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अदालत ने दिया अनोखा आदेश: याचिका बहाल, आश्रम में एक घंटे सेवा की शर्त

नई दिल्ली। मध्यप्रदेश की Madhya Pradesh High Court की ग्वालियर खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील निर्णय देते हुए साफ किया है कि वकील की गलती की सजा याचिकाकर्ता को नहीं दी जा सकती। इस फैसले ने न्याय के साथ मानवीय दृष्टिकोण और सामाजिक जिम्मेदारी का अनोखा संतुलन पेश किया है। क्या था मामला?यह मामला गोविंद स्वरूप श्रीवास्तव की याचिका से जुड़ा था, जिसे सुनवाई के दौरान उनके वकील के अनुपस्थित रहने के कारण खारिज कर दिया गया था। इसके बाद याचिका बहाल करने के लिए दिया गया आवेदन भी सिंगल बेंच द्वारा निरस्त कर दिया गया था।हालांकि, इस फैसले को चुनौती देते हुए मामला डिवीजन बेंच के सामने पहुंचा, जहां पूरी परिस्थितियों का दोबारा परीक्षण किया गया। डिवीजन बेंच ने दिया राहत भरा फैसलासुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता के वकील किसी अन्य अदालत में व्यस्त होने के कारण उपस्थित नहीं हो सके थे। ऐसे में याचिकाकर्ता को इसका नुकसान उठाना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।अदालत ने पूर्व आदेशों को निरस्त करते हुए याचिका को पुनः बहाल करने के निर्देश दिए, जिससे याचिकाकर्ता को बड़ी राहत मिली। ‘सजा’ नहीं, सामाजिक जिम्मेदारी की अनोखी शर्तहालांकि कोर्ट ने याचिका बहाल करते समय एक अनोखी शर्त भी रखी। अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता या उसका वकील Madhav Andh Ashram जाकर कम से कम 2000 रुपये की खाद्य सामग्री दान करे और वहां रहने वाले बच्चों व जरूरतमंदों के साथ कम से कम एक घंटा समय बिताए। ‘सोशल ऑडिट’ को बढ़ावा देने की पहलकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह शर्त किसी प्रकार की सजा नहीं है, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का एक प्रयास है। अदालत ने ‘सोशल ऑडिट’ की अवधारणा को रेखांकित करते हुए कहा कि समाज के जागरूक नागरिकों को समय-समय पर ऐसे संस्थानों का दौरा करना चाहिए, ताकि वहां की व्यवस्थाओं और जरूरतों को समझकर सुधार लाया जा सके। न्याय के साथ सामाजिक संदेशइस फैसले ने यह संदेश दिया है कि न्याय सिर्फ कानूनी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें मानवीय मूल्यों और सामाजिक सरोकारों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कोर्ट का यह दृष्टिकोण न्याय व्यवस्था में एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

नीरव मोदी प्रत्यर्पण केस में बड़ा अपडेट: लंदन में CBI की सक्रियता तेज, भारत वापसी के संकेत

नई दिल्ली। भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को भारत लाने की प्रक्रिया अब निर्णायक चरण में पहुंचती नजर आ रही है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, प्रत्यर्पण से जुड़ी अधिकांश कानूनी बाधाएं दूर हो चुकी हैं और इसी के चलते केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की टीमें इन दिनों लंदन में सक्रिय हैं। लंदन में CBI की मौजूदगी क्यों अहम? सूत्रों का कहना है कि लंदन में जांच एजेंसियों की बढ़ती गतिविधि इस बात का संकेत है कि प्रत्यर्पण प्रक्रिया अंतिम दौर में है। जैसे ही शेष औपचारिकताएं पूरी होंगी, नीरव मोदी को भारत लाने की कार्रवाई शुरू की जा सकती है। इसे भारत सरकार के लिए बड़ी कानूनी और कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है। क्या है पूरा मामला? नीरव मोदी पर अपने मामा मेहुल चोकसी के साथ मिलकर पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में करीब 13,000 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है। CBI के अनुसार, इस घोटाले में लगभग 6,498 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी सीधे तौर पर नीरव मोदी से जुड़ी बताई गई है। कब से जेल में है मोदी? 55 वर्षीय नीरव मोदी को 19 मार्च 2019 को ब्रिटेन में गिरफ्तार किया गया था। तब से वह वैंड्सवर्थ जेल, लंदन में बंद है। कभी लग्जरी ज्वेलरी ब्रांड और ग्लैमरस आयोजनों में चर्चा में रहने वाला यह कारोबारी अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित आर्थिक अपराधी बन चुका है। कानूनी रास्ते लगभग खत्म हाल ही में ब्रिटेन की हाई कोर्ट ऑफ जस्टिस ने नीरव मोदी की प्रत्यर्पण के खिलाफ अपील को फिर से खोलने की मांग खारिज कर दी थी। इसके बाद उसके पास सीमित कानूनी विकल्प बचे हैं। हालांकि उसने यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय का रुख किया है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे प्रक्रिया में ज्यादा देरी की संभावना नहीं है। कब हो सकता है प्रत्यर्पण? आधिकारिक तौर पर अभी कोई तारीख तय नहीं की गई है, लेकिन हालिया घटनाक्रमों को देखते हुए माना जा रहा है कि प्रत्यर्पण की प्रक्रिया जल्द पूरी हो सकती है। नीरव मोदी का भारत प्रत्यर्पण अब औपचारिकताओं तक सीमित माना जा रहा है। यदि यह जल्द होता है, तो यह न केवल आर्थिक अपराधियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई होगी, बल्कि भविष्य के मामलों के लिए भी सख्त संदेश साबित होगा।

सुप्रीम कोर्ट सख्त: पवन खेड़ा की ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर रोक, तीन हफ्ते में जवाब तलब

नई दिल्ली। पवन खेड़ा को तेलंगाना हाई कोर्ट से मिली ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने कांग्रेस नेता को नोटिस जारी करते हुए तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने यह आदेश असम सरकार की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिका में तेलंगाना हाई कोर्ट द्वारा दी गई एक सप्ताह की ट्रांजिट बेल को चुनौती दी गई थी। कोर्ट का स्पष्ट निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि फिलहाल ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर रोक रहेगी। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पवन खेड़ा असम की सक्षम अदालत में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन करते हैं, तो इस आदेश से उस प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद तय की गई है। असम सरकार की दलील सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि इस मामले में तेलंगाना हाई कोर्ट को सुनवाई का अधिकार क्षेत्र नहीं था, क्योंकि एफआईआर और कथित अपराध दोनों असम में दर्ज हुए हैं। उन्होंने इसे ‘फोरम शॉपिंग’ बताते हुए कानून के दुरुपयोग का आरोप लगाया। क्या है पूरा मामला यह विवाद हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भूयान सरमा को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से जुड़ा है। असम पुलिस ने पवन खेड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जिनमें मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश के आरोप शामिल हैं। खेड़ा का पक्ष खेड़ा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि मामला राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है और अधिकतम मानहानि का मामला बनता है, जिसमें गिरफ्तारी आवश्यक नहीं है। पहले क्या हुआ था तेलंगाना हाई कोर्ट की एकल पीठ ने 10 अप्रैल को खेड़ा को एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, ताकि वे संबंधित अदालत में नियमित जमानत के लिए आवेदन कर सकें। इसी आदेश को चुनौती देते हुए असम सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। राजनीतिक माहौल गर्म इस मामले ने राज्य की सियासत को भी गरमा दिया है। कांग्रेस ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया है, जबकि बीजेपी ने खेड़ा के बयान को गैरजिम्मेदार और मानहानिकारक करार दिया है।

कलेक्ट्रेट में फर्जीवाड़ा सरकारी बाबुओं और दलाल की मिलीभगत से जमीन बेचने की साजिश

