रूस ईरान को खुफिया जानकारी दे रहा! ट्रंप बोले- इससे कोई खास फायदा नहीं

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को उन रिपोर्टों को कम महत्व दिया, जिनमें कहा गया कि रूस ने ईरान को अमेरिकी सैनिकों और ठिकानों पर हमले के लिए खुफिया जानकारी दी है। ट्रंप ने कहा कि अगर ऐसा हुआ भी है, तो इससे ईरान को कोई खास लाभ नहीं हो रहा। यह टिप्पणी उन्होंने एयर फोर्स वन से मियामी के लिए रवाना होते समय की। अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद बढ़ा तनाव ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया जब अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू करने के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर है। युद्ध शुरू होने के एक दिन बाद कुवैत में ड्रोन हमले में अमेरिकी सेना के छह रिजर्व सैनिक मारे गए। राष्ट्रपति ने सीधे तौर पर पुष्टि नहीं की कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को रूस द्वारा ईरान को लक्ष्य संबंधी जानकारी देने के ठोस सबूत मिले हैं या नहीं, लेकिन उन्होंने कहा कि इससे युद्ध की दिशा पर बड़ा असर नहीं पड़ा है। रूस और अमेरिका संबंधों पर सवाल टाले जब ट्रंप से पूछा गया कि अगर रूस ईरान की मदद कर रहा है तो अमेरिका-रूस संबंधों पर क्या असर पड़ेगा, तो उन्होंने सवाल टालते हुए कहा कि “हम भी उनके खिलाफ वैसा ही कर सकते हैं।” उन्होंने यूक्रेन का उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले चार वर्षों से अमेरिका यूक्रेन को खुफिया सहायता दे रहा है ताकि वह रूस के हमलों से बच सके। तेल बाजार पर युद्ध का असर पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने के साथ ही तेल बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। फारस की खाड़ी के प्रवेश द्वार Hormuz Strait से रोजाना लगभग दो करोड़ बैरल तेल ले जाने वाले जहाज गुजरते हैं, लेकिन मौजूदा हालात में उनके आवागमन में रुकावट आई है। ईरान के जवाबी हमलों और क्षेत्र की ऊर्जा सुविधाओं को हुए नुकसान के कारण वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बढ़ा, जिससे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। रणनीतिक तेल भंडार पर ट्रंप का रुख तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के सवाल पर ट्रंप ने कहा कि जरूरत पड़ी तो कदम उठाने को तैयार हैं, लेकिन फिलहाल अमेरिका के पास पर्याप्त तेल भंडार मौजूद है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी रणनीतिक तेल भंडार में पिछले महीने के अंत तक लगभग 41.5 करोड़ बैरल तेल था, जबकि इसकी कुल क्षमता 70 करोड़ बैरल से अधिक है। ट्रंप ने कहा कि देश में पर्याप्त तेल है और बाजार में आपूर्ति जल्दी सामान्य हो सकती है।
Women's Day 2026: महिलाओं की सुरक्षा के लिए मोबाइल में जरूर रखें ये 3 सेफ्टी ऐप, एक क्लिक में मिलेगी मदद

नई दिल्ली। हर साल 8 मार्च को दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस जाता है। यह दिन महिलाओं के सम्मान और उनके अधिकारों को समर्पित होता है। इस अवसर पर कई लोग महिलाओं को उपहार देते हैं या उन्हें खास तरीके से सम्मानित करते हैं। लेकिन महिला दिवस सिर्फ उत्सव का दिन ही नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने का भी मौका है। आज के डिजिटल दौर में कुछ मोबाइल एप ऐसी हैं जो मुसीबत की स्थिति में महिलाओं के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम कर सकती हैं। इनमें आपातकालीन अलर्ट और लोकेशन शेयरिंग जैसे फीचर दिए गए हैं। आइए जानते हैं ऐसी तीन महत्वपूर्ण सेफ्टी ऐप्स के बारे में, जिन्हें हर महिला को अपने मोबाइल में रखना चाहिए। 1. 