पारंपरिक खेती से आधुनिक बागवानी तक: भोपाल के किसान रामसिंह कुशवाह कमा रहे लाखों, पॉलीहाउस में फूलों की खेती से बदली किस्मत

भोपाल । भोपाल जिले के फंदा क्षेत्र के ग्राम बरखेड़ा बोंदर के किसान रामसिंह कुशवाह ने आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं की मदद से खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदलकर एक नई मिसाल पेश की है। कभी धान गेहूं और सोयाबीन जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने वाले रामसिंह कुशवाह सीमित आय के कारण आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे थे लेकिन अब वे फूलों और फलों की आधुनिक खेती से हर महीने लाखों रुपये की आमदनी प्राप्त कर रहे हैं। उनकी सफलता की कहानी न केवल आर्थिक उन्नति का उदाहरण है बल्कि प्रदेश के किसानों के लिए प्रेरणा भी बन गई है। रामसिंह कुशवाह बताते हैं कि उनका परिवार वर्षों से पारंपरिक खेती करता आ रहा था लेकिन बढ़ती लागत और कम लाभ के कारण खेती से पर्याप्त आमदनी नहीं हो पा रही थी। इसी दौरान उन्हें उद्यानिकी विभाग द्वारा संचालित एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के बारे में जानकारी मिली। इस योजना के तहत उन्होंने राष्ट्रीय विकास परियोजना का लाभ लेते हुए लगभग एक हजार स्क्वायर फीट क्षेत्र में पॉलीहाउस बनाकर गुलाब और जरबेरा जैसे फूलों की खेती शुरू की। बाद में राज्य योजना के तहत वर्ष 2023-24 में उन्होंने उद्यानिकी विभाग से सब्सिडी प्राप्त कर एक एकड़ भूमि में पॉलीहाउस स्थापित किया और गुलाब जरबेरा तथा गेंदा के लगभग 30 हजार पौधे लगाए। आज वे प्रतिदिन करीब चार हजार कट फ्लावर बाजार में बेचते हैं और इससे रोजाना चार से छह हजार रुपये तक की आमदनी अर्जित कर रहे हैं। फूलों के उत्पादन को बढ़ाने और लागत कम करने के लिए उन्होंने इस वर्ष अपने पॉलीहाउस में सेंसर आधारित ऑटोमेशन सिस्टम भी स्थापित किया है। इस सिस्टम की कुल लागत लगभग चार लाख रुपये है जिसमें से दो लाख रुपये की सब्सिडी सरकार की ओर से प्राप्त हुई है। इस आधुनिक तकनीक की मदद से एक एकड़ की खेती में पानी खाद और दवाइयों की संतुलित मात्रा 24 घंटे स्वतः दी जाती है जिससे समय और लागत दोनों की बचत होती है। इस तकनीक को अपनाकर रामसिंह कुशवाह भोपाल जिले में ऑटोमेटेड बागवानी प्रणाली अपनाने वाले पहले किसान बन गए हैं। रामसिंह कुशवाह की खेती में उगाए गए गुलाब और जरबेरा के फूल अब स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं हैं बल्कि उनकी सप्लाई दिल्ली जयपुर और लखनऊ जैसे बड़े शहरों तक की जा रही है। आधुनिक तकनीक वैज्ञानिक पद्धति और ड्रिप व स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली को अपनाने से उन्हें बेहतर उत्पादन मिल रहा है। इन सिंचाई प्रणालियों पर भी उन्हें लगभग 50 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ मिला है। आज उनकी खेती से प्रतिदिन हजारों फूलों का उत्पादन हो रहा है और इससे उन्हें नियमित आय प्राप्त हो रही है। फूलों और फलों की खेती ने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है बल्कि गांव के अन्य किसानों को भी नई दिशा दी है। रामसिंह कुशवाह कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की योजनाओं के कारण उन्हें आधुनिक खेती अपनाने का अवसर मिला है। उनका मानना है कि सही मार्गदर्शन नई तकनीक और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर किसान खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदल सकते हैं। उनकी सफलता की यह कहानी प्रदेश के किसानों के लिए प्रेरणा बन गई है।
932 किमी ड्राइव कर प्रेमिका को किया प्रपोज, कार पर लिखे मैसेज से वायरल हुई युवक की लव स्टोरी

बीजिंग। चीन (China) में एक युवक की अनोखी प्रेम कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। 26 वर्षीय युवक ने अपनी गर्लफ्रेंड को शादी के लिए प्रपोज करने के लिए करीब 932 किलोमीटर का लंबा सफर तय किया। इस रोमांटिक पहल ने इंटरनेट पर लोगों का ध्यान खींच लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक Tan नाम का युवक Jiangxi Province का रहने वाला है और फिलहाल Fujian Province में अपना कारोबार करता है। कार पर लगाया खास बैनर फरवरी में Chinese New Year के दौरान उसकी गर्लफ्रेंड अपने घर Guizhou गई हुई थी। इसी दौरान युवक ने उसे सरप्राइज देने और शादी के लिए प्रपोज करने का फैसला किया। यात्रा के दौरान ट्रैफिक में आसानी के लिए उसने अपनी कार की पिछली खिड़की पर एक लाल बैनर लगा दिया। उस पर लिखा था। “भाइयों, मुझे पहले जाने दें… मैं अपनी गर्लफ्रेंड को प्रपोज करने जा रहा हूं।” 12 घंटे से ज्यादा की ड्राइव हाईवे पर जैसे ही अन्य ड्राइवरों ने यह संदेश देखा, कई लोगों ने उसकी कार को रास्ता दे दिया। कुछ ने हॉर्न बजाकर और हाथ हिलाकर उसे शुभकामनाएं भी दीं। युवक ने करीब 12.5 घंटे लगातार ड्राइव कर यह लंबा सफर तय किया। उसने बताया कि शुरुआत में सफर लंबा और थकाऊ लग रहा था, लेकिन जैसे-जैसे वह अपनी प्रेमिका के करीब पहुंचता गया, उसकी उत्सुकता और खुशी बढ़ती चली गई। प्रेमिका को मिला बड़ा सरप्राइज युवक की गर्लफ्रेंड को इस सरप्राइज के बारे में बिल्कुल भी जानकारी नहीं थी। दोनों की मुलाकात यूनिवर्सिटी में हुई थी और वे पिछले चार साल से रिलेशनशिप में हैं। जब युवक उसके घर पहुंचा और उसने शादी के लिए प्रपोज किया, तो युवती ने खुशी-खुशी उसका प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। सोशल मीडिया पर लोगों ने की तारीफ यह रोमांटिक कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई है। वीडियो को लाखों बार देखा जा चुका है और लोग युवक की इस अनोखी पहल की जमकर तारीफ कर रहे हैं। एक यूजर ने मजाकिया अंदाज में लिखा, “इतने लोगों ने रास्ता देकर मदद की है, अब अपनी मंगेतर को कभी निराश मत करना।”
नारी सम्मान ही सभ्य, सुसंस्कृत होने की पहचान

विनोद बब्बरयस्य पूज्यंते नार्यस्तु तत्र रमन्ते देवता अथार्त जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं। इसी प्रकार कहा गया- ‘न गृहं गृह मित्याहु गृहिणी गृह मुच्यते’. सच ही है परिवार संस्था की संकल्पना नारी के बिना व्यर्थ है। महल हो या टूटी झोंपड़ी गृहलक्ष्मी के प्रवेश से ही घर बनता है। परिवार के विस्तार, पोषण, विकास का प्रश्न हो या हास- उल्लास, सृजन, संयम, धर्म, परोपकार का, नारी नायिका की भूमिका में है। पुरुष जीविका अर्जन के नाम पर अपनी जिम्मेवारी से पल्ला झाड़ सकते हैं परंतु परिवार को सुसंस्कृत, परिष्कृत और समुन्नत बनाने के अपने उत्तरदायित्व को नारी कभी नहीं भूलती। नारी को परिवार का हृदय और प्राण कहा जाता है तो समाज का सेतुबंध भी नारी ही है। उदारचेत्ता और सुव्यवस्था की अभ्यस्त सुसंस्कारी देवी अपनी कोमलता, संवेदना, करुणा, स्नेह और ममता के स्वाभाविक गुणों से परिवार की जिम्मेवारी निभाते हुए सामाजिक रिश्तों को भी निभाती है। इतिहास साक्षी है, मातृशक्ति ने सदैव अपनी संतान में मातृभूमि के प्रति श्रद्धा के संस्कार विकसित किये। माता जीजाबाई को कौन नहीं जानता जिसने वीर शिवा को छत्रपति बनाया था। हाड़ा रानी ने अपने नवविवाहित पति को मातृभूमि के प्रति कर्तव्य याद दिलाने के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान प्रस्तुत किया। पद्मीनी संग हजारों देवियों ने जौहर कर धर्म रक्षा का स्वर्णिम अध्याय लिखा। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने इतिहास पर ऐसी छाप छोड़ी की हर नारी में उनकी छवि तलाशी जाती है क्योंकि कोमल हृदय देवी आवश्यकता पड़ने पर चंडी का रूप भी धारण कर सकती है। स्वतंत्रता संग्राम में कित्तूर कर्नाटक की रानी चेनम्मा से लखनऊ की बेगम हजरत महल, मध्यप्रदेश के रामगढ़ की रानी अवन्तीबाई, मुंडभर की महावीरी देवी सहित असंख्य वीरांगनाओं ने अपने युद्ध कौशल से दुश्मन के छक्के छुड़ाये। इतिहास साक्षी है, 1857 की क्रान्ति के दौरान दिल्ली के आस-पास के गाँवों की 255 महिलाओं ने क्रांति की मशाल को अपने प्राण देकर भी बूझने न दिया। इन्हें अंग्रेजों ने मुजफ्फरनगर में गोली से उड़ा दिया गया था। इतना ही नहीं, स्वामी श्रद्धानन्द की पुत्री वेद कुमारी और आज्ञावती ने महिलाओं को संगठित कर अंग्रेजी वस्तुओं के बहिष्कार और उनकी होली जलाने का अभियान शुरु किया। नागा रानी गुइंदाल्यू, दुर्गा भाभी, सरोजिनी नायडू सहित अनेक वीरांगनाओं के अनन्य राष्ट्रप्रेम, अदम्य साहस, अटूट प्रतिबद्धता की गौरवशाली दास्तान हमारी मातृशक्ति के इस रूप से भी साक्षात्कार कराती है। नारी ने समाज को अपना सब दिया लेकिन भटके हुए लोगों ने उसके साथ न्याय नहीं किया। 1947 में धर्म के आधार पर देश विभाजन के समय हमारी मातृशक्ति को अपमान और अपार कष्ट सहने पड़े। यही नहीं, एक काल विशेष अक्रांताओं द्वारा नारी अपहरण, हरम, हत्या, पर्दा, सौतन, जबरन धर्मांतरण से आरंभ हुआ। इससे कालांतर में कुछ कुरीतियां पनपी। यथा नवजात कन्या की हत्या, बाल विवाह, सती प्रथा, देवदासी प्रथा, अशिक्षा, विधवा का अभिशाप। कामुक सोच के कारण नारी को सुरक्षित पिंजरे में बंद करने वाली कुप्रथाएं हावी हो गई। आखिर राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने अकारण तो नहीं कहा होगा- अबला जीवन तेरी हाय यही कहानी! आंचल में है दूध और आंखों में पानी। कारण कुछ भी हो लेकिन एक काल विशेष से नारी शोषित रही है। परिस्थितियों ने ऐसा दबाव बनाया कि वह लगातार डरी, सहमी रही। इसी बीच कुछ क्रूर बादशाहों और समाजों ने नारी श्रद्धा और सम्मान को ‘सामान’ बना दिया। विकृतियों ने ऐसा विकराल रूप धारण किया कि राजाओं को जन्म देने वाली नारी की जिंदगी का फैसला करते हुए भी उससे बात तक नहीं जाती थी। ज्ञातव्य है कि गुरु नानक देव जी ने नारी निंदा करने वालों को चेताते हुए कहा है – सो क्यों मंदा आखिए जिस जम्मे राजान । नामधारी संप्रदाय के संस्थापक सद्गुरु राम सिंह जी ने सर्वप्रथम बेटियों के जीवन के अधिकार के पक्ष में कुड़ी मार से नहीं, व्यवहार को जन जन तक पहुंचते हुए ऐसे राक्षसों से संबंध न रखने का आह्वान किया था ! कल नहीं, आज भी कन्या भ्रूण हत्या होती है। पर्दाप्रथा, दहेज या बालविवाह जैसी कुप्रथाएं अभी कायम है। एक संप्रदाय विशेष में हलाला जैसी घृणित परंपराएं आज भी कायम है। उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के विपरीत तलाक के बाद महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित रखा गया है। हर काल में भेदभाव और अन्याय की स्थिति को बदलने और नारी को सम्मान दिलाने वाले कुछ महापुरुष हुए हैं जिन्होंने अपने-अपने ढंग से ऐसी कुरीतियों के विरुद्ध आवाज उठा नारी सशक्तिकरण का उद्घोष किया। इसमें कोई संदेह नहीं कि आज स्थिति बहुत बदली है। आज भारत की नारी वायुसेना के लड़ाकू विमान उड़ाने से राजनीति, प्रशासन, व्यवसाय और शिक्षा के क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण स्थान बना चुकी है। देश के सर्वोच्च राष्ट्रपति के पद को आज आदिवासी समाज से संबंध रखने वाली एक देवी सुशोभित कर रही है। तो इससे पूर्व देश की प्रधानमंत्री और अनेक राज्यों में मुख्यमंत्री भी नारी रह चुकी हैं। देश की राजधानी दिल्ली की वर्तमान मुख्यमंत्री भी एक नारी है। यह सर्वाधिक है कि मोदी सरकार के प्रयासों से संसद और विधानसभाओं में 33% महिला आरक्षण विधेयक नई संसद में सर्वप्रथम सर्वसम्मति से पारित होकर कानून बना जो जनगणना व नए परिसीमन के बाद शीघ्र लागू होगा। स्वाभाविक है इस क्रांतिकारी परिवर्तन के बाद लोकतंत्र और प्रशासन की सूरत भी बदलेगी। पंचायतों में महिलाओं को पचास फीसदी आरक्षण पहले से ही प्राप्त है। इसके बावजूद देश के ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में बदलाव की गति अत्यंत धीमी है। उसपर कन्या भ्रूण हत्या गंभीर असंतुलन पैदा कर रही है। यह स्थिति तब हैजबकि भारतीय संस्कृति के मूल आधार वेदों में नारी जाति को उच्च स्थान दिया गया है। नारी के प्रति ऐसा सम्मान और स्थान विश्व के किसी भी मत की पुस्तक में देखने को नहीं मिलता। महिला दिवस की सार्थकता तब है जब राजनीति और समाज की धारणा बदलें। नारी को उसका खोया सम्मान, अधिकार मिलें। अन्यथा ऐसे दिवस केवल शाब्दिक कर्मकांड बनकर रह जाएगे। ध्यान रहे अपनी मातृशक्ति के अशिक्षित, अस्वस्थ, असंतुलित, अपमानित, असमान रहते कोई भी समाज न तो विकास कर सकता है और न ही विश्व में सम्मान प्राप्त कर सकता है। हॉ कृतघन जरूर कहला सकता है। देश की सभी बेटियों को उच्चतम स्तर तक की शिक्षा तथा अन्य सुविधाएं बिना शुल्क, बिना भेदभाव दी जानी चाहिए । महिलाओं से संबंधित अपराधों की
