Vastu Tips: शनि देव की कृपा पाने के लिए शनिवार को करें ये आसान उपाय

Vastu Tips:Vastu Tips:नई दिल्ली। शनिवार के दिन शनिदेव की विशेष पूजा और वास्तु उपाय करने से घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। शनि देव की कृपा पाने के लिए केवल पूजा ही नहीं, बल्कि वास्तु शास्त्र के अनुसार कुछ विशेष उपाय करना भी जरूरी है। अगर आपके घर में लगातार आर्थिक तंगी, कामों में रुकावट या नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव नजर आ रहा है, तो आज के दिन ये उपाय विशेष रूप से फायदेमंद साबित हो सकते हैं। 1. शनि मंदिर जाएं और सरसों के तेल का दिया जलाएं शनिवार के दिन शनि मंदिर जाकर पूजा करना बेहद लाभकारी माना गया है। इस दौरान सरसों के तेल का दिया जलाना चाहिए। शनि देव को काला रंग प्रिय है, इसलिए इस दिन काले कपड़े पहनकर मंदिर जाएं। इसके साथ ही काली दाल का दान करने से भी शनिदेव की कृपा बनी रहती है। 2. घर के मुख्य द्वार पर शनि यंत्र लगाएं वास्तु शास्त्र में बताया गया है कि घर के मुख्य द्वार पर शनि यंत्र लगाने से घर में आने वाली नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं। यह उपाय घर के वातावरण को सकारात्मक बनाए रखने में मदद करता है और परिवार में सुख-शांति लाता है। 3. शमी का पौधा लगाएं और पत्तियां चढ़ाएं शनिवार को शमी का पौधा लगाना विशेष लाभकारी माना गया है। शमी देवता को प्रिय होने के कारण यह पौधा शनि देव की कृपा बढ़ाता है। शमी की पत्तियों को शनिदेव को चढ़ाने से घर में आर्थिक तंगी और अन्य परेशानियां कम होती हैं। 4. नकारात्मकता बढ़ाने वाली आदतों से बचें शनिवार के दिन कुछ विशेष सावधानियां रखना भी जरूरी है। जैसे, नाखून और बाल काटना इस दिन वर्जित माना गया है। ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और घर में समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए शनिवार को अपने बाल और नाखून न काटें। 5. नियमित पूजा और उपाय से घर में खुशहाली इन उपायों को नियमित रूप से अपनाने से घर और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। शनि देव प्रसन्न रहते हैं और किसी भी बाधा, आर्थिक तंगी या मानसिक परेशानियों को दूर करने में मदद करते हैं। शनिवार के दिन वास्तु शास्त्र के अनुसार ये उपाय करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और परिवार के सभी सदस्य मानसिक और आर्थिक रूप से मजबूत रहते हैं।
महाकाल के दरबार पहुंची एक्ट्रेस कावेरी प्रियम, भस्म आरती में शामिल हुईं, बोलीं- यहां की ऊर्जा है अलौकिक

उज्जैन। उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के भस्म आरती के दौरान टीवी और फिल्म एक्ट्रेस कावेरी प्रियम भगवान महाकाल के दर्शन करने पहुंचीं। सुबह करीब 4 बजे उन्होंने आरती में भाग लिया और नंदी हॉल में बैठकर इस दिव्य अनुष्ठान का अनुभव किया। आरती के बाद उन्होंने मंदिर की देहरी से भगवान महाकाल को जल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। ‘भस्म आरती में मिलती है अद्भुत ऊर्जा’ दर्शन के बाद कावेरी प्रियम ने अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि बाबा महाकाल के दरबार की शक्ति को शब्दों में व्यक्त करना आसान नहीं है। उन्होंने बताया, “मैं पिछले तीन वर्षों से यहां लगातार आ रही हूं। भस्म आरती के समय जो ऊर्जा महसूस होती है, वह सच में अद्भुत और अलौकिक है।” टीवी से फिल्मों तक बनाया खास मुकाम कावेरी प्रियम ने अपने करियर की शुरुआत टीवी शो नागिन 2 में बीके के किरदार से की थी। इसके बाद उन्होंने ये रिश्ते हैं प्यार के में कुहू माहेश्वरी राजवंश और जिद्दी दिल माने ना में डॉ. मोनामी महाजन की भूमिका निभाकर दर्शकों के बीच पहचान बनाई। फिल्मों में उन्होंने तिश्नगी से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की।
fuel price today India : पेट्रोल-डीजल के नए दाम जारी, सोने की खरीद पर भी लगी सख्ती: आज का पूरा अपडेट

fuel price today India : नई दिल्ली। 4 अप्रैल 2026 को तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के ताजा दाम जारी कर दिए हैं। देश के ज्यादातर बड़े शहरों में कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, जिससे आम लोगों को राहत मिली है। हालांकि, कुछ शहरों में मामूली उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। पेट्रोल के दाम दिल्ली में पेट्रोल ₹94.77 प्रति लीटर और मुंबई में ₹103.54 प्रति लीटर पर स्थिर है। कोलकाता, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे शहरों में भी कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। नोएडा, मुजफ्फरपुर और रांची जैसे कुछ शहरों में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। डीजल की कीमतों में स्थिरता डीजल के दाम भी ज्यादातर शहरों में स्थिर रहे। दिल्ली में डीजल ₹87.67 और मुंबई में ₹90.03 प्रति लीटर मिल रहा है। कुछ शहरों में मामूली बढ़ोतरी और गिरावट जरूर देखी गई, लेकिन कुल मिलाकर बाजार स्थिर बना हुआ है। कीमतें क्यों बदलती हैं? पेट्रोल-डीजल की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) के दाम डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स (Excise Duty और VAT) इसी वजह से हर राज्य और शहर में कीमतें अलग-अलग होती हैं। सरकार का बड़ा फैसला: सोने की खरीद पर नए नियम सरकार अब सोने की खरीदारी से जुड़े नियमों को और सख्त करने जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य सोने की शुद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। अब हर सोने के गहने पर 6 अंकों का HUID (Hallmark Unique Identification) कोड अनिवार्य होगा। यह कोड एक तरह का यूनिक पहचान नंबर है, जिसे दोबारा किसी अन्य गहने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। ग्राहक BIS CARE ऐप के जरिए इस कोड की जांच कर सकते हैं ताकि सोने की असलियत की पुष्टि हो सके। हॉलमार्किंग एक प्रमाणन प्रक्रिया है, जो यह सुनिश्चित करती है कि सोना तय शुद्धता मानकों के अनुसार है। इसे भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा नियंत्रित किया जाता है। इससे नकली या कम गुणवत्ता वाले सोने की बिक्री पर रोक लगती है और ग्राहकों को सही जानकारी मिलती है। नए नियमों के तहत क्या बदलाव होंगे? सोने पर HUID कोड का दोबारा इस्तेमाल नहीं होगा हर गहने की अलग पहचान होगी खरीदारी में पारदर्शिता बढ़ेगी धोखाधड़ी और नकली हॉलमार्क पर रोक लगेगी ₹2 लाख से अधिक खरीद पर PAN कार्ड जरूरी ₹10 लाख से अधिक खरीद पर PAN + आधार + आय प्रमाण जरूरी₹2 लाख से अधिक का कैश भुगतान नहीं किया जा सकेगा 4 अप्रैल को पेट्रोल-डीजल के दामों में स्थिरता देखने को मिली है, जिससे आम जनता को राहत मिली है। वहीं, सरकार के नए फैसले के तहत सोने की खरीद को और सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। आने वाले समय में ये नियम ग्राहकों के लिए सुरक्षा और भरोसे को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
Apple का बंपर ऑफर: iPhone 17 Pro Max पर 49,000 रुपये की छूट, सिर्फ सालगिरह सेल में

नई दिल्ली। टेक दिग्गज Apple ने अपनी 50वीं सालगिरह के मौके पर ग्राहकों को बड़ा तोहफा दिया है। कंपनी का फ्लैगशिप स्मार्टफोन iPhone 17 Pro Max अब भारी डिस्काउंट के साथ उपलब्ध है। इस ऑफर के चलते महंगा प्रीमियम फोन अब पहले के मुकाबले काफी सस्ता हो गया है। 1.49 लाख से घटकर ₹1.02 लाख तक पहुंची कीमत दरअसल, लॉन्च के समय iPhone 17 Pro Max की कीमत ₹1,49,900 थी, लेकिन अब यह ऑफर्स के बाद घटकर करीब ₹1,02,900 तक पहुंच गई है। यह खास डील Imagine Store के जरिए दी जा रही है, जो Apple का अधिकृत रीसेलर है। इस ऑफर ने उन लोगों के लिए शानदार मौका पैदा कर दिया है, जो लंबे समय से iPhone खरीदने का इंतजार कर रहे थे। ऐसे मिल रहा है ₹49,000 का डिस्काउंट इस कीमत में कमी कई तरह के ऑफर्स को मिलाकर की गई है। इसमें ₹4,000 का बैंक कैशबैक, ₹1,000 का इंस्टेंट डिस्काउंट और ₹6,000 का एक्सचेंज बोनस शामिल है। इसके अलावा पुराने स्मार्टफोन पर ₹36,000 तक का एक्सचेंज वैल्यू भी मिल रहा है। इन सभी ऑफर्स को जोड़ने के बाद कुल मिलाकर करीब ₹49,000 तक की बचत हो रही है। सिर्फ iPhone नहीं, बाकी डिवाइस पर भी ऑफर सिर्फ iPhone 17 Pro Max ही नहीं, बल्कि इस सेल में अन्य Apple डिवाइस पर भी आकर्षक ऑफर मिल रहे हैं। iPhone 17 Pro की कीमत घटकर करीब ₹89,900 तक पहुंच गई है। वहीं iPad 2025 के WiFi वेरिएंट पर भी छूट मिल रही है और इसे ₹31,900 में खरीदा जा सकता है। Apple Watch के कई मॉडल्स भी इस सेल में डिस्काउंट के साथ उपलब्ध हैं। iPhone 17 Pro Max के दमदार फीचर्स अगर फीचर्स की बात करें, तो iPhone 17 Pro Max को कंपनी का अब तक का सबसे पावरफुल स्मार्टफोन माना जा रहा है। इसमें 6.9 इंच का 120Hz OLED डिस्प्ले, A19 Pro चिप और 12GB RAM दी गई है, जो इसे बेहद तेज और स्मूथ बनाती है। कैमरे के मामले में भी यह फोन काफी दमदार है, जिसमें 48MP का ट्रिपल कैमरा सेटअप और 8x ऑप्टिकल जूम मिलता है। साथ ही इसकी बैटरी 37 घंटे तक वीडियो प्लेबैक देने में सक्षम है। Apple की यह एनिवर्सरी सेल ग्राहकों के लिए बड़ा मौका बनकर आई है। इतने बड़े डिस्काउंट के साथ प्रीमियम iPhone खरीदना अब पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। अगर आप नया स्मार्टफोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो यह ऑफर आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
स्किन की देखभाल अब आसान! गर्मियों में इन फलों का सेवन करें और पाएं ग्लोइंग त्वचा

नई दिल्ली।गर्मी के मौसम में तेज धूप और बढ़ते तापमान की वजह से त्वचा का प्राकृतिक ग्लो कम हो जाता है। चेहरे की रंगत फीकी पड़ जाती है और टेनिंग आम समस्या बन जाती है। आमतौर पर लोग महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स का सहारा लेते हैं, लेकिन प्रकृति ने हमें ऐसे फलों की सौगात दी है जो त्वचा को नेचुरल ग्लो देने में बेहद असरदार हैं। इन फलों का सही सेवन गर्मियों में त्वचा और स्वास्थ्य दोनों के लिए लाभकारी है। 1. नारियल पानी – प्राकृतिक हाइड्रेशन का खजानानारियल पानी गर्मियों में शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए सबसे अच्छा विकल्प है। यह त्वचा को मुलायम और ग्लोइंग बनाने में मदद करता है। रोजाना एक नारियल पानी पीने से न केवल पेट स्वस्थ रहता है बल्कि चेहरे की रुखी त्वचा में निखार आता है। नारियल पानी में मौजूद इलेक्ट्रोलाइट्स शरीर के तापमान को संतुलित रखते हैं और गर्मी से होने वाली थकान को कम करते हैं। 2. तरबूज – विटामिन सी और पानी का भरपूर स्रोततरबूज में विटामिन सी, फाइबर और पानी प्रचुर मात्रा में होता है। विटामिन सी त्वचा को टैनिंग से बचाने में मदद करता है। गर्मियों में अगर त्वचा फीकी पड़ जाए या टेनिंग हो जाए तो तरबूज का सेवन चेहरे के लिए वरदान साबित होता है। यह न केवल त्वचा को ग्लोइंग बनाता है, बल्कि शरीर के तापमान को भी संतुलित रखता है। 