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नर्मदापुरम में प्रतिभाओं का सम्मान 52 टॉपर्स को मिला मंच विधायक बोले यही जीवन के टर्निंग पॉइंट

नर्मदापुरम । नर्मदापुरम जिले में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित करने के लिए आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह प्रेरणा और उत्साह का केंद्र बन गया। मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं और 12वीं परीक्षाओं में जिले में शीर्ष स्थान प्राप्त करने वाले 52 विद्यार्थियों को जिला पंचायत सभागार में सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कलेक्टर सोमेश मिश्रा की अध्यक्षता में कार्यक्रम आयोजित हुआ, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में विधायक डॉ सीताशरन शर्मा मौजूद रहे। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष राधा पटेल, जनपद अध्यक्ष भूपेंद्र चौकसे और सीईओ हिमांशु जैन सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र और सम्मान देकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा जीवन का सबसे बड़ा अस्त्र है, जो व्यक्ति को हर चुनौती से लड़ने की क्षमता देता है। उन्होंने कहा कि 10वीं कक्षा जीवन का पहला महत्वपूर्ण पड़ाव होती है, जहां से भविष्य की नींव मजबूत होती है। इसके बाद 12वीं, उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में निरंतर मेहनत ही सफलता की कुंजी है। विधायक डॉ सीताशरन शर्मा ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि 10वीं और 12वीं कक्षा जीवन के दो बड़े टर्निंग पॉइंट होते हैं। 10वीं के बाद विषयों का चयन और 12वीं के बाद करियर का निर्णय व्यक्ति के पूरे भविष्य को दिशा देता है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की इस सफलता से उनके परिवारों में गर्व और खुशी का माहौल है। इस वर्ष के परीक्षा परिणामों में खास बात यह रही कि ग्रामीण और सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों ने शानदार प्रदर्शन किया। सीमित संसाधनों के बावजूद इन छात्रों ने अपनी मेहनत और लगन से सफलता हासिल की, जो अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन गई है। पथरौटा के सरकारी स्कूल की छात्रा रितिका कुरुचि ने 12वीं होम साइंस में टॉप कर एक मिसाल पेश की। माता-पिता के साये के बिना दादा-दादी और चाचा-चाची के सहयोग से पढ़ाई करते हुए उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की। वहीं तारारोड़ा गांव की आंशिक सराठे ने आर्ट्स संकाय में 93.2 प्रतिशत अंक लाकर पहला स्थान प्राप्त किया। उनके पिता सैलून चलाते हैं, जिससे यह सफलता और भी प्रेरणादायक बन जाती है। उत्कृष्ट विद्यालय की शेख जोया ने आर्ट्स में दूसरा स्थान हासिल किया, जिनके पिता बाइक मैकेनिक हैं। गणित में अवनी गोहिया और रशिका राय, विज्ञान में आदित्य लोवंशी और नमामि बसेड़िया, कृषि में कनक चौरे और कॉमर्स में निखिल सोनी तथा शिफा शाह ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। 10वीं कक्षा में नैना यादव, सोनम परिहार और प्रिंसी साहू टॉपर रहीं। जिला शिक्षा अधिकारी लक्ष्मी नारायण प्रजापति के अनुसार, जिले का 10वीं का परिणाम 78 प्रतिशत और 12वीं का 81 प्रतिशत रहा, जिससे नर्मदापुरम को प्रदेश में 16वीं रैंक प्राप्त हुई है। यह समारोह केवल सम्मान का मंच नहीं बल्कि उन संघर्षों और सफलताओं की कहानी भी है, जो यह बताती हैं कि मेहनत और संकल्प से किसी भी परिस्थिति को पार किया जा सकता है।

बैंकिंग शेयरों में दबाव और कमजोर वैश्विक संकेतों से बाजार पर बना रहा नकारात्मक असर

