रवींद्र जडेजा की ट्रेड डील ने राजस्थान रॉयल्स को बनाया खिताब का प्रबल दावेदार, चर्चा में है ₹14 करोड़ का यह सौदा!

नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग 2026 से पहले राजस्थान रॉयल्स और चेन्नई सुपर किंग्स के बीच हुए बड़े खिलाड़ी अदला-बदली सौदे ने क्रिकेट जगत में काफी चर्चा पैदा कर दी है। इस डील के तहत अनुभवी ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा राजस्थान रॉयल्स का हिस्सा बने हैं, जबकि टीम संयोजन में कई अन्य बदलाव भी देखने को मिले हैं। इस कदम के बाद यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या राजस्थान रॉयल्स ने इस निर्णय से दीर्घकालिक लाभ हासिल किया है या यह केवल एक रणनीतिक जोखिम है। रवींद्र जडेजा ने इस सीजन में अब तक ऑलराउंड प्रदर्शन के जरिए अपनी उपयोगिता साबित करने की कोशिश की है। उन्होंने गेंद और बल्ले दोनों से टीम के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कुछ मैचों में उन्होंने मिडिल ओवर्स में विकेट निकालकर विपक्षी टीम की रन गति पर रोक लगाई, जबकि जरूरत पड़ने पर बल्ले से भी उपयोगी पारियां खेली हैं। चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ मुकाबले में जडेजा ने प्रभावी गेंदबाजी करते हुए दो अहम विकेट लिए और टीम को शुरुआती सफलता दिलाई। इसके बाद गुजरात टाइटंस के खिलाफ उन्होंने किफायती गेंदबाजी के साथ-साथ निचले क्रम में नाबाद रहकर टीम को स्थिरता प्रदान की। हालांकि कुछ मैचों में उन्हें सीमित भूमिका मिली, लेकिन उनका अनुभव लगातार टीम के काम आता रहा। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ मैच में जडेजा ने गेंद और बल्ले दोनों से संतुलित प्रदर्शन किया। उन्होंने मिडिल ओवर्स में रन रोकने के साथ एक विकेट हासिल किया और बाद में तेज रन बनाकर टीम की जीत में योगदान दिया। इसी तरह सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ मैच में उन्होंने कठिन परिस्थिति में बल्लेबाजी करते हुए टीम को बड़े संकट से बाहर निकालने की कोशिश की। कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ मुकाबले में भी उनका प्रदर्शन उपयोगी रहा, जहां उन्होंने गेंद से दबाव बनाने के साथ-साथ बल्ले से भी योगदान दिया, हालांकि टीम को करीबी हार का सामना करना पड़ा। राजस्थान रॉयल्स के लिए रवींद्र जडेजा का सबसे बड़ा फायदा उनका तीनों विभागों में संतुलित योगदान माना जा रहा है। वे मध्यक्रम में तेजी से रन बनाने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर पारी को संभालने की क्षमता रखते हैं। उनकी स्पिन गेंदबाजी मिडिल ओवर्स में विपक्षी टीम पर दबाव बनाने में अहम भूमिका निभाती है। इसके अलावा उनकी फील्डिंग भी टीम के लिए बड़ा प्लस पॉइंट है, जहां वे अतिरिक्त रन बचाने के साथ-साथ कई अहम मौके बनाते हैं। उनका अंतरराष्ट्रीय अनुभव टीम के युवा खिलाड़ियों के लिए मार्गदर्शन का काम करता है, जिससे टीम का समग्र प्रदर्शन बेहतर होने की संभावना बढ़ जाती है।
कार्बोहाइड्रेट पर बड़ा भ्रम: क्या इन्हें छोड़ना वाकई जरूरी है? एक्सपर्ट ने बताया सच

नई दिल्ली । आजकल वजन बढ़ने की समस्या तेजी से बढ़ती जीवनशैली से जुड़ी एक आम चुनौती बन चुकी है। इसी कारण लोग वजन घटाने के लिए तरह-तरह के डाइट प्लान अपनाते हैं, जिनमें सबसे आम तरीका कार्बोहाइड्रेट यानी कार्ब्स को पूरी तरह से छोड़ देना माना जाता है। बहुत से लोग यह मान लेते हैं कि रोटी, चावल, ब्रेड या आलू खाने से वजन बढ़ता है और इन्हें बंद कर देने से तेजी से वजन कम किया जा सकता है। लेकिन विशेषज्ञों और विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO की राय इस धारणा को पूरी तरह गलत बताती है। एक्सपर्ट्स के अनुसार कार्बोहाइड्रेट वजन बढ़ाने के लिए जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि असली समस्या उनके प्रकार और मात्रा में होती है। शरीर को ऊर्जा देने वाले मुख्य स्रोतों में कार्बोहाइड्रेट सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इन्हें पूरी तरह बंद कर देना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक आम मिथक है कि सभी कार्बोहाइड्रेट वजन बढ़ाते हैं। वास्तव में शरीर को ऊर्जा, मस्तिष्क को सक्रिय रखने और दिनभर की गतिविधियों के लिए कार्ब्स की आवश्यकता होती है। अगर इन्हें पूरी तरह बंद कर दिया जाए तो शरीर में कमजोरी, थकान, चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। WHO और पोषण विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रिफाइंड और प्रोसेस्ड कार्ब्स जैसे सफेद चीनी, सफेद मैदा, सफेद चावल, बिस्किट और कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन सीमित किया जाए। ये कार्ब्स तेजी से पचते हैं और शरीर में फैट बढ़ाने में योगदान दे सकते हैं। इसके बजाय कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट को डाइट में शामिल करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। कॉम्प्लेक्स कार्ब्स में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो पाचन को धीमा और स्थिर बनाता है। इससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और बार-बार भूख लगने की समस्या कम होती है। यही कारण है कि ये कार्ब्स वजन नियंत्रित करने में मदद करते हैं। साबुत अनाज जैसे गेहूं, जौ, बाजरा, रागी, ब्राउन राइस, दालें और बीन्स को हेल्दी कार्ब्स की श्रेणी में रखा जाता है। इसके अलावा फल जैसे सेब, केला और संतरा, साथ ही सब्जियां, नट्स और बीज भी शरीर को जरूरी पोषण देने के साथ-साथ वजन संतुलन में मदद करते हैं। ये सभी खाद्य पदार्थ शरीर में धीरे-धीरे ऊर्जा छोड़ते हैं और ब्लड शुगर को स्थिर बनाए रखते हैं। विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि केवल कार्बोहाइड्रेट कम करना वजन घटाने का सही तरीका नहीं है। एक संतुलित आहार जिसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और हेल्दी फैट का सही अनुपात हो, वही सबसे प्रभावी माना जाता है। इसके साथ नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद भी बेहद जरूरी है। लंबे समय तक पूरी तरह कार्ब-फ्री डाइट अपनाना न सिर्फ मुश्किल है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए बेहतर तरीका यह है कि प्रोसेस्ड कार्ब्स की जगह हेल्दी और कॉम्प्लेक्स कार्ब्स को रोजमर्रा की डाइट में शामिल किया जाए, जिससे वजन नियंत्रण भी हो और शरीर को जरूरी ऊर्जा भी मिलती रहे।
वैभव सूर्यवंशी की शानदार पारी गई बेकार, मैदान पर छलक आए आंसू तो दिग्गजों ने बढ़ाया हौसला!

नई दिल्ली। कोलकाता नाइट राइडर्स और राजस्थान रॉयल्स के बीच खेले गए रोमांचक मुकाबले के बाद एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने क्रिकेट प्रेमियों को भावुक कर दिया। महज 15 साल के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी मैच खत्म होने के बाद मैदान पर ही भावुक होकर रोते नजर आए। शानदार प्रदर्शन के बावजूद उनकी टीम को हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद उनकी प्रतिक्रिया चर्चा का विषय बन गई। इस मैच में वैभव सूर्यवंशी ने बेहद आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए 28 गेंदों में 46 रनों की तेज पारी खेली। उनकी इस पारी ने राजस्थान रॉयल्स को मजबूत शुरुआत दिलाई और लक्ष्य तक पहुंचने की उम्मीदें भी जगाईं। हालांकि मध्यक्रम के लड़खड़ाने के कारण टीम दबाव में आ गई और मुकाबले में पीछे रह गई। कोलकाता नाइट राइडर्स के गेंदबाजों ने महत्वपूर्ण समय पर विकेट निकालकर मैच का रुख बदल दिया। खासकर स्पिन विभाग ने रन गति पर रोक लगाकर राजस्थान की रन चेज को मुश्किल बना दिया। अंतिम ओवरों में दबाव बढ़ने के साथ टीम लक्ष्य से दूर होती चली गई और मुकाबला उनके हाथ से निकल गया। मैच समाप्त होने के बाद मैदान का माहौल पूरी तरह बदल गया। जहां एक ओर जीतने वाली टीम में खुशी का माहौल था, वहीं दूसरी ओर राजस्थान रॉयल्स के खेमे में निराशा छा गई। इसी दौरान वैभव सूर्यवंशी डगआउट में अकेले बैठे नजर आए और भावुक होकर रोने लगे। उन्होंने अपनी कैप से चेहरा छिपाने की कोशिश की, लेकिन उनकी निराशा साफ झलक रही थी। इस भावुक पल के दौरान खेल भावना का भी एक सकारात्मक उदाहरण देखने को मिला, जब विपक्षी टीम के एक सदस्य ने आगे बढ़कर वैभव को सांत्वना दी और उनका हौसला बढ़ाया। यह दृश्य मैदान पर मौजूद लोगों और दर्शकों के लिए काफी भावुक कर देने वाला रहा। वैभव सूर्यवंशी इस सीजन में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और निडर खेल शैली के लिए लगातार सुर्खियों में रहे हैं। कम उम्र में ही उन्होंने अपने प्रदर्शन से प्रभावित किया है। उनका स्ट्राइक रेट काफी प्रभावशाली रहा है और वे हर मैच में तेजी से रन बनाने की कोशिश करते हैं। हालांकि अपने खेल को लेकर उनकी गंभीरता भी साफ दिखाई देती है। आउट होने के बाद वे अक्सर निराश नजर आते हैं, जिससे यह पता चलता है कि वे अपने प्रदर्शन को लेकर कितने सजग और भावुक हैं। इतनी कम उम्र में इस तरह का समर्पण उनके भविष्य को और मजबूत बनाता है। यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि क्रिकेट सिर्फ जीत और हार का खेल नहीं है, बल्कि इसमें भावनाएं, मेहनत और उम्मीदें भी गहराई से जुड़ी होती हैं। वैभव जैसे युवा खिलाड़ियों के लिए ऐसे अनुभव आगे चलकर सीख और मजबूती का आधार बनते हैं।
आस्था पर शराब का साया, नर्मदा तट पर अवैध कारोबार से उठे बड़े सवाल

मंडला । मध्य प्रदेश के मंडला में बहने वाली नर्मदा नदी के किनारे आज एक चिंताजनक तस्वीर सामने आ रही है जो आस्था और व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े करती है। यह वही पवित्र धरा है जहां हर दिन श्रद्धालु पूजा अर्चना और शांति की तलाश में पहुंचते हैं लेकिन अब इसी आस्था के केंद्र के आसपास अवैध शराब का कारोबार खुलेआम फलता फूलता नजर आ रहा है। कभी इस क्षेत्र की पवित्रता को बनाए रखने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट घोषणा की थी कि नर्मदा तट से पांच किलोमीटर के दायरे में शराब की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। इस फैसले का उद्देश्य था कि आस्था और धार्मिक मर्यादाओं की रक्षा हो सके और नर्मदा किनारे का वातावरण स्वच्छ और पवित्र बना रहे। लेकिन आज यह घोषणा सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आती है। जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। नगर के पान ठेले छोटे दुकानों होटल और ढाबों पर खुलेआम शराब बेची जा रही है। न केवल बिक्री बल्कि लोगों को बैठाकर वहीं शराब पिलाई जा रही है। यह सब इतनी बेखौफी से हो रहा है जैसे नियम कानून का कोई अस्तित्व ही न हो। सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन को यह सब दिखाई नहीं दे रहा या फिर जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह अवैध कारोबार लंबे समय से चल रहा है और कार्रवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकताएं ही की जाती हैं। कभी कभार छापेमारी होती है कुछ बोतलें जब्त होती हैं और फिर सब कुछ पहले जैसा शुरू हो जाता है। यह मामला सिर्फ कानून के उल्लंघन तक सीमित नहीं है बल्कि आस्था के साथ भी सीधा खिलवाड़ है। मंडला की पहचान ही नर्मदा तट की पवित्रता से जुड़ी हुई है। लोग यहां दूर दूर से आते हैं मोक्ष और शांति की कामना लेकर लेकिन जब इसी पवित्र स्थान पर शराब का कारोबार खुलेआम हो तो यह श्रद्धा को ठेस पहुंचाने वाला है। स्थिति यह दर्शाती है कि कहीं न कहीं सिस्टम कमजोर पड़ रहा है या फिर अवैध कारोबार करने वालों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि उन्हें किसी का डर नहीं रह गया है। यह भी सवाल उठता है कि जिम्मेदारी किसकी है प्रशासन की स्थानीय पुलिस की या फिर समाज की जो सब कुछ देखकर भी चुप है। आज जरूरत सिर्फ खबर दिखाने की नहीं बल्कि ठोस कार्रवाई की है। उन वादों को जमीन पर उतारने की है जो कभी जनता से किए गए थे। अगर समय रहते इस पर सख्ती नहीं की गई तो वह दिन दूर नहीं जब आस्था की यह नगरी अपनी पहचान खोने लगेगी। यह मामला केवल एक अवैध कारोबार का नहीं बल्कि आस्था कानून और व्यवस्था तीनों की परीक्षा है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार तंत्र इस चुनौती का सामना कैसे करता है और क्या नर्मदा तट की पवित्रता को फिर से स्थापित किया जा सकेगा या नहीं।
OpenAI में बड़े बदलाव का दौर: कई पावरफुल लीडर्स ने एक साथ दिया इस्तीफा..

नई दिल्ली। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में काम करने वाली प्रमुख कंपनी OpenAI में हाल ही में बड़े स्तर पर नेतृत्व परिवर्तन देखने को मिला है। कंपनी के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है, जिससे टेक्नोलॉजी जगत में हलचल तेज हो गई है। इनमें से कुछ प्रमुख तकनीकी और प्रोडक्ट लीडर्स शामिल हैं, जिन्होंने लंबे समय तक कंपनी के विकास और AI उत्पादों के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह बदलाव केवल व्यक्तिगत निर्णयों तक सीमित नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे कंपनी के भीतर चल रहे व्यापक पुनर्गठन का हिस्सा बताया जा रहा है। पिछले कुछ समय से OpenAI अपने फोकस में बदलाव कर रही है, जहां शोध आधारित मॉडल से आगे बढ़कर व्यावसायिक उपयोग और उत्पाद केंद्रित रणनीति पर जोर दिया जा रहा है। इस बदलाव का सीधा असर कंपनी के लोकप्रिय AI टूल ChatGPT पर भी पड़ने की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में ChatGPT और अन्य AI सेवाएं अधिक व्यावहारिक और व्यावसायिक जरूरतों के अनुरूप विकसित की जाएंगी। इसका उद्देश्य इन तकनीकों को सिर्फ शोध तक सीमित न रखकर रोजमर्रा के उपयोग और बिजनेस सेक्टर में अधिक उपयोगी बनाना है। हाल ही में कंपनी छोड़ने वाले एक वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी ने अपने इस्तीफे को व्यक्तिगत और पेशेवर संतुलन से जुड़ा निर्णय बताया है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम करने के बाद अब वे अपने जीवन में परिवार और व्यक्तिगत प्राथमिकताओं पर ध्यान देना चाहते हैं। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण AI प्रोडक्ट्स के विकास में योगदान दिया था। इसके साथ ही कंपनी में हाल के महीनों में कई अन्य स्तरों पर भी बदलाव देखने को मिले हैं। कुछ वरिष्ठ अधिकारी या तो कंपनी छोड़ चुके हैं या फिर उनकी भूमिकाओं में परिवर्तन किया गया है। साथ ही कुछ रिसर्च यूनिट्स को पुनर्गठित कर अन्य टीमों के साथ मिला दिया गया है, जिससे कंपनी की आंतरिक संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। इन घटनाओं को केवल सामान्य इस्तीफों के रूप में नहीं देखा जा रहा है, बल्कि यह माना जा रहा है कि AI उद्योग एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है। अब कंपनियां ऐसे मॉडल पर ध्यान दे रही हैं जो न केवल तकनीकी रूप से उन्नत हों, बल्कि सीधे तौर पर उपयोगकर्ताओं और व्यवसायों के लिए लाभकारी भी साबित हों। इस बदलाव का असर पूरी AI इंडस्ट्री पर पड़ सकता है, क्योंकि अब फोकस केवल शोध और प्रयोगों से हटकर ऐसे प्रोडक्ट्स पर केंद्रित हो रहा है जो बड़े पैमाने पर उपयोग में लाए जा सकें और आर्थिक रूप से भी मजबूत साबित हों। ChatGPT जैसे प्लेटफॉर्म के लिए यह परिवर्तन एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है, जहां आने वाले समय में यह तकनीक और अधिक उपयोगी, तेज और व्यवसायिक जरूरतों के अनुरूप विकसित हो सकती है।
गर्मियों में आंखों को दें तुरंत राहत, ठंडा कॉटन पैड है सबसे आसान और असरदार उपाय

नई दिल्ली । गर्मियों का मौसम जहां शरीर को थका देता है वहीं आंखों पर भी इसका गहरा असर देखने को मिलता है। तेज धूप गर्म हवा और बढ़ता स्क्रीन टाइम आंखों में जलन सूजन और थकान जैसी समस्याओं को जन्म देता है। मोबाइल कंप्यूटर और लैपटॉप पर घंटों काम करने से आंखें ड्राई हो जाती हैं और उनमें भारीपन महसूस होने लगता है। ऐसे में एक सरल घरेलू उपाय ठंडा कॉटन पैड आंखों को तुरंत राहत देने में बेहद कारगर साबित होता है। आयुर्वेद और स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी आंखों की देखभाल के लिए ठंडे सेक को फायदेमंद मानते हैं। आयुष मंत्रालय द्वारा भी आंखों की थकान और जलन से राहत के लिए ठंडे कॉटन पैड के इस्तेमाल की सलाह दी गई है। यह उपाय पूरी तरह सुरक्षित है और इसे किसी भी उम्र के लोग आसानी से अपना सकते हैं। ठंडे कॉटन पैड का उपयोग करना बेहद आसान है। सबसे पहले चेहरे को साफ पानी से धो लें ताकि धूल और पसीना हट जाए। इसके बाद साफ और मुलायम कॉटन पैड लें और उन्हें ठंडे पानी में भिगो दें। हल्का सा निचोड़कर अतिरिक्त पानी निकाल लें ताकि पैड ज्यादा गीला न हो। फिर आराम से लेट जाएं और आंखें बंद करके दोनों आंखों पर कॉटन पैड रख लें। करीब 10 मिनट तक इसी स्थिति में आराम करें और गहरी सांस लेते रहें। यह ठंडा सेक आंखों की मांसपेशियों को तुरंत आराम देता है और सूजन को कम करता है। साथ ही आंखों में रक्त संचार बेहतर होता है जिससे थकान और भारीपन दूर होता है। अगर चाहें तो पानी में गुलाब जल की कुछ बूंदें मिलाकर इसका उपयोग कर सकते हैं जिससे आंखों को अतिरिक्त ताजगी और सुकून मिलता है। इस उपाय को दिन में एक बार या जरूरत के अनुसार किया जा सकता है। खासकर तब जब आप लंबे समय तक स्क्रीन पर काम कर चुके हों या धूप में रहने के कारण आंखों में जलन हो रही हो। शाम के समय इसे करना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है क्योंकि इस समय आंखों को आराम की जरूरत होती है। हालांकि यह उपाय सामान्य थकान और जलन के लिए बेहद प्रभावी है लेकिन अगर आंखों में लगातार दर्द धुंधलापन या कोई गंभीर समस्या बनी रहती है तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। इसके अलावा ध्यान रखें कि हमेशा साफ कॉटन पैड का इस्तेमाल करें और पानी बहुत ज्यादा ठंडा न हो। इस तरह ठंडा कॉटन पैड एक सरल सस्ता और प्रभावी तरीका है जो गर्मियों में आंखों को राहत देने के साथ उन्हें स्वस्थ बनाए रखने में भी मदद करता है। नियमित उपयोग से आंखें तरोताजा रहती हैं और दिनभर की थकान आसानी से दूर हो जाती है।
Char Dham Yatra 2026: कपाट खुलते ही उमड़ी भीड़, पहले दिन 10 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

नई दिल्ली । Chardham Yatra 2026 की शुरुआत के साथ ही श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक है। गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलते ही पहले दिन ही हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यात्रा के पहले दिन 10 हजार से ज्यादा तीर्थयात्रियों ने दोनों धामों में दर्शन किए, जिससे इस साल भी भारी भीड़ के संकेत मिल गए हैं। अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर 19 अप्रैल को दोनों धामों के कपाट विधि-विधान के साथ खोले गए, जिसके साथ ही चार धाम यात्रा का औपचारिक शुभारंभ हो गया। प्रशासन ने पहले से ही बड़े स्तर पर तैयारियां की थीं, क्योंकि इस बार रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद जताई जा रही है। Chardham Yatra के पहले दिन उमड़ी भारी भीड़कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए भक्त सुबह से ही मंदिरों के बाहर जुटने लगे थे। पहले ही दिन 10 हजार से ज्यादा लोगों का दर्शन करना इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में संख्या और तेजी से बढ़ सकती है। सरकार के मुताबिक, इस बार यात्रा के लिए पहले से ही लाखों लोगों ने रजिस्ट्रेशन करा लिया है, जिससे साफ है कि 2026 की चार धाम यात्रा पिछले वर्षों की तुलना में ज्यादा व्यस्त रहने वाली है। प्रशासन की तैयारी और सुरक्षा व्यवस्थाश्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा, स्वास्थ्य और ट्रैफिक व्यवस्था को मजबूत किया है। रास्तों पर मेडिकल टीम, हेल्प डेस्क और पुलिस बल की तैनाती की गई है, ताकि यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न हो। इसके अलावा भीड़ को नियंत्रित करने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन सिस्टम लागू किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यात्रा को सुरक्षित और सुचारु बनाने के लिए हर जरूरी इंतजाम किए गए हैं। कुल मिलाकर, चार धाम यात्रा 2026 की शुरुआत जोरदार रही है। पहले ही दिन भारी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी यह दिखाती है कि इस साल यात्रा में रिकॉर्ड भीड़ देखने को मिल सकती है।
OTT पर इस वीक मिलेगा एक्शन-थ्रिल का फुल डोज, जानें क्या होगा खास

नई दिल्ली । अगर आप भी इस हफ्ते अपने घर पर ही बैठकर फ़िल्में और सीरीज का मजा उठाना चाहते हैं। तो यह हफ्ता आपके लिए काफी खास हो सकता है। इस हफ्ते आपको OTT पर एक्शन, कॉमेडी और थ्रिल सब कुछ घर पर ही देखने को मिल जाएगा। क्योंकि इस हफ्ते एक से बढ़कर एक फ़िल्में और सीरीज दस्तक देने को तैयार है तो चलिए उनके बारे में जानते हैं। इस हफ्ते OTT पर क्या होगा खासओटीटी पर भी ‘टोस्टर’ (Toaster) और ‘मटका किंग'(Matka King) सहित कई फिल्में और सीरीज बीते सप्ताह रिलीज हुईं। और अब ये वीक भी काफी शानदार है। 24 सीरीजअनिल कपूर अभिनीत एक्शन थ्रिलर शो ’24’ का तीसरा सीजन इस वीक रिलीज होने जा रहा है। इसमें अनिल कपूर एक बार फिर जय सिंह राठौड़ के रोल में नजर आने वाले हैं। उनका यह किरदार देखने के लिए फैंस बड़े ही उत्सुक हैं। इसे दर्शक 24 अप्रैल को Jio Hotstar पर देख सकेंगे। स्ट्रेंजर थिंग्स- टेल्स फ्रॉम ’85’यह सीरीज भी इस वीक की OTT लिस्ट में शामिल है। यह 23 अप्रैल 2026 से Netflix पर स्ट्रीम होगी। यह एक एनिमेटेड साइंस फिक्शन सीरीज है। अगर आपको एनिमेटेड शो पसंद हैं, तो इसे देख सकते हैं। एपेक्सयह एक सर्वाइवल एक्शन थ्रिलर फिल्म है। यह भी इस वीक रिलीज होगी। इसका निर्देशन बाल्टासर कोरमाकुर ने किया है। इसकी स्क्रिप्ट जेरेमी रॉबिन्स ने लिखी है। वहीं, इसमें चार्लीज थेरॉन, टैरोन एगर्टन और एरिक बाना जैसे सितारे हैं। यह 24 अप्रैल 2026 से Netflix पर स्ट्रीम होगी। प्रतिछायायह मलयालम पॉलिटिकल थ्रिलर फिल्म इस साल मार्च में थिएटर्स में रिलीज हुई थी। अब यह ओटीटी पर दस्तक देने जा रही है। इस वीक से दर्शक इसे देख सकेंगे। इस फिल्म में पावर, राजनीति और बदले की दमदार कहानी दिखाई गई है। ये 24 अप्रैल को jio Hotstar पर आएगी।
किचन में कीड़े-मकोड़ों से छुटकारा पाने के लिए अपनाएं ये आसान घरेलू उपाय, केमिकल स्प्रे की जरूरत नहीं

नई दिल्ली: घर की रसोई यानी किचन न सिर्फ खाना बनाने की जगह होती है, बल्कि यह पूरे परिवार की सेहत से जुड़ी सबसे अहम जगह मानी जाती है। यहां जरा सी लापरवाही भी कीड़े-मकोड़ों और कॉकरोच जैसी समस्या को बढ़ा सकती है। नमी, खाने के टुकड़े और गंदगी के कारण किचन में छोटे कीड़े आसानी से पनपने लगते हैं, जो न केवल देखने में असुविधाजनक होते हैं बल्कि कई तरह की बीमारियों का कारण भी बन सकते हैं। आमतौर पर लोग इन्हें भगाने के लिए केमिकल स्प्रे का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इनमें मौजूद हानिकारक तत्व सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। ऐसे में घरेलू और प्राकृतिक उपाय एक सुरक्षित विकल्प साबित हो सकते हैं। किचन में कीड़ों से छुटकारा पाने के लिए प्याज एक असरदार प्राकृतिक उपाय माना जाता है। प्याज की तेज गंध कीड़ों को बिल्कुल पसंद नहीं होती और यह उन्हें दूर रखने में मदद करता है। प्याज का रस निकालकर उसमें थोड़ा बेकिंग सोडा मिलाकर पानी के साथ स्प्रे तैयार किया जा सकता है। इस घोल को किचन के कोनों, सिंक के आसपास और गैस चूल्हे के पीछे छिड़कने से कीड़ों की समस्या कम हो सकती है। लहसुन भी कीड़ों को भगाने में बेहद प्रभावी माना जाता है। इसकी तेज गंध कॉकरोच और अन्य कीड़ों को दूर रखती है। प्याज और लहसुन को मिलाकर तैयार किया गया घोल और उसमें काली मिर्च मिलाकर स्प्रे बनाने से इसका असर और भी बढ़ जाता है। इसे नियमित रूप से इस्तेमाल करने से किचन में कीड़ों की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है। इसके साथ ही किचन की साफ-सफाई का ध्यान रखना सबसे जरूरी है। रात में सिंक में जूठे बर्तन छोड़ना कीड़ों को आकर्षित करता है, इसलिए बर्तन तुरंत साफ करने चाहिए। किचन की सतह पर जमा नमी भी कीड़ों के पनपने का कारण बनती है, इसलिए काम खत्म होने के बाद स्लैब और सिंक को सूखे कपड़े से साफ करना चाहिए। स्वच्छ और सूखा किचन न केवल कीड़ों को दूर रखता है, बल्कि परिवार की सेहत को भी सुरक्षित बनाता है। नियमित सफाई के साथ प्राकृतिक उपाय अपनाकर इस समस्या से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है।
पेट की हर समस्या का देसी इलाज, बेल का शरबत बनाए पाचन मजबूत और शरीर तरोताजा

नई दिल्ली । गर्मियों का मौसम आते ही शरीर पर उसका असर साफ दिखाई देने लगता है। तेज गर्मी और पसीने के कारण जहां एक ओर डिहाइड्रेशन की समस्या बढ़ती है वहीं दूसरी ओर पेट से जुड़ी परेशानियां भी आम हो जाती हैं। अपच गैस कब्ज और पेट फूलने जैसी दिक्कतें लोगों को परेशान करने लगती हैं। ऐसे में अगर आप बाजार के ठंडे और शक्कर से भरपूर पेयों से दूरी बनाकर कोई प्राकृतिक और फायदेमंद विकल्प तलाश रहे हैं तो बेल का शरबत आपके लिए एक बेहतरीन उपाय साबित हो सकता है। बेल का शरबत भारतीय परंपरा में लंबे समय से गर्मियों के लिए एक असरदार पेय माना जाता रहा है। आयुष मंत्रालय भी इसे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी बताता है। बेल में फाइबर प्रोटीन आयरन और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं और पाचन तंत्र को बेहतर करते हैं। अगर आपका पाचन कमजोर है या खाने के बाद पेट में भारीपन महसूस होता है तो बेल का शरबत आपके लिए खास तौर पर फायदेमंद है। इसमें मौजूद फाइबर पाचन क्रिया को दुरुस्त करता है और गैस कब्ज जैसी समस्याओं को दूर करने में मदद करता है। यह पेट को साफ रखता है और आंतों को स्वस्थ बनाए रखता है जिससे भोजन सही तरीके से पच पाता है। गर्मियों में दस्त और डायरिया की समस्या भी काफी देखने को मिलती है। ऐसे में बेल का शरबत एक प्राकृतिक उपचार की तरह काम करता है और शरीर को जल्दी रिकवर करने में मदद करता है। यह शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है और डिहाइड्रेशन से बचाता है। इसके अलावा यह शरीर को ठंडक देने के साथ साथ ऊर्जा भी प्रदान करता है। गर्मी में लगातार पसीना निकलने से शरीर थका हुआ महसूस करता है लेकिन बेल का शरबत पीने से ताजगी बनी रहती है और पूरे दिन एनर्जी महसूस होती है। बेल का शरबत रक्त शुद्धि में भी मदद करता है। यह शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालता है जिससे त्वचा पर भी अच्छा असर पड़ता है और चेहरा साफ और चमकदार दिखाई देता है। इसके नियमित सेवन से कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रहता है और हृदय स्वास्थ्य बेहतर होता है। महिलाओं के लिए भी यह शरबत काफी लाभकारी माना जाता है। विशेष रूप से प्रसव के बाद यह शरीर को पोषण देने और दूध बढ़ाने में सहायक होता है। बेल का शरबत बनाना बेहद आसान है। इसके लिए ताजा बेल का गूदा निकालकर उसे अच्छी तरह मैश कर लें और उसमें ठंडा पानी मिलाएं। स्वाद के लिए काला नमक जीरा पाउडर और शहद या गुड़ डाल सकते हैं। इसे अच्छी तरह मिलाकर ठंडा कर लें और सेवन करें। अगर आप रोजाना सुबह खाली पेट या दोपहर के बाद एक गिलास बेल का शरबत पीते हैं तो इससे पाचन बेहतर रहता है और शरीर पूरे दिन तरोताजा बना रहता है। यह एक सस्ता प्राकृतिक और बेहद असरदार उपाय है जो गर्मियों में सेहत को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।