3. खीरा – त्वचा और पेट दोनों का खजानाखीरा सिर्फ सलाद का हिस्सा नहीं, बल्कि यह गर्मियों में शरीर को हाइड्रेट और त्वचा को ताजगी देने वाला सुपरफूड है। खीरे में पानी और फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो चेहरे की रुखी त्वचा को नरम करने और पाचन को सुधारने में मदद करती है। कई स्किन ट्रीटमेंट में भी खीरे का उपयोग किया जाता है। 4. आम – विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स का शक्ति केंद्रआम गर्मियों का पसंदीदा फल है और इसमें त्वचा के लिए लाभकारी विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं। यह चेहरे के खोए हुए निखार को वापस लाने में मदद करता है। नियमित और सही मात्रा में आम का सेवन शरीर और त्वचा दोनों को फायदा पहुंचाता है। 5. संतरा – गहरे दाग-धब्बों का प्राकृतिक हलसंतरे में भरपूर विटामिन सी और अन्य पोषक तत्व होते हैं, जो त्वचा को अंदर से पोषण देते हैं। संतरा चेहरे को ग्लोइंग बनाने के साथ-साथ दाग-धब्बों और त्वचा की सूजन को भी कम करता है। इसके छिलके का उपयोग फेसपैक में करने से भी लाभ होता है।
गैजेट्स का ज़्यादा इस्तेमाल खतरनाक! जानें रेडिएशन से बचने के आसान उपाय

नई दिल्ली।आज के डिजिटल युग में हमारा जीवन गैजेट्स पर निर्भर हो गया है। घर पर टीवी, एसी, मोबाइल और ऑफिस में कंप्यूटर या लैपटॉप, हर जगह इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस हमारी जिंदगी का हिस्सा बन गए हैं। लेकिन इनका लगातार और गलत इस्तेमाल शरीर के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। गैजेट रेडिएशन से सुरक्षा अब एक जरूरी स्वास्थ्य मुद्दा बन चुकी है। गैजेट्स और हमारे स्वास्थ्य पर प्रभावमोबाइल, लैपटॉप, वाई-फाई जैसे उपकरण रेडिएशन उत्सर्जित करते हैं। यह रेडिएशन अक्सर दिखता नहीं है, लेकिन शरीर और मस्तिष्क को अंदर से प्रभावित करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक सीधे संपर्क में रहने से सिरदर्द, नींद में खलल, आंखों की थकान और मानसिक स्वास्थ्य पर असर हो सकता है। बच्चों के लिए यह और भी गंभीर हो सकता है, क्योंकि उनका मस्तिष्क और मानसिक विकास अभी पूरा नहीं हुआ होता। लैपटॉप और कंप्यूटर का सुरक्षित उपयोगलैपटॉप का उपयोग करते समय हमेशा माउस और कीबोर्ड का इस्तेमाल करें। लैपटॉप को गोद में रखने के बजाय टेबल पर रखें और शरीर से लगभग एक फीट की दूरी बनाए रखें। इससे रेडिएशन का सीधा प्रभाव शरीर पर नहीं पड़ेगा। मोबाइल का सुरक्षित उपयोगफोन को हमेशा खुद से सटाकर न रखें, खासकर पॉकेट में या सोते समय। बच्चों को मोबाइल पर खेलने या लंबा समय बिताने से बचाएं। सोते समय फोन को एयरप्लेन मोड में रखें, जिससे रेडिएशन का स्तर काफी हद तक कम हो जाता है। वाई-फाई और घर की सुरक्षायदि घर में वाई-फाई का राउटर है, तो उसे कमरे के बाहर या बच्चों से दूर लगवाएं। राउटर से निकलने वाली किरणें नींद पर असर डाल सकती हैं और मस्तिष्क की नसों को प्रभावित कर सकती हैं। घर में रेडिएशन का स्तर कम करने के लिए गैजेट्स का संतुलित उपयोग और सही दूरी बनाए रखना जरूरी है। बच्चों की सुरक्षा और मानसिक विकासअत्यधिक गैजेट उपयोग बच्चों के मानसिक विकास और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता पर नकारात्मक असर डाल सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बच्चों को पढ़ाई या खेल के दौरान गैजेट से दूर रखें। उनकी सेहत और मस्तिष्क की वृद्धि के लिए खुली हवा, खेल और संतुलित आहार अधिक जरूरी हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती पर किया पुण्य स्मरण

भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के गौरव पत्रकारिता जगत के नक्षत्र माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती पर उन्हें नमन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि माखनलाल चतुर्वेदी की कृतियां आज भी समाज और राष्ट्र के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उनके लेखन और चिंतन ने न केवल पत्रकारिता की दुनिया में नया मार्ग प्रशस्त किया बल्कि समाज के नवनिर्माण और लोक कल्याण के संदेश भी दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विशेष रूप से यह कहा कि माखनलाल चतुर्वेदी के प्रखर विचार और गहन चिंतन उनके समय के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए भी मार्गदर्शक सिद्ध होंगे। उनके योगदान और राष्ट्रसेवा का प्रभाव अनंतकाल तक अविस्मरणीय रहेगा। माखनलाल चतुर्वेदी जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में क्रांतिकारी माना जाता है ने अपने लेखन और समाजसेवा के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रनिर्माण में अमूल्य योगदान दिया। उनके विचार और दृष्टिकोण आज भी पत्रकारिता साहित्य और समाज सेवा के क्षेत्र में आदर्श माने जाते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अवसर पर सभी नागरिकों को प्रेरणा लेनी चाहिए कि वे समाज और राष्ट्र की भलाई के लिए अपने कर्तव्यों का पालन करें। माखनलाल चतुर्वेदी का जीवन यह दिखाता है कि साहसिक विचार और समाजहित में समर्पण किसी भी समय प्रासंगिक और प्रभावशाली हो सकता है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पत्रकारिता जगत और आम नागरिकों से अपील की कि वे उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करें। उनके विचारों और लेखों का अध्ययन कर आने वाली पीढ़ी न केवल पत्रकारिता की उत्कृष्टता सीख सकती है बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी समझ सकती है। इस प्रकार माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती पर मुख्यमंत्री द्वारा किया गया पुण्य स्मरण न केवल उनके योगदान को याद करने का अवसर है बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा स्रोत भी है। उनके आदर्श और समाज के प्रति समर्पण आज भी लोगों को सामाजिक चेतना और राष्ट्रसेवा की ओर अग्रसरित करते हैं।
राष्ट्रीय चेतना के कवि माखनलाल चतुर्वेदी

– आचार्य ललित मुनि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में जब देश की जनता जाग रही थी, तब साहित्य ने एक अनूठी भूमिका निभाई। वह केवल शब्दों का संग्रह नहीं था, बल्कि एक जीवंत शस्त्र बन गया था, जो गुलामी की जंजीरों को तोड़ने का आह्वान करता था। उन दिनों, जब ब्रिटिश साम्राज्य की छाया पूरे देश पर छाई हुई थी, तब कवियों, लेखकों और पत्रकारों ने अपनी कलम से जनमानस में राष्ट्रप्रेम की चिंगारी जगाई। साहित्य ने आम आदमी को जागरूक किया, युवाओं को बलिदान के लिए प्रेरित किया और स्वतंत्रता की भावना को घर-घर तक पहुंचाया। ऐसे ही युग के एक महान कवि, पत्रकार और स्वतंत्रता सेनानी थे पंडित माखनलाल चतुर्वेदी, जिन्हें राष्ट्रीय चेतना के कवि, एक भारतीय आत्मा और युगचारण के नाम से जाना जाता है। उनकी कविताएं सरल भाषा में गहरी राष्ट्रभक्ति और मानवीय संवेदना को समेटे हुए हैं, जो आज भी पाठकों के हृदय को स्पर्श करती हैं। इस आलेख में उनके जीवन, उनकी रचनाओं और स्वतंत्रता आंदोलन में साहित्य की भूमिका का विस्तार से अध्ययन किया गया है, ताकि उस युग की भावना और उनकी प्रेरक कविताओं का सजीव चित्र हमारे सामने उभर सके। माखनलाल चतुर्वेदी का