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ईरान ने दुबई में US मिलिट्री ठिकानों पर किया हमला, शाहेद-136 ड्रोन से साधा निशाना

दुबई। ईरान (Iran) ने यूएई (UAE) के दुबई (Dubai) में यूएस मिलिट्री ठिकाने (US Military Bases) पर बड़ा ड्रोन हमला किया है. ईरानी मीडिया के मुताबिक, ईरान ने शाहेद-136 ड्रोन (Shahed-136 Drone) से दुबई में उस बिल्डिंग पर हमला किया है, जहां अमेरिकी मिलिट्री के अधिकारी मौजूद थे. इससे पहले सऊदी में स्थित अमेरिकी दूतावास पर ईरान ने ड्रोन के जरिए निशाना साधा था, जहां पर हमले के बाद आग लगने की खबर आई थी. हालांकि, रिपोर्ट्स में पता चला है कि एंबेसी हमले के वक्त खाली थी. कतर की ओर बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन्सकतर के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि उसने हमले शुरू होने के बाद से देश पर दागे गए अधिकांश ईरानी प्रोजेक्टाइल को रोक दिया है, जिसमें तीनों क्रूज मिसाइलें, 101 बैलिस्टिक मिसाइलों में से 98, 39 ड्रोन में से 24 और दोनों SU-24 लड़ाकू जेट शामिल हैं। सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी किया है. रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता, मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने कहा, “रियाद और अल-खार्ज शहरों के पास 8 ड्रोन को रोका और नष्ट किया गया.” सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें दिखाया गया है कि मंगलवार सुबह-सुबह ईरानी ड्रोन के हमले के बाद इज़राइल में US एंबेसी में आग लग गई.

Iran के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की पत्नी की भी मौत.. US-इजराइली हमलें हो गई थीं घायल

तेहरान। ईरान (Iran) के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई (Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei) की पत्नी, मंसूरेह खोजस्तेह बाघेरजादेह की मौत हो गई है। खबर है कि US-इजराइली हमलों में लगी चोटों की वजह से उनकी मौत हो गई। ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर (Government Broadcaster) प्रेस टीवी ने सोमवार को कहा कि हमले के बाद वह ‘शहीद हो गईं’ खामेनेई खुद शनिवार को अमेरिका और इजराइल के हमलों में मारे गए थे। ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया कि खोजस्तेह भी उन्हीं हमलों में घायल हो गई थीं और बाद में उनकी चोटों की वजह से मौत हो गई। ईरान की सरकारी मीडिया ने बताया कि अयातुल्ला खामेनेई हमलों के शुरुआती दौर में ही मारे गए। US और इज़राइली अधिकारियों ने कहा कि ये हमले स्ट्रेटेजिक मिलिट्री और सिक्योरिटी टारगेट पर किए गए थे। इसकी पुष्टि US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के धर्मगुरु की मौत की घोषणा के कुछ घंटों बाद हुई, जो सरकार बदलने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा था। सुप्रीम लीडर के परिवार में हुई मौतों की पहले ही पुष्टि कर दी थीरिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि खामेनेई के कई रिश्तेदार, जिनमें उनकी बेटी, दामाद और उनकी पोती शामिल हैं, उन्हीं हमलों में मारे गए। रॉयटर्स ने यंग जर्नलिस्ट्स क्लब के ज़रिए तेहरान सिटी काउंसिल के एक सदस्य का ज़िक्र किया, जिन्होंने हमलों के बाद सुप्रीम लीडर के परिवार में हुई मौतों की पहले ही पुष्टि कर दी थी। सुप्रीम लीडर के परिवार के सदस्यों की मौत से तेहरान की लीडरशिप पर अंदरूनी दबाव बढ़ने और पूरे इलाके में तनाव और बढ़ने की उम्मीद है। ईरानी अधिकारियों ने पहले ही चेतावनी दी है कि देश पर किसी भी हमले का बदला लिया जाएगा। सीनियर मौलवी अयातुल्ला अराफी अंतरिम सुप्रीम लीडर के तौर पर काम करेंगेसरकार से जुड़ी IRNA न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक, अली खामेनेई की हत्या के बाद सीनियर मौलवी अयातुल्ला अलीरेज़ा अराफी ईरान के अंतरिम सुप्रीम लीडर के तौर पर काम करेंगे। अराफी को टेम्पररी लीडरशिप काउंसिल का ज्यूरिस्ट मेंबर बनाया गया है, जिसे ईरान के कॉन्स्टिट्यूशनल प्रोसेस के तहत परमानेंट उत्तराधिकारी चुने जाने तक ट्रांज़िशन के दौरान सुप्रीम लीडर की शक्तियों का इस्तेमाल करने का काम सौंपा गया है। ईरान के संवैधानिक ढांचे के तहत, अंतरिम लीडरशिप काउंसिल में प्रेसिडेंट मसूद पेजेशकियन, चीफ जस्टिस गुलाम-होसैन मोहसेनी-एजेई और गार्डियन काउंसिल के एक मौलवी शामिल हैं। यह तीन सदस्यों वाली बॉडी मिलकर सुप्रीम लीडर की शक्तियों का इस्तेमाल करेगी और खामेनेई की मौत के बाद बदलाव के समय में देश के मामलों की देखरेख करेगी, जब तक कि कोई परमानेंट उत्तराधिकारी नहीं चुना जाता।

रोहित शर्मा की भविष्यवाणी सच हुई: संजू सैमसन का धमाका, सेमीफाइनल का टिकट बन गया सुनिश्चित

नई दिल्ली। टी20 वर्ल्ड कप 2026 में टीम इंडिया ने एक यादगार पल देखा, जब संजू सैमसन ने अपनी शानदार पारी से टीम को सेमीफाइनल का टिकट दिलाया। इस मौके से पहले ही पूर्व कप्तान रोहित शर्मा ने सैमसन को प्रेरित किया था, कहा, “दुखी मत हो, यह टूर्नामेंट लंबा है, मौका कभी भी आ सकता है।” टी20 वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत 7 फरवरी को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में भारत और यूएसए के बीच हुई थी। उस दिन रोहित शर्मा, जो टूर्नामेंट के ब्रांड एंबेसडर थे, मैदान पर मौजूद थे।टी20 वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत 7 फरवरी को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में भारत और यूएसए के बीच हुई थी। उस दिन रोहित शर्मा, जो टूर्नामेंट के ब्रांड एंबेसडर थे, मैदान पर मौजूद थे। उन्हें पता था कि संजू सैमसन अभी प्लेइंग इलेवन में नहीं होंगे, लेकिन उन्होंने सैमसन से कहा कि मौके के लिए तैयार रहो। संजू सैमसन टी20 वर्ल्ड कप 2024 की विनिंग टीम का हिस्सा रहे थे, लेकिन उस टूर्नामेंट में उनका खेल नहीं हुआ था। 2026 के लिए टीम में शामिल होने के बावजूद, न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज में उनका प्रदर्शन कमजोर रहा। इसके चलते ओपनिंग की जिम्मेदारी अभिषेक शर्मा और ईशान किशन को मिली और सैमसन बाहर बैठ गए। 7 फरवरी को ICC ने रोहित और सैमसन का वीडियो शेयर किया, जिसमें रोहित कहते हैं, “दुखी मत हो भाई, यह लंबा टूर्नामेंट है और मौका कभी भी आ सकता है।” संजू सैमसन का जवाब था, “मैं ठीक हूं।” यह बातचीत उनकी वापसी और प्रदर्शन का संकेत बन गई। सुपर 8 में संजू सैमसन ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। पहले मैच में उन्होंने 8 गेंदों में 22 रन बनाकर आउट हुए, लेकिन दूसरे मैच में 15 गेंदों में 24 रन बनाए। 1 मार्च को उन्होंने धमाकेदार 97 रनों की पारी खेली और टीम इंडिया को सेमीफाइनल का टिकट दिलाया। इस पारी ने न केवल टीम को जीत दिलाई, बल्कि फैंस और क्रिकेट विश्लेषकों को भी रोमांचित कर दिया। रोहित शर्मा की भविष्यवाणी सच साबित हुई। संजू सैमसन ने सही समय पर सही मौके का फायदा उठाकर सबका दिल जीत लिया और साबित कर दिया कि क्रिकेट में धैर्य, तैयारी और आत्मविश्वास ही सफलता की कुंजी हैं।

रास्ता मिला, रफ्तार नहीं! टी20 वर्ल्ड कप में भारत की बैटिंग पर उठे सवाल

नई दिल्ली। टीम इंडिया ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सेमीफाइनल में जगह बना ली है। सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में भारतीय टीम 5 मार्च को इंग्लैंड के खिलाफ छठी बार टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल में उतरने जा रही है। कागजों पर यह उपलब्धि शानदार दिखती है, लेकिन घरेलू सरजमीं पर खेले जा रहे इस टूर्नामेंट में सुपर-8 तक का सफर भारत के लिए बिल्कुल भी आसान नहीं रहा। टीम के प्रदर्शन में वह चैंपियन वाली धार लगातार नजर नहीं आई, खासकर बल्लेबाजी में कई खामियां उजागर हुईं। बल्लेबाजी बनी सबसे बड़ी चिंतापूरे टूर्नामेंट में भारत की सबसे बड़ी कमजोरी बल्लेबाजी रही है। पहले ही मैच में अमेरिका के खिलाफ भारतीय बैटिंग ऑर्डर ताश के पत्तों की तरह बिखर गया। महज 77 रन पर टीम ने अपने छह प्रमुख बल्लेबाजों के विकेट गंवा दिए थे। ऐसे मुश्किल समय में कप्तान सूर्यकुमार यादव ने 84 रनों की जिम्मेदार पारी खेलकर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। हालांकि यह पारी टीम की कमजोरी को ढंकने भर का काम कर सकी, समस्या खत्म नहीं हुई। नामीबिया जैसी अपेक्षाकृत कमजोर टीम के खिलाफ भी बल्लेबाज संघर्ष करते दिखे। ईशान किशन और हार्दिक पांड्या ने कुछ रन जरूर जोड़े, लेकिन बाकी बल्लेबाजों की धीमी बल्लेबाजी चिंता का कारण बनी। खुद कप्तान सूर्यकुमार यादव 12 रन बनाने में 13 गेंदें खेल गए, जबकि तिलक वर्मा 21 गेंदों पर 25 रन ही बना सके। बड़े मैचों में भी डगमगाया क्रमपाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में ईशान किशन ने 40 गेंदों में 77 रनों की शानदार पारी खेलकर टीम को संभाला। लेकिन उनके अलावा सिर्फ सूर्यकुमार यादव ही 30 रन का आंकड़ा पार कर सके। उन्होंने 29 गेंदों में 32 रन बनाए, जो उनकी आक्रामक शैली के मुताबिक धीमा प्रदर्शन माना गया। नीदरलैंड के खिलाफ शिवम दुबे ने 31 गेंदों में 66 रन की तेज पारी खेली, लेकिन यह भी टीम के समग्र प्रदर्शन को स्थिर नहीं कर सकी। ग्रुप स्टेज में छोटी टीमों के खिलाफ खेलने के बावजूद अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा और खुद कप्तान रनों के लिए जूझते नजर आए। इससे यह सवाल खड़ा हुआ कि क्या भारत का बल्लेबाजी क्रम दबाव में बिखर जाता है? सुपर-8 में और बढ़ीं मुश्किलेंउम्मीद थी कि सुपर-8 राउंड में भारतीय बल्लेबाज अपने असली रंग में नजर आएंगे, लेकिन कहानी उलटी साबित हुई। साउथ अफ्रीका के खिलाफ मजबूत माने जाने वाले बल्लेबाजी क्रम ने सिर्फ 111 रन बनाए। इस मैच ने टीम की कमजोरियों को फिर उजागर कर दिया। जिम्बाब्वे के खिलाफ जरूर बल्लेबाजी ने दम दिखाया और भारत ने टी20 विश्व कप में अपना सबसे बड़ा स्कोर बनाया। इससे टीम को आत्मविश्वास मिला, लेकिन निरंतरता की कमी साफ झलकती रही। वेस्टइंडीज के खिलाफ संजू सैमसन ने 97 रनों की ताबड़तोड़ पारी खेलकर टीम को जीत दिलाई, पर बाकी बल्लेबाज अपेक्षा के अनुरूप योगदान नहीं दे सके। स्टार खिलाड़ियों से उम्मीदें अधूरीटी20 वर्ल्ड कप 2026 में अभिषेक शर्मा से सबसे ज्यादा उम्मीदें थीं, लेकिन वह छह मैचों में सिर्फ 80 रन ही बना सके। तीन मुकाबलों में तो वह खाता तक नहीं खोल पाए। कप्तान सूर्यकुमार यादव, जो अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं, इस टूर्नामेंट में तेज रन बनाने में संघर्ष करते दिखे। उनका स्ट्राइक रेट करीब 135 रहा, जो उनके मानकों के हिसाब से कम है। हार्दिक पांड्या भी बड़े और निर्णायक मौकों पर अपेक्षित योगदान देने में नाकाम रहे। कुल मिलाकर, टीम इंडिया के लिए ईशान किशन ही ऐसे बल्लेबाज रहे, जिनके प्रदर्शन में निरंतरता दिखी। सेमीफाइनल की चुनौतीअब 5 मार्च को इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में भारत को अपनी बल्लेबाजी की कमियों से पार पाना होगा। नॉकआउट मुकाबले में छोटी-सी चूक भी भारी पड़ सकती है। अगर बल्लेबाज सामूहिक रूप से जिम्मेदारी नहीं लेते, तो मजबूत गेंदबाजी के बावजूद टीम मुश्किल में फंस सकती है। भारतीय टीम ने सेमीफाइनल तक का सफर तय कर लिया है, लेकिन खिताब जीतने के लिए बल्लेबाजी को चैंपियन जैसी धार दिखानी ही होगी

शशि कपूर के हाथों मिला पहला अवॉर्ड और आर.के. स्टूडियो की वो रातें; अनिल कपूर ने खोल दिए करियर के सुनहरे राज