112 India Appयह एप भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा तैयार की गई है। इसमें SOS बटन दिया गया है, जिसे दबाते ही आपकी लोकेशन तुरंत आपातकालीन सेवाओं तक पहुंच जाती है। इस एप की खास बात यह है कि यह हिंदी और अंग्रेजी सहित करीब 10 भाषाओं में उपलब्ध है। इसके अलावा मोबाइल के पावर बटन को तीन बार दबाने पर भी इमरजेंसी अलर्ट भेजा जा सकता है। 2. e‑Raksha Appयह एप Madhya Pradesh Police और राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई है। इसमें जीपीएस आधारित ट्रैकिंग सिस्टम और SOS अलर्ट की सुविधा दी गई है। इस एप के जरिए उपयोगकर्ता अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन से तुरंत संपर्क कर सकता है। साथ ही इसमें आत्मरक्षा से जुड़े ट्यूटोरियल और सुरक्षा से संबंधित सलाह भी उपलब्ध है। 3. Himmat Appयह एप Delhi Police द्वारा महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है। इसमें SOS बटन दबाते ही यूजर की लोकेशन और अन्य जरूरी जानकारी सीधे पुलिस कंट्रोल रूम तक पहुंच जाती है। इस एप की खासियत यह है कि यह जरूरत पड़ने पर ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग भी पुलिस तक भेज सकता है, जिससे आपात स्थिति में तुरंत मदद मिल सके। इन ऐप्स को मोबाइल में रखकर महिलाएं किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता प्राप्त कर सकती हैं और अपनी सुरक्षा को और मजबूत बना सकती हैं।
Women’s Day 2026: रात में कार ड्राइव करते समय महिलाएं अपनाएं ये 5 सेफ्टी टिप्स, सफर होगा सुरक्षित

नई दिल्ली। गाड़ी चलाते समय हर व्यक्ति को ट्रैफिक नियमों और सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी होता है। लेकिन जब महिलाएं ड्राइव कर रही हों, खासकर रात के समय, तो उन्हें अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत होती है। कई महिलाएं देर रात ऑफिस से घर लौटती हैं या अन्य कामों के लिए यात्रा करती हैं, ऐसे में कुछ जरूरी सावधानियां उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती हैं। इस अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर जानते हैं कि महिलाओं को रात में कार चलाते समय किन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। 1. गाड़ी के सभी दरवाजे लॉक रखेंड्राइविंग शुरू करते ही कार के सभी दरवाजों को लॉक कर लेना चाहिए। सिर्फ ड्राइविंग सीट का दरवाजा लॉक करना पर्याप्त नहीं होता। रास्ते में किसी अनजान व्यक्ति को लिफ्ट देने से बचना भी सुरक्षित रहता है। 2. सुनसान रास्तों से बचेंरात के समय शॉर्टकट के चक्कर में सुनसान या कम आवाजाही वाले रास्तों से बचना बेहतर होता है। यदि नेविगेशन का उपयोग कर रहे हैं तो छोटे रास्तों की बजाय मुख्य सड़क या हाईवे का चयन करना अधिक सुरक्षित हो सकता है। 3. कार की स्थिति पहले से जांच लेंड्राइव पर निकलने से पहले वाहन की स्थिति जरूर जांच लें। कार की समय पर सर्विसिंग हो, बैटरी सही हो, टायर में पर्याप्त हवा हो और हेडलाइट समेत सभी जरूरी सिस्टम ठीक से काम कर रहे हों। 4. सेफ्टी टूल्स साथ रखेंकार में कुछ जरूरी सुरक्षा उपकरण रखना फायदेमंद हो सकता है। जैसे पेपर स्प्रे, इलेक्ट्रिक शॉक रॉड या अन्य सेल्फ डिफेंस टूल्स, जो जरूरत पड़ने पर काम आ सकें। 5. फोन और लोकेशन हमेशा एक्टिव रखेंरात में यात्रा करते समय मोबाइल फोन पूरी तरह चार्ज होना चाहिए। अपनी लाइव लोकेशन परिवार या भरोसेमंद व्यक्ति के साथ शेयर करना भी सुरक्षित कदम है। इसके अलावा मोबाइल के डायल पैड पर पुलिस या किसी करीबी का नंबर सबसे ऊपर सेव रखें ताकि आपात स्थिति में तुरंत कॉल किया जा सके। इन छोटी-छोटी सावधानियों को अपनाकर महिलाएं रात में भी ज्यादा सुरक्षित तरीके से ड्राइव कर सकती हैं।
Women’s Day Special: 30 की उम्र के बाद महिलाएं क्या खाएं, स्किन ग्लो और कोलेजन के लिए डाइट टिप्स

नई दिल्ली। हर साल 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। यह दिन केवल महिलाओं की उपलब्धियों का जश्न मनाने के लिए नहीं बल्कि उनकी सेहत के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए भी बेहद खास माना जाता है। अक्सर महिलाएं घर और ऑफिस की जिम्मेदारियों के बीच अपनी सेहत को पीछे छोड़ देती हैं। लेकिन 30 की उम्र के बाद शरीर में कई ऐसे बदलाव शुरू हो जाते हैं जिन पर ध्यान देना बेहद जरूरी होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार 30 की उम्र के बाद महिलाओं के शरीर में कोलेजन का स्तर धीरे धीरे कम होने लगता है। कोलेजन एक महत्वपूर्ण प्रोटीन होता है जो त्वचा को मजबूत, लचीला और चमकदार बनाए रखने में मदद करता है। जब शरीर में इसकी कमी होने लगती है तो त्वचा पर झुर्रियां दिखाई देने लगती हैं, त्वचा ढीली पड़ सकती है और प्राकृतिक ग्लो भी कम हो सकता है। इसी वजह से 30 की उम्र के बाद महिलाओं के लिए सही और संतुलित डाइट लेना बेहद जरूरी हो जाता है। अगर खानपान में जरूरी पोषक तत्व शामिल किए जाएं तो न केवल कोलेजन का स्तर बेहतर बना रहता है बल्कि शरीर भी लंबे समय तक स्वस्थ रहता है। डाइट में सबसे पहले प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करना जरूरी है। क्योंकि कोलेजन खुद एक प्रकार का प्रोटीन है और इसकी पर्याप्त मात्रा शरीर को मिलना बेहद आवश्यक है। इसके लिए महिलाएं अपनी डाइट में पनीर, दही, मूंग दाल, राजमा, चना, सोयाबीन, टोफू और विभिन्न प्रकार के ड्राई फ्रूट्स और नट्स शामिल कर सकती हैं। ये खाद्य पदार्थ शरीर को जरूरी पोषण देने के साथ स्किन और मसल्स को भी मजबूत बनाने में मदद करते हैं। इसके अलावा शरीर के लिए बायोटिन और जिंक भी बेहद जरूरी पोषक तत्व माने जाते हैं। इनकी कमी होने पर त्वचा पर दाग धब्बे दिखने लगते हैं, बाल कमजोर हो सकते हैं और नाखून भी टूटने लगते हैं। इसलिए डाइट में बादाम, कद्दू के बीज, तिल, मशरूम और अंडे की सफेदी जैसे खाद्य पदार्थों को शामिल करना फायदेमंद माना जाता है। ओमेगा 3 फैटी एसिड भी महिलाओं की सेहत के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। यह शरीर में सूजन को कम करने, हड्डियों को मजबूत रखने और जोड़ों के दर्द को कम करने में मदद करता है। ओमेगा 3 की पर्याप्त मात्रा पाने के लिए डाइट में अलसी के बीज, चिया सीड्स, अखरोट और सूरजमुखी के बीज जैसे खाद्य पदार्थों को शामिल किया जा सकता है। विटामिन C भी कोलेजन के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है। अगर शरीर में विटामिन C की कमी हो जाए तो इम्यूनिटी कमजोर हो सकती है और त्वचा भी जल्दी डैमेज होने लगती है। इसलिए महिलाओं को अपनी डाइट में आंवला, संतरा, नींबू, कीवी, स्ट्रॉबेरी और शिमला मिर्च जैसे विटामिन C से भरपूर फूड्स जरूर शामिल करने चाहिए। संतुलित आहार के साथ पर्याप्त पानी पीना, नियमित व्यायाम करना और अच्छी नींद लेना भी महिलाओं की सेहत के लिए उतना ही जरूरी है। सही डाइट और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर महिलाएं 30 की उम्र के बाद भी अपनी त्वचा को स्वस्थ और शरीर को ऊर्जावान बनाए रख सकती हैं। महिला दिवस का संदेश भी यही है कि महिलाएं अपने परिवार की देखभाल के साथ साथ अपनी सेहत को भी उतनी ही प्राथमिकता दें ताकि वे लंबे समय तक स्वस्थ और खुशहाल जीवन जी सकें।
रेगिस्तानी हवाओं से मध्य प्रदेश में बढ़ी गर्मी, तपने लगा मालवा-निमाड़, रतलाम सबसे गर्म

