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प्रदर्शन पड़ा भारी ,केन बेतवा प्रोजेक्ट के विरोध, में 50 लोगों पर केस दर्ज

छतरपुर । मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में चल रहे प्रदर्शन को लेकर पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है। इस मामले में यूथ कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक परमार समेत करीब 50 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। कार्रवाई के बाद इलाके में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार ग्राम ढोड़न में परियोजना के विरोध में प्रदर्शन किया जा रहा था जहां स्थिति उस समय बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बन गई। पुलिस का आरोप है कि इस दौरान शासकीय कार्य में बाधा डाली गई कर्मचारियों के साथ अभद्रता की गई और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। इन आरोपों के आधार पर बमीठा थाने में गंभीर धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है। बताया जा रहा है कि इस कार्रवाई की शुरुआत चंद्रनगर रेंजर की शिकायत के बाद हुई। मामले ने उस वक्त और तूल पकड़ लिया जब प्रदर्शन से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। यह वीडियो कथित तौर पर अभिषेक परमार की ओर से अपलोड किया गया था जिसके आधार पर पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल अन्य लोगों की पहचान शुरू की। अब तक 15 से 20 लोगों की पहचान की जा चुकी है और आगे भी जांच जारी है। बमीठा थाना प्रभारी वाल्मीकि चौबे के मुताबिक वन परिक्षेत्र अधिकारी राजेंद्र तिवारी ने लिखित शिकायत दर्ज कराई थी जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। FIR में सरकारी कर्मचारी पर हमला शासकीय कार्य में बाधा डालना और लोक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984 की धारा 3 (1) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि वायरल वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे भी आरोपियों की पहचान की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रशासन अलर्ट मोड में है और इलाके में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। यह मामला अब सिर्फ कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि राजनीतिक रंग भी लेता नजर आ रहा है। एक ओर जहां प्रशासन इसे कानून के उल्लंघन का मामला बता रहा है वहीं दूसरी ओर प्रदर्शनकारी इसे अपने अधिकारों की आवाज बता रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है।

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में सियासी तापमान चरम पर, मोहन यादव के आक्रामक प्रचार से विकास बनाम जंगलराज की बहस तेज

नई दिल्ली/पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच चुनावी माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। इसी क्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कोलकाता और मेदिनीपुर में जोरदार प्रचार अभियान चलाकर राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी। उन्होंने कमरहाटी क्षेत्र की गलियों में पैदल भ्रमण करते हुए स्थानीय लोगों से सीधा संवाद किया और भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में जनसंपर्क अभियान चलाया। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता अब ठहराव नहीं बल्कि परिवर्तन और तेज विकास चाहती है। उन्होंने राज्य में रोजगार, सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि विकास की संभावनाएं होने के बावजूद उनका पूरा लाभ नहीं उठाया जा सका है। उनके अनुसार राज्य को एक ऐसी शासन व्यवस्था की जरूरत है जो नीति और क्रियान्वयन दोनों स्तरों पर मजबूत हो। डॉ. मोहन यादव ने यह भी कहा कि राज्य के कई क्षेत्रों में युवाओं को रोजगार के लिए अन्य राज्यों की ओर जाना पड़ रहा है, जो चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने दावा किया कि सही नीतियों और मजबूत प्रशासन के जरिए इस स्थिति को बदला जा सकता है और युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। चुनावी प्रचार के दौरान उन्होंने कानून व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए और कहा कि राज्य में स्थिर और जवाबदेह शासन की आवश्यकता है। उनके अनुसार जनता अब ऐसे नेतृत्व की अपेक्षा कर रही है जो विकास को प्राथमिकता दे और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाए। कमरहाटी और आसपास के क्षेत्रों में जनसंपर्क के दौरान मुख्यमंत्री ने लोगों से सीधे बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं। कई नागरिकों ने रोजगार, महंगाई और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी चुनौतियों को उनके सामने रखा। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि राज्य में विकास केंद्रित सरकार बनती है तो इन समस्याओं के समाधान पर तेजी से काम किया जाएगा। मेदिनीपुर क्षेत्र में अपने संबोधन में उन्होंने केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके अनुसार जब दोनों स्तरों पर एक समान विकास दृष्टि होती है तो योजनाओं का लाभ जनता तक अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचता है। चुनावी सभा के दौरान उन्होंने विपक्ष पर भी निशाना साधा और कहा कि राज्य की जनता अब बदलाव चाहती है और विकास की गति को तेज करना चाहती है। उन्होंने विकास, रोजगार और सुरक्षा को इस चुनाव का मुख्य मुद्दा बताया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के आक्रामक प्रचार से चुनावी माहौल और अधिक प्रतिस्पर्धी हो गया है। विकास और शासन व्यवस्था को लेकर बहस अब चुनावी विमर्श का प्रमुख हिस्सा बनती जा रही है।

राजगढ़ कुक्षी रोड पर सड़क हादसा: अनियंत्रित होकर पलटी बस, 14 लोग घायल

कुक्षी । मध्य प्रदेश के राजगढ़ कुक्षी मार्ग पर शनिवार सुबह एक गंभीर सड़क हादसा हो गया। आंबासोटी घाट के पास एक निजी यात्री बस अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई, जिससे बस में सवार यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। इस दुर्घटना में 14 से अधिक लोग घायल हो गए। घाट पर नियंत्रण खोने से पलटी बस जानकारी के अनुसार, बस राजगढ़ से टांडा बाग होते हुए मनावर जा रही थी। सुबह करीब 9:30 बजे रिंगनौद के आगे टांडा घाट क्षेत्र में चालक ने बस पर नियंत्रण खो दिया, जिससे वह सड़क किनारे पलट गई। हादसे के तुरंत बाद चालक मौके से फरार हो गया। एक युवक की हालत गंभीर हादसे में संजय नामक युवक के दोनों पैर बस के नीचे दबकर बुरी तरह कुचल गए। घटना के बाद उनकी पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। डॉक्टरों के मुताबिक, संजय की स्थिति गंभीर है और प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें रेफर किया गया है। उनकी पत्नी भी घायल हुई हैं और उनका इलाज जारी है।तुरंत शुरू हुआ राहत-बचाव कार्य घटना की सूचना मिलते ही रिंगनौद चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से राहत कार्य शुरू किया गया। बस में फंसे यात्रियों को बाहर निकालकर तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। अलग-अलग अस्पतालों में इलाज जारी पुलिस के अनुसार, कुल 14 यात्री घायल हुए हैं। इनमें से 7 को राजगढ़ के कंचन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, जबकि बाकी 7 का इलाज टांडा के शासकीय अस्पताल में चल रहा है। सभी को सामान्य से मध्यम चोटें आई हैं। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है और फरार बस चालक की तलाश की जा रही है।

सोना और पेट्रोल डीजल की कीमतों में उतार चढ़ाव जारी बाजार में हलचल के बीच उपभोक्ताओं पर दिख रहा सीधा असर

नई दिल्ली: देशभर में आज सोने और पेट्रोल डीजल की कीमतों में हल्का उतार चढ़ाव देखने को मिला है जिससे बाजार में एक बार फिर सक्रियता बढ़ गई है। कीमती धातु और ईंधन दोनों ही ऐसे क्षेत्र हैं जिनकी कीमतों पर वैश्विक आर्थिक स्थिति, मांग और आपूर्ति तथा मुद्रा विनिमय दरों का सीधा प्रभाव पड़ता है। इसी कारण हर दिन इनके भाव में हल्का बदलाव देखने को मिलता रहता है जिसका असर आम लोगों की दैनिक जीवन लागत पर साफ दिखाई देता है। सोने के बाजार में आज विभिन्न श्रेणियों के अनुसार कीमतों में स्थिरता के साथ हल्की हलचल दर्ज की गई है। चौबीस कैरेट सोना प्रति दस ग्राम लगभग एक लाख इक्यावन हजार रुपये से ऊपर के स्तर पर बना हुआ है जबकि तेईस कैरेट सोना भी इसी के आसपास दर्ज किया गया है। बाईस कैरेट सोना एक लाख अड़तीस हजार रुपये के करीब और अठारह कैरेट सोना एक लाख तेरह हजार रुपये के आसपास बना हुआ है। चौदह कैरेट सोने की कीमत भी अपेक्षाकृत कम स्तर पर स्थिर बनी हुई है। यह स्थिति दर्शाती है कि सोने के दामों में अचानक बड़ी तेजी या गिरावट नहीं बल्कि सीमित दायरे में उतार चढ़ाव जारी है। देश के प्रमुख शहरों में सोने के भाव में हल्का अंतर देखने को मिला है। राजधानी क्षेत्र में चौबीस कैरेट सोना सबसे ऊंचे स्तर के करीब दर्ज किया गया है। मुंबई और कोलकाता में भी कीमतें लगभग समान स्तर पर बनी हुई हैं। दक्षिण भारत के प्रमुख शहर चेन्नई में सोने के दाम अपेक्षाकृत अधिक रहे हैं। वहीं उत्तर भारत के लखनऊ नोएडा और गाजियाबाद जैसे क्षेत्रों में भी कीमतें लगभग समान रुझान के साथ बनी हुई हैं। यह अंतर स्थानीय कर और बाजार मांग के कारण देखने को मिलता है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी आज विभिन्न शहरों में मामूली बदलाव दर्ज किया गया है। राजधानी में पेट्रोल की कीमत लगभग चौानवे रुपये के आसपास और डीजल लगभग सत्तासी रुपये के करीब बना हुआ है। मुंबई में पेट्रोल एक सौ चार रुपये से ऊपर और डीजल बानवे रुपये के आसपास दर्ज किया गया है। कोलकाता और चेन्नई में भी ईंधन के दाम इसी तरह के स्तर पर बने हुए हैं। लखनऊ में पेट्रोल की कीमत लगभग चौरानवे रुपये के करीब और डीजल अठासी रुपये के आसपास देखा गया है। पटना और हैदराबाद जैसे शहरों में ईंधन के दाम अपेक्षाकृत अधिक स्तर पर बने हुए हैं। ईंधन की कीमतों में बदलाव का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और कर संरचना को माना जाता है। जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव होता है तो उसका सीधा असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई देता है। इसके अलावा मांग और आपूर्ति का संतुलन भी कीमतों को प्रभावित करता है जिससे अलग अलग समय पर दामों में हल्का बदलाव देखने को मिलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोने और ईंधन दोनों की कीमतें आने वाले समय में वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर रहेंगी। सोना जहां सुरक्षित निवेश का माध्यम माना जाता है वहीं पेट्रोल डीजल की कीमतें सीधे आम उपभोक्ता के दैनिक खर्च को प्रभावित करती हैं। वर्तमान स्थिति में दोनों ही बाजारों में बड़े बदलाव की बजाय सीमित दायरे में उतार चढ़ाव का रुझान बना हुआ है।

महू में चिप्स फैक्ट्री में बॉयलर ब्लास्ट, धमाके से मचा हड़कंप, बच्चे का चेहरा झुलसा

महू । मध्य प्रदेश के महू क्षेत्र के कोदरिया गांव में शनिवार सुबह एक आलू चिप्स फैक्ट्री में जोरदार धमाका हो गया। इस हादसे में बॉयलर फटने से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घटना में फैक्ट्री परिसर में रहने वाला एक बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया।गंभीर हालत में बच्चे को किया रेफर घायल बच्चे की पहचान शुभम, पिता जितेंद्र मकवाना के रूप में हुई है। धमाके के तुरंत बाद उसे महू के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर इंदौर रेफर कर दिया गया। बताया जा रहा है कि उसका चेहरा बुरी तरह झुलस गया है।धमाके की आवाज से दहला इलाका प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विस्फोट इतना तेज था कि उसकी गूंज दूर तक सुनाई दी। धमाके के बाद बॉयलर से निकलती भाप ने हालात को और भयावह बना दिया, जिससे मौके पर मौजूद लोगों में घबराहट फैल गई। शुभम अपने परिवार के साथ इसी फैक्ट्री परिसर में रहता था, जहां उसके पिता भी काम करते हैं।अवैध फैक्ट्रियों पर उठे सवाल घटना के बाद स्थानीय लोगों ने क्षेत्र में संचालित फैक्ट्रियों की वैधता पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कोदरिया और आसपास कई यूनिट बिना अनुमति के चल रही हैं, जिन पर प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। हादसे के बाद अब प्रशासनिक कार्रवाई और जांच पर सभी की नजर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते अवैध फैक्ट्रियों पर सख्ती की जाती, तो इस तरह की घटनाओं से बचा जा सकता था।