नई दिल्ली: वैश्विक संकेतों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। निवेशकों की सतर्कता और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के इंतजार का असर बाजार पर स्पष्ट रूप से देखने को मिला, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक दबाव में नजर आए। शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स हल्की गिरावट के साथ 77,976 के स्तर के आसपास खुला, जबकि निफ्टी भी कमजोरी के साथ 24,166 के करीब पहुंच गया। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में भी बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ था, जिससे निवेशकों का रुख पहले से ही सतर्क बना हुआ था और बाजार में भरोसे की कमी दिखाई दी। बाजार की इस कमजोरी का असर बैंकिंग सेक्टर पर भी पड़ा, जहां प्रमुख बैंकिंग शेयरों में दबाव देखने को मिला। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं और सुरक्षित निवेश रणनीति अपना रहे हैं। वित्तीय शेयरों में बिकवाली ने बाजार की चाल को और कमजोर किया। वैश्विक स्तर पर भी मिश्रित संकेत देखने को मिल रहे हैं। एशियाई बाजारों में गिरावट का रुख बना हुआ है, जहां कई प्रमुख सूचकांक कमजोर प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि अमेरिकी बाजारों में पिछले सत्र में हल्की बढ़त दर्ज की गई, लेकिन इसका सकारात्मक असर भारतीय बाजार पर दिखाई नहीं दिया। कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिली है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए कुछ राहत का संकेत है। इसके बावजूद निवेशक पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं और बाजार में सतर्कता बनी हुई है। डॉलर की मजबूती भी बाजार पर दबाव बना रही है। मजबूत डॉलर के कारण विदेशी निवेश प्रवाह प्रभावित हो सकता है, जिससे उभरते बाजारों में अस्थिरता बढ़ने की संभावना रहती है। यही कारण है कि घरेलू बाजार में उतार-चढ़ाव का माहौल बना हुआ है। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेत जरूर सामने आए हैं, लेकिन निवेशक अभी भी किसी ठोस परिणाम का इंतजार कर रहे हैं। प्रमुख देशों के बीच चल रही बातचीत का सीधा असर बाजार की दिशा पर पड़ सकता है, इसलिए बाजार की नजर अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में बाजार सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव के साथ कारोबार कर सकता है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे धैर्य बनाए रखें और सोच-समझकर निवेश निर्णय लें।

लोकसभा में राहुल गांधी के भाषण पर निशिकांत दुबे का तंज, बोले माइकल जैक्शन का डांस याद आ गया’

नई दिल्ली। महिला आरक्षण बिल पर मतदान से पहले लोकसभा में जोरदार बहस देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर जाति जनगणना को लेकर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे को दबाने की कोशिश कर रही है। वहीं बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने उनके भाषण पर तीखा कटाक्ष किया। निशिकांत दुबे ने साधा निशाना इस पर जवाब देते हुए बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने विपक्ष खासकर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस सत्ता में थी तब जातिगत जनगणना क्यों नहीं कराई गई। साथ ही उन्होंने पुराने परिसीमन और नीतियों का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने पहले इसका विरोध किया था। राहुल गांधी के भाषण पर तंज कसते हुए निशिकांत दुबे ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि महिला मुद्दों पर गंभीर चर्चा सुनने को मिलेगी लेकिन भाषण देखकर उन्हें माइकल जैक्शन का डांस याद आ गया। अखिलेश यादव से हुई तीखी नोकझोंक बहस के दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी हस्तक्षेप किया और दुबे से कहा कि वे इतिहास में ज्यादा न जाएं और मुद्दे पर बात करें। इस पर दोनों नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। चर्चा के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि वे कन्नौज में एक मंदिर गए थे और उनके लौटने के बाद मंदिर को गंगाजल से धुलवाया। निशिकांत दुबे ने कहा कि जिसने भी ऐसा किया वो गलत है और मंदिर धुलवाने वाले को कानून के हिसाब से सजा मिलनी चाहिए। निशिकांत दुबे ने आगे कहा कि कांग्रेस लंबे समय तक जातिगत जनगणना के खिलाफ रही है। उन्होंने सोनिया गांधी और पी. चिदंबरम के पुराने बयानों का जिक्र करते हुए दावा किया कि कांग्रेस नेताओं ने पहले इस मुद्दे को संविधान और सामाजिक एकता के खिलाफ बताया था।

संगीतकार ने गरारे की ध्वनि को रिकॉर्ड करके फिल्म का सबसे यादगार और डरावना पार्श्व संगीत तैयार किया था।