ट्रंप के नए आयात टैरिफ पर बढ़ा विवाद, 20 से अधिक अमेरिकी राज्यों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की नई वैश्विक आयात टैरिफ नीति को लेकर अमेरिका में बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। 20 से अधिक अमेरिकी राज्यों ने इस फैसले को चुनौती देते हुए अदालत का रुख किया है। राज्यों का आरोप है कि राष्ट्रपति अपने अधिकारों से आगे बढ़कर आयात शुल्क लागू कर रहे हैं, जिससे व्यापारियों और आम नागरिकों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। इस मामले की सुनवाई United States Court of International Trade, न्यूयॉर्क में होगी। जानकारी के अनुसार, यह मुकदमा Oregon, Arizona, California और New York सहित कई डेमोक्रेटिक शासित राज्यों के अटॉर्नी जनरल की ओर से दायर किया गया है। उनका कहना है कि ट्रंप प्रशासन कई देशों से आने वाले उत्पादों पर लगभग 15 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाने की योजना बना रहा है, जो कानून के दायरे से बाहर है। ट्रंप ने दी नीति की सफाई राष्ट्रपति Donald Trump का कहना है कि यह कदम अमेरिका के लंबे समय से जारी व्यापार घाटे को कम करने के लिए जरूरी है। उनके मुताबिक यह शुल्क Trade Act of 1974 की धारा 122 के तहत लगाया गया है। इस प्रावधान के अनुसार राष्ट्रपति अधिकतम 15 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगा सकते हैं और यह व्यवस्था पांच महीने तक लागू रह सकती है। आवश्यकता पड़ने पर इसकी अवधि बढ़ाने का अधिकार कांग्रेस के पास होता है। राज्यों ने उठाए कानूनी सवाल मुकदमा दायर करने वाले राज्यों का तर्क है कि इस धारा का इस्तेमाल केवल विशेष परिस्थितियों में किया जा सकता है, न कि विभिन्न देशों से आने वाले सामान पर व्यापक रूप से टैरिफ लगाने के लिए। राज्यों का कहना है कि इससे स्थानीय कारोबार, उद्योग और उपभोक्ताओं पर महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ने की आशंका है। अदालत करेगी अंतिम फैसला मामले की सुनवाई न्यूयॉर्क स्थित United States Court of International Trade में होगी, जहां यह तय किया जाएगा कि ट्रंप का नया टैरिफ कानून के अनुरूप है या नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पिछले साल अदालत ने ट्रंप द्वारा आपातकालीन शक्तियों के तहत लगाए गए कुछ टैरिफ को रद्द कर दिया था। इससे संकेत मिलता है कि न्यायपालिका राष्ट्रपति के व्यापार संबंधी फैसलों की समीक्षा कर सकती है।
जबलपुर में दो गुटों के बीच हिंसक झड़प के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात

जबलपुर में दो गुटों के बीच हिंसक झड़प के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में पुरानी रंजिश को लेकर बुधवार रात दो पक्षों के बीच अचानक हिंसक झड़प हो गई। इस घटना में करीब 20 वर्षीय युवक घायल हो गया। विवाद के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया, जिसे देखते हुए प्रशासन ने इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है। घायल युवक को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उसकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। मामूली कहासुनी से बढ़ा विवाद पुलिस के अनुसार, बुधवार रात करीब 10:30 बजे भान तलैया से छोटी ओमती मार्ग पर सोनकर समाज के दो पक्षों के बीच मामूली कहासुनी शुरू हुई थी। देखते ही देखते यह विवाद बढ़ गया और दोनों पक्षों के लोग बड़ी संख्या में मौके पर जुट गए। कुछ ही देर में बहस झड़प में बदल गई और दोनों तरफ से मारपीट शुरू हो गई। हालात इतने बिगड़ गए कि लोगों ने एक-दूसरे पर जमकर पत्थरबाजी भी कर दी, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हमले में युवक घायल इस दौरान आयुष सोनकर नाम का युवक घायल हो गया, जिसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक उसकी हालत अब स्थिर है। मामले की सूचना मिलते ही