नई दिल्ली :बॉलीवुड के ‘झक्कास’ अभिनेता अनिल कपूर आज भले ही वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुके हों, लेकिन उनके करियर की नींव बेहद सादगी और संघर्ष के साथ पड़ी थी। हाल ही में गेमिंग रियलिटी शो ‘व्हील ऑफ फॉर्च्यून’ में अक्षय कुमार के साथ बातचीत के दौरान अनिल कपूर ने अपने जीवन के उन पन्नों को पलटा, जो आज की पीढ़ी के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं हैं। अभिनेता ने भावुक होते हुए बताया कि उनके पेशेवर सफर की शुरुआत साल 1976 में मुंबई के वर्ली स्थित दूरदर्शन स्टूडियो से हुई थी। उस समय एक छोटे से कार्यक्रम में परफॉर्म करने के बदले उन्हें पहली कमाई के रूप में मात्र 250 रुपये मिले थे। अनिल कपूर के लिए वह महज एक कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि उनके हुनर पर लगी पहली मुहर थी, जिसने उन्हें भविष्य का सुपरस्टार बनने का आत्मविश्वास दिया। अपने कॉलेज के दिनों को याद करते हुए अनिल कपूर ने एक दिलचस्प वाकया साझा किया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने पहली बार एक नाटक में हिस्सा लिया, तो वहां मुख्य अतिथि के रूप में दिग्गज अभिनेता शशि कपूर मौजूद थे। अनिल की प्रतिभा से प्रभावित होकर शशि कपूर ने उन्हें ‘बेस्ट एक्टर’ की ट्रॉफी से नवाजा। उस पल को याद करते हुए अभिनेता ने कहा कि महान कलाकार के हाथों मिले उस सम्मान ने ही उन्हें यकीन दिलाया कि वे अभिनय की दुनिया में लंबी रेस का घोड़ा साबित हो सकते हैं। हालांकि, अनिल आज भी अपने उस शुरुआती दौर की रिकॉर्डिंग तलाश रहे हैं, ताकि वे देख सकें कि पांच दशक पहले वे स्क्रीन पर कैसे दिखते और अभिनय करते थे, लेकिन अफसोस कि वह क्लिप अब तक नहीं मिल पाई है। बातचीत का सिलसिला जब उनके करियर के सबसे प्रतिष्ठित गाने ‘धक-धक करने लगा’ पर पहुँचा, तो अनिल कपूर ने कई राज खोले। फिल्म ‘बेटा’ के इस कालजयी गाने को लेकर उन्होंने विनम्रता से कहा कि यह गाना पूरी तरह से माधुरी दीक्षित का है और उन्होंने केवल उनका साथ निभाया था। अक्षय कुमार के टोकने पर कि यह गाना दोनों की मेहनत का फल है, अनिल ने बताया कि इसकी शूटिंग बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में हुई थी। मशहूर कोरियोग्राफर सरोज खान के निर्देशन में आर.के. स्टूडियो में फिल्माए गए इस गाने की शूटिंग रातों में होती थी। उन दिनों अनिल और माधुरी दोनों ही दिन में दो-दो अलग फिल्मों की शूटिंग कर रहे थे और थकान के बावजूद रात भर जागकर ‘धक-धक’ गाने को पूरा किया गया। आज भी इस गाने में जो ऊर्जा और ताजगी नजर आती है, उसके पीछे उन सितारों की रातों की नींद और समर्पण छिपा है

मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, ट्रंप ने दिया बड़ा संकेत-ईरान में सैन्य विकल्प खुले

नई दिल्ली। दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर ऐसा संकेत दिया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। विदेशों में लंबे युद्धों से दूरी बनाने के अपने पुराने रुख से अलग जाते हुए ट्रंप ने कहा है कि “यदि आवश्यकता पड़ी” तो वह ईरान में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं करते। “मैं यह नहीं कहता कि जमीन पर सैनिक नहीं होंगे”अमेरिकी अखबार New York Post को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, “जैसा कि हर राष्ट्रपति कहता है, ‘जमीन पर कोई सैनिक नहीं होगा।’ मैं ऐसा नहीं कहता। उन्होंने स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर अमेरिकी सैनिकों को ग्राउंड पर भेजा जा सकता है, हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि फिलहाल इसकी आवश्यकता नहीं होगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है और क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं। ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ और हताहतों की खबरइससे पहले अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि सोमवार तक अमेरिकी सेना के चार सदस्य मारे गए हैं। शनिवार सुबह ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ की घोषणा करते हुए ट्रंप ने संभावित नुकसान का संकेत दिया था। वीडियो संदेश में उन्होंने कहा, “ईरानी शासन मारना चाहता है। साहसी अमेरिकी नायकों की जान जा सकती है, और हमारे सैनिक हताहत हो सकते हैं; युद्ध में अक्सर ऐसा होता है। ट्रंप ने दावा किया कि यह ऑपरेशन तय समय से आगे चल रहा है और “बहुत तेजी से खत्म होने वाला है।” उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व को खत्म करने में चार सप्ताह लगने की उम्मीद थी, लेकिन 49 नेता “एक दिन में” मारे गए। उनके मुताबिक मारे गए लोगों में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei भी शामिल थे। हालांकि, इस दावे पर स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। “जितना समय लगेगा, उतना चलेगा अभियान” सोमवार को ट्रंप ने संकेत दिया कि ऑपरेशन चार से पांच सप्ताह तक चल सकता है और यदि इससे अधिक समय भी लगे तो वह इसके लिए तैयार हैं। संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के स्थायी प्रतिनिधि Danny Danon ने भी कहा कि अभियान में “जितना समय लगेगा, लगेगा। इस बयानबाजी ने संकेत दिया है कि अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान के खिलाफ लंबी रणनीति पर काम कर सकते हैं। अमेरिकी जनता बंटी हुईविदेशी युद्धों में अमेरिका की पिछली उलझनों-जैसे इराक और अफगानिस्तान को देखते हुए अमेरिकी जनता सतर्क नजर आ रही है। एक रॉयटर्स-इप्सोस पोल के अनुसार, केवल 27 प्रतिशत लोगों ने ईरान पर हमले का समर्थन किया, जबकि 43 प्रतिशत इससे असहमत थे और 13 प्रतिशत अनिश्चित रहे। हालांकि ट्रंप ने पोल के आंकड़ों को खारिज करते हुए कहा, “मुझे पोलिंग की परवाह नहीं है। मुझे सही काम करना है। उन्होंने यह भी कहा कि वह एक “साइलेंट मेजॉरिटी” पर भरोसा करते हैं, जो उनके अनुसार “असली पोल” में दिखाई देगी। वैश्विक असर की आशंकाट्रंप के इस बयान ने पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका पैदा कर दी है। यदि वास्तव में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती होती है, तो यह क्षेत्रीय संघर्ष को व्यापक युद्ध का रूप दे सकता है। फिलहाल दुनिया की निगाहें वॉशिंगटन और तेहरान पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह टकराव किस दिशा में जाता है।