जन्म 4 अप्रैल 1889 को मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले के बाबई गांव में हुआ था। उनके पिता नंदलाल चतुर्वेदी गांव के प्राथमिक विद्यालय में अध्यापक थे। घर का वातावरण संस्कारों से परिपूर्ण था, जहां संस्कृत, अंग्रेजी और अन्य भाषाओं का ज्ञान सहज रूप से प्राप्त होता था। मात्र सोलह वर्ष की आयु में वे शिक्षक बन गए और खंडवा के मिडिल स्कूल में पढ़ाने लगे। किंतु उनकी कलम और हृदय की पुकार उन्हें शिक्षण कार्य से आगे ले गई। सन् 1908 में माधवराव सप्रे के ‘हिंदी केसरी’ पत्र ने राष्ट्रीय आंदोलन और बहिष्कार विषय पर निबंध प्रतियोगिता आयोजित की। युवा माखनलाल का निबंध प्रथम स्थान पर चुना गया। यह उनके जीवन का पहला महत्वपूर्ण मोड़ था, जिसने उन्हें राष्ट्रसेवा की ओर प्रेरित किया। अप्रैल 1913 में खंडवा से ‘प्रभा’ मासिक पत्रिका का प्रकाशन आरंभ हुआ और संपादन का दायित्व उन्हें सौंपा गया। सितंबर 1913 में उन्होंने अध्यापक की नौकरी छोड़ दी और पूर्ण रूप से साहित्य, पत्रकारिता तथा राष्ट्रीय आंदोलन को समर्पित कर दिया। उनका जीवन संघर्ष और समर्पण की मिसाल बन गया। सन् 1916 के लखनऊ कांग्रेस अधिवेशन में उन्होंने गणेश शंकर विद्यार्थी, मैथिलीशरण गुप्त और महात्मा गांधी से मुलाकात की। गांधीजी के विचारों से वे गहराई से प्रभावित हुए। सन् 1920 के असहयोग आंदोलन में महाकोशल क्षेत्र से पहली गिरफ्तारी देने वाले वे ही थे। जेल की काली दीवारों के बीच भी उनकी कलम रुकी नहीं। उन्होंने वहां से भी राष्ट्र-जागरण का कार्य जारी रखा। सन् 1930 के सविनय अवज्ञा आंदोलन में भी उन्हें पहली गिरफ्तारी का सम्मान मिला। कुल मिलाकर वे तीन बार जेल गए, जहां उन्होंने न केवल यातनाएं सहीं, बल्कि अपनी रचनाओं से साथियों का मनोबल भी बढ़ाया। उनकी पत्रकारिता ब्रिटिश शासन के लिए चुनौती बन गई थी। ‘प्रभा’ के बाद उन्होंने ‘कर्मवीर’ का संपादन संभाला, जो पहले जबलपुर से प्रकाशित होता था। गणेश शंकर विद्यार्थी की गिरफ्तारी के बाद उन्होंने ‘प्रताप’ का संपादन भी किया। इन पत्रों के माध्यम से उन्होंने ब्रिटिश नीतियों की आलोचना की, स्वदेशी को प्रोत्साहित किया और नई पीढ़ी को गुलामी से बाहर आने का आह्वान किया। उनकी लेखनी सरल, स्पष्ट और प्रभावशाली थी, जो सीधे जनमानस तक पहुंचती थी। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान साहित्य की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। जब राजनीतिक नेतृत्व जेलों में बंद था, तब कविताएं, गीत और निबंध जनता के बीच स्वतंत्रता की लहर फैलाते रहे। भारतेन्दु हरिश्चंद्र से प्रारंभ हुई यह परंपरा निरंतर आगे बढ़ती रही। मैथिलीशरण गुप्त की ‘भारत-भारती’ ने राष्ट्रप्रेम की ज्वाला प्रज्वलित की, तो सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ और जयशंकर प्रसाद की रचनाओं ने छायावादी युग में भावुकता और विद्रोह का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत किया। माखनलाल चतुर्वेदी का योगदान इस दृष्टि से विशिष्ट था कि उन्होंने साहित्य को जन आंदोलन का सशक्त माध्यम बना दिया। उनकी कविताएं केवल पढ़ी ही नहीं जाती थीं, बल्कि गाई जाती थीं, जेलों में सुनाई जाती थीं और सभाओं में उद्धृत की जाती थीं। साहित्य ने उस समय राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया। हिंदू-मुस्लिम एकता, स्वदेशी उत्पादों का प्रचार और अंग्रेजी साम्राज्यवाद का विरोध जैसे विषयों को उन्होंने अपनी रचनाओं में प्रमुख स्थान दिया। उनकी पत्रकारिता ने साहित्य को एक प्रभावी हथियार बनाया। ‘प्रभा’, ‘कर्मवीर’ और ‘प्रताप’ जैसे पत्रों ने न केवल समाचार प्रस्तुत