर यात्रियों का रुख रेलवे की ओर बढ़ेगा, जिससे ट्रेनों में भीड़ बढ़ने की संभावना है। इसी को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने अतिरिक्त भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष ट्रेनों की घोषणा की है। भोपाल मंडल से रीवा, भोपाल और दानापुर के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी। गाड़ी संख्या 02192/02191 एक-एक ट्रिप 28 फरवरी 2026 को संचालित करेगी। वहीं गाड़ी संख्या 02186/02185 नंबर की स्पेशल ट्रेन 2 और 3 मार्च 2026 को दो-दो ट्रिप चलेगी। इसके अलावा भोपाल-रीवा स्पेशल ट्रेन (01704/01703) 5 मार्च 2026 को एक ट्रिप करेगी। वहीं रानी कमलापति-दानापुर स्पेशल ट्रेन (01667/01668) 27 फरवरी और 2 मार्च को रवाना होगी। वापसी में यह ट्रेन 28 फरवरी और 3 मार्च को चलेगी। रेलवे के इस फैसले से त्योहार के दौरान घर जाने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि बस हड़ताल और ट्रेनों में बढ़ती भीड़ की संभावना को देखते हुए यात्रियों को समय रहते टिकट बुक कराने और वैकल्पिक यात्रा योजना तैयार रखने की सलाह दी जा रही है। विशेष रूप से लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को रेलवे की वेबसाइट या अधिकृत काउंटर से अपडेट लेते रहना चाहिए। होली के अवसर पर हर वर्ष यात्रियों की संख्या में भारी वृद्धि देखी जाती है। ऐसे में बस सेवा बंद रहने और ट्रेनों में अतिरिक्त भीड़ के चलते यात्रा प्रबंधन प्रशासन के लिए भी चुनौती बन सकता है। फिलहाल रेलवे की ओर से की गई अतिरिक्त ट्रेनों की व्यवस्था को राहत भरा कदम माना जा रहा है, जबकि बस ऑपरेटरों की हड़ताल से परिवहन व्यवस्था पर असर पड़ना तय है।

इंदौर में 'ग्रीन गोल्ड डे': दिनेश सहारा फाउंडेशन ने 1000 पौधों का किया रोपण, वॉकाथॉन से बढ़ाई पर्यावरण जागरूकता

इंदौर में दिनेश सहारा फाउंडेशन द्वारा आयोजित ‘ग्रीन गोल्ड डे’ का आयोजन पर्यावरण संरक्षण और समाज सेवा के संदेश को लेकर किया गया। यह कार्यक्रम न केवल प्रकृति के प्रति लोगों की जिम्मेदारी को उजागर करता है, बल्कि सनातन मूल्यों और आध्यात्मिक जागरूकता को भी बढ़ावा देता है। इस खास मौके पर शहर के नागरिकों, युवाओं और समाजसेवियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और हरित भविष्य के प्रति अपने संकल्प का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम की शुरुआत पितृ पर्वत पर वृक्षारोपण अभियान से हुई। यहां स्वयंसेवकों और प्रकृति प्रेमियों ने मिलकर 1,000 से अधिक पौधे लगाए। वृक्षारोपण के साथ ही गौ सेवा का आयोजन भी किया गया, जो न केवल पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में सहायक है, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी इसकी अहमियत है। डॉ. दिनेश सहारा के साथ उनके परिवार के सदस्य सुरेश सहारा, नितेश सहारा और मनीष सहारा सहित अन्य गणमान्य लोग भी मौजूद रहे और इस पुनीत कार्य में हिस्सा लिया। शाम के समय ‘ग्रीन गोल्ड वॉकाथॉन’ का आयोजन किया गया, जो 3 किलोमीटर लंबी पदयात्रा थी। इस वॉकाथॉन में इंदौर के युवा, परिवार और बुजुर्ग भाग लेने के लिए उमड़े। इस पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य लोगों में स्वच्छ और सुरक्षित भविष्य के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी की भावना पैदा करना था। डॉ. दिनेश सहारा ने इस दौरान संदेश दिया कि पर्यावरण की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य है। कार्यक्रम में समाजसेवा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया। इसमें रंजन नेगी, सुरेश एमजी, प्रियंशु कुमाथ, सुधींद्र मोहन शर्मा, डॉ. जगदीश यादव और पुनीत पांडे जैसे नाम शामिल थे। कार्यक्रम का समापन Walk to Heal, Sing to Feel थीम पर आधारित भजन क्लबिंग के साथ हुआ। सुरम्य भजनों ने उपस्थित लोगों को भक्ति और आत्मचिंतन के गहरे भाव से जोड़ा। अपने संबोधन में डॉ. दिनेश सहारा ने कहा कि हरा रंग केवल एक रंग नहीं, बल्कि जीवन की डोर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वृक्षारोपण, गौ सेवा और सामूहिक भजन ईश्वर और प्रकृति से जुड़ने के सरल माध्यम हैं। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि सच्चा उत्सव सेवा और जीवन के संरक्षण में निहित है। डॉ. सहारा ने सभी से सतत विकास और आध्यात्मिक जागरूकता को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की। ‘ग्रीन गोल्ड डे’ का यह आयोजन पर्यावरण संरक्षण, समाज सेवा और आध्यात्मिक जागरूकता को जोड़ने का अनूठा प्रयास माना जा रहा है। इंदौर के नागरिकों और युवा स्वयंसेवकों ने इस कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर भाग लेकर एक संदेश दिया कि प्रकृति और समाज के प्रति जिम्मेदारी केवल एक दिन की नहीं बल्कि सतत प्रयासों से निभाई जा सकती है।

BHIND MUDERS CASE: भिंड: बोरी में मिले शव का बड़ा खुलासा, गला दबाकर की गई थी हत्या, पीएम रिपोर्ट में खुलासा

BHIIND MURDER CASE

HIGHLIGHTS: 18 फरवरी को बोरी में मिला था शव पोस्टमार्टम में गला दबाकर हत्या की पुष्टि खरीदारी के लिए निकली थी युवती मोबाइल तीन दिन पहले से बंद 10 से अधिक संदिग्धों से पूछताछ BHIND MUDERS CASE: ग्वालियर। भिंड जिले के सुरपुरा थाना क्षेत्र के सोई गांव में 18 फरवरी की शाम बंबा की पुलिया के पास एक बोरी में बंद युवती का शव मिला जिसमे अब बड़ा खुलासा सामने आया है। बता दें कि ग्रामीणों को बोरी संदिग्ध हालत में पड़ी दिखी तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी। जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने बोरी काटकर शव बाहर निकाला। सेवाधाम आश्रम में 51 दिन में 11 बच्चों की मौत, 50 से अधिक की हालत गंभीर; हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान पुलिस का कहना है कि पहचान होने पर मृतका की शिनाख्त बादपुरी निवासी 20 वर्षीय अफसाना खान के रूप में हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या की पुष्टि मामले में अब सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साफ हुआ है कि अफसाना की मौत गला दबाने से हुई। सूचना कि मने तो रिपोर्ट के बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच और तेज कर दी है। सेवाधाम आश्रम में 51 दिन में 11 बच्चों की मौत, 50 से अधिक की हालत गंभीर; हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान खरीदारी के लिए निकली थी, फिर लापता परिजनों के अनुसार अफसाना प्रतापपुरा बाजार खरीदारी के लिए निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। काफी तलाश के बाद सुरपुरा थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई गई। हैरानी की बात यह है कि जिस दिन रिपोर्ट दर्ज हुई, उसी शाम शव बरामद हो गया। AMBAH BJP LEADER CONTROVERSY: BJP उपाध्यक्ष का विवादित बयान: सिंगर के पहनावे पर किए भद्दे कमेंट मोबाइल तीन दिन पहले से बंद पुलिस ने मृतका का मोबाइल जब्त कर लिया है। बताया जा रहा है कि मोबाइल घटना से तीन दिन पहले से बंद था। पुलिस कॉल डिटेल और लोकेशन के आधार पर जांच कर रही है। वजन घटाना हुआ आसान: तमन्ना भाटिया और फिटनेस ट्रेनर सिद्धार्थ सिंह की टिप्स दस से अधिक संदिग्धों से पूछताछ अब तक दस से ज्यादा संदिग्धों से पूछताछ की जा चुकी है। पुलिस पारिवारिक विवाद और व्यक्तिगत रंजिश सहित हर एंगल से जांच कर रही है। अटेर एसडीओपी रविंद्र वास्कले ने कहा कि जल्द ही मामले का खुलासा किया जाएगा।

वल्लभ, विंध्याचल और सतपुड़ा भवन में GAD टीम की सख्त कार्रवाई, समय से न आने वाले अधिकारियों पर होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई

मध्यप्रदेश के तीन प्रमुख सरकारी भवन-वल्लभ भवन, विंध्याचल भवन और सतपुड़ा भवन—में कर्मचारियों और अधिकारियों की कार्यालयीन समयपालन की जांच के लिए GAD की विशेष टीम तैनात की गई है। यह कदम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आदेश पर लिया गया है, जो कार्यालयीन समय प्रबंधन को लेकर सख्त रवैया अपना रहे हैं। जानकारी के अनुसार, टीम का उद्देश्य समय से कार्यालय में न पहुँचने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान करना और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव और सामान्य प्रशासन विभाग को निर्देश दिया है कि गुरुवार सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक तीनों भवनों में सभी कर्मचारियों की उपस्थिति, आने-जाने का समय और किसी भी प्रकार की अनधिकृत अनुपस्थिति का पूरा रिकॉर्ड तैयार किया जाए। इस प्रक्रिया में GAD की टीम हर कार्यालय में तैनात रहेगी और समयपालन की स्थिति का विस्तृत ब्यौरा तैयार करेगी। सुरक्षा और प्रशासनिक दक्षता के लिहाज से यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पहले ही अधिकारियों को समय से कार्यालय आने की हिदायत दी थी। उनका कहना है कि पांच दिन के कार्य सप्ताह के बावजूद कई अधिकारी समय पर कार्यालय नहीं पहुँचते, जिससे प्रशासनिक काम प्रभावित होता है। इस कारण उन्होंने सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि सभी कार्यालय समय पालन करें और कार्य सुचारू रूप से चले। यह निरीक्षण ऐसे समय पर किया जा रहा है जब मुख्यमंत्री राज्य के बाहर हैं। वे वर्तमान में राजस्थान और छत्तीसगढ़ के दौरे पर हैं। आज सीएम भीलवाड़ा में उद्योगपतियों से मुलाकात कर निवेश संभावनाओं पर चर्चा करेंगे, इसके बाद वे अन्य कार्यक्रमों में भाग लेंगे और शाम को रायपुर लौटेंगे। इस दौरे के दौरान सचिवालयों में GAD टीम की तैनाती से यह संदेश स्पष्ट होता है कि समयपालन और प्रशासनिक अनुशासन को सख्ती से लागू किया जाएगा, भले ही मुख्यमंत्री दौरे पर हों। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से अधिकारियों में समय पालन की भावना मजबूत होगी और कार्यालयीन कार्यों में बाधा कम होगी। वहीं, यह भी देखा जा रहा है कि ऐसे निरीक्षण से कर्मचारियों और अधिकारियों में जवाबदेही बढ़ती है और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता आती है। GAD की टीम आने-जाने का पूरा रिकॉर्ड तैयार करेगी और अनाधिकृत अनुपस्थिति पाए जाने पर प्रशासनिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इस कदम के पीछे मुख्य उद्देश्य सरकारी कार्यों में सुचारू संचालन सुनिश्चित करना और प्रशासनिक जिम्मेदारियों में कोई कमी न रहने देना है। समयपालन और अनुशासन पर यह सख्त रुख मंत्रालयों में एक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

विनायक दामोदर सावरकर : एक विचार, एक क्रांति, एक युग

डॉ. निवेदिता शर्मा एक विचार, एक क्रांति, एक युग यदि इन शब्दों में किसी व्यक्तित्व को समेटना हो तो वह नाम है स्‍वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर जी का। उन्होंने स्वतंत्रता प्राप्‍ति को ही अपने जीवन का परम ध्येय बनाया। उनके लिए स्वाधीनता राष्ट्रीय चेतना की पुकार थी। उनका संपूर्ण जीवन इस सत्य का प्रमाण है कि यदि संकल्प अडिग हो तो लोहे की सलाखें भी विचारों को कैद नहीं कर सकतीं। 28 मई 1883 को महाराष्ट्र के भगूर में जन्मे सावरकर बचपन से ही तेजस्वी, जिज्ञासु और राष्ट्रभक्ति की भावना से ओतप्रोत रहे। अल्पायु में माता-पिता का निधन हो गया, किंतु विपरीत परिस्थितियों ने उनके मनोबल को और दृढ़ किया। छात्र जीवन में उन्होंने मित्र मेला और बाद में अभिनव भारत जैसे क्रांतिकारी संगठन की स्थापना की। ये संगठन गुप्त क्रांतिकारी मंडल के साथ ही राष्ट्रजागरण के केंद्र थे, जहाँ युवाओं के हृदय में स्वतंत्रता की ज्योति प्रज्वलित की जाती थी। पुणे के फर्ग्युसन महाविद्यालय में अध्ययन करते समय उन्होंने विदेशी वस्त्रों की होली जलाकर ब्रिटिश सत्ता को खुली चुनौती दी। आगे की शिक्षा के लिए वे लंदन गए जहाँ इंडिया हाउस में रहकर उन्होंने क्रांतिकारी गतिविधियों को संगठित किया। वहीं उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को नया दृष्टिकोण देने का साहसिक कार्य किया। उनकी प्रसिद्ध कृति The Indian War of Independence 1857 ने अंग्रेजों द्वारा प्रचारित सिपाही विद्रोह की अवधारणा को अस्वीकार करते हुए 1857 को राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम सिद्ध किया। प्रस्तावना में वे लिखते हैं कि 1857 का संघर्ष केवल सैनिकों का विद्रोह नहीं था, वह स्वतंत्रता के लिए राष्ट्रीय युद्ध था। 1909 के इस ग्रंथ ने भारतीय युवाओं में आत्मगौरव का संचार किया। ब्रिटिश सरकार ने इसे प्रतिबंधित कर दिया क्योंकि यह पुस्तक क्रांति की चेतना को तीव्र कर रही थी। सावरकर ने इतिहास को पराधीनता की दृष्टि से मुक्त कर स्वाभिमान के आलोक में पुनर्परिभाषित किया। 1910 में उनकी गिरफ्तारी हुई और 1911 में उन्हें दो-दो आजीवन कारावास की सजा देकर अंडमान भेज दिया गया। सेल्युलर जेल की अंधेरी कालकोठरी में जो यातनाएँ उन्होंने सहीं, वे किसी भी सामान्य मनुष्य को तोड़ सकती थीं। तेल के कोल्हू में बैलों की तरह जोतना, कोड़े, एकांतवास और अमानवीय व्यवहार उनके दैनिक जीवन का हिस्सा बन गया। किंतु अंडमान की सेल्युलर जेल की अंधेरी काल कोठरी भी वीर सावरकर की क्रांतिकारी चेतना को कुचल नहीं सकी। उन्होंने अपनी आत्मकथा माझी जन्मठेप में उन दिनों का मार्मिक वर्णन करते हुए लिखा है कि कालकोठरी की अंधेरी रातों में भी उनके मन में स्वतंत्र भारत का सूर्य उदित होता रहता था। निश्‍चित ही इन शब्दों में एक कैदी भावना में एक तपस्वी का अडिग विश्वास झलकता है। उनका जीवन हमें दिखाता है कि यदि संकल्प अडिग हो तो कारागार भी साधना स्थल बन जाता है। कारावास के वर्षों ने उनके विचारों को और परिपक्व किया। 1923 में प्रकाशित उनकी पुस्तक Hindutva: Who Is a Hindu? में उन्होंने हिंदुत्व की अवधारणा प्रस्तुत की। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदुत्व को सिर्फ धार्मिक पहचान के रूप में नहीं समझना चाहिए। अध्याय छह में वे लिखते हैं कि हिंदू वह है जो इस भारतभूमि को अपनी पितृभूमि और पुण्यभूमि दोनों के रूप में स्वीकार करता है। इस परिभाषा में सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय अस्मिता का भाव निहित है। उन्होंने हिंदुत्व को एक जीवनदर्शन बताया, ऐसा दर्शन जिसमें राष्ट्र सर्वोपरि है और हर नागरिक उसकी आत्मा है। यह विचार उनके व्यापक राष्ट्रवाद का आधार था। सावरकर सामाजिक समरसता के प्रबल समर्थक थे। रत्नागिरी में नजरबंदी के दौरान उन्होंने अस्पृश्यता के विरुद्ध आंदोलन चलाया और 1931 में पतित पावन मंदिर की स्थापना की, जहाँ सभी जातियों को प्रवेश का अधिकार दिया गया। हिंदुत्व के सामाजिक आयाम पर विचार करते हुए उन्होंने लिखा, जातिगत विभाजन ने हिंदू समाज को दुर्बल किया है और एकता ही उसे सशक्त बना सकती है। उनके लिए राष्ट्रनिर्माण सिर्फ राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं था, वे सदैव ही सामाजिक सुधार और आत्मसम्मान के पुनर्जागरण पर आवश्यक बल देते रहे। उनका व्यक्तित्व बहुआयामी था। वे क्रांतिकारी थे, लेखक थे, कवि थे और विचारक भी। उनकी कविताएँ मातृभूमि के प्रति समर्पण से भरी हुई हैं। ने मजसी ने परत मातृभूमीला जैसी रचनाओं में एक व्याकुल हृदय की पुकार सुनाई देती है जो अपनी भूमि से दूर रहकर भी उसी की स्मृति में जीता है। वे हर राष्ट्रभक्त के हृदय में विचारों की दहकती ज्वाला हैं, वे क्रांति की मशाल हैं। उनके भाषणों और लेखों में राष्ट्रवाद का ओजस्वी स्वर गूंजता है। उन्होंने युवाओं को संगठित होने और सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त करने का आह्वान किया क्योंकि वे मानते थे कि स्वतंत्र राष्ट्र की सुरक्षा उसके जागरूक और सक्षम नागरिकों पर निर्भर करती है। इतिहास में उनके जीवन के कुछ प्रसंग विवादों से भी जुड़े रहे। महात्मा गांधी की हत्या के संदर्भ में उनका नाम आया, किंतु न्यायालय ने साक्ष्यों के अभाव में उन्हें दोषमुक्त कर दिया। मतभेदों और वैचारिक असहमतियों के बावजूद यह तथ्य निर्विवाद है कि उन्होंने अपने जीवन का स्वर्णिम काल कारावास में बिताया और राष्ट्र के लिए असाधारण त्याग किया। उनके योगदान का मूल्यांकन करते समय उनके समग्र जीवन और तप को दृष्टि में रखना आवश्यक है। जीवन के अंतिम चरण में भी उनका आत्मविश्वास और अनुशासन अटूट रहा। 26 फरवरी 1966 को उन्होंने भारत राष्‍ट्र में चिति के रूप में आत्मार्पण का निर्णय लिया। उनका मानना था कि जब जीवन का ध्येय पूर्ण हो जाए और शरीर राष्ट्रसेवा में समर्थ न रहे तो शांतिपूर्वक उसका परित्याग कर देना चाहिए। यह निर्णय भी उनके तपस्वी स्वभाव का द्योतक था। स्वाधीनता के सूर्य, अखंड राष्ट्रवाद के पुजारी, हिंदुत्व के प्रखर व्याख्याकार और संघर्षों के तपस्वी विनायक दामोदर वीर सावरकर की पुण्यतिथि पर उन्हें करबद्ध नमन करते हुए स्मरण होता है कि उनका जीवन सिर्फ अतीत की कहानी न होकर वर्तमान और भविष्य के लिए प्रेरणा है। उन्होंने हमें सिखाया कि राष्ट्र केवल भौगोलिक सीमा नहीं होता, वह करोड़ों लोगों की सामूहिक चेतना और सांस्कृतिक स्मृति का जीवंत स्वरूप है। जब कोई व्यक्ति उस चेतना के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर देता है तो वह स्वयं एक युग बन जाता है। एक विचार जोकि स्वाधीनता का था, एक क्रांति जो आत्मगौरव की थी और एक युग जो राष्ट्रसमर्पण का प्रतीक बन गया, वह

सेवाधाम आश्रम में 51 दिन में 11 बच्चों की मौत, 50 से अधिक की हालत गंभीर; हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान

उज्जैन । अंबोदिया स्थित अंकित सेवाधाम आश्रम में बीते डेढ़ माह के भीतर 11 बच्चों की मौत ने शहर में हड़कंप मचा दिया है। 20 नवंबर 2025 से 10 जनवरी 2026 के बीच हुई इन मौतों में अधिकांश बच्चे बहु-दिव्यांग थे और 10 से 18 वर्ष की आयु वर्ग में आते थे। बच्चों को गंभीर स्थिति में जिला अस्पताल उज्जैन लाया गया था लेकिन इलाज के दौरान उनकी जान बचाई नहीं जा सकी। इस मामले पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। कोर्ट ने मुख्य सचिव महिला एवं बाल विकास प्रमुख सचिव आयुक्त कलेक्टर उज्जैन जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी और आश्रम अधीक्षक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है। अदालत ने आश्रम की निरीक्षण रिपोर्ट पेश करने के निर्देश भी दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च 2026 को निर्धारित की गई है। शासकीय चरक अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार दिसंबर 2025 में 8 और जनवरी 2026 में 2 बच्चों की मौत हुई। सभी मामलों में पोस्टमॉर्टम शासकीय चरक भवन अस्पताल में थाना भैरवगढ़ पुलिस की मौजूदगी में कराया गया। अस्पताल के आरएमओ डॉ. चिन्मय चिंचोलेकर ने बताया कि अधिकांश बच्चों में एनीमिया जैसी गंभीर बीमारियां पाई गईं और कुछ को मृत अवस्था में लाया गया जबकि कुछ की इलाज के दौरान मौत हुई। अंकित सेवाधाम आश्रम में वर्तमान में लगभग 250 निराश्रित और दिव्यांग बच्चे रह रहे हैं जिनमें से 50 से अधिक की हालत गंभीर बताई जा रही है। आश्रम संचालक सुधीर भाई गोयल ने कहा कि आश्रम में आने वाले अधिकांश बच्चे पहले से ही गंभीर बीमारियों से पीड़ित होते हैं। कई बच्चे स्वयं चलने-उठने या भोजन करने में असमर्थ हैं। करीब 1.5 साल पहले इंदौर के युग पुरुष धाम आश्रम में बच्चों की मौत और बीमारी के मामलों के बाद प्रशासन ने उस आश्रम की मान्यता रद्द कर दी थी। इसके बाद वहां रह रहे 86 दिव्यांग बच्चों को उज्जैन के सेवाधाम आश्रम में शिफ्ट किया गया जिनमें अधिकांश मृतक भी शामिल थे। सुधीर भाई गोयल ने कहा कि मृतक बच्चे पहले से गंभीर बीमारियों से ग्रसित थे। उनमें सांस लेने में कठिनाई खून की कमी और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं थीं। उन्होंने यह भी बताया कि बच्चों का इलाज पहले से ही विभिन्न अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में चल रहा था और उनकी गंभीर स्थिति के कारण उन्हें आश्रम में रखा गया। मामले की संवेदनशीलता और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए हाईकोर्ट ने सभी जिम्मेदार अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। अदालत के नोटिस के बाद आश्रम और संबंधित स्वास्थ्य सुविधाओं की निगरानी और कड़ी करने की संभावना जताई जा रही है।

बोर्ड एग्जाम में घबराहट और भूलने की समस्या से कैसे निपटें..

नई दिल्ली।बोर्ड एग्जाम का समय छात्रों के लिए हमेशा तनावपूर्ण होता है। कई बार ऐसा होता है कि घंटों पढ़ाई करने के बाद भी पेपर हाथ में आते ही सब कुछ भूल जाता है। यह सिर्फ छात्रों की कमजोरी नहीं, बल्कि एक सामान्य मानसिक प्रतिक्रिया है। कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल, नवी मुंबई के कंसल्टेंट साइकियाट्रिक डॉक्टर पार्थ नागड़ा के अनुसार यह स्ट्रेस और घबराहट का परिणाम होता है। परीक्षाएं आपकी याददाश्त और समझने की क्षमता को परखने का तरीका हैं। इसलिए पॉजिटिव सोच और आत्मविश्वास के साथ इन पर काबू पाना जरूरी है। डॉक्टर कहते हैं कि खुद को पॉजिटिव कल्पना में देखें। उदाहरण के लिए सोचें कि आप स्कूल टॉपर बन रहे हैं और अपने जीवन में खुशहाल और संतुलित भविष्य जी रहे हैं। यह मानसिक तैयारी आपको परीक्षा में घबराहट कम करने में मदद करेगी। इतना ही नहीं, यह समझना भी महत्वपूर्ण है कि परीक्षा सफलता का केवल एक तरीका है, जीवन में अन्य विकल्प भी मौजूद हैं। पढ़ाई की तैयारी के टिप्स:छोटे और आसान लक्ष्य तय करें। उदाहरण के लिए 25–30 मिनट पढ़ें, 10 मिनट रिवीजन करें और 15 मिनट ब्रेक लें। खुद के नोट्स बनाएं क्योंकि लिखने से याददाश्त तेज होती है। कठिन टॉपिक्स को छोटे हिस्सों में बांटकर अभ्यास करें और आत्मविश्वास बनाए रखें। डायग्राम और चित्रों का इस्तेमाल याददाश्त बढ़ाने में मदद करता है। पढ़ाई के लिए टाइम टेबल तय करें और रोज 7–8 घंटे नींद लें। नींद के दौरान पढ़ा हुआ लंबे समय तक याद रहता है। दोस्तों के साथ मिलकर पढ़ाई करें और घर का पौष्टिक खाना खाएं। रोज 30 मिनट हल्की एक्सरसाइज से दिमाग सक्रिय रहता है। परीक्षा का सामना करने के टिप्स:आखिरी समय की पढ़ाई से बचें। इससे आत्मविश्वास कमजोर होता है और तनाव बढ़ता है। परीक्षा से एक दिन पहले बैग, पैन-पेंसिल, हॉल टिकट जैसी जरूरी चीजें तैयार रखें। खुद की तुलना दूसरों से न करें। हर छात्र की अपनी ताकत और कमजोरियां होती हैं। इंटरनेट और सोशल मीडिया से दूरी बनाएं। आराम के लिए म्यूजिक सुनें, हल्की टहलें या दोस्तों से बात करें। डॉक्टर बताते हैं कि अगर अत्यधिक घबराहट या पैनिक अटैक हो तो गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज, योग और मेडिटेशन अपनाएं। फिर भी अगर राहत न मिले तो किसी अच्छे साइकियाट्रिस्ट से परामर्श जरूर लें। इस तरह, पढ़ाई और परीक्षा की सही तैयारी, पॉजिटिव सोच और मानसिक संतुलन के जरिए छात्र अपनी घबराहट को कम कर सकते हैं और बोर्ड एग्जाम का सामना आत्मविश्वास के साथ कर सकते हैं। याद रखें, असफलता भी सफलता का हिस्सा है और उससे सीखकर आगे बढ़ना सबसे महत्वपूर्ण है।

AMBAH BJP LEADER CONTROVERSY: BJP उपाध्यक्ष का विवादित बयान: सिंगर के पहनावे पर किए भद्दे कमेंट

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HIGHLIGHTS: मुरैना के अंबाह मेले में भाजपा नेता ने किया विवादित बयान सिंगर सोनल प्रधान के पहनावे पर भद्दा कमेंट वीडियो सोशल मीडिया पर हुआ वायरल कांग्रेस ने बयान को अशोभनीय करार दिया भाजपा ने फोरम में चर्चा और आगे की कार्रवाई का ऐलान किया AMBAH BJP LEADER CONTROVERSY: ग्वालियर। मुरैना के अंबाह में आयोजित जयेश्वर महादेव मेले में भाजपा जिला उपाध्यक्ष जिनेश जैन ने बॉलीवुड सिंगर सोनल प्रधान के पहनावे को लेकर विवादित टिप्पणी की। बता दें कि उन्होंने कहा कि सिंगर की पेंट नाभि से 3 इंच नीचे थी और जनता इसे देखकर मजे ले रही थी। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर अब तेज़ी से वायरल हो रहा है और इसने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। सहयोगी ने रिकॉर्डिंग रोकने की कोशिश की वीडियो में दिख रहा है कि जिनेश जैन का सहयोगी रिकॉर्डिंग बंद करने की बात कह रहा था। इसके बावजूद रिकॉर्डिंग करने वाले ने इसे जारी रखा। बताया जा रहा है कि मेले में सिंगर सोनल प्रधान ने कई हिट गीत जैसे “कमली- कमली”, “लैला मैं लैला”, “चिट्टियां कलाइयां”, “दिलबर” और “घूमर” जैसे गांव पर अपनी परफॉरमेंस दी। विदेशी नागरिकों के आधार पर सख्ती: वीजा खत्म होते ही होगा निष्क्रिय, OCI और नेपाल-भूटान नागरिकों के लिए 10 साल तक वैध महिला सम्मान पर उठे सवाल कांग्रेस विधायक दिनेश गुर्जर ने बयान को अशोभनीय करार दिया और कहा कि भाजपा की कथनी और करनी में अंतर है। साथ ही उन्होंने कहा कि महिलाओं के प्रति अमर्यादित भाषा का प्रयोग अब चिंता का विषय बन गया है। वजन घटाना हुआ आसान: तमन्ना भाटिया और फिटनेस ट्रेनर सिद्धार्थ सिंह की टिप्स भाजपा का रुख और आगे की कार्रवाई भाजपा जिला अध्यक्ष कमलेश कुशवाह ने कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि को मर्यादा में रहकर बोलना चाहिए। मामले को लेकर उन्होंने बताया कि इस बयान पर पार्टी फोरम में चर्चा होगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