डिजिटल दुनिया में मोदी का जलवा! यूट्यूब चैनल ने पार किए 30 मिलियन सब्सक्राइबर्स

नई दिल्ली। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। उनके आधिकारिक यूट्यूब चैनल ने 30 मिलियन यानी 3 करोड़ सब्सक्राइबर्स का आंकड़ा पार कर लिया है। इस उपलब्धि के साथ ही वे यूट्यूब पर दुनिया के सबसे अधिक सब्सक्राइब किए जाने वाले राजनेता बन गए हैं। यह उपलब्धि न केवल उनकी लोकप्रियता को दर्शाती है, बल्कि डिजिटल माध्यमों पर उनकी सशक्त उपस्थिति का भी प्रमाण है। वैश्विक नेताओं में सबसे आगेसब्सक्राइबर संख्या के मामले में प्रधानमंत्री मोदी अपने वैश्विक समकक्षों से काफी आगे निकल गए हैं। इस सूची में दूसरे स्थान पर ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति Jair Bolsonaro हैं, जिनके यूट्यूब चैनल पर लगभग 66 लाख (6.6 मिलियन) सब्सक्राइबर्स हैं। यह संख्या पीएम मोदी के मुकाबले करीब एक-चौथाई है। यूट्यूब पर मोदी की लोकप्रियता अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump से भी कहीं अधिक बताई जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के सब्सक्राइबर ट्रंप से कई गुना ज्यादा हैं। इससे स्पष्ट है कि भारतीय प्रधानमंत्री की डिजिटल पहुंच अब वैश्विक स्तर पर एक अलग पहचान बना चुकी है। देश के भीतर भी बड़ी बढ़तभारत में भी पीएम मोदी का डिजिटल प्रभाव स्पष्ट रूप से नजर आता है। सब्सक्राइबर संख्या के मामले में उनका चैनल कांग्रेस नेता Rahul Gandhi के यूट्यूब चैनल से लगभग तीन गुना आगे है। इतना ही नहीं, उनके सब्सक्राइबरों की संख्या Aam Aadmi Party और Indian National Congress के आधिकारिक चैनलों की तुलना में चार गुना से भी अधिक बताई जा रही है। यह अंतर बताता है कि डिजिटल कम्युनिकेशन के क्षेत्र में पीएम मोदी ने एक मजबूत और व्यापक दर्शक वर्ग तैयार किया है। सोशल मीडिया पर भी शतकयूट्यूब के साथ-साथ इंस्टाग्राम पर भी प्रधानमंत्री मोदी ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर 100 मिलियन (10 करोड़) से अधिक फॉलोअर्स हो चुके हैं। इसके साथ ही वे इस आंकड़े को पार करने वाले दुनिया के पहले प्रमुख नेता बन गए हैं। 2014 में इंस्टाग्राम से जुड़ने के बाद पीएम मोदी ने लगातार सक्रिय रहकर अपने अकाउंट को दुनिया के सबसे ज्यादा फॉलो किए जाने वाले राजनीतिक प्रोफाइल्स में शामिल कर दिया। वर्तमान में विश्व के बड़े नेताओं में उनके सबसे अधिक फॉलोअर्स बताए जाते हैं। खास बात यह है कि इंस्टाग्राम पर भी उनके फॉलोअर्स की संख्या डोनाल्ड ट्रंप से दोगुने से अधिक बताई जाती है। डिजिटल रणनीति का असरविशेषज्ञ मानते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी ने शुरुआत से ही सोशल मीडिया को सीधे संवाद के माध्यम के रूप में अपनाया। उनके भाषण, कार्यक्रम, ‘मन की बात’, विदेश यात्राओं और सरकारी अभियानों से जुड़े वीडियो नियमित रूप से साझा किए जाते हैं, जिससे आम नागरिकों तक सीधा संदेश पहुंचता है। यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर उनकी सक्रियता ने उन्हें युवा वर्ग के बीच भी खासा लोकप्रिय बनाया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उनकी पहुंच पारंपरिक मीडिया से आगे निकलती दिखाई दे रही है, जहां वे सीधे करोड़ों लोगों से संवाद स्थापित कर रहे हैं। वैश्विक प्रभाव की झलक30 मिलियन से अधिक सब्सक्राइबर्स के साथ पीएम मोदी का यूट्यूब चैनल अब विश्व स्तर पर नेताओं के बीच सबसे अधिक सब्सक्राइब किया जाने वाला चैनल बन चुका है। यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब वैश्विक राजनीति में डिजिटल कम्युनिकेशन की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

सिनेमा जगत में महासंग्राम: रणवीर बनाम फरहान विवाद में कूदे आमिर खान और ऋतिक रोशन, क्या कानूनी दांवपेच से सुलझेगी गुत्थी?

