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केआरसीएल में दो पदों पर भर्ती का अवसर, 63 वर्ष तक के उम्मीदवारों के लिए सुनहरा मौका

भोपाल। भारतीय रेलवे में नौकरी की चाह रखने वाले अभ्यर्थियों के लिए कोंकण रेलवे निगम लिमिटेड की ओर से एक महत्वपूर्ण भर्ती सूचना जारी की गई है। इस भर्ती के तहत वर्क मैनेजर और असिस्टेंट वर्क मैनेजर के कुल दो पदों को भरा जाना है। यह अवसर विशेष रूप से उन योग्य उम्मीदवारों के लिए आकर्षक माना जा रहा है जो रेलवे क्षेत्र में तकनीकी और प्रबंधन अनुभव रखते हैं या सेवानिवृत्ति के बाद भी अपने कौशल का उपयोग करना चाहते हैं। विभाग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार चयन प्रक्रिया और आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सरल रखा गया है ताकि अधिक से अधिक पात्र उम्मीदवार इसमें भाग ले सकें। इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया 10 अप्रैल से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवारों को 30 अप्रैल तक अपना आवेदन जमा करना होगा। आवेदन केवल ईमेल के माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे, इसलिए इच्छुक अभ्यर्थियों को निर्धारित समय सीमा का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। अंतिम तिथि के बाद किसी भी प्रकार का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम समय की तकनीकी या अन्य किसी भी प्रकार की समस्या से बचने के लिए समय रहते अपना आवेदन पूरा कर लें। आवेदन पत्र को सही तरीके से भरकर आवश्यक दस्तावेजों के साथ निर्धारित प्रारूप में भेजना अनिवार्य होगा। इस भर्ती के लिए शैक्षणिक योग्यता के रूप में उम्मीदवार के पास इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल या प्रोडक्शन इंजीनियरिंग में किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से डिग्री या डिप्लोमा होना चाहिए। इसके साथ ही यह भी आवश्यक है कि उम्मीदवार रेलवे या उससे संबंधित सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में कार्यरत रहे हों या सेवानिवृत्त यांत्रिक विभाग के अधिकारी हों। अभ्यर्थियों के पास निर्धारित वर्षों का व्यावहारिक अनुभव होना भी जरूरी रखा गया है ताकि कार्य की गुणवत्ता और दक्षता सुनिश्चित की जा सके। अधिकतम आयु सीमा 63 वर्ष निर्धारित की गई है जिसकी गणना 10 अप्रैल के आधार पर की जाएगी। वेतन संरचना की बात करें तो चयनित उम्मीदवारों को प्रति माह 39100 रुपये से लेकर 15600 रुपये तक का वेतन दिया जाएगा। इसके अलावा अन्य भत्ते और लाभ भी नियमानुसार प्रदान किए जाएंगे। चयनित अभ्यर्थियों की पोस्टिंग विशाखापत्तनम स्थित वडालापुडी कार्यशाला में की जाएगी जहां उन्हें तकनीकी और प्रबंधकीय जिम्मेदारियों का निर्वहन करना होगा। यह पद उन अनुभवी उम्मीदवारों के लिए एक बेहतर अवसर है जो अपने लंबे करियर अनुभव को एक संगठित रेलवे परियोजना में योगदान के रूप में उपयोग करना चाहते हैं। आवेदन प्रक्रिया के तहत उम्मीदवारों को पहले संबंधित भर्ती अधिसूचना के अनुसार आवेदन पत्र डाउनलोड करना होगा। इसके बाद उसे ध्यानपूर्वक भरकर सभी आवश्यक विवरण सही तरीके से दर्ज करने होंगे। मांगे गए दस्तावेजों की प्रतियां भी आवेदन के साथ संलग्न करनी होंगी। पूरा आवेदन एक ही फाइल में तैयार कर निर्धारित ईमेल पते पर भेजना होगा। अभ्यर्थियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका आवेदन अंतिम तिथि के दिन शाम साढ़े पांच बजे से पहले पहुंच जाए। आवेदन भेजने के बाद भविष्य के संदर्भ के लिए उसका प्रिंट सुरक्षित रखना भी आवश्यक होगा।

भारत की म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री नई ऊंचाई पर: वित्त वर्ष 26 में AUM में जोरदार उछाल

नई दिल्ली। भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने वित्त वर्ष 2026 में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार देश का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) सालाना आधार पर 12.2 प्रतिशत बढ़कर 73.73 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इस दौरान इंडस्ट्री के कुल एसेट बेस में लगभग 8 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। यह जानकारी एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) द्वारा जारी आंकड़ों में सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बावजूद सक्रिय इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में निवेशकों की रुचि मजबूत बनी हुई है। मार्च में इक्विटी फंड्स में इनफ्लो बढ़कर 40,450.26 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो जुलाई 2025 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। यह संकेत देता है कि निवेशक बाजार में गिरावट को अवसर के रूप में देख रहे हैं और लंबी अवधि के दृष्टिकोण से निवेश कर रहे हैं। सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए भी निवेश लगातार बढ़ रहा है। मार्च में SIP इनफ्लो 32,087 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो फरवरी के 29,845 करोड़ रुपये से अधिक है। यह दर्शाता है कि रिटेल निवेशक बाजार की अस्थिरता के बावजूद नियमित और अनुशासित निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इक्विटी इनफ्लो में यह वृद्धि मुख्य रूप से वित्त वर्ष के अंत में पोर्टफोलियो री-बैलेंसिंग, बाजार में हालिया गिरावट और आकर्षक वैल्यूएशन के कारण हुई है। निवेशकों ने गिरावट के समय खरीदारी को अवसर माना है, जिससे बाजार में फंड फ्लो मजबूत हुआ है। हालांकि, पूरे म्यूचुअल फंड उद्योग में मार्च के दौरान 2.39 लाख करोड़ रुपये का नेट आउटफ्लो दर्ज किया गया, जबकि फरवरी में 94,530 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो देखा गया था। डेट म्यूचुअल फंड्स में भी भारी आउटफ्लो देखने को मिला, जो 2.94 लाख करोड़ रुपये रहा। यह उतार-चढ़ाव बाजार में अल्पकालिक अस्थिरता को दर्शाता है। गोल्ड ETF में निवेश भी घटकर 2,266 करोड़ रुपये रह गया, जबकि फरवरी में यह 5,254.95 करोड़ रुपये था। वहीं इक्विटी कैटेगरी में फ्लेक्सी-कैप फंड्स सबसे आगे रहे, जिनमें 10,054.12 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। इसके अलावा स्मॉल-कैप और मिड-कैप फंड्स में भी मजबूत निवेश देखा गया, जो क्रमशः 6,263.56 करोड़ रुपये और 6,063.53 करोड़ रुपये रहा। लार्ज-कैप फंड्स में भी 2,997.84 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज किया गया। कुल मिलाकर, आंकड़े बताते हैं कि भारत में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री तेजी से विस्तार कर रही है और निवेशक अब लंबी अवधि के निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे बाजार की स्थिरता और गहराई दोनों बढ़ रही हैं।

आईटी इंडस्ट्री में वापसी की रफ्तार: भारत में डिमांड बढ़ी, ग्रोथ आउटलुक हुआ मजबूत

नई दिल्ली। भारत के आईटी सेक्टर को लेकर एक सकारात्मक संकेत सामने आया है। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार देश का आईटी उद्योग धीरे-धीरे रिकवरी की राह पर लौट रहा है और आने वाले समय में ग्रोथ आउटलुक में भी सुधार देखने को मिल सकता है। निवेशकों की सतर्कता के बावजूद मांग और आय के संकेतों में क्रमिक सुधार दर्ज किया जा रहा है, जिससे सेक्टर में नई उम्मीदें जगी हैं।  रिपोर्ट में कहा गया है कि भर्ती गतिविधियों में बढ़ोतरी, मैनेजमेंट की स्थिर टिप्पणी और क्लाउड सर्विसेज से होने वाली आय में लगातार सुधार यह दर्शाता है कि सेक्टर अब स्थिरता की ओर बढ़ रहा है। इसके साथ ही वैश्विक बाजारों में आईटी सेवाओं की मांग भी धीरे-धीरे बेहतर हो रही है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में आई गिरावट से भारतीय आईटी कंपनियों की आय पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। इससे कंपनियों के मार्जिन मजबूत होने की संभावना है, जो पूरे सेक्टर के लिए लाभकारी संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, मुद्रा विनिमय दर का यह प्रभाव आने वाले समय में कंपनियों की कमाई को सपोर्ट करेगा। वित्त वर्ष 2026 की मार्च तिमाही को लेकर अनुमान लगाया गया है कि आईटी कंपनियों की आय में तिमाही आधार पर मामूली वृद्धि देखने को मिल सकती है, जबकि सालाना आधार पर इसमें बेहतर ग्रोथ दर्ज होने की संभावना है। बड़ी आईटी कंपनियों का प्रदर्शन स्थिर रहने का अनुमान है, वहीं मिडकैप कंपनियां इस सेक्टर की ग्रोथ में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि टेक्नोलॉजी और कम्युनिकेशन सेक्टर में सुधार के शुरुआती संकेत दिख रहे हैं, जबकि अन्य संबंधित क्षेत्र स्थिर बने हुए हैं। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2027 तक आईटी सेक्टर में स्थिर आय वृद्धि का अनुमान जताया गया है। इसी आधार पर वित्त वर्ष 2027 और 2028 के लिए आय अनुमानों में लगभग 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को तेजी से अपनाया जा रहा है, जिससे आईटी सेक्टर में नए अवसर बन रहे हैं। भारतीय कंपनियां बड़ी टेक फर्मों के साथ साझेदारी कर रही हैं और जनरेटिव एआई तथा एंटरप्राइज सॉल्यूशंस में नए प्लेटफॉर्म विकसित कर रही हैं। इससे आने वाले वर्षों में सेक्टर की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और मजबूत होने की उम्मीद है। कुल मिलाकर रिपोर्ट संकेत देती है कि चुनौतियों के बावजूद भारत का आईटी सेक्टर धीरे-धीरे स्थिरता और रिकवरी की दिशा में आगे बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में इसमें बेहतर ग्रोथ देखने को मिल सकती है। भारत का आईटी सेक्टर धीरे-धीरे रिकवरी दिखा रहा है और मांग व आय में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। AI, क्लाउड सर्विसेज और रुपये की कमजोरी से आने वाले समय में ग्रोथ और मजबूत होने की उम्मीद है।

रायसेन में तीन दिवसीय कृषि महोत्सव में आधुनिक खेती तकनीकों का प्रदर्शन

रायसेन। मध्यप्रदेश के रायसेन जिले में आयोजित तीन दिवसीय उन्नत कृषि महोत्सव में देशभर से आए किसानों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर आधुनिक और तकनीक आधारित खेती की नई संभावनाओं को समझा। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य परंपरागत कृषि पद्धतियों के साथ स्मार्ट खेती को बढ़ावा देना और किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन के लिए प्रेरित करना है, जिससे उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो सके। कृषि महोत्सव में आधुनिक कृषि यंत्रों, उन्नत तकनीकों और वैज्ञानिक खेती के तरीकों का व्यापक प्रदर्शन किया गया।यहां किसानों को ड्रिप सिंचाई प्रणाली, संरक्षित खेती और बागवानी आधारित उन्नत फसलों की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने किसानों को बदलते समय के अनुसार खेती में तकनीक के उपयोग की आवश्यकता पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया, जिससे वे अपनी खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बना सकें। वर्तमान समय में कृषि क्षेत्र तेजी से आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है और किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर वैज्ञानिक तरीकों को अपना रहे हैं। सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को नई तकनीक, बेहतर बीज और आधुनिक उपकरणों की सुविधा मिल रही है, जिससे कृषि उत्पादन में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है। बागवानी और उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने के लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि किसान फसल विविधीकरण की ओर बढ़ सकें और अपनी आय के नए स्रोत विकसित कर सकें। इसके अंतर्गत फल, सब्जी, फूल, मसाले तथा औषधीय पौधों की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है और किसानों को प्रशिक्षण के साथ वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना के तहत छोटे किसानों को आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना और विस्तार के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। इसके साथ ही संरक्षित खेती जैसे पॉलीहाउस, ग्रीनहाउस और शेडनेट तकनीक को बढ़ावा देने के लिए किसानों को बड़ी मात्रा में सब्सिडी दी जा रही है। बागवानी फसलों जैसे आम, अमरूद और आंवला की खेती पर भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिससे किसान पारंपरिक फसलों से हटकर अधिक लाभकारी विकल्पों की ओर बढ़ सकें। ड्रिप सिंचाई प्रणाली को जल संरक्षण और बेहतर उत्पादन के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीक के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही ड्रैगन फ्रूट जैसी नई और उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे किसान आधुनिक और लाभकारी कृषि मॉडल को अपना सकें। कृषि महोत्सव किसानों के लिए ज्ञान और अवसरों का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हो रहा है, जहां वे नई तकनीकों को समझकर भविष्य की खेती के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं और कृषि क्षेत्र में नवाचार की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।

‘मेक इन इंडिया’ को बड़ी उड़ान: तेजस फाइटर जेट के इंजन रिपेयर सेंटर के लिए GE एयरोस्पेस और IAF में समझौता

नई दिल्ली। भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को नई रफ्तार देते हुए अमेरिकी कंपनी GE Aerospace और भारतीय वायुसेना भारतीय वायुसेना के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत भारत में तेजस फाइटर जेट को शक्ति देने वाले F404-IN20 इंजन के लिए एक आधुनिक रिपेयर और मेंटेनेंस डिपो स्थापित किया जाएगा। यह कदम ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा माना जा रहा है। इस नई सुविधा का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब तेजस लड़ाकू विमानों के इंजन की मरम्मत और रखरखाव भारत में ही किया जा सकेगा। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि विमान की ऑपरेशनल उपलब्धता भी बढ़ेगी। अभी तक कई महत्वपूर्ण मरम्मत कार्यों के लिए विदेशी सुविधाओं पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन इस डिपो के शुरू होने के बाद यह निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी। समझौते के अनुसार यह डिपो पूरी तरह भारतीय वायुसेना के स्वामित्व और संचालन में रहेगा, जबकि तकनीकी सहयोग GE एयरोस्पेस द्वारा दिया जाएगा। कंपनी विशेषज्ञ तकनीशियन, प्रशिक्षण, जरूरी उपकरण और स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध कराएगी, जिससे भारत में ही उच्च स्तरीय इंजन मेंटेनेंस संभव हो सकेगा। इस समझौते को भारत के रक्षा क्षेत्र में एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है, क्योंकि यह देश की स्वदेशी क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ लड़ाकू विमानों की तैयारियों को भी बेहतर बनाएगा। तेजस जैसे स्वदेशी लड़ाकू विमान के लिए यह सुविधा बेहद अहम साबित होगी, क्योंकि इससे मिशन रेडीनेस और फ्लीट उपलब्धता में सुधार होगा। GE एयरोस्पेस की ओर से कहा गया है कि यह साझेदारी भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की उनकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है। कंपनी के अनुसार इससे भारतीय वायुसेना को आधुनिक तकनीक और सपोर्ट तेजी से उपलब्ध होगा, जिससे संचालन और भी प्रभावी होगा। कंपनी पहले से ही भारत के रक्षा और विमानन क्षेत्र में सक्रिय है। इसके इंजन P-8I समुद्री निगरानी विमान, MH-60R हेलीकॉप्टर और AH-64 अपाचे जैसे प्लेटफॉर्म्स में उपयोग किए जाते हैं। इसके अलावा GE के LM2500 मरीन गैस टर्बाइन का उपयोग INS विक्रांत और शिवालिक क्लास फ्रिगेट्स में भी किया गया है, जिससे भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ी है। पिछले चार दशकों से GE एयरोस्पेस भारत के एयरोस्पेस सेक्टर में सक्रिय है और पुणे स्थित इसका निर्माण संयंत्र तथा देश के कई साझेदार इसके वैश्विक सप्लाई नेटवर्क का हिस्सा हैं। इस नए डिपो के साथ भारत अब रक्षा मेंटेनेंस और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और मजबूत कदम बढ़ा रहा है।

ऑफिस लीजिंग में जबरदस्त उछाल: 5 साल में सबसे मजबूत ग्रोथ, 21 मिलियन स्क्वायर फीट के पार बाजार

नई दिल्ली। भारत के रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़ी एक बड़ी और सकारात्मक रिपोर्ट सामने आई है। देश में ऑफिस लीजिंग की मांग वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में सालाना आधार पर 10 प्रतिशत बढ़कर 21.6 मिलियन स्क्वायर फीट तक पहुंच गई है। यह पिछले पांच वर्षों में दर्ज की गई सबसे मजबूत वृद्धि मानी जा रही है। इस बढ़त ने भारत के कमर्शियल रियल एस्टेट मार्केट को नई मजबूती दी है और निवेशकों का भरोसा भी बढ़ाया है। यह जानकारी सैविल्स इंडिया की ताजा रिपोर्ट में दी गई है, जिसमें कहा गया है कि मजबूत मांग के साथ-साथ आपूर्ति में गिरावट भी देखी गई है। रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि में ऑफिस स्पेस की नई आपूर्ति सालाना आधार पर 28 प्रतिशत घटकर 7.9 मिलियन स्क्वायर फीट रह गई। इसका सीधा असर यह हुआ कि देश में खाली पड़े ऑफिस स्पेस का स्तर घटकर कुल उपलब्ध स्टॉक का 13.9 प्रतिशत रह गया, जो बाजार के लिए एक स्वस्थ संकेत माना जा रहा है। लीजिंग गतिविधियों में टेक्नोलॉजी सेक्टर की भूमिका सबसे अहम रही, जिसने कुल मांग में 32 प्रतिशत की हिस्सेदारी दर्ज की। इसके बाद फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस सेक्टर ने 22 प्रतिशत योगदान दिया, जबकि बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस (बीएफएसआई) सेक्टर की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत रही। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि भारत का ऑफिस मार्केट तेजी से विविधता की ओर बढ़ रहा है और सिर्फ आईटी सेक्टर तक सीमित नहीं रह गया है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि बड़े आकार के ऑफिस स्पेस की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। कुल लीजिंग में एक लाख स्क्वायर फीट या उससे अधिक के सौदों की हिस्सेदारी 52 प्रतिशत रही, जो यह दर्शाता है कि बड़ी कंपनियां भारत में अपने ऑपरेशन का विस्तार कर रही हैं। वैश्विक क्षमता केंद्र (GCC) भी इस वृद्धि को लगातार सपोर्ट कर रहे हैं, जिससे बड़े शहरों में कमर्शियल डिमांड बढ़ी है। शहरों के प्रदर्शन की बात करें तो बेंगलुरु सबसे आगे रहा, जहां आईटी-बीपीएम कंपनियों की मजबूत मौजूदगी के कारण ऑफिस लीजिंग 6 मिलियन स्क्वायर फीट तक पहुंच गई। यहां सालाना आधार पर 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। दिल्ली-एनसीआर ने भी मजबूत प्रदर्शन करते हुए 3.6 मिलियन स्क्वायर फीट की मांग दर्ज की। वहीं हैदराबाद ने सबसे तेज उछाल दिखाया, जहां 39 प्रतिशत की वृद्धि के साथ मांग 4.3 मिलियन स्क्वायर फीट तक पहुंच गई। पुणे में भी 20 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 3 मिलियन स्क्वायर फीट की लीजिंग हुई, जबकि मुंबई में 2.8 मिलियन स्क्वायर फीट की मांग दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत का ऑफिस मार्केट लगातार मजबूत हो रहा है। कंपनियां भारत को अपने विस्तार और निवेश के लिए सुरक्षित और लाभकारी बाजार के रूप में देख रही हैं। आने वाले समय में भी इस सेक्टर में स्थिर और मजबूत ग्रोथ की उम्मीद जताई जा रही है, खासकर आईटी, बीएफएसआई और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के चलते।

नशे की लत ने उजाड़ा हंसता खेलता परिवार और बेटे के हाथों हुई पिता की निर्मम हत्या..

नई दिल्ली: उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ से एक ऐसी हृदय विदारक घटना सामने आई है जिसने मानवीय रिश्तों और पारिवारिक मर्यादाओं को झकझोर कर रख दिया है। नशे की विनाशकारी लत के चलते एक युवक ने मामूली विवाद के बाद अपने ही पिता की लोहे की रॉड से हमला कर जान ले ली। यह दुखद वारदात शनिवार देर रात एक गांव में घटित हुई जिसके बाद से पूरे क्षेत्र में मातम और सनसनी का माहौल व्याप्त है। नशा किस प्रकार एक हंसते खेलते परिवार को पूरी तरह बर्बाद कर सकता है यह घटना उसका एक जीवंत और डरावना उदाहरण बनकर सामने आई है जिसने समाज के सामने कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। प्राप्त प्राथमिक विवरण के अनुसार अठाइस वर्षीय आरोपी युवक लंबे समय से विभिन्न प्रकार के नशों का आदी था और इसी लत के कारण घर में अक्सर कलह की स्थिति बनी रहती थी। शनिवार की रात भी आरोपी का अपने पचास वर्षीय पिता के साथ किसी बहुत ही सामान्य बात को लेकर वाद विवाद शुरू हुआ था। नशे के प्रभाव और अनियंत्रित क्रोध में डूबे युवक ने पास ही रखी लोहे की एक भारी रॉड उठाई और अपने पिता के सिर पर जोरदार प्रहार कर दिया। हमले के बाद लहूलुहान होकर पिता जमीन पर गिर पड़े और चीख पुकार सुनकर पहुंचे परिजनों ने उन्हें तत्काल चिकित्सालय पहुंचाया लेकिन उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की और सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर आरोपी युवक को हिरासत में ले लिया। प्रारंभिक पूछताछ और ग्रामीणों के बयानों से यह स्पष्ट हुआ है कि आरोपी की नशे की लत ने उसे हिंसक बना दिया था और वह छोटी छोटी बातों पर भी अपना आपा खो बैठता था। शव का पंचनामा भरकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। गांव के निवासी इस घटना से स्तब्ध हैं और उनका कहना है कि नशा केवल शरीर को ही नहीं बल्कि व्यक्ति के विवेक और संवेदनाओं को भी पूरी तरह समाप्त कर देता है। यह मामला केवल एक आपराधिक घटना मात्र नहीं है बल्कि यह हमारे समाज में तेजी से फैलते नशे के जाल की विभीषिका को भी दर्शाता है। पहाड़ी अंचलों में युवाओं के बीच बढ़ती नशाखोरी अब परिवारों के विनाश का कारण बन रही है जहां संस्कार और रिश्तों की डोर कमजोर पड़ती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए केवल दंडात्मक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है बल्कि सामाजिक स्तर पर जागरूकता अभियान और नशामुक्ति प्रयासों की सक्रियता अनिवार्य है। जब तक युवाओं को इस दलदल से बाहर निकालने के ठोस प्रयास नहीं होंगे तब तक रिश्तों के लहूलुहान होने का यह सिलसिला थमता नजर नहीं आता। वर्तमान में आरोपी गिरफ्त में है और कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है लेकिन एक पिता को खोने और एक बेटे के अपराधी बनने का यह घाव परिवार के लिए कभी न भरने वाला साबित होगा। गांव की गलियों में आज सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग भारी मन से इस त्रासदी पर चर्चा कर रहे हैं। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी गई है। इस घटना ने एक बार फिर यह चेतावनी दी है कि यदि नशे के बढ़ते प्रभाव पर समय रहते लगाम नहीं कसी गई तो भविष्य में मानवीय मूल्यों का संरक्षण करना कठिन हो जाएगा और समाज को ऐसी ही अन्य पीड़ादायक घटनाओं का गवाह बनना पड़ेगा।

फॉर्मूला 1 की भारत वापसी की तैयारी: सरकार ने शुरू की पहल, जल्द मिल सकती है खुशखबरी