नई दिल्ली:   भारतीय सिनेमा का इतिहास केवल शानदार कहानियों और अभिनय तक सीमित नहीं है बल्कि इसके पीछे तकनीकी नवाचारों और संगीत की अद्भुत दुनिया छिपी हुई है। अस्सी के दशक की एक ऐसी ही कल्ट क्लासिक फिल्म ने दर्शकों के दिलों पर अपनी अमिट छाप छोड़ी थी। इस फिल्म में नायक के एक नकारात्मक और रहस्यमयी हमशक्ल पात्र के पर्दे पर आगमन के समय बजने वाले डरावने पार्श्व संगीत ने उस दौर में सिनेमाघरों में बैठे लोगों के रोंगटे खड़े कर दिए थे। दशकों तक इस विशिष्ट ध्वनि को लेकर फिल्म प्रेमियों के मन में कौतूहल बना रहा कि इसे किस आधुनिक वाद्य यंत्र या तकनीक से बनाया गया होगा। अब इस संगीत के पीछे की वास्तविकता सामने आई है जो यह स्पष्ट करती है कि एक महान कलाकार के लिए पूरी दुनिया ही संगीत का एक मंच है और वह साधारण वस्तुओं से भी असाधारण कला का सृजन कर सकता है। फिल्म में जब उस खूंखार पात्र का प्रवेश होता है तो पृष्ठभूमि में एक अजीब सी गूंज और कंपन सुनाई देता है जो दर्शकों के मन में भय का संचार करता है। लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि यह किसी विदेशी तकनीक या महंगे सिंथेसाइज़र का परिणाम है। वास्तविकता यह है कि संगीत जगत के उस दिग्गज जादूगर ने इस भयावह प्रभाव को पैदा करने के लिए किसी पारंपरिक साज का सहारा नहीं लिया था। उन्होंने इस ध्वनि को उत्पन्न करने के लिए पानी के साथ गरारे करने की क्रिया का उपयोग किया था। संगीतकार ने गरारे करते समय निकलने वाली आवाज को रिकॉर्ड किया और फिर उसे अपनी संगीत समझ के साथ इस तरह ढाला कि वह सिनेमाई इतिहास का सबसे चर्चित और डरावना बैकग्राउंड स्कोर बन गया। यह प्रयोग उनकी उस मौलिक सोच को दर्शाता है जहां वे रोजमर्रा की ध्वनियों में भी संगीत ढूंढ लेते थे। पंचम दा के नाम से मशहूर इस संगीतकार की यह विशेषता रही थी कि वे हमेशा लीक से हटकर सोचने के लिए जाने जाते थे। उन्होंने अपने करियर में कई बार कांच की बोतलों को टकराने रसोई के बर्तनों या फिर कागज फटने जैसी ध्वनियों को सुपरहिट गीतों का हिस्सा बनाया था। इस विशेष फिल्म के लिए उन्होंने गरारे की आवाज को इसलिए चुना क्योंकि वे उस नकारात्मक पात्र की क्रूरता और रहस्य को एक अलग पहचान देना चाहते थे। जब इस रचनात्मक रहस्य का खुलासा हुआ तो संगीत के जानकार भी हैरान रह गए। यह किस्सा आज भी फिल्म निर्माण की कक्षाओं में एक उदाहरण के रूप में सुनाया जाता है कि कैसे एक कलाकार अपनी कल्पनाशीलता के बल पर बहुत ही सीमित और साधारण संसाधनों से वैश्विक स्तर का प्रभाव पैदा कर सकता है। उस समय के सिनेमा में अमिताभ बच्चन जैसे महानायक की उपस्थिति फिल्म के हर पक्ष से सर्वश्रेष्ठ की मांग करती थी। संगीतकार ने इस मांग को बखूबी समझा और न केवल मधुर गीतों की रचना की बल्कि पार्श्व संगीत के जरिए फिल्म के तनावपूर्ण दृश्यों में प्राण फूंक दिए। नायक के सौम्य व्यक्तित्व और उसके खतरनाक हमशक्ल के बीच का मानसिक द्वंद्व पर्दे पर स्पष्ट करने में इस डरावनी ध्वनि का बहुत बड़ा योगदान था। आज के आधुनिक दौर में जहां कंप्यूटर के जरिए लाखों तरह की ध्वनियां बनाई जा सकती हैं वहां अस्सी के दशक के ये मौलिक प्रयोग यह याद दिलाते हैं कि तकनीक केवल एक साधन है असली जादू तो कलाकार के मस्तिष्क और उसकी रचनात्मकता में होता है। सिनेमा की यह विरासत हमें यह संदेश देती है कि महान कलाकृतियां केवल महंगे उपकरणों की मोहताज नहीं होतीं। कभी-कभी एक साधारण विचार और उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग ही इतिहास रचने के लिए काफी होता है। दशकों बीत जाने के बाद भी जब दर्शक उस फिल्म के उस विशेष दृश्य को देखते हैं तो वही पुराना रोमांच महसूस करते हैं। यह कहानी न केवल एक संगीतकार की सफलता को बयां करती है बल्कि भारतीय फिल्म संगीत के उस स्वर्णिम काल को भी समर्पित है जहां कलाकार नए-नए प्रयोगों से दर्शकों को आश्चर्यचकित करने का कोई भी अवसर हाथ से नहीं जाने देते थे।