नई दिल्ली :भारतीय सिनेमा जगत की सबसे चर्चित फ्रेंचाइजी में से एक डॉन 3 इन दिनों अपनी कास्टिंग या स्क्रिप्ट से ज्यादा, अभिनेता रणवीर सिंह और निर्देशक फरहान अख्तर के बीच बढ़ते विवाद को लेकर सुर्खियों में है। पिछले ढाई साल से जिस प्रोजेक्ट का इंतजार दर्शक बेसब्री से कर रहे थे, अब वह कानूनी पचड़ों और आपसी मतभेदों की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। ताजा खबरों के मुताबिक, रणवीर सिंह और फरहान अख्तर के बीच का यह मनमुटाव इस कदर बढ़ गया है कि अब बॉलीवुड के ‘मिस्टर परफेक्शनिस्ट’ आमिर खान और ऋतिक रोशन जैसे दिग्गजों को बीच-बचाव के लिए आगे आना पड़ा है। विवाद की मुख्य जड़ फिल्म से रणवीर सिंह का अचानक बाहर होना और उसके बाद फरहान की प्रोडक्शन कंपनी द्वारा मांगे गए 40 करोड़ रुपये के मुआवजे को माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, प्रोडक्शन हाउस का दावा है कि रणवीर के हटने से उन्हें भारी वित्तीय नुकसान हुआ है, जबकि रणवीर सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस हर्जाने के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया की एक हालिया रिपोर्ट ने इस मामले में नया मोड़ दे दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस गंभीर आर्थिक और पेशेवर गतिरोध को सुलझाने के लिए आमिर खान, ऋतिक रोशन, राजकुमार हिरानी, जोया अख्तर, साजिद नाडियाडवाला और रमेश तौरानी जैसे बड़े फिल्ममेकर्स ने एक गुप्त मीटिंग की है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य कानूनी कार्रवाई से बचते हुए आपसी सहमति से कोई बीच का रास्ता निकालना था। रणवीर सिंह ने इस मामले पर अपना कड़ा रुख अपनाते हुए फरहान अख्तर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अभिनेता का कहना है कि फरहान इस प्रोजेक्ट को लेकर कभी पूरी तरह गंभीर नहीं थे। रणवीर के अनुसार, उन्हें लीड रोल के लिए साइन करने के बावजूद फरहान समानांतर रूप से ऋतिक रोशन से भी बातचीत कर रहे थे। इसके अलावा, रणवीर का आरोप है कि फिल्म की स्क्रिप्ट तैयार नहीं थी और जब उन्होंने कुछ बदलावों का सुझाव दिया, तो मेकर्स ने उसे सिरे से खारिज कर दिया। इन्हीं रचनात्मक मतभेदों और विश्वास की कमी के चलते रणवीर ने खुद को डॉन 3 से अलग करना ही बेहतर समझा। दूसरी ओर, प्रोड्यूसर गिल्ड ऑफ इंडिया ने भी अब इस मामले में सक्रियता दिखाई है और जरूरत पड़ने पर कानूनी विशेषज्ञों की मदद लेने की बात कही है। जहाँ एक तरफ डॉन के रूप में अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान की विरासत को आगे बढ़ाने का सपना अधूरा दिखता नजर आ रहा है, वहीं दूसरी तरफ रणवीर सिंह का पूरा ध्यान अपनी हालिया ब्लॉकबस्टर फिल्म धुरंधर की सफलता पर है। पिछले साल बॉक्स ऑफिस हिला देने वाली धुरंधर के बाद, अब इसका दूसरा भाग यानी धुरंधर 2 आगामी 19 मार्च को सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए तैयार है। दिलचस्प बात यह है कि उसी दिन साउथ सुपरस्टार यश की फिल्म टॉक्सिक भी रिलीज हो रही है, जिससे बॉक्स ऑफिस पर एक बड़े क्लैश की संभावना बनी हुई है। अब देखना यह होगा कि फिल्म जगत के दिग्गज डॉन 3 के इस विवाद को सुलझा पाते हैं या यह मामला कोर्ट की दहलीज तक पहुंचेगा।

ईरान पर बढ़ा अमेरिकी दबाव: व्हाइट हाउस ने अमेरिकियों पर हमलों की सूची जारी की

नई दिल्ली विगत लगभग पांच दशकों से अमेरिका की अलग-अलग सरकारें ईरान पर यह आरोप लगाती रही हैं कि वह मध्य पूर्व और अन्य क्षेत्रों में अमेरिकी नागरिकों व सैन्यकर्मियों पर हुए हमलों में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शामिल रहा है। इसी क्रम में व्हाइट हाउस ने एक विस्तृत बयान जारी कर ऐसे हमलों की सूची साझा की है। बयान में ईरान को “दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला देश” बताते हुए कहा गया कि उसने “किसी भी अन्य आतंकवादी शासन से अधिक अमेरिकियों को मारा है।” साथ ही यह भी कहा गया कि राष्ट्रपति Donald Trump “वह कर रहे हैं जो पिछले पांच दशकों के राष्ट्रपतियों ने करने से परहेज किया-खतरे को हमेशा के लिए खत्म करना।” 1979 से शुरू हुआ टकरावनवंबर 1979: तेहरान में अमेरिकी दूतावास पर कब्जा कर 66 अमेरिकियों को 444 दिनों तक बंधक बनाए रखा गया। अप्रैल 1983: लेबनान की राजधानी Beirut में अमेरिकी दूतावास पर आत्मघाती कार बम हमला, 17 अमेरिकी मारे गए। अक्टूबर 1983: बेरूत में मरीन कंपाउंड पर ट्रक बम धमाका, 241 अमेरिकी सैनिकों की मौत। 1990 का दशक: बड़े आतंकी हमले1996: Saudi Arabia में अमेरिकी एयर फोर्स हाउसिंग कॉम्प्लेक्स पर ट्रक बम हमला, 19 एयरमैन की मौत, सैकड़ों घायल। 1998: Kenya और Tanzania में अमेरिकी दूतावासों पर बम धमाके, 224 लोगों की मौत, जिनमें एक दर्जन अमेरिकी शामिल। इन हमलों के लिए अमेरिका ने ईरान समर्थित संगठनों-Hezbollah, Hamas और Islamic Jihad-को जिम्मेदार ठहराया। इराक युद्ध और उसके बाद2003–2011: इराक युद्ध के दौरान ईरान समर्थित मिलिशिया द्वारा कम से कम 603 अमेरिकी सैनिकों की हत्या का दावा। जनवरी 2007: कर्बला में अमेरिकी सैनिकों की हत्या, जिसमें ईरान की कुद्स फोर्स का नाम जोड़ा गया। पूर्व एफबीआई एजेंट Robert Levinson 2007 में ईरान में लापता हुए, जिनकी कथित रूप से हिरासत में मौत हो गई। हालिया घटनाएंजनवरी 2024: जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर ड्रोन हमला, तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए। अक्टूबर 2023: इजरायल पर हमले के दौरान 46 अमेरिकियों की मौत और 12 के अपहरण का आरोप ईरान समर्थित हमास पर लगाया गया। नवंबर 2024: एक ईरानी नागरिक और आईआरजीसी से जुड़े व्यक्ति पर डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की साजिश का आरोप। व्हाइट हाउस ने कहा कि अक्टूबर 2003 से नवंबर 2024 के बीच ईरान और उसके प्रॉक्सी द्वारा मिडिल ईस्ट में अमेरिकी बलों पर 180 से अधिक हमले किए गए। गौरतलब है कि अमेरिका ने 1984 से ईरान को “आतंकवाद प्रायोजक देश” की सूची में शामिल कर रखा है। ईरान लगातार इन आरोपों से इनकार करता रहा है और अमेरिकी नीतियों को क्षेत्रीय अस्थिरता के लिए जिम्मेदार ठहराता है।

अमेरिका ने ईरान के दो महत्वपूर्ण नेवल बेस को किया तबाह, युद्ध का चौथा दिन, जानें 10 बड़ी बातें

