Chambalkichugli.com

सिनेमाई उत्कृष्टता के लिए कलाकार का अटूट समर्पण और साहसी स्टंट बना चर्चा का विषय।

नई दिल्ली : भारतीय सिनेमा के इतिहास में साहसी स्टंट और जोखिम भरे एक्शन दृश्यों के लिए मशहूर कलाकारों ने समय-समय पर अपनी सीमाओं को चुनौती दी है। इसी कड़ी में एक रोंगटे खड़े कर देने वाला वाकया सामने आया है जहाँ एक बड़े बजट की फिल्म के फिल्मांकन के दौरान गहरे नीले समुद्र के भीतर खतरनाक शार्क मछलियों के बीच एक्शन दृश्य को अंजाम दिया गया। इस दृश्य की मांग इतनी चुनौतीपूर्ण थी कि कलाकार को बिना किसी सुरक्षा पिंजरे के पानी की गहराइयों में उतरना पड़ा। मनोरंजन जगत में वास्तविकता का पुट डालने के उद्देश्य से उठाए गए इस कदम ने न केवल तकनीकी टीम को हैरत में डाल दिया बल्कि कलाकार के जीवन पर भी एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया था। समुद्र के भीतर फिल्माए गए इस सीक्वेंस के दौरान दर्जनों शिकारी शार्क मछलियां कलाकार के बेहद करीब तैर रही थीं। दृश्य को प्रभावी बनाने के लिए कलाकार को पानी के भीतर काफी समय तक अपनी सांसें रोककर और बिना किसी विशेष सुरक्षा उपकरण के अभिनय करना था। शूटिंग के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब शार्क मछलियों का व्यवहार अप्रत्याशित हो गया और वहां मौजूद विशेषज्ञों के चेहरे पर चिंता की लकीरें खिंच गईं। पानी के भीतर ऑक्सीजन और दबाव के साथ तालमेल बिठाना पहले से ही कठिन था और ऊपर से इन हिंसक जीवों की मौजूदगी ने स्थिति को बेहद तनावपूर्ण बना दिया था। इस जानलेवा जोखिम के पीछे का मुख्य कारण पर्दे पर दर्शकों को एक वास्तविक और अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करना था। वर्तमान दौर में जहाँ अधिकांश दृश्यों के लिए कंप्यूटर ग्राफिक्स और विशेष प्रभावों का सहारा लिया जाता है वहीं इस कलाकार ने प्राकृतिक और वास्तविक माहौल में काम करने को प्राथमिकता दी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के दृश्यों में जरा सी चूक भी प्राणघातक साबित हो सकती है। कलाकार ने इस जोखिम को स्वीकार करते हुए न केवल अपनी पेशेवर प्रतिबद्धता दिखाई बल्कि यह भी साबित किया कि एक उत्कृष्ट रचना के लिए वे किसी भी हद तक जा सकते हैं। फिल्मांकन के बाद जब इस घटना का विवरण साझा किया गया तो सिनेमा जगत में सुरक्षा मानकों को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। हालांकि टीम के साथ पेशेवर गोताखोर और चिकित्सा कर्मी तैनात थे लेकिन शार्क के हमले की स्थिति में बचाव की गुंजाइश बहुत कम होती है। यह अनुभव उस कलाकार के करियर के सबसे साहसी और चुनौतीपूर्ण क्षणों में से एक बन गया है। इस साहसिक कदम ने फिल्म निर्माण की कला के प्रति उनके समर्पण को एक नए शिखर पर पहुंचा दिया है और दर्शकों के बीच इस आगामी दृश्य को लेकर उत्सुकता कई गुना बढ़ गई है।