महिला आरक्षण पर राहुल गांधी ने सरकार को घेरा, कहा- यह असली वुमन बिल नहीं, दादी इंदिरा का किया जिक्र

नई दिल्ली। संसद के विशेष सत्र के दूसरे दिन लोकसभा में बोलते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने महिला आरक्षण मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए एक निजी अनुभव साझा किया और सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने अपनी दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को याद करते हुए कहा कि उन्होंने उन्हें बचपन में डर का सामना करना सिखाया था। सुनाया बचपन का किस्सा राहुल गांधी ने बताया कि बचपन में एक बार उनकी दादी उन्हें घर से बाहर ले गईं और कुछ समय के लिए अकेला छोड़ दिया। वहां मौजूद कुत्तों और लोगों के कारण वे डर गए थे। जब इंदिरा गांधी वापस आईं और उन्होंने अपनी परेशानी बताई तो उन्होंने समझाया कि डर असल में उनके मन में था। राहुल ने कहा कि इस अनुभव ने उन्हें जिंदगी में डर से लड़ना सिखाया। महिलाओं से हर कोई सीखता है अपने संबोधन में राहुल गांधी ने कहा कि हर व्यक्ति अपने जीवन में महिलाओं से सीखता है चाहे वह मां हो बहन हो या अन्य कोई भूमिका। उन्होंने यह भी कहा कि सच्चाई कड़वी होती है लेकिन उसका सामना करना जरूरी है। हालांकि उन्होंने मौजूदा महिला आरक्षण विधेयक पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह वास्तव में महिलाओं के हितों का बिल नहीं है। विधेयक की मंशा पर उठाए सवाल राहुल गांधी ने कहा कि 2023 में पारित महिला आरक्षण बिल को लेकर सत्ता पक्ष के सहयोगियों ने संकेत दिया था कि इसे 10 साल बाद लागू किया जा सकता है। उनके अनुसार यह महिलाओं को तत्काल लाभ देने वाला कदम नहीं है। चुनावी नक्शा बदलने की कोशिश कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि देश के इलेक्टोरल मैप को बदलने की कोशिश की जा रही है जो महिला आरक्षण के मूल मुद्दे से अलग है। उन्होंने कहा कि यह एक बड़ा राजनीतिक सवाल है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जाति जनगणना का भी उठाया मुद्दा लोकसभा में अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने जाति जनगणना को लेकर भी सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री ने इस पर बात तो की लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि इसके आंकड़ों का उपयोग आरक्षण तय करने में होगा या नहीं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार वास्तविक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करती है तो कांग्रेस इसका पूरा समर्थन करेगी। सरकार पर डर की राजनीति का आरोप राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार डर की राजनीति कर रही है और देश की राजनीतिक संरचना को बदलने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि छोटे राज्यों को उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी कम होने का संकेत दिया जा रहा है जिसे विपक्ष स्वीकार नहीं करेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि दलित और ओबीसी समुदायों को पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है। राहुल गांधी ने अंत में कहा कि उनकी पार्टी देश के लोगों के प्रतिनिधित्व से कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी वर्ग के अधिकारों पर आंच नहीं आने दी जाएगी और हर हमले का मजबूती से विरोध किया जाएगा।

डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए गोल्ड निवेश में पारदर्शिता और सुविधा का बढ़ता रुझान..

