Chambalkichugli.com

भारत की रिपोर्ट से लीक हो गई US-इंडोनेशिया की सीक्रेट एयरस्पेस डील, बवाल के बाद हटना पड़ा पीछे

वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में ईरान के साथ जंग रहे युद्ध के बीच अमेरिका साउथ ईस्ट एशिया में स्थित एक मुस्लिम देश संग मिलकर बड़ा खेल करने की तैयारी में था। हालांकि एक भारतीय रिपोर्ट ने इस प्लान पर पानी फेर दिया है। बीते दिनों अमेरिका और दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम देश इंडोनेशिया के बीच एक सीक्रेट समझौते की तैयारी चल रही थी, लेकिन अब इंडियन मीडिया की एक रिपोर्ट से हुए खुलासे के बाद हड़कंप मच गया है। दरअसल अमेरिका और इंडोनेशिया के बीच 13 अप्रैल को एक डिफेंस डील साइन होनी थी। हालांकि डील साइन होने से ठीक पहले 12 अप्रैल को एक मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि अमेरिका इंडोनेशिया के एयरस्पेस में अपने सैन्य विमानों को पूरी इजाजत देने की योजना बना रहा है। इस लीक के बाद इंडोनेशिया में भारी हंगामा हुआ और आखिरकार इस प्रावधन को फाइनल डील से बाहर कर दिया गया है। रिपोर्ट में हुआ खुलासा इस डील की पूरी जानकारी रिपोर्ट ‘संडे गार्जियन’ में प्रकाशित हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और इंडोनेशिया के बीच कई महीने से इस गुप्त योजना पर काम कर रही थी। फरवरी में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच वाइट हाउस में हुई बैठक में भी इस पर चर्चा हुई थी। इसे 13 अप्रैल को अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री शाफ्री जमसोएद्दीन की बैठक में औपचारिक रूप से शामिल किया जाना था, लेकिन विवाद के कारण इसे लागू नहीं किया जा सका। डील में क्या था? इस प्रस्तावित डील के तहत अमेरिकी सैन्य विमानों को इंडोनेशिया के एयरस्पेस में बिना किसी रोक-टोक के उड़ान भरने की इजाजत मिल जाती। आधिकारिक तौर पर इसे इमरजेंसी और संकट के समय इस्तेमाल के लिए बताया गया, लेकिन इसका असली मकसद इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में निगरानी बढ़ाना था, खासकर उस समय जब ईरान ने होर्मुज पर दबाव बढ़ा दिया है और ग्लोबल ऑयल सप्लाई प्रभावित हो रही है। ऐसे में अमेरिका मलक्का स्ट्रेट पर पकड़ मजबूत करना चाहता था, जो दुनिया का सबसे व्यस्त तेल व्यापार मार्ग है और जहां से करीब 30 प्रतिशत समुद्री तेल और 40 प्रतिशत वैश्विक व्यापार गुजरता है। इंडोनेशिया ही क्यों? इंडोनेशिया की भौगोलिक स्थिति इस रणनीति के केंद्र में है, क्योंकि वह मलक्का के पास स्थित है। अमेरिका के लिए यह डील इंडो-पैसिफिक में चीन पर नजर रखने के लिए अहम साबित हो सकती थी, क्योंकि फिलहाल उसे उत्तरी ऑस्ट्रेलिया के सैन्य ठिकानों पर निर्भर रहना पड़ता है, जो दूरी के लिहाज से कम प्रभावी हैं। क्यों हटना पड़ा पीछे? हालांकि जैसे ही यह रिपोर्ट सामने आई, इंडोनेशिया में इसका तीखा विरोध शुरू हो गया। जकार्ता में सांसदों ने इस तरह के किसी भी समझौते की वैधता पर सवाल उठाए। संसद के डिप्टी चेयर सुकामता ने साफ कहा कि किसी भी विदेशी सैन्य सहयोग के लिए संसद से सलाह लेना जरूरी है और बिना कानूनी आधार के एयरस्पेस देना संभव नहीं है। इस विरोध के बाद प्रबोवो सरकार दबाव में आ गई। इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय ने तुरंत सफाई देते हुए कहा कि अमेरिकी विमानों को ओवरफ्लाइट एक्सेस देने का प्रस्ताव फाइनल डील का हिस्सा नहीं है। मंत्रालय ने कहा कि यह सिर्फ “लेटर ऑफ इंटेंट” के स्तर पर चर्चा में था और अभी न तो अंतिम है और न ही बाध्यकारी। साथ ही यह भी कहा गया कि किसी भी समझौते में इंडोनेशिया की संप्रभुता और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि रहेंगे। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब यह डील फिलहाल ठंडे बस्ते में चली गई है।

सोमी अली ने धर्मेंद्र के साथ गहरे भावनात्मक रिश्ते और जीवनभर के जुड़ाव को किया याद..

