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726 पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू; क्या आप बनना चाहते हैं तकनीकी शिक्षक?

नई दिल्ली। बिहार तकनीकी सेवा आयोग की ओर से राज्य में तकनीकी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़ी भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है। इस भर्ती के तहत इंस्ट्रक्टर के कुल 726 पदों को भरा जाएगा। आयोग ने इसके लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी करते हुए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 15 अप्रैल से शुरू कर दी है, जो 15 मई तक जारी रहेगी। निर्धारित समय सीमा के भीतर इच्छुक और योग्य उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। इस भर्ती में विभिन्न तकनीकी ट्रेडों के लिए पद शामिल किए गए हैं। इनमें सर्वेक्षण, मशीनिस्ट, फिटर, वेल्डर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैकेनिक, रेडियो और टीवी मैकेनिक, इलेक्ट्रिशियन, वायरमैन, ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग, ट्रैक्टर मैकेनिक और कृषि मशीनरी जैसे कई क्षेत्र शामिल हैं। इन पदों का उद्देश्य राज्य के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में कुशल प्रशिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। आवेदन के लिए उम्मीदवारों के पास संबंधित विषय में आईटीआई, डिप्लोमा या स्नातक की डिग्री होना अनिवार्य रखा गया है। इसके साथ ही कुछ पदों के लिए अनुभव और आवश्यक तकनीकी कौशल भी जरूरी होंगे। आयोग ने स्पष्ट किया है कि केवल पात्र उम्मीदवारों को ही आगे की चयन प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। आयु सीमा के अनुसार न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित की गई है। पुरुष उम्मीदवारों के लिए अधिकतम आयु 37 वर्ष और महिला उम्मीदवारों के लिए 40 वर्ष तय की गई है। आयु की गणना निर्धारित तिथि के अनुसार की जाएगी और आरक्षित वर्ग को नियमों के अनुसार छूट दी जाएगी। चयन प्रक्रिया में ऑनलाइन लिखित परीक्षा, दस्तावेज सत्यापन और चिकित्सा परीक्षण जैसे चरण शामिल होंगे। सभी चरणों को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले उम्मीदवारों को अंतिम चयन सूची में जगह मिलेगी। चयनित उम्मीदवारों को शुरुआती स्तर पर 35,400 रुपये प्रतिमाह वेतन प्रदान किया जाएगा। आवेदन शुल्क सभी वर्गों के लिए समान रखा गया है, जिसे ऑनलाइन माध्यम से जमा करना अनिवार्य होगा। शुल्क जमा किए बिना आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है। उम्मीदवारों को पहले रजिस्ट्रेशन करना होगा, उसके बाद लॉगिन कर आवेदन फॉर्म भरना होगा। सभी व्यक्तिगत और शैक्षणिक विवरण सही तरीके से भरने के बाद आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होंगे। अंत में आवेदन शुल्क जमा कर फॉर्म सबमिट करना होगा और भविष्य के लिए उसका प्रिंट सुरक्षित रखना होगा।

Raw Papaya Benefits : कच्चा पपीता है सेहत का पावरहाउस, सूजन और टॉक्सिन दूर करने में असरदार, जानें सही सेवन तरीका

  Raw Papaya Benefits : नई दिल्ली । पपीता एक ऐसा फल है जिसे सेहत के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है लेकिन जहां पका हुआ पपीता आमतौर पर ज्यादा खाया जाता है वहीं कच्चा पपीता अपने गुणों के कारण उससे भी अधिक प्रभावी माना जाता है। पोषक तत्वों से भरपूर कच्चा पपीता शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाता है और आयुर्वेद में इसे औषधि के रूप में भी देखा जाता है। हालांकि इसके सेवन के दौरान कुछ जरूरी सावधानियों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है। कच्चे पपीते में फाइबर विटामिन सी और कैरोटीनॉयड प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं। इसमें मौजूद पापेन नामक एंजाइम खासतौर पर पाचन तंत्र के लिए बेहद फायदेमंद होता है। यह एंजाइम खाने को खासकर प्रोटीन को तेजी से तोड़ने में मदद करता है जिससे भोजन आसानी से पच जाता है। यही कारण है कि जिन लोगों को गैस अपच या पेट भारी रहने की समस्या होती है उनके लिए कच्चा पपीता एक कारगर उपाय माना जाता है। अगर भोजन के बाद पेट में भारीपन महसूस होता है या भूख कम लगने लगी है तो कच्चे पपीते का सेवन लाभदायक हो सकता है। इसे सब्जी के रूप में खाने से पाचन क्रिया बेहतर होती है और भूख भी बढ़ती है। यह कमजोर पाचन शक्ति को मजबूत बनाने में सहायक है जिससे शरीर को जरूरी पोषण सही तरीके से मिल पाता है। वजन नियंत्रित करने के लिए भी कच्चा पपीता एक अच्छा विकल्प माना जाता है। इसमें कैलोरी कम होती है और फाइबर की मात्रा अधिक होती है जिससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है। इससे ओवरइटिंग की आदत पर नियंत्रण पाने में मदद मिलती है और धीरे-धीरे वजन संतुलित होने लगता है। कच्चा पपीता शरीर की अंदरूनी सूजन को कम करने में भी प्रभावी है। यह शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालने में मदद करता है जिससे रक्त शुद्ध होता है और त्वचा पर भी सकारात्मक असर दिखाई देता है। नियमित और संतुलित मात्रा में सेवन करने से चेहरे पर निखार आता है और शरीर अधिक ऊर्जावान महसूस करता है। महिलाओं के लिए भी कच्चा पपीता लाभकारी माना जाता है क्योंकि यह हॉर्मोन संतुलन में मदद करता है लेकिन इसका सेवन सोच समझकर करना जरूरी है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं या जो महिलाएं गर्भधारण की योजना बना रही हैं उन्हें इसका सेवन डॉक्टर की सलाह के बाद ही करना चाहिए क्योंकि गलत तरीके से सेवन करने पर यह नुकसान भी पहुंचा सकता है। कच्चे पपीते को सीधे खाने के बजाय उबालकर या पकाकर ही सेवन करना बेहतर माना जाता है। इसे सब्जी सूप सलाद या जूस के रूप में लिया जा सकता है लेकिन मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है। अधिक मात्रा में सेवन करने से शरीर पर विपरीत प्रभाव भी पड़ सकता है। इस तरह कच्चा पपीता एक प्राकृतिक औषधि की तरह काम करता है जो पाचन सुधारने से लेकर शरीर को अंदर से साफ करने तक कई फायदे देता है लेकिन इसके लाभ तभी मिलते हैं जब इसे सही तरीके और संतुलित मात्रा में सेवन किया जाए।

somvar vrat : भोलेनाथ को प्रसन्न करने का सरल उपाय, सोमवार व्रत के फायदे और जरूरी नियम जान लें

  somvar vrat : नई दिल्ली । हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और इस दिन रखा गया व्रत विशेष फलदायी बताया गया है। मान्यता है कि जो व्यक्ति सच्ची श्रद्धा और विधि विधान से सोमवार का व्रत करता है उस पर भगवान शिव की विशेष कृपा बनी रहती है और जीवन में सुख समृद्धि के द्वार खुलते हैं। यह व्रत केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं बल्कि मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का भी स्रोत माना जाता है। सोमवार व्रत रखने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इससे मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। चाहे नौकरी में सफलता की इच्छा हो या व्यापार में वृद्धि की कामना इस व्रत को करने से साधक को सकारात्मक परिणाम मिलने लगते हैं। इसके अलावा अविवाहित कन्याएं अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति और शीघ्र विवाह के लिए भी यह व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा विशेष विधि से करनी चाहिए। इस दिन सुबह स्नान के बाद शिवलिंग पर जल चढ़ाना चाहिए और चंदन अक्षत दूध गंगाजल तथा तिल मिलाकर अभिषेक करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके साथ ही महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और व्यक्ति को मानसिक शांति प्राप्त होती है। कहा जाता है कि सूर्योदय के समय शिवलिंग पर गन्ने के रस से अभिषेक करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इसके अलावा इस दिन गरीबों को भोजन कराना और अपनी क्षमता के अनुसार दान करना भी बेहद शुभ माना गया है। शिव मंदिर में रुद्राक्ष दान करना भी भगवान शिव को प्रसन्न करने का एक प्रभावी उपाय माना जाता है। Bijroni Shanti Dham Fire : शिवपुरी में आग लगने से झुलसे 80 से ज़्यादा पेड़, स्मृति में लगाए थे पौधे जहां एक ओर सोमवार व्रत के कुछ विशेष नियम हैं वहीं कुछ बातों का ध्यान रखना भी जरूरी होता है। इस दिन तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए और किसी भी प्रकार का झगड़ा या विवाद नहीं करना चाहिए। शांति और संयम का पालन करना इस व्रत की सफलता के लिए आवश्यक माना जाता है। मान्यता यह भी है कि सोमवार के दिन शक्कर का उपयोग नहीं करना चाहिए और सफेद वस्त्र या दूध का दान करने से बचना चाहिए। इसके अलावा इस दिन पूर्व उत्तर या आग्नेय दिशा में यात्रा करना भी शुभ नहीं माना जाता। भगवान शिव को पीले रंग की मिठाई का भोग नहीं लगाना चाहिए और किसी का अपमान करने से भी बचना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सोमवार व्रत करने से कुंडली में चंद्रमा मजबूत होता है जिससे मानसिक तनाव और चिंता में कमी आती है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है जो मानसिक परेशानियों या अस्थिरता से जूझ रहे हैं। सावन महीने में सोमवार व्रत का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। इस दौरान किया गया व्रत और पूजा कई गुना अधिक फलदायी मानी जाती है। कहा जाता है कि इस समय भगवान शिव अपने भक्तों की हर मनोकामना शीघ्र पूरी करते हैं। इस प्रकार सोमवार व्रत केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि जीवन में संतुलन शांति और सफलता प्राप्त करने का एक सरल और प्रभावी माध्यम भी है। यदि इसे सही नियमों के साथ किया जाए तो इसके परिणाम अत्यंत सकारात्मक और लाभकारी हो सकते हैं।

Bijroni Shanti Dham Fire : शिवपुरी में आग लगने से झुलसे 80 से ज़्यादा पेड़, स्मृति में लगाए थे पौधे

Bijroni Shanti Dham Fire

HIGHLIGHTS: शांति धाम में 80-90 पेड़ आग में झुलसे अज्ञात असामाजिक तत्वों पर आग लगाने का आरोप स्मृति में लगाए गए पौधों को भारी नुकसान ग्रामीणों में आक्रोश, सख्त कार्रवाई की मांग वर्षों की मेहनत और पर्यावरण को बड़ा झटका Bijroni Shanti Dham Fire : ग्वालियर। शिवपुरी जिले के बदरवास जनपद के बिजरोनी गांव स्थित शांति धाम में रविवार को आगजनी की गंभीर घटना सामने आई। बता दें कि अज्ञात असामाजिक तत्वों द्वारा लगाई गई आग में लगभग 80 से 90 पेड़ झुलस गए, जबकि कई अन्य पौधे भी इसकी चपेट में आ गए। कुल 250 पेड़-पौधों में से बड़ी संख्या प्रभावित होने से पूरे क्षेत्र में चिंता का माहौल है। UPI और दक्षिण कोरियाई पेमेंट सिस्टम के बीच ऐतिहासिक करार, लेन-देन होगा अब और भी आसान! वर्षों की मेहनत पर फिरा पानी ग्रामीणों ने बताया कि शांति धाम को वर्षों की मेहनत और समर्पण से विकसित किया गया था। यहां अंतिम संस्कार के बाद दिवंगत व्यक्तियों की स्मृति में एक-एक पेड़ लगाने की परंपरा शुरू की गई थी। इस अनूठी पहल ने इस स्थान को भावनात्मक और पर्यावरणीय दृष्टि से बेहद खास बना दिया था। सेंसेक्स और निफ्टी में ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति: विदेशी तनाव के चलते सुरक्षित निवेश की तलाश में निवेशक, छोटे शेयरों में गिरावट ने बिगाड़ा बाजार का मूड! युवाओं और ग्रामीणों की मेहनत पर चोट गांव के युवाओं और स्थानीय निवासियों ने मिलकर यहां सैकड़ों पौधे लगाए थे और उनकी नियमित देखभाल भी की जाती थी। धीरे-धीरे यह मुक्तिधाम हरे-भरे परिसर में बदल गया था, जो अब आगजनी के कारण क्षतिग्रस्त हो गया है। इस घटना से लोगों में गहरा आक्रोश है। घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल जांच कर दोषियों की पहचान करने और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यह सिर्फ पेड़ों का नुकसान नहीं, बल्कि भावनाओं और परंपरा पर हमला है। एक मशहूर अभिनेत्री जिसने परिवार को दी प्राथमिकता, और बॉलीवुड को ‘करिश्मा-करीना’ के रूप में दी सबसे बड़ी विरासत! पर्यावरण और भावनाओं को दोहरी चोट इस आगजनी से न केवल हरियाली को नुकसान हुआ है, बल्कि उन परिवारों की भावनाएं भी आहत हुई हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों की स्मृति में ये पौधे लगाए थे। ग्रामीणों का कहना है कि दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।  

Bank Heist news : सिंगरौली में 15 करोड़ की दिनदहाड़े डकैती, सुरक्षा में 3 बड़ी चूक से बदमाश हुए फरार

  Bank Heist news : सिंगरौली । मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में हुई 15 करोड़ रुपए की सनसनीखेज बैंक डकैती ने सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। बैढ़न स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र की शाखा में दिनदहाड़े पांच हथियारबंद बदमाश घुसे और करीब 10 किलो सोना व 20 लाख रुपए नकद लूटकर फरार हो गए। इस वारदात ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी है और पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में पुलिस ने एक आरोपी कमलेश कुमार को गिरफ्तार किया है, जिसे आठ दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है। हालांकि लूट का पूरा माल अभी बरामद नहीं हो सका है। पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी फंटूश उर्फ ननकी बिहार के नालंदा जिले का रहने वाला है जबकि अन्य आरोपी झारखंड और अन्य क्षेत्रों से जुड़े हैं। फरार आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस की 10 विशेष टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। डकैती की घटना के पीछे सबसे बड़ी बात तीन गंभीर लापरवाहियां मानी जा रही हैं। पहली यह कि बैंक में शुरुआत से ही कोई सुरक्षा गार्ड तैनात नहीं था। वर्ष 2018 में खुली इस शाखा में कभी गार्ड नहीं रखा गया। बैंक प्रबंधन ने खर्च कम करने के नाम पर यह व्यवस्था खत्म कर दी थी। इससे बदमाशों को वारदात को अंजाम देने में आसानी मिली। दूसरी बड़ी चूक पुलिस की प्रतिक्रिया में देरी को लेकर सामने आई है। घटना की सूचना मिलने के बावजूद पुलिस मौके पर करीब 20 मिनट की देरी से पहुंची जबकि थाना बैंक से महज डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर है। इस देरी का फायदा उठाकर आरोपी आसानी से फरार हो गए। तीसरी और अहम लापरवाही यह रही कि शहर के चेक पॉइंट्स को समय पर अलर्ट नहीं किया गया। सीसीटीवी फुटेज में बदमाशों को बाइक से शहर से बाहर जाते हुए देखा गया लेकिन वे मस्जिद तिराहा और अंबेडकर चौक जैसे प्रमुख चेक पॉइंट पार कर गए और किसी ने उन्हें नहीं रोका। इसके बाद वे बीजपुर रोड होते हुए छत्तीसगढ़ सीमा में प्रवेश कर गए। घटना के बाद बैंक के सुरक्षा इंतजामों की पोल और भी खुली जब यह सामने आया कि बैंक में लगा अलार्म सिस्टम भी सिर्फ औपचारिकता भर था। अलार्म बजने पर भी कोई त्वरित मदद नहीं मिलती क्योंकि वह पुलिस कंट्रोल रूम से जुड़ा नहीं है। इस बीच गिरफ्तार आरोपी कमलेश कुमार को रेलवे स्टेशन पर शक के आधार पर पकड़ा गया। उसके पास से 15 लाख 20 हजार रुपए और 61 ग्राम सोना बरामद हुआ। पूछताछ में उसने पहले पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की लेकिन सख्ती के बाद उसने डकैती में शामिल होने की बात कबूल कर ली। पुलिस अब अन्य फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है और पड़ोसी राज्यों की पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई कर रही है। इस घटना ने न केवल बैंकिंग सुरक्षा व्यवस्था बल्कि पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Salman Khan film controversy : सलमान खान की वो ब्लॉकबस्टर जिसने पर्दे पर मचाया धमाल, मगर पर्दे के पीछे विवादों ने नहीं छोड़ा पीछा!

   Salman Khan film controversy : नई दिल्ली। बॉलीवुड की कई सफल फिल्मों के पीछे सिर्फ ग्लैमर और सफलता ही नहीं, बल्कि कई बार ऐसे किस्से भी जुड़े होते हैं जो समय के साथ सामने आते हैं और इंडस्ट्री को हिला देते हैं। ऐसी ही एक फिल्म रही चोरी चोरी चुपके चुपके, जिसमें सलमान खान, रानी मुखर्जी और प्रीति जिंटा मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट साबित हुई, लेकिन इसके निर्माण से जुड़ी कुछ विवादित चर्चाएं लंबे समय तक सुर्खियों में बनी रहीं। फिल्म के निर्माण को लेकर उस दौर में यह चर्चा सामने आई थी कि इसके वित्तीय प्रबंधन और प्रोडक्शन प्रक्रिया में कुछ ऐसे संपर्क शामिल थे जिन पर बाद में सवाल उठे। बताया जाता है कि फिल्म की शुरुआत के दौरान एक व्यक्ति ने सलमान खान की डेट्स को लेकर दावा किया था, जिसके आधार पर प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया गया। बाद में जैसे जैसे फिल्म पर काम आगे बढ़ा, वैसे वैसे इसके वित्तीय ढांचे को लेकर कई तरह की बातें सामने आने लगीं। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब फिल्म से जुड़े कुछ लेनदेन और संपर्कों को लेकर संदेह जताया गया। उस समय इंडस्ट्री में यह भी चर्चा रही कि कुछ बाहरी दबाव और अनौपचारिक मांगों ने माहौल को जटिल बना दिया था। इसी दौरान जांच और कानूनी कार्रवाई जैसी स्थितियां भी बनीं, जिसने पूरे मामले को और विवादित बना दिया। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर फिल्म इंडस्ट्री के कुछ लोगों ने बाद में यह संकेत दिए कि उस दौर में फिल्म निर्माण और फाइनेंसिंग के क्षेत्र में पारदर्शिता की कमी के कारण कई प्रोजेक्ट्स प्रभावित होते थे। हालांकि फिल्म की शूटिंग और निर्माण अंततः पूरा हुआ और यह बड़े पर्दे पर रिलीज भी हुई। 2001 में रिलीज हुई इस फिल्म का निर्देशन अब्बास मस्तान ने किया था। रोमांटिक कॉमेडी शैली में बनी यह फिल्म दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय रही और इसने बॉक्स ऑफिस पर मजबूत प्रदर्शन किया। करीब 13 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने लगभग 37 करोड़ रुपये की कमाई की, जिससे यह उस साल की सफल फिल्मों में शामिल हो गई। फिल्म की सफलता का मुख्य कारण इसकी मनोरंजक कहानी, कलाकारों की केमिस्ट्री और हल्के फुल्के अंदाज में पेश किया गया कथानक था। दर्शकों ने इसे खूब पसंद किया, लेकिन इसके निर्माण से जुड़ी चर्चाएं इसे लंबे समय तक विवादों में भी बनाए रखती हैं। यह फिल्म आज भी इस बात का उदाहरण मानी जाती है कि बॉलीवुड की चमकदार दुनिया के पीछे कई बार ऐसी परतें भी होती हैं जो समय के साथ धीरे धीरे सामने आती हैं और दर्शकों को हैरान कर देती हैं।

digital payments India : UPI और दक्षिण कोरियाई पेमेंट सिस्टम के बीच ऐतिहासिक करार, लेन-देन होगा अब और भी आसान!

   digital payments India : नई दिल्ली। भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली UPI अब एक और बड़े देश में अपनी पहुंच बनाने जा रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तहत भारत और दक्षिण कोरिया ने अपने-अपने इलेक्ट्रॉनिक भुगतान सिस्टम को जोड़ने पर सहमति जताई है। इस पहल के बाद भारतीय नागरिक जल्द ही दक्षिण कोरिया में भी अपने UPI आधारित ऐप्स के जरिए आसानी से भुगतान कर सकेंगे, जिससे विदेशी यात्रा और लेनदेन पहले से अधिक सरल हो जाएंगे। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के लोकल QR कोड आधारित भुगतान सिस्टम को आपस में जोड़ना है। इसका सीधा फायदा यात्रियों, छात्रों और कामकाजी लोगों को मिलेगा, जो एक देश से दूसरे देश में जाते समय डिजिटल भुगतान की सुविधा का उपयोग कर सकेंगे। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद भारतीय उपयोगकर्ता दक्षिण कोरिया में वहां के QR कोड स्कैन कर अपने UPI ऐप से सीधे भुगतान कर सकेंगे। इसी तरह दक्षिण कोरिया के नागरिक भारत में भी इसी सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। यह पहल डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके तहत तकनीकी एकीकरण, सुरक्षा मानक, मुद्रा विनिमय और संचालन व्यवस्था जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर काम किया जाएगा। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही यह सुविधा आम उपयोगकर्ताओं के लिए पूरी तरह से उपलब्ध हो पाएगी। भारत में UPI पहले से ही डिजिटल लेनदेन का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है। देश के भीतर इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है और अब इसका अंतरराष्ट्रीय विस्तार इसे वैश्विक पहचान दिला रहा है। इस कदम से भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है और नकद रहित लेनदेन को और अधिक बढ़ावा मिलेगा। डिजिटल भुगतान के अलावा इस समझौते के दौरान दोनों देशों ने आपसी सहयोग के अन्य क्षेत्रों पर भी चर्चा की है। इनमें सांस्कृतिक आदान-प्रदान, शिक्षा, तकनीकी सहयोग और रचनात्मक उद्योग शामिल हैं। दोनों देशों ने फिल्म, संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से लोगों के बीच संबंध मजबूत करने पर सहमति जताई है, जिससे आपसी समझ और सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही दोनों देशों ने व्यापारिक संबंधों को भी विस्तार देने का लक्ष्य तय किया है। आने वाले वर्षों में व्यापार को दोगुना करने की दिशा में काम किया जाएगा। इसके लिए एआई, सेमीकंडक्टर, जहाज निर्माण और वित्तीय तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है। इस डिजिटल पेमेंट एकीकरण को एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, क्योंकि इससे न केवल अंतरराष्ट्रीय यात्रा आसान होगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की फिनटेक क्षमता भी मजबूत होगी। यह पहल भविष्य में अन्य देशों के साथ भी इसी तरह के समझौतों का रास्ता खोल सकती है।

Stock Market India : ब्रोकरेज ने जताया 64 रुपये के टारगेट का भरोसा; क्या अब मल्टीबैगर रिटर्न के लिए तैयार हैं निवेशक?

   Stock Market India : नई दिल्ली।विंड एनर्जी सेक्टर की प्रमुख कंपनी सुजलॉन एनर्जी के शेयरों में हाल के दिनों में तेज रफ्तार देखने को मिली है। लगातार खरीदारी के चलते स्टॉक में मजबूत तेजी बनी हुई है और निवेशकों का रुझान इस ओर बढ़ा है। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में शेयर में लगभग 20 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई है, जबकि एक महीने के भीतर इसमें करीब 28 प्रतिशत तक की तेजी देखने को मिली है। हाल के कारोबारी सत्र में शेयर लगभग 53 रुपये के स्तर पर बंद हुआ, जिससे बाजार में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह आगे चलकर 64 रुपये के स्तर को पार कर सकता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी में आई यह तेजी केवल अल्पकालिक नहीं है, बल्कि इसके पीछे सेक्टर की मजबूत संभावनाएं भी अहम भूमिका निभा रही हैं। ब्रोकरेज हाउस जेएम फाइनेंशियल ने सुजलॉन एनर्जी पर अपनी BUY रेटिंग को बरकरार रखते हुए अगले 12 महीनों के लिए 64 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है। रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा स्तर से शेयर में लगभग 30 प्रतिशत तक की अतिरिक्त बढ़त की संभावना बनी हुई है। इसके पीछे मुख्य कारण भारत में तेजी से बढ़ती बिजली की मांग और नवीकरणीय ऊर्जा पर सरकार का बढ़ता फोकस माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार विंड एनर्जी सेक्टर आने वाले समय में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, खासकर तब जब सोलर और गैस आधारित ऊर्जा उत्पादन दिन के कुछ समय तक सीमित रहता है। शाम और रात के समय बिजली की मांग को पूरा करने में विंड एनर्जी एक मजबूत विकल्प के रूप में उभर रही है, जिससे इस सेक्टर की कंपनियों को फायदा मिल सकता है। सरकारी स्तर पर भी विंड एनर्जी क्षमता बढ़ाने पर लगातार काम किया जा रहा है। आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर नए प्रोजेक्ट्स शुरू होने की संभावना है, जिससे इस क्षेत्र में निवेश और विस्तार दोनों को बढ़ावा मिलेगा। इससे कंपनियों की ऑर्डर बुक मजबूत होने और उत्पादन क्षमता में सुधार की उम्मीद है। कंपनी के प्रदर्शन में हाल के समय में सुधार देखने को मिला है। प्रोजेक्ट्स के निष्पादन और डिलीवरी में तेजी आई है, जिससे पहले की तुलना में कामकाज अधिक सुचारू हुआ है। इससे कंपनी के कैश फ्लो में सुधार और नए ऑर्डर्स मिलने की संभावना भी बढ़ी है। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि सुजलॉन के शेयर की दिशा आगे चलकर पूरी तरह से रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की मांग, सरकारी नीतियों और वैश्विक ऊर्जा परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। यदि सेक्टर में मौजूदा रफ्तार बनी रहती है, तो शेयर में आगे और मजबूती देखने को मिल सकती है।

son killed father : रिश्तों पर भारी पड़ा पैसा: बड़वानी के पिछोड़ी में बेटे ने पिता के सिर में मारी गोली

son killed father : बड़वानी । मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले से एक ऐसी सनसनीखेज वारदात सामने आई है जिसने पिता-पुत्र के पवित्र रिश्ते को लहूलुहान कर दिया है। जिला मुख्यालय के समीपस्थ ग्राम पिछोड़ी में एक कलयुगी बेटे ने महज चंद रुपयों के लालच और विवाद में अपने ही पिता के सिर में गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। जिस पिता ने बेटे के बेहतर भविष्य के लिए अपनी जमा-पूंजी दांव पर लगा दी उसी बेटे ने आवेश में आकर पिता की जीवनलीला समाप्त कर दी। सोमवार 20 अप्रैल की दोपहर हुई इस घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत और मातम का माहौल है। मिली जानकारी के अनुसार पुलिस को सोमवार दोपहर फोन के जरिए सूचना मिली थी कि ग्राम पिछोड़ी में एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस की टीम तत्काल घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस ने मौके का बारीकी से निरीक्षण किया और शव का पंचनामा तैयार कर मामले की जांच शुरू की। इस दौरान पुलिस को जो सच्चाई पता चली उसने अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। इस जघन्य हत्याकांड की चश्मदीद गवाह कोई और नहीं बल्कि मृतक की पत्नी और आरोपी की मां गौरी बाई हैं। Raw Papaya Benefits : कच्चा पपीता है सेहत का पावरहाउस, सूजन और टॉक्सिन दूर करने में असरदार, जानें सही सेवन तरीका गौरी बाई ने रोते हुए पुलिस को बताया कि उनके 32 वर्षीय बेटे चंदन बडोले ने अपने 58 वर्षीय पिता जगन बडोले की हत्या की है। मां के अनुसार पिता और पुत्र के बीच पिछले कुछ समय से रुपयों के लेनदेन को लेकर तनाव चल रहा था। सोमवार को भी इसी बात को लेकर विवाद शुरू हुआ। देखते ही देखते बहस इतनी बढ़ गई कि दोनों के बीच मारपीट होने लगी। इसी बीच गुस्से में आपा खो चुके चंदन ने पास रखी पिस्तौल निकाली और सीधे अपने पिता के सिर पर गोली दाग दी। गोली लगते ही जगन बडोले लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़े और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। शहर कोतवाली थाना प्रभारी बलजीत सिंह बिसेन ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि शुरुआती जांच और मृतक की पत्नी के बयानों से यह स्पष्ट है कि विवाद की मुख्य वजह पैसा थी। मृतक जगन बडोले ने पहले भी अपने बेटे चंदन को वेल्डिंग की दुकान चलाने और अन्य जरूरतों के लिए दो लाख रुपये दिए थे। बावजूद इसके चंदन की मांगें कम नहीं हो रही थीं। वह लगातार और पैसों के लिए अपने पिता पर दबाव बना रहा था। सोमवार को जब पिता ने और पैसे देने से मना किया तो आरोपी ने इस खौफनाक वारदात को अंजाम दे दिया। Stock Market India : ब्रोकरेज ने जताया 64 रुपये के टारगेट का भरोसा; क्या अब मल्टीबैगर रिटर्न के लिए तैयार हैं निवेशक? पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा जहाँ की प्रारंभिक रिपोर्ट में भी सिर पर गंभीर चोट और गोली लगने के कारण मौत होने की पुष्टि हुई है। थाना प्रभारी बिसेन ने बताया कि आरोपी चंदन बडोले वारदात को अंजाम देने के बाद से ही फरार है। पुलिस की अलग-अलग टीमें उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और जल्द ही आरोपी को सलाखों के पीछे भेजने का दावा किया है। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जब रिश्तों के बीच लालच की दीवार खड़ी होती है तो वहां केवल खून और पछतावा ही शेष बचता है।

Babita Kapoor : एक मशहूर अभिनेत्री जिसने परिवार को दी प्राथमिकता, और बॉलीवुड को ‘करिश्मा-करीना’ के रूप में दी सबसे बड़ी विरासत!

  Babita Kapoor : नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर में कई ऐसी अभिनेत्रियां रहीं जिन्होंने कम समय में ही अपनी मजबूत पहचान बना ली थी। इन्हीं में से एक नाम बबीता का है, जिन्होंने अपने अभिनय और स्क्रीन प्रेजेंस से दर्शकों के बीच खास जगह बनाई। 20 अप्रैल 1947 को कराची में जन्मी बबीता का बचपन फिल्मी माहौल में ही बीता, क्योंकि उनके परिवार का संबंध पहले से ही सिनेमा जगत से था। इसी कारण बहुत कम उम्र में उन्होंने फिल्मों की दुनिया में कदम रख दिया और शुरुआती दौर से ही अपनी प्रतिभा का परिचय देने लगीं। बबीता ने अपने करियर में उस दौर के बड़े सितारों के साथ काम किया और कई चर्चित फिल्मों का हिस्सा बनीं। उन्होंने राजेश खन्ना, जितेंद्र और शशि कपूर जैसे सुपरस्टार्स के साथ स्क्रीन साझा की और अपनी भूमिकाओं से दर्शकों का ध्यान खींचा। उनके किरदारों में रोमांस, पारिवारिक भावनाएं और हल्की कॉमेडी का सुंदर मिश्रण देखने को मिलता था, जिससे वे उस समय की लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शामिल हो गईं। उनकी अभिनय शैली सहज और प्रभावशाली मानी जाती थी, जिसने उन्हें इंडस्ट्री में एक अलग पहचान दी। फिल्मी करियर के दौरान बबीता ने कई सफल फिल्मों में काम किया और धीरे-धीरे अपनी जगह मजबूत की। हालांकि उनका यह सफर अपेक्षाकृत छोटा रहा, लेकिन इस दौरान उन्होंने अपनी छाप छोड़ दी। करियर के चरम पर पहुंचने के बाद उनकी निजी जिंदगी ने एक नया मोड़ लिया, जिसने उनके पेशेवर जीवन को पूरी तरह बदल दिया। उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव तब आया जब उनकी मुलाकात रणधीर कपूर से हुई। दोनों ने एक साथ काम किया और यहीं से उनके रिश्ते की शुरुआत हुई। बाद में दोनों ने विवाह कर लिया। शादी के बाद बबीता ने फिल्मों से दूरी बनाने का फैसला किया और अपने परिवार को प्राथमिकता दी। उस समय पारिवारिक परंपराओं और व्यक्तिगत निर्णयों के चलते उन्होंने अभिनय की दुनिया को छोड़ दिया। शादी के बाद उनका जीवन पूरी तरह परिवार केंद्रित हो गया। समय के साथ कपूर परिवार को आर्थिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा, क्योंकि रणधीर कपूर का करियर अपेक्षित गति नहीं पकड़ सका। ऐसे समय में बबीता ने परिवार को संभालने और घर की जिम्मेदारियों को मजबूती से निभाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद परिवार को स्थिर बनाए रखा। बबीता की सबसे बड़ी भूमिका उनकी बेटियों करिश्मा कपूर और करीना कपूर खान के जीवन में देखी जाती है। दोनों बेटियां आगे चलकर हिंदी सिनेमा की बड़ी और सफल अभिनेत्रियां बनीं। उनकी परवरिश और मार्गदर्शन में बबीता का महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। उन्होंने अपनी बेटियों को सही दिशा दी और उन्हें आत्मनिर्भर और सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई। बबीता की कहानी इस बात का उदाहरण है कि फिल्मी दुनिया की चमक के पीछे कई बार व्यक्तिगत फैसले और त्याग भी छिपे होते हैं। उन्होंने अपने करियर को छोड़कर परिवार को प्राथमिकता दी और अपनी बेटियों के भविष्य को संवारने में खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया।