पीएम सूर्य घर योजना को मिली रफ्तार: देश में 25 लाख से ज्यादा रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित

नई दिल्ली । देश में स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना तेजी से आगे बढ़ रही है। सरकार ने मंगलवार को संसद में जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना के तहत 5 मार्च 2026 तक देशभर में 25 लाख से अधिक घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं। इस तरह यह योजना देश में सौर ऊर्जा के विस्तार और हरित ऊर्जा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बनती जा रही है। राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्रीय ऊर्जा और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने बताया कि राष्ट्रीय पोर्टल पर अब तक 63,26,125 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 25,02,217 घरों में सफलतापूर्वक रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं। इससे साफ है कि लोग इस योजना के प्रति तेजी से रुचि दिखा रहे हैं और अपने घरों में सौर ऊर्जा अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं। सरकार के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में इस योजना के तहत अब तक 14,585.29 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं। वहीं वित्त वर्ष 2024-25 में इस योजना पर 7,822.92 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। इससे स्पष्ट है कि सरकार इस योजना के विस्तार पर लगातार निवेश बढ़ा रही है ताकि अधिक से अधिक घरों तक सौर ऊर्जा पहुंचाई जा सके। दरअसल प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को वर्ष 2024 में शुरू किया गया था। यह एक डिमांड-ड्रिवन योजना है यानी इसमें वही उपभोक्ता शामिल होते हैं जो स्वयं आवेदन करते हैं। देश के ऐसे सभी घरेलू उपभोक्ता जिनके पास स्थानीय बिजली वितरण कंपनी यानी डिस्कॉम से जुड़ा बिजली कनेक्शन है वे राष्ट्रीय पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर अपने घर की छत पर सोलर सिस्टम लगवा सकते हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य लोगों को सस्ती और स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराना है साथ ही पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करना भी है। सरकार का अनुमान है कि यदि देश में एक करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित हो जाते हैं तो इससे लगभग 1000 अरब यूनिट नवीकरणीय बिजली का उत्पादन संभव हो सकेगा। इतना ही नहीं इन सोलर सिस्टम का औसत जीवनकाल करीब 25 साल माना जाता है और इस अवधि में लगभग 720 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी लाई जा सकती है। इससे पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी। सरकार ने यह भी बताया कि वर्ष 2025 के अंत तक इस योजना के क्रियान्वयन में गुजरात महाराष्ट्र उत्तर प्रदेश केरल और राजस्थान जैसे राज्य सबसे आगे रहे हैं। इन राज्यों में बड़ी संख्या में लोगों ने अपने घरों की छतों पर सोलर पैनल लगवाए हैं। एक अन्य सवाल के जवाब में मंत्री ने बताया कि 31 दिसंबर 2025 तक देश में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता बढ़कर 266.78 गीगावाट तक पहुंच चुकी है। इसमें 258 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा शामिल है जिसमें सौर पवन जैव ऊर्जा और जल विद्युत जैसी ऊर्जा शामिल हैं। इसके अलावा 8.78 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता भी देश के ऊर्जा उत्पादन में योगदान दे रही है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को भी लागू किया जा रहा है। इस मिशन का उद्देश्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन उपयोग और निर्यात के क्षेत्र में वैश्विक केंद्र बनाना है।
मदुरै एयरपोर्ट हुआ इंटरनेशनल, केंद्र ने बढ़ाई तमिलनाडु की ग्लोबल कनेक्टिविटी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने तमिलनाडु के मदुरै हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा घोषित कर दिया। मंत्रिमंडल के बयान में कहा गया कि मदुरै, जो मंदिरों के शहर के रूप में प्रसिद्ध है, का यह हवाई अड्डा दक्षिणी तमिलनाडु का प्रमुख प्रवेश द्वार है। यह न केवल पर्यटन और तीर्थयात्रा को बढ़ावा देगा, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। मंत्रिमंडल ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय दर्जा मिलने से क्षेत्रीय संपर्क बढ़ेगा, व्यापार को गति मिलेगी और अंतरराष्ट्रीय तीर्थयात्री एवं व्यवसायों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी। मदुरै हवाई अड्डे की क्षमता शहर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के अनुरूप है, जिससे यह दक्षिण भारत में यात्रा और पर्यटन के लिए एक अहम केंद्र बन जाएगा। 2047 तक 350 हवाई अड्डों का लक्ष्य और विमानन क्षेत्र में नई दिशाकेंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने कहा कि भारत में वर्तमान में 164 हवाई अड्डे संचालित हैं और सरकार का लक्ष्य 2047 तक लगभग 200 और हवाई अड्डे जोड़ना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनौती केवल हवाई अड्डे बनाने की नहीं, बल्कि “भारत में अधिक विमान कैसे लाए जाएं” की है। नायडू के अनुसार, विमान निर्माण प्रणाली को तैयार करके भारत नागरिक उड्डयन क्षेत्र में अगला बड़ा कदम उठाने के लिए तैयार है। यह प्रणाली न केवल अगले 10-20 वर्षों में बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करेगी, बल्कि भारत को वैश्विक विमान निर्माण और निर्यात केंद्र बनाने में भी मदद करेगी। पिछले दस वर्षों में भारत में हवाई अड्डों की संख्या, यात्री संख्या और विमान बेड़े में दोगुनी वृद्धि हुई है। मंत्री ने इसे प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और नागरिक उड्डयन सुधारों का परिणाम बताया। विशेष रूप से उड़ान योजना ने देश में विमानन क्षेत्र की गति और पहुँच बढ़ाई है। नायडू ने यह भी कहा कि नागर विमानन मंत्रालय विमानन क्षेत्र में निवेश और निर्माण के लिए भारत के साथ साझेदारी करने वाले सभी लोगों को आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे न केवल हवाई परिवहन सुविधा बढ़ेगी, बल्कि विमानन उद्योग में रोजगार और आर्थिक अवसर भी बढ़ेंगे। मदुरै एयरपोर्ट के अंतरराष्ट्रीय दर्जे का महत्वमदुरै एयरपोर्ट का अंतरराष्ट्रीय दर्जा मिलने से दक्षिण भारत में पर्यटन, व्यापार और धार्मिक यात्रा को नया impulso मिलेगा। यह कदम न केवल यात्रियों के लिए सुविधाजनक है, बल्कि स्थानीय व्यवसायों और पर्यटन उद्योग के लिए भी आर्थिक विकास का अवसर लेकर आएगा। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के आने से मदुरै और आसपास के क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
सोलर ऊर्जा में बड़ी छलांग, पीएम सूर्य घर योजना के तहत 25 लाख से अधिक छतों पर सोलर सिस्टम

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने देशभर में जबरदस्त रफ्तार पकड़ ली है। सरकार ने मंगलवार को संसद को बताया कि 5 मार्च 2026 तक कुल 25,02,217 घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं। योजना के तहत वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक 14,585.29 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं, जबकि 2024-25 में इस पर 7,822.92 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। ऊर्जा एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने राज्यसभा में बताया कि योजना के लिए राष्ट्रीय पोर्टल पर अब तक 63,26,125 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 25 लाख से अधिक घरों में सोलर सिस्टम स्थापित किए गए हैं। यह योजना 2024 में शुरू की गई थी और यह डिमांड-ड्रिवन योजना है। इसके तहत देश के सभी घरेलू उपभोक्ता, जिनके पास स्थानीय डिस्कॉम से बिजली कनेक्शन है, राष्ट्रीय पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर अपनी छत पर सोलर सिस्टम लगवा सकते हैं। सौर ऊर्जा उत्पादन और पर्यावरणीय लाभसरकार का अनुमान है कि अगर एक करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जाएँ, तो इससे लगभग 1000 अरब यूनिट नवीकरणीय बिजली का उत्पादन संभव होगा। इसके साथ ही इन सिस्टम के 25 साल के जीवनकाल में लगभग 720 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी लाई जा सकती है। इस पहल से ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। 2025 के अंत तक योजना को लागू करने में गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, केरल और राजस्थान सबसे आगे रहे हैं। ये राज्य सौर ऊर्जा के उत्पादन और घरों में सोलर सिस्टम के विस्तार में शीर्ष पर हैं। नॉन-फॉसिल फ्यूल और ग्रीन हाइड्रोजन में भारत की प्रगतिमंत्री ने बताया कि 31 दिसंबर 2025 तक देश में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता 266.78 गीगावाट तक पहुंच चुकी है। इसमें 258 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा शामिल है, जिसमें 135.81 गीगावाट सौर ऊर्जा, 54.51 गीगावाट पवन ऊर्जा, 11.61 गीगावाट जैव ऊर्जा, 5.16 गीगावाट लघु जल विद्युत और 50.91 गीगावाट वृहद जल विद्युत शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 8.78 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता भी शामिल है। सरकार ने नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NGHM) को भी लागू किया है। इसका उद्देश्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है। यह मिशन देश में स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक बड़ा कदम है और भविष्य में हरित ऊर्जा समाधान के लिए भारत की स्थिति को मजबूत करेगा।
शीतला अष्टमी 2026 कल: भूलकर भी न करें ये गलतियां, मां शीतला की कृपा से मिलती है रोगों से रक्षा

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में चैत्र माह की शीतला अष्टमी का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व माना जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से मां शीतला की पूजा के लिए समर्पित होता है जिन्हें रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। साल 2026 में शीतला अष्टमी का पर्व 11 मार्च बुधवार को मनाया जाएगा। इस दिन श्रद्धालु मां शीतला की पूजा अर्चना कर परिवार के स्वास्थ्य सुख और रोगों से मुक्ति की कामना करते हैं। मान्यता है कि मौसम बदलने के समय कई प्रकार की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है ऐसे में मां शीतला की पूजा करने से परिवार को रोगों से सुरक्षा और आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है। शीतला अष्टमी से एक दिन पहले शीतला सप्तमी मनाई जाती है। इस दिन घरों में अलग अलग प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं। परंपरा के अनुसार दाल भात पूरी दही लस्सी और हरी सब्जियां जैसे कई व्यंजन तैयार किए जाते हैं। खास बात यह है कि इन सभी पकवानों को अगले दिन यानी शीतला अष्टमी के दिन ठंडा और बासी रूप में खाया जाता है। इस दिन घर में चूल्हा या गैस नहीं जलाया जाता। धार्मिक मान्यता के अनुसार ठंडा और बासी भोजन मां शीतला को प्रिय होता है और इससे शरीर को ठंडक भी मिलती है। इसलिए अष्टमी के दिन सबसे पहले इन व्यंजनों का भोग मां शीतला को लगाया जाता है और उसके बाद परिवार के लोग प्रसाद के रूप में इसे ग्रहण करते हैं। शीतला अष्टमी के दिन कुछ विशेष नियमों का पालन करना भी जरूरी माना गया है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और उसके बाद मां शीतला के मंदिर जाकर दर्शन करने चाहिए। पूजा के दौरान मां शीतला को हल्दी दही और बाजरे का भोग लगाया जाता है। कई स्थानों पर नीम के पत्तों का भी विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार नीम स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है और यह कई रोगों से बचाने में सहायक होता है। इसलिए पूजा के दौरान नीम की पत्तियां चढ़ाने की भी परंपरा है। धार्मिक दृष्टि से यह पर्व केवल पूजा अर्चना तक सीमित नहीं है बल्कि यह हमें स्वास्थ्य और स्वच्छता का संदेश भी देता है। मान्यता है कि शीतला अष्टमी के दिन आखिरी बार बासी भोजन किया जाता है और इसके बाद लंबे समय तक बासी भोजन करने से बचना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि अधिक समय तक बासी भोजन करने से स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। यह पर्व हमें मौसम बदलने के समय साफ सफाई संतुलित भोजन और स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की सीख भी देता है। इसके अलावा शीतला अष्टमी के दिन घर में पूजा करने के साथ साथ शीतला माता के मंदिर जाकर दर्शन करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। कई जगहों पर इस दिन भगवान शिव की पूजा करने का भी विधान बताया गया है। मान्यता है कि सच्चे मन और श्रद्धा से की गई पूजा से मां शीतला प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को रोगों से रक्षा का आशीर्वाद देती हैं। यही कारण है कि देश के कई हिस्सों में यह पर्व बड़ी आस्था और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
जल जीवन मिशन का विस्तार, केंद्र ने 8.69 लाख करोड़ रुपए का बजट मंजूर किया

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन (JJM) को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने और इसके स्वरूप में बदलाव करने का प्रस्ताव मंजूर किया। अब यह मिशन केवल इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर तक साफ़ और सुरक्षित पेयजल पहुंचाने पर जोर देगा। सरकार ने इस योजना का कुल बजट बढ़ाकर 8.69 लाख करोड़ रुपए कर दिया है, जिसमें केंद्र की हिस्सेदारी 3.59 लाख करोड़ रुपए होगी, जो 2019-20 में स्वीकृत 2.08 लाख करोड़ रुपए से 1.51 लाख करोड़ अधिक है। डिजिटल मैपिंग और ग्राम स्तर पर जवाबदेहीजल जीवन मिशन 2.0 के तहत राष्ट्रीय डिजिटल फ्रेमवर्क ‘सुजलम भारत’ लागू किया जाएगा। इसके अंतर्गत हर गांव को एक यूनिक ‘सुजल गांव’ या सर्विस एरिया आईडी दी जाएगी, जिससे पानी के स्रोत से लेकर घर तक की पूरी आपूर्ति प्रणाली को डिजिटल रूप से मैप किया जाएगा। ग्राम पंचायत (जीपी) और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (VWSC) को योजना के क्रियान्वयन और औपचारिक हस्तांतरण में शामिल किया जाएगा, जिसे ‘जल अर्पण’ प्रक्रिया कहा गया है। किसी भी ग्राम पंचायत को ‘हर घर जल’ घोषित करने से पहले यह प्रमाणित करना होगा कि गांव में पानी की आपूर्ति, संचालन और रखरखाव की पर्याप्त व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा की गई है। सरकार की योजना है कि हर साल ‘जल उत्सव’ आयोजित किया जाएगा, जिसमें गांव के लोग मिलकर जल व्यवस्था की समीक्षा और रखरखाव करेंगे। यह समुदाय की भागीदारी और स्वामित्व सुनिश्चित करने का अहम हिस्सा है। मिशन के असर और सामाजिक लाभसाल 2019 में मिशन की शुरुआत के समय केवल 3.23 करोड़ ग्रामीण घरों (करीब 17%) में नल से पानी की सुविधा थी। अब तक 12.56 करोड़ नए ग्रामीण घरों को नल का पानी उपलब्ध कराया जा चुका है। वर्तमान में देश के 19.36 करोड़ ग्रामीण घरों में लगभग 15.80 करोड़ घरों (81.61%) में नल से जल कनेक्शन पहुंच चुका है। सरकार के अनुसार, जल जीवन मिशन केवल पानी की उपलब्धता तक सीमित नहीं रहा। एसबीआई रिसर्च के अनुसार, योजना के कारण लगभग 9 करोड़ महिलाओं को रोज पानी लाने की मेहनत से राहत मिली है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुमान के मुताबिक, इससे महिलाओं के रोजाना श्रम में लगभग 5.5 करोड़ घंटे की बचत हो रही है, और डायरिया से होने वाली लगभग 4 लाख मौतों को रोका जा सकता है। नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर माइकल क्रेमर के अनुसार, पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में लगभग 30% तक कमी संभव है, जिससे हर साल करीब 1.36 लाख बच्चों की जान बचाई जा सकेगी। आईआईएम बेंगलुरु और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के अध्ययन के अनुसार, मिशन के जरिए 59.9 लाख प्रत्यक्ष और 2.2 करोड़ अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। सरकार का लक्ष्य है कि जल जीवन मिशन 2.0 के तहत दिसंबर 2028 तक देश के सभी 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल का पानी उपलब्ध कराया जाए और सभी ग्राम पंचायतों को ‘हर घर जल’ प्रमाणित किया जाए। इसे नागरिक-केंद्रित सेवा मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में चौबीसों घंटे सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो। साथ ही केंद्र सरकार विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के साथ मिलकर ग्रामीण जल आपूर्ति ढांचे के दीर्घकालिक संचालन, रखरखाव और जल स्रोत संरक्षण के लिए समन्वित रणनीति भी लागू करेगी।
सरकार का बड़ा फैसला, रेलवे विकास के लिए 765 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को हरी झंडी

नई दिल्ली। भारतीय रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीक को आधुनिक बनाने और संचालन को सुचारू बनाने के लिए केंद्र सरकार ने 765 करोड़ रुपए की कई परियोजनाओं को मंजूरी दी है। रेल मंत्रालय के अनुसार, इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य लाइन क्षमता बढ़ाना, माल और यात्री ट्रेनों की गति में सुधार करना और नेटवर्क के महत्वपूर्ण हिस्सों में आधुनिक संचार प्रणाली विकसित करना है। इनमें दो व्यस्त कॉरिडोर पर इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम का अपग्रेड और वेस्टर्न रेलवे के वडोदरा एवं मुंबई सेंट्रल डिवीजनों में ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क का विस्तार शामिल है। केंद्र सरकार ने रेलवे संचालन, मालगाड़ी क्षमता, यात्री ट्रेनों की रफ्तार और सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए 765 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी दी। इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन अपग्रेड और ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के विस्तार से भारतीय रेलवे का इंफ्रास्ट्रक्चर आधुनिक और भरोसेमंद होगा। विशेष रूप से, ईस्ट कोस्ट रेलवे के दुव्वाडा-विशाखापत्तनम- विजयनगरम सेक्शन में 106 किलोमीटर लंबे रूट पर इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम को अपग्रेड करने के लिए 318.07 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है। मौजूदा 1×25 केवी सिस्टम को 2×25 केवी सिस्टम में बदला जाएगा, जिससे मालगाड़ियों की क्षमता बढ़ेगी, ट्रेनों की रफ्तार में सुधार होगा और संचालन अधिक भरोसेमंद बनेगा। रेल मंत्रालय ने बताया कि यह परियोजना रेलवे बजट 2024-25 में शामिल राष्ट्रीय कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पूरे भारत में ट्रैक्शन सिस्टम को आधुनिक बनाना है। तकनीकी उन्नयन और सुरक्षा सुधार में बड़ा कदमसाउथ सेंट्रल रेलवे के गुंटकल डिवीजन के अंतर्गत कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में स्थित रायचूर–गुंटकल सेक्शन में भी इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम को अपग्रेड करने के लिए 259.39 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है। इस रूट को भी 1×25 केवी से 2×25 केवी सिस्टम में अपग्रेड किया जाएगा। यह मुंबई–चेन्नई कॉरिडोर का हिस्सा है और इसके सुधार से मालगाड़ियों की आवाजाही आसान होगी, यात्री ट्रेनों की गति बढ़ेगी और वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी आधुनिक ट्रेनों के संचालन में भी मदद मिलेगी। इसी के साथ, वेस्टर्न रेलवे के वडोदरा और मुंबई सेंट्रल डिवीजनों में 187.88 करोड़ रुपए की परियोजना के तहत 4×48 कोर ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क स्थापित किया जाएगा। लगभग 1,000 किलोमीटर क्षेत्र में बिछाई जाने वाली इस फाइबर केबल से एलटीई आधारित ‘कवच’ प्रणाली लागू करने में मदद मिलेगी। यह भारत में विकसित स्वदेशी ट्रेन टक्कर रोकने वाली सुरक्षा प्रणाली है, जो रेलवे नेटवर्क पर सुरक्षा और संचालन दोनों में सुधार करेगी। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से न केवल माल और यात्री ट्रेनों की गति बढ़ेगी, बल्कि रेलवे संचालन अधिक भरोसेमंद और सुरक्षित बन जाएगा। आधुनिक संचार नेटवर्क और उन्नत ट्रैक्शन सिस्टम के माध्यम से भारत की रेलवे संरचना को भविष्य के लिए और मजबूत बनाया जा रहा है।
नोटों की चिंता खत्म! सरकार का दावा, 10, 20 और 50 रुपए के नोट उपलब्ध हैं पर्याप्त

नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने मंगलवार को राज्यसभा में कहा कि देश में 10, 20 और 50 रुपए के नोटों की कोई कमी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार कम मूल्य के नोट परंपरागत रूप से एटीएम के माध्यम से नहीं दिए जाते रहे हैं। मंत्री ने सदन को यह भी बताया कि कम मूल्यवर्ग के नोटों को जनता तक पहुंचाने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है, जिसके तहत छोटे मूल्य के नोट वितरकों के माध्यम से नोट वितरित किए जा रहे हैं। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष (26 फरवरी तक) में 10 रुपए के 439.40 करोड़, 20 रुपए के 193.70 करोड़ और 50 रुपए के 130.30 करोड़ नोट केंद्रीय बैंक द्वारा आपूर्ति किए गए। तुलना में पिछले वित्त वर्ष 2025 में 10 रुपए के 180 करोड़, 20 रुपए के 150 करोड़ और 50 रुपए के 300 करोड़ नोट वितरित किए गए थे। यह स्पष्ट करता है कि कम मूल्य के नोट लगातार आम जनता और व्यापारिक लेनदेन की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। आरबीआई की भूमिका और डिजिटल भुगतान का बढ़ता महत्वभारतीय रिज़र्व बैंक लगातार विभिन्न मूल्यवर्ग के नोटों की आवश्यकता का आकलन करता है और सरकार को नोटों के मिश्रण की सलाह देता है। मंत्री ने बताया कि कम मूल्यवर्ग के नोटों की मांग को नोटों और सिक्कों के मिश्रण से पूरा किया जाता है। इसके अलावा, डिजिटल भुगतान का महत्व भी लगातार बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 (31 दिसंबर, 2025 तक) में एनपीसीआई की रिपोर्ट के अनुसार, रुपे केसीसी कार्ड के माध्यम से कुल 3.72 लाख डिजिटल लेन-देन हुए, जिनका मूल्य 111.17 करोड़ रुपए था। केंद्र सरकार के अनुसार, केसीसी कार्ड के तहत सभी पात्र किसानों को ऋण सीमा उनकी फसलों, खेती योग्य क्षेत्र और वित्तपोषण आवश्यकताओं के आधार पर तय की जाती है। डिजिटल माध्यम के जरिए छोटे मूल्य के लेन-देन भी सुनिश्चित किए जा रहे हैं, जिससे नकदी पर निर्भरता कम हो रही है। पंकज चौधरी ने सदन में स्पष्ट किया कि नोटों की पर्याप्त आपूर्ति और डिजिटल भुगतान दोनों ही मिलकर देश में लेन-देन की निरंतरता और पारदर्शिता बनाए रखने में मदद कर रहे हैं।
VIJAYPUR SEAT CONTRONVERSY: विजयपुर विधायक मामले पर सियासत तेज: कांग्रेस ने घेरा, कांग्रेस बोली- सुप्रीम कोर्ट जाएंगे, बीजेपी ने दिया जवाब

HIGHLIGHTS: विजयपुर विधायक के निर्वाचन को शून्य घोषित करने पर सियासत तेज कांग्रेस ने कहा- फैसले को सुप्रीम कोर्ट में देंगे चुनौती उमंग सिंघार ने सूचना आयुक्तों की नियुक्ति में देरी पर सरकार को घेरा गैस सिलेंडर और महंगाई को लेकर भी उठाए सवाल भाजपा ने कहा- कांग्रेस को अदालत के फैसले का सम्मान करना चाहिए VIJAYPUR SEAT CONTRONVERSY: श्योपुर। मध्य प्रदेश में जीतू पटवारी और उमंग सिंगर ने विजयपुर विधायक के निर्वाचन को शून्य घोषित किए जाने के फैसले को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। बता दें कि कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। जीतू पटवारी ने कहा कि कांग्रेस न्यायपालिका का सम्मान करती है, लेकिन पार्टी को भरोसा है कि सर्वोच्च न्यायालय में न्याय मिलेगा।साथ ही उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि उसे यह स्वीकार नहीं हो रहा कि एक आदिवासी नेता चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंच गया। Madhya Pradesh Cabinet decision: मध्यप्रदेश कैबिनेट के बड़े फैसले: 33,240 करोड़ की योजनाओं को मंजूरी, मुख्यमंत्री यंग इंटर्न्स प्रोग्राम शुरू होगा निर्मला सप्रे के मामले का भी उठाया मुद्दा पटवारी ने विधायक निर्मला सप्रे के मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा में हिम्मत है तो उस मामले में भी निर्णय कराकर दिखाए। आदिवासी विधायक श्री मुकेश मल्होत्रा जी सामान्य सीट से जीतकर आते हैं तो भाजपा को यह बिल्कुल नागवार गुजरता है। हम आज ही माननीय सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगे और क़ानूनी रूप से कांग्रेस का विधायक बनवाएँगे। pic.twitter.com/JGiJVAybxO — Jitendra (Jitu) Patwari (@jitupatwari) March 10, 2026 सूचना आयुक्तों की नियुक्ति में देरी पर सवाल वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सूचना आयोग में खाली पदों को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति लंबे समय से लंबित है और सरकार इस मामले में बेहद धीमी गति से काम कर रही है। सिंघार ने कहा कि इस संबंध में उनकी मुख्यमंत्री से बातचीत हुई है और जल्द दो सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की जानी चाहिए। BHIND CAR ACCIDENT: भिंड में NH-719 पर भीषण टक्कर: लग्जरी कार का एयरबैग बचा चालक की जान, सभी यात्री सुरक्षित महंगाई और गैस सिलेंडर पर भी सरकार को घेरा उमंग सिंघार ने गैस सिलेंडर की कमी और बढ़ती महंगाई को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि सरकार हर मुद्दे पर देर से निर्णय लेती है और जनता को राहत देने के बजाय केवल अपना खजाना भरने में लगी है। Covid vaccine compensation: सुप्रीम कोर्ट ने कोविड वैक्सीन साइड इफेक्ट्स के लिए मुआवजा देने का दिया आदेश: नो-फॉल्ट पॉलिसी लागू, एक्सपर्ट पैनल की जरूरत नहीं भाजपा ने दिया जवाब कांग्रेस नेताओं के बयानों पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं को उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करना चाहिए और अदालत के निर्णय का सम्मान करना चाहिए। खंडेलवाल ने यह भी कहा कि न्यायालय के फैसले पर अनावश्यक टिप्पणी करना कांग्रेस नेताओं की अज्ञानता को दर्शाता है।
गोंदिया रेलवे ट्रैक अपग्रेड: 5 से 24 अप्रैल तक 3 जोड़ी ट्रेनें रद्द, यात्रियों को अलर्ट

नई दिल्ली। गोंदिया, नागपुर मंडल – दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने गोंदिया स्टेशन पर प्लेटफॉर्म 3 के वॉशेबल एप्रन को हटाकर बैलेस्टेड ट्रैक में बदलने के लिए बड़े अपग्रेडेशन का काम शुरू किया है। इसके चलते 5 अप्रैल से 24 अप्रैल 2026 तक लाइन नंबर 05 (अप मेनलाइन) पर 20 दिन का ट्रैफिक ब्लॉक लिया गया है। रेलवे ने यात्रियों से कहा है कि वे यात्रा से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति जरूर चेक करें। प्रभावित ट्रेनें और तारीखेंकोरबा–अमृतसर एक्सप्रेस (18237) – कोरबा से 5 अप्रैल से 25 अप्रैल 2026 तक रद्द। अमृतसर–बिलासपुर एक्सप्रेस (18238) – अमृतसर से 7 अप्रैल से 27 अप्रैल 2026 तक रद्द। हजरत निजामुद्दीन–रायगढ़ एक्सप्रेस (12410) – निजामुद्दीन से 2, 4, 6, 7, 8, 9, 11, 13, 14, 15, 16, 18, 20, 21, 22 अप्रैल को रद्द। रायगढ़–हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस (12409) – रायगढ़ से 4, 6, 8, 9, 10, 11, 13, 15, 16, 17, 18, 20, 22, 23, 24 अप्रैल को रद्द। विशाखापत्तनम–हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस (12807) – विशाखापत्तनम से 5, 7, 8, 9, 11, 12, 14, 15, 16, 18, 19, 21, 22, 23 अप्रैल को रद्द। हजरत निजामुद्दीन–विशाखापत्तनम एक्सप्रेस (12808) – 7, 9, 10, 11, 13, 14, 16, 17, 18, 20, 21, 23, 24, 25 अप्रैल को रद्द। क्या है अपग्रेड का काम?रेलवे के अनुसार, गोंदिया स्टेशन पर प्लेटफॉर्म 3 के वॉशेबल एप्रन को हटाकर उसे बैलेस्टेड ट्रैक में बदला जा रहा है। यह कदम ट्रेन संचालन को और सुरक्षित और तेज बनाने के लिए लिया गया है। अपग्रेड के दौरान ट्रैक ब्लॉक होने के कारण कई लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनें अलग-अलग तिथियों पर रद्द रहेंगी। यात्रियों के लिए जरूरी सूचनारेलवे ने स्पष्ट किया है कि इस अवधि में ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहेगा, इसलिए यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा से पहले ट्रेन की स्थिति ऑनलाइन या स्टेशन पर चेक करें। विशेषकर कोरबा, अमृतसर, रायगढ़ और विशाखापत्तनम जाने वाले यात्री अपनी योजना में बदलाव कर लें। यह अपग्रेडेशन रेलवे की सुरक्षा और सुविधा के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे आने वाले समय में यात्रियों को बेहतर और निर्बाध सेवा मिलेगी। कीवर्ड: गोंदिया, रेलवे ट्रैक अपग्रेड, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, प्लेटफॉर्म 3, बैलेस्टेड ट्रैक, ट्रैफिक ब्लॉक, कोरबा-अमृतसर एक्सप्रेस, अमृतसर-बिलासपुर एक्सप्रेस, हजरत निजामुद्दीन-रायगढ़ एक्सप्रेस, विशाखापत्तनम एक्सप्रेस, ट्रेन रद्द, अप्रैल 2026
Madhya Pradesh Cabinet decision: मध्यप्रदेश कैबिनेट के बड़े फैसले: 33,240 करोड़ की योजनाओं को मंजूरी, मुख्यमंत्री यंग इंटर्न्स प्रोग्राम शुरू होगा

Madhya Pradesh Cabinet decision: भोपाल। मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई मध्य प्रदेश मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश के विकास और कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। मंत्रि परिषद ने विभिन्न विभागों की योजनाओं को आगामी पांच वर्षों तक जारी रखने के लिए करीब 33 हजार 240 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की। बैठक में युवाओं को प्रशासनिक व्यवस्था से जोड़ने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री यंग इंटर्न्स फॉर गुड गवर्नेंस प्रोग्राम को मंजूरी दी गई। इस योजना के तीन वर्ष के क्रियान्वयन के लिए लगभग 190 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। कार्यक्रम के तहत युवाओं को शासन प्रशासन की कार्यप्रणाली से जोड़कर नीति निर्माण और सुशासन की प्रक्रियाओं में भागीदारी का अवसर दिया जाएगा। कैबिनेट ने मध्यप्रदेश वृत्तिकर अधिनियम 1995 के तहत दिव्यांगजनों को वृत्तिकर से दी जा रही छूट को 31 मार्च 2030 तक जारी रखने का भी निर्णय लिया। इससे प्रदेश के हजारों दिव्यांग नागरिकों को आर्थिक राहत मिलती रहेगी। प्रदेश में स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए एक जिला एक उत्पाद परियोजना के तहत सात जिलों को शामिल करने का निर्णय लिया गया। इसमें सीधी में दरी कारपेट दतिया में गुड़ अशोकनगर में चंदेरी हाथकरघा वस्त्र भोपाल में जरी जरदोजी और जूट उत्पाद धार में बाग प्रिंट सीहोर में लकड़ी के खिलौने तथा उज्जैन में बटिक प्रिंट को बढ़ावा दिया जाएगा। इस परियोजना के लिए आगामी पांच वर्षों में 37.50 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे जिससे स्थानीय कारीगरों और बुनकरों को प्रशिक्षण ब्रांडिंग और बाजार उपलब्ध कराया जाएगा। न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सिंगरौली जिले के चितरंगी में व्यवहार न्यायालय स्थापित करने की स्वीकृति दी गई है। इसके तहत कनिष्ठ व्यवहार न्यायाधीश सहित कुल सात नए पदों का सृजन किया जाएगा। स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए मैहर कैमोर कटनी और निमरानी खरगोन में कर्मचारी राज्य बीमा निगम के तीन नए औषधालय खोलने का निर्णय लिया गया है। इन औषधालयों के लिए चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ के 51 पद स्वीकृत किए गए हैं। इससे लगभग 15 686 पंजीकृत श्रमिकों और उनके करीब 62 744 आश्रितों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। कैबिनेट ने ग्रामीण और खनिज क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए भी बड़ा फैसला लिया। खनिज अधिभार निधि के तहत ग्रामीण अवसंरचना पेयजल आपूर्ति और सड़क विकास कार्यों के लिए 6 090 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई। इसके अलावा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की योजनाओं के सुचारू संचालन के लिए 7 127 करोड़ रुपये मंजूर किए गए। योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग की 10 योजनाओं के लिए 2 064 करोड़ रुपये जनजातीय कार्य विभाग की योजनाओं के लिए 1 645 करोड़ रुपये और महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं के लिए 3 773 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई। उद्योग और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए एमएसएमई विभाग की निवेश संवर्धन और स्टार्ट अप नीति के क्रियान्वयन हेतु 11 361 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई। इन फैसलों को प्रदेश के आर्थिक विकास रोजगार सृजन और सामाजिक कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।