नई दिल्ली:   हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को लेकर अभिनेत्री सोमी अली द्वारा साझा की गई यादों ने फिल्म जगत में एक बार फिर भावनात्मक माहौल पैदा कर दिया है। लंबे समय तक भारतीय सिनेमा में सक्रिय रहे धर्मेंद्र अपनी सादगी, अपनापन और मजबूत स्क्रीन प्रेजेंस के लिए जाने जाते रहे हैं। उनके निधन के बाद भी उनके प्रशंसक और फिल्मी दुनिया से जुड़े लोग लगातार उन्हें याद कर रहे हैं। इसी क्रम में सोमी अली ने उनके साथ अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हुए एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव सामने रखा है। सोमी अली ने बताया कि उनके जीवन के शुरुआती दौर में धर्मेंद्र से उनकी मुलाकात एक निजी अवसर पर हुई थी, जहां बातचीत बेहद सहज और आत्मीय माहौल में हुई। इस मुलाकात के दौरान साधारण बातचीत और अपनत्व ने दोनों के बीच ऐसा रिश्ता बना दिया जिसे उन्होंने पिता और बेटी जैसे भावनात्मक जुड़ाव के रूप में महसूस किया। उनके अनुसार धर्मेंद्र का व्यवहार हमेशा बेहद सरल और स्नेहपूर्ण रहा, जिससे उनके आसपास मौजूद हर व्यक्ति को अपनापन महसूस होता था। अभिनेत्री ने यह भी साझा किया कि समय के साथ यह रिश्ता और गहरा होता गया और उनके जीवन के कठिन समय में धर्मेंद्र ने उन्हें मानसिक रूप से सहारा दिया। उन्होंने कहा कि जब भी जीवन में चुनौतियां आईं, धर्मेंद्र ने एक मार्गदर्शक की तरह उन्हें हिम्मत दी और सकारात्मक रहने के लिए प्रेरित किया। यह जुड़ाव केवल औपचारिक पहचान तक सीमित नहीं रहा बल्कि भावनात्मक रूप से जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया। सोमी अली ने फिल्मी करियर के दौरान धर्मेंद्र के साथ काम करने के अनुभव को भी याद किया, जिसमें दोनों ने एक फिल्म में साथ काम किया था। इस दौरान उनके बीच पेशेवर सहयोग के साथ एक मजबूत समझ विकसित हुई, जिसने उनके रिश्ते को और गहराई दी। फिल्म के सेट पर भी धर्मेंद्र का व्यवहार बेहद सहज और सहयोगी बताया गया, जिससे काम का माहौल सकारात्मक बना रहा। धर्मेंद्र को हिंदी सिनेमा में ऐसे अभिनेता के रूप में याद किया जाता है जिन्होंने अपने अभिनय के साथ-साथ अपने मानवीय स्वभाव से भी लोगों के दिलों में खास जगह बनाई। उनकी लोकप्रियता केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनके व्यक्तित्व की सरलता और गरिमा ने उन्हें हर पीढ़ी के दर्शकों के लिए खास बना दिया। सोमी अली की यह यादें इस बात को फिर से उजागर करती हैं कि फिल्मी दुनिया में कई रिश्ते समय के साथ भावनात्मक गहराई प्राप्त कर लेते हैं। उनकी साझा की गई भावनात्मक बातें इस ओर संकेत करती हैं कि सिनेमा केवल अभिनय और मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह इंसानी रिश्तों और अनुभवों का एक ऐसा संसार है जो कलाकारों के बीच जीवनभर के जुड़ाव पैदा कर सकता है।

अर्शदीप सिंह की शुरुआती गेंदबाजी से पलटा पूरा मैच, पंजाब किंग्स की बड़ी जीत

नई दिल्ली:   इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में पंजाब किंग्स ने एक बार फिर अपने संतुलित खेल और मजबूत रणनीति से प्रभावित किया। मुंबई इंडियंस के खिलाफ मिली सात विकेट की यह जीत टीम के आत्मविश्वास को और ऊंचाई देने वाली साबित हुई। मुकाबले का सबसे बड़ा मोड़ तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह का शुरुआती स्पेल रहा जिसने पूरी मैच की दिशा बदल दी और मुंबई की मजबूत शुरुआत को दबाव में बदल दिया। इस जीत ने पंजाब किंग्स को अंकतालिका में अपनी स्थिति और मजबूत करने का अवसर दिया। मुंबई इंडियंस ने टॉस हारने के बाद पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित ओवरों में छह विकेट के नुकसान पर 195 रन बनाए। टीम की शुरुआत अच्छी रही और मध्यक्रम ने भी योगदान दिया लेकिन असली चमक क्विंटन डिकॉक की पारी में देखने को मिली जिन्होंने 60 गेंदों पर नाबाद 112 रन बनाए। उनकी इस पारी में आक्रामकता और तकनीक का शानदार मिश्रण था जिसने टीम को एक मजबूत स्कोर तक पहुंचाया। हालांकि शुरुआती ओवरों में गिरे विकेटों ने मुंबई की लय को प्रभावित किया और अंतिम ओवरों में रन गति को और तेज करने में कठिनाई हुई। पंजाब किंग्स की ओर से अर्शदीप सिंह ने नई गेंद से शानदार गेंदबाजी का प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने शुरुआती ओवरों में लगातार दबाव बनाते हुए मुंबई के शीर्ष क्रम को झटका दिया। अपने स्पेल में उन्होंने चार ओवर में 22 रन देकर तीन महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए। उनकी गेंदबाजी की सबसे बड़ी खासियत उनकी लाइन और लेंथ में निरंतरता और यॉर्कर की सटीकता रही। शुरुआती ओवरों में मिले विकेटों ने मुंबई की बल्लेबाजी को पूरी तरह अस्थिर कर दिया और टीम को बड़े स्कोर की ओर बढ़ने से रोक दिया। अर्शदीप की इस प्रभावशाली गेंदबाजी ने पंजाब किंग्स को मैच में मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया। शुरुआती सफलताओं के बाद गेंदबाजों में आत्मविश्वास बढ़ा और पूरी गेंदबाजी इकाई ने मिलकर विपक्षी टीम पर दबाव बनाए रखा। टी20 क्रिकेट में अक्सर शुरुआती ओवरों का प्रभाव निर्णायक साबित होता है और इस मैच में भी यही देखने को मिला जहां शुरुआती विकेटों ने पूरे मुकाबले की दिशा बदल दी। लक्ष्य का पीछा करने उतरी पंजाब किंग्स की शुरुआत बेहद आक्रामक रही। बल्लेबाजों ने बिना किसी दबाव के रन गति को तेज रखा और शुरुआत से ही मैच पर पकड़ बना ली। प्रभसिमरन सिंह ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 39 गेंदों पर 80 रन बनाए और पारी को मजबूत आधार दिया। वहीं कप्तान श्रेयस अय्यर ने जिम्मेदारी भरी पारी खेलते हुए 35 गेंदों पर 66 रन बनाए। दोनों खिलाड़ियों की साझेदारी ने मैच को पूरी तरह पंजाब किंग्स के पक्ष में कर दिया और विपक्षी गेंदबाजों को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। पंजाब किंग्स ने केवल 16 ओवर और तीन गेंदों में तीन विकेट खोकर 198 रन बनाकर लक्ष्य हासिल कर लिया। यह जीत टीम की बल्लेबाजी की गहराई और आक्रामक मानसिकता को दर्शाती है। टीम ने एक बार फिर साबित किया कि सही रणनीति और आत्मविश्वास के साथ बड़े लक्ष्य भी आसानी से हासिल किए जा सकते हैं।

साउथ की फीमेल लीड फिल्मों का बॉक्स ऑफिस जलवा किसने मारी बाजी बनी नंबर वन क्वीन

नई दिल्ली । साउथ सिनेमा में लंबे समय तक हीरो केंद्रित फिल्मों का दबदबा रहा लेकिन पिछले कुछ वर्षों में तस्वीर तेजी से बदली है अब कई ऐसी फिल्में सामने आई हैं जिनमें हीरोइन ने पूरी कहानी को अपने कंधों पर उठाया और बॉक्स ऑफिस पर भी शानदार सफलता हासिल की इन फिल्मों ने यह साबित किया कि मजबूत कहानी और दमदार अभिनय के दम पर फीमेल लीड फिल्में भी बड़ी कमाई कर सकती हैं इस सूची में सबसे ऊपर नाम आता है कल्याणी प्रियदर्शन की फिल्म लोका चैप्टर 1 का जिसमें उन्होंने चंद्रा नाम के एक बेहद खास और रहस्यमयी किरदार को निभाया यह किरदार साधारण नहीं बल्कि एक अनोखी शक्ति से भरपूर है फिल्म ने दर्शकों को अपने कॉन्सेप्ट और प्रस्तुति से बांध कर रखा और वर्ल्डवाइड लगभग 303 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर डाली यह आंकड़ा इसे फीमेल लीड फिल्मों की रेस में सबसे आगे ले जाता है दूसरे स्थान पर कीर्ति सुरेश की चर्चित फिल्म महानती है जो साउथ इंडस्ट्री की महान अभिनेत्री के जीवन पर आधारित है इस फिल्म में कीर्ति ने भावनाओं से भरा ऐसा अभिनय किया कि उन्हें नेशनल अवॉर्ड तक मिला फिल्म एक कलाकार की सफलता संघर्ष और व्यक्तिगत टूटन की कहानी दिखाती है और करीब 85 करोड़ की कमाई के साथ यह भी बड़ी हिट साबित हुई तीसरे नंबर पर अनुष्का शेट्टी की भव्य ऐतिहासिक फिल्म रुद्रमादेवी आती है जिसमें उन्होंने एक शक्तिशाली रानी का किरदार निभाया फिल्म की भव्यता और अनुष्का की स्क्रीन प्रेजेंस ने दर्शकों को खूब प्रभावित किया और इसने लगभग 84 करोड़ का कलेक्शन किया अनुष्का शेट्टी की ही फिल्म अरुंधति चौथे स्थान पर है यह एक ऐसी फिल्म है जिसने अपने समय में महिला केंद्रित सिनेमा को नई पहचान दी हॉरर और ड्रामा के मेल से बनी इस फिल्म ने करीब 70 करोड़ की कमाई की और आज भी इसे एक कल्ट फिल्म माना जाता है पांचवें स्थान पर भी अनुष्का शेट्टी की फिल्म भागमती है जिसमें उन्होंने एक मजबूत और रहस्यमयी किरदार निभाया फिल्म ने सस्पेंस और थ्रिल के दम पर दर्शकों को बांधे रखा और लगभग 67 करोड़ का कलेक्शन किया छठे नंबर पर नजरिया नाजिम की फिल्म सुकशमदर्शिनि आती है जिसने लगभग 54 करोड़ से ज्यादा की कमाई की यह फिल्म कंटेंट के दम पर आगे बढ़ी और दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला सातवें स्थान पर सामंथा रुथ प्रभु की फिल्म ओह बेबी है जो एक अलग तरह की कहानी लेकर आई इस फिल्म में उम्र और जीवन के अनुभव को हल्के फुल्के अंदाज में दिखाया गया और इसने करीब 40 करोड़ की कमाई की इन सभी फिल्मों की सफलता यह साफ दिखाती है कि साउथ सिनेमा में अब कहानियां बदल रही हैं और दर्शक भी मजबूत महिला किरदारों को उतना ही पसंद कर रहे हैं जितना बड़े हीरो को यह ट्रेंड आने वाले समय में और भी मजबूत हो सकता है जहां हीरोइनों का दबदबा और बढ़ेगा और वे बॉक्स ऑफिस पर नए रिकॉर्ड बनाती नजर आएंगी

होर्मुज के पास आमने-सामने भारत-पाक नौसेना, बढ़ते तनाव के बीच 18 समुद्री मील की दूरी पर जहाज

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास एक असामान्य स्थिति देखने को मिली, जब भारत और पाकिस्तान की नौसेनाएं बेहद कम दूरी पर सक्रिय नजर आईं। अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर के बावजूद इलाके में तनाव बरकरार है। अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों से जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाई है, जबकि ईरान का दावा है कि होर्मुज पर उसका नियंत्रण कायम है। ओमान तट के पास दिखा असामान्य सैन्य मूवमेंट ओपन सोर्स इंटेलिजेंस एनालिस्ट डेमियन साइमन के अनुसार, ओमान के तट के पास भारत और पाकिस्तान के नौसैनिक जहाज एक-दूसरे से केवल 18 समुद्री मील की दूरी पर देखे गए। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि यह स्थिति इसलिए बनी क्योंकि दोनों देश पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच अपने-अपने व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा में जुटे हैं। समुद्री मार्गों की सुरक्षा में जुटी भारतीय नौसेना भारतीय नौसेना ने ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए अहम समुद्री रास्तों पर अपनी तैनाती बढ़ा दी है। इसका उद्देश्य भारत आने वाले एलपीजी, एलएनजी और कच्चे तेल के जहाजों को सुरक्षित रास्ता देना है। नौसेना के अनुसार, फारस की खाड़ी से लेकर होर्मुज और अरब सागर तक जहाजों को सुरक्षा प्रदान की जा रही है, ताकि वे बिना किसी बाधा के अपनी यात्रा पूरी कर सकें। बताया जा रहा है कि 10 से अधिक भारतीय जहाज फिलहाल होर्मुज क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जिन्हें सुरक्षित निकालने के प्रयास जारी हैं।अमेरिका-ईरान संबंधों में तनाव, बातचीत जारी अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अमेरिका जहां ईरान से उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर पीछे हटने की मांग कर रहा है, वहीं ईरान इस पर पूरी तरह सहमत नहीं है। हालांकि, दोनों देशों के बीच मतभेद कम करने और होर्मुज क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए बातचीत जारी है। ईरान ने संकेत दिया है कि वह ओमान की दिशा से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है, बशर्ते कोई ठोस समझौता हो। समझौते की उम्मीद और ट्रंप का संकेत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ वार्ता में प्रगति हो रही है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि शांति समझौता होता है, तो वह हस्ताक्षर प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं। ट्रंप ने कहा कि अगर समझौता इस्लामाबाद में होता है, तो वे वहां जाने पर भी विचार कर सकते हैं।

