भोपाल में शराब दुकान के खिलाफ धरना: जिपं उपाध्यक्ष ने शटर गिराकर किया विरोध, हाथों में तख्तियां

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शराब दुकानों की शिफ्टिंग को लेकर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। ईंटखेड़ी में तो हालात ऐसे बन गए कि जिला पंचायत उपाध्यक्ष मोहन सिंह जाट खुद ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठ गए। नाराज लोगों ने पहले दुकान का शटर गिराया, फिर मौके पर टेंट लगाकर भजन-कीर्तन शुरू कर दिया। शटर गिराकर शुरू किया धरना, प्रशासन को दी चेतावनीग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कुछ दिन पहले ही कलेक्टर को आवेदन देकर शराब दुकान हटाने की मांग की थी, लेकिन जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो सोमवार दोपहर 12 बजे से दुकान के सामने ही धरना शुरू कर दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि जब तक दुकान हटाई नहीं जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा और दुकान खुलने नहीं दी जाएगी। स्कूल-कॉलेज के रास्ते में दुकान, महिलाओं-बच्चों को परेशानीस्थानीय लोगों के मुताबिक, यह दुकान भैंरोपुरा, कल्याणपुरा और खामखेड़ा जाने वाले मुख्य रास्ते पर स्थित है। यहां अक्सर लोग बैठकर शराब पीते हैं, जिससे राहगीरों खासकर महिलाओं और बच्चों को भारी परेशानी होती है। क्षेत्र में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा भी बढ़ रहा है, जिससे माहौल बिगड़ रहा है। भोपाल के कई इलाकों में एक जैसा विरोधईंटखेड़ी ही नहीं, बल्कि शहर के अन्य इलाकों में भी शराब दुकानों के खिलाफ विरोध तेज हो गया है- अवधपुरी: ऋषिपुरम 80 फीट रोड पर लोग रोज सुंदरकांड पाठ कर विरोध जता रहे हैं।सेमराकलां: विजय नगर साईंराम कॉलोनी में एक साल से मांग, अब टेंट लगाकर भजन-कीर्तन।कोलार रोड (मंदाकिनी चौराहा): रहवासी इलाके और जैन मंदिर के पास दुकान शिफ्ट होने पर विरोध।पॉलिटेक्निक चौराहा: प्रोफेसर कॉलोनी के पास दुकान के खिलाफ छात्र संगठन भी सड़कों पर उतर चुके हैं। जनआंदोलन का रूप लेता विरोधभोपाल में शराब दुकानों को लेकर बढ़ता विरोध अब जनआंदोलन का रूप लेता नजर आ रहा है। ग्रामीणों और शहरवासियों का कहना है कि आबादी वाले इलाकों में ऐसी दुकानों से सामाजिक माहौल बिगड़ रहा है और सुरक्षा को खतरा बढ़ रहा है।
बदलते मौसम में बच्चों की सेहत का रखें खास ध्यान, अपनाएं ये आसान उपाय

नई दिल्ली। अप्रैल का महीना जहां मौसम को सुहावना बनाता है, वहीं बच्चों की सेहत के लिए यह चुनौतीपूर्ण भी साबित हो सकता है। कभी तेज धूप तो कभी अचानक बारिश के कारण तापमान में उतार-चढ़ाव होता रहता है, जिससे बच्चों का शरीर जल्दी तालमेल नहीं बिठा पाता। दिन में गर्मी और रात में ठंड के कारण सर्दी-जुकाम, गले में खराश और वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा हवा में बढ़ती नमी और धूल से एलर्जी और त्वचा संबंधी समस्याएं भी देखने को मिलती हैं। ऐसे में बच्चों की देखभाल के लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। मौसम के अनुसार पहनाएं कपड़ेइस समय बच्चों को न ज्यादा भारी और न ही बहुत हल्के कपड़े पहनाने चाहिए। बेहतर होगा कि उन्हें लेयरिंग में कपड़े पहनाएं, ताकि जरूरत के अनुसार कपड़े कम या ज्यादा किए जा सकें। घर से बाहर निकलते समय शॉल या हल्की जैकेट साथ रखना खासकर शाम के समय फायदेमंद रहता है। पौष्टिक आहार से बढ़ाएं इम्युनिटीबदलते मौसम में बच्चों का खानपान बेहद अहम भूमिका निभाता है। उनके आहार में ताजे फल और हरी सब्जियां शामिल करें, जो विटामिन्स से भरपूर हों। ठंडी चीजें जैसे आइसक्रीम और कोल्ड ड्रिंक्स से परहेज करना बेहतर होता है। साथ ही बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाना जरूरी है, ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे और रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहे। सफाई और दिनचर्या पर दें ध्यानइस मौसम में संक्रमण का खतरा अधिक होता है, इसलिए बच्चों को साफ-सफाई की आदत सिखाना जरूरी है। बाहर से आने के बाद हाथ-पैर धोना, नियमित नहाना और साफ कपड़े पहनना उनकी सेहत के लिए लाभदायक होता है। इसके अलावा पर्याप्त नींद भी जरूरी है। समय पर सोने से बच्चों की इम्युनिटी बेहतर होती है और वे बीमारियों से दूर रहते हैं। लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करेंअगर सभी सावधानियों के बावजूद बच्चे में सर्दी, खांसी या किसी भी तरह की परेशानी नजर आए, तो उसे नजरअंदाज न करें। समय रहते डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, ताकि बीमारी बढ़ने से पहले ही उसका इलाज हो सके।
भारतीय ‘राजमा-चावल’ का वैश्विक जलवा: दुनिया की टॉप बीन्स डिशेज में बनाई जगह

नई दिल्ली। भारतीय खानपान के लिए गर्व की बात है कि घर-घर में पसंद किया जाने वाला साधारण लेकिन स्वादिष्ट ‘राजमा-चावल’ अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहा है। अपने गाढ़े स्वाद और घरेलू अंदाज के लिए मशहूर यह नॉर्थ इंडियन व्यंजन दुनिया की बेहतरीन बीन्स डिशेज में शामिल हो गया है। यह उपलब्धि इस बात का संकेत है कि अब भारतीय घरेलू व्यंजन भी वैश्विक स्तर पर पहचान बना रहे हैं और लोगों के दिलों में अपनी जगह बना रहे हैं। ग्लोबल रैंकिंग में मिली जगहहाल ही में फूड रेटिंग प्लेटफॉर्म TasteAtlas द्वारा जारी सूची में राजमा और राजमा-चावल को दुनिया के टॉप 100 बीन्स डिशेज में स्थान दिया गया है। यह रैंकिंग दुनियाभर के हजारों यूजर्स की पसंद के आधार पर तैयार की गई है, जो भारतीय स्वाद की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाती है। रैंकिंग में शानदार प्रदर्शनइस सूची में राजमा को 14वां स्थान मिला है, जबकि राजमा-चावल की जोड़ी 25वें पायदान पर रही। खास बात यह है कि इस लिस्ट में ब्राजील, पुर्तगाल, मैक्सिको और तुर्की जैसे देशों के पारंपरिक व्यंजन भी शामिल हैं, जिनके बीच भारतीय डिश का यह स्थान काफी अहम माना जा रहा है। सिर्फ खाना नहीं, एक एहसासराजमा-चावल एक सरल लेकिन बेहद लोकप्रिय डिश है, जिसमें मसालों में पके लाल राजमा को चावल के साथ परोसा जाता है। जम्मू-कश्मीर, पंजाब और दिल्ली जैसे क्षेत्रों में यह केवल भोजन नहीं, बल्कि भावनाओं से जुड़ा स्वाद है, जो लोगों को घर और बचपन की याद दिलाता है।सादगी में छिपा है असली स्वादइस डिश की खासियत इसकी पारंपरिक तैयारी में है। राजमा को रातभर भिगोकर प्याज, टमाटर, अदरक, लहसुन और मसालों के साथ धीमी आंच पर पकाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और खुशबू गहराई तक विकसित होती है। चावल के साथ परोसे जाने पर यह स्वाद और पोषण का बेहतरीन मेल बन जाता है। टॉप पर रही पुर्तगाल की डिशजहां भारतीय राजमा-चावल ने सूची में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई, वहीं पहला स्थान पुर्तगाल की मशहूर डिश Sopa da pedra को मिला। इसके अलावा टॉप 10 में ब्राजील की फेजोआदा, मैक्सिको की सोपा तारास्का और मिस्र की फुल मेडामेस जैसी डिशेज भी शामिल हैं।
घर पर बनाएं बाजार जैसी गाढ़ी और स्वादिष्ट लस्सी, जानिए आसान टिप्स और सही तरीका..

नई दिल्ली। गर्मियों में ठंडे पेय की चाह बढ़ जाती है, लेकिन बाजार में मिलने वाले सॉफ्ट ड्रिंक्स और कोल्ड ड्रिंक्स में मौजूद केमिकल्स सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। ऐसे में देसी पेय ‘लस्सी’ एक बेहतरीन और हेल्दी विकल्प है, जो न सिर्फ शरीर को ठंडक देती है बल्कि पोषण भी प्रदान करती है। अक्सर लोगों को लगता है कि बाजार जैसी गाढ़ी और स्वादिष्ट लस्सी घर पर बनाना मुश्किल है, लेकिन सही तरीके और कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखकर इसे आसानी से तैयार किया जा सकता है।अच्छी लस्सी के लिए दही का सही चयन जरूरीलस्सी बनाने के लिए ताजा और हल्का खट्टा दही सबसे उपयुक्त माना जाता है। बहुत ज्यादा खट्टा दही स्वाद को बिगाड़ सकता है। दही जितना फ्रेश होगा, लस्सी उतनी ही स्वादिष्ट बनेगी। लस्सी बनाने से पहले दही को अच्छी तरह फेंट लें, ताकि उसमें कोई गांठ न रहे और टेक्सचर स्मूद बने। मीठी और नमकीन लस्सी का सही संतुलनलस्सी को अपनी पसंद के अनुसार मीठा या नमकीन बनाया जा सकता है।– मीठी लस्सी के लिए चीनी, इलायची पाउडर और थोड़ा सा गुलाब जल मिलाएं।– नमकीन लस्सी के लिए काला नमक, भुना जीरा पाउडर और पुदीना डालने से स्वाद और बढ़ जाता है।लस्सी को मथते समय ध्यान रखें कि इसे ज्यादा देर तक ब्लेंड न करें, वरना इसका गाढ़ापन कम हो सकता है।ठंडक और परोसने का सही तरीकालस्सी को ठंडा बनाने के लिए बर्फ डाली जा सकती है, लेकिन अधिक बर्फ डालने से स्वाद हल्का हो जाता है। बेहतर है कि पहले से ठंडा दही इस्तेमाल करें। परोसते समय ऊपर से मलाई या ड्राय फ्रूट्स डालकर इसे और भी स्वादिष्ट बनाया जा सकता है। अगर देसी अंदाज में लस्सी का मजा लेना चाहते हैं, तो इसे मिट्टी के कुल्हड़ में सर्व करना एक अच्छा विकल्प है, जिससे इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है। इस तरह कुछ आसान टिप्स अपनाकर आप घर पर ही बाजार जैसी गाढ़ी, ठंडी और स्वादिष्ट लस्सी तैयार कर सकते हैं।
लापरवाही पड़ी भारी: रतलाम में बिना सूचना गैरहाजिर 11 कर्मचारियों को नोटिस, कार्रवाई तय

रतलाम। मध्य प्रदेश के रतलाम में जनगणना प्रशिक्षण के दौरान बड़ी लापरवाही सामने आई है। भारत की प्रस्तावित जनगणना 2027 के पहले चरण (मकान सूचीकरण और गणना) की तैयारी के तहत चल रहे प्रशिक्षण सत्र में 11 कर्मचारी बिना सूचना के अनुपस्थित पाए गए। इस पर नगर निगम प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी को नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा है। 1 मई से शुरू होगा पहला चरण, ट्रेनिंग में ही लापरवाहीजानकारी के मुताबिक, जनगणना का पहला चरण 1 मई से 30 मई 2026 तक चलेगा। इसके लिए नगर निगम क्षेत्र में प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। 11 से 13 अप्रैल तक आयोजित इस प्रशिक्षण के पहले ही सत्र में 11 कर्मचारी बिना सूचना गायब रहे, जिससे प्रशासन नाराज हो गया। अधिकारियों का सख्त रुख, निलंबन की चेतावनीनोटिस अनिल भाना (नगर निगम आयुक्त एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी) की ओर से जारी किया गया है। स्पष्ट कहा गया है कि यदि संबंधित कर्मचारी 24 घंटे में संतोषजनक जवाब नहीं देते हैं, तो उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाएगी। जनगणना अधिनियम के तहत सजा का प्रावधानप्रशासन ने चेतावनी दी है कि जनगणना अधिनियम 1948 के तहत जनगणना कार्य में लापरवाही गंभीर अपराध है। इसके तहत दोषी पाए जाने पर 1000 