भोपाल। मध्य प्रदेश में मार्च की शुरुआत में ही गर्मी ने अप्रैल जैसा असर दिखाना शुरू कर दिया है। महीने के पहले पखवाड़े में ही तापमान 39 डिग्री के करीब पहुंच गया है। प्रदेश के मालवा-निमाड़ क्षेत्र, यानी इंदौर और उज्जैन संभाग के जिले सबसे ज्यादा गर्म रहे। शनिवार को यहां कई जगह तापमान 38 डिग्री से ऊपर दर्ज किया गया और दिन में ‘लू’ जैसी तपन महसूस हुई। रविवार को रंगपंचमी के दिन भी भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर सहित प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तेज गर्मी रहने की संभावना है। मौसम विभाग के मुताबिक राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों से आने वाली गर्म हवाओं का असर मध्य प्रदेश में महसूस किया जा रहा है। आने वाले दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे धूप और अधिक तीखी हो जाएगी। हवा की दिशा बदलने से बढ़ी गर्मीमौसम वैज्ञानिकों के अनुसार हवा की दिशा उत्तर-पूर्व से बदलकर अब पश्चिम और उत्तर-पश्चिम हो गई है। साथ ही हवा में नमी भी काफी कम है। रेगिस्तानी क्षेत्रों से आने वाली यही गर्म और शुष्क हवाएं प्रदेश में तापमान बढ़ाने का कारण बन रही हैं, जिससे मार्च की शुरुआत में ही गर्मी का असर तेज हो गया है। रतलाम रहा सबसे गर्म शनिवार को प्रदेश में सबसे अधिक तापमान रतलाम में 38.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा धार में 38.5 डिग्री, नर्मदापुरम में 37.6 डिग्री, सागर में 37.2 डिग्री और गुना में 37 डिग्री तापमान रिकॉर्ड हुआ। बड़े शहरों में उज्जैन सबसे गर्म रहा, जहां तापमान 36.5 डिग्री दर्ज किया गया। इंदौर में 36.4 डिग्री, भोपाल में 35.2 डिग्री, ग्वालियर में 35.7 डिग्री और जबलपुर में 34.6 डिग्री तापमान रहा। बदल रहा गर्मी का ट्रेंडप्रदेश में आमतौर पर तेज गर्मी मार्च के दूसरे पखवाड़े में शुरू होती है। पिछले दस वर्षों में भी 15 मार्च के बाद ही गर्मी ज्यादा बढ़ी है, लेकिन इस बार मौसम का ट्रेंड बदला हुआ दिखाई दे रहा है और महीने की शुरुआत में ही तापमान तेजी से बढ़ रहा है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले दो दिनों में प्रदेश का अधिकतम तापमान करीब 4 डिग्री तक बढ़ सकता है। ऐसे में मार्च के पहले ही पखवाड़े में तापमान 40 डिग्री तक पहुंचने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस साल अप्रैल और मई में हीट वेव यानी लू चलने की संभावना है। करीब 15 से 20 दिन तक लू का असर रह सकता है, हालांकि फिलहाल मार्च में लू चलने का अलर्ट नहीं दिया गया है।
नारी सशक्तिकरण में नई मिसाल बना मध्यप्रदेश: स्वास्थ्य, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण की योजनाओं से बदल रही महिलाओं की तस्वीर

भोपाल । मध्यप्रदेश में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में बीते कुछ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने महिलाओं और बालिकाओं के स्वास्थ्य पोषण सुरक्षा संरक्षण और आर्थिक आत्मनिर्भरता को केंद्र में रखकर अनेक योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू किया है। इन योजनाओं के सकारात्मक परिणाम अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगे हैं जिसके चलते मध्यप्रदेश धीरे धीरे नारी सशक्तिकरण के क्षेत्र में देश के लिए एक रोल मॉडल बनकर उभर रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी देश की प्रगति को समाज के चार प्रमुख वर्गों की उन्नति से जोड़ते हुए महिलाओं के सशक्तिकरण को प्राथमिकता देने की बात कही है। इसी दृष्टि से मध्यप्रदेश सरकार ने महिला कल्याण और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को मजबूत करने की रणनीति अपनाई है। प्रदेश में महिलाओं और बच्चों के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से देवी अहिल्या नारी सशक्तिकरण अभियान सहित कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं जिनका लाभ लाखों महिलाएं और बालिकाएं उठा रही हैं। प्रदेश में एकीकृत बाल विकास परियोजनाओं के तहत 453 परियोजनाओं के अंतर्गत 97 हजार 882 आंगनवाड़ी केंद्र स्वीकृत हैं जिनके माध्यम से लगभग 84 लाख हितग्राहियों को सेवाएं दी जा रही हैं। आंगनवाड़ियों में जियो फेंसिंग आधारित ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली लागू की गई है जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है। साथ ही प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है जहां आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी ऑनलाइन प्रणाली से शुरू की गई है। वित्तीय वर्ष 2026 27 में सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 कार्यक्रम के लिए 3 हजार 768 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। पोषण 2.0 के अंतर्गत मातृ एवं शिशु पोषण गंभीर कुपोषित बच्चों के उपचार और निगरानी के लिए पोषण ट्रैकर ऐप के माध्यम से आंगनवाड़ियों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। प्रदेश में फेस मैचिंग प्रणाली के जरिए 94 प्रतिशत हितग्राहियों का सत्यापन किया जा चुका है जो देश में सर्वाधिक है। पूरक पोषण आहार कार्यक्रम के तहत टेक होम राशन और गर्म पका भोजन योजना के माध्यम से 60 लाख से अधिक बच्चों गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को लाभ मिल रहा है। इस वर्ष के बजट में पोषण आहार के लिए 1 हजार 150 करोड़ और पोषण अभियान के लिए 250 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। मुख्यमंत्री बाल आरोग्य संवर्धन कार्यक्रम के माध्यम से वर्ष 2025 में पंजीकृत 7.37 लाख गंभीर कुपोषित बच्चों में से 3.71 लाख बच्चों को सामान्य पोषण स्तर तक लाया गया है। झाबुआ जिले के मोटी आई नवाचार को प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार भी मिल चुका है। प्रदेश में 5 हजार 263 नए आंगनवाड़ी भवनों का निर्माण कार्य जारी है वहीं लगभग 38 हजार 900 आंगनवाड़ी भवनों में बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने की योजना भी प्रस्तावित की गई है। भवन निर्माण और आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए 459 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना प्रदेश की सबसे बड़ी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर योजना बन चुकी है। वर्तमान में 1.25 करोड़ से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह 1 हजार 500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। जून 2023 से फरवरी 2026 तक इस योजना के तहत 52 हजार 305 करोड़ रुपये महिलाओं के खातों में सीधे ट्रांसफर किए जा चुके हैं। वित्तीय वर्ष 2026 27 में इस योजना के लिए 23 हजार 882 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। वहीं लाड़ली लक्ष्मी योजना के अंतर्गत अब तक 52.56 लाख बालिकाओं का पंजीयन हो चुका है जिसके लिए 1 हजार 801 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। महिला सुरक्षा और संरक्षण के क्षेत्र में भी प्रदेश में महत्वपूर्ण पहल की गई है। राज्य में 57 वन स्टॉप सेंटर संचालित हैं जबकि 8 नए केंद्रों को स्वीकृति दी गई है। महिला हेल्पलाइन 181 और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के माध्यम से इस वर्ष 1.43 लाख से अधिक मामलों का निराकरण किया गया है। भोपाल और इंदौर में सखी निवास संचालित हैं तथा 8 नए वर्किंग वूमन हॉस्टल स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा शक्ति सदन शौर्या दल योजना और समेकित बाल संरक्षण योजना के माध्यम से हजारों महिलाओं और बच्चों को संरक्षण और पुनर्वास सहायता प्रदान की जा रही है। महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश महिला वित्त एवं विकास निगम के माध्यम से हजारों स्व सहायता समूहों और महिला उद्यमियों को आर्थिक सहायता और ब्याज अनुदान दिया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026 27 के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग को कुल 32 हजार 730 करोड़ 45 हजार रुपये का बजट आवंटित किया गया है जो महिलाओं और बच्चों के कल्याण के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इन योजनाओं और प्रयासों के चलते मध्यप्रदेश में महिलाएं आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