मैहर में दर्दनाक हादसा: तालाब में नहाने गई चार लड़कियां डूबीं, दो की मौत, दो की जान बची

मैहर । मध्य प्रदेश के मैहर जिले में शनिवार सुबह एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां तालाब में नहाने गई चार लड़कियां डूब गईं। इस घटना में दो लड़कियों की मौत हो गई, जबकि दो को ग्रामीणों ने समय रहते बचा लिया। नहाने के दौरान हुआ हादसा कोतवाली थाना क्षेत्र के पटेहरा तालाब में यह घटना हुई। जानकारी के अनुसार, पटेहरा बीड़ी कॉलोनी की एक युवती और तीन नाबालिग किशोरियां सुबह नहाने के लिए तालाब पहुंची थीं। इसी दौरान एक किशोरी का पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में चली गई। बचाने की कोशिश बनी जानलेवा पहली किशोरी को बचाने के प्रयास में बाकी तीनों भी आगे बढ़ीं, लेकिन संतुलन बिगड़ने से चारों पानी में डूबने लगीं। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया और दो लड़कियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। हालांकि, दो की जान नहीं बचाई जा सकी। मृतकों की पहचान हादसे में जान गंवाने वाली लड़कियों की पहचान पूनम चौधरी (10) और आंचल चौधरी (20) के रूप में हुई है, जो पटेहरा बीड़ी कॉलोनी की निवासी थीं। दोनों के शवों को सिविल अस्पताल मैहर भेजा गया है। घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम दिव्या पटेल, तहसीलदार जितेंद्र पटेल और थाना प्रभारी महेंद्र सिंह चौहान मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इलाके में पसरा मातम इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। एक छोटी सी चूक ने दो जिंदगियां छीन लीं, जिससे स्थानीय लोग स्तब्ध हैं।

PM मोदी आज रात 8.30 बजे करेंगे राष्ट्र को संबोधित, महिला आरक्षण और परिसीमन विवाद के बीच देशभर में बढ़ी राजनीतिक हलचल

नई दिल्ली:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रात 8:30 बजे राष्ट्र को संबोधित करेंगे। इस अचानक घोषित संबोधन के बाद देशभर में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। आमतौर पर प्रधानमंत्री के ऐसे संबोधन महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णयों या बड़े राष्ट्रीय संदेशों से जुड़े रहे हैं, इसलिए इस बार भी संभावनाओं और कयासों का बाजार गर्म है। हाल ही में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े मुद्दों पर संसद और राजनीतिक मंचों पर तीखी बहस देखने को मिली है। ऐसे में माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री अपने संबोधन में इस विषय पर देश को सीधा संदेश दे सकते हैं। विशेष रूप से महिला आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया और भविष्य की रूपरेखा को लेकर कोई महत्वपूर्ण घोषणा या स्पष्टता सामने आ सकती है। इस मुद्दे पर राजनीतिक असहमति और जन अपेक्षाओं को देखते हुए यह विषय केंद्र में रह सकता है। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और वैश्विक ऊर्जा बाजार से जुड़े मुद्दों पर भी नजरें टिकी हुई हैं। मिडिल ईस्ट क्षेत्र में तनाव और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े संभावित प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था के लिए अहम माने जा रहे हैं। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि प्रधानमंत्री अपने संबोधन में वैश्विक परिस्थितियों पर भारत का दृष्टिकोण और रणनीतिक संदेश भी साझा कर सकते हैं। इसके अलावा देश के विकास एजेंडे और आर्थिक नीतियों को लेकर भी किसी नए दिशा संकेत की उम्मीद की जा रही है। सरकार द्वारा चल रहे विकास कार्यक्रमों और भविष्य की योजनाओं पर भी प्रधानमंत्री देश को संबोधित कर सकते हैं। ऐसे संबोधनों में अक्सर राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और आगे की नीतिगत दिशा का संकेत मिलता है। पिछले वर्षों में प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन कई महत्वपूर्ण फैसलों से जुड़े रहे हैं, जिनमें आर्थिक, सामाजिक और सुरक्षा से संबंधित बड़े कदम शामिल रहे हैं। इसी वजह से इस बार का संबोधन भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है और देश की निगाहें इस पर टिकी हुई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संबोधन केवल किसी एक मुद्दे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें कई स्तरों पर संदेश शामिल हो सकते हैं। महिला सशक्तिकरण, संवैधानिक प्रक्रिया, आर्थिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय स्थिति जैसे विषयों पर प्रधानमंत्री अपनी बात रख सकते हैं।

केंद्रीय कर्मचारियों को बड़ी राहत: 2 प्रतिशत बढ़ा महंगाई भत्ता, अब DA हुआ 60 प्रतिशत

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी राहत देते हुए महंगाई भत्ते DA में 2% की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में सीधा इजाफा होगा। अब 60% हुआ महंगाई भत्ता सरकार के इस निर्णय के बाद कुल महंगाई भत्ता 58% से बढ़कर 60% हो गया है। इस बढ़ोतरी का फायदा करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 65 लाख से ज्यादा पेंशनर्स को मिलेगा। सैलरी में कितना होगा इजाफा? यदि किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 36,500 रुपये है, तो 60% डीए के हिसाब से उसे 21,900 रुपये महंगाई भत्ता मिलेगा। यानी हर महीने की आय में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। एरियर का भी मिलेगा लाभ यह बढ़ा हुआ डीए 1 जनवरी 2026 से लागू माना जाएगा। ऐसे में कर्मचारियों को जनवरी, फरवरी और मार्च के एरियर का भुगतान भी एक साथ किया जाएगा, जिससे उन्हें अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिलेगा।लंबे इंतजार के बाद फैसला कर्मचारी काफी समय से इस घोषणा का इंतजार कर रहे थे। बढ़ती महंगाई के बीच आय बढ़ाने की मांग लगातार उठ रही थी। सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब कर्मचारी संगठन 8वें वेतन आयोग के तहत वेतन संरचना में बदलाव की मांग भी कर रहे हैं। महंगाई भत्ता क्यों बढ़ाया जाता है? महंगाई भत्ता कर्मचारियों की क्रय शक्ति बनाए रखने के लिए दिया जाता है। सरकार साल में दो बार जनवरी और जुलाई में इसे संशोधित करती है। इसकी गणना श्रम मंत्रालय के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) के आधार पर की जाती है, जो बाजार में बढ़ती कीमतों का संकेत देता है।

आज रात 8:30 बजे देश को संबोधित करेंगे प्रधानमंत्री मोदी, महिला आरक्षण पर कर सकते हैं बात

नई दिल्ली ।  हालांकि उनके संबोधन का विषय अभी आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं किया गया है लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं कि वे महिला आरक्षण और संसद में हालिया घटनाक्रम पर अपनी बात रख सकते हैं। दरअसल सरकार लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा विधेयक लेकर आई थी जो पारित नहीं हो सका। इसी पृष्ठभूमि में माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री अपने संबोधन में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठा सकते हैं। कैबिनेट बैठक में विपक्ष पर निशाना आज हुई कैबिनेट बैठक में भी इस विषय पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर ‘दोषी’ होने और महिलाओं के लिए आरक्षण बिल का समर्थन न करके महिलाओं के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया। पीएम मोदी ने विपक्ष के इस रवैये को एक गलती बताया और चेतावनी दी है कि भविष्य में उन्हें इसकी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह मैसेज देश के हर गांव तक पहुंचाया जाना चाहिए कि विपक्ष महिलाओं के प्रति नकारात्मक सोच रखता है. पिछले दशकों में क्यों नहीं मिला आरक्षण? विपक्षी दलों पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि वे वास्तव में महिलाओं के पक्ष में थे तो पिछले कई दशकों में उन्होंने आरक्षण लागू क्यों नहीं किया। उन्होंने इसे विपक्ष की नीयत पर सवाल खड़ा करने वाला मुद्दा बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने संकेत दिए कि महिला आरक्षण का विरोध करने का राजनीतिक परिणाम विपक्ष को भुगतना पड़ सकता है। उनके अनुसार जनता इस मुद्दे को गंभीरता से देख रही है और इसका असर चुनावी माहौल पर पड़ना तय है। गांव-गांव तक पहुंचाने का निर्देश उन्होंने पार्टी नेताओं को निर्देश दिया कि इस मुद्दे को देश के हर गांव तक पहुंचाया जाए। साथ ही कहा कि जनता के बीच जाकर यह बताया जाए कि महिलाओं के अधिकारों को लेकर सरकार और विपक्ष की सोच में क्या अंतर है।

महिला आरक्षण और परिसीमन विवाद पर भाजपा का कांग्रेस पर तीखा प्रहार, स्मृति ईरानी और रवि शंकर प्रसाद ने लगाए गंभीर आरोप

नई दिल्ली:महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को लेकर संसद में जारी राजनीतिक बहस अब और अधिक तेज हो गई है। इस मुद्दे पर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं स्मृति ईरानी और रवि शंकर प्रसाद ने प्रेस वार्ता कर कांग्रेस और विपक्षी दलों पर गंभीर आरोप लगाए। दोनों नेताओं ने कहा कि विपक्ष ने महिला आरक्षण जैसे ऐतिहासिक मुद्दे पर असंगत और विरोधाभासी रुख अपनाया है, जिससे महिलाओं के अधिकारों को लेकर राजनीतिक भ्रम की स्थिति बनी है। स्मृति ईरानी ने कहा कि देश की महिलाओं के अधिकारों को लेकर जो चर्चा की जा रही है, उसमें विपक्ष का रवैया जमीनी वास्तविकताओं से अलग दिखाई देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस महिलाओं के राजनीतिक और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए अपेक्षित कार्य नहीं कर पाई। उनके अनुसार वर्तमान सरकार ने महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई स्तरों पर ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण केवल एक राजनीतिक घोषणा नहीं है बल्कि यह महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में वास्तविक भागीदारी दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उनके अनुसार सरकार का उद्देश्य महिलाओं को केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि वास्तविक अधिकार देना है, जिससे वे देश की नीति निर्माण प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा सकें। स्मृति ईरानी ने कांग्रेस पर यह भी आरोप लगाया कि उसने इस मुद्दे को राजनीतिक दृष्टि से देखा है, जबकि यह सामाजिक सुधार से जुड़ा विषय है। उनके अनुसार महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर केवल भाषण देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नीतियों को जमीन पर लागू करना अधिक महत्वपूर्ण है। दूसरी ओर रवि शंकर प्रसाद ने भी कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे मुद्दों पर स्पष्ट रुख नहीं रखता। उनके अनुसार संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार लोकसभा और विधानसभा सीटों का पुनर्वितरण परिसीमन के माध्यम से ही संभव है और यह जनसंख्या के आधार पर तय होता है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन एक आवश्यक प्रक्रिया है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार यह दोनों प्रक्रियाएं एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं और इन्हें अलग करके देखना व्यावहारिक नहीं होगा। रवि शंकर प्रसाद ने यह भी कहा कि विपक्ष कुछ मामलों में समर्थन की बात करता है लेकिन जब संवैधानिक प्रक्रिया की बात आती है तो विरोधाभासी रुख अपनाता है। उनके अनुसार यह स्थिति देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्पष्टता की कमी पैदा करती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल क्षेत्रीय संतुलन और प्रतिनिधित्व के मुद्दे को लेकर भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर नीति निर्माण की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। कुल मिलाकर महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और गहरा गया है। दोनों पक्ष अपने अपने तर्कों के साथ इस मुद्दे पर आमने सामने हैं और यह बहस संसद से लेकर राजनीतिक मंचों तक लगातार तेज होती जा रही है।