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अक्षय तृतीया पर बन रहा दुर्लभ योग सोना खरीदने का सबसे शुभ समय और पूजा तरीका

नई दिल्ली । अक्षय तृतीया का पर्व हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है। इस दिन को “अबूझ मुहूर्त” भी कहा जाता है, यानी किसी भी शुभ कार्य के लिए अलग से मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किया गया दान, जप, तप और पूजा का फल अक्षय होता है, यानी उसका कभी क्षय नहीं होता। इस वर्ष अक्षय तृतीया 2026 का पर्व विशेष ज्योतिषीय संयोगों के कारण और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस बार अक्षय तृतीया पर रवि योग, त्रिपुष्कर योग, सौभाग्य योग और आयुष्मान योग जैसे कई शुभ संयोग बन रहे हैं। इसके साथ ही शुक्र ग्रह के अपनी स्वराशि में होने से मालव्य महापुरुष राजयोग और गजकेसरी योग का निर्माण भी हो रहा है, जिससे इस दिन का महत्व कई गुना बढ़ गया है। पंचांग के अनुसार वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 19 अप्रैल को सुबह 10:48 बजे शुरू होगी और 20 अप्रैल को सुबह 7:27 बजे समाप्त होगी। इस अवधि को अत्यंत शुभ माना गया है और इस दौरान किए गए कार्यों का फल कई गुना बढ़कर प्राप्त होता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा विशेष रूप से की जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था और इसका संबंध सतयुग एवं त्रेतायुग की शुरुआत से भी जोड़ा जाता है। महाभारत काल में श्रीकृष्ण द्वारा पांडवों को दिया गया अक्षय पात्र भी इसी दिन की महिमा से जुड़ा माना जाता है। पूजा विधि के अनुसार घर में चौकी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। सबसे पहले कलश स्थापना कर उनका आह्वान करें। गंगाजल से स्नान कराकर चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप और दीप अर्पित करें। पीले वस्त्र, फल, मिठाई और विशेष रूप से खीर या सत्तू का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इसके बाद मंत्र जप और आरती करें। सोना खरीदने के लिए इस दिन कई शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। 19 अप्रैल को सुबह 10:49 से 20 अप्रैल की सुबह 05:51 तक सोना खरीदना शुभ माना गया है। इसके अलावा 20 अप्रैल को दोपहर 02:26 से 03:52 तक अमृत मुहूर्त और 02:30 से 03:22 तक विजय मुहूर्त भी बेहद शुभ माना गया है। इस समय किया गया निवेश और खरीदारी विशेष फलदायी मानी जाती है।

भीमेश्वर मंदिर : प्रकृति और इतिहास का संगम, महाबली भीम ने स्वयं की थी स्थापना..