महिला आरक्षण पर सियासी घमासान: कंगना रनौत का विपक्ष पर हमला, ‘बेटियों के प्रति सोच’ पर उठाए सवाल

नई दिल्ली। महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर संसद में बहस के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा सांसद कंगना रनौत ने विपक्ष पर तीखा निशाना साधते हुए कहा कि उनके रुख से “बेटियों के प्रति उनकी सोच” उजागर हो रही है। कंगना रनौत ने कहा कि विपक्ष परिसीमन को लेकर अनावश्यक बहाने बना रहा है, जबकि इस मुद्दे पर स्थिति पहले ही स्पष्ट की जा चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश देख रहा है कि विपक्ष की मंशा क्या है और वह महिला आरक्षण को लेकर गंभीर नहीं है। परिसीमन पर ‘भ्रम फैलाने’ का आरोप भाजपा के एक अन्य सांसद तेजस्वी सूर्या ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण कानून को लेकर जनता को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि परिसीमन के बाद दक्षिणी राज्यों को अधिक सीटों का लाभ मिल सकता है। सूर्या ने याद दिलाया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में सर्वसम्मति से पारित हुआ था और तब सभी दल इस बात पर सहमत थे कि इसे जनगणना और परिसीमन के बाद लागू किया जाएगा। उनके मुताबिक अब विपक्ष इस मुद्दे पर यू-टर्न ले रहा है। सत्ता और विपक्ष आमने-सामने महिला आरक्षण में संशोधन और परिसीमन आयोग के गठन से जुड़े प्रस्तावों पर एनडीए और विपक्ष के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल रही है। जहां सत्तापक्ष का कहना है कि महिलाओं को आरक्षण के लिए लंबे समय से इंतजार करना पड़ा है, वहीं विपक्ष का आरोप है कि सरकार की कार्यप्रणाली देश के संघीय ढांचे को प्रभावित कर सकती है। संसद में पेश हुए अहम विधेयक लोकसभा में चर्चा के लिए ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक, 2026’ ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ पेश किए गए हैं। प्रस्ताव के मुताबिक, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के बाद 2029 के आम चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू करने की योजना है। इसके तहत लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 तक की जा सकती है। संख्याबल की चुनौती वर्तमान में लोकसभा में एनडीए के पास 292 सांसद हैं, जबकि विपक्षी दलों के पास 233 सदस्य हैं। संविधान संशोधन विधेयक पारित करने के लिए उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। ऐसे में यह मुद्दा न केवल नीतिगत बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम बन गया है, जिस पर आने वाले दिनों में और तीखी बहस देखने को मिल सकती है।

ईरान संकट का असर: केले के दाम धराशायी, 2 रुपये किलो तक पहुंचे, महाराष्ट्र के किसान संकट में