तेहरान। अमेरिका ने ईरानी नेवी के दो सबसे महत्वपूर्ण नेवल बेस बंदर अब्बास नेवल बेस और कोनार्क नेवल बेस पर भीषण हमले किए हैं। अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद इन दोनों नेवल बेस को लेकर कई सैटेलाइट तस्वीरें सामने आई हैं। इन तस्वीरों में बंदर अब्बास नेवल बेस पर तैनात IRINS मकरान सी बेस-टाइप जहाज पर आग लगी हुई दिख रही है। बंदर अब्बास ईरान के होर्मुज स्ट्रेट को कंट्रोल करने के उद्देश्य से बनाया गया नौसेना बेस होने के साथ-साथ ईरानी नौसेना का मुख्य हेडक्वार्टर भी है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि ईरान की नौसेना फोर्स को खत्म करना अमेरिकी अधिकारियों का मुख्य मकसद है। अमेरिका ने अब तक 10 ईरानी जहाजों को नुकसान पहुंचाने की बात भी कही है। बंदर अब्बास नेवल बेस की तबाहीप्लैनेट लैब्स की तरफ से जारी की गई सैटेलाइट तस्वीरों में रात को ली गई बंदर अब्बास नेवल बेस की स्थिति का पता चलता है। तस्वीरों में ईरानी नेवी का मुख्य हेडक्वार्टर और इसके कई सबसे काबिल जहाज और सबमरीन तैनात दिख रहे हैं। तस्वीरों में नेवल बेस के ज्यादातर हिस्सों में घना काला धुआं उठता हुआ दिखाई दे रहा है। फैसेलिटी के कई हिस्सों पर हमले का असर साफ देखा जा सकता है। तस्वीरों के आकलन से यह भी पता चलता है कि फ्लोटिंग डॉक को गंभीर नुकसान पहुंचा है, पेट्रोल बोट डैमेज हो चुके हैं और कई बिल्डिंग पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी हैं। तस्वीरों से स्पष्ट है कि IRINS मकरान जहाज पर हमला किया गया है। इसे नौसेना अड्डे के दक्षिणी छोर पर एक बर्थ पर डॉक किया गया था। यह जहाज मूल रूप से एक ऑयल टैंकर था जिसे ईरानी अधिकारियों ने “फॉरवर्ड बेस शिप” में बदल दिया था। इसके आगे का हिस्सा बड़ा खुला फ्लाइट डेक और कई अन्य खूबियों से लैस था। मकरान जहाज ने 2021 में कमीशन होने के बाद कई बार विदेश यात्राएं की हैं और यह उन कई समुद्री बेस जैसे जहाजों में से एक है जिन्हें ईरान ने हाल के सालों में सेवा में लगाया। 2 मार्च की तस्वीरों की तुलना पहले की तस्वीरों से करने पर लगता है कि एक या दो फ्रिगेट साइज के वॉरशिप पर भी हमला हुआ है। ये साफ तौर पर पोर्ट पर सबसे कीमती टारगेट में से एक थे। पोर्ट में जो एक किलो क्लास पनडुब्बी और छोटी पनडुब्बी हैं, उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। कुछ अन्य सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि ईरानी नौसना के कई और मुख्य युद्धपोत शायद तबाह हो गए या उन्हें गंभीर नुकसान पहुंचा है। बंदर अब्बास पोर्ट ईरान के होर्मोज़्गन प्रांत की राजधानी बंदर अब्बास में स्थित है और हॉर्मुज जलडमरूमध्य इसके बिल्कुल पास है। कोनार्क पोर्ट पर भी अमेरिकी हमलेबंदर अब्बास की तस्वीर में धुएं की वजह से यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि पोर्ट में कितने जहाजों को नुकसान हुआ। 2 मार्च की तस्वीर की तुलना 26 फरवरी की तस्वीर से करने पर साफ पता चलता है कि कई छोटी नावें और कुछ बड़े जहाज पोर्ट से बाहर कर दिए गए। संभव है कि कुछ जहाज डूब गए हों, लेकिन इसके कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहे हैं। फिर भी ईरानी नौसेना के कई जहाज अभी भी बचे हैं और ड्राईडॉक में कई जंगी जहाज दिखाई दे रहे हैं। बंदर अब्बास के बाहर भी ईरानी नौसेना के एसेट्स पर हमला हुआ। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि ईरान के दक्षिण-पूर्वी सिरे के पास कोनार्क में पोर्ट पर हमले हुए। कई जंगी जहाज नष्ट हो गए या उन्हें गंभीर नुकसान पहुंचा। शुरुआती अनुमान में यह अलवंद क्लास का फ्रिगेट बताया गया, लेकिन बाद में यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इसे मौज क्लास के वॉरशिप के रूप में पहचाना, जिसे कभी-कभी जमरान क्लास भी कहा जाता है। कोनार्क पोर्ट ईरान के सिस्तान और बलूचिस्तान प्रांत में स्थित है और चाबहार बंदरगाह के ठीक बगल, ओमान की खाड़ी के पास स्थित है। युद्ध के चौथे दिन की 10 बड़ी बातें1. 28 फरवरी को युद्ध के पहले दिन ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत हो गई।2. अमेरिका ने हमले को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ और इजरायल ने ‘ऑपरेशन रोअर ऑफ द लॉयन’ नाम दिया।3. ईरान ने जवाबी कार्रवाई में होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का दावा किया, जिससे तेल की कीमतों में इजाफा हुआ।4. पेंटागन ने 6 अमेरिकी सैनिकों की मौत और 18 घायल होने की पुष्टि की, जबकि इजरायल में अब तक 12 लोगों की मौत हुई।5. खामेनेई की मौत के बाद ईरान में सरकार चलाने के लिए अंतरिम शासी परिषद का गठन किया गया।6. ईरान ने खाड़ी के कई देशों जैसे सऊदी अरब, कतर, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत पर हमले किए।7. अमेरिका के बी-2 बॉम्बर्स ने ईरान के अंडरग्राउंड परमाणु केंद्रों और मिसाइल भंडारण सुविधाओं पर हमला किया।8. ईरान के रेड क्रेसेंट के अनुसार मरने वालों की संख्या 600 से अधिक पहुंच गई, जिनमें सैनिक और आम नागरिक शामिल हैं।9. अमेरिका ने खाड़ी देशों में स्थित प्रमुख दूतावासों जैसे इराक, जॉर्डन और कुवैत से अपने अधिकारियों को तुरंत निकालने का आदेश दिया।10. डोनाल्ड ट्रंप और युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि युद्ध 4-5 हफ्ते या उससे अधिक समय तक चल सकता है, और उन्होंने ईरान में सैनिकों को उतारने की संभावना से इनकार नहीं किया।