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UAE ने मांगा अरबों का कर्ज, पाकिस्तान पर बढ़ा दबाव; सऊदी अरब से बढ़ी उम्मीदें

इस्लामाबाद। आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए नया संकट खड़ा हो गया है। संयुक्त अरब अमीरात द्वारा अरबों डॉलर का कर्ज वापस मांगे जाने के बीच अब सऊदी अरब एक बार फिर उसके लिए ‘संकटमोचक’ के रूप में उभरता नजर आ रहा है। इसी कड़ी में सऊदी वित्त मंत्री मोहम्मद अल-जदान का इस्लामाबाद दौरा काफी अहम माना जा रहा है। इसे पाकिस्तान को संभावित आर्थिक राहत के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी नेतृत्व के प्रति आभार जताते हुए कहा कि सऊदी सहयोग ने देश की आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। UAE का कर्ज लौटाने से बढ़ेगी मुश्किलें जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान 2018 में लिए गए 3 अरब डॉलर से अधिक के कर्ज को UAE को लौटाने की प्रक्रिया में है। यह राशि उसके विदेशी मुद्रा भंडार का करीब 18 प्रतिशत है। ऐसे में भुगतान से देश की आर्थिक स्थिति पर सीधा दबाव पड़ना तय माना जा रहा है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के अनुसार, मार्च के अंत तक देश के पास करीब 16.4 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार था, जो लगभग तीन महीने के आयात के लिए पर्याप्त माना जाता है। खाड़ी देशों के बदलते समीकरण विशेषज्ञों का मानना है कि UAE द्वारा कर्ज रोलओवर से इनकार केवल आर्थिक नहीं, बल्कि बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों का भी संकेत हो सकता है। खासकर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े हालात के बीच यह कदम अहम माना जा रहा है। हालांकि पाकिस्तान ने इसे सामान्य वित्तीय प्रक्रिया बताया है। सऊदी-पाकिस्तान रक्षा सहयोग भी मजबूत इस बीच सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रणनीतिक साझेदारी भी गहरी होती दिख रही है। सऊदी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, पाकिस्तानी वायुसेना का एक दल पूर्वी क्षेत्र स्थित किंग अब्दुलअजीज एयर बेस पर तैनात किया गया है। इसमें लड़ाकू और सहायक विमान शामिल हैं, जिनका उद्देश्य सैन्य समन्वय और ऑपरेशनल तैयारियों को मजबूत करना है। IMF और कर्ज भुगतान की दोहरी चुनौती पाकिस्तान पर इस महीने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को 1.3 अरब डॉलर के बॉन्ड का भुगतान भी करना है। साथ ही वह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से 1.2 अरब डॉलर की अगली किस्त का इंतजार कर रहा है। आर्थिक जानकारों का कहना है कि UAE के अचानक रुख ने पाकिस्तान की वित्तीय योजना को झटका दिया है। अब देश को विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट से बचने और आर्थिक संतुलन बनाए रखने के लिए सऊदी अरब सहित अन्य सहयोगी देशों पर अधिक निर्भर रहना पड़ सकता है। कुल मिलाकर, मौजूदा हालात में पाकिस्तान के लिए आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियां बढ़ती दिख रही हैं, और उसकी नजरें एक बार फिर सऊदी समर्थन पर टिकी हैं।

भारत से इतनी नफरत, पाकिस्तान में आशा भोसले के गाने चलाए तो चैनल को नोटिस भेजा

इस्‍लामाबाद। दिग्गज भारतीय गायिका आशा भोसले पर कंटेंट चलाने को लेकर पाकिस्तान में एक चैनल को कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। पाकिस्तान में नियामक की तरफ से जारी पत्र में कहा गया है कि भारतीय कंटेंट का प्रसारण करना मना है। साथ ही चैनल से इस संबंध में जवाब भी तलब किया गया है। भोसले का रविवार को मुंबई के अस्पताल में निधन हो गया था। सोमवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया। पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक प्राधिकरण (PEMRA) ने जियोन्यूज को कारण बताओ नोटिस जारी कर यह स्पष्टीकरण मांगा है कि उसने भोसले की मौत की खबर के साथ भारतीय सामग्री क्यों प्रसारित की। पाकिस्तान में भारतीय कंटेंट पर प्रतिबंध 2018 से लागू है। PEMRA ने कहा कि भोसले की मौत की खबर प्रसारित करते समय जियोन्यूज ने भारतीय गाने और भारतीय फिल्मों के दृश्य प्रसारित करना, पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले का जानबूझकर उल्लंघन है। जिसमें भारतीय सामग्री के प्रसारण पर प्रतिबंध लगाया गया है। जियोन्यूज के प्रबंध निदेशक अजहर अब्बास ने एक पोस्ट में कहा, ‘प्रतिष्ठित कलाकारों के बारे में रिपोर्टिंग करते समय उनके कार्यों को याद करना और उनकी सराहना करना हमेशा से एक परंपरा रही है। वास्तव में, आशा भोसले जैसी कलाकार के लिए, हमें उनके कालजयी और यादगार गीतों को और भी अधिक साझा करना चाहिए था। फिर भी, पाकिस्तान के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक, PEMRA ने इसे प्रतिबंधित करने का विकल्प चुना है।’ भोसले का मुंबई के शिवाजी पार्क श्मशान घाट पर सोमवार शाम हिंदू रीति-रिवाज और पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। संगीत जगत की जानी-मानी हस्ती को अंतिम विदाई देने के लिए शिवाजी पार्क के अंदर और बाहर काफी संख्या में लोग एकत्र थे। पृष्ठभूमि में आशा का गाया गीत, ‘अभी ना जाओ छोड़कर…’ बज रहा था। लता मंगेशकर की बहनों में से एक, आशा भोसले का रविवार को निधन हो गया था। वह 92 वर्ष की थीं। उनकी बड़ी बहन लता का भी फरवरी 2022 में 92 वर्ष की आयु में रविवार के ही दिन निधन हुआ था। भोसले के बेटे आनंद ने उन्हें मुखाग्नि दी। आशा भोसले ने महज 10 साल की उम्र में गाना शुरू किया था और वह आठ दशक लंबे अपने करियर में लगभग 12,000 गीत गाए। दिवंगत गायिका को अंतिम विदाई देने वालों में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार तथा निर्देशक रमेश सिप्पी, अभिनेता आमिर खान और विक्की कौशल शामिल थे।

तेज रफ्तार का कहर: शिवपुरी में ट्रक खाई में पलटा, दूसरे वाहन सुरक्षित रहे

शिवपुरी। शिवपुरी जिले के लुकवासा चौकी क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-46 पर सोमवार दोपहर एक बड़ा सड़क हादसा होते-होते टल गया। जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र के औरंगाबाद से अलीगढ़ की ओर जा रहा एक मालवाहक ट्रक दैहरदा ब्रिज से उतरते समय अचानक अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरा। ब्रिज से उतरते ही बिगड़ा संतुलन, चालक ने खोया नियंत्रणप्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रक जैसे ही दैहरदा ब्रिज से नीचे उतरा, वह अचानक लहराने लगा और चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका। इसके बाद ट्रक सीधे सड़क किनारे खाई में जा गिरा। ट्रक में बजाज ऑटोमोबाइल्स का सामान लदा हुआ था, जिससे दुर्घटना के समय स्थिति और भी गंभीर हो सकती थी। नींद की झपकी या तकनीकी कारण, जांच जारीट्रक चालक फरीद, जो मेवात का रहने वाला है, ने बताया कि हादसा अचानक हुआ और वह कारण स्पष्ट नहीं बता सका। शुरुआती आशंका यह जताई जा रही है कि चालक को नींद की झपकी आने के कारण वाहन पर नियंत्रण खो गया होगा, हालांकि वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है। बड़ा हादसा टला, अन्य वाहन सुरक्षितइस घटना का सबसे राहत भरा पहलू यह रहा कि ट्रक किसी अन्य वाहन से नहीं टकराया। हादसे के समय सड़क पर मौजूद अन्य चारपहिया और दोपहिया वाहन इसकी चपेट में आने से बच गए, जिससे एक बड़ा और जानलेवा हादसा टल गया। प्रशासनिक जांच की संभावनाघटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा और स्थिति का जायजा लिया। सड़क सुरक्षा और दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच की संभावना जताई जा रही है।

बॉर्डर पार भी बॉलीवुड का क्रेज मर्दानी 3 टॉप पर ,धुरंधर समेत ये फिल्में भी ट्रेंड में

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा का जादू केवल देश तक सीमित नहीं है बल्कि सरहदों के पार भी इसका असर साफ दिखाई देता है। इसका ताजा उदाहरण पाकिस्तान में देखने को मिल रहा है जहां नेटफ्लिक्स पर कई भारतीय फिल्में जबरदस्त तरीके से ट्रेंड कर रही हैं। खास बात यह है कि इस लिस्ट में बड़े बजट और चर्चित फिल्मों को पीछे छोड़ते हुए एक सस्पेंस क्राइम थ्रिलर ने नंबर वन की कुर्सी पर कब्जा जमा लिया है। इस समय पाकिस्तान में जो भारतीय फिल्म सबसे ज्यादा देखी जा रही है वह है मर्दानी 3। रानी मुखर्जी की यह फिल्म दर्शकों को बेहद पसंद आ रही है और वह एक बार फिर पुलिस अधिकारी शिवानी शिवाजी रॉय के किरदार में मजबूत और दमदार अंदाज में नजर आ रही हैं। फिल्म की कहानी और उसका सस्पेंस दर्शकों को अंत तक बांधे रखने में कामयाब रहा है जिसकी वजह से यह टॉप पोजीशन पर बनी हुई है। दूसरे नंबर पर जगह बनाई है वध 2 ने जो अपनी गहरी कहानी और दमदार अभिनय के कारण चर्चा में है। संजय मिश्रा और नीना गुप्ता जैसे अनुभवी कलाकारों की मौजूदगी इस फिल्म को और खास बनाती है। यह फिल्म अपने इमोशनल और थ्रिलिंग कंटेंट के कारण दर्शकों से जुड़ने में सफल रही है। वहीं तीसरे स्थान पर ट्रेंड कर रही है धुरंधर जो पहले से ही चर्चा में रही है। रणवीर सिंह की इस फिल्म का ओटीटी पर भी शानदार प्रदर्शन जारी है। हालांकि बड़े पैमाने पर चर्चा में रहने के बावजूद यह मर्दानी 3 से पीछे रह गई है जो अपने आप में दिलचस्प बात है। इसके अलावा लिस्ट में हैप्पी पटेल खतरनाक जासूस भी शामिल है जिसका दर्शक लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। फिल्म में कॉमेडी और जासूसी का मिश्रण दर्शकों को खूब एंटरटेन कर रहा है और यही वजह है कि यह भी ट्रेंडिंग लिस्ट में अपनी जगह बनाए हुए है। पुरानी फिल्मों का क्रेज भी कम नहीं हुआ है। मर्दानी 2 और मर्दानी भी पाकिस्तान में लगातार ट्रेंड कर रही हैं। यह दिखाता है कि मजबूत कहानी और दमदार किरदार वाली फिल्मों की लोकप्रियता समय के साथ कम नहीं होती बल्कि और बढ़ती जाती है। इस पूरी लिस्ट से एक बात साफ हो जाती है कि भारतीय फिल्मों की पहुंच अब वैश्विक हो चुकी है। कंटेंट अगर दमदार हो तो भाषा और सीमाएं मायने नहीं रखतीं। खासकर सस्पेंस और क्राइम थ्रिलर जैसी शैलियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी पसंद किया जा रहा है। पाकिस्तान में इन फिल्मों का ट्रेंड करना इस बात का संकेत है कि दर्शक अब केवल मसाला एंटरटेनमेंट ही नहीं बल्कि मजबूत कहानी और बेहतरीन अभिनय को भी महत्व दे रहे हैं। आने वाले समय में यह ट्रेंड और मजबूत हो सकता है जहां भारतीय फिल्में दुनिया के अलग अलग हिस्सों में अपनी पहचान और भी मजबूत करेंगी।

‘जय श्री राम’ बोलने पर 500 रुपये की छूट: कोलकाता के डॉक्टर के ऑफर पर सियासी बवाल

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक हृदय रोग विशेषज्ञ (Cardiologist) के अनोखे ऑफर ने राजनीतिक गलियारों में विवाद खड़ा कर दिया है। डॉक्टर ने घोषणा की है कि जो भी मरीज उनके क्लिनिक में आकर ‘जय श्री राम’ कहेगा, उसे कंसल्टेशन फीस में 500 रुपये की भारी छूट दी जाएगी। डॉक्टर ने अपने इस कदम को राज्य में ‘राजनीतिक बदलाव’ की उम्मीद से जोड़ा है। इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. पी.के. हाजरा ने यह छूट केवल दक्षिण कोलकाता स्थित अपने निजी चेंबर पर लागू की है। वे एक प्राइवेट अस्पताल में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी विभाग के निदेशक भी हैं, लेकिन वहां यह छूट लागू नहीं होगी। डॉ. हाजरा ने अपने क्लिनिक पर एक पोस्टर लगाया है, जिसमें वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दुपट्टा पहने नजर आ रहे हैं। उन्होंने यह जानकारी सोशल मीडिया पर भी शेयर की है। डॉक्टर के मुताबिक, यह पोस्टर उनके ही एक मरीज ने तैयार किया था। डॉ. हाजरा ने कहा कि यह पूरी तरह से उनके दिमाग की उपज है। उन्होंने अपनी मंशा स्पष्ट करते हुए कहा: पिछले कई वर्षों में एक डॉक्टर के तौर पर मैंने मरीजों के सवाल झेले हैं कि आखिर उन्हें इलाज के लिए दूसरे राज्यों में क्यों जाना पड़ता है। जब भी मैं बंगाल के मरीजों को इलाज के लिए असम, ओडिशा या दक्षिण भारत जाते देखता हूं, तो मुझे बहुत बुरा लगता है। इसके विपरीत दूसरे राज्यों से लोग यहां नहीं आते। मुझे लगता है कि इस चलन को बदलने की जरूरत है। डॉक्टर ने आगे कहा कि वह सीधे तौर पर भाजपा से नहीं जुड़े हैं, लेकिन वह भाजपा शासित अन्य राज्यों की प्रगति के प्रशंसक हैं। डॉ. हाजरा ने स्वीकार किया कि उन्हें अपने गृह जिले पश्चिम मेदिनीपुर के पिंगला से भाजपा का टिकट मिलने की उम्मीद थी। जब ऐसा नहीं हुआ, तो उन्होंने लोगों को राज्य में बदलाव के लिए वोट करने हेतु प्रेरित करने का यह अनोखा तरीका निकाला। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काम की तारीफ भी की, लेकिन कहा कि अन्य राज्यों की विकास गति को देखते हुए बंगाल पिछड़ रहा है। उनके अनुसार, केंद्र और टीएमसी सरकार के बीच चल रही “खींचतान” का सीधा असर राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली पर पड़ा है। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पेशे से चिकित्सक डॉ. निर्मल माझी ने इस कदम की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया: डॉ. हाजरा अपनी जुटाई गई अपार संपत्ति की रक्षा करने के लिए भाजपा का पक्ष लेने की कोशिश कर रहे हैं। वह खुद को बचाने के लिए भाजपा की ‘वाशिंग मशीन’ में घुसकर अपनी छवि साफ करना चाहते हैं। माझी ने यह भी दावा किया कि ऐसे कदमों से भाजपा को चुनाव जीतने में कोई मदद नहीं मिलेगी क्योंकि जनता का समर्थन टीएमसी के साथ है। भाजपा के राज्यसभा सांसद और बंगाल के पूर्व भाजपा अध्यक्ष राहुल सिन्हा ने डॉ. हाजरा के इस कदम की सराहना की। उन्होंने कहा: मुझे लगता है कि यह पहल अन्य डॉक्टरों को भी आगे आने और ऐसे फैसले लेने के लिए प्रेरित करेगी, ताकि राज्य के स्वास्थ्य ढांचे की बेहतरी के लिए बदलाव लाया जा सके। बता दें कि पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है, और मतों की गिनती 4 मई को की जाएगी।

फर्जी न्यायिक अधिकारी बनकर घूम रहे दो आरोपी गिरफ्तार, दिल्ली पुलिस ने अवैध हथियार और जाली दस्तावेज किए बरामद

नई दिल्ली:   राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें दो व्यक्तियों को फर्जी पहचान और अवैध हथियारों के साथ गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि इनमें से एक व्यक्ति ने खुद को न्यायिक अधिकारी बताकर न केवल सरकारी पहचान का दुरुपयोग किया बल्कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए सुरक्षा व्यवस्था को गुमराह करने की कोशिश भी की। यह कार्रवाई राजधानी में बढ़ती सुरक्षा सतर्कता के बीच की गई है, जहां संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही थी। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान झांसी जिले के रहने वाले 31 वर्षीय सूर्या अग्रवाल और 21 वर्षीय निखिल यादव के रूप में हुई है। दोनों पर आरोप है कि वे फर्जी पहचान और अवैध हथियारों के सहारे खुद को प्रभावशाली और आधिकारिक पदों से जुड़ा दिखाने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस ने बताया कि यह कार्रवाई संसद मार्ग थाना क्षेत्र में उस समय की गई जब एक संदिग्ध वाहन की गतिविधियों पर शक हुआ और उसे रोककर जांच शुरू की गई। जानकारी के अनुसार, एक एसयूवी वाहन बिना पंजीकरण नंबर प्लेट के चल रही थी और उस पर काली फिल्म चढ़ी हुई थी, जो नियमों के खिलाफ है। वाहन पर न्यायिक अधिकारी से जुड़ा एक स्टिकर भी लगा हुआ था, जिससे संदेह और गहरा गया। इसी आधार पर पुलिस ने वाहन को रोककर तलाशी ली। जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए, उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों को भी सतर्क कर दिया। तलाशी में निखिल यादव के पास से एक पिस्तौल और चार जिंदा कारतूस बरामद किए गए, जबकि सूर्या अग्रवाल के पास से पांच जिंदा कारतूस मिले। इसके अलावा जांच में यह भी सामने आया कि अग्रवाल खुद को वकील और एक सिविल जज के रूप में पेश कर रहा था। उसने एक न्यायिक पहचान पत्र और दिल्ली में हथियार ले जाने की अनुमति से जुड़ा एक दस्तावेज भी दिखाया, जिसे बाद में फर्जी पाया गया। पुलिस की सत्यापन प्रक्रिया में यह स्पष्ट हुआ कि प्रस्तुत किए गए पहचान पत्र और अनुमति पत्र पूरी तरह से जाली और डिजिटल रूप से बदले गए थे। हालांकि अग्रवाल के पास उत्तर प्रदेश में जारी एक वैध हथियार लाइसेंस था, लेकिन यह केवल उसी राज्य तक सीमित था और उसे दिल्ली में हथियार ले जाने की कोई अनुमति नहीं देता था। इस गंभीर अनियमितता के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इस पूरे प्रकरण में पुलिस ने न केवल अवैध हथियार बल्कि फर्जी दस्तावेज, संदिग्ध स्टिकर और संबंधित वाहन को भी जब्त कर लिया है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी लंबे समय से अपनी पहचान को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे थे और खुद को प्रभावशाली पदों से जोड़कर पेश कर रहे थे। पुलिस अब इस बात की जांच में जुटी है कि इन फर्जी दस्तावेजों को तैयार करने में और कौन लोग शामिल हो सकते हैं और क्या यह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा है। सुरक्षा एजेंसियां इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही हैं ताकि इस तरह की घटनाओं को भविष्य में रोका जा सके। KeywordsFake Judicial Officer, Delhi Police Arrest, Illegal Weapons Case, Forged Documents, Security Breach India, Crime News Delhi, Weapon Seizure Case संक्षिप्त विवरण

गोल्डन डक से बना काला अध्याय अभिषेक शर्मा ने तोड़ा रोहित शर्मा का अनचाहा रिकॉर्ड

नई दिल्ली । आईपीएल 2026 के रोमांचक सीजन के बीच एक ऐसा आंकड़ा सामने आया है जिसने क्रिकेट प्रेमियों को हैरान कर दिया है। सनराइजर्स हैदराबाद के युवा ओपनर अभिषेक शर्मा के नाम एक ऐसा रिकॉर्ड दर्ज हो गया है जिसे कोई भी बल्लेबाज अपने करियर से जोड़ना नहीं चाहेगा। राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ खेले गए मुकाबले में वह पहली ही गेंद पर आउट हो गए और इस गोल्डन डक के साथ उन्होंने साल 2026 में टी20 क्रिकेट में सातवीं बार शून्य पर आउट होने का अनचाहा आंकड़ा छू लिया। यह केवल एक खराब पारी नहीं थी बल्कि एक ऐसे सिलसिले की कड़ी थी जो अब चिंता का विषय बन चुका है। अभिषेक ने इस प्रदर्शन के साथ एक कैलेंडर वर्ष में किसी भारतीय बल्लेबाज द्वारा सबसे ज्यादा बार शून्य पर आउट होने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। इससे पहले यह रिकॉर्ड रोहित शर्मा और संजू सैमसन के नाम था जिन्होंने अलग अलग सालों में छह छह बार शून्य पर आउट होने का आंकड़ा छुआ था। लेकिन अभिषेक ने इस आंकड़े को पीछे छोड़ते हुए नया नकारात्मक रिकॉर्ड बना दिया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जहां रोहित शर्मा और संजू सैमसन ने अपने रिकॉर्ड 32 पारियों में बनाए थे वहीं अभिषेक शर्मा ने मात्र 18 पारियों में ही सात बार शून्य पर आउट होकर यह आंकड़ा हासिल कर लिया। यह आंकड़ा उनकी आक्रामक शैली के साथ साथ उनकी अस्थिरता को भी उजागर करता है। हालांकि उनके बल्लेबाजी आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर पूरी तरह निराशाजनक नहीं है। आईपीएल 2026 में उन्होंने अब तक पांच पारियों में 25.80 की औसत और 215.80 के जबरदस्त स्ट्राइक रेट से 129 रन बनाए हैं जिसमें उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 74 रन रहा है। आईपीएल से पहले खेले गए टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भी उनका प्रदर्शन उतार चढ़ाव से भरा रहा। दुनिया के नंबर एक टी20 बल्लेबाज के रूप में मैदान पर उतरे अभिषेक अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरे नहीं उतर सके और आठ पारियों में केवल 141 रन ही बना पाए। हालांकि न्यूजीलैंड के खिलाफ फाइनल मुकाबले में 52 रन की अहम पारी खेलकर उन्होंने अपनी क्षमता का परिचय जरूर दिया। अगर साल 2026 के कुल प्रदर्शन पर नजर डालें तो उन्होंने 18 टी20 मैचों में 26.58 की औसत और 203.60 के स्ट्राइक रेट से 452 रन बनाए हैं। इस दौरान उनके बल्ले से पांच अर्धशतक निकले हैं लेकिन सात बार शून्य पर आउट होना उनकी निरंतरता पर सवाल खड़े कर रहा है। राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ मुकाबले में अभिषेक की विफलता के बावजूद सनराइजर्स हैदराबाद की टीम ने शानदार प्रदर्शन किया। ईशान किशन ने जिम्मेदारी संभालते हुए 44 गेंदों में 91 रन की विस्फोटक पारी खेली और टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया। उनके साथ हेनरिच क्लासेन और ट्रेविस हेड ने भी अहम योगदान दिया जिससे टीम ने 20 ओवर में 216 रन बनाए। जवाब में राजस्थान रॉयल्स की शुरुआत बेहद खराब रही और टीम ने शुरुआती तीन ओवर में ही पांच विकेट गंवा दिए। सनराइजर्स के गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए विपक्षी टीम को 159 रन पर समेट दिया और 57 रन से बड़ी जीत दर्ज की। इस पूरे मुकाबले में जहां एक तरफ हैदराबाद की जीत ने टीम को मजबूती दी वहीं दूसरी तरफ अभिषेक शर्मा का यह रिकॉर्ड चर्चा का केंद्र बन गया है। यह आंकड़ा उनके लिए एक चेतावनी की तरह है कि आक्रामकता के साथ निरंतरता भी उतनी ही जरूरी है। आने वाले मैचों में सभी की नजरें इस बात पर होंगी कि क्या वह इस दबाव से उबरकर अपने खेल को नई दिशा दे पाते हैं या नहीं।

किन्नर समाज की आस्था का अनोखा केंद्र: जहां माता करती हैं मुर्गे की सवारी

मेहसाणा। देश में एक से बढ़कर एक मंदिर हैं जिनके लिए भक्तों की आस्था गहरी है. कुछ मंदिर रहस्‍यों से भरे है तो कुछ मंदिर आश्चर्य का कारण बनते हैं. इस कड़ी में हम गुजरात के मेहसाणा जिले में स्थित देवी बहुचरा माता मंदिर के बारे में जानेंगे जहां से किन्नर समाज की गहरी आस्था जुड़ी है. देश के कोने-कोने से यहां किन्नर पहुंचते हैं और बहुचरा माता को अर्धनारीश्वर के रूप में पूजकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें. आइए बहुचरा माता मंदिर के बारे में विस्तार से जानते हैं. बहुचरा देवी मंदिर की मान्यता स्‍थानीय मान्यताओं के अनुसार बहुचरा माता ने एक साथ बहुत सारे राक्षसों का अंत किया था जिसके कारण देवी का नाम बहुचरा पड़ा. मंद‍िर में बहुत सारे मुर्गे घूमते है जिसके कारण मंदिर को मुर्गों वाली देवी के रूप में भी जाना जाता है. माता बहुचरा मुर्गे की सवारी करती है. यह मंदिर किन्नरों के लिए गहरी आस्था का केंद्र है. मंदिर को लेकर मान्‍यता है क‍ि जो भी व्यक्ति इस मंदिर में पूजा कर माता का आशीर्वाद लेता है उसे अगले किसी भी जन्म में क‍िन्‍नर के रूप में नहीं जन्‍म लेना पड़ता. वहीं, संतान प्राप्ति की इच्छा भी देवी बहुचरा पूरी करती है. मान्यता है कि जब माता के आशीर्वाद से संतान प्राप्ति हो जाती है तो बच्चे के केश मंदिर में छोड़े जाती है और मंदिर में मुर्गों के दान भी किया जाता है. ……………….

नाबालिगों के साथ कथित अपराध का मामला: चाइल्ड होम में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से सामने आया यह मामला पूरे प्रदेश को झकझोर देने वाला है। वर्ष 2016 में एक चाइल्ड केयर सेंटर से भागी दो नाबालिग लड़कियों ने पुलिस पूछताछ में जो खुलासे किए, उन्होंने बाल संरक्षण व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया। शुरुआत में गुमशुदगी के तौर पर दर्ज यह मामला तब सनसनीखेज मोड़ पर पहुंच गया जब लड़कियों ने बालगृह के अंदर कथित शोषण की बात बताई। सुरक्षित आश्रय बना डर का ठिकानाशहर के बीच स्थित माधव बाल आश्रम को अनाथ और बेसहारा लड़कियों के लिए सुरक्षित स्थान माना जाता था। यहां पुलिस द्वारा बरामद नाबालिग बच्चियों को भी रखा जाता था। 1997 से संचालित इस संस्था का संचालन समाजसेवी शैला अग्रवाल और उनके पिता केएन अग्रवाल द्वारा किया जाता था। बाहर से यह संस्था बेहद प्रतिष्ठित और विश्वसनीय मानी जाती थी, जहां प्रशासनिक अधिकारियों और नेताओं की भी भागीदारी रहती थी। काउंसलिंग में सामने आए चौंकाने वाले संकेतचाइल्ड काउंसलर द्वारा की गई शुरुआती काउंसलिंग के दौरान ही माहौल पर संदेह गहराने लगा। एक पीड़िता ने इशारों में बताया कि बालगृह में सब कुछ ठीक नहीं है और विरोध करने पर मारपीट की जाती है। जैसे ही संचालक वहां पहुंचीं, बच्ची चुप हो गई, जिससे संदेह और मजबूत हो गया। इसके बाद मामले की जानकारी बाल कल्याण समिति और वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई। रात में नशीला खाना और कथित शोषण के आरोपकाउंसलिंग के दौरान सामने आए आरोपों में कहा गया कि रात के समय भोजन में नशीला पदार्थ मिलाया जाता था, जिसके बाद कई लड़कियां बेहोशी की स्थिति में चली जाती थीं। पीड़िताओं ने यह भी बताया कि सुबह उठने पर उन्हें दर्द और असहजता महसूस होती थी। कई बार विरोध करने पर मारपीट और धमकियों का भी सामना करना पड़ता था। मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के गंभीर आरोपलड़कियों के अनुसार, आश्रम में डर और दहशत का माहौल था। किसी भी विरोध पर उन्हें अपमानित किया जाता और धमकाया जाता था। यहां तक कि उनके कपड़े फटे हुए या अस्त-व्यस्त हालत में पाए जाने की बातें भी सामने आईं। पीड़िताओं ने बताया कि वे लंबे समय तक डर के कारण कुछ भी बोल नहीं पाईं। प्रशासन में मचा हड़कंप, जांच के आदेशमामले के सामने आने के बाद जिला प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। तत्काल आश्रम में जांच शुरू की गई और अन्य बच्चियों की भी काउंसलिंग कराई गई ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके। अधिकारियों ने इसे बेहद गंभीर मामला मानते हुए उच्च स्तरीय जांच की प्रक्रिया शुरू की। कई गंभीर सवाल खड़े हुएइस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं क्या बालगृह में चल रहे इस कथित अपराध में अंदरूनी लोग शामिल थे या बाहरी लोग? कितनी बच्चियां इस शोषण का शिकार हुईं? और सबसे बड़ा सवाल, क्या वर्षों तक चल रही यह गतिविधि प्रशासन की नजर से छिपी रही?

भीषण गर्मी पर महाराष्ट्र सरकार का बड़ा प्रहार, दोपहर 12 से 4 बजे तक आउटडोर काम पर पूर्ण प्रतिबंध लागू

नई दिल्ली:   महाराष्ट्र में बढ़ती गर्मी और लगातार तेज हो रही हीटवेव के खतरे को देखते हुए राज्य सरकार ने श्रमिकों और आम जनता की सुरक्षा के लिए बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। राज्य में तापमान लगातार सामान्य से अधिक दर्ज किया जा रहा है और कई क्षेत्रों में लू की स्थिति गंभीर रूप ले चुकी है। इसी को ध्यान में रखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले आउटडोर श्रमिकों के लिए सख्त मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP लागू करने की घोषणा की गई है, ताकि गर्मी के सबसे खतरनाक समय में लोगों की जान और स्वास्थ्य की रक्षा की जा सके। नई व्यवस्था के अनुसार ऑरेंज और रेड अलर्ट के दौरान दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक सभी बाहरी कार्य पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे। यह समय दिन का सबसे अधिक गर्म हिस्सा माना जाता है, जब लू लगने और शरीर में पानी की कमी जैसी समस्याओं का खतरा सबसे अधिक होता है। इसके अलावा कामकाजी समय में भी बड़ा बदलाव किया गया है, जिसके तहत अब श्रमिक सुबह 6 बजे से 11 बजे तक और शाम 4 बजे से 8 बजे तक ही काम कर सकेंगे। इस निर्णय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि श्रमिक अत्यधिक गर्मी के संपर्क में न आएं और सुरक्षित वातावरण में अपना काम पूरा कर सकें। सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्माण स्थलों, औद्योगिक क्षेत्रों, बाजारों और ठेला वेंडिंग जोन में इन नियमों का सख्ती से पालन किया जाए। स्थानीय प्रशासन को निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन न हो सके। प्रशासन का कहना है कि यह कदम केवल एक अस्थायी व्यवस्था नहीं बल्कि बदलते मौसम और जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए जरूरी सुरक्षा उपाय है। राज्य के कई हिस्सों में हालात गंभीर होते जा रहे हैं। विशेष रूप से विदर्भ, मराठवाड़ा और खानदेश क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित बताए जा रहे हैं, जहां तापमान लगातार ऊंचा बना हुआ है। वहीं मुंबई, पुणे, नागपुर और नासिक जैसे बड़े शहरों में शहरी ताप द्वीप प्रभाव के कारण तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जा रहा है। इस कारण शहरी क्षेत्रों में भी गर्मी का असर तेजी से बढ़ता जा रहा है। मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार कुछ इलाकों में तापमान 47 से 49 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जो स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद खतरनाक स्थिति मानी जाती है। ऐसे हालात में सरकार ने पहले से ही तैयारी तेज कर दी है ताकि किसी भी आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके। राज्य सरकार ने 15 जिलों को हाई रिस्क जोन घोषित किया है, जिनमें लातूर, अमरावती, यवतमाल, वाशिम, अकोला, बुलढाणा, नागपुर, वर्धा, चंद्रपुर, गोंदिया, भंडारा, जलगांव, नंदुरबार, धुले और नांदेड़ शामिल हैं। इन जिलों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है और जरूरत पड़ने पर इस SOP को अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है। गर्मी से राहत देने के लिए प्रशासन ने कई स्तरों पर तैयारी शुरू की है। प्रमुख बाजारों, ट्रैफिक जंक्शनों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में पीने के पानी की व्यवस्था की जा रही है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से ओआरएस और इलेक्ट्रोलाइट्स उपलब्ध कराए जा रहे हैं ताकि लोगों को डिहाइड्रेशन से बचाया जा सके। इसके साथ ही श्रमिक क्षेत्रों में अस्थायी छाया, आराम स्थल और ठंडक की व्यवस्था पर भी जोर दिया जा रहा है। महिला कामगारों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं, वहीं स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट मोड पर रखा गया है। आपातकालीन एंबुलेंस सेवाओं को संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया गया है ताकि किसी भी स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके। सरकार का मानना है कि यह SOP न केवल तत्काल राहत प्रदान करेगी बल्कि लंबे समय में हीटवेव से होने वाले जोखिमों को भी कम करने में मदद करेगी। बदलते मौसम के इस दौर में यह कदम श्रमिक वर्ग की सुरक्षा और जनस्वास्थ्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।