बेलबाग, हनुमानताल और ओमती थाना क्षेत्र की पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को काबू में किया। Sonu Kurmi, सिटी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस ने बताया कि इस मामले में अप्पा सोनकर समेत अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। बताया जा रहा है कि अप्पा सोनकर पहले से ही एक अन्य आपराधिक मामले में वांछित है। गोली चलने की अफवाह से मची भगदड़ घटना के दौरान गोली चलने की अफवाह भी फैल गई, जिससे लोगों में डर का माहौल बन गया और कुछ समय के लिए भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वास्तव में गोली चली या नहीं। पुलिस का कहना है कि फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। CCTV और वायरल वीडियो से जांच घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। पुलिस ने आरोपियों की पहचान के लिए वायरल वीडियो और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज अपने कब्जे में ले ली है और उनकी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि माहौल बिगाड़ने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
क्या है छत्तीसगढ़ का ‘आवा पानी झोकी’ आंदोलन, किसानों की पहल से जल संरक्षण की नई मिसाल

रायपुर। छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में जल संरक्षण को लेकर किसानों ने एक अनोखी पहल शुरू की है, जिसे ‘आवा पानी झोकी’ नाम दिया गया है। इस आंदोलन के तहत किसान अपनी खेती की जमीन का करीब 5 प्रतिशत हिस्सा वर्षा जल संग्रह के लिए अलग रख रहे हैं, ताकि बारिश का पानी खेतों में ही संरक्षित किया जा सके। इस पहल का उद्देश्य प्रदेश में जल संरक्षण को बढ़ावा देना और लंबे समय में जल क्रांति की दिशा में कदम बढ़ाना है। खेतों में बन रहे छोटे तालाब और गड्ढे Ministry of Jal Shakti के मुताबिक, इस अभियान में किसान स्वेच्छा से अपनी कृषि भूमि के एक हिस्से में छोटे रिचार्ज तालाब और सीढ़ीनुमा गड्ढे बनवा रहे हैं। इन संरचनाओं में बारिश का पानी जमा होता है और धीरे-धीरे जमीन में समाकर भूजल स्तर को बढ़ाने में मदद करता है। इस व्यवस्था से मानसून के दौरान गिरने वाली पानी की हर बूंद को खेतों में ही रोका और पुनः उपयोग किया जा रहा है। इलाके में दिखने लगे सकारात्मक परिणाम मंत्रालय ने इस प्रयोग को उल्लेखनीय बताया है। पहले जो बारिश का पानी बहकर निकल जाता था, अब वह मिट्टी और भूजल स्रोतों का पुनर्भरण कर रहा है। इससे मिट्टी के कटाव में कमी आई है और सूखे के समय फसलों में नमी भी बनी रहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल साबित करता है कि सतत जल प्रबंधन के लिए भारी निवेश से ज्यादा सामूहिक भागीदारी जरूरी होती है। महिलाएं बनीं ‘नीर नायिका’, युवक ‘जल दूत’ इस अभियान में ग्रामीण समुदाय की बड़ी भूमिका है। गांवों की महिलाएं ‘नीर नायिका’ बनकर घर-घर लोगों को जल संरक्षण के लिए प्रेरित कर रही हैं और पारंपरिक लोकगीतों के जरिए जागरूकता फैला रही हैं। वहीं युवाओं को ‘जल दूत’ कहा जा रहा है, जो नालियों का मानचित्रण करने, नहरों से गाद निकालने, नुक्कड़ नाटक और भित्ति चित्रों के माध्यम से लोगों को अभियान से जोड़ने का काम कर रहे हैं। श्रमदान से तालाबों का पुनर्जीवन इस आंदोलन के दौरान सामूहिक श्रमदान से 440 से अधिक पारंपरिक तालाबों का पुनरुद्धार किया गया, जो अब प्राकृतिक जल पुनर्भरण के स्रोत बन गए हैं। इसके अलावा Pradhan Mantri Awas Yojana के 500 से ज्यादा लाभार्थियों ने भी अपने घरों के पास जल संरक्षण के गड्ढे बनवाए हैं। हजारों किसानों ने अपनाया 5% मॉडल जानकारी के अनुसार 1,260 से अधिक किसानों ने अपनी जमीन का 5 प्रतिशत हिस्सा जल पुनर्भरण के लिए अलग रखा है और पूरे Koriya District में 2,000 से ज्यादा सोख गड्ढे बनाए गए हैं। एक उदाहरण में ग्रामीणों ने सामूहिक प्रयास से सिर्फ तीन घंटे में 660 सोख गड्ढे बना दिए, जो इस अभियान में लोगों की भागीदारी को दर्शाता है। भूजल स्तर में भी हुआ सुधार मंत्रालय के अनुसार इस पहल के परिणाम अब स्पष्ट दिखने लगे हैं। कई गांवों में भूजल स्तर 3 से 4 मीटर तक बढ़ गया है, जबकि 17 दूरस्थ जनजातीय बस्तियों में सूख चुके झरने फिर से बहने लगे हैं। मिट्टी में नमी बढ़ने से कृषि उत्पादकता में सुधार हुआ है और बेहतर आजीविका के कारण मौसमी पलायन में करीब 25 प्रतिशत की कमी आई है।
शवयात्रा में मचा हड़कंप: मधुमक्खियों के हमले से भागे ग्रामीण, कई लोग घायल

उन्नाव। उत्तरप्रदेश के उन्नाव (Unnao) जिले में अंतिम संस्कार के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब अचानक मधुमक्खियों के झुंड ने शवयात्रा में शामिल लोगों पर हमला कर दिया। मधुमक्खियों के डंक से बचने के लिए लोग इधर-उधर भागने लगे और कुछ समय के लिए शव को वहीं छोड़ना पड़ा। इस घटना में करीब दो दर्जन ग्रामीण घायल हो गए, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना Ahimakheda village की है, जो Ajgain police station area के अंतर्गत आता है। यहां रहने वाले 65 वर्षीय सुंदर लाल का गुरुवार सुबह निधन हो गया था। परिजन और गांव के लोग उनका अंतिम संस्कार करने के लिए शव को गांव के बाहर स्थित खेत में ले गए थे। बताया गया कि खेत के पास एक बाग में पेड़ पर मधुमक्खियों का बड़ा छत्ता था। जैसे ही शवयात्रा वहां पहुंची, मधुमक्खियां अचानक भड़क गईं और लोगों पर हमला कर दिया। देखते ही देखते वहां भगदड़ मच गई। करीब 50-60 लोग शवयात्रा में शामिल थे, जो अपनी जान बचाने के लिए आसपास के सरसों और गेहूं के खेतों तथा झाड़ियों में छिप गए। मधुमक्खियों के हमले में लगभग दो दर्जन लोगों को डंक लग गए। सूचना मिलने पर एंबुलेंस मौके पर पहुंची और घायलों को इलाज के लिए Nawabganj Community Health Center ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें इंजेक्शन और दवाइयां देकर उपचार किया। घटना में घायल ग्रामीणों ने बताया कि खेत के पास खिन्नी का एक पेड़ है, जिस पर मधुमक्खियों का बड़ा छत्ता लगा हुआ था। जैसे ही लोग शव लेकर वहां पहुंचे, मधुमक्खियां अचानक झुंड बनाकर हमला करने लगीं। ग्रामीणों के अनुसार, सुंदर लाल करीब 15-20 दिन पहले रिश्तेदारी में गए थे, जहां गिरने से उनका पैर टूट गया था। इसके बाद से उनकी तबीयत लगातार खराब चल रही थी और गुरुवार सुबह उनकी मौत हो गई। मधुमक्खियों के शांत होने के बाद ग्रामीण दोबारा मौके पर पहुंचे और फिर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई।
पाकिस्तानी नागरिक सबा प्रकरण में नया मोड़: ‘नाजिया’ का वोटर कार्ड किसी और का

मेरठ। उत्तरप्रदेश के मेरठ (Meerut) में कथित पाकिस्तानी नागरिक सबा की गिरफ्तारी और फर्जी दस्तावेजों के मामले में अब नया मोड़ सामने आया है। सबा के अधिवक्ता वीके शर्मा ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि जिस वोटर कार्ड को आधार बनाकर सबा को जेल भेजा गया, वह असल में किसी दूसरी महिला का है और इस पूरे मामले में बड़ी गड़बड़ी हुई है। वोटर कार्ड को लेकर नया खुलासा अधिवक्ता वीके शर्मा ने मीडिया के सामने ‘नाजिया पत्नी फरहत’ नाम से जारी वोटर कार्ड पेश करते हुए बताया कि उस पर दर्ज ईपीआईसी (EPIC) नंबर TXL0674044 वही है, जिसे शिकायत में मुख्य आधार बनाया गया था। उनका कहना है कि यह वोटर कार्ड मेरठ के Sathla village की रहने वाली एक महिला का है, जिसका सबा से कोई संबंध नहीं है। जानकारी के मुताबिक वह महिला अपने परिवार और प्रोफेसर पति के साथ वहीं रह रही है। पुलिस पर बिना जांच गिरफ्तारी का आरोप वकील ने आरोप लगाया कि पुलिस ने बिना ठोस जांच और भौतिक सत्यापन के केवल एक शिकायत के आधार पर सबा को गिरफ्तार कर लिया। उनका कहना है कि अगर सही तरीके से जांच होती, तो यह साफ हो जाता कि जिस वोटर कार्ड का हवाला दिया जा रहा है, वह किसी अन्य महिला का है। 33 साल से भारत में रहने का आरोप दरअसल यह मामला तब सामने आया जब रुकसाना खान पत्नी अयाज खान ने जिला प्रशासन और एसएसपी से शिकायत की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि जली कोठी क्षेत्र में रहने वाली सबा उर्फ नाजी उर्फ नाजिया पाकिस्तान की नागरिक है और वह पिछले करीब 33 वर्षों से बिना वैध नागरिकता के भारत में रह रही है। शिकायत में यह भी कहा गया था कि सबा का निकाह मेरठ के फरहत मसूद से हुआ था और वर्ष 1993 में उसने पाकिस्तान में बेटी को जन्म दिया था। बाद में वह पाकिस्तानी पासपोर्ट के जरिए भारत आई और यहीं बस गई। आरोप यह भी लगाया गया कि उसने फर्जी पहचान पत्रों के आधार पर भारतीय दस्तावेज तैयार कराए। कोर्ट में होगी कानूनी लड़ाई इसी शिकायत के आधार पर 16 फरवरी को Delhi Gate Police Station Meerut में मामला दर्ज किया गया था और 17 फरवरी को सबा को जेल भेज दिया गया। अब बचाव पक्ष के वकील का कहना है कि वे अदालत में इस मामले को मजबूती से उठाएंगे। उनका दावा है कि जिस वोटर कार्ड को सबा से जोड़ा जा रहा है, उसमें सठला गांव की महिला की फोटो है और कहीं भी सबा का उल्लेख नहीं है। ऐसे में वे गलत गिरफ्तारी और मानसिक उत्पीड़न के आरोप में पुलिस के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं। इस नए खुलासे के बाद पूरे मामले में पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं और आगे की कानूनी कार्रवाई पर सबकी नजर टिकी है।
IRIS DENA पर मोदी सरकार की चुप्पी से भड़के खरगे, कहा-देश की विदेश नीति को बर्बाद कर रहे…

नई दिल्ली। इजरायल और अमेरिका द्वारा मिलकर ईरान पर किए गए हमले ने वैश्विक राजनीति के साथ-साथ भारत की घरेलू राजनीति को भी तेज कर दिया है। ईरानी जहाज को हिंद महासागर में अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा डुबोए जाने पर भारत सरकार की चुप्पी को लेकर विपक्ष ने अपनी नाराजगी जाहिर की है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि हिंद महासागर में हुई इस घटना पर पीएम नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की चुप्पी से साफ है कि देश के रणनीतिक और राष्ट्रीय हितों की घोर उपेक्षा की जा रही है। यह न सिर्फ भारत के राष्ट्रीय सिद्धांतों का अपमान है, बल्कि हमारी उस विदेश नीति का भी अपमान है, जिसे तमाम सरकारों ने बड़ी मेहनत से बनाया और अपनाया है। सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखे एक पोस्ट में खरगे ने मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “ईरान का जो जहाज टारपीडो की चपेट में आने से डूबा है यह जहाज बिना सैन्य साजो सामान के था और भारत में आयोजित अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू 2026 से लौट रहा था। ईरानी नौसेना का जहाज ईरिस डेना भारत का आमंत्रित अतिथि था और यह विशाखापत्तनम में 15 से 26 फरवरी तक आयोजित अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू 2026 में शामिल हुआ था। इस आयोजन में 70 से ज्यादा देशों की नौसेनाएं शामिल हुईं थीं। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि आश्चर्य की बात यह है कि इस अतिथि के डूबने पर भारत की तरफ से कोई चिंता या संवेदना व्यक्त नहीं की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पर चुप हैं। पीएम मोदी पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि जब आप अपने ही आंगन में हो रही घटनाओं पर प्रतिक्रिया नहीं दे सकते हैं तो हमें महासागर सिद्धांतों और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ होने के सिद्धांतों पर उपदेश क्यों दे रहे हैं। होर्मुज की खाड़ी में फंसे 1100 भारतीय नाविक: खरगे कांग्रेस अध्यक्ष ने इस युद्ध की वजह से होर्मुज की खाड़ी में फंसे भारतीयों को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि होर्मुज की खाड़ी में 38 भारतीय ध्वज वाले जहाज और 1100 नाविक फंसे हुए हैं। प्टन आशीष कुमार समेत दो भारतीय नाविकों की कथित तौर पर मौत हो गई है। समुद्री बचाव या राहत अभियान क्यों नहीं चलाया जा रहा है? पीएम मोदी कहते हैं कि कच्चे तेल और अन्य तेल का भंडार केवल 25 दिनों के लिए बचा है। तेल की बढ़ती कीमतों के बीच, हमारी ऊर्जा संबंधी इमरजेंसी योजना क्या है, खासकर भारत सरकार द्वारा रूसी तेल का आयात रोकने की मांग को लगभग स्वीकार करने के बाद। खाड़ी देशों के साथ अन्य प्रमुख वस्तुओं के व्यापार का क्या होगा। विदेश नीति को बर्बाद कर रहे हैं: खरगे कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए और कहा कि विदेश मंत्रालय के 3 मार्च के बयान के अनुसार, “कुछ भारतीय नागरिकों की जान चली गई है या वे लापता हैं”। खाड़ी देशों में एक करोड़ भारतीय रहते हैं। मेडिकल छात्र मदद की गुहार लगाते हुए हताश वीडियो संदेश जारी कर रहे हैं। भारत सरकार उनकी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित कर रही है? क्या प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को निकालने की कोई योजना बनाई गई है? उन्होंने कहा कि इन सब स्थितियों के बीच “स्पष्ट रूप से, मोदी जी का आत्मसमर्पण राजनीतिक और नैतिक दोनों है। यह भारत के मूल राष्ट्रीय हितों का अपमान करता है और हमारी उस विदेश नीति को खत्म कर रहा है, जिसे वर्षों से लगातार सरकारों द्वारा सावधानीपूर्वक और मेहनत से बनाया और अपनाया गया है।” गौरतलब है कि इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले के साथ शुरू हुई यह जंग अब पश्चिम एशिया से आगे बढ़कर हिंद महासागर में पहुंच गई है। भारत में फ्लीट रिव्यू कार्यक्रम के तहत आए ईरानी युद्धपोत को अमेरिकी पनडुब्बी ने श्रीलंका के करीब डुबो दिया। इस घटना में 80 से ज्यादा ईरानी नौसैनिकों के मारे जाने की आशंका है। बाकियों को श्रीलंकाई नेवी से बचाव अभियान के तहत बचाया था। फिलहाल यह सैनिक श्रीलंका में मौजूद हैं।
भोपाल में पालक महासंघ का हल्ला बोल: निजी स्कूलों की मनमानी फीस के खिलाफ DEO कार्यालय का घेराव

भोपाल ।राजधानी भोपाल में निजी स्कूलों द्वारा मनमाने ढंग से फीस और अन्य शुल्क वसूले जाने के खिलाफ अभिभावकों का गुस्सा सड़कों पर नजर आया। पालक महासंघ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में अभिभावकों ने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए घेराव किया और निजी स्कूल संचालकों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि निजी स्कूल फीस, बस शुल्क, किताबों और अन्य मदों में लगातार मनमानी वसूली कर रहे हैं, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान पालक महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में शिक्षा माफिया सक्रिय है और निजी स्कूल संचालकों के दबाव में प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा। उनका आरोप है कि अभिभावक लंबे समय से शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से स्कूलों के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया। प्रदर्शन के दौरान अभिभावकों ने DEO कार्यालय का घेराव करते हुए जोरदार नारेबाजी की और शिक्षा विभाग के खिलाफ नाराजगी जताई। पालक महासंघ के प्रतिनिधियों ने बताया कि वे अपनी मांगों को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपने पहुंचे थे, लेकिन अधिकारी ने ज्ञापन लेने से इनकार कर दिया और कार्यालय छोड़कर चले गए। इस घटना से प्रदर्शनकारियों में और अधिक आक्रोश फैल गया और उन्होंने इसे अभिभावकों की समस्याओं के प्रति प्रशासन की उदासीनता बताया। अभिभावकों का कहना है कि निजी स्कूल हर साल फीस में मनमानी बढ़ोतरी कर देते हैं, जबकि बस शुल्क और किताबों के नाम पर भी भारी रकम वसूली जाती है। इससे खासकर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। कई अभिभावकों ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई जारी रखना भी उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है। पालक महासंघ ने सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की है कि निजी स्कूलों की फीस वृद्धि पर तुरंत रोक लगाई जाए और फीस, बस चार्ज तथा किताबों की कीमतों के लिए एक पारदर्शी और तय ढांचा बनाया जाए। इसके अलावा उन्होंने शिक्षा माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और दोषी स्कूलों पर भारी जुर्माना लगाने की मांग भी उठाई है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग की कि जिला शिक्षा अधिकारी और संबंधित अधिकारियों पर किसी तरह का दबाव डालने वाले लोगों की जांच की जाए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। पालक महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा।