Pakistan के बलूचिस्तान में सेना और विद्रोहियों में हुई भारी गोलीबारी, सैकड़ों घायल

इस्लामाबाद । पाकिस्तान (Pakistan) के बलूचिस्तान प्रांत (Balochistan Province) में सेना व बलोच विद्रोहियों (Army and Baloch rebels) में भीषण गोलीबारी चल रही है। स्थिति यह है कि सैन्य अभियानों के बीच खारान, खुजदार और मस्तुंग सहित कई जिलों में हिंसा से विद्रोह और व्यापक हो गया है। सेना-विद्रोहियों में सशस्त्र झड़पों के बीच बड़ी संख्या में सैकड़ों की संख्या में आम नागरिक हताहत हुए हैं। हालांकि, सीमित पहुंच के कारण इन खबरों पर पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बल खामोशी बनाए हैं। जबकि खारान में नया सैन्य अभियान शुरू होने का दावा निवासियों ने किया। सेना ने अलमार्क और किसान जैसे इलाकों में तड़के एक अभियान शुरू कर दिया। इस अभियान के दौरान, कुछ अज्ञात हथियारबंद लोगों ने सेना के दस वाहनों के काफिले पर घात लगाकर हमला किया और दोनों पक्षों में गोलीबारी शुरू हो गई। स्थानीय लोगों ने अपने ऊपर ड्रोन उड़ने की भी जानकारी दी, लेकिन हताहतों या अभियान के नतीजों के बारे में कोई भी पुष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। अधिकारी इन घटनाक्रमों पर चुप्पी साधे हैं। इसके बाद सोहिंदा में काफी देर तक गोलीबारी होती रही। यह झड़प कई घंटों तक चली। इस दौरान क्षेत्र में ड्रोन उड़ते भी देखे गए। बलूचिस्तान के बरखान जिल में अंधाधुंध सैन्य गोलीबारी में आम नागरिकों के हताहत होने की खबरें सामने आई हैं। यहां बलोच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने हाल ही में हुई बमबारी और गोलाबारी की निंदा कर इसे सामूहिक सजा का कृत्य बताया है। इस अभियान में कई गैर-लड़ाकों की मौत हो गई, जिनमें महिलाएं, बच्चे और बुज़ुर्ग शामिल हैं। बीवाईसी ने घटना को बेहद दुखद और निंदनीय त्रासदी बताया।
आधी रात को सस्ता हुआ तेल! कच्चे तेल में 10% गिरावट, फिर भी देशभर में पेट्रोल-डीजल के दाम जस के तस

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट के बावजूद भारत में आम लोगों को फिलहाल राहत नहीं मिली है। शुक्रवार को ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल 10% तक लुढ़ककर 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया, लेकिन ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने घरेलू कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया। देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर बना हुआ है। सबसे सस्ता पेट्रोल-डीजल यहां अंडमान-निकोबार की राजधानी पोर्टब्लेयर में अब भी सबसे सस्ता ईंधन मिल रहा है। यहां पेट्रोल 78.05 रुपये और डीजल 82.64 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है, जो बड़े शहरों की तुलना में काफी कम है। क्यों गिरे कच्चे तेल के दाम? ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से वैश्विक शिपिंग को फिर से सुचारू करने के संकेत दिए हैं। इस खबर के बाद सप्लाई को लेकर बनी चिंता कम हुई और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल के रेट (₹/लीटर) मुंबई – 104.21 कोलकाता – 103.94 चेन्नई – 100.75 अहमदाबाद – 94.49 बेंगलुरु – 94.49 हैदराबाद – 107.46 जयपुर – 104.72 लखनऊ – 94.69 पुणे – 104.04 चंडीगढ़ – 94.30 इंदौर – 106.48 सूरत – 95.00 नाशिक – 95.50 डीजल के ताजा रेट (₹/लीटर) मुंबई – 92.15 कोलकाता – 90.76 चेन्नई – 92.34 अहमदाबाद – 90.17 बेंगलुरु – 89.02 हैदराबाद – 95.70 जयपुर – 90.21 लखनऊ – 87.80 पुणे – 90.57 चंडीगढ़ – 82.45 इंदौर – 91.88 पटना – 93.80 सूरत – 89.00 पहले बढ़ चुके हैं दाम हाल ही में प्राइवेट कंपनियों ने कीमतों में बढ़ोतरी की थी। शेल इंडिया ने 1 अप्रैल को पेट्रोल 7.41 रुपये और डीजल 25.01 रुपये प्रति लीटर महंगा किया था। वहीं, नायरा ने मार्च में पेट्रोल-डीजल के दाम करीब 5 रुपये तक बढ़ाए थे। प्रीमियम फ्यूल भी महंगा इंडियन ऑयल ने 1 अप्रैल को XP100 पेट्रोल की कीमत 11 रुपये बढ़ाकर 160 रुपये प्रति लीटर कर दी थी। इसके अलावा प्रीमियम डीजल ‘एक्स्ट्रा ग्रीन’ भी 91.49 रुपये से बढ़कर 92.99 रुपये प्रति लीटर हो गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट के बावजूद घरेलू स्तर पर फिलहाल कोई राहत नहीं है। अब सबकी नजर ऑयल कंपनियों के अगले फैसले पर टिकी है—क्या आम आदमी को सस्ता पेट्रोल-डीजल मिलेगा या इंतजार लंबा चलेगा?
भारत-चीन रिश्तों में नई नरमी! SCO मंच पर पहली खास बैठक, जिनपिंग के भारत दौरे के संकेत

नई दिल्ली। लंबे तनाव के बाद भारत और चीन के रिश्तों में फिर से गर्माहट दिखने लगी है। साल 2024 में पूर्वी लद्दाख विवाद सुलझने के बाद पहली बार दोनों देशों के बीच शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के तहत अहम द्विपक्षीय वार्ता हुई। 16-17 अप्रैल को हुई इस बैठक को कूटनीतिक रिश्तों में सुधार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। क्या रही बैठक की अहम बातें? विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों देशों ने SCO नेताओं के फैसलों को लागू करने और संगठन की भविष्य की रणनीति पर गहन चर्चा की। सुरक्षा, व्यापार, कनेक्टिविटी और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे मुद्दों पर सहयोग मजबूत करने पर सहमति बनी। इस दौरान प्रतिनिधिमंडलों ने विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी सिबी जॉर्ज से भी मुलाकात की, जहां द्विपक्षीय और क्षेत्रीय सहयोग की समीक्षा की गई। BRICS और SCO में बढ़ती नजदीकियां लद्दाख विवाद सुलझने के बाद भारत और चीन अब BRICS और SCO जैसे मंचों पर मिलकर काम कर रहे हैं। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद लगातार बढ़ रहा है। जिनपिंग के भारत दौरे की चर्चा बीजिंग ने भारत की BRICS अध्यक्षता का समर्थन किया है। इसी क्रम में चीन के विदेश मंत्री वांग यी मई में भारत आ सकते हैं। वहीं, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सितंबर में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन के लिए भारत आने की संभावना जताई जा रही है। SCO पर भारत का साफ रुख भारत SCO को क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग के लिए अहम मंच मानता है, लेकिन उसने साफ किया है कि किसी भी कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट में सदस्य देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से समझौता नहीं होगा। पीएम मोदी का संदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि ऐसी कनेक्टिविटी, जो संप्रभुता का सम्मान नहीं करती, वह टिकाऊ नहीं हो सकती। भारत और चीन के बीच बढ़ती बातचीत यह संकेत दे रही है कि दोनों देश तनाव को पीछे छोड़कर सहयोग की नई राह पर बढ़ना चाहते हैं। अब सबकी नजर संभावित उच्चस्तरीय दौरों और आने वाले फैसलों पर टिकी है।
क्या भाजपा को पहले से था विधेयक गिरने का अंदाजा, फिर क्यों महिला आरक्षण में संशोधन का खेला दांव

नई दिल्ली। लोकसभा में नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक के गिरने के बाद बीजेपी विपक्ष पर आक्रामक है तो वहीं विपक्ष का कहना है कि यह बीजेपी की सोची-समझी साजिश है। बिना संवाद के विशेष सत्र बुलाया गया और फिर विधेयक ना पास होने का ठीकरा विपक्ष पर फोड़ा जा रहा है। महिला आरक्षण संशोधन विधेयक 2023 और परिसीमन विधेयक 2026 समेत तीन विधेयकों को पास कराने के लिए पांच राज्यों में चुनाव के बीच ही संसद का विशेष सत्र बुलाया गया। पहले दिन रात 1 बजे के बाद तक विधेयकों पर चर्चा होती रही। 17 अप्रैल को सरकार ने महिला आरक्षण कानून को लागू करने की अधिसूचना भी जारी कर दी और फिर शाम को जब वोटिंग हुई तो विधेयक निचले सदन में गिर गया। विधेयक गिरते ही बीजेपी विपक्ष पर आक्रामक हो गई। बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस समेत विपक्ष महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ है। वहीं कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि यह एक तरह का षड्यंत्र था ताकि बीजेपी विधानसभा चुनाव के बीच बिना ठीक से संवाद किए ऐसी परिस्थितियां बनाए कि विधेयक पारित ना होने का ठीकरा विपक्ष पर फोड़ा जा सके। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन में वोटिंग से पहले ही सोशल मीडिया पर अपना संदेश जारी करते हुए कहा विपक्षी सांसदों से भी अपील की थी कि वे विधेयक के पक्ष में वोटिंग करें। वहीं विपक्ष के सांसदों का कहना था कि 2023 में पारित विधेयक को उसी रूप में लागू किया जाए। इसमें संशोधन की जरूरत कहां से पड़ गई अशोक गहलोत ने शुक्रवार को कहा, धानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सहित पूरी सरकार को यह पहले दिन से मालूम था कि संविधान संशोधन विधेयक विपक्ष के सहयोग के बिना पास नहीं हो सकता। इसके बावजूद उन्होंने विपक्षी दलों को विश्वास में नहीं लिया। बीजेपी ने किया विपक्ष में फूट डालने का प्रयास- गहलोत गहलोत ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे लगातार इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग कर रहे थे, परन्तु इतने महत्वपूर्ण विषय पर प्रधानमंत्री ने सभी विपक्षी पार्टियों को एक साथ बुलाकर बात करने के बजाय अलग-अलग बात कर उनमें फूट डालने का प्रयास किया। कैसे गिर गया विधेयक सदन में ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’, पर हुए मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। विधेयक पर मत विभाजन में 528 सदस्यों ने हिस्सा लिया। इस विधेयक को पारित करने के लिए 352 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता थी। विधेयक गिरने का भी फायदा उठाएगी बीजेपी? विधानसभा चुनावों में बीजेपी अकसर महिला वोटों के लिए कोई ना कोई दांव खेलती है। ऐसे में जानकारों का कहना है कि बीजेपी को पहले से पता था कि इस विधेयक को लेकर विपक्ष एकजुट होने का प्रयास करेगा। अगर विधेयक पास होता है तब भी बीजेपी इसे बंगाल चुनाव में मुद्दा बना सकती है। वहीं अगर विधेयक पास नहीं होता है तो वह इसी के बहाने विपक्ष को निशाने पर ले सकती है। अब इस राजनीति की शुरुआत पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु से हो चुकी है। यह मुद्दा 2029 के चुनाव में भी भुनाया जा सकता है।
आधी रात को पुणे एयरपोर्ट पर फाइटर जेट की हार्ड लैंडिंग….अस्थाई रूप से बंद करना पड़ा रनवे

पुणे। भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के फाइटर जेट की हार्ड लैंडिंग (IAF fighter jet Hard Landing) के कारण आधी रात को पुणे एयरपोर्ट (Pune Airport) ही बंद करना पड़ गया। पुणे एयरपोर्ट पर शुक्रवार की रात को इंडियन एयरफोर्स के फाइटर एयरक्राफ्ट की हार्ड लैंडिंग हुई. इसके कारण ही रनवे को बंद कर दिया गया। राहत की बात है कि पायलट सुरक्षित है और किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ है। अधिकारियों ने जानकारी दी कि भारतीय वायुसेना का एक फाइटर जेट के हार्ड लैंडिंग से जुड़ी घटना के बाद शुक्रवार को पुणे एयरपोर्ट का रनवे अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया. उसने कहा कि रनवे को फिर से चालू करने के प्रयास जारी हैं। इंडियन एयरफोर्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, ‘ भारतीय वायुसेना के एक विमान से जुड़ी घटना के कारण पुणे का रनवे अस्थायी रूप से बंद है. विमान का क्रू सुरक्षित है और किसी भी आम नागरिक की संपत्ति को कोई नुकसान नहीं हुआ है.’ उसने कहा, ‘रनवे को फिर से चालू करने और जल्द से जल्द सामान्य परिचालन शुरू करने के प्रयास जारी हैं.’ यह पुणे एयरपोर्ट यानी हवाई अड्डा ‘दोहरे उपयोग वाले मॉडल’ पर काम करता है. इसमें आम नागरिकों की कमर्शियल उड़ानों को एक सक्रिय वायु सेना स्टेशन के साथ जोड़ा जाता है. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि वायुसेना के एक विमान की ‘हार्ड लैंडिंग’ हुई, लेकिन उन्होंने इस बारे में और कोई जानकारी देने से मना कर दिया। पुणे इंटरनेशनल एयरपोर्ट के अधिकारियों के अनुसार, शुक्रवार की रात करीब 10:25 बजे लैंडिंग के दौरान भारतीय वायुसेना का एक लड़ाकू विमान का अंडरकैरिज (पहिए) खराब हो गया. इसके चलते हार्ड लैंडिंग हुई और फिर पूरा रनवे बंद हो गया. उन्होंने कहा, ‘भारतीय वायुसेना के ATC के अनुसार रनवे को साफ करने और सामान्य परिचालन बहाल करने में 4-5 घंटे लगेंगे.’ केंद्रीय मंत्री ने क्या कहाकेंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने हवाई अड्डे पर रनवे का परिचालन रोके जाने की पुष्टि की. मुरलीधर मोहोल ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘शुक्र है कि विमान का क्रू सुरक्षित है और किसी भी आम नागरिक की संपत्ति को कोई नुकसान नहीं हुआ है. एयरलाइंस को सूचित कर दिया गया है और रनवे पर सामान्य परिचालन बहाल करने में लगभग 5 घंटे लग सकते हैं.’ उन्होंने कहा, ‘मैं हवाई अड्डे के निदेशक और वायु सेना के अधिकारियों के लगातार संपर्क में हूं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि स्थिति जल्द से जल्द सुलझ जाए।
दिनभर AC में रहने से स्किन हो रही ड्राई? ये आसान टिप्स बनाएंगे आपकी स्किन को हाइड्रेटेड और ग्लोइंग

नई दिल्ली : गर्मी से बचने के लिए आजकल लोग ज्यादातर समय एसी (AC) वाले कमरों में बिताते हैं, चाहे ऑफिस हो या घर। ठंडी हवा भले ही राहत देती है, लेकिन इसका सीधा असर हमारी स्किन पर पड़ता है। लगातार एसी में रहने से त्वचा की नमी धीरे-धीरे कम होने लगती है, जिससे स्किन ड्राई, बेजान और खिंची हुई महसूस हो सकती है। कई लोगों को चेहरे पर रूखापन, हल्की सफेद परत और ग्लो कम होने जैसी समस्याएं भी दिखने लगती हैं। एसी की ठंडी और सूखी हवा त्वचा की प्राकृतिक नमी को सोख लेती है, जिससे स्किन डिहाइड्रेट हो जाती है। ऐसे में स्किन को सही देखभाल की जरूरत होती है ताकि उसका ग्लो और सॉफ्टनेस बरकरार रहे। सबसे पहले स्किन को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए एसी में बैठने से पहले और दौरान हल्का मॉइश्चराइजर जरूर लगाएं। जेल बेस्ड या हयालूरोनिक एसिड युक्त मॉइश्चराइजर स्किन में नमी बनाए रखने में मदद करता है और ड्राईनेस को कम करता है। दूसरा और सबसे जरूरी उपाय है पर्याप्त मात्रा में पानी पीना। एसी में रहने पर अक्सर प्यास कम लगती है, लेकिन शरीर में पानी की कमी स्किन को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है। दिनभर में पर्याप्त पानी, नारियल पानी और ताजे फलों के जूस का सेवन त्वचा को अंदर से हाइड्रेट रखता है। इसके अलावा स्किन को समय-समय पर हल्के फेस मिस्ट या गुलाब जल से रिफ्रेश करना भी फायदेमंद होता है। यह त्वचा को तुरंत ताजगी देता है और ड्राईनेस कम करता है। एसी में लंबे समय तक रहने वाले लोगों के लिए स्किन केयर रूटीन को नियमित रखना बेहद जरूरी है। सही देखभाल से न सिर्फ त्वचा का ग्लो बना रहता है, बल्कि वह हेल्दी और सॉफ्ट भी दिखाई देती है।
विपक्ष ने दिया BJP को बड़ा चुनावी मुद्दा… LS में पास नहीं होने दिया महिला आरक्षण बिल

नई दिल्ली। महिला आरक्षण विधेयक (Women’s Reservation Bill) के खिलाफ 230 विपक्षी सांसदों (Opposition MPs) ने वोट किया. लोकसभा (Lok Sabha) में बिल पास नहीं हो सका. इसका असर समझें. भाजपा अब खुल कर कह सकेगी कि हमने महिला हित में अपने प्रयास में कोई कोताही नहीं की. विपक्ष ने ही साथ नहीं दिया. नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने तो यहां तक कहा था कि क्रेडिट भले ले लीजिए, लेकिन इसे पास होने दीजिए. यानी भाजपा अब हमलावर होगी तो विपक्ष बचाव की मुद्रा में रहेगा. विपक्ष कैसे महिलाओं को समझा पाएगा, यह तो विपक्षी रणनीतिकार ही बता पाएंगे. पर, पहली नजर में विपक्ष इस मुद्दे पर फंसा नजर आता है। महिलाएं हित-अहित समझती हैं महिलाएं अब 50 साल पहले वाली नहीं रहीं. शिक्षित होने के साथ ही वे हर क्षेत्र में पुरुषों की बराबरी कर रही हैं. इसे ऐसे समझें। 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र की कामकाजी (रोजगार + स्वरोजगार) महिलाओं की संख्या लगभग 20 करोड़ (200 मिलियन) के आसपास है, (PLFS 2023-24 के अनुसार). यह संख्या महिलाओं की करीब 50-52 प्रतिशत आबादी में से है. जाहिर है कि कामकाजी महिलाएं थोड़ी-बहुत शिक्षित तो होंगी ही .उन्हें महिला हित-अहित की समझ भी होगी। महिलाएं नाराज हो सकती हैं अब जरा इन आंकड़ों पर गौर फरमाएं. 2024 के लोकसभा चुनाव में कुल वोट पड़े थे 64,64,20,869 (लगभग 64.64 करोड़). NDA और INDIA गठबंधन के बीच वोटों का अंतर 1,49,57,501 यानी करीब 1.5 करोड़ का था. NDA को 28,26,68,733 (43.80 प्रतिशत) वोट मिले थे एनडीए ने 293 सीटें जीतीं. विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA को 2,67,71,1,232 (41.48 प्रतिशत) वोट मिले. सफलता मिली 234 पर. भाजपा की सीटें 2024 में घट गईं तो उसने ऐसे ही तरीके खोज कर सुधार की कोशिशें शुरू कर दीं। भाजपा का योजना बद्ध एक्शन 2024 और अभी की स्थितियों में कोई बड़ा फर्क नहीं आया है. सिवा इसके कि भाजपा 2814 और 2019 के मुकाबले 2024 में कमजोर पड़ी, लेकिन उसके बाद हुए राज्यों के चुनाव में भाजपा और उसके नेतृत्व में बना एनडीए लगातार जीतता रहा है. एनडीए की लीडर भाजपा ने अपनी कमजोरी खोज कर 2019 से आगे निकलने की रणनीति पर काम कर रही है. विपक्ष अपवाद छोड़ कर आदतन इसे बढ़ाने के बजाय घटाने की जुगत में ही लगा है। भाजपा महिला बिल को भुनाएगी करीब 4 दशक पहले से ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण की चर्चा चल रही है. किसी को अपने हित और हक की बात समझने के लिए इतना वक्त कम नहीं होता. बिल पेश होने के पहले से ही भाजपा यह संदेश गांव-गांव तक पहुंचाने के अभियान में लग गई है. अब तो वह महिलाओं को यह कह सकेगी कि उसने तो पूरी कोशिश की, पर विपक्ष ने ही पानी फेर दिया. जहां 1.5 करोड़ के अंतर से एनडीए की सरकार बन गई वहां 20-21 करोड़ कामकाजी महिलाओं में 10 प्रतिशत को भी भाजपा ने अपने प्रभाव में ले लिया तो विपक्ष की परेशानी बढ़ सकती है। महिलाएं आरक्षण समझती हैं महिलाएं परिसीमन नहीं समझतीं. पुरुषों की तरह ही उन्हें भी सिर्फ इतनी ही समझ है कि इधर-उधर से कांट-छांट कर एमपी-एमएलए की सीट बढ़ जाएंगी. बहुसंख्यक महिलाओं को सियासी दांव-पेंच से क्या मतलब! अलबत्ता वे इसे अधिक समझेंगी कि आरक्षण बिल पास हो जाने पर सैकड़ा 33 महिलाएं विधानसभा और लोकसभा में बढ़ जातीं. 543 सीटों वाली लोकसभा में अभी 74 (13.6 प्रतिशत) महिला सांसद हैं. महिला आरक्षण बिल पास हो जाने पर यह संख्या दोगुनी से अधिक होने की बाध्यता रहती .विपक्ष ने रोड़ा अंटका दिया। महिलाओं की ताकत सभी जानते विपक्ष महिलाओं की ताकत से अनजान नहीं है. बिहार में नीतीश कुमार के साथ महिलाओं की ताकत का एहसास सभी राजनीतिक दलों को है. जेडीयू की साथी भाजपा भी महिलाओं में उतनी पैठ नहीं बना पाई है. नीतीश ने 2005 से ही महिला वोट बैंक तैयार किया है. यह वोट बैंक इतना मजबूत है कि 2024 के संसदीय चुनाव में जब बड़े-बड़े विश्लेषक और चुनावी पंडित मात खा गए. प्रशांत किशोर भी मात खा गए. जेडीयू में कुछ दिन रहने के बावजूद उन्हें यह भान नहीं हुआ कि नीतीश की असली ताकत आधी आबादी यानी महिलाएं हैं. वे जेडीयू के 5 सीटों पर सिमट जाने की शर्त लगाने लगे. उनके बुढ़ापे का मज़ाक़ उड़ाया जाने लगा. विपक्ष उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से बीमार बनाता-बताता रहा. इसके बावजूद नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने भाजपा से कम पर लड़ कर भाजपा के बराबर लोकसभा की 12 सीटें जीत लीं। राज्यों में दिखी महिलाओं की शक्ति दिल्ली, हरियाणा महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बंगाल और झारखंड के बाद बिहार में भी विधानसभा चुनाव के दौरान महिलाओं की मिली अहमियत उनकी ताकत का इजहार करती है. सबने महिलाओं पर ही दांव लगाया. महिलाओं ने जिन पर ज्यादा भरोसा किया, उन्होंने बाजी मारी ली. बीजेपी ने भी फ्री बीज की रणनीति अपना ली. भाजपा-एनडीए शासित राज्यों में फ्री बीज से एंटी इनकम्बैंसी को प्रो इनकम्बैंसी बदल दिया. ममता और हेमंत सोरेन महिलाओं की बदौलत ही कामयाब हो पाए. नुकसान की समझ होते हुए भी विपक्ष ने यह मौका गंवा दिया. भाजपा के जाल में उलझा विपक्ष भाजपा ने बड़े कायदे से महिला आरक्षण के मुद्दे को भुना लिया. जानिए, कैसे भुनाया. भाजपा जानती थी कि यह बिल इतने विवादों में रहा है कि इसका पास होना आठवां आश्चर्य ही होगा. दूसरे कि भाजपा अपनी 2/3 बहुमत न होने की सच्चाई से भी वाकिफ थी .फिर भी बिल पेश कर दिया और इसे सियासी इवेंट बना दिया. विपक्ष भाजपा की इस चाल को समझ नहीं पाया. भाजपा और मोदी विरोध के नाम पर विपक्ष ने बिल का विरोध कर एक जरूरी काम को नकार दिया। विपक्ष का दांव उल्टा पड़ गया.
PM मोदी का वैश्विक लोकप्रियता में दबदबा कायम… सर्वे में शीर्ष पर बरकरार…

नई दिल्ली। वैश्विक लोकप्रियता सर्वे (Global Popularity Survey) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) अभी भी शीर्ष पर बरकरार हैं। अमेरिकी ओपिनियन रिसर्च इंस्टीट्यूट मॉर्निंग कंसल्ट की ओर से जारी हालिया सर्वेक्षण के नतीजों में यह बात सामने आई है। सर्वे में यह भी कहा गया कि वैश्विक राजनीति में एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) का दबदबा साबित कर दिया है। करीब 24 लोकतांत्रिक देशों में किए गए इस सर्वे में शामिल 70 फीसदी लोगों ने उनके नेतृत्व पर भरोसा जताया है। सर्वेक्षण के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ अन्य वैश्विक नेताओं की तुलना में काफी ऊंचा है। वहीं, दूसरी ओर जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज इस मामले में पिछड़ गए हैं, उन्हें दुनिया का सबसे अलोकप्रिय नेता आंका गया है। इस सूची में दूसरे स्थान पर दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग (63 फीसदी) और तीसरे स्थान पर चेक गणराज्य के प्रधानमंत्री आंद्रेज बाबिस (55 फीसदी) रहे। लेकिन मोदी शीर्ष पर रहे। विज्ञापन मॉर्निंग कंसल्ट के सर्वे में यह भी कहा गया कि एक ओर जहां भारतीय प्रधानमंत्री की वैश्विक स्वीकार्यता और मजबूत हो रही है। वहीं, यूरोप के प्रमुख देशों के नेताओं को जनता के विरोध और अविश्वास का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति की लोकप्रियता का स्तर भी गिर गया है। मैक्रों और ट्रंप की स्थितिलोकप्रियता के मामले में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों दूसरे सबसे अलोकप्रिय नेता हैं, जिनसे 75% जनता असंतुष्ट है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस सूची में नीचे से 10वें स्थान पर हैं। ईरान के साथ संघर्ष जैसी चुनौतियों के बावजूद, लगभग 38% अमेरिकियों ने ट्रंप के कामकाज का समर्थन किया है। बता दें, 2025 में दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता रेटिंग लगभग 47-51% के बीच थी। अप्रैल 2026 तक इसका स्तर -18 के पास पहुंच गया, जिससे वे आधुनिक समय के सबसे कम लोकप्रिय राष्ट्रपतियों में से एक बन गए।
MP: नीमच में ट्रैक पर रखे पत्थरों से टकराई रतलाम-उदयपुर ट्रेन, जोरदार धमाके से अटकी यात्रियों की सांसें …

नीमच। शुक्रवार शाम रतलाम से उदयपुर (Ratlam to Udaipur) जा रही ट्रेन के यात्रियों की सांसें उस वक्त अटक गईं, जब साजिश के तहत ट्रैक पर रखे गए भारी पत्थरों से ट्रेन टकरा गई। तेज रफ्तार ट्रेन के पहियों के नीचे पत्थरों के आने से हुए जोरदार धमाके (Loud bangs) और झटकों से पूरी बोगियां दहल उठीं। गनीमत रही कि ट्रेन की गति अधिक होने के कारण बड़ा हादसा टल गया और इंजन सुरक्षित रहा। घटना के बाद ट्रेन 12 मिनट तक ट्रैक पर खड़ी रही, जिससे यात्रियों में भारी दहशत फैल गई। क्या है पूरा मामलामिली जानकारी के अनुसार रतलाम से शाम 5:10 बजे रवाना हुई उदयपुर सिटी एक्सप्रेस (Udaipur City Express.) जैसे ही नीमच जिले (Neemuch district) के हरकिया खाल क्षेत्र से गुजर रही थी, तभी किसी अज्ञात शरारती तत्व द्वारा मुख्य ट्रैक पर रखे बड़े पत्थरों के ट्रेन से टकराकर चकनाचूर होने से तेज धमाका हुआ। आवाज इतनी जोरदार थी कि आसपास के लोग भी सहम गए। ट्रेन के अचानक झटके से रुकने और तेज धमाके की आवाज सुनकर अंदर बैठे यात्रियों में हड़कंप मच गया। लोग अपनी सीटों से नीचे गिर गए। महिला और बच्चे घबराकर रोने-चिल्लाने लगे। यात्रियों को लगा कि ट्रेन पटरी से उतर गई है या कोई बड़ा धमाका हुआ है। लोको पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए तत्काल इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोक दिया। इसके बाद सुरक्षा की जांच की गई। करीब 12 मिनट की मशक्कत और पटरी के मुआयने के बाद जब सब कुछ सामान्य पाया गया, तब जाकर ट्रेन को आगे रवाना किया गया। इस दौरान यात्रियों की सांसें हलक में अटकी रहीं। सूचना मिलते ही आरपीएफ और स्थानीय पुलिस प्रशासन अलर्ट हो गया है। ट्रैक पर पत्थर किसने रखे और इसके पीछे मंशा क्या थी? यह जांच का विषय है। घटना ने एक बार फिर रेल सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगाला जा रहा है ताकि साजिश रचने वालों की पहचान की जा सके।
अक्षय तृतीया 2026 पर बन रहा अक्षय योग इन 3 राशियों की चमकेगी किस्मत

नई दिल्ली । हर साल वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाने वाला अक्षय तृतीया इस बार विशेष ज्योतिषीय संयोग लेकर आ रहा है। वर्ष 2026 में इस दिन ‘अक्षय योग’ का निर्माण हो रहा है, जिसे अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस योग में सूर्य और चंद्रमा अपनी उच्च राशियों में रहेंगे, जिससे इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। यह स्थिति धन, करियर, शिक्षा और पारिवारिक जीवन में सकारात्मक परिणाम देने वाली मानी जाती है। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार इस शुभ योग का प्रभाव सभी राशियों पर अलग-अलग रूप में पड़ेगा, लेकिन कुछ राशियों के लिए यह विशेष रूप से लाभकारी साबित हो सकता है। सबसे पहले मेष राशि के जातकों के लिए यह समय करियर में उन्नति का संकेत दे रहा है। नौकरी में कार्यों की सराहना होगी और सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा। हालांकि, थोड़ी आर्थिक चुनौतियां सामने आ सकती हैं, लेकिन जीवनसाथी के सहयोग से स्थिति संतुलित रहेगी। इस दौरान स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी होगा। तुला राशि के जातकों के लिए यह समय राहत और खुशियों से भरा रहने वाला है। लंबे समय से चली आ रही परेशानियों में कमी आएगी और परिवार में सुख-शांति का माहौल बनेगा। किसी शुभ समाचार की प्राप्ति हो सकती है और यात्रा या घूमने का अवसर भी मिल सकता है। धनु राशि के लिए यह समय भाग्यवृद्धि का संकेत दे रहा है। कम मेहनत में अच्छे परिणाम मिलने के योग बन रहे हैं। छात्रों को पढ़ाई में सफलता मिलेगी, जबकि जीवनसाथी का सहयोग आत्मविश्वास बढ़ाएगा। आर्थिक स्थिति में सुधार और नए कार्यों की शुरुआत के संकेत भी दिखाई दे रहे हैं। ज्योतिषियों के अनुसार इस अक्षय योग का असर मुख्य रूप से करियर, धन, शिक्षा और पारिवारिक जीवन पर देखने को मिलेगा। आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ-साथ रिश्तों में मधुरता और मानसिक शांति भी बढ़ने की संभावना है। कुल मिलाकर यह समय कई लोगों के लिए नई संभावनाओं और सकारात्मक बदलावों की शुरुआत का संकेत माना जा रहा है।