ट्रंप बोले- जमीनी युद्ध की जरूरत ही नहीं, ईरान की नौसेना खत्म

नई दिल्ली। इजरायल-ईरान संघर्ष सातवें दिन और तेज हो गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार तेहरान ने अज़रबैजान और क़तर में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर नए हमले किए। ईरान ने यह भी चेतावनी दी कि भारतीय महासागर में एक ईरानी युद्धपोत को टॉरपीडो से डुबाने के लिए अमेरिका को ‘पछतावा’ होगा। इसी बीच एक धार्मिक नेता ने डोनाल्ड ट्रंप के ‘खून’ की मांग करने वाला बयान दिया। दूसरी ओर, इजरायली सेना ने बताया कि पिछले 24 घंटों में लेबनान में ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह के 80 ठिकानों पर हमला किया गया। साथ ही ईरान के अंदर भी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च साइट्स समेत कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए हमलों की एक नई लहर चलाई गई। इस बीच एक बड़ी घटना में अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा दागे गए टॉरपीडो से श्रीलंका के तट के पास एक ईरानी युद्धपोत डूब गया जिसमें कम से कम 87 लोगों की मौत हो गई। लगभग 32 लोगों को बचाकर श्रीलंका के दक्षिणी शहर गाले के अस्पताल में भर्ती कराया गया। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि वह युद्धपोत ‘शांत तरीके से डूब गया।’ इसी दौरान कुवैत के पास खाड़ी क्षेत्र में एक तेल टैंकर में भी धमाका हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक जहाज के बाईं ओर बड़ा विस्फोट देखा गया जिसके बाद उसमें पानी भरने लगा। जहाज के कप्तान ने बताया कि धमाके के बाद एक छोटी नाव को उस इलाके से दूर जाते हुए देखा गया। यह घटना कुवैत के मुबारक अल कबीर पोर्ट से लगभग 30 नॉटिकल मील (करीब 56 किमी) दक्षिण-पूर्व में हुई
टी-20 विश्व कप फाइनल में भारत की एंट्री पर MP में जश्न: इंदौर के राजवाड़ा पर ढोल-ताशे, जबलपुर-उज्जैन में आतिशबाजी

मध्यप्रदेश । टी 20 विश्व कप के दूसरे सेमीफाइनल मुकाबले में टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इंग्लैंड को हराकर फाइनल में जगह बना ली। मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों ने गेंद और बल्ले दोनों से दमदार खेल दिखाया। मैच के आखिरी ओवर तक रोमांच बना रहा लेकिन भारतीय टीम ने शानदार संयम और रणनीति के साथ मुकाबला अपने नाम कर लिया। भारत की इस जीत के साथ ही देशभर में जश्न का माहौल बन गया और मध्य प्रदेश के कई शहरों में क्रिकेट प्रेमी खुशी से झूम उठे। इंदौर में जीत का जश्न सबसे ज्यादा ऐतिहासिक राजवाड़ा क्षेत्र में देखने को मिला। जैसे ही भारत की जीत तय हुई बड़ी संख्या में लोग हाथों में तिरंगा लेकर राजवाड़ा चौराहे पर पहुंच गए। युवाओं ने ढोल ताशों की धुन पर जमकर नाचते हुए जीत का जश्न मनाया। पूरे इलाके में भारत माता की जय और वंदे मातरम् के नारे गूंजने लगे। लोगों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी और जमकर आतिशबाजी की। देर रात तक राजवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों में उत्सव जैसा माहौल बना रहा। भारत की इस जीत के बाद क्रिकेट प्रेमियों का उत्साह चरम पर पहुंच गया है और अब सभी की नजरें फाइनल मुकाबले पर टिक गई हैं। लोगों को उम्मीद है कि टीम इंडिया फाइनल में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए विश्व कप ट्रॉफी अपने नाम करेगी। वहीं जबलपुर में भी भारत की जीत के बाद क्रिकेट फैंस सड़कों पर उतर आए। शहर के मालवीय चौक पर बड़ी संख्या में लोग जमा हुए और भारत की जीत का जश्न मनाया। यहां युवाओं ने पटाखे जलाए और एक दूसरे को बधाई दी। भारत की जीत के नारे और देशभक्ति के गीतों के बीच पूरे इलाके में उत्सव जैसा माहौल बन गया। उज्जैन में भी टीम इंडिया की जीत की खुशी साफ नजर आई। शहर के हृदय स्थल टॉवर चौक पर युवाओं की टोलियां एकत्रित हो गईं। यहां लोगों ने तिरंगा लहराते हुए जमकर आतिशबाजी की और भारत माता की जय तथा वंदे मातरम् के नारे लगाए। युवा बुजुर्ग और बच्चे सभी इस जीत के जश्न में शामिल दिखाई दिए। क्रिकेट प्रेमियों ने कहा कि टीम इंडिया का प्रदर्शन पूरे टूर्नामेंट में शानदार रहा है और सेमीफाइनल में इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम को हराना बड़ी उपलब्धि है। अब सभी को उम्मीद है कि भारतीय टीम फाइनल में भी इसी तरह का दमदार खेल दिखाकर देश को एक और विश्व कप जीत का जश्न मनाने का मौका देगी।
ग्लोबल एनर्जी वॉर में ईरान का मास्टरस्ट्रोक: अमेरिका और सहयोगियों के लिए हॉर्मुज पूरी तरह 'ब्लॉक', भारत-चीन के लिए खुली रहेगी तेल की सप्लाई।

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की विभीषिका के बीच ईरान के ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर’IRGC ने एक ऐसी घोषणा की है, जिसने पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार में हलचल मचा दी है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि दुनिया की ऊर्जा जीवनरेखा माना जाने वाला ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’Strait of Hormuz अब केवल संयुक्त राज्य अमेरिका, इजरायल, यूरोप और उनके पश्चिमी सहयोगियों के जहाजों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है। ईरानी सरकारी प्रसारक IRIB के माध्यम से दी गई यह चेतावनी सीधे तौर पर उन देशों को निशाना बनाती है जो वर्तमान संघर्ष में ईरान के खिलाफ खड़े हैं। IRGC ने दो टूक कहा है कि यदि इन प्रतिबंधित देशों का कोई भी जहाज इस जलमार्ग से गुजरने की कोशिश करेगा, तो उसे निश्चित रूप से हमला करके नष्ट कर दिया जाएगा। हालाँकि, इस अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि भारत इस सख्त नाकेबंदी के दायरे से बाहर है। बुधवार को जहाँ केवल चीनी जहाजों को अनुमति देने की बात कही गई थी, वहीं अब नए ऐलान के बाद यह साफ हो गया है कि भारतीय तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों के लिए यह रास्ता सुरक्षित रहेगा। तेहरान का यह रुख भारत के साथ उसके पुराने और विश्वसनीय संबंधों को दर्शाता है। भारतीय अधिकारियों और विशेषज्ञों के अनुसार, इस छूट से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा काफी हद तक टल गया है, क्योंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है। ईरानी अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का हवाला देते हुए इस कार्रवाई को जायज ठहराया है। उनका कहना है कि युद्धकाल में इस्लामिक गणराज्य ईरान को अपनी सीमाओं से लगे जलमार्गों पर नियंत्रण करने का पूरा अधिकार है। यह कठोर फैसला अमेरिका और इजरायल द्वारा पिछले शनिवार को शुरू किए गए संयुक्त सैन्य अभियान के जवाब में लिया गया है। गौरतलब है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक समुद्री तेल परिवहन का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा वहन करता है। इसकी रणनीतिक अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फारस की खाड़ी के तमाम बंदरगाहों, जिनमें दुबई का जेबेल अली भी शामिल है, के लिए यह एकमात्र निकास मार्ग है। वर्तमान स्थिति की गंभीरता को समुद्री ट्रैकिंग वेबसाइटों पर साफ देखा जा सकता है। कुवैत और दुबई के तटों के पास सैकड़ों टैंकर और कमर्शियल जहाज लंगर डाले खड़े हैं, जो इस नाकेबंदी के कारण आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। इतिहास में यह पहली बार है जब हॉर्मुज को वाणिज्यिक जहाजों के लिए इस तरह पूरी तरह बंद किया गया है। यहाँ तक कि 1980 के दशक के भीषण ईरान-इराक युद्ध के दौरान भी इस मार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप नहीं हुआ था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नाकेबंदी से भले ही एशिया-यूरोप के मुख्य मार्गों पर तुरंत असर न पड़े, लेकिन खाड़ी क्षेत्र से होने वाली तेल और गैस की आपूर्ति बाधित होने से दुनिया भर में ऊर्जा संकट और बढ़ सकता है। फिलहाल, भारत के लिए हॉर्मुज का यह ‘खुला दरवाजा’ एक बड़ी कूटनीतिक जीत और आर्थिक राहत का संकेत है।
सिवनी में पुलिस की बड़ी कार्रवाई: हिस्ट्रीशीटर अजीत उपाध्याय और प्रबुद्ध शुक्ला समेत तीन गिरफ्तार, हथियार बरामद कर निकाला जुलूस

सिवनी । मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में कोतवाली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए हत्या के प्रयास के गंभीर मामले में फरार चल रहे कुख्यात हिस्ट्रीशीटर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने दबिश देकर अजीत उपाध्याय प्रबुद्ध शुक्ला और एक अन्य आरोपी को पकड़ने में सफलता हासिल की। तीनों आरोपियों को पेंच टाइगर रिजर्व क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई उस मामले में की गई है जिसमें एक युवक पर सरेआम जानलेवा हमला किया गया था। घटना के बाद से आरोपी लगातार फरार चल रहे थे और पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई थी। आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस ने लगातार अलग अलग स्थानों पर दबिश दी और आखिरकार पेंच टाइगर रिजर्व इलाके में घेराबंदी कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक कार एक पिस्टल जिंदा कारतूस और एक चाकू भी बरामद किया है। पुलिस का कहना है कि ये सभी आरोपी जिले के कुख्यात अपराधी हैं और इनके खिलाफ पहले से ही कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें मारपीट धमकी अवैध हथियार रखने और अन्य गंभीर अपराध शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को शहर में लाकर उनका जुलूस भी निकाला। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहा और आरोपियों को पैदल घुमाया गया ताकि अपराधियों में पुलिस का खौफ बना रहे और आम जनता में सुरक्षा की भावना मजबूत हो सके। कोतवाली पुलिस का कहना है कि आरोपियों से फिलहाल पूछताछ की जा रही है और इस मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों के पास से बरामद हथियार कहां से आए और इनका इस्तेमाल किन किन घटनाओं में किया गया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक आरोपियों के खिलाफ पहले से दर्ज मामलों की भी समीक्षा की जा रही है और उनके आपराधिक नेटवर्क को लेकर जानकारी जुटाई जा रही है। मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है और जरूरत पड़ने पर अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी भी की जाएगी।
ईरान में नेतृत्व का महासंग्राम: ट्रंप ने मोजतबा खामेनेई को बताया 'लाइटवेट', कहा- शांति के लिए अमेरिकी दखल जरूरी।

नई दिल्ली । ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हालिया मृत्यु ने न केवल तेहरान में सत्ता का शून्य पैदा किया है, बल्कि वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक युद्ध को भी जन्म दे दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले में बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए ‘एक्सियोस’ को दिए एक इंटरव्यू में सनसनीखेज बयान दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें मोजतबा खामेनेई, जो अपने पिता के उत्तराधिकारी के रूप में सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं, बिल्कुल भी मंजूर नहीं हैं। ट्रंप ने मोजतबा को एक ‘लाइटवेट’हल्का खिलाड़ी करार देते हुए कहा कि वह ऐसे किसी भी व्यक्ति को स्वीकार नहीं करेंगे जो खामेनेई की पुरानी और कट्टरपंथी नीतियों को आगे बढ़ाए। ट्रंप का यह दावा केवल विरोध तक सीमित नहीं है; उन्होंने ईरान के अगले नेता की नियुक्ति में प्रत्यक्ष अमेरिकी भागीदारी की मांग की है। इसके लिए उन्होंने वेनेजुएला का उदाहरण दिया, जहाँ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारीजनवरी 2026 के बाद डेल्सी रोड्रिगेज के साथ ‘मैनेज्ड ट्रांजिशन’ किया गया था। ट्रंप का मानना है कि यदि ईरान में शांति और सौहार्द लाना है, तो वाशिंगटन को नेतृत्व चयन की प्रक्रिया का हिस्सा बनना होगा। उन्होंने चेतावनी भी दी कि यदि ईरान ने फिर से किसी कट्टरपंथी को अपना नेता चुना, तो अमेरिका को अगले पांच वर्षों के भीतर दोबारा युद्ध के मैदान में उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। दूसरी ओर, ईरान का आंतरिक ढांचा इस समय भारी दबाव में है। 