मुंबई। पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत के कृषि व्यापार पर भी साफ दिखने लगा है। खासतौर पर ईरान से जुड़े हालात और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते संकट ने महाराष्ट्र के केला उत्पादक किसानों की कमर तोड़ दी है। निर्यात ठप होने से बाजार में सप्लाई बढ़ गई है और कीमतें गिरकर बेहद निचले स्तर पर पहुंच गई हैं। निर्यात रुका, घरेलू बाजार में बढ़ा दबाव महाराष्ट्र के प्रमुख केला उत्पादक जिले जलगांव और सोलापुर इस समय सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। बेहतर मौसम और अच्छी बारिश के कारण इस बार उत्पादन अच्छा हुआ था, लेकिन खाड़ी देशों में जारी संकट के चलते निर्यात लगभग ठप पड़ गया। कोल्ड स्टोरेज में बड़ी मात्रा में केले फंसे हुए हैं और शिपमेंट रुकने से किसानों को मजबूरन माल घरेलू बाजार में उतारना पड़ रहा है। कीमतों में भारी गिरावट फरवरी तक केले के दाम 18 से 22 रुपये प्रति किलो के बीच थे, लेकिन हालात तेजी से बिगड़े। मार्च में कीमतें घटकर 8–10 रुपये प्रति किलो रह गईं अप्रैल के पहले हफ्ते में ये गिरकर सिर्फ 2–3 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गईं कीमतों में यह गिरावट तब और तेज हुई जब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव बढ़ा और आपूर्ति शृंखला प्रभावित हुई। किसानों को भारी नुकसान सोलापुर जिले के करमाला क्षेत्र के एक किसान के मुताबिक, उन्होंने 10 एकड़ में केले की खेती पर करीब 20 लाख रुपये का निवेश किया था। फरवरी में जहां उन्हें 22 रुपये प्रति किलो तक भाव मिला, वहीं अब कीमतें 2–3 रुपये पर आ गई हैं। ऐसे में उन्हें कुल मिलाकर सिर्फ 2.5 से 3 लाख रुपये मिलने की उम्मीद है, यानी 17 लाख रुपये से ज्यादा का नुकसान झेलना पड़ सकता है। सालभर की फसल, जोखिम भी बड़ा केले की खेती अन्य फसलों की तरह मौसमी नहीं होती, बल्कि इसमें सालभर निवेश करना पड़ता है। ऐसे में कीमतों में अचानक गिरावट किसानों के लिए भारी संकट खड़ा कर देती है। लागत निकलना भी मुश्किल हो जाता है। सरकार से मदद की मांग निर्यात पर निर्भर किसान अब सरकार से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मुआवजा दिया जाए नए निर्यात बाजार तलाशे जाएं खाड़ी देशों के विकल्प विकसित किए जाएं विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही निर्यात के रास्ते नहीं खुले, तो किसानों की आर्थिक स्थिति और बिगड़ सकती है।

IPL 2026 में KKR की अग्निपरीक्षा क्या GT के खिलाफ खुलेगा जीत का खाता

नई दिल्ली । कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए इंडियन प्रीमियर लीग 2026 अब तक किसी बुरे सपने से कम साबित नहीं हुआ है टीम लगातार हार से जूझ रही है और अंक तालिका में सबसे निचले पायदान पर पहुंच गई है ऐसे में शुक्रवार को गुजरात टाइटन्स के खिलाफ होने वाला मुकाबला उसके लिए करो या मरो जैसा बन गया है जहां वह अपनी पहली जीत दर्ज करने के इरादे से मैदान में उतरेगी कप्तान अजिंक्य रहाणे और कोच अभिषेक नायर के नेतृत्व में टीम अब तक संतुलन और स्पष्ट रणनीति बनाने में असफल रही है केकेआर ने अब तक खेले गए पांच मैचों में से चार में हार का सामना किया है जबकि एक मुकाबला बारिश के कारण रद्द हो गया था टीम के प्रदर्शन में निरंतरता की कमी साफ नजर आ रही है गेंदबाजी विभाग में भी टीम को बड़ा झटका लगा है हर्षित राणा और आकाश दीप के चोटिल होने के अलावा मुस्तफिजुर रहमान के बाहर होने से गेंदबाजी कमजोर पड़ गई है वहीं स्पिन विभाग जो टीम की ताकत माना जाता था वह भी इस सीजन में बेअसर नजर आ रहा है सुनील नारायण और वरुण चक्रवर्ती जैसे गेंदबाज अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं चक्रवर्ती अब तक एक भी विकेट हासिल नहीं कर सके हैं बल्लेबाजी में भी टीम का संयोजन सवालों के घेरे में है कैमरन ग्रीन पर बड़ी जिम्मेदारी है जिन्हें भारी कीमत पर टीम में शामिल किया गया था लेकिन वह उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए हैं पांच पारियों में उनके बल्ले से सिर्फ 56 रन निकले हैं टीम मैनेजमेंट के फैसले भी चर्चा में हैं जैसे टिम सीफर्ट और रचिन रविंद्र जैसे खिलाड़ियों को बाहर रखना दूसरी ओर गुजरात टाइटन्स संतुलित और आत्मविश्वास से भरी टीम नजर आ रही है कप्तान शुभमन गिल के नेतृत्व में टीम ने शानदार प्रदर्शन किया है हालांकि उसे अपने घरेलू मैदान पर एक हार का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद उसने बाहर जीत दर्ज कर लय हासिल कर ली है गुजरात की गेंदबाजी आक्रमण मजबूत दिख रहा है जिसमें प्रसिद्ध कृष्णा और राशिद खान अहम भूमिका निभा रहे हैं वहीं बल्लेबाजी में जोस बटलर और शुभमन गिल का फॉर्म टीम को और मजबूती देता है इस मुकाबले में केकेआर के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपनी रणनीति को सुधारना और तीनों विभागों में बेहतर प्रदर्शन करना होगा अगर टीम को इस सीजन में वापसी करनी है तो उसे इस मैच में हर हाल में जीत दर्ज करनी होगी वहीं गुजरात टाइटन्स अपनी जीत की लय को बरकरार रखते हुए अंक तालिका में अपनी स्थिति और मजबूत करने के इरादे से उतरेगी अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या केकेआर अपनी खोई हुई लय वापस पा सकेगी या फिर गुजरात टाइटन्स का दबदबा एक और मुकाबले में कायम रहेगा