नई दिल्ली : अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर सोना खरीदने की पारंपरिक परंपरा अब डिजिटल रूप में भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इसी कड़ी में एक प्रमुख डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म ने अपने यूजर्स को 24 कैरेट डिजिटल गोल्ड खरीदने का आसान और सुरक्षित विकल्प उपलब्ध कराया है। यह सुविधा उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो बिना किसी भौतिक झंझट के निवेश करना चाहते हैं और तकनीक के माध्यम से अपनी बचत को बढ़ाना चाहते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यूजर्स 99.99 प्रतिशत शुद्धता वाला डिजिटल गोल्ड सीधे ऐप के माध्यम से खरीद सकते हैं। यह गोल्ड विश्वसनीय और प्रमाणित प्लेटफॉर्म्स के जरिए उपलब्ध कराया जाता है, जिससे पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित होती है। इस व्यवस्था के तहत ग्राहकों को भरोसेमंद निवेश का अनुभव मिलता है और उन्हें गुणवत्ता को लेकर किसी प्रकार की चिंता नहीं रहती। डिजिटल गोल्ड खरीदने के लिए कई पेमेंट विकल्प उपलब्ध हैं, जिनमें यूपीआई, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और वॉलेट जैसे माध्यम शामिल हैं। यह सुविधा उपयोगकर्ताओं को उनकी सुविधा के अनुसार भुगतान करने की स्वतंत्रता देती है और पूरी प्रक्रिया को सरल और तेज बनाती है। इस प्लेटफॉर्म की एक खास विशेषता यह है कि ग्राहक बहुत छोटी राशि से भी निवेश शुरू कर सकते हैं। मात्र 10 रुपये से शुरुआत कर धीरे धीरे निवेश बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा नियमित निवेश के लिए दैनिक या मासिक आधार पर निवेश करने की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे उपयोगकर्ता समय के साथ अपनी बचत को व्यवस्थित तरीके से बढ़ा सकते हैं। डिजिटल गोल्ड की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसकी लिक्विडिटी है। उपयोगकर्ता जब चाहें अपना गोल्ड बेच सकते हैं और राशि सीधे अपने बैंक खाते में प्राप्त कर सकते हैं। इससे यह निवेश पारंपरिक सोने की तुलना में अधिक लचीला और सुविधाजनक बन जाता है। देशभर में बड़ी संख्या में लोग इस सुविधा का लाभ उठा रहे हैं, जिससे डिजिटल गोल्ड की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। यह विकल्प विशेष रूप से उन लोगों के बीच तेजी से स्वीकार किया जा रहा है जो डिजिटल माध्यमों के जरिए निवेश करना पसंद करते हैं। अक्षय तृतीया जैसे शुभ अवसर पर यह सुविधा पारंपरिक विश्वास और आधुनिक तकनीक का संतुलित मेल प्रस्तुत करती है, जहां लोग आसानी से सुरक्षित निवेश कर सकते हैं और अपनी वित्तीय योजनाओं को मजबूत बना सकते हैं।

सीएनजी पर एक्साइज ड्यूटी हटाने की सिफारिश से ईंधन को सस्ता और अधिक किफायती बनाने की बड़ी पहल