नई दिल्ली:   कर्नाटक के शिमोगा जिले के सागर क्षेत्र में स्थित भीमेश्वर मंदिर आस्था, प्रकृति और प्राचीन इतिहास का एक अनूठा संगम माना जाता है। घने जंगलों और हरियाली से घिरे पश्चिमी घाट की गोद में स्थित यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण पर्यटकों को भी आकर्षित करता है। यहां आने वाले श्रद्धालु इसे एक ऐसा स्थान मानते हैं जहां आध्यात्मिक शांति और प्राकृतिक सौंदर्य दोनों का अनुभव एक साथ मिलता है। इस मंदिर का संबंध महाभारत काल से जोड़ा जाता है और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह स्थान पांडवों के अज्ञातवास से भी जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि इसी क्षेत्र में पांडवों ने कुछ समय के लिए आश्रय लिया था और इसी दौरान भीम ने यहां भगवान शिव की आराधना से जुड़े एक महत्वपूर्ण स्थल की स्थापना की थी। इसी मान्यता के कारण इस स्थान का नाम भीमेश्वर पड़ा। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भीम ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी और भगवान शिव की पूजा के लिए इस स्थल को पवित्र रूप दिया गया था। इसके साथ ही एक मान्यता यह भी है कि अर्जुन ने अपने बाण से यहां एक जलधारा उत्पन्न की थी, जो आज भी एक झरने के रूप में बहती हुई देखी जाती है और मंदिर की पवित्रता को और अधिक विशेष बनाती है। यह जलधारा आज भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बनी हुई है। मंदिर का निर्माण काले पत्थरों से किया गया है और इसकी वास्तुकला प्राचीन दक्षिण भारतीय शैली को दर्शाती है। मंदिर परिसर में मजबूत स्तंभों पर बनी आकृतियां और धार्मिक प्रतीक इसकी ऐतिहासिकता को और गहराई प्रदान करते हैं। यहां भगवान शिव के साथ भगवान गणेश, नंदी और भगवान विष्णु की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं, जो इस स्थल की धार्मिक विविधता को दर्शाती हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर अत्यंत प्राचीन है और इसे चालुक्य काल से भी जोड़ा जाता है। समय के साथ यह स्थान प्राकृतिक परिवेश में स्थित होने के कारण अपेक्षाकृत कम विकसित रहा है, लेकिन इसकी आध्यात्मिक पहचान आज भी मजबूत बनी हुई है। यहां सावन माह और शिवरात्रि के अवसर पर विशेष पूजा और आयोजन किए जाते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। जंगलों के बीच स्थित होने के कारण इस मंदिर तक पहुंचने के लिए पैदल यात्रा और ट्रैकिंग का सहारा लेना पड़ता है, जो इसे एक रोमांचक तीर्थ यात्रा का अनुभव भी बना देता है। निकटतम रेलवे स्टेशन से लेकर सड़क मार्ग तक पहुंचने के बाद भी मंदिर तक लगभग दो किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी पड़ती है, जिससे यह स्थान और अधिक प्राकृतिक और शांत वातावरण में स्थित प्रतीत होता है। भीमेश्वर मंदिर आज भी आस्था और प्रकृति के बीच संतुलन का एक जीवंत उदाहरण है, जहां प्राचीन कथाएं, धार्मिक विश्वास और प्राकृतिक सौंदर्य एक साथ मिलकर एक अनूठा अनुभव प्रदान करते हैं।

‘उड़ता तीर’ में पहली बार साथ नजर आएंगे सारा अली खान और आयुष्मान खुराना..

नई दिल्ली:   बॉलीवुड में एक नई और हाई-एनर्जी एंटरटेनमेंट फिल्म ‘उड़ता तीर’ को लेकर जबरदस्त चर्चा शुरू हो गई है। इस फिल्म में पहली बार सारा अली खान और आयुष्मान खुराना की जोड़ी बड़े पर्दे पर नजर आएगी, जिससे दर्शकों के बीच उत्साह और बढ़ गया है। फिल्म की घोषणा के साथ ही इसकी कहानी और स्टारकास्ट को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार बातचीत तेज हो गई है। यह फिल्म एक स्पाई कॉमेडी जॉनर पर आधारित है, जिसमें जासूसी की गंभीर दुनिया को हल्के-फुल्के और मनोरंजक अंदाज में पेश किया जाएगा। कहानी में एक्शन और कॉमेडी का मिश्रण देखने को मिलेगा, जिससे इसे एक अलग तरह का सिनेमाई अनुभव माना जा रहा है। आयुष्मान खुराना अपनी अनोखी कॉमिक टाइमिंग और अलग किरदारों के चयन के लिए जाने जाते हैं, जबकि सारा अली खान अपने चुलबुले और एनर्जेटिक अंदाज से कहानी में ताजगी जोड़ती नजर आएंगी। फिल्म के जरिए निर्देशक आकाश ए कौशिक निर्देशन की दुनिया में कदम रख रहे हैं। यह उनके करियर का पहला बड़ा प्रोजेक्ट है, जिसमें उन्होंने कहानी को लिखने और निर्देशित करने दोनों की जिम्मेदारी संभाली है। फिल्म को बड़े स्तर पर तैयार किया जा रहा है और इसे एक मल्टी-प्रोडक्शन सहयोग के तहत बनाया जा रहा है, जिसमें कई अनुभवी निर्माता जुड़े हुए हैं। ‘उड़ता तीर’ की रिलीज डेट भी तय कर दी गई है और यह फिल्म 11 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। रिलीज डेट सामने आने के बाद फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ गई है। खासकर आयुष्मान और सारा की नई ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री को लेकर फिल्म इंडस्ट्री में काफी चर्चा हो रही है। इसी साल दोनों कलाकारों की एक और फिल्म ‘पति पत्नी और वो 2’ भी रिलीज होने वाली है, जिससे यह साफ है कि यह जोड़ी लगातार दर्शकों के बीच अपनी उपस्थिति मजबूत कर रही है। लगातार दो प्रोजेक्ट्स में साथ नजर आने से उनकी केमिस्ट्री और स्क्रीन प्रेजेंस को लेकर भी उम्मीदें बढ़ गई हैं। फिल्म ‘उड़ता तीर’ को एक मनोरंजक और ताज़ा कहानी के रूप में देखा जा रहा है, जो दर्शकों को कॉमेडी और स्पाई थ्रिलर का अनोखा मिश्रण देने का वादा करती है।