किए, बल्कि राष्ट्रभक्ति की भावना को सुदृढ़ किया। ब्रिटिश सरकार इन पत्रों से इतनी भयभीत थी कि कई बार संपादकों पर मुकदमे चलाए गए और उन्हें जेल भेजा गया। इसके बावजूद माखनलाल चतुर्वेदी जैसे साहित्यकारों ने अपनी लेखनी नहीं छोड़ी। उनकी रचनाएं छायावाद की परंपरा में आती हैं, किंतु उनमें राष्ट्र चेतना का ओज सर्वाधिक प्रमुख है। उन्होंने कविता, निबंध, नाटक और कहानी सभी विधाओं में लेखन किया। उनके प्रमुख काव्य संग्रहों में ‘हिमकिरीटिनी’, ‘हिमतरंगिणी’, ‘युगचारण’, ‘समर्पण’, ‘मरण-ज्वार’ और ‘वेणु लो गूंजे धरा’ उल्लेखनीय हैं। गद्य साहित्य में ‘कृष्णार्जुन युद्ध’, ‘साहित्य देवता’, ‘समय के पांव’ और ‘अमीर इरादे गरीब इरादे’ विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। सन् 1943 में ‘हिमकिरीटिनी’ पर उन्हें देव पुरस्कार प्राप्त हुआ और सन् 1955 में ‘हिमतरंगिणी’ के लिए उन्हें हिंदी साहित्य अकादमी का प्रथम पुरस्कार मिला। सन् 1959 में उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया, किंतु सन् 1967 में राजभाषा हिंदी से संबंधित संवैधानिक संशोधन के विरोध में उन्होंने यह सम्मान लौटा दिया। सागर विश्वविद्यालय ने उन्हें 1959 में डी.लिट. की मानद उपाधि प्रदान की। मध्यप्रदेश शासन ने भी उन्हें सम्मानित किया। उनकी सर्वाधिक प्रसिद्ध कविता ‘पुष्प की अभिलाषा’ है, जो बलिदान और समर्पण का प्रतीक है। इसमें कवि कहता है कि वह राजसी आभूषणों का हिस्सा नहीं बनना चाहता, बल्कि मातृभूमि के चरणों में अर्पित होना चाहता है। यह कविता स्वतंत्रता सेनानियों के बीच अत्यंत लोकप्रिय थी और युवाओं को देश के लिए बलिदान का संदेश देती थी। इसी प्रकार ‘कैदी और कोकिला’ कविता जेल जीवन के अनुभवों पर आधारित है, जिसमें स्वतंत्रता की आकांक्षा और संघर्ष की भावना व्यक्त होती है। कोयल की आवाज कैदी के मन में आशा का संचार करती है और उसे स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा देती है। उनकी अन्य कविताओं में भी राष्ट्रप्रेम, प्रकृति और मानवीय संवेदना का
गर्मियों में ककड़ी का जादू: तन और मन दोनों को देती है शीतलता

नई दिल्ली। गर्मी का मौसम आते ही तेज धूप, लू और पसीने से परेशान होना आम बात है। ऐसे में ककड़ी शरीर और मन को ठंडक देने वाला सबसे सस्ता और आसान उपाय साबित होती है। इसे “शीतल फल” कहा जाता है क्योंकि इसमें 95 प्रतिशत से अधिक पानी होता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स भी गर्मियों में ककड़ी के नियमित सेवन की सलाह देते हैं, जो न सिर्फ गर्मी से राहत देती है बल्कि कई स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करती है। शरीर को हाइड्रेट रखेगर्मी में पसीना ज्यादा आता है और शरीर डिहाइड्रेट हो सकता है। ककड़ी प्राकृतिक रूप से शरीर में पानी की कमी को दूर करती है। इसमें मौजूद इलेक्ट्रोलाइट्स और मिनरल्स पूरे दिन ऊर्जा बनाए रखते हैं। सलाद, रायता या जूस के रूप में ककड़ी का सेवन शरीर का तापमान नियंत्रित रखता है और लू लगने की आशंका को कम करता है। वजन घटाने और पाचन में सहायकककड़ी में कैलोरी बहुत कम और फाइबर भरपूर होता है, जिससे भूख नियंत्रित रहती है। जो लोग वजन कम करना चाहते हैं, उनके लिए ककड़ी रोजाना आहार का हिस्सा बन सकती है। इसके अलावा, ककड़ी पाचन शक्ति को मजबूत करती है, कब्ज और गैस की समस्या को कम करती है और पेट को स्वस्थ रखती है। त्वचा और सौंदर्य के लिए फायदेमंदककड़ी में मौजूद पानी और एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा की सूजन कम करते हैं और उसे चमकदार बनाते हैं। गर्मियों में चेहरे पर ककड़ी के टुकड़े रखने से ठंडक मिलती है और सनबर्न से बचाव होता है। अन्य स्वास्थ्य लाभ ककड़ी ब्लड प्रेशर को नियंत्रित, हड्डियों को मजबूत, आंखों की थकान कम करने और इम्यूनिटी बढ़ाने में भी मदद करती है। ककड़ी का सही सेवनहेल्थ एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि ककड़ी का जूस बनाकर पीएं या सलाद में टमाटर, प्याज और नींबू के साथ मिलाकर खाएं। इसे दही के साथ रायता बनाकर भी लिया जा सकता है। सैंडविच और रोल्स में भी ककड़ी डाली जा सकती है। रोजाना कम से कम एक ककड़ी खाने की सलाह दी जाती है। आसान, सस्ती और सुरक्षितककड़ी सस्ती, आसानी से उपलब्ध और बिना किसी साइड इफेक्ट वाली होती है। गर्मियों में इसे अपने आहार में शामिल करने से तन और मन दोनों शीतल रहते हैं और कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव होता है।
संकटों को दूर करने वाला विकट गणेश व्रत, जानिए दिन का शुभ मुहूर्त और समय

नई दिल्ली । हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को विकट संकष्टी का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष यह पावन पर्व 5 अप्रैल रविवार को पड़ रहा है। भगवान गणेश के अष्टविनायक रूपों में से एक विकट स्वरूप की इस दिन विशेष पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि विकट गणेश अपने भक्तों को सभी प्रकार के ज्ञात और अज्ञात भय रोग शोक और दुर्घटनाओं से सुरक्षित रखते हैं। भक्तों का विश्वास है कि यह व्रत न केवल व्यक्ति को निर्भीक बनाता है बल्कि विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष करने का साहस भी प्रदान करता है। घोर संकटों में भी भक्तों की रक्षा करने वाले विकट गणेश अपराजेयता का वरदान देते हैं। इसलिए इस दिन व्रत और पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इस वर्ष 5 अप्रैल को चतुर्थी तिथि दोपहर 11 बजकर 59 मिनट से शुरू होकर अगले दिन तक रहेगी। व्रत रखने वाले भक्त पूरे दिन उपवास रखते हैं और शाम को चंद्रमा के उदय के बाद पूजा और चंद्र दर्शन के साथ व्रत का पारण करते हैं। दिन का समय भी इस पूजा और व्रत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। सूर्योदय सुबह 6 बजकर 7 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 41 मिनट पर होगा। चंद्रोदय रात 9 बजकर 58 मिनट पर है। शुभ मुहूर्त के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 35 मिनट से 5 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 59 मिनट से 12 बजकर 49 मिनट तक है। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 20 मिनट तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 40 मिनट से 7 बजकर 3 मिनट तक रहेगा। वहीं अमृत काल दोपहर 2 बजकर 24 मिनट से 4 बजकर 10 मिनट तक रहेगा जिसे अत्यंत शुभ समय माना जाता है। वहीं अशुभ समयों से बचना भी आवश्यक है। राहुकाल शाम 5 बजकर 7 मिनट से 6 बजकर 41 मिनट तक यमगण्ड दोपहर 12 बजकर 24 मिनट से 1 बजकर 58 मिनट तक और गुलिक काल दोपहर 3 बजकर 33 मिनट से 5 बजकर 7 मिनट तक रहेगा। दुर्मुहूर्त शाम 5 बजकर 1 मिनट से 5 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। भद्रा सुबह 6 बजकर 7 मिनट से दोपहर 11 बजकर 59 मिनट तक रहेगा। इस प्रकार विकट संकष्टी चतुर्थी 5 अप्रैल को भगवान गणेश की विशेष आराधना और व्रत रखने का दिन है। इस दिन की पूजा न केवल मानसिक और आध्यात्मिक बल बढ़ाती है बल्कि जीवन में आने वाले संकटों और परेशानियों से सुरक्षा का भी मार्ग प्रशस्त करती है। शुभ मुहूर्त और समय का पालन कर भक्त इस दिन की विशेष महत्ता का लाभ उठा सकते हैं और अपने जीवन में सुख शांति और सुरक्षा प्राप्त कर सकते हैं।