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भीषण गर्मी के बीच स्कूल टाइम बदला, सिवनी में पारा 41 डिग्री पार

नई दिल्ली। सिवनी जिले में गर्मी ने अप्रैल में ही मई-जून जैसे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। रविवार को अधिकतम तापमान 41.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस सीजन में पहली बार 40 के पार पहुंचा। तेज धूप और उमस भरी गर्मी के चलते आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बाजारों में ठंडे पेय और रसीले फलों की मांग बढ़ गई है, वहीं अस्पतालों में हीट-वेव से प्रभावित मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है। डॉक्टरों ने लोगों को दोपहर के समय बाहर निकलने से बचने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी है। लू का अलर्ट, आने वाले दिनों में और बढ़ेगी तपिशमौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में लू चलने की संभावना है, जिससे तापमान में और वृद्धि हो सकती है। 19 अप्रैल को अधिकतम तापमान 41.2°C और न्यूनतम 20.6°C दर्ज किया गया। सुबह से ही तेज धूप लोगों को परेशान कर रही है, हालांकि रात के समय तापमान में थोड़ी गिरावट से कुछ राहत मिल रही है। पिछले कुछ दिनों में भी तापमान लगातार 40 डिग्री के आसपास बना हुआ है, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि गर्मी का असर अभी और बढ़ेगा। स्कूलों के समय में बदलाव, बच्चों को राहतभीषण गर्मी को देखते हुए कलेक्टर नेहा मीना ने स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला लिया है। नए आदेश के तहत नर्सरी (प्ले ग्रुप) से लेकर कक्षा 12वीं तक के सभी शासकीय, अशासकीय, नवोदय, सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के स्कूल अब सुबह 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक संचालित होंगे। हालांकि परीक्षाएं पहले से तय समय के अनुसार ही होंगी। इस निर्णय से बच्चों को तेज धूप और लू के असर से काफी राहत मिलेगी। लगातार बढ़ रहा तापमान, सतर्क रहने की जरूरतपिछले पांच दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो तापमान लगातार बढ़ रहा है 15 अप्रैल को 39.6°C, 16 और 17 अप्रैल को 40.4°C, 18 अप्रैल को 40.0°C और 19 अप्रैल को 41.2°C दर्ज किया गया। इससे साफ है कि जिले में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग लोगों से सतर्क रहने और जरूरी एहतियात बरतने की अपील कर रहे हैं।

वैश्विक तनाव बेअसर भारतीय दवाओं की बढ़ी मांग ,इंदौर के पीथमपुर एसईजेड ने बनाया रिकॉर्ड

इंदौर । वैश्विक तनाव और मिडिल ईस्ट संकट के बावजूद भारत की फार्मा इंडस्ट्री ने अपनी मजबूती एक बार फिर साबित कर दी है। मध्यप्रदेश के पीथमपुर स्थित स्पेशल इकोनॉमिक जोन की फार्मा कंपनियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जेनेरिक दवाओं के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिडिल ईस्ट संकट और व्यापारिक नीतियों में बदलाव जैसी चुनौतियां सामने हैं। वाणिज्यिक और उद्योग विभाग के अंतर्गत आने वाले मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम की रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच पीथमपुर एसईजेड से कुल 14302 करोड़ रुपए से अधिक का निर्यात हुआ है। यह पिछले वर्ष की तुलना में करीब 10.46 प्रतिशत अधिक है जो इस क्षेत्र की लगातार बढ़ती क्षमता को दर्शाता है। खास बात यह है कि इस एसईजेड में लगभग 70 से 80 प्रतिशत कंपनियां फार्मा सेक्टर से जुड़ी हुई हैं। यहां निर्मित जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति दुनिया के कई बड़े बाजारों में की जा रही है जिनमें अमेरिका जर्मनी ऑस्ट्रेलिया यूनाइटेड किंगडम और खाड़ी देश शामिल हैं। इन दवाओं की बढ़ती मांग का सबसे बड़ा कारण इनकी किफायती कीमत और विश्वसनीय गुणवत्ता है। भारत में बनी जेनेरिक दवाएं ब्रांडेड दवाओं के मुकाबले 30 से 40 प्रतिशत तक सस्ती होती हैं जिससे वैश्विक बाजार में इनकी प्रतिस्पर्धा क्षमता काफी मजबूत हो जाती है। भारत को लंबे समय से फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड कहा जाता रहा है और इसका कारण यही है कि यहां कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाली दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। अब वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत और बीमा कंपनियों के दबाव के चलते कई देश सस्ती दवाओं की ओर रुख कर रहे हैं। यही वजह है कि भारतीय फार्मा कंपनियों को बड़े पैमाने पर ऑर्डर मिल रहे हैं। दिलचस्प बात यह भी है कि कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां अब भारत में कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग के जरिए दवाएं बनवा रही हैं और उन्हें अपने ब्रांड नाम से अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेच रही हैं। इससे न केवल भारतीय कंपनियों को फायदा हो रहा है बल्कि देश की निर्यात क्षमता भी लगातार बढ़ रही है। हालांकि इस सकारात्मक स्थिति के बीच कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं। मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और समुद्री मार्गों पर असर के कारण शिपमेंट में देरी हो रही है। कंटेनर समय पर रवाना नहीं हो पा रहे हैं जिससे सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध जैसी परिस्थितियों का असर लॉजिस्टिक्स पर पड़ता है लेकिन मांग बनी रहने के कारण निर्यात में गिरावट नहीं आई है। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में यदि वैश्विक हालात सामान्य होते हैं तो भारतीय जेनेरिक दवाओं का निर्यात और तेजी से बढ़ सकता है। कुल मिलाकर यह स्पष्ट है कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद मेड इन इंडिया फार्मा सेक्टर वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है और आगे भी इसके विस्तार की पूरी संभावनाएं हैं।

बढ़ते पारे के बीच 'पाती' के जरिए सीधे जनता से जुड़े सीएम योगी; सुरक्षा के लिए जारी किए कड़े निर्देश!

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में तापमान लगातार बढ़ रहा है और भीषण गर्मी का असर जनजीवन पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। इस स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों के नाम एक विशेष पाती जारी कर लोगों से सावधानी बरतने और स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की अपील की है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि बदलते मौसम के इस दौर में सतर्कता और तैयारी ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है, जिससे लू और गर्मी के दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि प्रकृति का चक्र निरंतर चलता रहता है और हर ऋतु अपने साथ अलग परिस्थितियां लेकर आती है। इस समय ग्रीष्म ऋतु अपने चरम की ओर बढ़ रही है और तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि जैसे सर्दी के मौसम में बचाव के उपाय किए जाते हैं, वैसे ही गर्मी के मौसम में भी व्यापक तैयारियां आवश्यक हैं। सरकार की ओर से आमजन की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बढ़ती गर्मी के कारण बिजली की मांग में भी तेजी आई है, जिसे ध्यान में रखते हुए पर्याप्त विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है। उत्पादन इकाइयों को उनकी पूरी क्षमता से संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि प्रदेश के किसी भी हिस्से में बिजली की कमी न हो। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि गर्मी के मौसम में श्रमिकों और खुले में काम करने वाले लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। कार्यस्थलों पर छाया, पेयजल और प्राथमिक स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। लू और गर्मी से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं ताकि लोग समय रहते आवश्यक सावधानियां अपना सकें। उन्होंने आगे बताया कि सार्वजनिक स्थानों जैसे सरकारी कार्यालयों, अस्पतालों, थानों और अन्य केंद्रों पर ठंडे और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही अस्पतालों में हीट स्ट्रोक से प्रभावित मरीजों के लिए विशेष चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं ताकि आपात स्थिति में तुरंत उपचार मिल सके। मुख्यमंत्री ने पशुधन और वन्यजीवों की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही। गोशालाओं और अन्य पशु आश्रयों में पानी, चारा और छाया की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि पशुओं को भी इस भीषण गर्मी से सुरक्षित रखा जा सके। अपने संदेश के अंत में मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे स्वयं और अपने परिवार का विशेष ध्यान रखें। पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करें और हल्के तथा सूती वस्त्र पहनें। उन्होंने लोगों से यह भी कहा कि अनावश्यक रूप से धूप में निकलने से बचें और किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें। साथ ही उन्होंने पशु पक्षियों के लिए पानी रखने की भी अपील की ताकि इस कठिन मौसम में संवेदनशीलता और मानवता का संदेश आगे बढ़ सके।

छिंदवाड़ा में नरवाई जलाने पर सख्ती, 60 एफआईआर दर्ज; प्रशासन सख्त

नई दिल्ली। छिंदवाड़ा जिले में नरवाई (फसल अवशेष) जलाने के मामलों को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। अब तक जिले में कुल 60 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। अलग-अलग तहसीलों में हुई कार्रवाई के तहत चौरई में 15, अमरवाड़ा और बिछुआ में 10-10, उमरेठ में 8, तमिया में 6, चांद और हर्रई में 4-4, परासिया में 2 तथा छिंदवाड़ा तहसील में 1 मामला सामने आया है। इसके अलावा कई किसानों पर जुर्माना भी लगाया गया है। कलेक्टर के निर्देश तुरंत कार्रवाई और सख्त निगरानीजिले के कलेक्टर हरेन्द्र नारायण ने इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नरवाई जलाने की सूचना मिलते ही तत्काल मौके पर पहुंचकर जांच करें और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियां पर्यावरण और मिट्टी की गुणवत्ता के लिए बेहद नुकसानदायक हैं, इसलिए किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संयुक्त टीमें करेंगी निगरानी, किसानों को दी जाएगी समझाइशकलेक्टर ने कृषि और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमों को लगातार फील्ड में निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अधिकारियों को यह भी कहा गया है कि किसानों को जागरूक किया जाए और उन्हें नरवाई जलाने के नुकसान तथा इसके वैकल्पिक उपायों की जानकारी दी जाए। प्रशासन का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना ही नहीं, बल्कि किसानों को सही दिशा में मार्गदर्शन देना भी है। आगे भी जारी रहेगी सख्तीप्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि नरवाई जलाने के मामलों में आगे भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ एफआईआर और जुर्माने की कार्रवाई लगातार की जाएगी, ताकि इस पर पूरी तरह नियंत्रण पाया जा सके।

राष्ट्रपति मुर्मु और पीएम मोदी ने किया ली जे म्युंग का शाही स्वागत!

नई दिल्ली। दिल्ली में सोमवार को राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग और उनकी पत्नी किम हे-क्युंग का औपचारिक और भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उपस्थित रहे। पूरे समारोह में राजनयिक गरिमा, सांस्कृतिक सौहार्द और पारंपरिक भारतीय आतिथ्य की झलक देखने को मिली। राष्ट्रपति भवन परिसर में आयोजित इस स्वागत कार्यक्रम ने भारत और दक्षिण कोरिया के बीच मजबूत होते संबंधों को एक नई दिशा प्रदान की। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर भारत पहुंचे हैं। उनके आगमन को दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस यात्रा के दौरान व्यापार, तकनीक, निवेश, रक्षा सहयोग और सांस्कृतिक आदान प्रदान जैसे विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को विस्तार देने पर चर्चा होने की संभावना है। राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह के दौरान भारतीय परंपरा के अनुरूप विशेष स्वागत की व्यवस्था की गई थी। बच्चों ने पारंपरिक परिधानों में भारतीय तिरंगा और दक्षिण कोरिया का राष्ट्रीय ध्वज लेकर अतिथियों का स्वागत किया, जिससे माहौल और अधिक सांस्कृतिक रूप से जीवंत हो गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति ली और उनकी पत्नी का गर्मजोशी से स्वागत किया और दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। इस राजकीय यात्रा से पहले भारत के विदेश मंत्री ने भी दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति से मुलाकात की थी, जिसमें दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। इस बातचीत में विशेष रूप से तकनीकी साझेदारी, आर्थिक सहयोग, नवाचार और वैश्विक मुद्दों पर साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने पर बल दिया गया। दोनों देशों ने भविष्य में आपसी सहयोग को और व्यापक बनाने की इच्छा व्यक्त की। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ने अपनी यात्रा के दौरान भारत को एक तेजी से उभरती हुई वैश्विक शक्ति बताया और दोनों देशों के बीच साझेदारी को भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया मिलकर शांति, विकास और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित मजबूत संबंधों को आगे बढ़ा सकते हैं। यह दौरा भारत और दक्षिण कोरिया के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। इस यात्रा से न केवल कूटनीतिक संबंधों में मजबूती आएगी बल्कि व्यापार, तकनीक और सांस्कृतिक सहयोग के नए रास्ते भी खुलने की उम्मीद है।

भारत श्रीलंका संबंधों ,को नई मजबूती तमिल समुदाय के लिए हाउसिंग प्रोजेक्ट ,और कई अहम समझौते

नई दिल्ली । भारत और श्रीलंका के बीच संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने श्रीलंका के दौरे के दौरान कई अहम कार्यक्रमों में भाग लिया। अपने इस दौरे के दौरान उन्होंने नुवारा एलिया पहुंचकर भारतीय मूल के तमिल समुदाय के लिए चलाई जा रही आवास परियोजना का जायजा लिया। यह परियोजना भारत द्वारा श्रीलंका में चलाए जा रहे व्यापक विकास सहयोग कार्यक्रम का हिस्सा है जिसका उद्देश्य तमिल समुदाय के जीवन स्तर को बेहतर बनाना है। नुवारा एलिया में उपराष्ट्रपति ने इंडियन हाउसिंग प्रोजेक्ट की विभिन्न साइट्स का निरीक्षण किया और वहां चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। यह परियोजना खास तौर पर प्लांटेशन क्षेत्रों में रहने वाले भारतीय मूल के तमिल परिवारों को बेहतर आवास सुविधा उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई है। इसके तहत हजारों परिवारों को पक्के घर उपलब्ध कराए जा रहे हैं जिससे उनके जीवन में स्थायित्व और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। इससे पहले उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कोलंबो में श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के साथ साथ सांस्कृतिक और विकासात्मक सहयोग को बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों यानी एमओयू पर भी हस्ताक्षर किए गए जो स्वास्थ्य शिक्षा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देंगे। इन समझौतों में मुल्लैतिवु में एक आधुनिक मेडिकल वार्ड कॉम्प्लेक्स का निर्माण शामिल है जिससे स्थानीय लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी। इसके अलावा पूर्वी प्रांत में महिला सशक्तीकरण के लिए प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने और विभिन्न अस्पतालों में विशेष यूनिट विकसित करने जैसे कदम भी उठाए जाएंगे। साथ ही कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग क्लस्टर और पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए आयुर्वेद गांव विकसित करने की योजना भी शामिल है। भारत और श्रीलंका के बीच हुई घोषणाओं में भारतीय मूल के तमिल समुदाय के लिए ओसीआई सुविधा को छठी पीढ़ी तक बढ़ाने का फैसला भी अहम माना जा रहा है। इससे इस समुदाय के लोगों को भारत से जुड़े अधिकार और सुविधाएं प्राप्त करने में आसानी होगी। इसके अलावा इंडियन हाउसिंग प्रोजेक्ट के तीसरे चरण के पूरा होने की घोषणा भी की गई जिसमें हजारों घर बनाए गए हैं। रेलवे और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भी सहयोग को बढ़ावा देते हुए नॉर्दर्न रेलवे लाइन पर ट्रेन सेवाओं को फिर से शुरू करने और विभिन्न प्रांतों में पुलों के निर्माण की घोषणा की गई है। वहीं छात्रों के लिए स्कॉलरशिप बढ़ाने और श्रीलंका के अंतरराष्ट्रीय बिग कैट अलायंस में शामिल होने की सहमति भी दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग को दर्शाती है। यह दौरा स्पष्ट रूप से दिखाता है कि भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ केवल कूटनीतिक संबंध ही नहीं बल्कि विकास और मानवीय सहयोग को भी प्राथमिकता दे रहा है। आने वाले समय में इन परियोजनाओं का लाभ सीधे तौर पर श्रीलंका के तमिल समुदाय और अन्य स्थानीय नागरिकों को मिलेगा जिससे दोनों देशों के संबंध और अधिक मजबूत होंगे।

