जबलपुर में बुलडोजर एक्शन पर ब्रेक हाईकोर्ट ने कलेक्टर और निगम कमिश्नर को नोटिस भेजा

जबलपुर । मध्यप्रदेश के जबलपुर में मदन महल पहाड़ी से विस्थापित किए जा रहे लोगों के पुनर्वास को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा हस्तक्षेप करते हुए अंतरिम रोक लगा दी है इस फैसले के बाद प्रशासनिक कार्रवाई पर फिलहाल विराम लग गया है और पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है कोर्ट ने इस संबंध में जबलपुर कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रशासन से यह स्पष्ट करने को कहा है कि जिन स्थानों पर विस्थापितों को बसाया जा रहा है वहां मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से यह दलील दी गई कि प्रस्तावित पुनर्वास स्थल पर रहने के लिए आवश्यक सुविधाओं का अभाव है जिससे विस्थापितों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई संजीव सचदेवा और विनय सराफ की खंडपीठ में हुई जहां अदालत ने प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए संतोषजनक जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं अब इस मामले की अगली सुनवाई 18 अप्रैल को निर्धारित की गई है जिस पर सभी पक्षों की नजरें टिकी हुई हैं दरअसल मदन महल पहाड़ी क्षेत्र में लंबे समय से अतिक्रमण की समस्या बनी हुई थी जिसे हटाने के लिए प्रशासन ने बड़े स्तर पर अभियान चलाया था यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत की जा रही है जिसका उद्देश्य पहाड़ी के प्राकृतिक स्वरूप को संरक्षित करना और अवैध कब्जों को हटाना है जानकारी के अनुसार 7 मार्च 2026 से इस अभियान को दोबारा शुरू किया गया और प्रशासन ने पुरवा क्षेत्र में ICMR के सामने स्थित करीब 700 अवैध कब्जों को हटाने के लिए बुलडोजर कार्रवाई की इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों को हटाकर जबलपुर के तेवर क्षेत्र में पुनर्वासित करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी हालांकि विस्थापितों ने पुनर्वास स्थल की स्थिति को लेकर गंभीर आपत्तियां जताई हैं उनका कहना है कि वहां न तो पर्याप्त पानी की व्यवस्था है और न ही अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं ऐसे में बिना समुचित व्यवस्था के उन्हें वहां बसाना उनके जीवन स्तर को और अधिक कठिन बना सकता है हाईकोर्ट का यह निर्णय इस बात को रेखांकित करता है कि विकास और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के साथ साथ मानवीय पहलुओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता अदालत ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि पुनर्वास केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि उसमें विस्थापितों के सम्मानजनक जीवन के लिए आवश्यक सभी सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए फिलहाल प्रशासन इस मामले में अपना पक्ष तैयार करने में जुटा हुआ है और कोर्ट के निर्देशों के अनुसार आवश्यक जानकारी प्रस्तुत करने की तैयारी कर रहा है वहीं प्रभावित लोगों को भी उम्मीद है कि अदालत उनके हितों की रक्षा करेगी और उन्हें उचित सुविधाओं के साथ सुरक्षित पुनर्वास मिलेगा आने वाली सुनवाई इस पूरे मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है
शहबाज शरीफ की इज्जत बच गई! कंगाल पाकिस्तान को सऊदी प्रिंस ने दिए 2 अरब डॉलर

इस्लमाबाद। किस्तान के केंद्रीय बैंक स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने गुरुवार को पुष्टि की कि उसे सऊदी अरब से 2 अरब अमेरिकी डॉलर प्राप्त हो गए हैं। यह राशि वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब द्वारा एक दिन पहले घोषित की गई 3 अरब डॉलर की अतिरिक्त सहायता का हिस्सा है। तो पाकिस्तान की इज्जत बच गई? सऊदी अरब से पाकिस्तान को 2 अरब अमेरिकी डॉलर की माली मदद मिली है। पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) ने गुरुवार को पुष्टि की कि उसे सऊदी अरब से 2 अरब अमेरिकी डॉलर प्राप्त हो गए हैं। यह राशि वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब द्वारा एक दिन पहले घोषित की गई 3 अरब डॉलर की अतिरिक्त सहायता का हिस्सा है। एसबीपी ने सोशल मीडिया पर जारी एक पोस्ट में बताया कि यह धनराशि 15 अप्रैल ( बुधवार ) को प्राप्त हुई है, जिससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। सऊदी अरब ने मंगलवार को पाकिस्तान के लिए अपनी मौजूदा 5 अरब डॉलर की सुविधा को तीन वर्ष और बढ़ा दिया है तथा अतिरिक्त 3 अरब डॉलर की जमा राशि देने का वादा भी किया है। वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने अमेरिका से कहा कि मौजूदा 5 अरब डॉलर की जमा राशि अब सालाना रोलओवर व्यवस्था के अधीन नहीं रहेगी और इसे लंबी अवधि तक बढ़ा दिया गया है। वहीं, एसबीपी के प्रवक्ता ने बताया कि 2 अरब डॉलर पहले ही प्राप्त हो चुके हैं, जबकि शेष 1 अरब डॉलर जल्द ही आने वाला है। इस नई जमा राशि के साथ सऊदी अरब पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक में कुल 8 अरब डॉलर की नकद जमा रखने वाला सबसे बड़ा देश बन गया है। पाकिस्तान को यह मदद सऊदी ने ऐसे समय में किया है जब पाकिस्तान इस महीने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को 3.5 अरब डॉलर चुकाने की तैयारी कर रहा है, जो उसके विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। आईएमएफ ने शर्त रखी है कि पाकिस्तान के तीन प्रमुख द्विपक्षीय ऋणदाताओं ( सऊदी अरब, चीन और यूएई) को चल रहे तीन वर्षीय कार्यक्रम के पूरा होने तक अपनी नकद जमा राशि बनाए रखनी होगी। तीन देशों की यात्रा पर हैं शहबाज शरीफ बता दें कि यह वित्तीय सहायता प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की पश्चिम एशिया यात्रा के दौरान प्राप्त हुई है। बुधवार को तीन देशों की यात्रा पर निकले शरीफ ने कहा कि सऊदी अरब का यह समर्थन पाकिस्तान की बाहरी वित्तीय जरूरतों के लिए ‘नाजुक समय’ पर आया है। इससे विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने और देश के बाहरी खाते को सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री शरीफ ने कहा कि सरकार आईएमएफ समर्थित कार्यक्रम के तहत अपने बाजार दायित्वों और लक्ष्यों के अनुरूप भंडार बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। वित्तीय वर्ष के अंत तक लगभग 18 अरब डॉलर का भंडार बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जो करीब 3.3 महीने के आयात कवर के बराबर है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 27 मार्च तक पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 16.4 अरब डॉलर था, जो लगभग तीन महीने के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त था। हालांकि, यूएई को ऋण चुकाने की मांग ने भंडार पर नया दबाव डाला था। मार्च में पाकिस्तान यूएई के साथ 3.5 अरब डॉलर की सुविधा बढ़ाने के समझौते में विफल रहा था, जो सात वर्षों में ऐसी पहली विफलता मानी जा रही है।
श्योपुर हादसे पर CM मोहन यादव का बड़ा ऐलान मृतकों को 4 लाख घायलों को आर्थिक मदद

श्योपुर । मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है इस घटना पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता का बड़ा ऐलान किया है मुख्यमंत्री ने इस हादसे को बेहद पीड़ादायक बताते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया मुख्यमंत्री द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस दुर्घटना में जान गंवाने वाले प्रत्येक मृतक के परिजनों को 4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी वहीं गंभीर रूप से घायल लोगों को 1 लाख रुपए और अन्य घायलों को 50 हजार रुपए की सहायता राशि प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं यह घोषणा मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से की और संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से राहत कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए यह दर्दनाक हादसा श्योपुर जिले के विजयपुर थाना क्षेत्र के खितरपाल गांव के पास हुआ जहां एक ट्रैक्टर ट्रॉली अनियंत्रित होकर पलट गई बताया जा रहा है कि ट्रॉली में सवार सभी लोग वीरपुर क्षेत्र के घूघस गांव से विजयपुर के झारबड़ौदा में भात देने जा रहे थे इसी दौरान गैस गोदाम के पास अचानक संतुलन बिगड़ने से ट्रैक्टर ट्रॉली पलट गई और उसमें सवार कई लोग उसके नीचे दब गए हादसा इतना भयावह था कि मौके पर ही चार महिलाओं की दर्दनाक मौत हो गई जबकि 20 से अधिक लोग घायल हो गए घटना के तुरंत बाद मौके पर चीख पुकार मच गई और आसपास के लोग सहायता के लिए दौड़ पड़े स्थानीय लोगों ने राहत और बचाव कार्य शुरू करते हुए घायलों को बाहर निकाला और उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुंचाया जहां उनका इलाज जारी है मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि इस दुखद घटना में घायल हुए सभी लोगों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना भी की साथ ही प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाए इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में यात्रियों को ले जाने के लिए उपयोग किए जाने वाले ट्रैक्टर ट्रॉली जैसे असुरक्षित साधनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं अक्सर देखा जाता है कि ऐसे वाहनों में क्षमता से अधिक लोगों को बैठाया जाता है जिससे हादसों का खतरा बढ़ जाता है फिलहाल प्रशासन द्वारा पूरे मामले की जांच की जा रही है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है वहीं घायलों के इलाज और पीड़ित परिवारों को राहत पहुंचाने का काम प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है इस हादसे ने पूरे क्षेत्र में शोक की लहर फैला दी है और लोग मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं
यूरोप पर मंडरा रहा ‘फ्यूल संकट’ का खतरा: सिर्फ 6 हफ्तों का जेट ईंधन, उड़ानें रद्द होने की आशंका

वाशिंगटन। मिडल ईस्ट में जारी तनाव अब वैश्विक ऊर्जा संकट का रूप लेता दिख रहा है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के प्रमुख फातिह बिरोल ने चेतावनी दी है कि यूरोप के पास जेट ईंधन का भंडार बेहद सीमित रह गया है—सिर्फ करीब छह सप्ताह या उससे थोड़ा अधिक। अगर हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले समय में फ्लाइट्स कैंसल होने की नौबत आ सकती है। होर्मुज बना संकट का ‘गला दबाने वाला पॉइंट’ बिरोल ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को इस पूरे संकट का सबसे बड़ा कारण बताया। यह वही समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% गुजरता है। मौजूदा युद्ध के चलते यहां आपूर्ति बाधित है, जिससे तेल, गैस और अन्य जरूरी संसाधनों की वैश्विक सप्लाई पर असर पड़ रहा है। उन्होंने साफ कहा—अगर यह मार्ग जल्द नहीं खुला, तो यह “अब तक का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट” साबित हो सकता है। यूरोप में ईंधन की किल्लत, दुनिया पर असर IEA प्रमुख के मुताबिक, यूरोप में जेट ईंधन की कमी सबसे पहले नजर आएगी। फ्लाइट्स रद्द होने लगेंगी पेट्रोल, गैस और बिजली महंगी होगी सप्लाई चेन प्रभावित होगी इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा—महंगाई बढ़ेगी और विकास दर धीमी पड़ सकती है। गरीब देशों पर सबसे ज्यादा मार बिरोल ने चेताया कि इस संकट का असर सभी देशों पर पड़ेगा, लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के विकासशील देशों को झेलना पड़ेगा। उनके मुताबिक, आर्थिक नुकसान असमान होगा कमजोर अर्थव्यवस्थाएं ज्यादा प्रभावित होंगी कुछ देशों में मंदी तक की स्थिति बन सकती है ‘टोल बूथ’ सिस्टम पर आपत्ति ईरान द्वारा होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क (टोल) लगाने की कोशिश पर भी बिरोल ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि अगर यह व्यवस्था स्थायी हो गई, तो भविष्य में अन्य अहम समुद्री रास्तों—जैसे मलक्का स्ट्रेट—पर भी ऐसा हो सकता है, जो वैश्विक व्यापार के लिए खतरनाक संकेत है। टैंकर फंसे, उत्पादन ठप फारस की खाड़ी में 110+ तेल टैंकर और 15+ LNG जहाज फंसे हुए हैं युद्ध में 80 से ज्यादा ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रभावित उत्पादन सामान्य होने में कई महीने, पूरी रिकवरी में 2 साल तक लग सकते हैं आगे क्या? बिरोल के अनुसार, अगर मई के अंत तक हालात नहीं सुधरे, तो दुनिया को ऊंची महंगाई धीमी आर्थिक वृद्धि और संभावित मंदी का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह संकट भविष्य में परमाणु ऊर्जा और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर दुनिया को तेजी से मोड़ सकता है। ऊर्जा और भू-राजनीति का यह टकराव अब पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लेता दिख रहा है। अगर होर्मुज स्ट्रेट जल्द नहीं खुला, तो आने वाले हफ्तों में इसका असर सीधे लोगों की जेब और यात्रा दोनों पर दिखेगा।
सिंगरौली में तेज रफ्तार का कहर हाइवा ने बाइक सवारों को कुचला 2 की मौत सड़क पर उबाल

सिंगरौली । मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले में एक बार फिर तेज रफ्तार ने कहर बरपाया है जहां देर रात हुए भीषण सड़क हादसे में दो लोगों की दर्दनाक मौत हो गई जबकि एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया घटना लघाडोल थाना क्षेत्र के भाटपानी इलाके की बताई जा रही है जहां कोयले से लोड एक तेज रफ्तार हाइवा वाहन ने बाइक सवार तीन लोगों को बेरहमी से कुचल दिया प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसा इतना भयावह था कि टक्कर लगते ही बाइक सवार दो युवकों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया जबकि तीसरा गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर तड़पता रहा स्थानीय लोगों की मदद से घायल को तुरंत बैढ़न के जिला ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया गया जहां उसका इलाज जारी है और उसकी हालत नाजुक बताई जा रही है मृतकों की पहचान में सामने आया है कि एक युवक सीधी जिले के भुईमाड गांव का निवासी था जबकि दूसरा मृतक और घायल सिंगरौली जिले के बरवानी क्षेत्र के बताए जा रहे हैं इस दुखद घटना की खबर मिलते ही परिजनों में मातम छा गया और पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया हादसे के बाद गुस्साए ग्रामीणों और परिजनों ने सड़क पर उतरकर जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया लोगों ने सड़क को दोनों तरफ से जाम कर दिया जिससे आवागमन पूरी तरह ठप हो गया और कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और हालात को संभालने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया अधिकारियों द्वारा लगातार लोगों को समझाइश दी जा रही है ताकि जाम को खुलवाया जा सके और स्थिति सामान्य हो सके हालांकि लोगों का गुस्सा इतना ज्यादा है कि वे दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं बताया जा रहा है कि हादसे के बाद आरोपी हाइवा चालक मौके से फरार हो गया जिसकी तलाश के लिए पुलिस द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं आसपास के क्षेत्रों में नाकेबंदी भी की गई है ताकि जल्द से जल्द आरोपी को गिरफ्तार किया जा सके यह घटना एक बार फिर सड़क सुरक्षा और तेज रफ्तार वाहनों पर नियंत्रण को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है खासकर उन इलाकों में जहां भारी वाहनों की आवाजाही अधिक रहती है स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर पहले भी कई हादसे हो चुके हैं लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया फिलहाल प्रशासन स्थिति को सामान्य करने और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के प्रयास में जुटा हुआ है लेकिन इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर कब तक लापरवाही और तेज रफ्तार की कीमत निर्दोष लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ेगी
असरानी की कॉमेडी यात्रा: दिग्गज कलाकारों से मिली प्रेरणा ने बदला करियर..

नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा के दिग्गज कॉमेडी अभिनेता असरानी का सफर भारतीय फिल्म जगत में एक ऐसी मिसाल के रूप में देखा जाता है जिसने यह साबित किया कि सहज अभिनय और सटीक कॉमिक टाइमिंग किसी भी कलाकार को अमर बना सकती है। अपने करियर की शुरुआत में उन्होंने पारंपरिक अभिनय से आगे बढ़कर हास्य की बारीकियों को समझने की कोशिश की और धीरे धीरे अपनी एक अलग पहचान बनाई। उनकी छवि आज भी दर्शकों के मन में उस सख्त लेकिन हास्यपूर्ण जेलर के रूप में जीवित है, जिनका संवाद आज भी लोकप्रिय संस्कृति का हिस्सा बना हुआ है। असरानी के अभिनय जीवन को आकार देने में हिंदी सिनेमा के कई दिग्गज कलाकारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। शुरुआती दौर में उन्होंने किशोर कुमार की फिल्मों और उनके अनोखे अंदाज को करीब से समझा, जहां हास्य केवल संवाद पर नहीं बल्कि अभिव्यक्ति और समय पर आधारित होता था। इसी तरह महमूद की कॉमेडी शैली ने उन्हें यह सिखाया कि हास्य में भावनाओं का संतुलन कितना महत्वपूर्ण होता है। वहीं जॉनी वॉकर के साथ काम करने के अनुभव ने उनके पेशेवर अनुशासन को मजबूत किया और यह समझ दी कि समय की पाबंदी और सेट पर अनुशासन भी एक कलाकार की पहचान बनाते हैं। इन तीनों कलाकारों का प्रभाव असरानी के व्यक्तित्व और अभिनय शैली में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। फिल्मी करियर के दौरान असरानी ने कई ऐसी फिल्मों में काम किया जो भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम दौर का हिस्सा मानी जाती हैं। इन फिल्मों में उनका योगदान केवल एक हास्य कलाकार तक सीमित नहीं रहा बल्कि उन्होंने हर किरदार में एक अलग तरह की ऊर्जा और वास्तविकता जोड़ी। उनकी खासियत यह रही कि वे हर दृश्य में स्वाभाविक लगते थे और दर्शकों को बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के हंसा देते थे। समय के साथ उन्होंने यह भी समझाया कि कॉमेडी केवल चुटकुलों पर निर्भर नहीं होती बल्कि सही समय पर बोले गए संवाद और परिस्थिति की समझ से उत्पन्न होती है। अपने लंबे करियर में असरानी ने यह सिद्ध किया कि एक सफल कलाकार बनने के लिए निरंतर सीखना और अपने अनुभवों से विकसित होना जरूरी है। उन्होंने अपने समकालीन कलाकारों से जो सीख ली, उसे अपने अभिनय में इस तरह ढाला कि वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन गई। उनकी कॉमेडी शैली में सरलता, वास्तविकता और गहरी समझ का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है, जिसने उन्हें भारतीय फिल्म उद्योग में एक विशिष्ट स्थान दिलाया। आज भी उनके किरदार और अभिनय शैली दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बने रहते हैं और नई पीढ़ी के कलाकार उनके काम से प्रेरणा लेते हैं। उनका योगदान भारतीय सिनेमा में हास्य अभिनय की परिभाषा को नया आयाम देता है और यह दर्शाता है कि एक कलाकार की सबसे बड़ी पूंजी उसका अनुशासन, अवलोकन क्षमता और सीखने की इच्छा होती है।
Lenskart विवाद: हिजाब की इजाजत और बिंदी पर रोक की खबर से बवाल, पीयूष बंसल ने दी सफाई

नई दिल्ली। आईवियर कंपनी Lenskart इन दिनों सोशल मीडिया पर बड़े विवाद में घिर गई है। कंपनी की कथित “स्टाफ यूनिफॉर्म और ग्रूमिंग गाइड” सामने आने के बाद आरोप लगे कि कर्मचारियों को हिजाब या पगड़ी पहनने की अनुमति है, लेकिन बिंदी और तिलक जैसे धार्मिक प्रतीकों पर रोक लगाई गई है। इस खबर के सामने आते ही लोगों में नाराजगी फैल गई और कंपनी पर भेदभाव के आरोप लगने लगे। क्या है पूरा विवाद? सोशल मीडिया पर वायरल दस्तावेज में दावा किया गया कि Lenskart स्टोर कर्मचारियों को काले रंग का हिजाब और पगड़ी पहनने की छूट देता है, लेकिन “धार्मिक टीका/तिलक और बिंदी/स्टिकर” की अनुमति नहीं है। इसी कथित नियम को लेकर यूजर्स ने सवाल उठाए और इसे धार्मिक असमानता से जोड़कर देखा। पीयूष बंसल की सफाई विवाद बढ़ने के बाद कंपनी के संस्थापक पीयूष बंसल ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि वायरल दस्तावेज कंपनी की मौजूदा नीति का हिस्सा नहीं है और यह एक पुराना ड्राफ्ट है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि कंपनी किसी भी तरह के धार्मिक प्रतीकों पर रोक नहीं लगाती और कर्मचारियों को बिंदी, तिलक समेत सभी प्रतीक पहनने की पूरी स्वतंत्रता है। साथ ही, उन्होंने इस पूरे मामले से पैदा हुए भ्रम के लिए माफी भी मांगी। सफाई पर भी उठे सवाल हालांकि, बंसल की सफाई के बाद भी विवाद शांत नहीं हुआ। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने दावा किया कि वायरल दस्तावेज हाल ही (फरवरी 2026) का है, इसलिए इसे “पुराना” बताना सही नहीं है। कुछ लोगों ने कंपनी से मौजूदा नीति सार्वजनिक करने की मांग की, जबकि अन्य ने यह सवाल उठाया कि अगर यह पुरानी पॉलिसी भी थी, तो उस समय ऐसे नियम क्यों बनाए गए थे। सोशल मीडिया पर बढ़ा दबाव यह मामला अब कंपनी की ब्रांड छवि से जुड़ गया है। यूजर्स लगातार पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं और स्पष्ट नीति सामने लाने की बात कह रहे हैं। फिलहाल कंपनी ने अपनी स्थिति साफ कर दी है, लेकिन सोशल मीडिया पर जारी बहस से यह साफ है कि मामला अभी पूरी तरह थमा नहीं है।
वैश्विक अनिश्चितताओं और डॉलर की मजबूती के बीच सोने पर लगातार दबाव और चांदी में सीमित लेकिन स्थिर मजबूती का रुझान

नई दिल्ली: कीमती धातुओं और वैश्विक बाजारों में उतार चढ़ाव का मिला जुला असर निवेशकों की धारणा पर भारी पड़ा सोना दबाव में रहा जबकि चांदी ने मजबूती दिखाई रुपया भी डॉलर के मुकाबले उतार चढ़ाव के बीच हल्की बढ़त के साथ खुला और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना रहा सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन वैश्विक संकेतों के बीच घरेलू कमोडिटी बाजार में अस्थिरता साफ दिखाई दी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में जून डिलीवरी वाला सोना कारोबार की शुरुआत में मजबूती के साथ खुला लेकिन दिन बढ़ने के साथ इसमें गिरावट देखने को मिली सोने ने कारोबार के दौरान एक सीमित दायरे में उतार चढ़ाव दिखाया और निवेशकों की सतर्कता के कारण इसमें बड़ी तेजी नहीं बन सकी शुरुआती कारोबार में जहां सोने को वैश्विक मांग और सुरक्षित निवेश के रुझान से समर्थन मिला वहीं बाद में डॉलर की मजबूती और मुनाफावसूली के चलते इसमें दबाव बढ़ गया दूसरी ओर चांदी ने दिनभर अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया और इसमें हल्की तेजी दर्ज की गई चांदी की कीमतों को औद्योगिक मांग से समर्थन मिला हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार इसमें स्थायी तेजी के लिए अभी और मजबूत संकेतों की आवश्यकता बनी हुई है बाजार प्रतिभागियों का मानना है कि जब तक प्रमुख स्तरों को निर्णायक रूप से पार नहीं किया जाता तब तक इसमें सीमित दायरे में कारोबार जारी रह सकता है मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले हल्की मजबूती दिखाई शुरुआती कारोबार में रुपया पिछले सत्र की तुलना में मजबूत खुला जिसका प्रमुख कारण घरेलू शेयर बाजार में स्थिरता और विदेशी बाजारों में जोखिम भावना में सुधार रहा साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भी रुपये को समर्थन मिला हालांकि वैश्विक स्तर पर डॉलर की मजबूती ने रुपये की बढ़त पर दबाव बनाए रखा और इसका प्रभाव दिनभर देखने को मिला कच्चे तेल के बाजार में भी नरमी का रुख रहा ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी कच्चे तेल दोनों में गिरावट दर्ज की गई जिसका कारण वैश्विक मांग को लेकर अनिश्चितता और भू राजनीतिक घटनाक्रम में अपेक्षाकृत स्थिरता माना जा रहा है मध्य पूर्व में तनाव में कमी और संघर्ष विराम की खबरों ने भी ऊर्जा बाजार की धारणा को प्रभावित किया जिससे तेल की कीमतों में नरमी आई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू राजनीतिक घटनाक्रमों ने बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाई इजरायल और लेबनान के बीच संघर्ष विराम की घोषणा और अमेरिका ईरान वार्ता में प्रगति की उम्मीदों ने वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को बढ़ाया है हालांकि इसके बावजूद निवेशक पूरी तरह आश्वस्त नहीं दिखे और उन्होंने सुरक्षित निवेश विकल्पों में संतुलित रुख बनाए रखा घरेलू शेयर बाजार में भी