चावल खाने से नहीं बढ़ता पेट, एक्सपर्ट ने बताया सही तरीका, बस इन 5 आयुर्वेदिक नियमों का रखें ध्यान

नई दिल्ली। भारतीय भोजन में चावल का बहुत खास स्थान है। देश के अधिकांश घरों में लंच और डिनर में चावल जरूर बनाया जाता है। दाल चावल, राजमा चावल या अलग अलग तरह की करी के साथ चावल खाना लोगों को बेहद पसंद होता है। हालांकि कई लोग यह मानते हैं कि चावल खाने से पेट बाहर निकल आता है और वजन तेजी से बढ़ने लगता है। इसी डर की वजह से कई लोग अपनी डाइट से चावल को पूरी तरह हटाने का फैसला कर लेते हैं। लेकिन आयुर्वेद के अनुसार यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि चावल खुद मोटापा नहीं बढ़ाता बल्कि इसे गलत तरीके से खाने या गलत किस्म के चावल चुनने से पाचन पर असर पड़ सकता है और शरीर में अतिरिक्त चर्बी जमा हो सकती है। इसलिए चावल खाने से पहले कुछ जरूरी आयुर्वेदिक नियमों को समझना जरूरी है। आयुर्वेद में चावल की उम्र को बहुत महत्व दिया गया है। आमतौर पर लोग बाजार से नया चावल खरीद कर इस्तेमाल करने लगते हैं। लेकिन आयुर्वेद के अनुसार नया चावल भारी माना जाता है और इसे पचाने में शरीर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। नया चावल कफ बढ़ा सकता है और पाचन को धीमा कर सकता है। जिन लोगों को अक्सर सुस्ती महसूस होती है या जिनका पाचन कमजोर है उन्हें नया चावल खाने से बचना चाहिए। इसके विपरीत एक साल पुराना चावल हल्का और सुपाच्य माना जाता है। पुराने चावल की तासीर ऐसी हो जाती है कि वह पेट पर ज्यादा बोझ नहीं डालता और शरीर को जल्दी ऊर्जा देता है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि संभव हो तो एक साल पुराना चावल ही इस्तेमाल करना चाहिए। चावल बनाने का तरीका भी सेहत पर असर डाल सकता है। आजकल ज्यादातर लोग कुकर में चावल बनाना पसंद करते हैं क्योंकि इससे समय की बचत होती है। लेकिन आयुर्वेद में कुकर में बने चावल को उतना अच्छा नहीं माना गया है। विशेषज्ञों के अनुसार चावल को खुले बर्तन में ज्यादा पानी के साथ पकाना चाहिए और पकने के बाद उसका माड़ यानी अतिरिक्त पानी निकाल देना चाहिए। इससे चावल हल्का और पचने में आसान हो जाता है। इसके अलावा आयुर्वेद में शरीर की प्रकृति के अनुसार भी खानपान को महत्व दिया गया है। हर व्यक्ति की प्रकृति अलग होती है और उसी के अनुसार चावल खाने का तरीका भी अलग हो सकता है। जिन लोगों की वात प्रकृति होती है उन्हें अक्सर जोड़ों में दर्द, गैस या त्वचा में रूखापन जैसी समस्याएं रहती हैं। ऐसे लोगों को चावल खाते समय उसमें थोड़ा सा घी मिलाकर खाना चाहिए। इससे पाचन बेहतर होता है और शरीर को संतुलन मिलता है। पित्त प्रकृति वाले लोगों को अक्सर एसिडिटी, सीने में जलन या ज्यादा गर्मी महसूस होती है। ऐसे लोगों के लिए दूध के साथ चावल या चावल की खीर खाना फायदेमंद माना जाता है क्योंकि यह शरीर की गर्मी को संतुलित करने में मदद करता है। वहीं कफ प्रकृति वाले लोगों का वजन जल्दी बढ़ने की संभावना ज्यादा होती है और उन्हें सर्दी खांसी की समस्या भी हो सकती है। ऐसे लोगों को हमेशा पुराना चावल खाना चाहिए और चावल का माड़ निकाल कर ही सेवन करना चाहिए। इस तरह सही प्रकार का चावल चुनकर और सही तरीके से पकाकर खाने से न केवल पाचन बेहतर रहता है बल्कि वजन बढ़ने का खतरा भी कम हो सकता है। इसलिए चावल को पूरी तरह छोड़ने के बजाय उसे सही नियमों के साथ खाना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है।
रंगपंचमी पर सबसे पहले महाकाल को चढ़ा रंग, भस्म आरती में केसर जल अर्पित, शिव परिवार को लगाया हर्बल गुलाल