वजन घटाना हुआ आसान: तमन्ना भाटिया और फिटनेस ट्रेनर सिद्धार्थ सिंह की टिप्स

नई दिल्ली।बॉलीवुड एक्ट्रेस तमन्ना भाटिया की फिटनेस का राज उनके ट्रेनर सिद्धार्थ सिंह ने अब सबके सामने साझा किया है। वजन घटाने की चाहत रखने वाले अक्सर भारी एक्सरसाइज और महंगी डाइट प्लान की ओर रुख करते हैं, लेकिन सिद्धार्थ सिंह का कहना है कि वजन कम करने के लिए सबसे आसान तरीका रोज़मर्रा की थाली में संतुलन बनाए रखना है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर वीडियो में बताया कि नई डाइट लेने की बजाय अपनी प्लेट स्ट्रक्चर को सही करना ज्यादा प्रभावी साबित होता है। सिद्धार्थ के अनुसार हर खाने की थाली में तीन मुख्य घटक होने चाहिए। पहला और सबसे अहम हिस्सा है पाम प्रोटीन। इसमें आप चिकन, पनीर, टोफू, दाल या अंडे शामिल कर सकते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि दिन के हर खाने में प्रोटीन का होना जरूरी है। बिना प्रोटीन के वजन घटाना मुश्किल है क्योंकि यह मसल्स को बनाए रखने और शरीर की चर्बी कम करने में मदद करता है। दूसरा हिस्सा है स्मार्ट कार्ब्स। आम धारणा है कि कार्ब्स खाने से वजन बढ़ता है, लेकिन सिद्धार्थ इसे गलत मानते हैं। यदि कार्ब्स सही मात्रा और सही समय पर शामिल किए जाएं, तो यह वजन घटाने में सहायक हो सकते हैं। इसके लिए आप अपनी प्लेट में एक मुट्ठी रोटी, चावल या शकरकंद जैसी चीजें ले सकते हैं। इससे शरीर को ऊर्जा मिलती है और आप दिनभर एक्टिव रहते हैं। तीसरा और महत्वपूर्ण हिस्सा है सब्जियां। हर प्लेट में कम से कम दो मुट्ठी हरी सब्जियों का होना जरूरी है। इनमें फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो पेट को लंबे समय तक भरा रखती है और बार-बार खाने की इच्छा को कम करती है। फाइबर का सेवन मेटाबॉलिज्म को भी बेहतर बनाता है और वजन घटाने की प्रक्रिया को तेज करता है। सिद्धार्थ सिंह बताते हैं कि कई बिजी प्रोफेशनल्स जो केवल 5 से 7 किलो वजन कम करना चाहते हैं, उन्हें कार्ब्स पूरी तरह से हटाने की जरूरत नहीं है। असली फर्क संतुलित प्लेट स्ट्रक्चर से आता है। प्रोटीन, स्मार्ट कार्ब्स और हरी सब्जियों का सही अनुपात रखने से वजन घटाना सरल और स्वस्थ दोनों होता है। इसके अलावा सिद्धार्थ ने कहा कि छोटी-छोटी आदतें भी असर डालती हैं। खाने से पहले पानी पीना, धीमी गति से खाना, और रात के समय हल्का खाना शरीर को डिटॉक्स करने और वजन नियंत्रित करने में मदद करता है। इस तरीके को अपनाकर किसी भी व्यक्ति को अतिरिक्त मेहनत किए बिना फिटनेस और वजन में सुधार महसूस हो सकता है। वास्तव में, फिट रहने के लिए जरूरी नहीं कि आप महंगी डाइट प्लान या जिम में घंटों समय बिताएं। सही प्लेट स्ट्रक्चर, संतुलित भोजन और थोड़ी जागरूकता से वजन कम करना हर किसी के लिए संभव है। यदि आप भी वजन घटाने की कोशिश कर रहे हैं, तो आज ही अपनी प्लेट को संतुलित करने की शुरुआत करें और छोटे-छोटे बदलाव को जीवनशैली में शामिल करें।