नई दिल्ली: स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन को सस्ता बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है, जिसके तहत एक उच्चस्तरीय समिति ने कंप्रेस्ड नेचुरल गैस यानी सीएनजी पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी हटाने की सिफारिश की है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य सीएनजी को अधिक किफायती और आकर्षक ईंधन विकल्प बनाना है, ताकि देश में स्वच्छ ईंधन के उपयोग को तेजी से बढ़ाया जा सके। समिति के अनुसार वर्तमान में सीएनजी पर लगभग 14 प्रतिशत एक्साइज ड्यूटी लगती है, जिससे इसकी कीमत कई क्षेत्रों में अपेक्षाकृत अधिक हो जाती है। इस टैक्स को हटाने से सीएनजी की लागत में कमी आएगी और यह पेट्रोल तथा डीजल के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेगी। इसके साथ ही सीएनजी वाहनों पर वस्तु एवं सेवा कर को घटाकर 5 प्रतिशत करने का सुझाव भी दिया गया है, जिससे उपभोक्ताओं को इस ईंधन की ओर आकर्षित किया जा सके। यह पहल देश के उस दीर्घकालिक लक्ष्य से भी जुड़ी है जिसके तहत वर्ष 2030 तक कुल ईंधन खपत में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी को 15 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि करों में राहत मिलने से न केवल सीएनजी की मांग बढ़ेगी बल्कि यह पर्यावरण के अनुकूल विकल्प के रूप में तेजी से अपनाया जाएगा। समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि सीएनजी और पेट्रोल के बीच मूल्य अंतर को बनाए रखा जाए, ताकि उपभोक्ता पेट्रोल की जगह सस्ते और स्वच्छ विकल्प के रूप में सीएनजी को प्राथमिकता दें। इससे बड़ी संख्या में परिवारों और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को सीधे आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है। वर्तमान स्थिति में कुछ राज्यों में अतिरिक्त करों के कारण सीएनजी की कीमत अधिक हो जाती है, जिससे इसकी लोकप्रियता पर असर पड़ता है। प्रस्तावित कर राहत से इस असंतुलन को दूर करने और पूरे देश में समान रूप से सीएनजी को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही सरकार पाइप्ड नेचुरल गैस को भी बढ़ावा देने की दिशा में सक्रिय है। बड़ी संख्या में नए कनेक्शन जारी किए जा रहे हैं और उपभोक्ताओं को एलपीजी से पीएनजी की ओर स्थानांतरित होने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे घरेलू ऊर्जा उपयोग में स्थिरता और सुविधा दोनों बढ़ रही हैं। देश में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया जा रहा है, जिससे अधिक से अधिक क्षेत्रों तक प्राकृतिक गैस की पहुंच सुनिश्चित की जा सके। यह नेटवर्क अब देश के अधिकांश हिस्सों को कवर कर चुका है और शहरी के साथ साथ अर्ध शहरी क्षेत्रों में भी इसकी पहुंच बढ़ रही है। सरकार की यह रणनीति ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक लाभ के बीच संतुलन बनाने पर केंद्रित है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि इन सिफारिशों को लागू किया जाता है तो इससे देश में स्वच्छ ईंधन की खपत को नई गति मिल सकती है और आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी।

पीसी शर्मा का सरकार पर तीखा वार महिला आरक्षण को बताया इवेंट मैनेजमेंट और तबादलों को उद्योग

भोपाल । भोपाल में मध्यप्रदेश के पूर्व कानून मंत्री पीसी शर्मा ने राज्य सरकार पर कई मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने महिला आरक्षण बिल परिसीमन तबादला नीति और अन्य प्रशासनिक निर्णयों को लेकर सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए इसे चुनावी रणनीति का हिस्सा बताया। पीसी शर्मा ने कहा कि महिला आरक्षण को जिस तरीके से लागू किया जा रहा है वह सही प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है। उनके मुताबिक पहले जनगणना होनी चाहिए उसके बाद परिसीमन और फिर आरक्षण लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में जो कुछ किया जा रहा है वह नारी सम्मान के नाम पर केवल दिखावा है और इसका उद्देश्य आगामी चुनावों में महिलाओं के वोट हासिल करना है। उन्होंने यह भी कहा कि पंचायत और नगरीय निकायों में महिला आरक्षण पहले से लागू है जिसे दिग्विजय सिंह की सरकार के समय और राजीव गांधी के 73 और 74वें संविधान संशोधन के जरिए लागू किया जा चुका है। तबादला नीति को लेकर भी उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में एक बार फिर तबादला उद्योग शुरू होने वाला है। उनके अनुसार ट्रांसफर प्रक्रिया में पैसों का लेनदेन बढ़ेगा और इसका सीधा असर प्रशासनिक पारदर्शिता पर पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस व्यवस्था का उपयोग अपने हितों के लिए करती है। कानून व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने गंभीर सवाल उठाए। हाल ही में सामने आए एक मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सत्ता से जुड़े लोगों में कानून का डर खत्म हो गया है। उनका आरोप था कि अपराध की घटनाओं में वृद्धि हुई है और दोषियों को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है जिससे आम जनता में असुरक्षा का माहौल बन रहा है। मंदिर प्रबंधन को लेकर भी पीसी शर्मा ने सुझाव दिया कि सरकार को मंदिरों की व्यवस्था सुधारनी है तो सरकारी जमीन मंदिरों के नाम की जानी चाहिए और जो जमीनों पर कब्जा है उसे वापस दिलाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर धार्मिक शिक्षा से जुड़े कोर्स शुरू किए जाते हैं तो सभी धर्मों के लिए समान रूप से प्रबंधन पाठ्यक्रम चलाए जाने चाहिए। शिक्षकों के आंदोलन पर समर्थन जताते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस शिक्षकों के साथ खड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां ऐसी हैं जिससे पद खाली कर अपने लोगों को अवसर दिया जा सके। कुल मिलाकर कांग्रेस ने इन मुद्दों को लेकर सरकार को घेरते हुए इसे जनहित के बजाय राजनीतिक लाभ के लिए उठाए गए कदम बताया है।

गुजरात टाइटंस और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच निर्णायक भिड़ंत, अहमदाबाद में KKR के सामने पहली जीत का दबाव

नई दिल्ली:   इंडियन प्रीमियर लीग 2026 के 25वें मुकाबले में आज गुजरात टाइटंस और कोलकाता नाइट राइडर्स आमने सामने होंगी। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला जाने वाला यह मुकाबला दोनों टीमों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। गुजरात टाइटंस जहां अपने संतुलित प्रदर्शन को जारी रखते हुए अंकतालिका में अपनी स्थिति और मजबूत करना चाहेगी वहीं कोलकाता नाइट राइडर्स इस सीजन की अपनी पहली जीत हासिल करने के इरादे से मैदान में उतरेगी। दोनों टीमों की मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह मुकाबला प्रतिस्पर्धा और दबाव से भरपूर होने की उम्मीद है। गुजरात टाइटंस ने इस सीजन में अब तक संतुलित और योजनाबद्ध खेल का प्रदर्शन किया है। टीम ने चार मैचों में दो जीत दर्ज कर यह साबित किया है कि उसके पास हर विभाग में मजबूती है। बल्लेबाजी में शीर्ष क्रम ने निरंतरता दिखाई है और टीम को मजबूत शुरुआत दी है। जोस बटलर ने अपनी शानदार फॉर्म से टीम को मजबूती प्रदान की है जबकि कप्तान शुभमन गिल भी अच्छी लय में नजर आ रहे हैं। गेंदबाजी में प्रसिद्ध कृष्णा ने प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए विपक्षी बल्लेबाजों को लगातार परेशान किया है और महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए हैं। दूसरी ओर कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए यह सीजन अब तक निराशाजनक रहा है। टीम ने पांच मुकाबलों में चार हार का सामना किया है जबकि एक मैच पूरा नहीं हो सका। इस कारण टीम अंकतालिका में पिछड़ गई है और उस पर जीत हासिल करने का दबाव बढ़ता जा रहा है। बल्लेबाजी में टीम के प्रमुख खिलाड़ी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं जिससे टीम की स्थिति कमजोर हुई है। हालांकि अंगकृष रघुवंशी ने कुछ अच्छी पारियां खेलकर उम्मीद बनाए रखी है लेकिन उन्हें अन्य बल्लेबाजों का सहयोग नहीं मिल पाया है। दोनों टीमों के बीच अब तक के मुकाबलों में गुजरात टाइटंस का पलड़ा भारी रहा है। पिछले मैचों में गुजरात ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए अधिकतर मुकाबले अपने नाम किए हैं जिससे टीम का आत्मविश्वास मजबूत है। इसके अलावा घरेलू मैदान का फायदा भी गुजरात को मिल सकता है क्योंकि अहमदाबाद की पिच बल्लेबाजों के लिए अनुकूल मानी जाती है और यहां बड़े स्कोर बनने की संभावना रहती है। शुरुआती ओवरों में तेज गेंदबाजों को कुछ मदद मिल सकती है लेकिन बाद में बल्लेबाजों के लिए रन बनाना आसान हो जाता है। मौसम की बात करें तो अहमदाबाद में आज गर्मी का असर अधिक रहने की संभावना है और तापमान काफी ऊंचा रह सकता है। ऐसी परिस्थितियों में खिलाड़ियों की फिटनेस और सहनशक्ति की परीक्षा होगी। हालांकि बारिश की कोई संभावना नहीं है जिससे पूरे मुकाबले के खेले जाने की उम्मीद है। मुकाबले के विश्लेषण में गुजरात टाइटंस अधिक संतुलित और आत्मविश्वासी टीम के रूप में नजर आती है जबकि कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए यह मैच वापसी का महत्वपूर्ण अवसर है। टीम को जीत के लिए हर विभाग में बेहतर प्रदर्शन करना होगा और दबाव में सही रणनीति अपनानी होगी। Keywords: IPL 2026, Gujarat Titans, Kolkata Knight Riders, Narendra Modi Stadium, Shubman Gill, Jos Buttler, T20 Cricket, Match Preview गुजरात टाइटंस और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच यह मुकाबला संतुलन और संघर्ष का प्रतीक है जहां एक टीम अपनी लय बनाए रखना चाहती है और दूसरी अपनी पहली जीत की तलाश में है।

LPG किल्लत को लेकर विरोध प्रदर्शन सड़क पर उतरे लोग मंत्री का काफिला घिरा

सीधी । सीधी जिले में एलपीजी गैस सिलेंडर की कथित किल्लत को लेकर लोगों का गुस्सा उस समय खुलकर सामने आ गया जब महिलाओं ने सड़क पर सिलेंडर रखकर मंत्री राधा सिंह के काफिले का रास्ता रोक दिया। यह पूरा घटनाक्रम उस वक्त हुआ जब पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री राधा सिंह “नारी शक्ति वंदन रैली” में शामिल होने सीधी पहुंची थीं। जानकारी के अनुसार, मंत्री का काफिला पूजा पार्क से सम्राट चौक, सराफा बाजार और गांधी चौक होते हुए पैदल मार्च के रूप में आगे बढ़ रहा था। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं भी उनके साथ चल रही थीं और “नारी शक्ति, राष्ट्र शक्ति” के नारे लगाए जा रहे थे। लेकिन इसी बीच पढ़ैनिया गैस एजेंसी के पास कुछ महिलाओं ने सड़क पर सिलेंडर रखकर विरोध शुरू कर दिया और मंत्री के काफिले को रोक दिया। प्रदर्शन कर रही महिलाओं का आरोप था कि क्षेत्र में गैस सिलेंडर की भारी किल्लत है। कई उपभोक्ताओं ने बताया कि बुकिंग कराने के बाद भी समय पर सिलेंडर नहीं मिल रहा है, जिससे घरेलू कामकाज प्रभावित हो रहा है। कुछ महिलाओं ने कहा कि इंडेन कनेक्शन होने के बावजूद सप्लाई नियमित नहीं है, जबकि प्रताप गैस एजेंसी से भी समय पर सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। वहीं इस पूरे घटनाक्रम पर मंत्री राधा सिंह ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रदेश में कहीं कोई किल्लत नहीं है और कुछ लोग जानबूझकर प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में महिला आरक्षण लागू होने जा रहा है, जिसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को बधाई दी। घटना के दौरान स्थिति कुछ देर के लिए तनावपूर्ण रही, हालांकि कुछ ही मिनटों में मौके पर रखे गए सिलेंडर हट गए और प्रदर्शनकारी वहां से हट गए। बताया जा रहा है कि मंत्री अपने काफिले से बाहर नहीं उतरीं और स्थिति सामान्य होने के बाद कार्यक्रम आगे बढ़ाया गया। इस घटना ने एक बार फिर गैस आपूर्ति व्यवस्था और जमीनी स्तर पर उपभोक्ताओं की परेशानियों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।