बालाघाट में सर्पदंश से बुजुर्ग की मौत, खुले में शौच के दौरान हुआ हादसा

नई दिल्ली। बालाघाट जिले के चंद्रपुरी गांव में रविवार शाम एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां सर्पदंश से 71 वर्षीय बुजुर्ग की मौत हो गई। मृतक रमेश गोस्वामी खेत की ओर शौच के लिए गए थे, तभी एक जहरीले सांप ने उन्हें काट लिया। घर लौटकर उन्होंने परिजनों को घटना की जानकारी दी, जिसके बाद उन्हें तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान देर रात उन्होंने दम तोड़ दिया। खेत में शौच के दौरान डसा सांप, जहर फैलने से मौतजानकारी के मुताबिक, रमेश गोस्वामी खेती-मजदूरी कर अपना जीवनयापन करते थे। रविवार शाम खुले में शौच के दौरान सांप ने उनके पैर में डस लिया। परिजन उन्हें आनन-फानन में अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने तत्काल उपचार शुरू किया, लेकिन जहर तेजी से फैल चुका था। रात करीब 12 बजे उनकी मौत हो गई, जिससे परिवार में शोक की लहर दौड़ गई। पुलिस ने किया पोस्टमार्टम, जांच जारीसोमवार सुबह अस्पताल चौकी पुलिस ने डॉक्टर की सूचना पर शव को कब्जे में लेकर पंचनामा तैयार किया और पोस्टमार्टम कराया। इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस के अनुसार, प्राथमिक जांच में मामला सर्पदंश का ही प्रतीत हो रहा है। मर्ग डायरी संबंधित थाने भेजकर आगे की जांच की जा रही है। खुले में शौच के दावों पर उठे सवालइस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में शौच मुक्त (ODF) दावों की वास्तविकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव में शौचालय की सुविधा या उसका उपयोग सही तरीके से नहीं हो पा रहा है, जिसके चलते लोगों को खुले में जाना पड़ता है। यही लापरवाही इस दुखद घटना का कारण बनी। ग्रामीणों ने की सुविधाएं बढ़ाने की मांगघटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांवों में शौचालय व्यवस्था को मजबूत किया जाए और लोगों को जागरूक किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।

संस्कृत को जन-जन की भाषा बनाने के लिए दिल्ली में एकजुट हुए दिग्गज, जानिए क्या है भविष्य का मेगा प्लान!

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रसार के उद्देश्य से संस्कृत भारती के केंद्रीय कार्यालय का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर प्रमुख सामाजिक और सांस्कृतिक हस्तियों की उपस्थिति रही, जहां संस्कृत भाषा के ऐतिहासिक महत्व और उसकी आधुनिक प्रासंगिकता पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि संस्कृत केवल एक प्राचीन भाषा नहीं बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा की जीवंत धारा है, जो आज भी समाज को दिशा देने की क्षमता रखती है। उद्घाटन समारोह में संस्कृत के सांस्कृतिक और दार्शनिक महत्व को रेखांकित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि संस्कृत में वेद, उपनिषद और अनेक शास्त्रीय ग्रंथों का विशाल भंडार संरक्षित है, जो मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं को गहराई से समझने में सहायता करता है। इस अवसर पर यह विचार भी सामने आया कि यदि संस्कृत को शिक्षा, प्रशासन और दैनिक जीवन में अधिक स्थान दिया जाए तो यह न केवल सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करेगी बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने में भी सहायक होगी। कार्यक्रम में यह भी चर्चा हुई कि संस्कृत को केवल धार्मिक भाषा के रूप में सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसे ज्ञान, विज्ञान और आधुनिक शोध के साथ जोड़कर आगे बढ़ाया जाना चाहिए। कई वक्ताओं ने इसे भारतीय सभ्यता की आधारभूत भाषा बताते हुए कहा कि यह भाषा न केवल भारत की सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए है बल्कि विश्व की अनेक भाषाओं के विकास में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। शिक्षा और संस्कृति से जुड़े विशेषज्ञों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज के समय में नैतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए भी संस्कृत का अध्ययन आवश्यक है। उनका मानना था कि तकनीकी प्रगति के साथ यदि सांस्कृतिक और नैतिक शिक्षा को संतुलित रखा जाए तो समाज अधिक सशक्त बन सकता है। इसी संदर्भ में संस्कृत भाषा को शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने पर बल दिया गया। समारोह में यह भी बताया गया कि संस्कृत भारती का उद्देश्य केवल भाषा का प्रचार करना नहीं है, बल्कि इसे जन-जन की भाषा बनाना है। इसके लिए विभिन्न शैक्षिक कार्यक्रमों, प्रशिक्षण सत्रों और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से लोगों को संस्कृत से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इस पहल को भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने इस बात पर सहमति जताई कि संस्कृत को आधुनिक समाज में पुनः स्थापित करने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। भाषा को केवल अध्ययन तक सीमित रखने के बजाय इसे व्यवहारिक जीवन में शामिल करने पर बल दिया गया, जिससे यह आने वाली पीढ़ियों के लिए अधिक उपयोगी और जीवंत बन सके।

