महू में अंबेडकर जयंती पर बवाल श्रद्धालुओं से धक्का मुक्की पुलिस के रवैये पर उठे सवाल

इंदौर । मध्यप्रदेश के महू में अंबेडकर जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान उस समय विवाद खड़ा हो गया जब श्रद्धा और उत्साह के बीच पुलिस के व्यवहार को लेकर सवाल उठने लगे। डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर की जन्मस्थली पर देशभर से हजारों अनुयायी पहुंचे थे और पूरे क्षेत्र में आस्था का माहौल बना हुआ था। सुबह से ही लोग अपने परिवारों के साथ बाबा साहेब को नमन करने और इस खास दिन को यादगार बनाने के लिए वहां एकत्रित हो रहे थे। कई श्रद्धालु जन्मस्थली परिसर में फोटो और वीडियो के जरिए इस पल को सहेज रहे थे। इसी दौरान आरोप है कि वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने अचानक लोगों को हटाना शुरू कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों और श्रद्धालुओं का कहना है कि बिना किसी स्पष्ट सूचना के पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए लोगों को पीछे हटने के लिए मजबूर किया। इस दौरान कई लोगों के साथ धक्का मुक्की भी हुई जिससे माहौल बिगड़ गया और मौके पर अफरा तफरी मच गई। दूर दराज से आए अनुयायियों ने इस व्यवहार का विरोध किया और नाराजगी खुलकर सामने आई। देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और लोगों ने मौके पर ही नारेबाजी शुरू कर दी। श्रद्धालुओं का आरोप था कि उन्हें सम्मान के साथ श्रद्धांजलि देने का मौका नहीं दिया जा रहा है और उनके साथ अनावश्यक सख्ती बरती जा रही है। सूत्रों के अनुसार यह पूरा घटनाक्रम उस समय सामने आया जब मुख्यमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा किया जा रहा था। वीआईपी मूवमेंट के मद्देनजर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाए लेकिन यह सख्ती कई लोगों को नागवार गुजरी। इस घटना ने एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर आम श्रद्धालुओं की भावनाओं और गरिमा को नजरअंदाज किया जा सकता है। आस्था के इस बड़े आयोजन में बेहतर भीड़ प्रबंधन और संवेदनशील व्यवहार की अपेक्षा की जाती है ताकि किसी भी तरह का विवाद पैदा न हो। फिलहाल यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और प्रशासन की ओर से स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। लोगों की मांग है कि भविष्य में ऐसे आयोजनों में बेहतर व्यवस्था और मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए ताकि श्रद्धा और सम्मान का माहौल बना रहे।
वंदना कटारिया: ओलंपिक में हैट्रिक लगाने वाली इकलौती भारतीय खिलाड़ी

नई दिल्ली। भारतीय महिला हॉकी की स्टार खिलाड़ी वंदना कटारिया का नाम देश के खेल इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। 15 अप्रैल 1992 को रोशनाबाद (उत्तराखंड) में जन्मी वंदना ने फॉरवर्ड पोजीशन पर खेलते हुए भारतीय टीम को कई ऐतिहासिक जीत दिलाई और महिला हॉकी को नई पहचान दी। शुरुआती करियर और पहचानवंदना कटारिया को साल 2006 में भारतीय जूनियर टीम में जगह मिली और 2009 में उन्होंने सीनियर टीम में कदम रखा। 2013 जूनियर वर्ल्ड कप में वे भारत की टॉप स्कोरर रहीं, जहां टीम ने कांस्य पदक जीता। इसी प्रदर्शन ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। एशियाई खेल और अंतरराष्ट्रीय सफलता2014 एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतने वाली टीम का वह अहम हिस्सा थीं। इसी साल उन्हें हॉकी इंडिया की ‘प्लेयर ऑफ द ईयर’ भी चुना गया। 