88 सदस्यीय विशेषज्ञों का पैनलAssembly of Experts नया उत्तराधिकारी चुनने के लिए जद्दोजहद कर रहा है। मोजतबा खामेनेई, जिनके ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्सIRGC के साथ बेहद गहरे और मजबूत रिश्ते हैं, फिलहाल मौलवी संगठन में सबसे प्रभावशाली व्यक्ति माने जा रहे हैं। हालांकि, ईरान का संविधान वंशानुगत शासन की अनुमति नहीं देता, लेकिन मोजतबा का प्रभाव उन्हें इस दौड़ में सबसे आगे रखता है। ट्रंप के इस हस्तक्षेप ने अब ईरान के भीतर और अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या एक संप्रभु राष्ट्र के सर्वोच्च धार्मिक नेता का चुनाव बाहरी शक्तियों के दबाव में हो सकता है। ऊर्जा बाजार के विशेषज्ञों का भी मानना है कि ट्रंप का यह रुख ईरान के साथ भविष्य के परमाणु समझौते और क्षेत्रीय स्थिरता को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा। फिलहाल, ईरान ने आधिकारिक रूप से नए नेता के नाम की घोषणा को टाल दिया है, लेकिन ट्रंप के इस ताजा बयान ने तेहरान और वाशिंगटन के बीच पहले से ही जारी तनाव की आग में घी डालने का काम किया है। अब पूरी दुनिया की नजरें विशेषज्ञों के उस पैनल पर टिकी हैं, जिसे कानून के अनुसार जल्द ही नया उत्तराधिकारी घोषित करना है।
ईरान पर हमले के विरोध में सीनेट में हंगामा, पूर्व मरीन का टूटा हाथ; सांसद की भूमिका पर विवाद, VIDEO वायरल

नई दिल्ली । अमेरिका में ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच विरोध के स्वर भी तेज होते जा रहे हैं। इसी कड़ी में यूनाइटेड स्टेट्स सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति की सुनवाई के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक पूर्व अमेरिकी मरीन ने ईरान पर हमले के विरोध में जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प में पूर्व सैनिक का हाथ टूट गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और अमेरिकी राजनीति में नई बहस को जन्म दे रहा है। घायल प्रदर्शनकारी की पहचान ब्रायन मैकगिनेस के रूप में हुई है जो वर्ष 2000 से 2004 तक यूनाइटेड स्टेट्स मरीन कॉर्प्स में सार्जेंट के पद पर तैनात रह चुके हैं। जानकारी के मुताबिक मैकगिनेस सीनेट की सुनवाई के दौरान अचानक खड़े हो गए और ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का विरोध करने लगे। उन्होंने पश्चिम एशिया में अमेरिका की सैन्य भूमिका और इजरायल के समर्थन पर भी सवाल उठाए। स्थिति बिगड़ती देख यूएस कैपिटल पुलिस ने उन्हें हॉल से बाहर निकालने की कोशिश की। इसी दौरान मैकगिनेस ने दरवाजे के फ्रेम को पकड़ लिया और बाहर जाने से इनकार कर दिया। वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिसकर्मी उन्हें हटाने की कोशिश कर रहे हैं और खींचतान के दौरान उनका हाथ दरवाजे में फंस जाता है। इसी अफरा-तफरी में उनका हाथ टूट जाता है। कमरे में मौजूद लोगों की आवाजें भी वीडियो में सुनाई देती हैं जहां कुछ लोग चिल्लाते हुए कहते हैं उसका हाथ… उसका हाथ… ओह माय गॉड! वहीं पुलिस अधिकारी लगातार उन्हें दरवाजा छोड़ने के लिए कहते हुए सुनाई देते हैं। इस घटना में एक अमेरिकी सांसद की भूमिका भी सामने आई है। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिस अधिकारियों के साथ अमेरिकी सीनेटर टिम शीही भी प्रदर्शनकारी को बाहर निकालने में मदद करते नजर आ रहे हैं। हालांकि झड़प के दौरान उनका हाथ किस तरह टूटा इसे लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। हॉल से बाहर ले जाए जाने के दौरान मैकगिनेस जोर-जोर से चिल्लाते हुए कहते सुने गए कोई भी सैनिक इजरायल के लिए लड़ना नहीं चाहता। उनका यह बयान पश्चिम एशिया में अमेरिका की सैन्य नीतियों के विरोध को दर्शाता है और इसी वजह से यह मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया है। घटना के बाद सीनेटर टिम शीही ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने कहा कि कैपिटल पुलिस एक असंतुलित प्रदर्शनकारी को हटाने की कोशिश कर रही थी और वह केवल स्थिति को शांत करने में मदद कर रहे थे। उन्होंने लिखा कि यह व्यक्ति टकराव के इरादे से कैपिटल आया था और पुलिस अपनी ड्यूटी निभा रही थी। शीही ने उम्मीद जताई कि घायल व्यक्ति को उचित मदद मिलेगी और भविष्य में ऐसी घटनाएं नहीं होंगी। वीडियो सामने आने के बाद अमेरिका में ईरान नीति इजरायल के समर्थन और पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप को लेकर नई बहस छिड़ गई है। कई विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना अमेरिकी राजनीति में बढ़ते ध्रुवीकरण और विदेश नीति को लेकर गहरी असहमति को भी उजागर करती है।
Gen Z' आंदोलन का असर: नेपाल चुनाव में पारंपरिक पार्टियों का अंत, बालेन शाह की RSP ने रचा इतिहास।

नई दिल्ली । नेपाल की सियासत में 5 मार्च 2026 का दिन एक ऐसी तारीख के रूप में दर्ज हो गया है, जिसने हिमालयी राष्ट्र के पूरे राजनीतिक मानचित्र को बदल कर रख दिया है। पिछले साल सितंबर 2025 में हुए ऐतिहासिक ‘जनरेशन जेड’ (Gen Z) आंदोलन की धमक अब मतपेटियों से निकल रही है। शुरुआती मतगणना के रुझान किसी बड़े राजनीतिक भूचाल से कम नहीं हैं। काठमांडू के पूर्व मेयर और रैपर बालेन शाह (बालेंद्र शाह) के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) एक ऐसी प्रचंड सुनामी बनकर उभरी है, जिसमें नेपाल की पुरानी और पारंपरिक पार्टियों, विशेष रूप से वामपंथी धड़े का अस्तित्व खतरे में नजर आ रहा है। इस चुनाव का सबसे हाई-प्रोफाइल और दिलचस्प मुकाबला झापा-5 सीट पर देखने को मिल रहा है। यहाँ से आ रहे आंकड़े न केवल चौंकाने वाले हैं, बल्कि देश की बदलती सोच का आईना भी हैं। चार बार के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, जिन्हें नेपाल की राजनीति का ‘चाणक्य’ माना जाता था, अपने ही गढ़ में RSP के बालेन शाह से बुरी तरह पिछड़ते दिख रहे हैं। शुरुआती गिनती में जहाँ बालेन शाह ने 1,478 वोटों के साथ मजबूत बढ़त बनाई है, वहीं ओली महज 384 वोटों पर टिके हुए हैं। यह केवल एक सीट की हार-जीत नहीं है, बल्कि नेपाल के युवाओं द्वारा पुरानी व्यवस्था को नकारने का स्पष्ट संदेश है। काठमांडू के सभी 10 निर्वाचन क्षेत्रों में RSP का ‘क्लीन स्वीप’ होता दिख रहा है। पार्टी की युवा उम्मीदवार रंजू दर्शना ने काठमांडू-1 से भारी अंतर से जीत हासिल की है, उन्हें अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी नेपाली कांग्रेस के प्रबल थापा छेत्री से लगभग दोगुने वोट मिले हैं। इसी तरह बिराज भक्त श्रेष्ठ और गणेश पराजुली जैसे नए चेहरों ने भी अपनी सीटों पर जीत का परचम लहराया है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, इस बार 60% मतदान हुआ, जिसमें करीब 10 लाख नए युवा वोटरों ने अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई। इन युवाओं ने भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और खराब गवर्नेंस के खिलाफ मतदान कर ‘घंटी’ (RSP का चुनाव चिह्न) को अपनी पहली पसंद बनाया है। दूसरी तरफ, वामपंथी दलों और नेपाली कांग्रेस के लिए ये नतीजे किसी दुःस्वप्न से कम नहीं हैं। पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ और केपी शर्मा ओली की पार्टियां अपने पारंपरिक वोट बैंक को बचाने में नाकाम रही हैं। यहाँ तक कि गगन थापा के नेतृत्व वाली नेपाली कांग्रेस भी RSP की आंधी के आगे बेबस नजर आ रही है। भारत ने भी नेपाल की इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नेपाल की जनता को इस ऐतिहासिक चुनाव के सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए शांति और प्रगति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई है। मतगणना 9 मार्च तक पूरी होने की उम्मीद है, लेकिन रुझानों ने यह साफ कर दिया है कि नेपाल अब एक नए और युवा नेतृत्व की ओर मजबूती से कदम बढ़ा चुका है।
पश्चिम एशिया तनाव के बीच राहत: भारत में नहीं बढ़ेंगे पेट्रोल डीजल के दाम, कनाडा-ऑस्ट्रेलिया से LPG आयात की तैयारी

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-इजरायल तथा ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है लेकिन भारत सरकार ने आम उपभोक्ताओं को राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि फिलहाल देश में पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़ाए जाएंगे। छह दिन से जारी युद्ध के चलते वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत करीब 16 प्रतिशत बढ़कर 85 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है और ब्रेंट क्रूड लगभग 85.41 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है। इसके बावजूद केंद्र सरकार का कहना है कि भारत के पास पर्याप्त तेल और गैस का भंडार मौजूद है और घरेलू बाजार पर इसका तत्काल कोई असर नहीं पड़ेगा। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों पर तेजी से काम किया है। एलपीजी के मामले में भारत केवल कतर पर निर्भर नहीं है बल्कि ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों ने भी गैस की आपूर्ति का प्रस्ताव दिया है। सरकार का कहना है कि जरूरत पड़ने पर इन देशों से आयात बढ़ाकर किसी भी संभावित कमी को पूरा किया जा सकता है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक भारत लगातार विभिन्न ऊर्जा उत्पादकों और आपूर्तिकर्ताओं के संपर्क में है और स्थिति पर करीबी नजर रखी जा रही है। दरअसल पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के बीच कतर ने अस्थायी रूप से अपना गैस उत्पादन रोक दिया है जिसका असर वैश्विक आपूर्ति पर पड़ सकता है। वर्तमान में भारत लगभग 195 मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर गैस का आयात करता है जिसमें करीब 60 एमएमएससीएम यानी लगभग 30 प्रतिशत गैस कतर से आती है। सरकार का कहना है कि इस कमी को पूरा करने के लिए अन्य देशों से गैस आयात बढ़ाने की योजना तैयार है। यदि जरूरत पड़ी तो गैस कंपनियां उद्योगों को गैस आपूर्ति की प्राथमिकताओं में बदलाव कर सकती हैं लेकिन घरेलू उपभोक्ताओं पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पीएनजी और सीएनजी जैसे घरेलू उपयोग वाले गैस उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। उद्योगों के पास वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत उपलब्ध होते हैं इसलिए गैस की संभावित कमी की स्थिति में आपूर्ति का संतुलन बनाया जा सकता है। फिलहाल ऐसी कोई स्थिति नहीं बनी है जिससे आम उपभोक्ताओं को चिंता करने की जरूरत पड़े। ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सरकार ने यह भी जानकारी दी है कि देश में फिलहाल करीब 50 दिनों के लिए तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। इसमें 25 दिनों के लिए कच्चे तेल का स्टॉक और लगभग 25 दिनों की जरूरत के हिसाब से पेट्रोल और डीजल उपलब्ध है। इसके अलावा भारत लगातार दूसरे देशों से भी तेल आपूर्ति को लेकर बातचीत कर रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की दी जा रही धमकी को लेकर भी सरकार ने कहा है कि इसका भारत पर सीमित असर पड़ेगा। भारत के कुल तेल आयात का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा ही इस मार्ग से गुजरता है जबकि बाकी 60 प्रतिशत अन्य रास्तों से आता है। सरकार ने सुरक्षित मार्गों से आयात बढ़ाने की रणनीति भी तैयार कर ली है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध कुछ समय और चलता है तो कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं लेकिन संघर्ष थमते ही कीमतों में गिरावट की संभावना है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की उपलब्धता पर्याप्त है। इस बीच भारत अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी और ओपेक जैसे संगठनों के साथ भी आपूर्ति को लेकर लगातार बातचीत कर रहा है। साथ ही समुद्री परिवहन को सुरक्षित और सस्ता बनाए रखने के लिए अमेरिका की वित्तीय संस्था डीएफसी के साथ जहाजों के बीमा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा जारी है।
GWALIOR HIGH COURT: हाईकोर्ट सख्त: आदेश की अवहेलना पर सिविल जज के आचरण की जांच के निर्देश

HIGHLIGHTS: हाईकोर्ट ने आदेश की अवहेलना पर सिविल जज के आचरण की जांच के निर्देश दिए विवादित संपत्ति पर यथास्थिति आदेश के बावजूद निर्माण का आरोप ट्रायल कोर्ट ने गवाहों के बयान दर्ज किए बिना PWD से रिपोर्ट मंगाई रिपोर्ट भेजने में निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को होगी GWALIOR HIGH COURT: ग्वालियर। हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अपने आदेश की अवहेलना और न्यायिक प्रक्रिया में लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए एक सिविल जज के आचरण की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि अदालत ने यह मामला किसी अन्य सिविल जज को सौंपते हुए चार माह के भीतर पूरी जांच कर रिपोर्ट पेश करने को कहा है। US-Iran संघर्ष के बीच PM मोदी ने की फ्रांस के राष्ट्रपति से चर्चा, जानें किन मुद्दों पर हुई बात यथास्थिति आदेश के बावजूद शुरू हुआ निर्माण मामला अशोक कुमार एवं अन्य बनाम मीरा देवी से जुड़ा है। वर्ष 2013 में विवादित संपत्ति को लेकर अदालत ने यथास्थिति बनाए रखने का अंतरिम आदेश जारी किया था। इसके बावजूद प्रतिवादी पक्ष द्वारा कथित रूप से विवादित जमीन पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। इसके बाद याचिकाकर्ता अशोक कुमार ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की। GWALIOR AICD ATTACK: दहेज़ में कार न मिलने पर मां सहित बच्चे पर फेंका एसिड; गोद में सो रही थी 4 माह की बच्ची ट्रायल कोर्ट से मांगी गई थी जांच रिपोर्ट मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने 4 अप्रैल 2024 को ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया था कि वह जांच कर यह स्पष्ट करे कि क्या अदालत के अंतरिम आदेश का उल्लंघन करते हुए निर्माण किया गया है। ट्रायल कोर्ट को चार माह के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने और 24 अप्रैल 2024 को पक्षकारों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित करने के निर्देश भी दिए गए थे। LIZZARDS IN WATER TANK: इंदौर के बाद ग्वालियर में पानी पर सवाल: PM आवास टंकी में मिलीं 5 मरी छिपकलियां; निगम पर लगे लापरवाही के आरोप जांच प्रक्रिया में बरती गई लापरवाही हालांकि लंबे समय तक रिपोर्ट पेश नहीं की गई। बाद में ट्रायल कोर्ट ने विधिवत जांच प्रक्रिया अपनाने के बजाय लोक निर्माण विभाग (PWD) के कार्यपालन यंत्री से स्थल निरीक्षण रिपोर्ट मंगाकर सीधे हाईकोर्ट को भेज दी। कोर्ट ने पाया कि यह रिपोर्ट पक्षकारों की अनुपस्थिति में तैयार की गई प्रतीत होती है और निर्धारित प्रक्रिया का भी पालन नहीं किया गया। नेटफ्लिक्स पर सच्ची क्राइम कहानियों की डरावनी डॉक्यूमेंट्रीज: रहस्य, अपराध और रोमांच जो आपके रोंगटे खड़े कर दें! अगली सुनवाई 20 अगस्त को हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस रिपोर्ट पर भरोसा नहीं किया जा सकता और मामले की विधिवत जांच आवश्यक है। अदालत ने मामले की जांच किसी अन्य सिविल जज से कराने के निर्देश दिए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को निर्धारित की गई है।
ईरान-इजरायल युद्ध का वैश्विक ऊर्जा संकट: दुनिया भर में महंगी हुई रसोई गैस, जानें भारत पर क्या होगा असर?

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने न केवल वैश्विक भू-राजनीति को प्रभावित किया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भी भारी अनिश्चितता पैदा कर दी है। मार्च 2026 की शुरुआत के साथ ही वैश्विक बाजार में रसोई गैस LPG की कीमतों में बड़ी हलचल देखी जा रही है। globalpetrolprices.com द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 2 मार्च 2026 तक दुनिया भर में एलपीजी की औसत कीमत 71.96 भारतीय रुपये प्रति लीटर तक पहुँच गई है। यह उछाल मुख्य रूप से ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी सैन्य संघर्ष और लॉजिस्टिक बाधाओं का परिणाम माना जा रहा है। वैश्विक स्तर पर कीमतों का विश्लेषण करें तो यह अंतर स्पष्ट दिखाई देता है कि अमीर और ऊर्जा आयात करने वाले देशों में कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। अल्जीरिया, अंगोला, सऊदी अरब और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में हाल के दिनों में एलपीजी की दरों में वृद्धि दर्ज की गई है। इसके विपरीत, रूस और बेलारूस जैसे देशों में मामूली गिरावट देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों तक सबकी पहुंच समान है, लेकिन विभिन्न देशों द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स और दी जाने वाली सब्सिडी के कारण खुदरा कीमतों में जमीन-आसमान का अंतर पैदा हो जाता है। भारतीय उपभोक्ताओं के लिए इस वैश्विक उथल-पुथल के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है। जहां दुनिया भर के कई देशों में गैस की कीमतें बढ़ रही हैं, वहीं भारत में फिलहाल एलपीजी की कीमतें 59.9 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर बनी हुई हैं। इंडियन ऑयल के ताजा डेटा के अनुसार, देश की राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाला घरेलू सिलेंडर ₹853 में उपलब्ध है, जबकि मुंबई में यह ₹852.50 की दर से बिक रहा है। हालांकि, भौगोलिक स्थिति के कारण पटना में इसकी कीमत ₹951 और लखनऊ में ₹890.50 तक पहुंच गई है। पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों जैसे कारगिल में सिलेंडर ₹985.5 और पुलवामा में ₹969 में मिल रहा है। वाणिज्यिक मोर्चे पर भी कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। दिल्ली में 19 किलो वाला कमर्शियल सिलेंडर 1768.50 रुपये और मुंबई में 1720 रुपये में मिल रहा है, जबकि चेन्नई में इसकी कीमत 1929 रुपये है। लेकिन यह स्थिरता कितनी लंबी टिकेगी, यह हॉर्मुज जलमार्ग की स्थिति पर निर्भर करता है। जीरो कार्बन एनालिटिक्स की एक रिपोर्ट चेतावनी देती है कि यदि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लंबा खिंचता है और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य Strait of Hormuz को अवरुद्ध कर दिया जाता है, तो पूरा एशिया ऊर्जा संकट की चपेट में आ सकता है। चूँकि एशिया के अधिकांश देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी जलमार्ग पर निर्भर हैं, इसलिए हॉर्मुज की नाकेबंदी कच्चे तेल और एलपीजी की आपूर्ति श्रृंखला को पूरी तरह ध्वस्त कर सकती है। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में यदि वैश्विक तनाव और बढ़ता है, तो कच्चे तेल और गैस के दामों में होने वाला उतार-चढ़ाव भारतीय बाजार को भी प्रभावित कर सकता है। फिलहाल सरकार की सब्सिडी नीतियों और स्टॉक प्रबंधन ने आम आदमी की जेब को सुरक्षित रखा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार की अस्थिरता भविष्य के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।