सीमित दायरे में हल्की बढ़त देखने को मिली जिससे रुपये को कुछ समर्थन मिला लेकिन समग्र बाजार माहौल सतर्क ही बना रहा कमोडिटी विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल बाजार में स्पष्ट दिशा का अभाव है और यह स्थिति वैश्विक आर्थिक संकेतों तथा भू राजनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी इस पूरे परिदृश्य में निवेशकों की नजर आगामी आर्थिक आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों की नीतिगत टिप्पणियों पर टिकी हुई है जो आने वाले समय में बाजार की दिशा तय कर सकती हैं फिलहाल बाजार में सतर्कता और अवसर दोनों का मिश्रण बना हुआ है और हर बदलाव पर निवेशक नजर बनाए हुए हैं
महिला आरक्षण पर कांग्रेस का बड़ा फैसला नेताओं की पत्नियों को नहीं मिलेगा टिकट

भोपाल । भोपाल में आयोजित महिला कांग्रेस की अहम बैठक में महिला आरक्षण को लेकर एक बड़ा और संकेतात्मक फैसला सामने आया है जिसने प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है सूत्रों के अनुसार बैठक में इस बात पर गंभीर चर्चा हुई कि यदि किसी विधानसभा या लोकसभा सीट को महिलाओं के लिए आरक्षित किया जाता है तो वहां पुरुष नेताओं की पत्नियों या पारिवारिक सदस्यों को टिकट नहीं दिया जाएगा बल्कि पार्टी की सक्रिय और जमीनी महिला कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी यह बैठक प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय में आयोजित हुई जहां महिला सशक्तिकरण और संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से कई मुद्दों पर विचार विमर्श किया गया इस दौरान यह बात प्रमुख रूप से सामने आई कि महिला आरक्षण का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा जब उन महिलाओं को आगे बढ़ने का अवसर दिया जाए जो लंबे समय से संगठन के लिए काम कर रही हैं और जमीनी स्तर पर सक्रिय भूमिका निभा रही हैं बैठक में मौजूद नेताओं ने यह भी कहा कि अब समय आ गया है कि राजनीति में परिवारवाद की परंपरा को सीमित किया जाए खासकर उन परिस्थितियों में जहां महिलाओं के लिए सीट आरक्षित की जाती है वहां केवल पारिवारिक आधार पर टिकट देना महिला नेतृत्व के वास्तविक विकास में बाधा बन सकता है यही कारण है कि पार्टी के भीतर इस सोच को आगे बढ़ाया जा रहा है कि टिकट वितरण में पारदर्शिता और योग्यता को प्राथमिकता दी जाए सूत्रों के मुताबिक इस प्रस्ताव को पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी के समक्ष रखने की तैयारी की जा रही है जहां इसे औपचारिक मंजूरी मिल सकती है यदि यह प्रस्ताव पारित होता है तो यह न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश में कांग्रेस के लिए एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जाएगा क्योंकि इससे यह संकेत जाएगा कि पार्टी महिला सशक्तिकरण को केवल नारे तक सीमित नहीं रखना चाहती बल्कि उसे व्यवहार में भी लागू करना चाहती है राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह का कदम पार्टी के भीतर नई ऊर्जा का संचार कर सकता है और उन महिला कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करेगा जो वर्षों से संगठन में सक्रिय रहते हुए भी अवसर की प्रतीक्षा कर रही हैं इससे पार्टी की छवि में भी सुधार हो सकता है और युवा तथा महिला मतदाताओं के बीच विश्वास बढ़ सकता है हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर अंतिम निर्णय अभी बाकी है लेकिन जिस तरह से इसे लेकर चर्चा हुई है उससे साफ संकेत मिलते हैं कि कांग्रेस अब संगठनात्मक ढांचे में बदलाव और सुधार की दिशा में आगे बढ़ रही है आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह प्रस्ताव किस रूप में लागू होता है और इसका राजनीतिक परिदृश्य पर क्या प्रभाव पड़ता है कुल मिलाकर भोपाल में हुई इस बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस केवल औपचारिकता निभाने के बजाय ठोस और प्रभावी कदम उठाने की दिशा में सोच रही है जो आने वाले चुनावों में पार्टी की रणनीति का अहम हिस्सा बन सकता है
चंद्रशेखर जयंती के विशेष संयोग ने इस राजनीतिक घटनाक्रम को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया..

नई दिल्ली:चंद्रशेखर जयंती पर हरिवंश नारायण सिंह का राज्यसभा उपसभापति के रूप में तीसरी बार चयन, प्रधानमंत्री ने अनुभव और संतुलन की भूमिका को बताया लोकतांत्रिक मजबूती का आधारराज्यसभा में शुक्रवार का दिन संसदीय कार्यवाही के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा, जब हरिवंश नारायण सिंह को लगातार तीसरी बार उपसभापति के रूप में चुना गया। सदन में इस निर्णय को व्यापक समर्थन मिला और उनके चयन को अनुभव, संतुलन और संसदीय परंपराओं के प्रति भरोसे की निरंतरता के रूप में देखा गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि केवल एक पद का दोहराव नहीं है, बल्कि सदन के प्रति उनके लंबे अनुभव और प्रभावी कार्यशैली की स्वीकृति है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि हरिवंश नारायण सिंह ने बीते वर्षों में राज्यसभा की कार्यवाही को सुचारु और संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं के बीच संतुलन स्थापित करना और सदन की गरिमा को बनाए रखना एक कठिन कार्य है, जिसे उन्होंने अपने धैर्य और समझदारी से निभाया है। उनके अनुसार, उनकी कार्यशैली ने सदन में संवाद और अनुशासन दोनों को मजबूत किया है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि हरिवंश नारायण सिंह का जीवन अनुभव और सामाजिक जुड़ाव सदन की कार्यवाही को अधिक समृद्ध बनाता है। उन्होंने ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर शिक्षा और पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य किया और बाद में संसदीय जिम्मेदारी संभालते हुए लोकतांत्रिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका अनुभव सदन की चर्चाओं को अधिक गहराई और संतुलन प्रदान करता है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने एक विशेष संयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस दिन हरिवंश नारायण सिंह को तीसरी बार यह जिम्मेदारी मिली, उसी दिन देश के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की जयंती भी है। उन्होंने बताया कि हरिवंश का चंद्रशेखर के साथ गहरा संबंध रहा है और वे उनके विचारों और कार्यों से जुड़े रहे हैं। यह संयोग इस अवसर को और भी महत्वपूर्ण बना देता है। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि हरिवंश नारायण सिंह का जीवन सामाजिक चेतना और जनसेवा से प्रेरित रहा है। शिक्षा के दौरान काशी में उनका अध्ययन उनके व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण रहा। ग्रामीण परिवेश से आने के कारण उन्होंने समाज की वास्तविकताओं को करीब से समझा, जिसका प्रभाव उनके सार्वजनिक जीवन में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पिछले कुछ वर्षों में हरिवंश ने देशभर के शैक्षणिक संस्थानों में संवाद कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाई है। यह प्रयास युवाओं और नीति निर्माण की दुनिया के बीच एक सेतु का कार्य करता है और लोकतांत्रिक संवाद को और मजबूत बनाता है। राज्यसभा में उनके पुनर्निर्वाचन को लेकर विभिन्न सदस्यों ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की। सदन में यह माना गया कि अनुभवी नेतृत्व संसदीय कार्यवाही को अधिक प्रभावी और संतुलित बनाता है। उनके चयन को निरंतरता और स्थिरता के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।