2014-15 में एफआईएच हॉकी वर्ल्ड लीग में उन्होंने 11 गोल कर टूर्नामेंट की टॉप स्कोरर बनने का रिकॉर्ड बनाया। ओलंपिक में ऐतिहासिक हैट्रिकवंदना कटारिया ने 2020 टोक्यो ओलंपिक में इतिहास रच दिया, जब वह ओलंपिक हॉकी में हैट्रिक लगाने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। इस उपलब्धि ने उन्हें दुनिया भर में पहचान दिलाई और भारतीय महिला हॉकी को नई ऊंचाई पर पहुंचाया। सम्मान और उपलब्धियांवंदना को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए कई बड़े सम्मान मिले, जिनमें अर्जुन पुरस्कार और पद्मश्री शामिल हैं। 2022 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया, वहीं उन्होंने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान की ब्रांड एंबेसडर बनकर समाजिक स्तर पर भी योगदान दिया। शानदार अंतरराष्ट्रीय करियरअपने करियर में वंदना कटारिया ने 320 अंतरराष्ट्रीय मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व किया और 158 गोल दागे। उनकी आक्रामक खेल शैली और लगातार गोल करने की क्षमता ने उन्हें भारतीय हॉकी की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल किया। संन्यास और विरासत1 अप्रैल 2025 को वंदना कटारिया ने अंतरराष्ट्रीय हॉकी से संन्यास की घोषणा की। हालांकि मैदान से दूर होने के बावजूद उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेंगी।
सब जूनियर मेन्स हॉकी में यूपी की जीत, कप्तान केतन कुशवाहा की कप्तानी रही खास

नई दिल्ली। सब-जूनियर मेन्स नेशनल हॉकी चैंपियनशिप में उत्तर प्रदेश की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया। फाइनल में यूपी ने हॉकी मध्य प्रदेश को 5-2 से हराकर ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। पूरी चैंपियनशिप में टीम अपराजेय रही और हर मैच में दमदार खेल दिखाया। “खुली बातचीत और भरोसा ही जीत की कुंजी”टीम के कप्तान केतन कुशवाहा ने जीत का राज बताते हुए कहा कि टीम के अंदर खुली बातचीत और एक-दूसरे पर भरोसा ही सबसे बड़ी ताकत रही। उन्होंने बताया कि हर खिलाड़ी अपनी गलतियों पर चर्चा करता था और उन्हें सुधारने की कोशिश करता था, जिससे टीम लगातार बेहतर होती गई। शुरुआती गोल से मिला आत्मविश्वासकेतन कुशवाहा ने कहा कि फाइनल में शुरुआती गोल ने टीम का आत्मविश्वास बढ़ा दिया। इसके बाद टीम ने पूरे मैच में दबाव बनाए रखा और विपक्षी टीम को वापसी का मौका नहीं दिया। कोच और सिस्टम की बड़ी भूमिकाउत्तर प्रदेश हॉकी के अध्यक्ष डॉ. आरपी सिंह ने इस जीत को राज्य की मजबूत हॉकी प्रणाली का नतीजा बताया। उन्होंने कहा कि युवा खिलाड़ियों को समय रहते पहचानकर उन्हें सही कोचिंग और माहौल देना इस सफलता की असली वजह है। कोच रजनीश मिश्रा के योगदान की भी उन्होंने सराहना की। लगातार बेहतर हो रहा यूपी हॉकी का प्रदर्शनयूपी हॉकी ने पिछले कुछ वर्षों में लगातार शानदार प्रदर्शन किया है। 2021 से अब तक राज्य की टीमों ने विभिन्न कैटेगरी में 13 पदक जीते हैं, जिनमें 5 गोल्ड शामिल हैं। यह दिखाता है कि राज्य में हॉकी का मजबूत आधार तैयार हो रहा है।
गणपति बप्पा के दरबार में झुके अनुपम खेर, नई स्क्रिप्ट पढ़कर मांगी अपार सफलता की दुआ..

नई दिल्ली:हिंदी सिनेमा के वरिष्ठ अभिनेता अनुपम खेर इन दिनों थिएटर की दुनिया में फिर से सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और अपने नए नाटकों के जरिए दर्शकों से सीधा जुड़ाव बना रहे हैं। फिल्मों में लंबा सफर तय करने के बाद उन्होंने एक बार फिर रंगमंच की ओर रुख किया है, जहां वे लगातार नए प्रयोग और प्रस्तुतियों के साथ दर्शकों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। इसी क्रम में अपने आगामी नाटक की तैयारी के बीच वे भगवान गणपति का आशीर्वाद लेने पहुंचे, जहां उन्होंने अपने काम की सफलता के लिए विशेष प्रार्थना की। नाटक के मंचन से पहले अनुपम खेर मुंबई स्थित सिद्धिविनायक मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने श्रद्धा के साथ अपने नए प्रोजेक्ट की स्क्रिप्ट भगवान के सामने प्रस्तुत की। मंदिर परिसर में उन्होंने स्क्रिप्ट की कुछ पंक्तियां पढ़कर सुनाईं और अपने आगामी नाटक की सफलता के लिए आशीर्वाद मांगा। यह क्षण उनके लिए भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से बेहद खास रहा, जिसे उन्होंने अपने प्रशंसकों के साथ भी साझा किया। अनुपम खेर का थिएटर से जुड़ाव उनके करियर की शुरुआती दिनों से रहा है। अब एक लंबे अंतराल के बाद उन्होंने फिर से रंगमंच पर वापसी की है और लगातार नए नाटकों के जरिए अपनी कला को नई दिशा दे रहे हैं। उनका हालिया हिंदी म्यूजिकल नाटक जाने पहचाने अनजाने दर्शकों के बीच काफी सराहा जा रहा है, जिसमें आधुनिक रिश्तों की जटिलता और भावनात्मक दूरी को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है। इस नाटक की खास बात इसका संगीत और प्रस्तुति शैली है, जिसमें जाने-माने संगीतकारों और गायकों का योगदान रहा है। संगीत के जरिए कहानी को जीवंत बनाने की कोशिश की गई है, जिससे दर्शकों को एक अलग अनुभव मिलता है। अनुपम खेर ने इस प्रोजेक्ट में न केवल अभिनय किया है बल्कि इसके निर्माण और प्रस्तुति में भी सक्रिय भूमिका निभाई है। उनके इस नए प्रयास के पीछे एक स्पष्ट सोच नजर आती है कि वे थिएटर के माध्यम से ऐसे विषयों को सामने लाना चाहते हैं, जो आम जिंदगी से जुड़े हों और दर्शकों को भावनात्मक रूप से प्रभावित कर सकें। यही कारण है कि उनके नाटकों में कहानी, संगीत और अभिनय का संतुलन देखने को मिलता है। गौरतलब है कि इस नाटक का नाम भी एक दिलचस्प तरीके से सामने आया था, जिसे उनके करीबी परिवार सदस्य द्वारा सुझाया गया था। इससे यह भी साफ होता है कि उनके रचनात्मक काम में परिवार की भूमिका भी अहम बनी हुई है। अनुपम खेर का यह कदम यह दर्शाता है कि वे अपने काम को केवल पेशा नहीं बल्कि एक साधना के रूप में देखते हैं, जहां आस्था और कला का गहरा संबंध है। थिएटर के प्रति उनका समर्पण और नई शुरुआत के प्रति उनकी ऊर्जा यह संकेत देती है कि आने वाले समय में वे रंगमंच पर और भी प्रभावशाली प्रस्तुतियां लेकर आ सकते हैं।
खड़े ट्रेलर से भिड़ी बाइक मऊगंज में भीषण हादसा 3 लोगों की मौके पर मौत

नरसिंहपुर । मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले में इन दिनों एक बड़ा कारोबारी और कानूनी विवाद चर्चा का विषय बना हुआ है जहां तुलसी ब्रांड को लेकर दो पक्ष आमने सामने आ गए हैं। एक तरफ पतंजलि फूड्स लिमिटेड है तो दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर संचालित अनिल इंडस्ट्रीज। मामला ट्रेडमार्क और कॉ पीराइट अधिकारों से जुड़ा हुआ है जिसने अब कानूनी रूप ले लिया है। बताया जा रहा है कि तुलसी नाम से खाद्य तेल के ब्रांड को लेकर विवाद शुरू हुआ। पतंजलि फूड्स लिमिटेड का दावा है कि तुलसी उनका अधिकृत ब्रांड है और इस नाम का उपयोग किसी अन्य संस्था द्वारा करना नियमों के खिलाफ है। इसी आधार पर न्यायालय में शिकायत दर्ज कराई गई थी जिसके बाद कोर्ट ने कार्रवाई के आदेश जारी किए। इसी आदेश के तहत नरसिंहपुर के करेली क्षेत्र के जोहारिया में स्थित अनिल इंडस्ट्रीज पर पतंजलि की लीगल टीम ने पहुंचकर कार्रवाई की। आरोप है कि अनिल इंडस्ट्रीज तुलसी नाम से खाद्य तेल बेच रही थी जो कि ट्रेडमार्क नियमों का उल्लंघन है। नियमों के अनुसार किसी भी पंजीकृत ब्रांड नाम के साथ समान या भ्रम पैदा करने वाले शब्दों का उपयोग करना अवैध माना जाता है। हालांकि इस मामले में अनिल इंडस्ट्रीज के मालिक ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्होंने अपने उत्पाद के लिए सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की हैं जिनमें ट्रेडमार्क और कॉपीराइट से संबंधित औपचारिकताएं शामिल हैं। उनका दावा है कि उन्होंने अपने ब्रांड का विज्ञापन भी प्रकाशित कराया था और उस समय किसी भी प्रकार की आपत्ति सामने नहीं आई थी। इतना ही नहीं उन्होंने पतंजलि फूड्स लिमिटेड पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कंपनी उन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। उनके अनुसार जब उन्होंने अपने उत्पादों को पतंजलि के माध्यम से बेचने से इनकार किया तो उनके खिलाफ इस तरह की कानूनी कार्रवाई की गई। यह मामला अब पूरी तरह न्यायालय के अधीन है और अंतिम निर्णय कोर्ट के आदेश के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल दोनों पक्ष अपने अपने दावों पर कायम हैं जिससे यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि वास्तविक रूप से किसका पक्ष मजबूत है। इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि व्यापारिक दुनिया में ब्रांड और पहचान को लेकर प्रतिस्पर्धा किस हद तक जा सकती है। ट्रेडमार्क और कॉपीराइट जैसे कानूनी अधिकार जहां कंपनियों की पहचान की रक्षा करते हैं वहीं इनके दुरुपयोग के आरोप भी समय समय पर सामने आते रहते हैं। अब सभी की नजर न्यायालय के फैसले पर टिकी है जो यह तय करेगा कि इस विवाद में कौन सही है और कौन गलत।
क्रिकेट इतिहास के खास खिलाड़ी Manoj Prabhakar: जानिए उनके विश्व रिकॉर्ड के बारे में

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट इतिहास के बेहतरीन तेज गेंदबाजी ऑलराउंडरों में गिने जाने वाले मनोज प्रभाकर का जन्म 15 अप्रैल 1963 को गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। उन्होंने भारतीय टीम के लिए लंबे समय तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और गेंदबाजी के साथ-साथ निचले क्रम में उपयोगी बल्लेबाजी से भी टीम को कई बार संभाला। शानदार इंटरनेशनल करियरमनोज प्रभाकर ने 1984 में वनडे क्रिकेट से श्रीलंका के खिलाफ डेब्यू किया, जबकि उसी साल इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में भी कदम रखा। वह 1996 तक भारतीय टीम का हिस्सा रहे और इस दौरान उन्होंने कई यादगार प्रदर्शन किए। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 39 मैचों में 96 विकेट लिए, जबकि बल्ले से 1600 से ज्यादा रन बनाए, जिसमें 1 शतक और 9 अर्धशतक शामिल रहे। वनडे में उन्होंने 157 विकेट झटके और 1858 रन बनाए, जिसमें 2 शतक और 11 अर्धशतक शामिल थे। अनोखा विश्व रिकॉर्ड मनोज प्रभाकर के नाम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का एक खास रिकॉर्ड दर्ज है उन्होंने सबसे ज्यादा बार ओपनिंग करने का कारनामा किया। उन्होंने 45 वनडे और 20 टेस्ट मैचों में पारी की शुरुआत की, यानी गेंदबाजी और बल्लेबाजी दोनों ही भूमिकाओं में उन्होंने टीम की शुरुआत की। उनकी खासियत स्विंग गेंदबाजी, धीमी गेंद और सटीक लाइन-लेंथ मानी जाती थी, जिससे वे कई बड़े बल्लेबाजों के लिए चुनौती बन जाते थे। बड़ी उपलब्धियांमनोज प्रभाकर 1984 एशिया कप, 1985 वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ क्रिकेट, 1990-91 और 1995 एशिया कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे। उनके ऑलराउंड प्रदर्शन ने कई मौकों पर भारत को मजबूती दी। घरेलू क्रिकेट में भी दमदार रिकॉर्डघरेलू क्रिकेट में उन्होंने दिल्ली के लिए खेलते हुए 154 प्रथम श्रेणी मैचों में 385 विकेट और 7,000 से ज्यादा रन बनाए। लिस्ट ए क्रिकेट में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा, जहां उन्होंने 200 से ज्यादा मैचों में 269 विकेट लिए। करियर और विवादमनोज प्रभाकर का करियर जितना शानदार रहा, उतना ही विवादों से भी जुड़ा रहा। उन पर मैच फिक्सिंग के आरोप लगे और बाद में वे कोचिंग भूमिकाओं में भी नजर आए—दिल्ली, राजस्थान, अफगानिस्तान और नेपाल टीम के साथ उन्होंने काम किया।
विवाद के बाद नए अंदाज में लौट रहा टटीरी फिर से, बादशाह के गाने पर फिर टिकी सबकी नजर

नई दिल्ली:पंजाबी गायक बादशाह एक बार फिर अपने गाने टटीरी फिर से को लेकर सुर्खियों में हैं। पहले इस गाने को उसके कुछ विवादित लिरिक्स के कारण हटाना पड़ा था, लेकिन अब इसमें बदलाव के साथ इसे दोबारा रिलीज किया जा रहा है। गाने के नए संस्करण को लेकर दर्शकों में उत्सुकता बढ़ गई है, वहीं इसके सांस्कृतिक और पौराणिक संदर्भ भी चर्चा का विषय बन गए हैं। टटीरी शब्द केवल एक गाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध भारतीय लोक संस्कृति और परंपराओं से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। टटीरी एक छोटे पक्षी का नाम है, जो खुले मैदान में अंडे देने के लिए जाना जाता है। हरियाणा में इसे शुभता और खुशी का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि इस पक्षी का जिक्र लोकगीतों और पारंपरिक कहानियों में भी बार बार देखने को मिलता है। इस गाने को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब इसके कुछ शब्दों को लेकर आपत्ति जताई गई। इसके बाद गाने को हटा दिया गया और उसमें आवश्यक बदलाव करने का निर्णय लिया गया। अब जब यह गाना नए रूप में सामने आ रहा है, तो यह केवल एक संगीत रिलीज नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक चर्चा का केंद्र भी बन गया है। टटीरी का उल्लेख महाभारत काल से भी जोड़ा जाता है, जो इस पूरे विषय को और अधिक दिलचस्प बना देता है। एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, महाभारत युद्ध शुरू होने से पहले इस पक्षी ने युद्धभूमि में अंडे दिए थे। इस दृश्य को देखकर पांडव चिंतित हो गए थे। तब अर्जुन ने उन अंडों की रक्षा करने का संकल्प लिया और अपना धनुष उनके पास रख दिया। युद्ध के दौरान भीषण विनाश हुआ, लेकिन कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से टटीरी के अंडे सुरक्षित रहे। युद्ध समाप्त होने के बाद जब अर्जुन ने धनुष हटाया तो अंडे सुरक्षित पाए गए। यह प्रसंग इस बात को दर्शाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी ईश्वर अपने भक्तों और निर्दोष प्राणियों की रक्षा करते हैं। हरियाणा की लोक परंपराओं में टटीरी का विशेष महत्व है। इसे केवल एक पक्षी नहीं बल्कि भावनाओं के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। कई लोकगीतों में टटीरी के माध्यम से महिलाओं की भावनाओं और इच्छाओं को अभिव्यक्त किया गया है, जिन्हें वे खुले रूप से व्यक्त नहीं कर पातीं। यही कारण है कि टटीरी से जुड़े गीत लोगों के बीच भावनात्मक जुड़ाव पैदा करते हैं। बादशाह का यह गाना अब एक नए रूप में सामने आ रहा है, जिसमें मनोरंजन के साथ साथ सांस्कृतिक और पौराणिक संदर्भ भी जुड़ गए हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि दर्शक इसे किस तरह से स्वीकार करते हैं और क्या यह पहले की तरह ही चर्चा का विषय बनता है।
सतुआ संक्रांति पर श्रद्धा का उत्सव, जानिए इसका धार्मिक और स्वास्थ्य महत्व

नई दिल्ली। आज पूरे देश में सतुआ संक्रांति (सतुआन) का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन गर्मी की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है और सनातन परंपरा में इसका विशेष धार्मिक महत्व है। इस दिन सत्तू, जल से भरा घड़ा, पंखा और मौसमी फलों का दान करने का विधान है। मान्यता है कि इससे देवता प्रसन्न होते हैं और पितरों को तृप्ति मिलती है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है। सूर्य के राशि परिवर्तन से जुड़ा है पर्वयह पर्व मेष संक्रांति के रूप में भी जाना जाता है, जब सूर्य देव मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करते हैं। इस दिन गंगा या अन्य पवित्र नदियों में स्नान और सूर्य की उपासना का विशेष महत्व होता है। इसी के साथ खरमास का समापन भी हो जाता है और विवाह, उपनयन जैसे शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। सत्तू और घड़े के दान का धार्मिक महत्वधार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सत्तू का दान करने से देवी-देवता प्रसन्न होते हैं, जबकि जल से भरा घड़ा दान करने से पितरों की आत्मा तृप्त होती है। बेल, तरबूज, खरबूज, ककड़ी, खीरा और कच्चा आम जैसे ठंडक देने वाले फल भी दान किए जाते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान विष्णु ने राजा बलि को पराजित करने के बाद सबसे पहले सत्तू का सेवन किया था, तभी से इस दिन सत्तू का विशेष महत्व माना जाता है। ज्योतिष मान्यता के अनुसार जिनकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर होता है, वे इस दिन जल से भरा घड़ा दान करें तो उन्हें लाभ मिलता है। आस्था के साथ सेहत का भी ख्यालसतुआ संक्रांति सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है। गर्मी के मौसम में सत्तू शरीर को ठंडक देने का काम करता है। सत्तू का शरबत पीने से शरीर में ऊर्जा बनी रहती है और लू से बचाव होता है। यह फाइबर, प्रोटीन और मिनरल्स से भरपूर होता है, जिससे पाचन तंत्र मजबूत होता है और पेट की गर्मी कम होती है। आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार, घर से निकलने से पहले सत्तू का सेवन करने से हीट स्ट्रोक का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। परंपरा और विज्ञान का अनोखा मेलसतुआ संक्रांति का पर्व भारतीय संस्कृति में परंपरा और विज्ञान का सुंदर उदाहरण है। जहां एक ओर दान-पुण्य से आत्मिक संतोष मिलता है, वहीं सत्तू जैसे पौष्टिक आहार से शरीर को भी राहत मिलती है। यही कारण है कि यह पर्व आज भी लोगों की आस्था और जीवनशैली का अहम हिस्सा बना हुआ है।
चलते-उठते घुटनों से आती आवाज? जानिए कब बन सकती है बड़ी समस्या

नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और लगातार बैठकर काम करने की आदत ने घुटनों से जुड़ी समस्याओं को आम बना दिया है। कई लोग घुटनों में दर्द और चलने-उठने के दौरान आने वाली “कट-कट” की आवाज को मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह समस्या कई बार गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकती है, खासकर Osteoarthritis जैसी स्थितियों का। क्यों आती है घुटनों से आवाज?घुटनों से आवाज आना कई कारणों से हो सकता है। इनमें सबसे आम है जोड़ों के बीच मौजूद कार्टिलेज का घिसना। इसके अलावा शरीर में Vitamin D deficiency और कैल्शियम की कमी, शारीरिक गतिविधि का अभाव, ज्यादा वजन, बार-बार सीढ़ियां चढ़ना या लंबे समय तक एक ही पोजिशन में बैठे रहना भी इसकी वजह बनते हैं। कई मामलों में गैस या जोड़ों में हवा भरने से भी “कट-कट” की आवाज सुनाई देती है। ध्यान रखें: अगर आवाज के साथ दर्द, सूजन या जकड़न भी हो, तो यह सामान्य नहीं है और तुरंत सतर्क होने की जरूरत है। कब हो सकता है खतरे का संकेत?जब घुटनों की आवाज के साथ दर्द बढ़ने लगे, चलने में परेशानी हो या सूजन दिखे, तो यह शुरुआती आर्थराइटिस या जोड़ों की अन्य समस्याओं का संकेत हो सकता है। ऐसे में समय रहते इलाज न किया जाए तो समस्या गंभीर हो सकती है और आगे चलकर चलने-फिरने में भी दिक्कत आ सकती है। जीवनशैली में बदलाव से मिलेगा आरामघुटनों को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना हल्की-फुल्की शारीरिक गतिविधि बेहद जरूरी है। सुबह-शाम 15–20 मिनट की सैर करें। इससे जोड़ों की मूवमेंट बेहतर होती है और दर्द में राहत मिलती है। इसके अलावा:लंबे समय तक एक ही जगह बैठने से बचेंवजन को नियंत्रित रखेंसीढ़ियों का सीमित उपयोग करें आयुर्वेदिक उपाय भी कारगरआयुर्वेद में घुटनों के दर्द और आवाज को कम करने के लिए कुछ औषधियों का उल्लेख मिलता है, जैसे Ashwagandha, Yograj Guggul और Lakshadi Guggul। हालांकि इनका सेवन डॉक्टर की सलाह के बाद ही करना चाहिए। रोजाना रात में तिल के तेल से घुटनों की मालिश करने से सूजन और दर्द में राहत मिलती है और धीरे-धीरे “कट-कट” की आवाज भी कम हो सकती है। धूप और खानपान का रखें ध्यानशरीर में Vitamin D deficiency की कमी भी घुटनों की समस्या बढ़ा सकती है। इसलिए रोजाना कम से कम 10–15 मिनट धूप जरूर लें। साथ ही, सुबह खाली पेट मेथी का पानी पीना भी फायदेमंद माना जाता है। यह शरीर में वात संतुलित रखने में मदद करता है और जोड़ों के दर्द को कम करता है।
तुलसी ब्रांड ,पर कानूनी घमासान पतंजलि फूड्स और ,अनिल इंडस्ट्रीज आमने सामने

नरसिंहपुर । मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले में इन दिनों एक बड़ा कारोबारी और कानूनी विवाद चर्चा का विषय बना हुआ है जहां तुलसी ब्रांड को लेकर दो पक्ष आमने सामने आ गए हैं। एक तरफ पतंजलि फूड्स लिमिटेड है तो दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर संचालित अनिल इंडस्ट्रीज। मामला ट्रेडमार्क और कॉ पीराइट अधिकारों से जुड़ा हुआ है जिसने अब कानूनी रूप ले लिया है। बताया जा रहा है कि तुलसी नाम से खाद्य तेल के ब्रांड को लेकर विवाद शुरू हुआ। पतंजलि फूड्स लिमिटेड का दावा है कि तुलसी उनका अधिकृत ब्रांड है और इस नाम का उपयोग किसी अन्य संस्था द्वारा करना नियमों के खिलाफ है। इसी आधार पर न्यायालय में शिकायत दर्ज कराई गई थी जिसके बाद कोर्ट ने कार्रवाई के आदेश जारी किए। इसी आदेश के तहत नरसिंहपुर के करेली क्षेत्र के जोहारिया में स्थित अनिल इंडस्ट्रीज पर पतंजलि की लीगल टीम ने पहुंचकर कार्रवाई की। आरोप है कि अनिल इंडस्ट्रीज तुलसी नाम से खाद्य तेल बेच रही थी जो कि ट्रेडमार्क नियमों का उल्लंघन है। नियमों के अनुसार किसी भी पंजीकृत ब्रांड नाम के साथ समान या भ्रम पैदा करने वाले शब्दों का उपयोग करना अवैध माना जाता है। हालांकि इस मामले में अनिल इंडस्ट्रीज के मालिक ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्होंने अपने उत्पाद के लिए सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की हैं जिनमें ट्रेडमार्क और कॉपीराइट से संबंधित औपचारिकताएं शामिल हैं। उनका दावा है कि उन्होंने अपने ब्रांड का विज्ञापन भी प्रकाशित कराया था और उस समय किसी भी प्रकार की आपत्ति सामने नहीं आई थी। इतना ही नहीं उन्होंने पतंजलि फूड्स लिमिटेड पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कंपनी उन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। उनके अनुसार जब उन्होंने अपने उत्पादों को पतंजलि के माध्यम से बेचने से इनकार किया तो उनके खिलाफ इस तरह की कानूनी कार्रवाई की गई। यह मामला अब पूरी तरह न्यायालय के अधीन है और अंतिम निर्णय कोर्ट के आदेश के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल दोनों पक्ष अपने अपने दावों पर कायम हैं जिससे यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि वास्तविक रूप से किसका पक्ष मजबूत है। इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि व्यापारिक दुनिया में ब्रांड और पहचान को लेकर प्रतिस्पर्धा किस हद तक जा सकती है। ट्रेडमार्क और कॉपीराइट जैसे कानूनी अधिकार जहां कंपनियों की पहचान की रक्षा करते हैं वहीं इनके दुरुपयोग के आरोप भी समय समय पर सामने आते रहते हैं। अब सभी की नजर न्यायालय के फैसले पर टिकी है जो यह तय करेगा कि इस विवाद में कौन सही है और कौन गलत।