उज्जैन। रंगपंचमी के अवसर पर रविवार तड़के विश्व प्रसिद्ध उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में परंपरा के अनुसार भगवान महाकाल को सबसे पहले रंग अर्पित कर पर्व की शुरुआत की गई। सुबह 4 बजे मंदिर के पट खुलने के बाद भस्म आरती के दौरान भगवान महाकालेश्वर का विशेष पूजन किया गया और उन्हें एक लोटा केसर युक्त जल अर्पित किया गया। इसके बाद भगवान का त्रिपुंड, मुंडमाल और रजत आभूषणों से राजा स्वरूप में भव्य श्रृंगार किया गया। शिव परिवार को लगाया हर्बल रंगरंगपंचमी के मौके पर भस्म आरती के साथ विशेष पूजा-अर्चना की गई। पुजारियों ने गर्भगृह में विराजित सभी देवी-देवताओं का पूजन कर सबसे पहले भगवान महाकाल को रंग अर्पित किया। इस दौरान भगवान महाकाल के साथ माता पार्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय और नंदी को भी हर्बल रंग चढ़ाया गया। पूजन के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर मंत्रोच्चार के साथ हरिओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद भगवान का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। कपूर आरती के बाद भगवान के मस्तक पर भांग, चंदन और त्रिपुंड लगाकर विशेष श्रृंगार किया गया। श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित की गई। इसके बाद भगवान को रजत मुकुट, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की मालाएं अर्पित कर फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया। सुरक्षा के चलते रंग लाने पर रोकदो साल पहले धुलेंडी के दिन गर्भगृह में आग लगने की घटना को देखते हुए इस बार भी मंदिर में श्रद्धालुओं, पंडे-पुजारियों को रंग लाने की अनुमति नहीं दी गई। दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को सख्त जांच के बाद ही मंदिर में प्रवेश दिया गया। पहले हर साल श्रद्धालु रंग-गुलाल लेकर मंदिर पहुंचते थे, जिससे पूरा माहौल ब्रज की होली जैसा दिखाई देता था। इस बार भगवान को अर्पित किया जाने वाला केसर युक्त जल भी मंदिर की कोठार शाखा से ही पुजारियों को उपलब्ध कराया गया। मंदिर प्रशासन ने गर्भगृह, नंदी मंडपम, गणेश मंडपम, कार्तिकेय मंडपम और पूरे मंदिर परिसर में रंग या गुलाल ले जाने, उड़ाने या लगाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया है। साथ ही किसी भी उपकरण से रंग उड़ाने की भी अनुमति नहीं दी गई है। शाम की आरती में भी चढ़ेगा रंगसंध्या आरती के दौरान भगवान महाकाल को एक लोटा केसर युक्त जल और लगभग 500 ग्राम गुलाल अर्पित किया जाएगा। यह सामग्री मंदिर की कोठार शाखा द्वारा भस्म आरती और शासकीय पुजारियों को उपलब्ध कराई जाएगी।
Women's Day: महिलाओं के सम्मान का दिन…. हाउसमेकर हो कामकाजी, जानें अपने ये 5 अधिकार

नई दिल्ली। हर साल की तरह आज भी 8 मार्च को पूरे विश्व में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women’s Day) मनाया जा रहा है। ये दिन हर महिला को सम्मान (Women Respect) देने के लिए होता है, भले ही वो हाउसमेकर (Housemaker) हो, या फिर कामकाजी महिला (Working Woman) हों। महिला दिवस केवल उत्सव और सम्मान का दिन नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के अधिकारों, सुरक्षा और सशक्तिकरण के महत्व को समझने का अवसर भी है। सही जानकारी और जागरूकता ही महिलाओं को अपने जीवन में स्वतंत्र निर्णय लेने, समान अवसर पाने और समाज में सम्मान सुनिश्चित करने में मदद करती है। आज हम आपको पांच ऐसे अहम अधिकारों के बारे में बताएंगे, जिनका हर महिला को पता होना चाहिए। ये अधिकार न केवल उन्हें सशक्त बनाते हैं, बल्कि घर और समाज में उनकी सुरक्षा और सम्मान भी सुनिश्चित करते हैं। महिला दिवस पर इन अधिकारों को जानना और अपनाना हर महिला के लिए एक जरूरी कदम है। 1. शिक्षा का अधिकारभारतीय संविधान की अनुच्छेद 15(1) और 15(3) महिलाओं के खिलाफ भेदभाव को रोकते हैं और शिक्षा के समान अवसर सुनिश्चित करते हैं। ऐसे में कोई भी परिवार ये नहीं कह सकता कि वो सिर्फ अपने घर के लड़कों को पढ़ने भेजेगा, और लड़कियों को नहींं। 2. स्वास्थ्य का अधिकारभारतीय कानून के तहत महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं मिलना अनिवार्य है। मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 सुरक्षित प्रसव और मातृत्व अवकाश सुनिश्चित करता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति और प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं की स्वास्थ्य सुरक्षा को कानूनी मान्यता दी गई है। 3. समान वेतन और रोजगार का अधिकारभारतीय संविधान का अनुच्छेद 39(a) और 39(d) समान वेतन और काम के समान अवसर सुनिश्चित करता है। इसके अलावा भेदभाव उन्मूलन अधिनियम 1976 के तहत पुरुष और महिला कर्मचारियों को समान काम के लिए समान वेतन देना अनिवार्य है। 4. सुरक्षा का अधिकारभारतीय संविधान की अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देती है। इसके अलावा महिला सुरक्षा कानून जैसे घरेलू हिंसा अधिनियम 2005, शोषण रोकथाम अधिनियम और धारा 498A महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। 5. संपत्ति और आर्थिक स्वतंत्रता का अधिकारभारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 2005 के तहत बेटियों को पिता की संपत्ति में बराबर हिस्सा मिलता है। इसके अलावा अनुच्छेद 15 और 19 महिलाओं को आर्थिक निर्णय और व्यापार करने का अधिकार भी सुनिश्चित करते हैं। महिलाएं अपने बैंक खाता और निवेश पर स्वतंत्र निर्णय ले सकती हैं।
इंदौर में आज पारंपरिक गेर में मिसाइलों से उड़ेगा रंग, टेसू के फूलों से बने गुलाल से सजेगा राजवाड़ा

इंदौर। मालवा की सांस्कृतिक राजधानी इंदौर में आज रविवार को रंगों का सबसे बड़ा और भव्य उत्सव देखने को मिलेगा। पारंपरिक गेर के साथ पूरा पश्चिम क्षेत्र रंगों से सराबोर हो जाएगा। लाखों लोग इस अनूठे रंगोत्सव में शामिल होकर गुलाल और रंगों की बौछारों का आनंद लेंगे। गेर के साथ ही शहर में फागयात्रा भी निकलेगी, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल होंगी। आयोजकों ने इस भव्य आयोजन के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। कार्यक्रम के दौरान हजारों किलो गुलाल उड़ाया जाएगा, जिससे शहर का माहौल पूरी तरह रंगमय हो जाएगा।70 साल पुरानी परंपरायह परंपरागत गेर राजवाड़ा से निकाली जाती है और इसका इतिहास करीब सात दशक पुराना है। शुरुआत में बड़े कड़ावों में रंग भरकर लोगों को भिगोने की परंपरा थी। समय के साथ यह आयोजन बैलगाड़ियों और ट्रैक्टरों से होते हुए डीजे और आधुनिक तकनीक तक पहुंच गया। अब गेर में रंग बरसाने के लिए विशेष मिसाइल तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिससे रंग और पानी करीब 200 फीट तक हवा में उछाला जाएगा।लाखों लोग बनेंगे रंगोत्सव के साक्षीपिछले तीन वर्षों से गेर में शामिल होने वाले लोगों की संख्या 5 लाख से अधिक रही है। यही वजह है कि यह आयोजन देश के सबसे बड़े रंगोत्सवों में गिना जाने लगा है। इस बार भी लाखों लीटर पानी और हजारों किलो गुलाल उड़ाने की तैयारी की गई है। राजवाड़ा और आसपास के 5 से 6 किलोमीटर क्षेत्र में रंग, गुलाल और पानी की बौछारें देखने को मिलेंगी।टेसू के फूलों से बने गुलाल से बनेगा तिरंगाइस आयोजन की खास बात यह है कि करीब 8 हजार किलो टेसू के फूलों से तैयार गुलाल का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे राजवाड़ा पर तिरंगा बनाया जाएगा, जो उत्सव का विशेष आकर्षण होगा।ढोल-ताशे, झांकियां और सांस्कृतिक प्रस्तुतियांगेर में बैंड, ढोल-ताशे, आकर्षक झांकियां और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी देखने को मिलेंगी। गेर और फागयात्रा अपने-अपने तय मार्गों से निकलकर शहरवासियों को रंगों के इस महासागर में डुबो देंगी।