इंदौर के पाटनीपुरा में पूजा सामग्री की दुकान में लगी भीषण आग, लाखों का नुकसान

इंदौर। इंदौर शहर के पाटनीपुरा इलाके में सोमवार देर रात पूजा सामग्री की एक दुकान में भीषण आग लग गई, जिससे लाखों रुपए का सामान जलकर खाक हो गया। आग की तीव्रता को देखते हुए आसपास की दुकानों को एहतियातन खाली करा लिया गया। फायर ब्रिगेड के अनुसार, देर रात करीब 1:40 बजे आग लगने की सूचना मिली, जिसके बाद तुरंत दो दमकल वाहन मौके पर भेजे गए। आग पर काबू पाने के लिए करीब 17 हजार लीटर से अधिक पानी का इस्तेमाल किया गया। स्थानीय लोगों ने भी आग बुझाने में सहयोग किया। आग ‘विनायक पूजा पाठ सामग्री’ नामक दुकान में लगी। घटना के समय दुकान का शटर बंद था, जिससे अंदर तेजी से धुआं भर गया और आग ने विकराल रूप ले लिया। दमकल कर्मियों ने शटर तोड़कर अंदर प्रवेश किया और काफी मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण पाया। जनहानि नहीं, लेकिन भारी नुकसानपुलिस के अनुसार इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई है, लेकिन दुकान में रखा लाखों रुपए का सामान पूरी तरह नष्ट हो गया। आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। दुकान मालिक सुधीर अग्रवाल के भाई दीपक अग्रवाल ने बताया कि प्रारंभिक तौर पर आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। सूचना मिलते ही परिवार के सदस्य मौके पर पहुंच गए थे। घटना की सूचना मिलते ही एमआईजी थाना प्रभारी सीबी सिंह मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। प्रशासन ने आसपास की अन्य पूजा सामग्री दुकानों को तुरंत खाली कराकर बड़ा हादसा टाल दिया।

VFX, CGI और SFX में क्या फर्क है? जानिए फिल्मों का असली ‘जादू’ कैसे बनता है

नई दिल्ली। फिल्म निर्माण अब सिर्फ कैमरे और कलाकारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक हाई-टेक आर्ट बन चुका है, जिसमें कल्पना को हकीकत जैसा दिखाने के लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जाता है। ‘बाहुबली’ के विशाल किले हों या ‘एवेंजर्स’ की अंतरिक्ष जंग इन सबके पीछे मुख्य रूप से तीन तकनीकों का योगदान होता है: VFX, CGI और SFX। हाल ही में ‘रामायण’ जैसे बड़े प्रोजेक्ट की चर्चा के बीच एक बार फिर ये शब्द सुर्खियों में हैं। हालांकि आम दर्शक इन्हें एक ही समझ लेते हैं, लेकिन असल में इन तीनों का काम और तरीका बिल्कुल अलग होता है। SFX यानी स्पेशल इफेक्ट्स: जो कैमरे के सामने होता है असली जादूSFX यानी स्पेशल इफेक्ट्स वे प्रभाव होते हैं जिन्हें फिल्म की शूटिंग के दौरान ही सेट पर तैयार किया जाता है। इसे ‘प्रैक्टिकल इफेक्ट्स’ भी कहा जाता है क्योंकि इसमें कंप्यूटर का इस्तेमाल नहीं होता। उदाहरण के तौर पर अगर किसी सीन में विस्फोट दिखाना है, बारिश करवानी है, नकली खून दिखाना है या फिर टूटते हुए शीशे का दृश्य फिल्माना है, तो ये सब SFX के अंतर्गत आता है। पुराने जमाने की फिल्मों में रोबोट, मिनिएचर सेट या यांत्रिक उपकरणों से बनाए गए दृश्य भी इसी श्रेणी में आते हैं। इसकी खास बात यह है कि यह रियल टाइम में कैमरे के सामने शूट होता है, जिससे दृश्य अधिक वास्तविक महसूस होता है। CGI: जब कंप्यूटर बनाता है पूरी नई दुनियाCGI यानी Computer Generated Imagery वह तकनीक है जिसमें पूरी तरह डिजिटल दुनिया बनाई जाती है। इसमें कंप्यूटर की मदद से 3D मॉडल, एनिमेशन और ग्राफिक्स तैयार किए जाते हैं। यह उन चीजों को पर्दे पर दिखाने के लिए इस्तेमाल होता है जो असल दुनिया में मौजूद ही नहीं हैं या जिन्हें बनाना बेहद महंगा या असंभव है। जैसे किसी फिल्म में विशाल ड्रैगन, एलियन ग्रह या अवास्तविक पात्र ये सब CGI का कमाल होते हैं। इसमें शूटिंग के दौरान असली सेट की जरूरत नहीं होती, बल्कि पूरा दृश्य कंप्यूटर में तैयार किया जाता है और बाद में उसे फिल्म में जोड़ा जाता है। VFX: असली और डिजिटल दुनिया का परफेक्ट मेलVFX यानी Visual Effects सबसे व्यापक तकनीक है, जो असली शूट की गई फुटेज और CGI का संयोजन होती है। इसका उपयोग पोस्ट-प्रोडक्शन यानी शूटिंग के बाद किया जाता है। उदाहरण के लिए किसी अभिनेता को ग्रीन स्क्रीन के सामने शूट किया जाता है और बाद में उसके पीछे जलता हुआ शहर, पहाड़ या काल्पनिक दुनिया जोड़ दी जाती है। VFX का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि डिजिटल और असली फुटेज इतने सहज तरीके से मिल जाएं कि दर्शक को फर्क ही न दिखे। आज के समय में लगभग हर बड़ी फिल्म में VFX का भारी इस्तेमाल होता है। फिल्म देखते वक्त कैसे पहचानें फर्क?अगर आप ध्यान से देखें तो इन तकनीकों में फर्क पहचानना संभव है। जहां असली विस्फोट, बारिश या सेट पर बनी चीजें दिखें, वह SFX है। अगर कोई पूरी तरह काल्पनिक जीव या दुनिया दिखे जो असली लगने के बावजूद वास्तविक नहीं हो सकती, तो वह CGI है। वहीं जब असली शूटिंग के साथ डिजिटल बैकग्राउंड या बदलाव जोड़े गए हों, तो वह VFX होता है। हालांकि आधुनिक फिल्मों में इतनी सफाई से काम होता है कि कई बार इन्हें अलग पहचानना मुश्किल हो जाता है।  कल्पना को हकीकत बनाने की कलाआज फिल्म इंडस्ट्री में ये तीनों तकनीकें मिलकर सिनेमा को एक नया आयाम दे रही हैं। दर्शकों को अब ऐसी दुनिया देखने को मिलती है जो पहले सिर्फ कल्पना में ही संभव थी। आने वाले समय में ‘रामायण’ जैसे प्रोजेक्ट्स इन तकनीकों के और भी उन्नत रूप को सामने लाएंगे, जिससे भारतीय सिनेमा का स्तर वैश्विक स्तर पर और ऊंचा होगा।

मप्र में 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 15 अप्रैल को होगा जारी

भोपाल। मध्य प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा इस वर्ष आयोजित कक्षा दसवीं और बारहवीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 15 अप्रैल को सुबह 11 बजे जारी किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से दोनों कक्षाओं के परिणाम एक साथ घोषित करेंगे। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने सोमवार को बताया कि परिणाम के साथ दोनों कक्षाओं की मेरिट लिस्ट (टॉपर्स सूची) भी जारी की जाएगी। राज्य स्तर पर टॉप करने वाले मेधावी छात्रों को सरकार द्वारा विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। छात्रों को अपना परिणाम देखने के लिए केवल अपने रोल नंबर की आवश्यकता होगी। बोर्ड ने कॉपियों के मूल्यांकन और पोर्टल पर डेटा अपलोड करने का कार्य पहले ही पूर्ण कर लिया है। उन्होंने बताया कि परिणाम जारी करने से पहले क्रॉस चेकिंग और वैरिफिकेशन तेजी से पूरा किया गया। हर स्तर पर जांच की गई, ताकि कोई गलती न रहे। रिजल्ट “फुलप्रूफ” रखा गया है, जिससे छात्रों को परेशानी न हो। 10वीं में 9 लाख से ज्यादा छात्र शामिलप्रदेश में 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में 16 लाख से अधिक छात्र शामिल हुए। इनमें करीब 9 लाख 7 हजार छात्र 10वीं और लगभग 7 लाख छात्र 12वीं में बैठे। परीक्षा के लिए 3856 केंद्र बनाए गए थे। नकल रोकने के लिए फ्लाइंग स्क्वॉड, सीसीटीवी और प्रश्नपत्र वितरण की वीडियोग्राफी की व्यवस्था की गई थी। इसके बावजूद प्रदेश में करीब 100 नकल प्रकरण सामने आए। मुरैना में सबसे ज्यादा 41 और भोपाल में 20 मामले दर्ज हुए। डॉक्टरों और काउंसलर्स ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों पर दबाव न डालें और मानसिक सहयोग दें। गांधी मेडिकल कॉलेज की डॉ. रुचि सोनी ने कहा कि हर बच्चा अच्छा रिजल्ट चाहता है, लेकिन ऐसा हमेशा संभव नहीं होता। एक परीक्षा जीवन तय नहीं करती। बच्चों के तनाव में होने पर उनसे बात करें और उनका साथ दें। शिक्षा विभाग का उद्देश्य समय पर रिजल्ट जारी करना है, ताकि छात्र बिना देरी अगली कक्षा या कोर्स में प्रवेश ले सकें। तय समय पर परिणाम आने से छात्रों और अभिभावकों को राहत मिलेगी।

आईपीएल 2026 में ऑरेंज और पर्पल कैप की रेस हुई बेहद रोमांचक, हर मैच के साथ बदल रहा है शीर्ष खिलाड़ियों का समीकरण

नई दिल्ली:   इंडियन प्रीमियर लीग २०२६ के मैदानों पर बल्ले और गेंद के बीच छिड़ी जंग अब एक रोमांचक मोड़ पर पहुंच चुकी है। टूर्नामेंट के आगे बढ़ने के साथ ही व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर मिलने वाले शीर्ष सम्मानों की होड़ तेज हो गई है। खिलाड़ियों के बीच मैदान पर जारी इस स्वस्थ प्रतिस्पर्धा ने न केवल मैचों के रोमांच को बढ़ाया है बल्कि दर्शकों की उत्सुकता को भी चरम पर पहुंचा दिया है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार कुछ अनुभवी और कुछ युवा खिलाड़ियों ने अपनी खेल प्रतिभा के दम पर सूची में अपनी जगह मजबूत कर ली है जिससे यह स्पष्ट है कि इस साल का खिताब जीतने के लिए खिलाड़ियों को अपने कौशल की सीमाओं को पार करना होगा। बल्लेबाजी के मोर्चे पर दक्षिण अफ्रीकी दिग्गज हेनरिक क्लासेन ने अपने बल्ले से कोहराम मचा रखा है। उन्होंने अपनी आक्रामक और बेखौफ बल्लेबाजी के जरिए विपक्षी गेंदबाजों की रणनीतियों को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है। क्लासेन की सबसे बड़ी ताकत मैदान के हर कोने में रन बनाने की उनकी क्षमता और स्पिनरों के खिलाफ उनका दबदबा है। उनकी हालिया पारियों ने उन्हें वर्तमान में सबसे अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाजों की फेहरिस्त में सबसे ऊपर लाकर खड़ा कर दिया है। कठिन परिस्थितियों में शांत रहकर बड़े शॉट खेलने की उनकी कला ने उन्हें इस सीजन का सबसे खतरनाक बल्लेबाज बना दिया है और वह ऑरेंज कैप की दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं। दूसरी ओर गेंदबाजी में भारतीय तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा अपनी आग उगलती गेंदों से कहर बरपा रहे हैं। उन्होंने अपनी गति और सटीक बाउंसरों का बेहतरीन इस्तेमाल करते हुए बल्लेबाजों को टिकने का कोई मौका नहीं दिया है। सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाजों की श्रेणी में उन्होंने अपना दबदबा कायम किया है और वर्तमान में पर्पल कैप पर अपना अधिकार जमा रखा है। प्रसिद्ध कृष्णा ने न केवल शुरुआती ओवरों में विकेट चटकाए हैं बल्कि अंतिम ओवरों में भी अपनी यॉर्कर और धीमी गति की गेंदों से रनों की गति पर अंकुश लगाया है। उनकी यह शानदार फॉर्म उनकी टीम के लिए रक्षा कवच साबित हो रही है और विपक्षी बल्लेबाजी क्रम के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। टूर्नामेंट में कुछ खिलाड़ियों के लिए उतार चढ़ाव का दौर भी देखने को मिला है। वैभव अरोड़ा जैसे प्रतिभावान खिलाड़ियों ने जहां कुछ मैचों में अपनी चमक बिखेरी वहीं कुछ मौकों पर वह अपनी लय हासिल करने के लिए संघर्ष करते दिखे। हालांकि उनकी क्षमता पर किसी को संदेह नहीं है और आने वाले मैचों में उनके पास जोरदार वापसी करने का पूरा अवसर है। क्रिकेट के इस छोटे प्रारूप में एक स्पेल या एक पारी किसी भी खिलाड़ी की किस्मत बदल सकती है। खिलाड़ियों के बीच इस शीर्ष स्थान को हासिल करने की जद्दोजहद ने खेल के स्तर को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बना दिया है जहां हर गलती की सजा बड़ी कीमत चुकाकर भुगतनी पड़ती है। आने वाले हफ्तों में यह देखना बेहद रोमांचक होगा कि क्या क्लासेन और प्रसिद्ध कृष्णा अपने इस स्वर्णिम सफर को जारी रख पाते हैं या कोई अन्य खिलाड़ी इस दौड़ में उन्हें पीछे छोड़ देता है। सभी टीमों के कोच और कप्तान अब विशेष रूप से इन शीर्ष खिलाड़ियों के लिए अलग रणनीतियां तैयार कर रहे हैं। जैसे-जैसे नॉकआउट चरण करीब आएगा व्यक्तिगत उपलब्धियों के साथ-साथ टीम की सफलता का दबाव भी बढ़ेगा। फिलहाल क्रिकेट के इस महाकुंभ ने यह साबित कर दिया है कि यहां केवल वही टिक सकता है जिसके पास तकनीक के साथ-साथ धैर्य और मानसिक मजबूती का बेजोड़ संगम हो।

AMBEDKAR JAYANTI GWALIOR : 800 जवानों की निगरानी में मनाई जाएगी अंबेडकर जयंती, जुलूस और सोशल मीडिया पर पुलिस की पैनी नजर!

AMBEDKAR JAYANTI CELEBRATION

HIGHLIGHTS: अंबेडकर जयंती पर 800 से ज्यादा पुलिस जवान तैनात शहरभर में चेकिंग पॉइंट और ट्रैफिक डायवर्जन लागू बाल भवन में जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित जुलूस फूलबाग चौराहे पर होगा समाप्त सोशल मीडिया पर पुलिस की सख्त निगरानी AMBEDKAR JAYANTI GWALIOR : ग्वालियर। शहर में अंबेडकर जयंती को लेकर इस बार सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। बता दें की 800 से ज्यादा पुलिस जवान और अफसर तैनात किए गए हैं। पुलिस प्रशासन सड़कों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी पैनी नजर बनाए हुए है, ताकि किसी भी तरह की अफवाह या विवाद को समय रहते रोका जा सके। शहरभर में चेकिंग पॉइंट, ट्रैफिक डायवर्जन लागू सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए शहर के अलग-अलग हिस्सों में चेकिंग पॉइंट बनाए गए हैं। आने-जाने वाले वाहनों की जांच की जा रही है। वहीं, भीड़भाड़ वाले इलाकों में ट्रैफिक डायवर्जन भी लागू किया गया है, जिससे आयोजन के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था न हो। आशा भोसले का खुलासा: हिमेश रेशमिया को थप्पड़ मारने की बात, आरडी बर्मन पर कही दिलचस्प बात बाल भवन में जिला स्तरीय कार्यक्रम बाल भवन में जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन और विचारों पर व्याख्यान होंगे, साथ ही विभिन्न हितग्राहियों का सम्मान भी किया जाएगा। शहर में निकलेंगे जुलूस, फूलबाग पर होगा समापन शहर के अलग-अलग इलाकों से जुलूस और चल समारोह निकाले जाएंगे, जो फूलबाग चौराहा पहुंचकर अंबेडकर प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करेंगे। इसके अलावा कई स्थानों पर भंडारों का भी आयोजन किया जा रहा है। केंद्र सरकार का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 48 वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त सचिव स्तर पर नियुक्ति हाईकोर्ट परिसर में अतिरिक्त सुरक्षा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट परिसर में अंबेडकर प्रतिमा स्थापना को लेकर किसी भी संभावित विरोध को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। डीजे पर रोक, फिर भी पुलिस सतर्क कलेक्टर के आदेश के अनुसार तेज आवाज में डीजे बजाने पर रोक लगाई गई है। इसके बावजूद पुलिस को आशंका है कि कुछ स्थानों पर नियमों का उल्लंघन हो सकता है, इसलिए इस पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। केंद्र सरकार का बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 48 वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त सचिव स्तर पर नियुक्ति एसएसपी का बयान: हर गतिविधि पर नजर एसएसपी धर्मवीर सिंह ने साफ कहा है कि पूरे शहर में पुलिस मुस्तैद है। खासकर सोशल मीडिया पर नजर रखी जा रही है और आपत्तिजनक पोस्ट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

आशा भोसले का खुलासा: हिमेश रेशमिया को थप्पड़ मारने की बात, आरडी बर्मन पर कही दिलचस्प बात

नई दिल्ली।भारतीय संगीत की महान गायिका आशा भोसले अपने पति और दिग्गज संगीतकार आर. डी. बर्मन की विरासत को लेकर बेहद संवेदनशील मानी जाती थीं। वे कभी भी उनके काम या योगदान पर किसी तरह की नकारात्मक टिप्पणी बर्दाश्त नहीं करती थीं।इसी सख्त रवैये के कारण साल 2006 में एक बड़ा विवाद सामने आया, जब उनका नाम मशहूर सिंगर और कंपोजर हिमेश रेशमिया से जुड़ा।  कैसे शुरू हुआ विवाद?उस समय हिमेश रेशमिया अपने “नाक से गाने” वाले स्टाइल को लेकर काफी चर्चा में थे। एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने स्टाइल का बचाव करते हुए कुछ दिग्गज कलाकारों का उदाहरण दिया, जिसमें R.D. बर्मन का नाम भी शामिल था।यही बात आशा भोसले को बेहद आपत्तिजनक लगी। आशा भोसले का तीखा जवाबइस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए आशा भोसले ने कड़ा रुख अपनाया और कहा कि अगर कोई आर.डी. बर्मन के बारे में गलत टिप्पणी करता है तो “उसे थप्पड़ मारना चाहिए।”उनका यह बयान उस समय मीडिया में काफी सुर्खियों में रहा और संगीत जगत में बहस छिड़ गई। बाद में कैसे सुलझा मामला?विवाद बढ़ने के बाद हिमेश रेशमिया ने अपनी बात पर स्पष्टीकरण दिया और माना कि उन्हें किसी महान कलाकार का उदाहरण देने से पहले सोच-समझकर बोलना चाहिए था।इसके बाद उन्होंने आशा भोसले से माफी मांगी, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। रिश्ते फिर हुए सामान्यमाफी के बाद दोनों के बीच तनाव खत्म हो गया और बाद में आशा भोसले ने हिमेश रेशमिया के लिए गाने भी गाए। इससे साफ हुआ कि व्यक्तिगत नाराजगी के बावजूद वे प्रोफेशनल रिश्तों को आगे बढ़ाने में विश्वास रखती थीं।

जबलपुर के श्रमोदय विद्यालय में सांप्रदायिक विवाद ने पकड़ा तूल प्राचार्य पर गंभीर आरोपों के बाद जांच के आदेश

जबलपुर । मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। श्रमोदय विद्यालय जो शिक्षा का मंदिर माना जाता है वहां पर सांप्रदायिक भेदभाव और उत्पीड़न के आरोपों ने माहौल को पूरी तरह से तनावपूर्ण बना दिया है। स्कूल के प्रभारी प्राचार्य अब्दुल शाहिर शेख के खिलाफ हिंदू शिक्षकों और विद्यार्थियों के साथ भेदभाव करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामला उजागर होने के बाद लोक शिक्षा विभाग के अपर संचालक ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं जिससे पूरे प्रशासनिक तंत्र में हलचल मच गई है। बताया जा रहा है कि यह विवाद उस समय और गहरा गया जब रामनवमी के अवसर पर छात्रावास में कुछ विद्यार्थियों ने जय श्रीराम के नारे लगाए। आरोप है कि इस पर प्राचार्य और उनके सहयोगियों ने नाराजगी जताई और छात्रों के साथ मारपीट की गई। इस घटना ने विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच आक्रोश को जन्म दिया। वहीं अतिथि शिक्षकों ने भी प्राचार्य पर लगातार प्रताड़ना और अपमान करने के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि स्कूल का माहौल डर और दबाव से भरा हुआ है जहां खुलकर अपनी बात रखना भी मुश्किल हो गया है। मामले को और गंभीर बनाता है स्टाफ रूम में लगाए गए कैमरों को लेकर उठे सवाल। शिक्षकों का आरोप है कि उनकी गतिविधियों की रिकॉर्डिंग की जाती है और उसका दुरुपयोग किया जाता है। इससे शिक्षकों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है और कार्यस्थल का वातावरण प्रभावित हुआ है। इसके अलावा स्कूल में प्रशासनिक अनियमितताओं की भी शिकायतें सामने आई हैं जो जांच का विषय बन चुकी हैं। इन सभी घटनाओं का असर छात्रों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। लगभग 120 से अधिक विद्यार्थियों ने स्कूल से अपना नाम कटवा लिया है और ट्रांसफर सर्टिफिकेट ले लिया है। यह संख्या अपने आप में इस बात का संकेत है कि स्थिति कितनी गंभीर हो चुकी है। छात्रों का आरोप है कि उन्होंने पहले भी शिकायत की थी लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई जिससे उनका भरोसा टूट गया। मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी ध्यान खींचा है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम विभाग से जुड़े विशेष सहायक मंत्री द्वारा भी इस संबंध में पत्र भेजा गया है। इसके बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया और जांच के आदेश दिए गए। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या सामने आता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है। यह मामला केवल एक स्कूल का नहीं बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र के लिए एक चेतावनी है कि शिक्षा के स्थान पर किसी भी प्रकार का भेदभाव स्वीकार्य नहीं हो सकता। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह जरूरी हो जाता है कि सख्त कार्रवाई के साथ ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। फिलहाल छात्र अभिभावक और शिक्षक सभी निष्पक्ष जांच और न्याय की उम्मीद कर रहे हैं।

डल स्किन से छुटकारा पाकर पाएं नेचुरल ग्लो, सेब, चुकंदर और गाजर का जूस बना सकता है त्वचा को अंदर से हेल्दी और चमकदार

नई दिल्ली:गर्मी के मौसम में धूल, प्रदूषण और तेज धूप का असर सबसे पहले हमारी त्वचा पर दिखाई देता है। धीरे-धीरे चेहरा अपनी प्राकृतिक चमक खोने लगता है और स्किन डल व थकी हुई नजर आने लगती है। ऐसे में विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल बाहरी स्किन केयर ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि शरीर को अंदर से पोषण देना भी जरूरी होता है। इसी कारण सेब, चुकंदर और गाजर से बना प्राकृतिक जूस त्वचा के लिए एक सरल और प्रभावी उपाय माना जा रहा है, जो शरीर को जरूरी विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स देकर स्किन को स्वस्थ बनाने में मदद कर सकता है। सेब इस जूस का अहम हिस्सा माना जाता है, जिसमें विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। ये तत्व शरीर में कोलेजन के निर्माण को सपोर्ट करते हैं, जिससे त्वचा की कसावट बनी रहती है और उम्र बढ़ने के लक्षण धीरे-धीरे कम दिखाई देते हैं। सेब शरीर को हाइड्रेट रखने में भी मदद करता है, जिससे त्वचा में प्राकृतिक नमी और चमक बनी रहती है। चुकंदर को खून को शुद्ध करने वाला एक प्राकृतिक स्रोत माना जाता है। इसमें मौजूद तत्व शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाने में मदद करते हैं, जिससे त्वचा तक ऑक्सीजन और पोषण अधिक मात्रा में पहुंचता है। जब त्वचा को पर्याप्त पोषण मिलता है, तो वह अधिक साफ, चमकदार और स्वस्थ नजर आती है। चुकंदर शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में भी सहायक माना जाता है, जिसका सीधा असर त्वचा की गुणवत्ता पर दिखाई देता है। गाजर इस जूस का एक महत्वपूर्ण घटक है, जिसमें बीटा कैरोटीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह शरीर में विटामिन ए में बदलकर त्वचा की कोशिकाओं की मरम्मत और नए सेल्स के निर्माण में मदद करता है। यह त्वचा को सूखने से बचाकर उसे मुलायम और हेल्दी बनाए रखने में सहायक होता है, जिससे चेहरे पर प्राकृतिक निखार आता है। इन तीनों सामग्रियों का मिश्रण शरीर को अंदर से पोषण देने के साथ-साथ डिटॉक्स करने में भी मदद कर सकता है। नियमित रूप से इस प्राकृतिक जूस का सेवन त्वचा की डलनेस को कम करने, उसे साफ रखने और धीरे-धीरे प्राकृतिक ग्लो बढ़ाने में सहायक माना जाता है।

एमपी में तेज गर्मी का दौर शुरू, तापमान बढ़ने की संभावना, 16-17 अप्रैल से कई जिलों में लू का अलर्ट

भोपाल। मध्य प्रदेश में अब मौसम पूरी तरह बदल चुका है। बादल और बारिश का दौर खत्म होते ही तेज धूप ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। प्रदेश के कई इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है, जिससे गर्मी तेजी से बढ़ रही है। मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि 16 और 17 अप्रैल से राज्य के कई जिलों में भीषण लू चलने की संभावना है। सोमवार को रतलाम सबसे गर्म जिला दर्ज किया गया, जहां तापमान 41.2°C तक पहुंच गया। इसके अलावा धार, नर्मदापुरम और खरगोन में भी पारा 40 डिग्री सेल्सियस के ऊपर दर्ज हुआ। मौसम विभाग के अनुसार 16 और 17 अप्रैल को रतलाम, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, खरगोन, खंडवा, सीधी, सिंगरौली, मंडला और बालाघाट जिलों में लू का असर देखने को मिलेगा। वहीं भोपाल, इंदौर और उज्जैन में भी गर्म हवाएं लोगों को परेशान करेंगी। 15 अप्रैल से एक नया मौसम सिस्टम सक्रिय होने की संभावना है, लेकिन यह काफी कमजोर रहेगा। ऐसे में इससे गर्मी से राहत मिलने के आसार नहीं हैं। विभाग का कहना है कि अप्रैल का दूसरा पखवाड़ा आमतौर पर सबसे ज्यादा गर्म होता है। ग्वालियर में तापमान 45°C और भोपाल में 44°C तक पहुंचने का रिकॉर्ड भी रहा है। इससे पहले अप्रैल के शुरुआती दिनों में मौसम अलग ही रंग में नजर आया। 1 से 9 अप्रैल के बीच प्रदेश में लगातार आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का दौर चला। 15 से ज्यादा जिलों में ओले गिरे, जबकि करीब 45 जिलों में बारिश दर्ज की गई। इस दौरान ग्वालियर में सबसे ज्यादा वर्षा हुई।