आदित्य ठाकरे ने तो हीरोइन को ही मार दिया, निशिकांत दुबे के विवादित बोल, LS में हंगामा

नई दिल्‍ली। लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान आज (गुरुवार, 16 अप्रैल को) विपक्ष और सत्तापक्ष के सदस्यों के बीच उस समय तीखी नोंकझोक देखने को मिली, जब भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने एक अभिनेत्री की कथित आत्महत्या से जुड़े चर्चित मामले का परोक्ष रूप से हवाला देते हुए शिवेसना (UBT) के एक प्रमुख युवा नेता के नाम का उल्लेख किया। इसके बाद शिवसेना (UBT) के सांसद सदन में हंगामा करने लगे। शिवसेना सांसदों ने कहा कि दुबे को अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांगनी चाहिए। दरअसल, शिवसेना (UBT) के सांसद अरविंद सावंत ने महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’, ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ पर चर्चा में भाग लेते हुए बलात्कार के मामलों का उल्लेख करते हुए भाजपा से जुड़े दो नेताओं के नामों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भाजपा महिला आरक्षण के बहाने विपक्ष को बदनाम कर रही है, जबकि खुद उसके नेता महिलाओं के यौन शोषण के आरोपी रहे हैं। ढोल बजाने के लिए आरक्षण बिल लाया गया सावंत ने कहा कि ढोल बजाने के लिए आरक्षण बिल लाया गया है। उन्होंने कहा कि आपने परिसीमन उससे जोड़ा है, इसलिए विरोध हो रहा है। सावंत ने कहा, आज भी मणिपुर में हमले शुरू हैं। आपकी कथनी और करनी में फर्क है, कहा कुछ, और किया कुछ। आपको नहीं भूलना चाहिए कि कुलदीप सिंह सेंगर कौन है, बृज भूषण शरण सिंह किसकी पार्टी का है? जिन लोगों ने महिलाओं का यौन शोषण किया है। इस पर जब सत्ता पक्ष ने रोटा-टोकी की तो सावंत ने कहा, “क्यों बलात्कारी बहुत प्यारे हैं क्या आपको?” तो आदित्य ठाकरे की भी बात होगी इस पर पीठासीन जगदंबिका पाल ने कहा कि कार्रवाई से इसे निकलवा देंगे इस पर भी सावंत भड़क गए। उन्होंने पूछा क्यों क्या बलात्कारी आदर्श है किसी का? इसी बीच , भाजपा सांसद दुबे ने एक अभिनेत्री की कथित आत्महत्या से जुड़े मामले का हवाला देते हुए शिवसेना (UBT) के एक प्रमुख नेता के नाम का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “अगर ये कुलदीप सेंगर और बृजभूषण शरण की बात करेंगे तो आदित्य ठाकरे की भी बात होगी, उसने हिरोइन को मार दिया।” दुबे को माफी मांगनी चाहिए इसे लेकर सावंत, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार)की नेता सुप्रिया सुले और कांग्रेस के सदस्यों ने विरोध दर्ज कराया। अरविंद सावंत ने कहा कि भाजपा सांसद दुबे को माफी मांगनी चाहिए। हंगामा होता देख पीठासीन सभापति जगदंबिका पाल ने दुबे और सावंत की टिप्पणियों को सदन की कार्यवाही से हटाने का निर्देश दिया। इसके बाद भी सावंत ने अपना भाषण जारी रखा। सावंत ने कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण का विरोध नहीं कर रहा है बल्कि केंद्र सरकार ने स्वार्थ के लिए विशेष सत्र बुलाया है। उन्होंने सरकार से ही पूछा कि बताइए हमने महिलाओं का कब विरोध किया? सावंत ने कहा कि 2023 में सभी ने महिला आरक्षण का समर्थन किया था, क्या प्रधानमंत्री जी आप ये भी भूल गए। दिशा सालियान की आत्महत्या का मामला बता दें कि भाजपा सांसद का इशारा दिशा सालियान की आत्महत्या केस की तरफ था। 2020 में भी अभिनेत्री दिशा सालियान की मौत से जुड़े मामले में बीजेपी नेताओं ने आदित्य ठाकरे पर सवाल उठाए थे और उनके नाम का इस्तेमाल किया था। मार्च 2025 में, दिशा के पिता ने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया और मामले में उनकी भूमिका की जांच की मांग की थी।

आईपीएल 2026 में पंजाब किंग्स का दबदबा, लगातार जीत से शीर्ष पर मजबूत पकड़..