समुद्र में सियासी संग्राम ,अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान का कड़ा रुख, बोला मुंहतोड़ जवाब देंगे

नई दिल्ली । मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव गहराता नजर आ रहा है जहां अमेरिका और ईरान के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। ओमान की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना द्वारा एक ईरानी जहाज को जब्त किए जाने के बाद हालात तेजी से बिगड़ते दिख रहे हैं। इस कार्रवाई के बाद ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे सीधी उकसावे वाली कार्रवाई बताया है और जवाब देने की चेतावनी दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटना की जानकारी देते हुए बताया कि ईरान के झंडे वाला एक बड़ा कार्गो जहाज अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी को पार करने की कोशिश कर रहा था। उनके अनुसार लगभग 900 फीट लंबे इस जहाज को रोकने के लिए पहले चेतावनी दी गई लेकिन जब जहाज के क्रू ने निर्देशों का पालन नहीं किया तो अमेरिकी नौसेना को सख्त कार्रवाई करनी पड़ी। बताया जा रहा है कि अमेरिकी गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर USS Spruance ने जहाज को रोकने के लिए उसके इंजन रूम को निशाना बनाया जिससे वह आगे बढ़ने में असमर्थ हो गया। इसके बाद अमेरिकी मरीन ने जहाज को अपने कब्जे में ले लिया। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि इस जहाज पर पहले से वित्तीय प्रतिबंध लगे हुए थे और यह गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल रहा है। वहीं दूसरी ओर ईरान ने इस कार्रवाई को पूरी तरह गलत बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है। ईरानी सेना ने इसे समुद्री रास्ते में की गई डकैती करार दिया है और आरोप लगाया है कि अमेरिका ने न केवल जहाज को रोका बल्कि उसके नेविगेशन सिस्टम को भी नुकसान पहुंचाया और उस पर सैन्य कब्जा कर लिया। ईरान के सरकारी माध्यमों के जरिए जारी बयान में स्पष्ट कहा गया है कि इस कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा और जल्द ही जवाबी कदम उठाए जाएंगे। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावनाओं को लेकर भी चर्चा चल रही थी। खबरों के अनुसार अमेरिका की ओर से एक प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान के इस्लामाबाद जाने वाला है जहां संभावित वार्ता हो सकती है। इस प्रतिनिधिमंडल में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस स्पेशल दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि ईरान की ओर से अभी तक आधिकारिक रूप से इस बैठक की पुष्टि नहीं की गई है और वहां के मीडिया में भी इस पर संदेह जताया जा रहा है। ऐसे में यह घटना दोनों देशों के बीच संभावित कूटनीतिक प्रयासों पर भी असर डाल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ओमान की खाड़ी जैसी संवेदनशील जगह पर इस तरह की सैन्य कार्रवाई वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा सकती है क्योंकि यह क्षेत्र पहले से ही सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति पर भी पड़ सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि ईरान अपनी चेतावनी को किस हद तक अमल में लाता है और क्या दोनों देश बातचीत के जरिए इस तनाव को कम करने की दिशा में आगे बढ़ते हैं या यह टकराव और गंभीर रूप ले लेता है।

चंद्रबाबू नायडू के जन्मदिन पर दिल्ली से आया 'स्पेशल विश', पीएम मोदी ने आंध्र के विकास मॉडल को सराहा; राजनीतिक गलियारों में शुरू हुई बड़ी चर्चा!

नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के जन्मदिन के अवसर पर देश के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व से लेकर विभिन्न राज्यों के प्रमुखों तक ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। इस अवसर ने एक बार फिर उनके लंबे राजनीतिक अनुभव, प्रशासनिक दक्षता और विकास केंद्रित नीतियों को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। जन्मदिन के इस मौके पर भेजे गए संदेशों में उनके स्वस्थ और दीर्घ जीवन की कामना के साथ उनके कार्यकाल में हुए विकास कार्यों की सराहना प्रमुख रूप से देखने को मिली। राजनीतिक हलकों में इसे उनके प्रभाव और स्वीकार्यता का संकेत माना जा रहा है। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में नायडू के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में आंध्र प्रदेश ने कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य विकास की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है और इसमें मुख्यमंत्री की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। इस संदेश को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय और विकास की साझी सोच को दर्शाता है। इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ने भी मुख्यमंत्री नायडू को बधाई दी और उनके नेतृत्व को दूरदर्शी बताया। उन्होंने राज्य में चल रही प्रमुख परियोजनाओं, विशेषकर राजधानी निर्माण और बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़े प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में निवेश बढ़ाने और रोजगार सृजन की दिशा में सरकार सक्रिय रूप से काम कर रही है। उनके अनुसार राज्य की नीतियां युवाओं के लिए नए अवसर तैयार कर रही हैं और प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से शासन को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। इसके अलावा विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय नेतृत्व से जुड़े वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भी नायडू को शुभकामनाएं दीं। इन संदेशों में उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु जीवन की कामना के साथ उनके प्रशासनिक अनुभव की प्रशंसा की गई। कई नेताओं ने उन्हें एक अनुभवी और दूरदर्शी नेता बताते हुए कहा कि उनके निर्णयों ने आंध्र प्रदेश के विकास पथ को नई दिशा दी है। चंद्रबाबू नायडू को भारतीय राजनीति में एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है जिन्होंने तकनीकी विकास और आधुनिक प्रशासनिक ढांचे को प्राथमिकता दी। उनके नेतृत्व में राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई और शहरी विकास को नई गति मिली। उन्होंने निवेश आकर्षित करने के लिए नीतिगत सुधारों पर जोर दिया और बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण को प्राथमिकता दी। उनकी कार्यशैली को अक्सर एक कॉर्पोरेट दृष्टिकोण से जोड़कर देखा जाता है जिसमें दक्षता और परिणामों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। उनका राजनीतिक जीवन भी लंबे अनुभव और कई महत्वपूर्ण चरणों से गुजरते हुए आगे बढ़ा है। शुरुआती दौर में सक्रिय राजनीति में प्रवेश करने के बाद उन्होंने संगठनात्मक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और बाद में राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में नेतृत्व संभाला। समय के साथ उन्होंने न केवल पार्टी को मजबूत किया बल्कि राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में भी कई सुधार लागू किए। उनके कार्यकाल को अक्सर विकास, तकनीकी उन्नति और निवेश आधारित नीतियों के लिए जाना जाता है। वर्तमान जन्मदिन पर मिले व्यापक शुभकामनाओं ने उनके राजनीतिक कद और राष्ट्रीय स्तर पर उनकी स्वीकार्यता को फिर से उजागर किया है। विभिन्न नेताओं के संदेशों में उनके योगदान और नेतृत्व शैली की सराहना के साथ राज्य के भविष्य को लेकर सकारात्मक अपेक्षाएं भी व्यक्त की गई हैं।