देवास । मध्यप्रदेश के देवास जिले में प्रशासनिक तंत्र को झकझोर देने वाला एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है जिसमें कलेक्टर के नाम से फर्जी हस्ताक्षर और आदेश जारी कर जमीन बेचने की साजिश रची गई। इस मामले ने न केवल सरकारी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं बल्कि आम जनता में भी आक्रोश पैदा कर दिया है। जानकारी के अनुसार कलेक्ट्रेट कार्यालय से जुड़े इस मामले में सरकारी कर्मचारियों और एक दलाल की मिलीभगत सामने आई है। कलेक्टर ऋतुराज सिंह को जब इस गड़बड़ी की जानकारी मिली तो उन्होंने तत्काल BNP थाना पुलिस को शिकायत दर्ज कराई। जांच के बाद पुलिस ने धोखाधड़ी और सरकारी दस्तावेजों में कूट रचना जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए नजूल शाखा के बाबू रमेश लोबानिया अपर कलेक्टर कार्यालय के बाबू संजय जाटव विजयागंज मंडी तहसील के बाबू जितेंद्र भद्रे और एक दलाल को गिरफ्तार कर लिया है। शहर के CSP सुमित अग्रवाल ने बताया कि आरोपियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी दस्तावेज तैयार किए और उन्हें वैध दिखाकर जमीन बेचने की कोशिश की। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने सरकारी प्रक्रिया को दरकिनार कर कलेक्टर के नाम से फर्जी आदेश जारी किए। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल कर छोटे और कमजोर वर्ग के लोगों की जमीन को बेचने का प्रयास किया गया। इतना ही नहीं एक किसान की जमीन की रजिस्ट्री भी करवा दी गई थी जिसे बाद में निरस्त कराया गया। इस पूरे मामले में दलाल की भूमिका भी बेहद अहम मानी जा रही है जिसने खरीदार और सरकारी कर्मचारियों के बीच कड़ी का काम किया। आरोप है कि पैसों के लालच में यह पूरा फर्जीवाड़ा अंजाम दिया गया। यह मामला केवल फर्जी दस्तावेज बनाने तक सीमित नहीं है बल्कि यह एक सुनियोजित साजिश प्रतीत हो रही है जिसमें अंदरूनी कर्मचारियों ने सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाया। अब यह जांच का विषय है कि क्या इस पूरे प्रकरण में वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी थी या उन्हें पूरी तरह अंधेरे में रखा गया। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है और संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि यदि सरकारी दफ्तरों से ही फर्जी आदेश जारी होने लगें तो आम जनता का भरोसा व्यवस्था पर कैसे कायम रहेगा।

ईरान-अमेरिका तनाव का असर: सोना-चांदी की कीमतों में लगातार दूसरे दिन तेजी

नई दिल्ली। सोने और चांदी की कीमतों में आज लगातार दूसरे दिन तेजी देखने को मिली है। अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत की संभावनाओं की वजह से आज इंटरनेशनल मार्केट गोल्ड और सिल्वर का रेट फिर से बढ़ा हुआ है। मौजूदा परिस्थितियों की वजह से दुनिया भर में एनर्जी संकट गहरा गया है। बता दें, पाकिस्तान में ईरान और अमेरिका के बीच एक दौर की बातचीत हो गई है। लेकिन यह पूरी वार्ता विफल रही थी। दोनों पक्षों के बीच कोई समझौता तब नहीं हो पाया था। क्या है गोल्ड का ताजा रेट (Gold Latest Price)COMEX gold की कीमतों में आज शुरुआती कारोबार के दौरान बढ़ोतरी देखने को मिली। जिसके बाद यह 4855 डॉलर प्रति आउंस के स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले के सत्र में सोने का भाव 2 प्रतिशत से अधिक बढ़ा था। COMEX Silver के रेट भी आज बुधवार को बढ़ोतरी देखने को मिली है। चांदी की कीमतों में उछाल के बाद यह 79 डॉलर प्रति आउंस के स्तर पर पहुंच गई थी। ब्लूमबर्ग के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत आने वाले दिनों में हो सकती है। न्यूयार्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगले दो दिनों में बातचीत शुरू होने के संकेत दिए हैं। इन खबरों की वजह से मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाजार में तेजी दर्ज की गई। वहीं, डॉलर इंडेक्स 0.3 प्रतिशत लुढ़क चुका है। बता दें, जब से युद्ध शुरू हुआ है तब से मेटल की कीमतों में 8 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है। कहां तक जाएगा सोने और चांदी का रेट (Gold Silver Price Outlook)Augmon से जुड़ी रेनिशा कहती हैं कि सोने और चांदी इस समय भी बुल रन पर सवार हैं। हालांकि, आगे का रास्ता काफी अनिश्चितताओं से भरा हुआ है। रेनिशा का कहना है टेक्निकल स्तर पर, “गोल्ड 4800 से 4850 डॉलर (154000 रुपये से 155000 रुपये तक) के आस-पास रेसिस्टेंस दिखा रहा है। अगर कीमतें इसके ऊपर गई तो यह फिर 5000 डॉलर (160000 रुपये) के स्तर तक जा सकती हैं।” चांदी के विषय में एक्सपर्ट की राय है कि यह 77 डॉलर (246000 रुपये) के स्तर पर रेसिस्टेंस दिखा रहा है। इसके ऊपर जाने की स्थिति में चांदी का दाम 82 डॉलर से 87 डॉलर (255000 रुपये से 265000 रुपये) के स्तर तक पहुंच सकता है।”

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच फ्रांस की सक्रिय कूटनीति, क्या मैक्रों दिला पाएंगे राहत?

वाशिंगटन। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अब इमैनुएल मैक्रों ने शांति बहाली की दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी है। फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप और मसूद पेजेश्कियन से अलग-अलग बातचीत कर गतिरोध तोड़ने की कोशिश की है। होर्मुज स्ट्रेट बना तनाव का केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य में बनी तनावपूर्ण स्थिति इस पूरे विवाद की मुख्य वजह है। अमेरिका द्वारा यहां नौसैनिक नाकाबंदी लगाए जाने के बाद हालात और बिगड़ गए हैं। इस बीच ईरान ने संकेत दिया है कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन शर्त यह है कि चर्चा अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में हो। ज़्यादा जानें उज्जैन समाचार भोपाल रियल एस्टेट जबलपुर समाचार यह भी पढ़ें | US President Donald Trump Calls PM Modi; 40-Minute Discussion Held on Iran and Hormuz ईरान की शर्तें और रुख ईरान ने स्पष्ट किया है कि किसी भी पूर्ण युद्धविराम के लिए लेबनान में जारी शत्रुता को खत्म करना जरूरी होगा। तेहरान का मानना है कि यूरोप, खासकर फ्रांस, इस गतिरोध को खत्म करने में अहम भूमिका निभा सकता है। हालांकि इस्लामाबाद में हालिया वार्ता बेनतीजा रही, लेकिन ईरान ने आगे बातचीत जारी रखने की इच्छा जताई है। मैक्रों का शांति फॉर्मूला मैक्रों ने दोनों नेताओं से बातचीत के बाद तीन अहम प्रस्ताव सामने रखे— क्षेत्रीय स्थिरता के लिए युद्धविराम का विस्तार, जिसमें लेबनान को भी शामिल किया जाएहोर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी शर्त और शुल्क के तुरंत खोला जाएफ्रांस और ब्रिटेन के नेतृत्व में बहुपक्षीय मिशन बनाकर नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित की जाए फ्रांस और ब्रिटेन इस मुद्दे पर पेरिस में एक वीडियो कॉन्फ्रेंस की मेजबानी भी करने जा रहे हैं, जिसमें अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर चर्चा होगी। ट्रंप का दावा—ईरान बातचीत को तैयार डोनाल्ड ट्रंप ने भी हाल ही में दावा किया कि ईरान की ओर से बातचीत के संकेत मिले हैं और तेहरान समझौता करने को इच्छुक है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका का रुख सख्त बना रहेगा। क्या संभव है समाधान? विशेषज्ञों के मुताबिक, हालात बेहद संवेदनशील हैं और किसी भी छोटी चूक से बड़ा संघर्ष हो सकता है। ऐसे में फ्रांस की मध्यस्थता अहम साबित हो सकती है, लेकिन अंतिम समाधान दोनों पक्षों की राजनीतिक इच्छाशक्ति पर निर्भर करेगा। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच फ्रांस की पहल एक उम्मीद जरूर जगाती है, लेकिन शांति की राह अभी भी आसान नहीं दिख रही। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि कूटनीति जीतती है या टकराव और गहराता है।

राघव चड्ढा को केंद्र से मिली Z सिक्योरिटी, पंजाब सरकार ने छीन ली थी सुरक्षा

नई दिल्ली । आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा को केंद्र सरकार ने Z श्रेणी की सुरक्षा मुहैया कराई है। इससे पहले पंजाब की AAP सरकार उनकी सुरक्षा वापस ले चुकी थी। सूत्रों के अनुसार खुफिया एजेंसी की थ्रेट परसेप्शन रिपोर्ट के आधार पर गृह मंत्रालय ने यह निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के तहत दिल्ली और पंजाब में राघव चड्ढा को Z सिक्योरिटी मिलेगी जबकि अन्य स्थानों पर उन्हें Y प्लस सुरक्षा प्रदान की जाएगी।पार्टी में बदली जिम्मेदारियां हाल ही में आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटा दिया था। उनकी जगह अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंपी गई। साथ ही सदन में उनके बोलने पर भी रोक लगा दी गई थी। इसी बीच प्रवर्तन निदेशालय ED ने अशोक मित्तल के जालंधर स्थित आवास और उनकी निजी यूनिवर्सिटी में छापेमारी भी की है। खामोश किया जा सकता है हराया नहीं पार्टी से मतभेद बढ़ने के बाद राघव चड्ढा ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उन्हें बोलने से रोका जा सकता है लेकिन हराया नहीं जा सकता। उन्होंने पार्टी की ओर से लगाए जा रहे आरोपों का जवाब वीडियो जारी कर दिया। AAP नेतृत्व से बढ़ी दूरी पंजाब में AAP सरकार बनने के बाद 2022 में राघव चड्ढा को सुरक्षा दी गई थी जो लगातार जारी रही। लेकिन अरविंद केजरीवाल मनीष सिसोदिया और संजय सिंह जैसे नेताओं के जेल जाने पर उनकी चुप्पी पार्टी नेतृत्व को खली। हालांकि उस समय यह कहा गया कि वे आंखों के इलाज के लिए विदेश गए हुए थे। बाद में जब पार्टी के बड़े नेता जेल से बाहर आए तब भी उनकी सक्रियता कम दिखाई दी। इसके बाद उन्हें राज्यसभा में पद से हटाया गया और अब उनकी सुरक्षा भी वापस ले ली गई थी।Z सिक्योरिटी में कैसा होता है सुरक्षा घेरा Z श्रेणी की सुरक्षा देश में उच्च स्तर की सुरक्षा मानी जाती है। इसमें लगभग 22 सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाते हैं जिनमें 4 से 6 NSG कमांडो शामिल होते हैं। इसके अलावा दिल्ली पुलिस ITBP CRPF और स्थानीय पुलिस के जवान भी इस सुरक्षा घेरे का हिस्सा होते हैं।

राष्ट्रगीत विवाद: इंदौर की दो महिला कांग्रेस पार्षदों पर FIR, घंटों पूछताछ के बाद पुलिस की कार्रवाई

इंदौर । नगर निगम के बजट सत्र के दौरान राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के कथित अनादर के मामले में पुलिस ने सख्त कदम उठाया है। जांच पूरी होने के बाद एमजी रोड थाना पुलिस ने कांग्रेस की दो महिला पार्षदों रुबीना इकबाल खान और फौजिया शेख अलीम के खिलाफ बुधवार को मामला दर्ज कर लिया। शिकायत और वीडियो के आधार पर कार्रवाई पुलिस ने यह कार्रवाई भाजपा पार्षदों द्वारा दी गई शिकायत और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को आधार बनाकर की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने पहले दोनों पार्षदों को पूछताछ के लिए तलब किया था। एमजी रोड थाना पुलिस ने सोमवार और मंगलवार को दोनों आरोपियों को बुलाकर विस्तृत पूछताछ की। इस दौरान उनसे कई अहम सवाल पूछे गए और पूरे घटनाक्रम को लेकर उनके बयान दर्ज किए गए। साढ़े चार घंटे तक चली पूछताछ, दर्ज हुए बयान एसीपी विनोद दीक्षित के मुताबिक, भाजपा पार्षद दल ने थाने पहुंचकर इस मामले में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद जांच शुरू की गई। सोमवार को पार्षद फौजिया शेख अलीम के बयान दर्ज किए गए, जबकि मंगलवार को रुबीना इकबाल खान से पूछताछ की गई। दोनों से करीब साढ़े चार घंटे तक सवाल-जवाब किए गए। इस धारा में दर्ज हुआ केस पूछताछ और जांच के बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 196/1 के तहत केस दर्ज किया है। यह धारा विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता बढ़ाने और सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने से संबंधित है।

मध्यप्रदेश में चौंकाने वाला मामला अंतिम संस्कार रुका पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया शव

बैतूल । मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के आमला नगर में एक महिला की संदिग्ध मौत के मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब अंतिम संस्कार के दौरान चिता से शव को उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेजना पड़ा। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है और मामले को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार भीमनगर निवासी 62 वर्षीय शकुंतला गुजरे का मंगलवार को निधन हो गया था। परिजनों ने नियमानुसार उनका अंतिम संस्कार शुरू कर दिया और स्थानीय मोक्षधाम में चिता भी तैयार कर दी गई थी। इसी दौरान अचानक स्थिति बदल गई। महाराष्ट्र के सौसर क्षेत्र से पहुंची मृतका की बहन अंजली ने अंतिम दर्शन के दौरान शरीर पर कुछ संदिग्ध चोट के निशान देखे। इन निशानों को देखकर उन्होंने तुरंत हत्या की आशंका जताई और अंतिम संस्कार रोकने की मांग की। इसके बाद मामले की सूचना पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को गंभीरता से लेते हुए चिता से शव को उतरवाया गया। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया ताकि मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। पुलिस अधिकारियों के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला की मौत स्वाभाविक थी या इसके पीछे किसी प्रकार की साजिश या हिंसा शामिल है। फिलहाल मामले की जांच शुरू कर दी गई है और सभी पहलुओं पर गंभीरता से पड़ताल की जा रही है। इस घटना ने पूरे इलाके में चर्चा का माहौल बना दिया है और लोग इसे लेकर तरह-तरह की आशंकाएं जता रहे हैं। पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और कहा है कि जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।

प्रॉपर्टी कारोबारी पर जानलेवा हमला, गोली सीने के पार, पत्थर से भी किया वार

नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के Rajgarh जिले के भगवतीपुर गांव में रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है। 26 वर्षीय प्रॉपर्टी कारोबारी रामबाबू गुर्जर की उनके ही चचेरे भाइयों ने बेरहमी से हत्या कर दी। गोली मारने के बाद आरोपियों ने पत्थरों से हमला कर उनका चेहरा कुचल दिया। इस वारदात ने पूरे इलाके को दहला दिया है। मां की आंखों के सामने तड़पता रहा बेटामृतक की मां संतोष बाई ने जो मंजर बताया, वह दिल को झकझोर देने वाला है। उन्होंने कहा, “जैसे ही खबर मिली कि बेटे को मार रहे हैं, मैं दौड़कर मौके पर पहुंची। वह खून से लथपथ पड़ा था। मैंने उसे गोद में लिया और पल्लू से चेहरा साफ करने लगी।”तड़पते हुए रामबाबू ने आखिरी सांसों में कहा- “मां, मुझे विशाल और हुकुम ने गोली मारी… फिर पत्थरों से मारा…” और इतना कहते ही उसकी आंखें हमेशा के लिए बंद हो गईं।  सुनसान रास्ते पर रची गई साजिशघटना सोमवार (13 अप्रैल) रात करीब 10 बजे की है। रामबाबू गांव लौट रहे थे, तभी गांव से करीब 300 मीटर पहले सुनसान रास्ते पर आरोपियों ने पत्थर रखकर उनकी बाइक रुकवाई। जैसे ही उन्होंने गाड़ी धीमी की, सीने में गोली मार दी। गिरने के बाद भी हमलावर नहीं रुके और पत्थरों से लगातार हमला करते रहे।पोस्टमॉर्टम में खुलासा हुआ कि गोली सीने को चीरते हुए आर-पार निकल गई थी, जबकि पत्थर के वार से उनका जबड़ा टूट गया, कान फट गया और सिर व आंख में गंभीर चोटें आईं। जमीन विवाद बना हत्या की वजहपरिजनों के मुताबिक, इस खौफनाक हत्या के पीछे पुराना जमीन विवाद था। मृतक के भाई दीपक ने बताया कि चचेरा भाई हुकुम अपनी जमीन बेचते समय उनके खेत से रास्ता चाहता था, जिसे परिवार ने मना कर दिया था। तभी से रंजिश चल रही थी और आरोपियों ने बदला लेने की धमकी भी दी थी। शादी की खुशियां मातम में बदलींघर में खुशियों का माहौल था। 24 अप्रैल को छोटे भाई दीपक की शादी होने वाली थी। 19 अप्रैल को माता पूजन और 25 को रिसेप्शन तय था। रामबाबू खुद शादी के कार्ड बांट रहे थे। लेकिन एक ही रात में खुशियां मातम में बदल गईं।रामबाबू की पत्नी गर्भवती है और उनकी डेढ़ साल की बेटी भी है। इस घटना ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है। पुलिस कार्रवाई: एक आरोपी गिरफ्तार, दूसरा फरारमामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दूसरा अब भी फरार है। Madhya Pradesh Police आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है। गांव में दहशत, लोगों में गुस्साघटना के बाद गांव में सन्नाटा और दहशत का माहौल है। लोग खुलकर कुछ कहने से बच रहे हैं, लेकिन अंदर गुस्सा साफ झलक रहा है। घटनास्थल पर खून से सने पत्थर और बिखरे शादी के कार्ड इस दर्दनाक घटना की गवाही दे रहे हैं।