कांग्रेस विधायक विनय कुलकर्णी समेत 16 दोषियों को उम्रकैद, राजनीतिक साजिश के आरोपों पर सख्त टिप्पणी

नई दिल्ली /बेंगलुरु की एक विशेष अदालत ने वर्ष 2016 में हुए भाजपा कार्यकर्ता योगेश गौड़ा की हत्या के मामले में ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री विनय कुलकर्णी सहित कुल 16 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। लंबे समय से चल रहे इस चर्चित प्रकरण में अदालत के फैसले के बाद मामले ने एक निर्णायक मोड़ ले लिया है। अदालत ने अपने आदेश में इस घटना को गंभीर आपराधिक साजिश से जुड़ा मामला मानते हुए कड़ी सजा का आधार तैयार किया। विशेष न्यायाधीश संतोष गजानन भट ने फैसले में कहा कि प्रस्तुत साक्ष्य और जांच रिपोर्ट यह दर्शाते हैं कि यह मामला केवल व्यक्तिगत विवाद का नहीं था, बल्कि इसके पीछे संगठित साजिश की भूमिका सामने आई है। अदालत ने विनय कुलकर्णी को इस पूरे प्रकरण का प्रमुख सूत्रधार मानते हुए हत्या और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराया। यह घटना 15 जून 2016 की है, जब धारवाड़ में भाजपा नेता और जिला पंचायत के पूर्व सदस्य योगेश गौड़ा की उनके जिम परिसर में हत्या कर दी गई थी। इस वारदात के बाद स्थानीय थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी और प्रारंभिक जांच के बाद मामला आगे बढ़ते हुए केंद्रीय जांच एजेंसी तक पहुंचा। विस्तृत जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आए, जिनके आधार पर आरोपपत्र दाखिल किया गया और अदालत में सुनवाई शुरू हुई। विनय कुलकर्णी को वर्ष 2020 में गिरफ्तार किया गया था और बाद में उन्हें सशर्त जमानत दी गई थी। हालांकि वर्ष 2025 में अदालत ने गवाहों को प्रभावित किए जाने के आरोपों और सबूतों की गंभीरता को देखते हुए उनकी जमानत रद्द कर दी थी, जिसके बाद सुनवाई की प्रक्रिया और तेज हो गई थी। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस प्रकार की संगठित आपराधिक गतिविधियां लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानून के शासन के लिए गंभीर चुनौती हैं। इसलिए दोषियों को कठोर सजा देना आवश्यक है ताकि समाज में स्पष्ट संदेश जाए कि ऐसे अपराधों को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। सभी दोषियों को हत्या और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के तहत आजीवन कारावास की सजा के साथ आर्थिक दंड भी दिया गया है। इसके अतिरिक्त अन्य संबंधित धाराओं में अलग-अलग सजाएं निर्धारित की गई हैं, जो कानून के अनुसार साथ-साथ चलेंगी। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि मृतक के परिवार को मुआवजा प्रदान किया जाए ताकि उन्हें आर्थिक सहायता मिल सके। इस फैसले के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। वर्षों पुराने इस हाई प्रोफाइल हत्याकांड में अदालत का यह निर्णय न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण और निर्णायक चरण माना जा रहा है।

भारत श्रीलंका रिश्तों में नया अध्याय उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन दो दिवसीय यात्रा पर

नई दिल्ली । भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन 19 और 20 अप्रैल 2026 को दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर श्रीलंका जाएंगे। यह दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह उपराष्ट्रपति के रूप में उनका पहला द्विपक्षीय श्रीलंका दौरा होगा और इससे दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। इस दौरे के दौरान उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके और प्रधानमंत्री डॉ हरिनी अमरसूर्या से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा वह अन्य वरिष्ठ नेताओं अधिकारियों और श्रीलंका में रह रहे भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से भी संवाद करेंगे। भारत और श्रीलंका के संबंध ऐतिहासिक सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद मजबूत रहे हैं। श्रीलंका भारत की “नेबरहुड फर्स्ट” और “विजन महासागर” नीति का एक महत्वपूर्ण साझेदार है। ऐसे में यह दौरा हाल ही में हुई उच्च स्तरीय बैठकों के बाद द्विपक्षीय सहयोग को नई दिशा देने का अवसर प्रदान करेगा। इस बीच वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव विशेषकर अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष की स्थिति ने तेल आपूर्ति को प्रभावित किया है। इसका असर श्रीलंका पर भी पड़ा जहां ईंधन संकट की स्थिति बनने लगी थी। ऐसे समय में भारत ने आगे बढ़कर मदद करते हुए 38 000 मीट्रिक टन ईंधन की आपूर्ति की जिससे श्रीलंका को राहत मिली। भारत की इस सहायता के लिए श्रीलंका के नेताओं ने आभार व्यक्त किया। सांसद नमल राजपक्षे ने भारत की “नेबरहुड फर्स्ट” नीति की सराहना करते हुए कहा कि भारत संकट के समय हमेशा श्रीलंका के साथ खड़ा रहा है। उन्होंने श्रीलंका सरकार को भारत की आर्थिक नीतियों विशेष रूप से फ्यूल टैक्स एडजस्टमेंट मॉडल को अपनाने की सलाह भी दी। वहीं राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने भी भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया। उन्होंने बताया कि हाल ही में उनकी प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत हुई थी जिसमें उन्होंने ईंधन संकट की स्थिति साझा की थी और भारत ने तुरंत सहायता उपलब्ध कराई। कुल मिलाकर उपराष्ट्रपति का यह दौरा न केवल कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह दोनों देशों के बीच सहयोग विश्वास और साझेदारी को और गहरा करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

सुपर स्पेशियलिटी मेडिकल क्षेत्रों में शिक्षकों की नियुक्ति से शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी

नई दिल्ली: झारखंड में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 90 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इस भर्ती का उद्देश्य राज्य के मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशियलिटी विभागों में शिक्षकों की कमी को पूरा करना और उच्च स्तरीय चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना है। जारी जानकारी के अनुसार इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 28 अप्रैल 2026 से शुरू होगी और उम्मीदवार 12 मई 2026 तक आवेदन कर सकेंगे। आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 14 मई 2026 निर्धारित की गई है। इस पूरी प्रक्रिया में पात्र उम्मीदवारों से ऑनलाइन माध्यम से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इन पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास संबंधित सुपर स्पेशियलिटी विषय में डीएम, एमसीएच या डीएनबी जैसी उच्च स्तरीय योग्यता होना अनिवार्य है। इसके साथ ही चिकित्सा शिक्षा के लिए निर्धारित अन्य मानकों को भी पूरा करना आवश्यक होगा। यह नियुक्तियां राज्य के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में की जाएंगी, जिससे शिक्षा और प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार संभव हो सकेगा। आयु सीमा के अनुसार न्यूनतम आयु 30 वर्ष रखी गई है, जबकि अधिकतम आयु श्रेणी के अनुसार निर्धारित नियमों के तहत अलग अलग होगी। आरक्षित वर्गों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी, जिससे अधिक योग्य उम्मीदवारों को अवसर मिल सके। चयन प्रक्रिया में उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता और साक्षात्कार के आधार पर मेरिट तैयार की जाएगी। इसमें उम्मीदवारों के शैक्षणिक रिकॉर्ड और इंटरव्यू प्रदर्शन को प्रमुख आधार माना जाएगा। यह भर्ती चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे सुपर स्पेशियलिटी विभागों में विशेषज्ञ शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ेगी। इससे न केवल मेडिकल कॉलेजों की क्षमता में सुधार होगा बल्कि छात्रों को बेहतर और उन्नत प्रशिक्षण भी प्राप्त हो सकेगा।

ऑस्ट्रेलिया में तेल रिफाइनरी हादसा सरकार बोली सप्लाई पर नहीं पड़ेगा बड़ा असर

नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया में तेल रिफाइनरी में लगी आग के बाद ईंधन आपूर्ति को लेकर उठी चिंताओं के बीच प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि इस घटना का देश की फ्यूल सप्लाई पर बहुत कम असर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि रिफाइनरी में लगी आग गंभीर जरूर थी, लेकिन उत्पादन काफी हद तक सामान्य बना हुआ है। प्रधानमंत्री अल्बानीज अपने ब्रुनेई और मलेशिया के आधिकारिक दौरे को बीच में छोड़कर वापस लौटे और Viva Energy की रिफाइनरी का निरीक्षण किया। यह रिफाइनरी जिलॉन्ग शहर के पास स्थित है, जो मेलबर्न से करीब 65 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में है। बताया गया कि बुधवार रात उपकरण में खराबी के कारण रिफाइनरी में आग लग गई थी, जिसे गुरुवार दोपहर तक काबू में कर लिया गया। घटना के समय को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि उसी समय मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति पहले से प्रभावित है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की स्थिति नियंत्रण में है। रिफाइनरी के दौरे के दौरान मीडिया से बातचीत में अल्बानीज ने बताया कि डीजल और एविएशन फ्यूल का लगभग 80 प्रतिशत उत्पादन जारी है। वहीं पेट्रोल उत्पादन, जो देश की कुल सप्लाई का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा देता है, फिलहाल 60 प्रतिशत क्षमता पर चल रहा है और आने वाले दिनों में इसके बढ़ने की उम्मीद है। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही शनिवार को फ्यूल स्टॉकपाइल के स्तर को लेकर नियमित साप्ताहिक अपडेट भी जारी किया जाएगा, जिससे स्थिति पर नजर रखी जा सके। गौरतलब है कि यह रिफाइनरी ऑस्ट्रेलिया की केवल दो सक्रिय रिफाइनरियों में से एक है, इसलिए इस तरह की घटना का प्रभाव महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि शुरुआती आशंकाओं के विपरीत, उत्पादन पर सीमित असर की खबर ने राहत दी है। फायर और रेस्क्यू अधिकारियों के अनुसार, आग लगने की वजह तकनीकी खराबी थी और घटना की जांच जारी है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और सप्लाई चेन को सुचारु बनाए रखने पर ध्यान दिया जा रहा है।

वैभव सूर्यवंशी की विस्फोटक बल्लेबाजी ने क्रिकेट जगत का ध्यान खींचा..

नई दिल्ली:   क्रिकेट जगत में इन दिनों युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। अपनी आक्रामक और निडर बल्लेबाजी के दम पर उन्होंने कम समय में ही क्रिकेट फैंस और विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। हाल ही में उनके प्रदर्शन को देखकर पूर्व क्रिकेट प्रशासन से जुड़े एक वरिष्ठ व्यक्ति ने उनकी प्रतिभा की जमकर तारीफ की, लेकिन साथ ही उनकी उम्र को लेकर भी हैरानी जताई। उनके अनुसार जिस तरह की परिपक्वता और ताकत के साथ वैभव बल्लेबाजी कर रहे हैं, वह उनकी बताई गई उम्र से कहीं अधिक अनुभवपूर्ण नजर आती है। इस बयान में यह भी कहा गया कि वैभव सूर्यवंशी का बल्लेबाजी अंदाज बेहद आक्रामक है और वह बड़े शॉट्स खेलने में किसी भी तरह की हिचक नहीं दिखाते। उनकी टाइमिंग और पावर हिटिंग क्षमता ने उन्हें अन्य युवा खिलाड़ियों से अलग पहचान दी है। खास बात यह है कि इतनी कम उम्र में दबाव भरे माहौल में भी उनका आत्मविश्वास लगातार बना रहता है, जो किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। हालांकि इसी तारीफ के बीच उनकी उम्र को लेकर उठी टिप्पणी ने चर्चा को और बढ़ा दिया है। यह सवाल इसलिए उठा क्योंकि उनका खेल स्तर और मैदान पर उनका व्यवहार काफी परिपक्व नजर आता है। इस तरह की टिप्पणियों ने सोशल मीडिया और क्रिकेट सर्कल में नई बहस को जन्म दे दिया है, जहां एक ओर लोग उनकी प्रतिभा की सराहना कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर उनकी उम्र और विकास को लेकर अलग अलग राय सामने आ रही है। वैभव सूर्यवंशी ने अपने छोटे से करियर में ही यह संकेत दे दिया है कि वह लंबे समय तक क्रिकेट में बड़ा नाम बन सकते हैं। उनकी बल्लेबाजी में निडरता और आक्रामकता का जो मिश्रण देखने को मिलता है, वह आधुनिक टी20 क्रिकेट की मांग के अनुरूप माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर उन्हें सही मार्गदर्शन और निरंतर अवसर मिलते रहे तो वह आने वाले वर्षों में भारतीय क्रिकेट के प्रमुख चेहरों में शामिल हो सकते हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह दिखाया है कि आईपीएल जैसे मंच युवा खिलाड़ियों के लिए कितना बड़ा अवसर बन सकता है, जहां वे अपनी प्रतिभा के दम पर रातोंरात चर्चा में आ जाते हैं और क्रिकेट की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना लेते हैं।

शिक्षा से वंचित खमरिया 9 साल बाद भी स्कूल नहीं ग्रामीणों का गुस्सा बरकरार

कटनी । कटनी जिले की ढीमरखेड़ा तहसील के ग्राम खमरिया में शिक्षा को लेकर एक पुरानी घोषणा आज भी अधूरी पड़ी है। वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जनदर्शन यात्रा के दौरान गांव में हाई स्कूल खोलने की घोषणा की थी, लेकिन नौ साल बीत जाने के बाद भी यह घोषणा जमीन पर उतरती नजर नहीं आई। तहसील मुख्यालय से करीब 28 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में हाई स्कूल की सुविधा नहीं होने के कारण छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। खासकर बेटियों की शिक्षा पर इसका अधिक प्रभाव पड़ रहा है, जिससे कई परिवारों को मजबूरी में बच्चों की पढ़ाई बीच में ही रोकनी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने बार-बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। गांव में इस मुद्दे को लेकर आक्रोश इस कदर बढ़ा कि पिछले विधानसभा चुनाव में ग्रामीणों ने मतदान का बहिष्कार तक कर दिया था। उस समय भाजपा प्रत्याशी और वर्तमान विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह ने गांव पहुंचकर लोगों को आश्वासन दिया था कि चुनाव जीतने के बाद स्कूल खोलना उनकी प्राथमिकता होगी। विधायक बनने के बाद उन्होंने इस मुद्दे को उठाते हुए कटनी से लेकर भोपाल तक कई बार पत्राचार किया। उन्होंने शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर मामला विधानसभा में भी उठाया। वहीं शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह भी पिछले कुछ वर्षों से लगातार शिक्षा विभाग के अधिकारियों को पत्र लिखकर इस समस्या के समाधान की मांग करती रही हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी अधिकारियों की सुस्ती पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि इस तरह की लापरवाही से सरकार की छवि प्रभावित होती है और जनता का विश्वास कमजोर होता है। इस मामले पर विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह का कहना है कि उन्होंने इसे सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा है और हाल ही में शिक्षा मंत्री से मुलाकात के बाद आश्वासन मिला है कि आगामी नए शैक्षणिक सत्र में खमरिया में हाई स्कूल शुरू कर दिया जाएगा। वहीं शिक्षा विभाग के जबलपुर संभाग के संयुक्त संचालक अरुण इंगले ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं था, लेकिन अब जिला शिक्षा अधिकारी से रिपोर्ट मांगी गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मुख्यमंत्री की घोषणा पूरी क्यों नहीं हुई, इसकी जांच की जाएगी और जल्द ही समस्या का समाधान किया जाएगा। यह मामला न केवल एक अधूरी सरकारी घोषणा का उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी किस तरह बच्चों के भविष्य को प्रभावित कर रही है। अब देखने वाली बात यह होगी कि वर्षों से लंबित यह वादा कब तक हकीकत में बदलता है।

‘सन ऑफ सरदार 2’ को लेकर मृणाल ठाकुर के खुलासे से फिल्म इंडस्ट्री में चर्चा तेज..

नई दिल्ली:   बॉलीवुड अभिनेत्री मृणाल ठाकुर ने अपनी फिल्म ‘सन ऑफ सरदार 2’ को लेकर एक अनुभव साझा किया है, जिसमें उन्होंने शूटिंग प्रक्रिया और किरदार से जुड़ी कुछ परिस्थितियों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उनके अनुसार फिल्म के निर्माण के दौरान कुछ फैसलों की जानकारी उन्हें शुरुआती स्तर पर पूरी तरह नहीं दी गई थी, जिससे बाद में उन्हें अपने किरदार को लेकर अलग तरह का अनुभव महसूस हुआ। अभिनेत्री ने बताया कि फिल्म में उनके ऑन-स्क्रीन पति के किरदार को लेकर जो चयन किया गया, वह उनके लिए पहले से स्पष्ट नहीं था। जब उन्हें बाद में इस बारे में जानकारी मिली, तो उन्हें लगा कि यह उनके किरदार की सोच और अपेक्षाओं से अलग दिशा में था। इस कारण उन्होंने इसे एक असहज अनुभव के रूप में महसूस किया। मृणाल ठाकुर ने यह भी संकेत दिया कि फिल्म के कुछ हिस्सों में बाद में बदलाव किए गए, जिससे उनके किरदार की स्क्रीन पर मौजूदगी पर असर पड़ा। इन परिवर्तनों के कारण कहानी में उनके रोल की गहराई अपेक्षाकृत कम हो गई, जिससे उन्हें थोड़ी निराशा हुई। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि हर प्रोजेक्ट में ऐसे अनुभव सीखने का हिस्सा होते हैं। ‘सन ऑफ सरदार 2’ एक मल्टीस्टारर फिल्म है जिसमें कॉमेडी और इमोशनल ड्रामा का मिश्रण देखने को मिलता है। कहानी रिश्तों, गलतफहमियों और परिस्थितियों के उतार-चढ़ाव पर आधारित है, जिसमें हर किरदार का अपना महत्व है। मृणाल ठाकुर का किरदार भी कहानी के भावनात्मक पहलू को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाता है। इस बयान के बाद फिल्म इंडस्ट्री में कास्टिंग प्रक्रिया और कलाकारों के साथ संवाद को लेकर चर्चा फिर से तेज हो गई है। माना जा रहा है कि किसी भी बड़े प्रोजेक्ट में पारदर्शिता और स्पष्ट जानकारी कलाकारों के प्रदर्शन और अनुभव दोनों को बेहतर बना सकती है।