नई दिल्ली। केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने देश के खेल प्रेमियों को बड़ी उम्मीद दी है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि भारत में दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित मोटरस्पोर्ट प्रतियोगिता फॉर्मूला 1 की वापसी की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं और यह 2027 से पहले देश में दोबारा आयोजित हो सकती है। मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य भारत को अंतरराष्ट्रीय मोटरस्पोर्ट्स का बड़ा केंद्र बनाना है और इसी दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। खेल मंत्री ने मीडिया से बातचीत में बताया कि फॉर्मूला 1 की वापसी को लेकर ट्रैक और तकनीकी स्तर की कई अहम बाधाएं दूर कर ली गई हैं। उनके अनुसार अगले छह महीनों में बाकी तैयारियों को भी पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार चाहती है कि लंबे अंतराल के बाद भारत एक बार फिर दुनिया के सबसे तेज और रोमांचक रेसिंग इवेंट की मेजबानी करे। उन्होंने कहा कि इस दिशा में संबंधित एजेंसियां और खेल मंत्रालय मिलकर तेजी से काम कर रहे हैं ताकि समयसीमा के भीतर सभी व्यवस्थाएं पूरी हो सकें। भारत में पहले भी फॉर्मूला 1 का आयोजन हो चुका है, जब 2011 से 2013 के बीच ग्रेटर नोएडा स्थित बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट में इंडियन ग्रां प्री का आयोजन किया गया था। यह ट्रैक प्रसिद्ध डिजाइनर हरमन टिल्के द्वारा तैयार किया गया था और इसे दुनिया के बेहतरीन रेसिंग ट्रैकों में गिना जाता है। शुरुआती तीन सीजन में सेबेस्टियन वेट्टल ने रेड बुल रेसिंग के लिए लगातार जीत दर्ज कर दबदबा बनाया था, जिससे भारत में इस खेल को काफी लोकप्रियता मिली थी। हालांकि 2013 के बाद यह आयोजन भारत में बंद हो गया था। इसके पीछे मुख्य कारण टैक्स संबंधी विवाद, आयोजन की भारी लागत और प्रशासनिक चुनौतियां बताई जाती हैं। इसके बाद यह रेस फॉर्मूला 1 कैलेंडर से पूरी तरह बाहर हो गई। अब सरकार का दावा है कि पुराने अनुभवों से सीख लेते हुए नए मॉडल पर काम किया जा रहा है ताकि भविष्य में ऐसे अंतरराष्ट्रीय आयोजन स्थायी रूप से भारत में हो सकें। खेल मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल फॉर्मूला 1 ही नहीं बल्कि अन्य अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों जैसे मोटोजीपी को भी भारत में लाने की दिशा में प्रयास चल रहे हैं। सरकार का मानना है कि इससे देश में खेल संस्कृति मजबूत होगी, युवाओं को नए अवसर मिलेंगे और भारत की वैश्विक पहचान और भी सशक्त होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत में फॉर्मूला 1 की वापसी होती है तो इससे खेल पर्यटन, रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को बड़ा फायदा मिलेगा। साथ ही, भारत वैश्विक खेल मानचित्र पर एक बार फिर मजबूत उपस्थिति दर्ज कर सकेगा। खेल प्रेमियों में इस घोषणा के बाद उत्साह देखा जा रहा है और सभी को आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा है कि भारत में फॉर्मूला 1 की वापसी की तैयारियां चल रही हैं और 2027 से पहले रेस दोबारा हो सकती है। सरकार ट्रैक और इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम कर रही है, जिससे भारत फिर से इंटरनेशनल मोटरस्पोर्ट्स का बड़ा केंद्र बन सके।

TET Exam Cancellation Demand : अशोकनगर में शिक्षकों का मशाल जुलूस, TET रद्द करने की मांग तेज

ASHOKNAGAR TET PROTEST

HIGHLIGHTS: अशोकनगर में शिक्षकों का मशाल जुलूस टीईटी परीक्षा रद्द करने की मांग तेज गांधी पार्क से निकला शांतिपूर्ण प्रदर्शन नेताओं ने टीईटी को बताया ‘काला कानून’ 18 अप्रैल को भोपाल में सीएम हाउस घेराव   TET Exam Cancellation Demand : अशोकनगर। मशाल जुलूस से जताया विरोध अशोकनगर शहर में टीईटी परीक्षा निरस्त करने और नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता देने की मांग को लेकर रविवार रात शिक्षकों ने मशाल जुलूस निकाला। अध्यापक/शिक्षक संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर बड़ी संख्या में महिला और पुरुष शिक्षक सड़कों पर उतरे और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को उठाया। प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर की और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी भी की। बदलते मौसम में बच्चों की सेहत का रखें खास ध्यान, अपनाएं ये आसान उपाय गांधी पार्क से निकला जुलूस यह मशाल जुलूस गांधी पार्क से शुरू होकर स्टेशन रोड, तुलसी पार्क सहित शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए वापस गांधी पार्क पर ही समाप्त हुआ। हाथों में जलती मशालें लिए शिक्षकों ने अनुशासित ढंग से मार्च किया और टीईटी परीक्षा रद्द करने के साथ-साथ नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता देने की मांग को प्रमुखता से रखा। पूरे आयोजन के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखी गई। MP में नया कानून: अब गांवों में भी बनेंगी कॉलोनियां, 15% मकान गरीबों के लिए रिजर्व नेताओं ने बताया ‘काला कानून’ राज्य अध्यापक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष गोपाल शिवहरे ने कहा कि टीईटी शिक्षकों के हितों के खिलाफ ‘काला कानून’ है और इसे खत्म कराया जाएगा। वहीं कार्यकारी जिलाध्यक्ष दिलीप रघुवंशी ने सरकार से सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने और अंतिम निर्णय आने तक टीईटी परीक्षा पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई शिक्षकों के सम्मान और अधिकारों की है। विज्ञान भवन में नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में पीएम मोदी ने महिला नेतृत्व को बताया देश की प्रगति का आधार प्रदेशव्यापी आंदोलन, भोपाल में होगा घेराव आजाद अध्यापक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष भीमसिंह यादव ने बताया कि यह आंदोलन पूरे प्रदेश में चल रहा है और इससे करीब 70 हजार शिक्षक प्रभावित हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि 18 अप्रैल को भोपाल में ‘भरो आंदोलन’ के तहत मुख्यमंत्री निवास का घेराव किया जाएगा। इस प्रदर्शन में जिले के कई पदाधिकारी और सैकड़ों शिक्षक शामिल हुए।  

मप्र कैबिनेट के बड़े फैसले: 6 जिलों में खुलेंगे नए मेडिकल कॉलेज, 19,810 करोड़ के विकास कार्यों को दी मंजूरी

भोपाल। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में सोमवार को मंत्रालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। बैठक में लोक कल्याण और विकास कार्यों के लिए लगभग 19,810 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। साथ ही प्रदेश के छह जिलों में नए मेडिकल कॉलेज खोलने को भी स्वीकृति प्रदान की गई। विभिन्न विभागों की योजनाओं को मिली मंजूरीलोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने बताया कि बैठक में लोक निर्माण, सिंचाई, महिला एवं बाल विकास, कृषि और चिकित्सा शिक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई। सिंचाई और सड़क परियोजनाओं पर बड़ा खर्चमंत्रिपरिषद ने सागर जिले की मिडवासा मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए 286 करोड़ 26 लाख रुपये की प्रशासकीय मंजूरी दी है। इस परियोजना से 27 गांवों की करीब 7200 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा। इसके अलावा लोक निर्माण विभाग के तहत विभिन्न परियोजनाओं के लिए 10,801 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसमें बीओटी मार्गों का विकास, परियोजनाओं के भुगतान और सड़क विकास निगम की बाह्य वित्त परियोजनाएं शामिल हैं, जिन्हें 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रखने का निर्णय लिया गया है। पोषण, ग्रामीण विकास और कृषि को बढ़ावापंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के तहत प्रधानमंत्री पोषण शक्ति और मध्याह्न भोजन जैसी योजनाओं के संचालन के लिए 3,553 करोड़ 35 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है। वहीं, कृषि क्षेत्र में ‘सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मेकेनाइजेशन (SMAM)’ के तहत 2,250 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इससे कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा मिलेगा, लागत और समय की बचत होगी तथा ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर जोरप्रदेश में नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के लिए 1,674 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। इसके तहत जिला अस्पतालों को मेडिकल कॉलेज से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग के अंतर्गत स्वास्थ्य सेवाओं को 31 मार्च 2031 तक जारी रखने के लिए करीब 1,005 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। महिला सशक्तिकरण योजनाओं को भी समर्थनमहिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं—बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, वन स्टॉप सेंटर और महिला हेल्पलाइन-181 के संचालन के लिए 240 करोड़ 42 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। 8 नए वन स्टॉप सेंटर खुलेंगेप्रदेश में आठ नए वन स्टॉप सेंटर शुरू करने का निर्णय लिया गया है। ये सेंटर मैहर, मऊगंज, पांढुर्णा, धार (मनावर), पीथमपुर, इंदौर (लसूडिया, सांवेर) और झाबुआ (पेटलावद) में स्थापित किए जाएंगे। इन जिलों में बनेंगे नए मेडिकल कॉलेजमंत्रिपरिषद ने राजगढ़, मंडला, नीमच, मंदसौर, शिवपुरी और सिंगरौली जिलों में नए मेडिकल कॉलेज खोलने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इससे प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार होगा और स्थानीय स्तर पर बेहतर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।