नई दिल्ली:   इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में पंजाब किंग्स का प्रदर्शन लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। टीम ने इस सीजन में अपनी शुरुआत बेहद प्रभावशाली अंदाज में की है और लगातार जीत दर्ज करते हुए अंकतालिका में शीर्ष स्थान हासिल कर लिया है। मुंबई इंडियंस के खिलाफ वानखेड़े स्टेडियम में मिली सात विकेट की जीत ने टीम की स्थिति को और मजबूत कर दिया है। यह मुकाबला हाई स्कोरिंग और प्रतिस्पर्धी रहा जिसमें दोनों टीमों ने अपनी क्षमता का अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन पंजाब किंग्स ने रणनीति और संयम के साथ लक्ष्य हासिल कर मैच अपने नाम कर लिया। टीम के लगातार बेहतर प्रदर्शन ने यह संकेत दिया है कि इस बार पंजाब किंग्स खिताब की प्रबल दावेदारों में शामिल है। मुंबई इंडियंस ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित ओवरों में छह विकेट के नुकसान पर 195 रन बनाए। टीम की शुरुआत मजबूत रही और मध्यक्रम ने भी योगदान दिया लेकिन अंतिम ओवरों में रन गति को और तेज करने में थोड़ी कमी रह गई। इस पारी का सबसे बड़ा आकर्षण क्विंटन डिकॉक का शानदार शतक रहा जिन्होंने 60 गेंदों पर नाबाद 112 रन बनाकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। उनकी बल्लेबाजी में आक्रामकता और तकनीक का बेहतरीन संतुलन देखने को मिला। हालांकि पंजाब किंग्स के गेंदबाजों ने बीच के ओवरों में वापसी की कोशिश की और रन गति पर अंकुश लगाने का प्रयास किया लेकिन मुंबई को बड़े स्कोर तक पहुंचने से पूरी तरह नहीं रोक सके। लक्ष्य का पीछा करने उतरी पंजाब किंग्स की शुरुआत आत्मविश्वास से भरी रही। बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही सकारात्मक रुख अपनाया और गेंदबाजों पर दबाव बनाया। प्रभसिमरन सिंह ने तेजतर्रार पारी खेलते हुए 39 गेंदों पर 80 रन बनाए और पारी की गति को मजबूत आधार दिया। वहीं कप्तान श्रेयस अय्यर ने संयम और आक्रामकता का संतुलन दिखाते हुए 35 गेंदों पर 66 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली। दोनों बल्लेबाजों की साझेदारी ने मैच को पूरी तरह पंजाब के पक्ष में कर दिया और टीम ने केवल 16 ओवर और तीन गेंदों में तीन विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया। इस जीत ने टीम की बल्लेबाजी गहराई और आत्मविश्वास दोनों को उजागर किया। मैच के बाद टीम के मुख्य कोच ने खिलाड़ियों के प्रदर्शन और टीम की सोच पर अपनी बात रखते हुए कहा कि उनका उद्देश्य खिलाड़ियों पर नियंत्रण करना नहीं बल्कि उन्हें एक ऐसा माहौल देना है जहां वे स्वतंत्र रूप से अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें। उनके अनुसार कोच की भूमिका खिलाड़ियों का समर्थन करने और उन्हें लगातार बेहतर करने के लिए प्रेरित करने की होती है। उन्होंने यह भी बताया कि टीम निर्माण के दौरान सबसे महत्वपूर्ण बात स्पष्ट भूमिका और आपसी सहयोग होता है जिससे खिलाड़ी अपने दायित्व को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं और टीम के लिए योगदान दे पाते हैं। टीम प्रबंधन ने नीलामी के दौरान भी इसी सोच को अपनाया था और एक संतुलित टीम तैयार करने पर ध्यान दिया था जिसमें हर खिलाड़ी को उसकी भूमिका के अनुसार जिम्मेदारी दी गई। इस दृष्टिकोण का असर मैदान पर साफ दिखाई दे रहा है जहां खिलाड़ी आत्मविश्वास के साथ खेल रहे हैं और हर मैच में अलग-अलग खिलाड़ी टीम की जीत में योगदान दे रहे हैं। टी20 क्रिकेट की अनिश्चितता को देखते हुए यह रणनीति और भी प्रभावी साबित हो रही है क्योंकि किसी भी मैच में कुछ अच्छे प्रदर्शन ही परिणाम बदलने की क्षमता रखते हैं। इस सीजन में पंजाब किंग्स का प्रदर्शन इस बात का प्रमाण है कि सही रणनीति और सकारात्मक माहौल के साथ कोई भी टीम लगातार सफलता हासिल कर सकती है।