रुपए तक का जुर्माना और 3 साल तक की सजा का प्रावधान है। कई विभागों के कर्मचारी शामिलअनुपस्थित कर्मचारियों में शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, मलेरिया विभाग और जिला अस्पताल सहित कई विभागों के कर्मचारी शामिल हैं। इसके अलावा नगर निगम के कुछ कंप्यूटर ऑपरेटर और भृत्य वर्ग के कर्मचारियों को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन का संदेश जनगणना में लापरवाही बर्दाश्त नहींप्रशासन ने साफ किया है कि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समय पर जवाब नहीं मिलने पर सख्त कार्रवाई तय है।
2013 पुणे कार्यक्रम में पीएम मोदी और आशा भोसले की पहली आत्मीय मुलाकात..

नई दिल्ली। मशहूर पार्श्व गायिका आशा भोसले के निधन के बाद उनके और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच वर्षों पुराने संवाद और मुलाकातों से जुड़ी एक भावनात्मक कहानी फिर से चर्चा में आ गई है, जिसने उनके आपसी सम्मान, सादगी और आत्मीय संबंधों को उजागर किया है। इस पूरी कथा में कई ऐसे प्रसंग सामने आए हैं, जिनमें व्यक्तिगत अपनापन और सार्वजनिक जीवन की औपचारिकताओं से परे एक सहज मानवीय संबंध दिखाई देता है। जानकारी के अनुसार, आशा भोसले और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली औपचारिक मुलाकात वर्ष 2013 में पुणे में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान हुई थी, जब दीनानाथ मंगेशकर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के उद्घाटन समारोह में दोनों एक ही मंच पर मौजूद थे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने अत्यंत सरल और आत्मीय अंदाज में उन्हें संबोधित करते हुए पूछा था कि दीदी आप कैसी हैं, जिससे वहां मौजूद लोगों के बीच एक सहज और भावनात्मक वातावरण बन गया था। इस मुलाकात से पहले भी दोनों के बीच एक अनौपचारिक संवाद का उल्लेख मिलता है, जिसमें आशा भोसले ने स्वयं प्रधानमंत्री से संपर्क कर अपने पारिवारिक मूल और गुजरात से जुड़े भावनात्मक संबंधों का जिक्र किया था। उन्होंने उस समय गुजरात के विकास को लेकर भी सकारात्मक विचार व्यक्त किए थे, जिसे एक आत्मीय बातचीत के रूप में देखा गया था। समय के साथ दोनों के बीच यह संबंध और अधिक सम्मानपूर्ण होता गया। विभिन्न अवसरों पर हुई मुलाकातों में प्रधानमंत्री का व्यवहार हमेशा सहज और विनम्र रहा। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने आशा भोसले को दीदी कहकर संबोधित किया और विदाई के समय हाथ जोड़कर नमस्कार करते हुए कहा कि फिर मिलेंगे। यह सादगीपूर्ण व्यवहार आशा भोसले के मन में गहराई तक अंकित हो गया। बताया जाता है कि एक बार प्रधानमंत्री ने बातचीत के दौरान यह भी कहा था कि वे एक बार मिलने वाले व्यक्ति को कभी भूलते नहीं हैं। इस बात का असर आशा भोसले के परिवार पर भी पड़ा और उनके बीच एक भावनात्मक जुड़ाव और मजबूत हुआ। वर्ष 2015 में आशा भोसले के पुत्र के निधन के समय भी यह संबंध सामने आया, जब उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर एक कार्यक्रम में शामिल न हो पाने के लिए क्षमा मांगी थी। इसके जवाब में प्रधानमंत्री ने संवेदना व्यक्त करते हुए शोक संदेश भेजा और दुख की इस घड़ी में समर्थन और सहानुभूति जताई थी। आने वाले वर्षों में भी विभिन्न मंचों पर आशा भोसले ने प्रधानमंत्री के कार्यों और अनुशासन की प्रशंसा की और देश में हो रहे बदलावों को सकारात्मक रूप में स्वीकार किया। उनके बयानों में नेतृत्व के प्रति सम्मान और संतोष की भावना दिखाई देती रही। आशा भोसले का जीवन भारतीय संगीत जगत की एक अमूल्य धरोहर के रूप में देखा जाता है, जिन्होंने अपनी आवाज से कई पीढ़ियों को प्रभावित किया। उनके और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच यह संबंध सादगी, सम्मान और मानवीय जुड़ाव का एक प्रेरक उदाहरण माना जा रहा है।
वारदात से पहले गिरफ्तारी: ग्वालियर में कैंसर हिल्स से भिंड का आरोपी पकड़ा, हथियार भी मिले

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में पुलिस ने समय रहते कार्रवाई करते हुए एक संभावित बड़ी वारदात को टाल दिया। कैंसर हिल्स क्षेत्र में संदिग्ध हालात में खड़े एक बदमाश को क्राइम ब्रांच और कंपू थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी के पास से एक पिस्टल और कारतूस बरामद हुए हैं। पुलिस को देखते ही जंगल की ओर भागा, पीछा कर दबोचाडीएसपी क्राइम ब्रांच नागेन्द्र सिंह सिकरवार के मुताबिक, मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक शातिर बदमाश किसी वारदात को अंजाम देने की फिराक में कैंसर हिल्स इलाके में मौजूद है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और सर्चिंग शुरू की। इसी दौरान एक संदिग्ध युवक सुनसान रास्ते पर खड़ा मिला। पुलिस को देखते ही वह जंगल की ओर भागने लगा, लेकिन टीम ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। पिस्टल और कारतूस बरामद, पूछताछ जारीतलाशी लेने पर आरोपी के पास से एक देसी पिस्टल और जिंदा कारतूस बरामद हुए। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है कि वह किस मंशा से हथियार लेकर वहां मौजूद था और किस वारदात की योजना बना रहा था। भिंड का निगरानीशुदा बदमाश, रिकॉर्ड खंगाल रही पुलिसप्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी अंकुश भिंड जिले के लहार क्षेत्र का रहने वाला है और पुलिस का निगरानीशुदा बदमाश बताया जा रहा है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि के लिए ग्वालियर पुलिस ने भिंड पुलिस से उसका आपराधिक रिकॉर्ड मंगाया है। अधिकारियों के निर्देश पर संयुक्त कार्रवाईइस ऑपरेशन में क्राइम ब्रांच थाना प्रभारी अमित शर्मा और कंपू थाना प्रभारी अमर सिंह सिकरवार की टीम ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की। पुलिस अब आरोपी के नेटवर्क और संभावित साथियों की भी तलाश कर रही है।
मधुमक्खियों का हमला पड़ा भारी: जान बचाने मोबाइल टावर पर चढ़ा युवक, घंटों बाद सुरक्षित उतारा गया

ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक अनोखा लेकिन खतरनाक मामला सामने आया, जहां एक युवक मोबाइल टावर पर चढ़ने के बाद नीचे नहीं उतर सका। घटना पुरानी छावनी थाना क्षेत्र स्थित सम्राट मैरिज गार्डन के पास की है, जहां करीब 60 मीटर ऊंचे टावर पर युवक फंस गया। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और करीब एक घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद उसे सुरक्षित नीचे उतार लिया। मेंटेनेंस के दौरान हुआ हादसायुवक की पहचान बंटी रावत के रूप में हुई है, जो एक टेलीकॉम कंपनी में टावर मेंटेनेंस का काम करता है। वह नियमित जांच के लिए टावर पर चढ़ा था, लेकिन इसी दौरान एक अप्रत्याशित घटना ने उसे मुश्किल में डाल दिया। मधुमक्खियों के हमले से बढ़ी मुश्किलटावर पर काम करते समय अचानक मधुमक्खियों के झुंड ने उस पर हमला कर दिया। खुद को बचाने के प्रयास में वह और ऊपर चढ़ गया, लेकिन बाद में नीचे उतरने की हिम्मत नहीं जुटा पाया और वहीं फंस गया। स्थिति को देखकर आसपास के लोगों ने तुरंत पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। एक घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशनमौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड टीम ने पहले स्थिति का जायजा लिया और फिर सावधानीपूर्वक रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद युवक को सुरक्षित नीचे उतार लिया गया। समय रहते कार्रवाई होने से बड़ा हादसा टल गया। प्राथमिक उपचार के बाद हालत सामान्यनीचे उतारने के बाद युवक को प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस के अनुसार उसकी हालत अब सामान्य है और उसे कोई गंभीर चोट नहीं आई है।
ग्वालियर में इंस्पेक्टर पर रेप का आरोप: फेसबुक दोस्ती के बाद शादी का झांसा, केस दर्ज

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक पुलिस इंस्पेक्टर पर दुष्कर्म का गंभीर आरोप लगा है। झांसी रोड थाना में दर्ज एफआईआर के मुताबिक, आरोपी इंस्पेक्टर रूपेश शर्मा ने फेसबुक के जरिए महिला से दोस्ती कर उसे शादी का झांसा दिया और उसके साथ दुष्कर्म किया। शिकायत करने वाली 38 वर्षीय महिला शहर में बुटीक चलाती है और वर्तमान में 9 महीने की गर्भवती बताई जा रही है।फेसबुक से शुरू हुई दोस्ती, खुद को बताया अविवाहित पीड़िता के अनुसार, जनवरी 2024 में सोशल मीडिया के जरिए उसकी पहचान रूपेश शर्मा से हुई। बातचीत बढ़ने के साथ दोनों के बीच नजदीकियां भी बढ़ीं। इस दौरान आरोपी ने खुद को अविवाहित बताया और महिला को भरोसे में लिया, जबकि हकीकत में वह पहले से शादीशुदा और दो बच्चों का पिता है।शादी का झांसा देकर बनाए संबंध महिला का आरोप है कि 2024 में ही आरोपी पहली बार उसके बुटीक पर आया, जहां उसने जबरन संबंध बनाए। विरोध करने पर उसने शादी का वादा कर मामला शांत कराया। इसके बाद भी वह लगातार शादी का आश्वासन देकर महिला के साथ संबंध बनाता रहा। जब महिला ने शादी के लिए दबाव बनाया तो आरोपी टालमटोल करने लगा।सच्चाई सामने आई तो दी धमकी शक होने पर महिला ने आरोपी के बारे में जानकारी जुटाई, जिसमें उसकी शादी और बच्चों की सच्चाई सामने आई। विरोध करने पर इंस्पेक्टर ने उसे धमकाया। इसके बाद पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जांच के बाद देर रात आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया।ड्यूटी से गायब आरोपी, विभागीय कार्रवाई की तैयारी मामले के सामने आने के बाद आरोपी इंस्पेक्टर रूपेश शर्मा का मोबाइल बंद है और वह बिना सूचना ड्यूटी से भी गायब बताया जा रहा है। अखिलेश रैनवाल (एसपी, पीटीएस तिघरा) ने कहा कि मामले की जानकारी मिलने के बाद विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी।पुलिस जांच जारी, गिरफ्तारी की तैयारी पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आरोपी की तलाश की जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर सोशल मीडिया के जरिए बढ़ते अपराधों और भरोसे के दुरुपयोग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विज्ञान भवन में नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में पीएम मोदी ने महिला नेतृत्व को बताया देश की प्रगति का आधार

नई दिल्ली। राजधानी के विज्ञान भवन में आयोजित नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला सशक्तिकरण और नेतृत्व की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि जब निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ती है तो पूरा शासन तंत्र अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और जनहितकारी बनता है। उन्होंने कहा कि महिला नेतृत्व केवल सामाजिक बदलाव का प्रतीक नहीं है बल्कि यह एक मजबूत और प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था की नींव भी है, जिससे देश के विकास को नई दिशा मिलती है। प्रधानमंत्री ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2023 में इसे सभी राजनीतिक दलों की सहमति से पारित किया गया था, जो भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता और एकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी और अधिक प्रभावी और निर्णायक बने, ताकि नीति निर्माण में उनका योगदान और मजबूत हो सके। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने देश में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को भारत की प्रगति का सबसे बड़ा आधार बताया। उन्होंने कहा कि आज देश के सर्वोच्च पदों से लेकर पंचायत स्तर तक महिलाएं सक्रिय भूमिका निभा रही हैं और अपने दायित्वों को अत्यंत कुशलता और समर्पण के साथ निभा रही हैं। यह बदलाव न केवल शासन व्यवस्था को मजबूत कर रहा है बल्कि समाज की सोच में भी सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है। प्रधानमंत्री ने पंचायत स्तर पर महिलाओं की भागीदारी को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया और कहा कि लाखों महिलाएं स्थानीय निकायों में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। कई राज्यों में पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी लगभग आधी तक पहुंच चुकी है, जो भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को और अधिक सशक्त बना रही है। उन्होंने कहा कि विभिन्न अध्ययनों में यह स्पष्ट हुआ है कि जहां निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ती है वहां व्यवस्था अधिक पारदर्शी और संवेदनशील बनती है। जल जीवन मिशन जैसी योजनाएं इसका सशक्त उदाहरण हैं, जहां महिलाओं की सक्रिय भूमिका ने ग्रामीण जीवन में बड़ा परिवर्तन लाया है। प्रधानमंत्री ने जनधन योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले करोड़ों महिलाएं बैंकिंग व्यवस्था से दूर थीं, लेकिन अब करोड़ों बैंक खाते खुलने से उनकी आर्थिक भागीदारी में बड़ा बदलाव आया है। इससे महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता मिली है और वे देश की विकास यात्रा का मजबूत हिस्सा बनी हैं। उन्होंने मुद्रा योजना और स्टार्टअप क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में महिलाएं उद्यमिता और स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिल रही है। प्रधानमंत्री ने मातृत्व अवकाश को बढ़ाकर 26 सप्ताह किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह निर्णय महिलाओं के कार्यस्थल पर सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने स्किल इंडिया मिशन और ड्रोन दीदी जैसी पहलों को महिला सशक्तिकरण की नई पहचान बताते हुए कहा कि महिलाएं अब कृषि, तकनीक और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में भी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि महिला नेतृत्व वाला विकास भारत को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण आधार बन चुका है, जिससे न केवल महिलाओं का जीवन बदल रहा है बल्कि पूरे समाज की दिशा और सोच भी बदल रही है।